समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

समाजवादी पाल्टी अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रही है ।
करो या मरो …….. चुनाव सिर पे है ।
खबर है कि 1500 करोड़ से ऊपर की चुनाव सामग्री छप के तैयार है । इसमें पार्टी के झंडे banor पोस्टर Tshirt बनियान बिल्ले स्टिकर्स flex boards और hoardings और न जाने क्या क्या है ।
UP जैसे विशाल प्रदेश में , जहां 20 करोड़ की जनसंख्या और 11 करोड़ से ज़्यादा भोटर है ……. जहां 400 से ज़्यादा सीट पे प्रत्याशी उतारे जाने हैं ……. वहाँ पार्टी के दो फाड़ होने का ख़तरा है ।
ऊपर से नेताओं को यही नहीं पता कि उन्हें किस चुनाव चिन्ह पे चुनाव लड़ना है । समस्या ये है की भारी मात्रा में जो चुनाव प्रचार सामग्री छप के तैयार है वो सब साइकिल चुनाव चिन्ह से छपी है । अब इस साइकिल पे ही ख़तरा मंडरा रहा है ।
कल को अगर चुनाव आयोग ने ये साइकिल ही फ्रीज़ कर दी तो दोनों गुटों अर्थात अखिलेश और मुलायम सिपाल दोनों को नए सिंबल पे चुनाव लड़ना पडेगा । नयी प्रचार सामग्री कोई रातों रात तो छप नहीं जायेगी ।
जैसे पति पत्नी बच्चों की वजह से तलाक़ नहीं ले पाते और मजबूरन साथ रहते हैं उसी तरह साइकिल के मोह में मुलायम अकलेस अलग नहीं हो पा रहे । इसके अलावा इक्लेस जादो ने समाजवादी पाल्टी के दोनों बैंक खाते भी seize करा दिए …… मने कंगाली में आटा गीला ।

पकिस्तान भारत के बीच शान्ति रहे इसमें एक बड़ी समस्या ये आती है कि पाकिस्तान में पाक सरकार के अलावा कई Non State actors हैं । Army है , ISI है , उसके बाद विभिन्न जिहादी गुट हैं । आखिर भारत सरकार पाकिस्तान में शान्ति वार्ता करे तो किस से ?
यही हाल समाजवादी पाल्टी का है । अखिलेश मुलायम का बस चले तो दो मिनट में झगड़ा सुलटा लें ।
पर उधर रामगोपाल और इधर सिपाल जादो और अमर सींग …… ये तीन शान्ति और समझौता वार्ता में रोड़ा बने बैठे हैं । इक्लेस जादो और मुलायम जादो को अगर शान्ति स्थापना करनी है तो इन दोनों को रामगोपाल , सिपाल और अमर सींग इन तीनो को GPL मार के पार्टी से 60 साल के लिए निष्कासित कर देना चाहिए । इसके अलावा पार्टी में जितने भाई भतीजे भांजे बहू बेटियां बहन भेनजी भांजी भतीजी बुआ मौसी नानी समधी साले सालियाँ साढ़ू सरहज हैं उन सबकी G पे भी लात मार के party से बाहर कर देना चाहिए । इसके अलावा परतीक गुप्ता जादो और उसकी बीबी अपरना गुप्ता जादो को भी घर और पाल्टी दोनों से G पे लात मार के भगा देना चाहिए । भैंचो पोलिटिकल पाल्टी है कि तबेला ???????

पर काश …… GPL मार के भगा देना इतना ही आसान रहा होता ………. अमर सिंघवा एक नंबर का दलाल नहीं दल्ला है । न जाने किस किस के संग किस किस की रिकॉडिंग रखा होगा …….. और न जाने किस किस मुद्रा में रखा होगा ……. कम्बकब्त सोसल मीडिया का ज़माना है । एक घंटे में 45 लाख शेयर और views हो जाते हैं वीडियो clip के ।
अमर सिंह से पार पाना मुलायम इक्लेस जादो के बस का नहीं ।

समाजवादी पाल्टी का किस्सा खत्म समझ लो ।
बिना सिंबल , बिना प्रचार सामग्री , बिना funds , बिना नेता , हर सीट पे बागी उम्मीदवार , free for all gang bang ……. कब कौन किसकी कहाँ कैसे मार ले क्या पता ?ऊपर से भाजपा और मोदी जैसा सशक्त प्रतिद्वंद्वी ।

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ ……

ऐ अकलेस जादो , तुम ये जान लो कि वंस अपान ए टाइम इस परदेस में , जब कि ये पुत्तर परदेस नहीं बल्कि उत्तर परदेस होता था , चरण सिंह नाम के एक नेता हुआ करते थे ।
ई जो तुम्हारे बाप हैं न , मुलायम सिंग , किसी जमाने में ये उनके अँडुआ मने आंड मने testicles हुआ करते थे ……चौ चरण सिंह उत्तर प्रदेश के एक छत्र नेता हुए …… सचमुच के धरती पुत्र और किसान नेता …….. मने इतने बड़े नेता थे कि 1984 में जब कि इंदिरा गांधी की हत्या के उपरान्त उपजी सहानुभूति लहर में जब कि सब कुछ उड़ गया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी हार गए थे , तब भी अकेले चौ चरण सिंह ऐसे थे जो जीते थे । मने इतने बड़े नेता थे चौधरी साहब ……. और आज उसी चौधरी साहब का बेटा ……. उसने अपने मरहूम बाप की पार्टी और उनकी राजनैतिक विरासत का ये हाल बना दिया कि आज वो विधायक की एक सीट को तरस रहा है ।

1984 में जो राजीव गांधी 410 सीट के प्रचंड बहुमत से जीते थे उनका होनहार बिटवा आज उसी पार्टी को 44 सीट तक नीचे ले आया है और अब आगे 4 सीट पे ले जाने की तैयारी में है ।

आगे सुनो ……. एक और हुए हैं ……. भारतीय राजनीति के पितामह कहाये …… पितामह समझते हो ?
दादा । हरियाणा के चौधरी देवी लाल जी …… समूचा हरियाणा उन्हें ताऊ देवी लाल कहता था प्यार से ……… उसी ताऊ देवी लाल के बेटे और पोते आज जेल खट रहे हैं और पार्टी लौड़े के दक्खिन चली गयी ।

इसी हरियाणा के एक और बहुत बड़ी राजनैतिक हस्ती हुए चौधरी भजन लाल । एक ज़माना था कि उनकी एक आवाज़ पे पूरा हरियाणा खड़ा हो जाता था । उनके मरने के बाद उनके दोनों लौंडे भी बाप की राजनैतिक विरासत सम्हाल न पाए और आज कौड़ी के तीन हो के घूम रहे हैं । एक अदद सीट को मोहताज हैं ।

आगे सुनो …… एक हुए बलिया के बागी ……. बलिया के शेर ……. बाऊ चनसेखर सिंह …….. ये वो अज़ीम शख्सियत थे कि जिंदगी में कोई पद ही नहीं लिए …… कहते थे बनूंगा तो सिर्फ PM और एक दिन PM बन के ही दिखाया ……. आज उनके दोनों बेटे तुम्हारा पेल्हर तौलते हैं एक अदद विधायकी सांसदी के लिए ।

उधर मुम्बई में देख लो …… सारी जिंदगी अकेले बाला साहिब दहाड़ते रहे शेर की माफ़िक़ …….. उसी शेर का बेटा आज बकरी की माफ़िक़ मिमिया रहा है …….. और ये तमाम लोग तो वो हैं जिन्हें अपने बाप की विरासत लेने के लिए उसे अपदस्थ बेइज़्ज़त नहीं करना पड़ा । ये सब अपने अपने बाप के स्वाभाविक वारिस थे और उनके आशीर्वाद से गद्दी पे बैठे पर सम्हाल न पाए , और आज कौड़ी के तीन हो घूम रहे हैं ।

इसलिए , हे अखिलेश , तुम भी ये मत भूलो कि आज तुम और राम गोपाल बेशक Hydrocele बने, पानी से फूले हुए आंड मने अंडकोष की माफ़िक़ खरबूजे जैसे बड़े हो गए हो , पर ये मत भूलो कि आंड चाहे जितना बड़ा हो जाए रहता लांड के नीचे ही है …… हाँ ये अलग बात है कि कुछ बिसेस आपातकालीन परिस्थिति में आंड सटक के गले में आ जाते हैं …… पर अंततः तो उसे नीचे आना ही होता है …….. इसलिए हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ …… क्योंकि तुम्हारे पास ऐसा कुछ नहीं है जो बाप ने पहले न देखा हो ……. पर बेटा , भगवान् न करे , कि अगर बाप ने खोल के दिखा दिया न किसी दिन …… तो बेहोश हो जाओगे ।

नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ? असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..

वंस अपान ए टाइम , नवाबों के शहर नखलऊ में एक डाग्दर साहब हुआ करते थे ।
Jain साहब । वो नखलऊ के जाने माने गुप्त रोग बिसेसज्ञ मने sexologist हुआ करते थे ।
फिर जब वो नहीं रहे तो उनके लौंडे उनकी जगह sexologist बन गए ।
मने पहले नवाबों के सहर नखलऊ में एक Dr जैन sexologist होते थे , अब दो हो गए ।
अब नखलऊ वालों को बड़ी मुसीबत । किसके पास जाएँ ?
दोनों एक से बढ़ के एक ……. दोनों अपने आपको दावा करें कि असली बड़े वाले डाक् साब वही हैं लिहाजा नक्कालों से सावधान रहे ।

मेरे एक मित्र हैं ……. उन ने इन sexologist डाक्टरों और हकीमों पे बड़ी रिसर्च करी है । वो बताते हैं कि ऐसे झोला छाप हकीम आपको ज़्यादातर मुस्लिम बहुल आबादी वाले शहरों में , मुसलमाँ बस्तियों में ज़्यादा मिलेंगे । इक्का दुक्का sexologist बेशक हिन्दू मिल जाएँ पर बकिया अधिकाँश सब मुसलमाँ मिलेंगे ………. आखिर क्यों ?
मने नखलऊ , भोपाल , पुरानी दिल्ली , राम पुर , बरेली , देवबंद , मेरठ , मुज़फ्फर नगर , सहारनपुर , अमरोहा , बिजनोर ऐसे मुस्लिम बहुल शहरों में मिलेंगे । चंडीगढ़ , अमृतसर , जालंधर , रोहतक , करनाल , सोनीपत में नहीं मिलेंगे । गोरखपुर बनारस में नहीं मिलेंगे । बनारस में अगर कोई छूटा छटका हुआ भी तो मदनपुरा दाल मंडी और बेनियाबाग कज़्ज़ाकपुरा में ही मिलेगा , चौक मैदागिन , गोदौलिया पे नहीं मिलेगा ।
100 में से 99 sexologist मुसलमाँ मिलेंगे ।
100 के 100 झोला छाप फ़र्ज़ी नीम हकीम मिलेंगे ।

आखिर मुसलमानों के बीच ही क्यों प्रचलित है ये गुप्त रोग विशेषज्ञों की जमात ।
इसके मूल में कारण है ये 4 बीबियाँ रखने का रिवाज़ ।
आम तौर पे मियाँ जी लोग की समस्या ये हो जाती है की मियाँ की पहली दूसरी बीबी तो बुढ़िया होती है …….. पोपली पिलपिली …….. पर तीसरी चौथी आ जाती हैं एकदम जवान । अब मियाँ जी स्वयं तो हो गए 45 – 50 या 55 के और बीबी खरीद लाये हैदराबाद से 16 या 18 साल की …… अब मियाँ परेशान ……. अबे 55 साल का अधेड़ 18 साल की लौंडिया को क्या ख़ाक सम्हालेगा …….. तो उसको अपनी मरदाना कमजोरी का अहसास होता है …….. और फिर वो दौड़ता है इन sexologists की तरफ …….. और वो इन्हें सोने चांदी और हीरे की भस्म खिला के वापस जवान बना देने का दावा कर चूतिया बनाते हैं ।
सबसे मजेदार तथ्य ये है कि ये मुस्लिम समाज में sexologist की परंपरा कोई नयी नहीं है बल्कि ठीक उतनी ही पुरानी है जितना इस्लाम । क्योंकि हुज़ूर की जवानी तो बीत गयी अपने से उम्र में 25 साल बड़ी महिला के साथ । फिर जब वो पूरी हुई तो हुज़ूर को पहली बार जवान औरत नसीब हुई । उसके बाद जस जस हुज़ूर की उम्र बढ़ी उनकी बीबियों की उम्र घटती चली गयी और एक समय वो आया कि जब हुज़ूर कब्र में पैर लटकाये थे तो उनकी पत्नी बमुश्किल 20 साल की थीं ।
ऐसे में ये मरदाना कमजोरी की समस्या तो तब भी रही होगी ……..
बहरहाल ……. आज मैंने एक खबर में पढ़ा कि अकलेस और मुलायम दोनों ये कह रहे हैं कि नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ?
असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..
असली बड़े वाले जादो जी …….. हर मंगलवार सैफई में ……..
असली छोटे वाले जादो जी ……. हर सोमवार नखलऊ में …….
हमारी कोई ब्रांच नहीं है ……..

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

चुनाव आयोग ने ऊपी का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है ।
पहला वोट 11 फरवरी को पडेगा ।
इधर चुनाव आयोग dates declare कर रहा था उधर मुलायम अपने बेटे कलेस को समझा रहे थे कि बेटा मान जाओ नहीं तो साइकिल से उतर के पैदल हो जाना पड़ेगा ।
इधर कुछ लोगों ने दोनों बाप बेटा को समझा दिया है कि भैया ……. जादो जी लोग ……. दो नाव या दो घोड़े की सवारी करने वाले सवार की गाँड फट के flower हो जाया करती है ।
तुम दोनों तो अपने अपने रास्ते चले जाओगे पर हम मने cadre कार्यकर्ता और भोटर ……. हमारा क्या होगा । अबे तुम दोनों के चक्कर में फटेगी तो हमारी ।
उधर आजमखान ने समझाया बतावें कि अगर सपा बँटी और कमजोर हुई तो मुसलमान भोटर तुमको लात मार भेनजी की गोदी में जा बैठेगा ।
मुसलमान 2014 का खार खाये बैठा है । लोस चुनाव में मोदी ने ऐसी मारी बिना तेल के कि अब तक सहला रिये हैं भाई जान । आपको याद होगा कि 2014 में एक भी मुसलमान सांसद UP से जीत के नहीं गया । मुसलमान जानता है कि बँटा तो कटा ………
दोफाड़ सपा मने बसपा को फायदा । इसीलिए मुल्लायम आखिरी कोशिश कर रहे हैं और समझ अखिलेश भी रहे हैं ।
और इस खतरे को समझ भाजपा भी रही है ।
भाजपा शुरू से ही मुलायम और उनकी सपा को मुसलमानों के खिलाफ एक safety valve के रूप में इस्तेमाल करती आई है । मुलायम और मुसलमान का रिश्ता बड़ी प्यार मुहब्बत का रहा है । दोनों 69 में रहे । मुलायम इनको lollypop देते रहे चुसाते रहे । मुसलमान समझ ही न पाए आज तक कि lollypop चूस के आज तक कोई मोटा न हुआ । कड़वा सच है कि मुलायम ने कभी मुसलामानों को बढ़ने न दिया ……. तरक्की की सीढ़ी चढ़ने न दिया ……… हमेशा appeasement का lollypop चुभलाते रहे ।
इधर मुलायम कलेस दोनों जानते हैं कि वो तो हार ही रहे हैं पर ऐसा न हो कि भैंसवती जीत जाए । यही सोच अहीर भोटर की भी है । BMW न आये बेशक भाजपा आ जाए ।

खबर है कि परदे के पीछे सुलह के प्रयास अमित शाह कर रहे हैं । दो फाड़ सपा की बजाय एक कमजोर सपा भाजपा को ज़्यादा मुफीद है ।

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

Beware of the old Fox ……..

नमाजवादी कुनबे में जो घमासान मचा है उसपे मैं पिछले 3 दिन में काफी कुछ लिख चुका हूँ ।
जैसा कि मैंने लिखा था कि इतिहास अपने को दोहरा सकता है ।
जैसे 1969 में इंदिरा गांधी को जब कांग्रेस से निकाल दिया गया तो समूची कांग्रेस मय भोटर उनके साथ चली गयी ।
इंडीकेट ही असली कांग्रेस बन गयी । कामराज और निजलिंगप्पा का सिंडिकेट झंडू कौड़ी के तीन हो के रह गए ।
आज नमाजवादी पार्टी में जो खुली बगावत हुई और रामगोपाल वर्मा और कलेस जादो ने जिस तरह एक असंवैधानिक अवैध अधिवेशन बुला के पार्टी पे अवैध कब्जा कर लिया …….. और सत्ता की चाशनी पे मंडराने वाली मक्खियों की तरह सब विधायक अखिलेश के साथ जा खड़े हुए उस से बहुत ज़्यादा प्रभावित होने की ज़रूरत नहीं ।
क्योंकि अखिलेश इंदिरा गांधी नहीं हैं और मुलायम कामराज नहीं हैं और UP में समाजवादी पार्टी 60 के दशक की कांग्रेस नहीं है ।
60 के दशक की कांग्रेस उस जमाने की कांग्रेस थी जब विपक्ष नाम की कोई चीज़ नहीं थी । पूरे देश पे एक छत्र राज था कांग्रेस का । कांग्रेस के टिकट पे कुत्ता भी खड़ा हो तो जीत जाता था । कांग्रेस के लिए राजनीति खाली मैदान थी ।
आज UP में राजनीति के 4 ध्रुव हैं । भाजपा उफान पे है । सपा को बसपा और भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है । इस त्रिकोणीय संघर्ष में सपा अगर पहले नंबर पे आ सकती है तो तीसरे पे भी खिसक सकती है । सिर्फ एक % का swing हार को जीत में बदल सकता है या फिर सूपड़ा साफ कर सकता है ।
ऐसे में ऐसी खुली बगावत वो भी मुलायम सिंह से ?
मुलायम कामराज नहीं हैं । मुलायम की यूपी के अहीरों में कितनी पैठ और कितनी पकड़ है इसका अंदाज़ा शायद आपको न हो ।
अखिलेश और रामगोपाल को चाहिए कि वो इस बूढ़ी लोमड़ी से सतर्क रहे ।
Beware of the old Fox …….. हो सकता है कि मुलायम बेटे के सामने पसीज जाएँ और झुक जाएँ । पर अगर ……. खुदा न खास्ता …… मुलायम के अहम् को ठेस लगी ……. और उन ने अगर कमर कस ली …….. तो अहिरानी आज भी उनके नाम पे खड़ी हो जायेगी ।
यदि सचमुच मुलायम झोली पसार के अहिरानी में खड़े हो गए ……. और अपने बुढापे का वास्ता दे के एक इमोशनल सी स्पीच ……… सिर्फ एक स्पीच पूरा चुनाव पलट देगी ( सपा के लिए ) और अखिलेश और राम गोपाल जैसों की खटिया खड़ी कर देगी …….. अखिलेश और राम गोपाल की पार्टी की जमानत नहीं बचेगी ।
अब देखना ये है कि मुलायम और शिवपाल कितना fight back करते हैं ।
5 Jan को जो अधिवेशन बुलाया है देखना होगा कि उसमें कौन कौन आता है ।
अगर ये मान भी लिया जाए कि शिवपाल की लिस्ट के सभी 403 प्रत्याशी भी अगर अखिलेश खेमे में चले गए तो भी 150 से ज़्यादा के टिकट कटेंगे । बाकी बची 250 सीटों पे नए प्रत्याशी खोजना शिवपाल के लिए एक दिन का काम है ।
सपा के कुल 3 bank खाते हैं । एक दिल्ली में जिसके signatory राम गोपाल है पर उसमे funds नाम मात्र के हैं । बाकी दो खाते सैफई और लखनऊ में हैं । इसके signatory मुलायम हैं ।
अगले कुछ दिनों में party symbol के लिए लड़ाई होगी । बहुत संभव है कि Cycle मुलायम शिपाल के पास रह जाए और अखिलेश नए symbol पे चुनाव लड़ें ।
ऐसी स्थिति में क्या शिवपाल के वो 400 प्रत्याशी हर सीट पे क्या 5000 वोट भी नहीं काटेंगे ?
चतुष्कोणीय लड़ाई में जबकि भाजपा उफान पे हो और मुसलमान दिग्भ्रमित हो 3 जगह बँट बिखर रहा हो ……. हर सीट पे 5000 भोट का नुक्सान सफाया कर देगा ।
शिवपाल और मुलायम इतने भी गए बीते नहीं जो 5000 भोट को मोहताज हो जाएं ।
मुलायम अगर पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन भी गए तो अकेले शिवपाल भी इतने कमजोर नहीं कि हर सीट पे 5 या 10 हज़ार वोट काट के अखिलेश को औकात न बता दें ………..

नामाजवादी कुनबे की ये लड़ाई कोई नाटक नौटंकी नहीं एकदम असली है ।
तलवारें भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली ही होगा ।

क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..

Competitive Sports में एक सूत्र वाक्य है ।
क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..
मने सारी तैयारी के बाद जो चीज़ सबसे महत्वपूर्ण होती है वो है जी दारी ……. मने fighting Spirit , killing Spirit ……. मानसिक दृढ़ता ……..
हमारे यहाँ देसी Indian Style Wrestling जो मिट्टी के अखाड़ों में लड़ी जाती है ……. कुश्ती के दंगल होते हैं । इन इनामी दंगलों में जो सबसे बड़ी ईनामी कुश्ती होती है वो अक्सर लाखों की होती है । हरियाणा ,पंजाब , हिमांचल और महाराष्ट्र में पहली कुश्ती अक्सर लाख डेढ़ लाख की होती है । महाराष्ट्र में तो 5 लाख तक की । इसमें टाइम भी खुला होता है । इसे आर पार की कुश्ती कहते हैं । ऐसी कुश्तियां घंटा डेढ़ घंटा भी चल सकती है । मने जब तक हार जीत न हो तब तक भी चल सकती है । पिछले साल महाराष्ट्र के एक दंगल में ऐसी ही एक कुश्ती साढ़े तीन घंटा चली । पुराने जमाने में ancient Olympics में ऐसी कुश्तियां 10 – 12घंटे तक चल जाया करती थीं ।
modern Olympics में भी 1904 या 1908 वाले olympic में एक कुश्ती 19 घंटे चली बतायी जाती है । पहले दिन दस या 12 घंटे चली । फिर उसमे अवकाश दे दिया गया क्योंकि पहलवान जी लोग तो अखाड़े में खड़े थे पर दर्शक और आयोजक बैठे बैठे थक गए । इसलिए ये तय हुआ कि अब इसमें अवकाश दिया जाए और हार जीत का फैसला कल हो ……. अगले दिन फिर 7 या 9 घंटे हुई तब जा के एक मल्ल ने हार मानी …….. इसके बाद ओलम्पिक आयोजन समिति ने हाथ जोड़ लिए कि भैया …… ई ना चोलबे ……. इसके नियम क़ानून कुछ बदलो और हार जीत तय करने का कोई और नियम बानाओ …… इस तरह धीरे धीरे इस Modern Olympic Style wrestling का विकास हुआ जिसमे हार जीत Points पे होने लगी और कुश्ती का समय सीमित किया गया । इसके अलावा , पहले सिर्फ Heavy Wt wrestling ही होती थी जिसमे सिर्फ भारी भरकम पहलवान ही भाग लेते थे और बेचारे छोटे मोटे आदमी के लिए कोई गुंजाईश न थी । कालान्तर में ये Weight Categories का चलन हुआ ……..परन्तु देसी कुश्ती में आज भी आर पार की कुश्तियाँ होती हैं ……. हालांकि कई आयोजन समितियां अब ये करने लगी हैं कि एक निश्चित समय के बाद point पे कुश्ती करा के हार जीत का फैसला कर लिया जाए जिस से कि सारा दिन लड़ने लड़ाने की नौबत न आये । जैसे 40 मिनट आर पार …… यदि इसमें चित पट न हो तो फिर 5 मिनट point की कुश्ती करा के फैसला अंको के आधार पे ।
हम कोच प्रशिक्षक अपने पहलवानों को हमेशा एक ही बात समझाते हैं कि देखो बेटा ……. जब कुश्ती होती है और जब तुम थक जाते हो …….. तो ये याद रखो कि सामने वाला भी लड़ रहा है ……. उसका भी उतना ही जोर लग रहा जितना तुम्हारा ……. वो भी उतना ही थका हुआ है जितने तुम ……. ऐसे में जीतेगा वो जो जीदारी करेगा ……. वो जिसमे killing spirit कायम रहेगी …….. सारा खेल जीदारी का है …….. लड़ाई में बाकी की सारी physical तैयारी तो coach के हाथ में होती है …… जैसे Strength , endurance , speed , technique , Strategy …….. पर ये जो जीदारी है न ……. ये साली जन्म जात होती है ……. हालांकि इसे भी improve करने की कोशिश तो हम करते ही हैं ……. तभी ये Sports Psychology नामक विज्ञान आया ……. हम इसमें खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं …….. मने इसमें खिलाड़ी को ये समझाने की कोशिश लगातार करते हैं कि भाई अपने आपको पहचान …… तू बहुत तगड़ा है …….
पर ऐसे में बहुत से पहलवान ऐसे होते हैं जो आपकी बात सुन के हाँ हूँ तो करता रहेगा पर उसकी body language ऐसी होती है जो कोच से कह रही होती है ……. अरे कोच साब …… क्यूं चूतिया बणा रहे हो ……. क्यों झूठ धका रहे हो ……
क्यों मने चने के झाड़ पे चढ़ा रहे हो …….. आपणे के बेरा मैं कितना बड़ा गांडू हूँ ……. मने कोच कितना भी जोर लगा ले , जब तक पहलवान जी दारी न धरे ……. वो खुद को गांडू मानना बंद न करे ……. कुछ नहीं हो सकता ……..

ऊपी में भी यही किस्सा दोहराया ना रहा है ……. सामने वाले की फटी पड़ी है ……. उसके पिछवाड़े के चीथड़े उड़े हुए हैं ……. फट के हाथ में आई हुई है ……. कुनबे में घमासान मचा है …… पार्टी दो फाड़ होने को है , पिछले 6 महीने से सुलह की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी है ………. संगठन तितर बितर छिन्न भिन्न हो चुका है …….. voter निराश हताश है और नए ठौर ठिकाने खोज रहा है और इसी दुश्मन को आपने 2014 में नंगा करके मारा है , घसीट घसीट के मारा है ……. आप उस से बेजोड़ तगड़े हैं …….. पर कुछ गांडू किस्म के लोग लगातार यही कह रहे है कि अजीत भाई ……. क्यों चने के झाड़ पे चढ़ा रिये हो …….. आप जानते नाही कि मोलायम और उसका बेटा अखिलेश कितना तगड़ा है और हम कितने बड़े गांडू ……. देख लेना वही जीतेंगे 2017 ……..
क्योंकि वो शेर और हम गांडू ……… इतनी छीछालेदर के बाद भी वही जीतेंगे और इतने तगड़े होने के बाद भी हम ही हारेंगे क्योंकि आप जानते ही नहीं कि हम कितने भयंकर किस्म के गांडू है …….

दुनिया की हर बीमारी का इलाज है , गांडू गर्दी का कोई इलाज नहीं

किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ? मोलायम या अकलेस ?

इतिहास खुद को दोहरा रहा है क्या ?
बात 1966 की है ।
लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गाँधी PM बनी थी ।
उनके नेतृत्व में 67 में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया । सिर्फ 283 सीट आई । बहुमत से बमुश्किल 20 सीट ज़्यादा ।
जब शास्त्री जी मरे थे तो इंदिरा उनके मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी । उन्हें गूंगी गुड़िया कहा जाता था । वो सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा भर थी जिसके नाम के आगे गांधी नेहरु लगा था ।
शास्त्री के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कामराज ने तो अपनी तरफ से एक कठपुतली
बैठाई थी कुर्सी पे ……. सत्ता की चाभी उनके पास थी । उनके अलावा मोरारजी भाई देसाई , निजलिंगप्पा , नीलम संजीव रेड्डी , हितेंद्र देसाई , सत्येन्द्र नारायण सिन्हा , चन्द्र भानु गुप्त और वीरेन्द्र पाटिल जैसे दिग्गज थे कांग्रेस में ……… पर PM बनते ही इंदिरा गाँधी ने रंग दिखाना शुरू किया और इन वट वृक्षों की छाया से बाहर आ गयी ।
12 Nov 1969 को तत्कालीन अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने अपनी PM इंदिरा गाँधी को अनुशासन हीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया ……… इंदिरा ने अलग हो के नयी पार्टी बना ली ……. सारे बूढ़े खलीफा एक तरफ , गूंगी गुड़िया अकेली एक तरफ …….. इंदिरा गाँधी की कांग्रेस ( O ) और कामराज वाली Cong ( R ) …….. पार्टी दो फाड़ हो गयी ।
तत्कालीन कांग्रेस working committee के 705 मेंबर्स में से 446 इंदिरा गाँधी के साथ हो गए ।
पुरानी कांग्रेस जिसमे कामराज के साथ सब बूढ़े थे , वो उन दिनों सिंडिकेट कहलाती थी और इंदिरा की कांग्रेस इंडिकेट ……..

1971 में अगले आम चुनाव हुए । इंदिरा गाँधी ने 43.6% भोट के साथ 352 सीट जीत के बम्पर सफलता अर्जित की । सिंडिकेट के बुढवों को जनता ने नकार दिया । उनको सिर्फ 10 % भोट और सिर्फ 16 seats मिली ।
लोकतंत्र में राजा वो जिसके साथ जनता ……. भोटर ।

UP में वही तमाशा चल रहा है ।
पप्पू अखिलेश अपने बूढ़े घाघ बाप और चाचा की छाया से निकल के बाहर आ गया है ।
कल रात शहजादे सलीम ने अकबर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया ।
कहता है कि 265 सीट पे बागी उम्मीदवार लड़ाऊँगा …….. पार्टी मुख्यालय में निष्कासन का पत्र type कर के रखा है । सिर्फ मुलायम के sign होने बाकी हैं ।
सवाल है कि भोटर किसके साथ जाएगा ।
यादव वोटर confused है । बूढ़े बुजुर्ग मुलायम के साथ हैं तो युवा अखिलेश के साथ । जिलों में पुराने नेता मुलायम के साथ हैं तो नए अखिलेश के साथ ।

71 में जनता के सामने विकल्प सीमित थे । या सिंडिकेट या फिर इंडिकेट । उनके लिए चुनाव आसान था । उन्होंने इंदिरा को चुन लिया । आज UP की जनता के सम्मुख 4 विकल्प हैं ।
मोदी , मायावती , मुलायम या अखिलेश ।
आज की स्थिति में अखिलेश 3rd या 4th position के लिए लड़ रहे हैं ।
Gold और Silver मैडल तो तय है ।
सपा के भोटर ……. यादव : 35 % मोलायम , 35 अखिलेश , बाकी 30 % भाजपा ।
मुसलमाँ बेचारा …….. खरबूजा कटेगा और सबमे बंटेगा ……… पहले 3 जगह बँटना था अब 4 जगह बंटेगा । 40 % बसपा बाकी 60 % में 4 हिस्से ……..

असली लड़ाई 2017 के बाद शुरू होगी जब सपा में सिंडिकेट और इंडीकेट होगा ।
किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ?
मोलायम या अकलेस ?

UP में नमाजवादी कलह

नमाजवादी कुनबे की कलह सड़क पे आ गयी है ।
परसों अकलेस जादो ने 403 प्रत्याशियों की सूची अपनी तरफ से मोलायम जादो को सौंप दी थी ।
सिपाल जादो ने उस लिस्ट को अपने संडास में रख दिया । save paper ……. tissue paper के काम आयगा ।
कल सिपाल जादो ने अपनी लिस्ट मोलायम को थमा दी । उस लिस्ट में सिपाल ने कायदे से अकलेस का औकातीकरण किया है । जब मोलायम ने लिस्ट जारी की उस समय CM झांसी में थे । पर मोलायम ने उनकी उपस्थिति ज़रूरी नहीं समझी । सूची जारी कर दी । सूची जारी करते हुए ये भी कहा कि पार्टी का कोई CM चेहरा नहीं है । साथ ही ये भी साफ़ कर दिया कि पार्टी अकेले अपने बूते चुनाव लड़ेगी । किसी से कोई गठबंधन नहीं ।
सूची में ऐसे 107 नाम हैं जिनका टिकट अकलेस ने काट दिया था । उन 107 को सिपाल जादो ने टिकट दे दिया है ।
चुनावी राजनीति का पहला नियम ये है कि Anti Incumbency से निपटने के लिए sitting MLA या MP के टिकट काट दिए जाते हैं । पर अकलेस ने इस मौलिक सिद्धांत की अवहेलना करते हुए 216 sitting MLAs को टिकट दिया था । जो 10 MLA सिपाल जादो के बेहद करीबी थे सिर्फ उनका टिकट काटा । इसमें ओम प्रकाश सिंह , नारद राय और शादाब फातिमा प्रमुख है । नारद राय वो हैं जिन ने मंत्री रहते माफिया Don मुख्तार अंसारी की पार्टी में एंट्री कराई । शादाब फातिमा के लिए कहा जाता है कि वो अकलेस जादो की नयी चाची हैं …….. जाहिर सी बात है कि सिपाल की लिस्ट में चाची का जलवा कायम है ।
एक बात जो गौर करने लायक है वो ये कि महाभ्रष्ट खनन मंत्री गायत्री प्राजापति दोनों की लिस्ट में कायम हैं ।

मोटे तौर पे अकलेस जादो के 100 टिकट काट दिए गए और 107 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जिनका टिकट अकलेस ने काटा था ।

अखिलेश sitting MLAs पे दाव खेल रहे है । इनमे से 200 नाम ऐसे हैं जो आज तो अखिलेश के साथ दीखते हैं पर कल क्या करेंगे अल्लाह जाने ।

इस समय CM house में MLAs की बैठक चल रही है ।
देखिये क्या निकलता है ।

ये चुनाव सपा के लिए तो ख़तम है ………

नामाजवादी कुनबे में तलवारें फिर खीच गयी हैं ……..

भतीजे अकलेस जादो ने चचा सिपाल जादो को खोल के दिखा दिया है ……लो चचा पकड़ लो …….

हम ना मानते तुमको औ तुमाई अध्यक्सी कू …….. अपनी अध्यक्सी भीतर घाल लओ ……… भोत देखे आँ तुमाए जैसे अध्यक्स ……. तुम औ तुमाई पालटी ………

आज भतीजे ने पालटी अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए …….खुल्लम खुल्ला  विद्रोह करते हुए अपने 403 प्रत्याशी घोषित कर दिए ……..

अब अकलेस जादो खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे ……..और दुनिया से नहीं डरेंगे ……..

अकलेस किसी से न डर रहे हैं न किसी का लाज लिहाज रह गया है ……… उन्होंने जीरो मने शून्य से शुरू करने का मन बना लिया है . दरअसल अखिलेश के पास खोने के लिए कुछ नहीं है . परिवार खानदान की धन संपदा वो त्याग चुके हैं . अगर आपको याद हो तो लखनऊ की माता कैकयी ने सैफई के राजा दसरथ से कही कि हमाए बेटे का का होगा . राजा दसरथ ने बँटवारा कुछ यूँ किया कि देखो कैकयी , धन संपदा बिजनिस और चोरी चकारी से आज तक जो कमाया वो तुमाए बेटे परतीक कू दिया ……. और राजनैतिक पूँजी और विरासत अकलेस कू ……. पर परतीक जादो का पेट उतने से कहाँ भरने वाला था सो उन ने गायत्री प्रसाद प्ररजापती जैसे मन्तरी पाल लिए जो रोजाना दो चार डी रुपिया कमा के दे रहे थे खनन विभाग से …….

उधर राजपाट में हिस्सा बंटाने के लिए 36 ठो चचा भतीजा थे ………  बेचारे अकलेस जादो दोनों पैरों में बाप और चचा चक्की बाँध के राज किये ऊपी में . पर बर्दाश्त की भी हद होती है …….. विद्रोह के अलावा कोई चारा न था …….

इधर मुलायम जादो और सिपाल जादो न मोदी और अमित शाह के सामने हथियार डाल दिये हैं .

मुलायम ने मोदी से कहा ………. याद है ? हम दोनों भाई मने मैं और सिपाल , कहाँ से उठे हैं ? किस फुटपाथ मने सैफई के किस तबेले से उठे थे ? हमाए बाप के पास टूटी साइकिल न होती थी …….हम दोनों भाई पैदल ही ढोर चराया करते थे …….. और देख लो ….हमने सैफई से ढोर चराना शुरू किया और 30 – 40 सालों में पूरा ऊपी चर डाला ……… आज क्या नहीं है हमाए पास ……. अरबों खरबों की बेनामी संपत्ति है ……. स्विस बैंक में अकाउंट है ……. हमाए 36 ठो भाई भतीजा MP , MLA  हैं ……… तुमाए पास क्या है ? सिवाय 5 – 7 कुर्ता पजामा के ……… वो बी साले तुम फिरी में सिलवा लेते हो गांधीनगर से ? क्या हैं तुमाए भाई भतीजे ? एक रासन की दूकान चलाता है दुसरा 7000 की नोकरी करता है ……. भतीजी तुमाई शिक्षा मित्र लगी है गुजरात में ? अबे हमसे सीखे होते तो आज शिक्षा मंत्री होती सेण्टर में ……..

क्या है तुमाए पास ?

मोदी ने कहा ……. भोसड़ी के ……. मेरे पास इनकम टैक्स deptt है …….. CBI है , Enforcement directorate है , CBDT है , DRI है …….. और साथ में CRPF भी है ……… तिहाड़ जेल है …….

मुलायम बोले , मोदी भाई मैं तो मजाक कर रिया था …….. ये सीबीआई और IT वालों का नाम ले के काहे डराते हो …….. मेरे भाई तुम जहां कहोगे मेरा भाई सिपाल साइन कर देगा ……… बना लो यार तुम्ही बनाओ सरकार इस बार ऊपी में …….

उधर अकलेस कहता है …….. मैं मोदी को अपने हाथ पे नहीं लिखने दूंगा की मेरा बाप और चाचा चोर है …… मैं इन दोनों को GPL मार के पालटी से निकाल दूंगा या खुद निकल जाउंगा ……… सच ये है की अकलेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है ……. धन संपदा वो प्रतीक जादो को दे चुके हैं …….. ले दे के राजनैतिक विरासत है जिसपे सिपाल कब्जा जमाये बैठे हैं ……. कल शाम अखिलेश ने 403 सीटों पे अपने प्रत्याशी घोषित कर अंतिम सन्देश दे दिया है …….. सिपाल जादो की लिस्ट में 181 सीट अतीक और मुख्तार अंसारी जैसे चोर बदमाश डाकू माफिया को दी गयी है ……… अखिलेश की ये बगावत बता रही है कि उन्होंने सब कुछ zero से शुरू करने का मन बना लिया है ……. पार्टी टूटती है टूट जाए ……ख़तम होती है हो जाए ……. नए सिरे से शुरू करेंगे …… इंदिरा गाँधी ने भी तो ऐसा ही किया था कभी … इन्डिकेट ले के अलग हो गयी , सिंडिकेट ख़तम हो गया ……. भोटर सब इंदिरा के पास आ गया …….. पार्टी उसकी जिसके साथ भोटर …….

ये चुनाव तो सपा के लिए ख़तम है ……… अब देखते हैं  17 के बाद किसके पास क्या बचता है ………