लड़ाई बसपा भाजपा में हैं ।

मुझे याद है ।
2012 के चुनावी दिन थे ।
कांग्रेस का tempo high था ।
2009 में UPA2 ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी और कांग्रेस तो UP में लोकसभा की 22 सीट जीत के सातवें आसमान पे थी ।
राहुल गांधी UP की जीत में दूल्हा बने घूम रहे थे ।
उधर भाजपा का all time Low चल रहा था ।
UP में बमुश्किल 10 सीट …….
रालोद जैसी पार्टियां जिनकी गिनती न तीन में है न तेरह में , वो भी 5 सीट जीत के भाजपा से बराबरी का दम भर रही थीं …….
ऐसे माहौल में 2012 का विधान सभा चुनाव आया UP में ।
राहुल बाबा के नेतृत्व में कांग्रेस बम बम थी ।
माहौल ऐसे बनाया जा रहा था मानो अबकी बार कांग्रेस सरकार ।
यूँ लगता था मानो कांग्रेस का वनवास इस बार समाप्त हो ही जाएगा ।
कांग्रेसी नेताओं में इस बात को ले के खींच तान शुरू हो गयी कि कौन बनेगा मुख्य मंत्री ???????

पर जब नतीजा आया तो फुसस्सससस्स ……..
कुल जमा 28सीट पे सिमट के रह गयी कांग्रेस ।
भाजपा की भी दुर्दशा हुई । कुल जमा 47 सीट आयी ।
कहने का मतलब ये की उन दिनों भाजपा की औकात रालोद और कांग्रेस जैसी थी UP में ।
2012 में बसपा को हरा के सपा चुनाव जीती । अखिलेश भैया की साइकिल आसमान में उड़ी जा रही थी । अहीरों ने पूरे UP में बमचक मचा रखा था ।
ऐसे में मोदी जी ने गुजरात में लगातार तीसरी बार चुनाव जीता और कूद पड़े राष्ट्रीय राजनीति में ……. और प्रधान मंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी ……
उस समय , जबकि UP में भाजपा अभी ताजा ताजा अपनी मिट्टी पलीद करा के बैठी थी , राजनीति के पंडितों ने सवाल उछाला …….. हम्ममम्म ……. प्रधान मंत्री बनोगे ???????
कहाँ से लियाओगे सीट ?
जानते हो …….. 272 सीट लगता है परधान मंतरी बनने को …….
कहाँ से लियाओगे हेतना सीट ?

मोदी जी ने जवाब दिया ……. अब लड़ेंगे तो सीट भी आ ही जाएगा ………
अच्छा ??????? आ जाएगा ? अबे ठेले पे बिकता है का ? जो आ जाएगा ???????
अच्छा ई बताओ …….. ऊपी में केतना सीट जीत के PM बनोगे ।
तब IBTL में एक लेख छपा ।
IBTL कुछ right wing टाइप पोर्टल था । उसने कहा कि भाजपा UP में 20 सीट जीतेगी ।
20 सीट सुन के सेक्युलर leftist मीडिया और जनता ने खूब मज़ाक बनाया ……. ये मुह और मसूर की दाल ? Huhhhhh ……. 20 सीट …… सीट मानो पेड़ पे लगती है ……. गए और तोड़ लाये ।
खैर …….. मोदी जी भाजपा के अंदर खुद को PM प्रत्याशी घोषित करने के लिए संघर्षरत थे । उधर देश में आपकी लोकप्रियता का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा था ।
2012 में UP में भाजपा की ये समस्या थी कि इनके पास UP में सिर्फ और सिर्फ बनिया / सुनार वोट बचा था । यहां गक कि मजबूरी में ठाकुर तक छोड़ गए थे ।
2013 में जब मोदी जी PM प्रत्याशी के तौर पे उभरने लगे तो भाजपा में सबसे पहले जो वर्ग लौटा वो ठाकुर थे । जिनके साथ साथ ही ब्राह्मण और भूमिहार भी आ चढ़े । अब समस्त सवर्ण और बनिया व्यापारी भाजपा के साथ था ।
ऐसे में IBTL में फिर एक लेख छापा ……… UP में भाजपा 35 सीट ।
Leftist सेक्युलर मीडिया ने फिर खारिज कर दिया ।
Mid 2013 ……. मोदी जी को भाजपा ने तमाम खींच तान उठा पटक के बाद PM प्रत्याशी घोषित कर सिया । IBTL ने लिखा …….. UP में भाजपा 45 सीट …….. लोगों ने कहा पागल हैं …….
मीडिया अब भी भाजपा को 160 सीट दे रहा था देस भर में ……. और सवाल पूछता था कि समर्थन कहाँ से जुटाओगे ……. मोदी तो अछूत है …… आडवाणी होते तो शायद जुटा भी लेते ।
UP में भाजपा की समस्या ये थी कि इसकी पहचान शहरी और सवर्ण और बनियों की पार्टी के रूप में थी । OBC और दलित वोट नदारद थे ।
ऐसे में अमित शाह जी ने UP की कमान सम्हाली और मृत पड़े संगठन को ज़िंदा करना शुरू किया । भयंकर गुट बाजी थी । बीसियों नेता थे और सब के सब PM और CM material थे । नेता भारी भरकम और औकात इतनी भी नहीं कि अपनी सीट निकाल लें । ऐसे मृतप्राय संगठन में अमित शाह और मोदी जी ने जान फूंकी ।
बड़े नेताओं को धीरे धीरे दरकिनार किया ……. नहा नेतृत्व खड़ा किया ……. माहौल बनने लगा । गरमाने लगा । पर अब IBTL की हिम्मत न हुई कि वो 45 से ऊपर जाए ।
ऐसे में हमारे जैसों ने SM पे लिखना शुरू किया ……… 55
सो मेरे एक मित्र हैं । वो हैदराबाद के एक हिंदी अखबार के उप संपादक हैं ।
बोले …… का पहलवान ? भांग खाये हो का ? 55 ??????
मने राम लहर से भी आगे ……..
मैंने उन्हें जवाब दिया ……. राम लहर क्या थी ??????
यहां सुनामी बह रही है ।
चुनाव सिर पे था । टिकट वितरण की उठापटक के बाद जब तस्वीर साफ हुई तो मैंने एक दिन लिखा ……… क्या इस बार हम गाज़ीपुर भी जीत रहे हैं क्या ???????????
क्योंकि लक्षण मिलने लगे थे । और गाज़ीपुर की सीट पूरी UP में भाजपा के लिए सबसे कठिन सीट है ……. जातीय समीकरण ही ऐसे हैं ।
चुनाव में बमुश्किल 10 दिन थे
अंतिम चरण चल रहा था ।मैंने अपने जिले की वोटिंग से कोई 4 दिन पहले लिखा कि हम गाज़ीपुर जीत रहे हैं …….. जल प्रलय होगी ………
Result आया तो सब बह गया । सुनामी सब बहा ले गयी ।
73 सीट …….. सीटें वाकई पेड़ पे लगती हैं ।
पर उस पेड़ को सीचना सहेजना पड़ता है ।

बहरहाल ……. चुनावी मंच फिर सजा है UP में ।
वही अमित शाह हैं और वही मोदी जी हैं ।
और leftist secular मीडिया की वही जड़ता है ।
आज भी राजनीति के पंडितों को भरोसा नहीं ।
या यूँ कहिये कि भरोसा करना नहीं चाहते ।
हालांकि विधान सभा का चुनाव लोक सभा से अलग होता है ……. मुद्दे अलग होते हैं ……. क्षेत्र छोटे होते हैं , स्थानीय factors होते हैं …….. हार जीत का मार्जिन बहुत कम होता है ……. बहुकोणीय मुकाबला हो तो आकलन मुश्किल हो जाता है ……… पर इसके बावजूद ……. चुनाव के basics नहीं बदलते ।
अब जबकि UP में पहले चरण की voting में सिर्फ दो दिन बचे हैं ………..
सवाल है कितनी सीटें ????????
220 में दाग नहीं है ।
जस जस चुनाव होता जाएगा , आकलन ये होगा कि 220 से कितना ऊपर ।
मने 240 ????????
260 ?????????
या 280 ???????????
या फिर 300 ???????

पर इतना तय है कि पिछले 3 दिन में सपा पिछड़ी है और बसपा ने improve किया है ।
आज भाजपा की लड़ाई बसपा से है ।
कांग्रेस से गठबंधन कर सपा पीछे छूट गयी ।
कांग्रेस इतनी भारी है कि वो सपा को ले डूबेगी ।
लड़ाई बसपा भाजपा में हैं ।
परिदृश्य रोज़ बदल रहा है ।
इंतज़ार कीजिये ।

मुलायम के ये लोग ……….

कल चचा सिपाल जादो ने भतीजे अकललेस जादो के पिछवाड़े में खूंटा ठोक दिया है ।

कल जसवंतनगर से साइकिल चुनाव चिन्ह से पर्चा भरने के बाद उन्होंने सरेआम ललकारा कि बेटा अकललेस ये चुनाव तुम जीत लो ( जीत के दिखा दो ) उसके बाद जब 11 मार्च को नतीजे आ जाएंगे तो हम बनाएंगे नयी पार्टी । गौरतलब है कि 11 मार्च को या तो समाजवादी पाल्टी का विजय जलूस निकलेगा या फिर जनाजा ।
विजय जलूस के समय पार्टियां नहीं टूटा करती ।
जाहिर सी बात है कि चचा सिपाल जादो को बोल रहे हैं की ऐ भतीजे …….पहले 11 मार्च को तुमरी G मारेंगे और फिर तुम्हारी उस फटी हुई G में हाथ घुसेड़ के अपने हिस्से की समाजवादी पाल्टी निकाल लेंगे ।

मुलायम और सिपाल ने खुल के बगावत कर दी है ।
कल इटावा में सिविल लाइन्स में , समाजवादी पाल्टी के दफ्तर के ठीक बगल में एक नया दफ्तर खुला ……. उसपे बोर्ड लगा था ” मुलायम के लोग ” । इस दफ्तर का संचालन इटावा के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सुनील यादव कर रहे हैं । सुनील यादव को सिपाल जादो ने जिला अध्यक्ष बनाया था जिसे अकललेस जादो ने हटा दिया ।
इटावा सदर से तीन बार के विधायक रघुराज शाक्य का टिकट भी कलेस जादो ने काट दिया । वो भी अपने समर्थकों के साथ इस ” मुलायम के लोग ” दफ्तर में बैठ रहे हैं ।

आइये अब मैनपुरी चलते हैं ।
मैनपुरी के सपा जिलाध्यक्ष माणिक चंद शाक्य ने भी अपने ( सिपाल जादो के ) 2000 समर्थकों के साथ सपा से इस्तीफा दे के मुलायम के लोग join कर ली है । इन 2000 समर्थकों में 3 जिला पंचायत सदस्य , 40 ग्राम प्रधान , 60 पूर्व प्रधान और कई block प्रमुख हैं ।

इसी तरह कल मैनपुरी में अमित जानी ने शिवपाल यादव यूथ ब्रिगेड का गठन कर दिया ।
अनिल वर्मा ने शिवपाल युवजन सभा का गठन किया ।
Ground report ये है कि इटावा , मैनपुरी , कन्नौज , एटा इत्यादि जिलों में मुलायम शिवपाल को व्यापक जनसमर्थन है । 2012 में इन जिलों में सपा ने 69 में से 55 सीटें जीत ली थीं । खबर है कि इन 67 सीटों पे मुलायम सिपाल ब्रिगेड ने समाजवादी पार्टी – कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराने के लिए कमर कस ली है और भितरघात नहीं बल्कि खुली बगावत कर रहे हैं ।
बहुत संभव है कि ये ” मुलायम के लोग ” के दफ्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में खुल जाएंगे । बताया जा रहा है कि मुलायम के ये लोग कांग्रेस को दी गयी 105 सीटों से निर्दल चुनाव लड़ेंगे और शेष 300 सीटों पे समाजवादी पाल्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ खुली बगावत कर उनके खिला प्रचार करेंगे । इसके अलावा बहुत से ” मुलायम के लोग ” उन 300 सीटों से बागी उम्मीदवार के तौर पे चुनाव भी लड़ेंगे ।

” मुलायम के लोगों ” ने धार लिया है कि इस चुनाव में अखिलेश को नेस्तनाबूद कर देना है । इस दिशा में पहला हमला सपा – Cong गठबंधन पे हमला है । इस खुली बगावत का सीधा सीधा फायदा भाजपा को होने जा रहा है ।
इसके अलावा मुस्लिम भोटर की बेचैनी भी बढ़ गयी है । सपा – cong गठबंधन पे लटकी तलवार और मुलायम सिपाल की खुली बगावत के बाद मुसलमान एक बार फिर ये सोचने को मजबूर हुआ है कि कहाँ जाए ?

बसपा में ? मुस्लिम भोट का बिखराव भी तय है ।
कांग्रेस तो कहीं की न रही । समझौते में 300 सीट अखिलेश ले गए और बाकी 103 मुलायम के ये लोग ……….

UP चुनाव

इस्माइल मेरठी (Ismail Meeruti) साहब का एक शेर है ……..

अर्ज किया है ……..

उल्फत का जब मजा है कि वो भी हों बेकरार,
दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई।

और इसी शेर की तर्ज पे ……..

गठबंधन का तब मज़ा है कि दोनों ही हों बेजार ……..
औ दोनों तरफ हो गाँड …………… बराबर फटी हुई

UP में सपा और congress का गठबंधन होगा ज़रूर ।
क्योंकि दोनों मने अखिलेश औ राहुल ……. मने सपा औ कांग्रेस …….
भाजपा औ मोदी के मारे , दोनों की है गाँड बराबर फटी हुई ।

राहुल बाबा जानते हैं कि अगर गठबंधन न हुआ तो कांग्रेस की 5 सीट नहीं आएगी इस बार UP में ।
और कितना ही विकास का तंबू तान लें , सपा के लिए बिना गठबंधन 50 का आंकड़ा छूना मुश्किल है ।

Congress की जमीनी स्थिति ये है की कांग्रेसी वोटर जैसी कोई चीज़ UP में अब नहीं बची है । कुछ एक सीटों पे कुछ ऐसे लोग है जिनका अपना व्यक्तिगत भोट है …….. वो एक तरह से निर्दल लोग हैं …….. congress छोड़ अगर निर्दल भी लड़ जाएँ तो जीत जाएंगे । ऐसे 5 – 7 लोग कांग्रेस के टिकट पे लड़ के जीत जाते है इसलिए congress का खाता खुल जाता है UP में । ऐसी सीटों पे कुछ भोट उस प्रत्याशी की जात का और कुछ मुस्लिम भोट मिल के वो सीट जीती जाती है ।

मोदी जी ने पिछले 5 साल में सपा से उसका गैर यादव OBC वोट छीन लिया है ।
इसी तरह मायावती के दलित भोट बैंक में से मोदी जी ने गैर चमार – जाटव भोट में बड़ी सेंध लगायी है ।

सपा congress गठबंधन का सबसे बड़ा नुकसान BSP को होगा जहां उसका मुस्लिम भोट खिसक के सपा- cong के साथ आ जाएगा ।
मुस्लिम भोट बेशक एकमुश्त सपा को पड़ेगा जिसकी प्रतिक्रिया में हिन्दू भोट का counter polarization होगा ।

हालफिलहाल स्थिति ये है कि सपा – congress गठबंधन पूरी जोड़ जुगत के बाद भी 26 – 27 % तक पहुँच पायेगा जबकि इस चुनाव में भाजपा शुरुआत ही 34 % भोट के साथ करेगी जो campaign के साथ बढ़ेगा ।

यदि भाजपा ने 30% भोट लिया तो 220 सीट
32 % लिया तो 240 – 250
34% पे 260 से 280
36 % पे 300 +

आज की तारीख में सबसे खराब स्थिति BSP की है ।
यही हालत रही तो हाथी फिर अंडा दे सकता है ।
सिर्फ चमार – जाटव के बल पे तो 10 सीट आनी मुश्किल है ।

फिलहाल इंतज़ार कीजिये ……. टिकट वितरण और नाम वापसी होने दीजिए ।
तभी picture clear होगी ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

पूर्वांचल में बनारस का पडोसी जिला है चंदौली ।
इसे पूरब का Rice bowl कहते हैं । इस से सटे 4 – 5 जिले जैसे कि वाराणसी , गाज़ीपुर , जौनपुर , आज़मगढ़ , मिर्ज़ापुर , भदोही और उधर बिहार के कुछ जिले , इनमे दुनिया का सबसे बेहतरीन धान उगाया जाता है ।
आम तौर पे शहरी लोग चावल की सिर्फ एक variety जानते हैं । बासमती ……. जो अपने स्वाद और लंबे दाने के लिए पसंद किया जाता है और 70 से 150 रु किलो तक में बिकता है । इसके महंगे बिकने का एक कारण तो ये होता है कि इसकी उपज अन्य vatieties से कम होती है ।
पर पूर्वांचल के इन जिलों में कुछ स्थानीय varieties होती हैं , जिनकी उपज भी भरपूर है , मने bumper crop होती है , और स्वाद गुण में बासमती के बाप हैं । स्थानीय बाजार में इन किस्मों की कीमत 20 से 25 रु किलो तक होती है । इनमे ख़ास कर सोनम , मंसूरी ( इसकी 3 varieties हैं , नाटी , मंझली और साम्भा मंसूरी ) , धनरेखा इत्यादि । इसके अलावा एक किस्म है जीरा 32 …….. इसका दाना बहुत छोटा और महीन होता है , एकदम जीरे जैसा । ये है असल में बासमती का बाप । स्थानीय बाजार में 45 रु किलो बिकता है । ऐसी 20 अन्य varieties और हैं जो यहाँ होती हैं ……… और bumper होती हैं ।
ऐसा ही एक rice bowl राजस्थान में भी है । हाड़ौती संभाग में कोटा , बूंदी जिले में । वहाँ भी दुनिया का बेहतरीन बासमती होता है । बताया जाता है कि कोटा बूंदी जिले में 100 से ज़्यादा अत्याधुनिक विशाल Rice Mills और shellers हैं जो इस धान को process कर market में उतरते हैं । आज कोटा बूंदी का बासमती पूरी दुनिया में अपनी धाक मचा रहा है । समूचे Europe , अमेरिका और Middle east में इसकी जबरदस्त मांग है ।

पर स्वाद और उपज के मामले में चंदौली belt का धान कोटा बूंदी से 21 नहीं बल्कि 25 है ।
मने चंदौली की मिट्टी पानी और जलवायु में उपजा धान कोटा बूंदी से लाख दर्जे बेहतर है ………

अब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से एक सवाल ……… अखिलेश जी , चंदौली और इसके आस पास के जिलों में कितनी rice mills हैं ?
आपके 5 साल के शासन काल में चंदौली के इर्द गिर्द कितनी नयी rice mills लगी ?
आपकी सरकार ने चंदौली belt की इन बेहतरीन और इतनी सस्ती मने 20 – 22 रु किलो बिकने वाली varieties को देश भर में promote कर लोकप्रिय बनाने के लिए क्या काम किया ?

वाराणसी मंडल और इसके लगते जिले , हम यहां दुनिया का सबसे स्वादिष्ट दूध पैदा करते हैं …….. जी हां …….. बनारस की मिठाई का स्वाद यहां के दूध और मावे की मिठास और स्वाद से है …….. गाँव के dairy farmer की समस्या है कि उसका सुबह का दूध तो बिक जाता है पर शाम का नहीं बिकता …….. ऊपर से दूध उत्पादन तो अहीरों का मुख्य पेशा है ?
अखिलेश जी , आप बताएँगे कि आपकी सरकार ने पिछले 5 साल में कितने milk processing प्लांट लगाए पूर्वांचल में ? कितने milk collection centers खोले ? कितने chilling plants लगाए ?

अखिलेश जी , UP के यादव तो आपके बंधुआ भोटर हैं न ? Dairy farming बढ़ेगी तो सीधे सीधे उन्हें फायदा होगा ……. आपने पिछले 5 साल में dairy उद्योग के लिए क्या किया ?
बीकानेर जैसा सूखा पानी को तरसता जिला पूरे देश में दूध supply कर सकता है तो पूर्वांचल तो स्वर्ग है हुज़ूर dairy farming के लिए ……. कितनी ग्रोथ हुई पिछले 5 साल में milk production में ?
कितने नए Dairy farms खुले ? कितने farmers ने अपने farms upgrade किये ? आपने कितना ऋण उपलब्ध कराया डेरी फार्मिंग के लिए ?
पूर्वांचल में कितनी sugar mills नयी लगीं ?
जो बंद पड़ी थीं उनमे से कितनी चालू हुई ?
कितने नए cold स्टोर बनाये आपने ?
कितनी नहरें खुदी ?
कौन सी नयी सिचाई परियोजना ले के आये आप ?
कितने नए thermal power projects आपने लगाए प्रदेश में , या मंजूरी दी ……..
नितिन गडकरी के NH छोड़ पूरे पूर्वांचल की कोई एक सड़क बता दीजिए , जो आपने बनवाना या चौड़ा करना तो दूर , जिसका आपने patch work ही करा दिया हो ?
कोई एक सड़क ? कोई एक state हाईवे ?

कोई एक नया उद्योग जो लगा हो पूर्वांचल के इन 40 जिलों में ???????
मिर्ज़ापुर भदोही में दुनिया का सबसे बेहतरीन कालीन बनता है घर घर ……… जिसका सत्यानाश कर मारा कैलाश सत्यार्थी ने ……… उसके revival के लिए क्या किया आपने ?
वाराणसी और मऊ के साडी बुनकर ( जिनमे अधिकाँश मुसलमान है ) उनके लिए क्या किया ?

कोई एक स्कूल कॉलेज बताइये जो आपकी सरकार ने बनवाया हो पिछले 5 साल में ?

किसका विकास किये हो भैया ?
कहाँ किये हो ?

गायत्री प्रजापति रोज़ाना 4 करोड़ रु देता था तुमरी मने प्रतीक गुप्ता जादो की मम्मी को …….. सिर्फ साधना गुप्ता जादो और उनके लौंडे का विकास हुआ है पिछले 5 साल में ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

समाजवादी पाल्टी अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रही है ।
करो या मरो …….. चुनाव सिर पे है ।
खबर है कि 1500 करोड़ से ऊपर की चुनाव सामग्री छप के तैयार है । इसमें पार्टी के झंडे banor पोस्टर Tshirt बनियान बिल्ले स्टिकर्स flex boards और hoardings और न जाने क्या क्या है ।
UP जैसे विशाल प्रदेश में , जहां 20 करोड़ की जनसंख्या और 11 करोड़ से ज़्यादा भोटर है ……. जहां 400 से ज़्यादा सीट पे प्रत्याशी उतारे जाने हैं ……. वहाँ पार्टी के दो फाड़ होने का ख़तरा है ।
ऊपर से नेताओं को यही नहीं पता कि उन्हें किस चुनाव चिन्ह पे चुनाव लड़ना है । समस्या ये है की भारी मात्रा में जो चुनाव प्रचार सामग्री छप के तैयार है वो सब साइकिल चुनाव चिन्ह से छपी है । अब इस साइकिल पे ही ख़तरा मंडरा रहा है ।
कल को अगर चुनाव आयोग ने ये साइकिल ही फ्रीज़ कर दी तो दोनों गुटों अर्थात अखिलेश और मुलायम सिपाल दोनों को नए सिंबल पे चुनाव लड़ना पडेगा । नयी प्रचार सामग्री कोई रातों रात तो छप नहीं जायेगी ।
जैसे पति पत्नी बच्चों की वजह से तलाक़ नहीं ले पाते और मजबूरन साथ रहते हैं उसी तरह साइकिल के मोह में मुलायम अकलेस अलग नहीं हो पा रहे । इसके अलावा इक्लेस जादो ने समाजवादी पाल्टी के दोनों बैंक खाते भी seize करा दिए …… मने कंगाली में आटा गीला ।

पकिस्तान भारत के बीच शान्ति रहे इसमें एक बड़ी समस्या ये आती है कि पाकिस्तान में पाक सरकार के अलावा कई Non State actors हैं । Army है , ISI है , उसके बाद विभिन्न जिहादी गुट हैं । आखिर भारत सरकार पाकिस्तान में शान्ति वार्ता करे तो किस से ?
यही हाल समाजवादी पाल्टी का है । अखिलेश मुलायम का बस चले तो दो मिनट में झगड़ा सुलटा लें ।
पर उधर रामगोपाल और इधर सिपाल जादो और अमर सींग …… ये तीन शान्ति और समझौता वार्ता में रोड़ा बने बैठे हैं । इक्लेस जादो और मुलायम जादो को अगर शान्ति स्थापना करनी है तो इन दोनों को रामगोपाल , सिपाल और अमर सींग इन तीनो को GPL मार के पार्टी से 60 साल के लिए निष्कासित कर देना चाहिए । इसके अलावा पार्टी में जितने भाई भतीजे भांजे बहू बेटियां बहन भेनजी भांजी भतीजी बुआ मौसी नानी समधी साले सालियाँ साढ़ू सरहज हैं उन सबकी G पे भी लात मार के party से बाहर कर देना चाहिए । इसके अलावा परतीक गुप्ता जादो और उसकी बीबी अपरना गुप्ता जादो को भी घर और पाल्टी दोनों से G पे लात मार के भगा देना चाहिए । भैंचो पोलिटिकल पाल्टी है कि तबेला ???????

पर काश …… GPL मार के भगा देना इतना ही आसान रहा होता ………. अमर सिंघवा एक नंबर का दलाल नहीं दल्ला है । न जाने किस किस के संग किस किस की रिकॉडिंग रखा होगा …….. और न जाने किस किस मुद्रा में रखा होगा ……. कम्बकब्त सोसल मीडिया का ज़माना है । एक घंटे में 45 लाख शेयर और views हो जाते हैं वीडियो clip के ।
अमर सिंह से पार पाना मुलायम इक्लेस जादो के बस का नहीं ।

समाजवादी पाल्टी का किस्सा खत्म समझ लो ।
बिना सिंबल , बिना प्रचार सामग्री , बिना funds , बिना नेता , हर सीट पे बागी उम्मीदवार , free for all gang bang ……. कब कौन किसकी कहाँ कैसे मार ले क्या पता ?ऊपर से भाजपा और मोदी जैसा सशक्त प्रतिद्वंद्वी ।

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

वंस अपान ए टाइम , आंध्र परदेस के राजभवन में एक बड़े भयंकर किसिम के सीनियर कांग्रेसी नेता हुआ करते थे ……. लाट साब गवर्नर श्री नारायण दत्त तिवारी ।
उनकी रग रग में कांग्रेसी खून दौड़ता था । इस से पहले ऊ जिनगी भर ऊपी की राजनीती किये , कांग्रेस के जमाने में कई बार ऊपी के मुख्यमंत्री रहे । फिर जब ऊपी दो भाग में बंट गया और पहाड़ी इलाके काट के उत्तराखंड बन गया तो आप UK के मुख्यमंत्री भये । फिर जब एकदम्मे बुढ़ा गए और किसी काम के न रहे तो सोनिया गांधी ने इनको retirement पिलान के तहत आंध्र प्रदेश का गवर्नर बना के भेज दिया ।
इधर प्रतिभा पाटिल अपनी वार्षिक छुट्टियां मनाने आंध्र प्रदेश जाने वाली थीं ।
Protocol के तहत राष्ट्रपति की अगवानी लाट साब गवर्नर बहादुर किया करते हैं ।
तभी एक स्थानीय news चैनल ने एक वीडियो दिखाना शुरू किया जिसमें 86 साल के बुज़ुर्ग लाट साब गवर्नर बहादुर राज भवन में अपने शयन कक्ष में 35 साल की एक सुन्दर सुशील राजनीतिक कार्यों में दक्ष महिला को सहला रहे हैं ……… अब जो भैया मची जो बमचक ……. राजभवन के सामने महिला संगठन करें हाय हाय मुर्दा बाद …….. नतीजा जे हुआ कि लाट साब गवर्नर बहादुर को रातों रात इस्तीफा दे के बोरिया बिस्तर बाँध के देहरादून जाना पड़ा ……..
अब चूँकि इस type के MMS और भिडियो clips की मार्किट में भोत demand रहती है । इस लिए उस क्लिप की खोजायी शुरू भई ……. इसके अलावा बड़े बड़े धुरंधर वैज्ञानिकों को जांच और शोध का एक एक विषय ये मिल गया कि ई ससुरे कांग्रेसी साले सब ऐसी कौन सी भस्म बूटी खाते हैं कि 86 साल में भी टाइट रहते हैं और ई सुसरे संघी सब भरी जवानी में ही संन्यास और वैराग्य को प्राप्त हुए जाते है ………

खैर जांच कमीसन में ई निष्कर्ष निकाला कि कांग्रेसी की डंडी काम न भी करे तो भी सुहराने अंगुरियाने से बाज नहीं आता ……..

तो भैया हुआ यूँ कि पिछले हफ्ते जब मोलायम जादो दिल्ली पहुंचे तो मेरे जैसे किसी लुच्चे लफंगे ने टोक दिया …… चचा भोत हुआ ……. अब रहन दियो …… आपकी उमर भयी …… अब लड़कन बच्चन कू खेलन खान दियो …….

चचा बोले , अभी मन नहीं भरो है …… अभी कुछ दिन समाजवादी पाल्टी को सुहरा अंगुरिया लेन दियो ।
बेचारी समाजवादी पाल्टी …….. 25 बरस की हो गयी ।
एक तरफ मोलायम सहलाने अंगुरियाने से बाज नहीं आ रहे दूसरी तरफ सिपाल रामगोपाल सिकंदरे आज़म कैप्सूल खाय के ताने खड़े इधर अखिलेश कह रहे कि हमारी तो ब्याहता है समाजवादी पाल्टी …… सिर्फ हमारी ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ ……

ऐ अकलेस जादो , तुम ये जान लो कि वंस अपान ए टाइम इस परदेस में , जब कि ये पुत्तर परदेस नहीं बल्कि उत्तर परदेस होता था , चरण सिंह नाम के एक नेता हुआ करते थे ।
ई जो तुम्हारे बाप हैं न , मुलायम सिंग , किसी जमाने में ये उनके अँडुआ मने आंड मने testicles हुआ करते थे ……चौ चरण सिंह उत्तर प्रदेश के एक छत्र नेता हुए …… सचमुच के धरती पुत्र और किसान नेता …….. मने इतने बड़े नेता थे कि 1984 में जब कि इंदिरा गांधी की हत्या के उपरान्त उपजी सहानुभूति लहर में जब कि सब कुछ उड़ गया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी हार गए थे , तब भी अकेले चौ चरण सिंह ऐसे थे जो जीते थे । मने इतने बड़े नेता थे चौधरी साहब ……. और आज उसी चौधरी साहब का बेटा ……. उसने अपने मरहूम बाप की पार्टी और उनकी राजनैतिक विरासत का ये हाल बना दिया कि आज वो विधायक की एक सीट को तरस रहा है ।

1984 में जो राजीव गांधी 410 सीट के प्रचंड बहुमत से जीते थे उनका होनहार बिटवा आज उसी पार्टी को 44 सीट तक नीचे ले आया है और अब आगे 4 सीट पे ले जाने की तैयारी में है ।

आगे सुनो ……. एक और हुए हैं ……. भारतीय राजनीति के पितामह कहाये …… पितामह समझते हो ?
दादा । हरियाणा के चौधरी देवी लाल जी …… समूचा हरियाणा उन्हें ताऊ देवी लाल कहता था प्यार से ……… उसी ताऊ देवी लाल के बेटे और पोते आज जेल खट रहे हैं और पार्टी लौड़े के दक्खिन चली गयी ।

इसी हरियाणा के एक और बहुत बड़ी राजनैतिक हस्ती हुए चौधरी भजन लाल । एक ज़माना था कि उनकी एक आवाज़ पे पूरा हरियाणा खड़ा हो जाता था । उनके मरने के बाद उनके दोनों लौंडे भी बाप की राजनैतिक विरासत सम्हाल न पाए और आज कौड़ी के तीन हो के घूम रहे हैं । एक अदद सीट को मोहताज हैं ।

आगे सुनो …… एक हुए बलिया के बागी ……. बलिया के शेर ……. बाऊ चनसेखर सिंह …….. ये वो अज़ीम शख्सियत थे कि जिंदगी में कोई पद ही नहीं लिए …… कहते थे बनूंगा तो सिर्फ PM और एक दिन PM बन के ही दिखाया ……. आज उनके दोनों बेटे तुम्हारा पेल्हर तौलते हैं एक अदद विधायकी सांसदी के लिए ।

उधर मुम्बई में देख लो …… सारी जिंदगी अकेले बाला साहिब दहाड़ते रहे शेर की माफ़िक़ …….. उसी शेर का बेटा आज बकरी की माफ़िक़ मिमिया रहा है …….. और ये तमाम लोग तो वो हैं जिन्हें अपने बाप की विरासत लेने के लिए उसे अपदस्थ बेइज़्ज़त नहीं करना पड़ा । ये सब अपने अपने बाप के स्वाभाविक वारिस थे और उनके आशीर्वाद से गद्दी पे बैठे पर सम्हाल न पाए , और आज कौड़ी के तीन हो घूम रहे हैं ।

इसलिए , हे अखिलेश , तुम भी ये मत भूलो कि आज तुम और राम गोपाल बेशक Hydrocele बने, पानी से फूले हुए आंड मने अंडकोष की माफ़िक़ खरबूजे जैसे बड़े हो गए हो , पर ये मत भूलो कि आंड चाहे जितना बड़ा हो जाए रहता लांड के नीचे ही है …… हाँ ये अलग बात है कि कुछ बिसेस आपातकालीन परिस्थिति में आंड सटक के गले में आ जाते हैं …… पर अंततः तो उसे नीचे आना ही होता है …….. इसलिए हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ …… क्योंकि तुम्हारे पास ऐसा कुछ नहीं है जो बाप ने पहले न देखा हो ……. पर बेटा , भगवान् न करे , कि अगर बाप ने खोल के दिखा दिया न किसी दिन …… तो बेहोश हो जाओगे ।

नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ? असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..

वंस अपान ए टाइम , नवाबों के शहर नखलऊ में एक डाग्दर साहब हुआ करते थे ।
Jain साहब । वो नखलऊ के जाने माने गुप्त रोग बिसेसज्ञ मने sexologist हुआ करते थे ।
फिर जब वो नहीं रहे तो उनके लौंडे उनकी जगह sexologist बन गए ।
मने पहले नवाबों के सहर नखलऊ में एक Dr जैन sexologist होते थे , अब दो हो गए ।
अब नखलऊ वालों को बड़ी मुसीबत । किसके पास जाएँ ?
दोनों एक से बढ़ के एक ……. दोनों अपने आपको दावा करें कि असली बड़े वाले डाक् साब वही हैं लिहाजा नक्कालों से सावधान रहे ।

मेरे एक मित्र हैं ……. उन ने इन sexologist डाक्टरों और हकीमों पे बड़ी रिसर्च करी है । वो बताते हैं कि ऐसे झोला छाप हकीम आपको ज़्यादातर मुस्लिम बहुल आबादी वाले शहरों में , मुसलमाँ बस्तियों में ज़्यादा मिलेंगे । इक्का दुक्का sexologist बेशक हिन्दू मिल जाएँ पर बकिया अधिकाँश सब मुसलमाँ मिलेंगे ………. आखिर क्यों ?
मने नखलऊ , भोपाल , पुरानी दिल्ली , राम पुर , बरेली , देवबंद , मेरठ , मुज़फ्फर नगर , सहारनपुर , अमरोहा , बिजनोर ऐसे मुस्लिम बहुल शहरों में मिलेंगे । चंडीगढ़ , अमृतसर , जालंधर , रोहतक , करनाल , सोनीपत में नहीं मिलेंगे । गोरखपुर बनारस में नहीं मिलेंगे । बनारस में अगर कोई छूटा छटका हुआ भी तो मदनपुरा दाल मंडी और बेनियाबाग कज़्ज़ाकपुरा में ही मिलेगा , चौक मैदागिन , गोदौलिया पे नहीं मिलेगा ।
100 में से 99 sexologist मुसलमाँ मिलेंगे ।
100 के 100 झोला छाप फ़र्ज़ी नीम हकीम मिलेंगे ।

आखिर मुसलमानों के बीच ही क्यों प्रचलित है ये गुप्त रोग विशेषज्ञों की जमात ।
इसके मूल में कारण है ये 4 बीबियाँ रखने का रिवाज़ ।
आम तौर पे मियाँ जी लोग की समस्या ये हो जाती है की मियाँ की पहली दूसरी बीबी तो बुढ़िया होती है …….. पोपली पिलपिली …….. पर तीसरी चौथी आ जाती हैं एकदम जवान । अब मियाँ जी स्वयं तो हो गए 45 – 50 या 55 के और बीबी खरीद लाये हैदराबाद से 16 या 18 साल की …… अब मियाँ परेशान ……. अबे 55 साल का अधेड़ 18 साल की लौंडिया को क्या ख़ाक सम्हालेगा …….. तो उसको अपनी मरदाना कमजोरी का अहसास होता है …….. और फिर वो दौड़ता है इन sexologists की तरफ …….. और वो इन्हें सोने चांदी और हीरे की भस्म खिला के वापस जवान बना देने का दावा कर चूतिया बनाते हैं ।
सबसे मजेदार तथ्य ये है कि ये मुस्लिम समाज में sexologist की परंपरा कोई नयी नहीं है बल्कि ठीक उतनी ही पुरानी है जितना इस्लाम । क्योंकि हुज़ूर की जवानी तो बीत गयी अपने से उम्र में 25 साल बड़ी महिला के साथ । फिर जब वो पूरी हुई तो हुज़ूर को पहली बार जवान औरत नसीब हुई । उसके बाद जस जस हुज़ूर की उम्र बढ़ी उनकी बीबियों की उम्र घटती चली गयी और एक समय वो आया कि जब हुज़ूर कब्र में पैर लटकाये थे तो उनकी पत्नी बमुश्किल 20 साल की थीं ।
ऐसे में ये मरदाना कमजोरी की समस्या तो तब भी रही होगी ……..
बहरहाल ……. आज मैंने एक खबर में पढ़ा कि अकलेस और मुलायम दोनों ये कह रहे हैं कि नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ?
असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..
असली बड़े वाले जादो जी …….. हर मंगलवार सैफई में ……..
असली छोटे वाले जादो जी ……. हर सोमवार नखलऊ में …….
हमारी कोई ब्रांच नहीं है ……..

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

चुनाव आयोग ने ऊपी का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है ।
पहला वोट 11 फरवरी को पडेगा ।
इधर चुनाव आयोग dates declare कर रहा था उधर मुलायम अपने बेटे कलेस को समझा रहे थे कि बेटा मान जाओ नहीं तो साइकिल से उतर के पैदल हो जाना पड़ेगा ।
इधर कुछ लोगों ने दोनों बाप बेटा को समझा दिया है कि भैया ……. जादो जी लोग ……. दो नाव या दो घोड़े की सवारी करने वाले सवार की गाँड फट के flower हो जाया करती है ।
तुम दोनों तो अपने अपने रास्ते चले जाओगे पर हम मने cadre कार्यकर्ता और भोटर ……. हमारा क्या होगा । अबे तुम दोनों के चक्कर में फटेगी तो हमारी ।
उधर आजमखान ने समझाया बतावें कि अगर सपा बँटी और कमजोर हुई तो मुसलमान भोटर तुमको लात मार भेनजी की गोदी में जा बैठेगा ।
मुसलमान 2014 का खार खाये बैठा है । लोस चुनाव में मोदी ने ऐसी मारी बिना तेल के कि अब तक सहला रिये हैं भाई जान । आपको याद होगा कि 2014 में एक भी मुसलमान सांसद UP से जीत के नहीं गया । मुसलमान जानता है कि बँटा तो कटा ………
दोफाड़ सपा मने बसपा को फायदा । इसीलिए मुल्लायम आखिरी कोशिश कर रहे हैं और समझ अखिलेश भी रहे हैं ।
और इस खतरे को समझ भाजपा भी रही है ।
भाजपा शुरू से ही मुलायम और उनकी सपा को मुसलमानों के खिलाफ एक safety valve के रूप में इस्तेमाल करती आई है । मुलायम और मुसलमान का रिश्ता बड़ी प्यार मुहब्बत का रहा है । दोनों 69 में रहे । मुलायम इनको lollypop देते रहे चुसाते रहे । मुसलमान समझ ही न पाए आज तक कि lollypop चूस के आज तक कोई मोटा न हुआ । कड़वा सच है कि मुलायम ने कभी मुसलामानों को बढ़ने न दिया ……. तरक्की की सीढ़ी चढ़ने न दिया ……… हमेशा appeasement का lollypop चुभलाते रहे ।
इधर मुलायम कलेस दोनों जानते हैं कि वो तो हार ही रहे हैं पर ऐसा न हो कि भैंसवती जीत जाए । यही सोच अहीर भोटर की भी है । BMW न आये बेशक भाजपा आ जाए ।

खबर है कि परदे के पीछे सुलह के प्रयास अमित शाह कर रहे हैं । दो फाड़ सपा की बजाय एक कमजोर सपा भाजपा को ज़्यादा मुफीद है ।

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..

Competitive Sports में एक सूत्र वाक्य है ।
क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..
मने सारी तैयारी के बाद जो चीज़ सबसे महत्वपूर्ण होती है वो है जी दारी ……. मने fighting Spirit , killing Spirit ……. मानसिक दृढ़ता ……..
हमारे यहाँ देसी Indian Style Wrestling जो मिट्टी के अखाड़ों में लड़ी जाती है ……. कुश्ती के दंगल होते हैं । इन इनामी दंगलों में जो सबसे बड़ी ईनामी कुश्ती होती है वो अक्सर लाखों की होती है । हरियाणा ,पंजाब , हिमांचल और महाराष्ट्र में पहली कुश्ती अक्सर लाख डेढ़ लाख की होती है । महाराष्ट्र में तो 5 लाख तक की । इसमें टाइम भी खुला होता है । इसे आर पार की कुश्ती कहते हैं । ऐसी कुश्तियां घंटा डेढ़ घंटा भी चल सकती है । मने जब तक हार जीत न हो तब तक भी चल सकती है । पिछले साल महाराष्ट्र के एक दंगल में ऐसी ही एक कुश्ती साढ़े तीन घंटा चली । पुराने जमाने में ancient Olympics में ऐसी कुश्तियां 10 – 12घंटे तक चल जाया करती थीं ।
modern Olympics में भी 1904 या 1908 वाले olympic में एक कुश्ती 19 घंटे चली बतायी जाती है । पहले दिन दस या 12 घंटे चली । फिर उसमे अवकाश दे दिया गया क्योंकि पहलवान जी लोग तो अखाड़े में खड़े थे पर दर्शक और आयोजक बैठे बैठे थक गए । इसलिए ये तय हुआ कि अब इसमें अवकाश दिया जाए और हार जीत का फैसला कल हो ……. अगले दिन फिर 7 या 9 घंटे हुई तब जा के एक मल्ल ने हार मानी …….. इसके बाद ओलम्पिक आयोजन समिति ने हाथ जोड़ लिए कि भैया …… ई ना चोलबे ……. इसके नियम क़ानून कुछ बदलो और हार जीत तय करने का कोई और नियम बानाओ …… इस तरह धीरे धीरे इस Modern Olympic Style wrestling का विकास हुआ जिसमे हार जीत Points पे होने लगी और कुश्ती का समय सीमित किया गया । इसके अलावा , पहले सिर्फ Heavy Wt wrestling ही होती थी जिसमे सिर्फ भारी भरकम पहलवान ही भाग लेते थे और बेचारे छोटे मोटे आदमी के लिए कोई गुंजाईश न थी । कालान्तर में ये Weight Categories का चलन हुआ ……..परन्तु देसी कुश्ती में आज भी आर पार की कुश्तियाँ होती हैं ……. हालांकि कई आयोजन समितियां अब ये करने लगी हैं कि एक निश्चित समय के बाद point पे कुश्ती करा के हार जीत का फैसला कर लिया जाए जिस से कि सारा दिन लड़ने लड़ाने की नौबत न आये । जैसे 40 मिनट आर पार …… यदि इसमें चित पट न हो तो फिर 5 मिनट point की कुश्ती करा के फैसला अंको के आधार पे ।
हम कोच प्रशिक्षक अपने पहलवानों को हमेशा एक ही बात समझाते हैं कि देखो बेटा ……. जब कुश्ती होती है और जब तुम थक जाते हो …….. तो ये याद रखो कि सामने वाला भी लड़ रहा है ……. उसका भी उतना ही जोर लग रहा जितना तुम्हारा ……. वो भी उतना ही थका हुआ है जितने तुम ……. ऐसे में जीतेगा वो जो जीदारी करेगा ……. वो जिसमे killing spirit कायम रहेगी …….. सारा खेल जीदारी का है …….. लड़ाई में बाकी की सारी physical तैयारी तो coach के हाथ में होती है …… जैसे Strength , endurance , speed , technique , Strategy …….. पर ये जो जीदारी है न ……. ये साली जन्म जात होती है ……. हालांकि इसे भी improve करने की कोशिश तो हम करते ही हैं ……. तभी ये Sports Psychology नामक विज्ञान आया ……. हम इसमें खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं …….. मने इसमें खिलाड़ी को ये समझाने की कोशिश लगातार करते हैं कि भाई अपने आपको पहचान …… तू बहुत तगड़ा है …….
पर ऐसे में बहुत से पहलवान ऐसे होते हैं जो आपकी बात सुन के हाँ हूँ तो करता रहेगा पर उसकी body language ऐसी होती है जो कोच से कह रही होती है ……. अरे कोच साब …… क्यूं चूतिया बणा रहे हो ……. क्यों झूठ धका रहे हो ……
क्यों मने चने के झाड़ पे चढ़ा रहे हो …….. आपणे के बेरा मैं कितना बड़ा गांडू हूँ ……. मने कोच कितना भी जोर लगा ले , जब तक पहलवान जी दारी न धरे ……. वो खुद को गांडू मानना बंद न करे ……. कुछ नहीं हो सकता ……..

ऊपी में भी यही किस्सा दोहराया ना रहा है ……. सामने वाले की फटी पड़ी है ……. उसके पिछवाड़े के चीथड़े उड़े हुए हैं ……. फट के हाथ में आई हुई है ……. कुनबे में घमासान मचा है …… पार्टी दो फाड़ होने को है , पिछले 6 महीने से सुलह की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी है ………. संगठन तितर बितर छिन्न भिन्न हो चुका है …….. voter निराश हताश है और नए ठौर ठिकाने खोज रहा है और इसी दुश्मन को आपने 2014 में नंगा करके मारा है , घसीट घसीट के मारा है ……. आप उस से बेजोड़ तगड़े हैं …….. पर कुछ गांडू किस्म के लोग लगातार यही कह रहे है कि अजीत भाई ……. क्यों चने के झाड़ पे चढ़ा रिये हो …….. आप जानते नाही कि मोलायम और उसका बेटा अखिलेश कितना तगड़ा है और हम कितने बड़े गांडू ……. देख लेना वही जीतेंगे 2017 ……..
क्योंकि वो शेर और हम गांडू ……… इतनी छीछालेदर के बाद भी वही जीतेंगे और इतने तगड़े होने के बाद भी हम ही हारेंगे क्योंकि आप जानते ही नहीं कि हम कितने भयंकर किस्म के गांडू है …….

दुनिया की हर बीमारी का इलाज है , गांडू गर्दी का कोई इलाज नहीं