The tale of a dog ……. part 1

The tale of a dog

उसका नाम daisy था ।
जन्म उसका होशियारपुर पंजाब के एक मशहूर ब्रीडर के kennel में हुआ था ।
जालंधर के एक निःसंतान खानदानी रईस उसे खरीद लाये । साथ में उसका एक जोड़ीदार Sparky भी था । ये आज से कोई 13 साल पहले की बात है ।
ऐसा सुना है कि आज से 13 साल पहले यानी कि 2003 में ये dobberman जोड़ा शायद 60 या 70 हज़ार में खरीदा गया था ।
बाजार में दो किस्म के कुत्ते बिकते हैं । एक होते हैं pet क्लास ……. pet class मने सामान्य घर में पालने के लिए किसी भी नस्ल का pure bred …….. ऐसे pups नस्ल की डिमांड के अनुसार 2000 से ले के 8-10,000 तक के मिल जाते हैं ।
दूसरा प्रकार होता है Show क्लास ……. अर्थात वो pups जो बहुत मशहूर award winning dogs की pedegree केE होते हैं ……. वो जिनके parents ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय Dog Shows में award जीते हैं । ऐसे माँ बाप का जब कोई litter आता है तो ये ज़रूरी नहीं कि उसमें हर पिल्ला Show class ही निकले । कुछ एकदम सामान्य भी निकल सकते हैं । और कुछ बेहद शानदार show class निकलते हैं ।
ऐसे Show Class pups को पहचानना भी कोई आसान काम नहीं । उसके लिए भी experts होते हैं । बड़े अनुभवी लोग …….. तो ऐसे ही एक breeder हैं होशियारपुर में ……. उनसे कहा गया कि एक शानदार जोड़ा हमारे लिए book करो । booking amount जमा हुआ । उसके करीब 3 माह बाद सूचना आयी …….. आपके pups तैयार हैं ……. ले जाइए ।
और इस तरह Daisy और Sparky होशियारपुर से जालंधर आ गए ……. राजन भाई और पन्ना दीदी के घर । पन्ना दीदी निःसंतान थीं । उनकी गोद में मानो दो बच्चे आ गए । और इस तरह Daisy और Sparky उनके घर में उनकी गोद में पलने लगे ।
राजन भाई ने पहले दिन से ही तय कर लिया था कि daisy को मातृत्व सुख नहीं देना है । इसलिए बहुत छुटपन में ही उसकी surgery करा दी गयी ।
धीरे धीरे दोनों पन्ना दीदी की गोद में बढे पले । पन्ना दीदी उन्हें अपने हाथ से गर्मा गर्म रोटियां बना के खिलाया करती दूध से । दिन रात का साथ । उन दोनों से उनका सम्बन्ध वही माँ बच्चों वाला ।
पन्ना दी तो यूँ भी ममता और वात्सल्य की मूरत हैं ।
दोनों pups जवान हुए , तो इतने खूबसूरत , कि देखने वाले देखते रह जाते । पंजाब में यूँ भी लोग शौक़ीन हैं । अच्छी महंगी pedegree वाले dogs पालने के शौक़ीन । लोग Daisy और Sparky को देखते तो देखते रह जाते ।

पर ईश्वर को कुछ और ही मंज़ूर था । शायद इन दोनों pups का ही पुण्य प्रताप था , या फिर इन दोनों के प्रति उमड़ा पन्ना दी का वात्सल्य उनकी ममता …….. एकदम अपने बच्चों की सी देखभाल लाड़ दुलार प्यार ……… और 48 – 50 साल की उम्र में उनके भीतर न जाने ऐसे कौन से hormonal changes आये कि उन्होंने इस उम्र में जबकि अधिकाँश महिलाओं को menopause हो जाता है , उन्होंने conceive कर लिया । 48 साल की आयु में उनकी कोख में संतान आयी ।
उनकी pregnancy बड़े कष्ट में बीती ……. एक एक दिन पहाड़ सा ……. ईश्वर भी न जाने कौन सी परीक्षा ले रहा था । कई बार तो ऐसा लगा कि miscarriage हो जाएगा ।
पर अंततः युग का जन्म हुआ । 50 साल की उम्र में बेटा हुआ ……. घर में दीवाली मनी ……. घर में चिराग रौशन हुआ …….. इधर Daisy और Sparky ……. दोनों लगभग 2 साल के हो चले थे …….. युग के आने से वो दोनों परेशान ……. ये कौन आ गया हमारी माँ की गोद में ……. अब ये दोनों लगे jealous फील करने ……. युग को देखें तो गुर्रायें …….. पहले जहां दिन रात पन्ना दी की गोद में घुसे रहते थे , वहाँ अब उनके कमरे में भी घुसने की मनाही ।
अब दोनों को नीचे से ऊपर पहुंचा दिया गया था ……… नवजात शिशु को infection का डर जो था ……… दोनों ऊपर से अपनी माँ को टुकुर टुकुर ताकते रहते ……. भौंकते गुर्राते । जिसमे Sparky कुछ ज़्यादा ही परेशान हो गया था । उसने बात दिल से लगा ली थी । एक दिन वो न जाने कैसे ऊपर से छुड़ा के नीचे आ गया …… बेहद violent हो गया …… ज़बरदस्ती कमरे में घुसने की कोशिश करने लगा …….. सब लोग घबरा गए ……. बच्चे की सुरक्षा को ले के चिंतित …….. ऊपर से dobberman नस्ल ……… ये सब कभी कभी अत्यधिक violent होने के लिए कुख्यात हैं ……. परिवार ने तय किया कि कुछ दिन के लिए दोनों को हटा दिया जाए । बच्चे की सुरक्षा से कोई रिस्क नहीं ।
Daisy और Sparky के लिए नए घर खोजे जाने लगे ।
Sparky तो गया दूर मोगा ……..
Daisy को मेरी साली साहिबा ले आईं । उनका राजन भाई और पन्ना दी के घर आना जाना था …… बड़े पारिवारिक घनिष्ठ संबंध थे ।
वहाँ मैंने daisy को पहली बार देखा ।
पूछा , इसे कहाँ से ले आयी ?
क्या करोगी इसका ?
जानती हो कुत्ता पालना कितना दुरूह दुष्कर कार्य है ? कितनी care करनी पड़ती है । कितना खर्चीला होता है ।
बहिन जी ने कंधे उचका दिए ।
Daisy को नया घर मिल गया था ।
पर इस नए घर में वो पुरानी बात न थी ।
नया घर अकेला सा था । सुनसान ……. यहां कोई जोड़ीदार भी न था । न कोई खेलने के लिए साथी न कोई बोलने बतियाने के लिए । और न कोई दुलारने पुचकारने वाला ……..

क्रमशः …….. Continued……..
लंबी कहानी है ……. सत्य कथा …… कई भागों में ख़त्म होगी
पढ़ते रहिये

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