ममता बनर्जी और केजरीवाल का होम्योपैथी इलाज कराओ

pruritus vulvae नामक एक बीमारी होती है ।
अक्सर महिलाओं को हो जाती है ।
इसमें औरतों को योनि में भयंकर खुजली मचती है ।
मने इतनी भयंकर कि अण्ड का बंड बकने लगती हैं …. आँय बाँय साँय चिल्लाने लगती हैं …… आम तौर पे सभ्य सुसंस्कृत महिलाओं को यदा कदा यदि हलकी खुजली हो जाए तो मौके की नजाकत भांप मौक़ा ताड़ प्राइभेसी खोज के हल्का फुल्का खुजला लेती हैं परंतु यदि किसी को ये नामुराद बीमारी pruritus vulvae अगर हो जाए तो औरत सरेबाज़ार लहंगा पेटीकोट उठा के खुजलाती है ……..एकदम ममता बनर्जी की तरह ।
इसी से मिलती जुलती एक और बीमारी होती है जिसे Pruritus Ani कहते हैं । इसमें भी भयंकर चुल्ल और खुजली मचती है पर खुजली का स्थान vulva से सिर्फ एक inch नीचे घसक के Anus हो जाता है । मने इसके रोगी को ***में भयंकर खुजली मचती है । ये खुजली कितना भी खुजला लो कैसे भी खुजला लो …… मने बेशक लहंगा पेटीकोट उठा के खुजला ल्यो , सान्त ना होती । इसके मरीज अक्सर किसी पेड़ या खुरदुरे स्थान पे रगड़ के खुजलाते देखे जाते हैं ।
आमतौर पे ये दोनों बीमारियां अलग अलग होती है पर rarest of rare केस में एक साथ एक ही मरीज में दोनों बीमारियां एक साथ भी हो जाती हैं ।
मने मर्दों को pruritis ani के साथ pruritus vulvae तो हो नहीं सकती , सो उनको pruritus vulvae की जगह pruritus scroti हो जाता है मने उनके scrotum बोले तो आंड खुजलाने लगते हैं ।
मने इतनी भयंकर चुल्ल और खुजली मचती है की आदमी सरेबाज़ार सरेराह कहीं भी माने office meeting मंच मीटिंग में जहां हो वही , पैंट पाजामा अंडरबीयर उतार के कायदे से 15 – 20 मिनट जब खजुआ लेता है तब जा के कुछ तात्कालिक चैन मिलता है ।
ये तो हुए इस बीमारी के लक्षण बोले तो symptoms .
अब इसके कारणों पे नज़र डालें तो एक कारण तो bacterial infection और hygene की कमी हो सकता है ।
हालिया वर्षो में इसके socio politico economic reasons भी देखे गए हैं ।
मने socio economic reasons फार इगजामपुल नोटबंदी माने demonetization …….. नोट बंदी में अगर किसी बड़े नेता या पार्टी का 1000 – 2000 करोड़ रु डूब जाए तो उस पाल्टी के नेता को इस बीमारी के लक्षण उभर सकते हैं ।
Socio political reasons में ऐसे लक्षण तब उभरते हैं जब किसी विपरीत राजनैतिक विचारधारा का व्यक्ति PM बन जाए तो रोगी में इन बीमारियों के लक्षण उभर सकते हैं ।
फिलहाल मोमता बनर्जी और अरबिन्द भोसड़ीवाल जी में इन बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं ।

निदान : वैसे तो सिंपिल साफ़ सफाई रखने से फर्क पड़ जाता है ।
ये पेड़ इत्यादि से नहीं रगड़ना चाहिए । इस से फौरी लाभ तो मिल जाता है पर बाद में बीमारी बढ़ के भगंदर और नासूर हो जाने का ख़तरा उत्पन्न हो जाता है ।
कई बार सत्ता परिवर्तन हो जाए मने जिस आदमी से allergy हो वो कुर्सी से हट जाए तो ये बीमारी अपने आप शांत हो जाती है …….

खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।

जो लोग गाँव में रहे हैं या ग्रामीण पृष्ठभूमि से है उन्होंने ये दृश्य देखा होगा ।
शेष अपनी कल्पना से देख लें ।
गाँव में कोई पशु जब बीमारी या वृद्धावस्था से एकदम अशक्त हो जाता है तो बैठ जाता है ।
बार बार उठने की कोशिश करता है पर उठ नहीं पाता ।
खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।
ऐसे में किसान दो चार आदमी जुटाता है और सहारा दे के पशु को खडा कर देते हैं ।
दो आदमी आगे से दो पीछे से और एक पूंछ पकड़ के उठाता है ।
अब आप सोचेंगे पूंछ पकड़ के कैसे उठा सकते है ?
पूंछ जहां पीठ से जुडी होती है , गुदा स्थान ज़े ठीक ऊपर …….. वो बहुत मज़बूत जोड़ होता है ।
जब तक वहाँ से जोर नहीं लगाएगा ……. पशु हो या मनुष्य …… खडा नहीं हो सकता ।
*** तक का जोर लगाना ……. ये कहावत यूँ ही नहीं बनी है ।
*** भीच के जोर न लगाओ तो कोई भी भारी काम हो नहीं सकता ……..
कोई जानवर उठने की कोशिश कर रहा है और आप अकेले हैं , उसकी मदद करना चाहते हैं …….
पूंछ पकड़ के थोड़ा सा सहारा दीजिये , खडा हो जाएगा ।

बचपन का एक किस्सा याद है मुझे ।
एक भैंस थी जिसे सहारा दे के उठाना पड़ता था । भैया आते जाते 2 – 4 लोगों को बुलाते । साथ में हम बच्चे लगते । भैंस खड़ी हो जाती । दो तीन हफ्ते ये सिलसिला चला । फिर वो मर गयी ।
अब उसे एक बैलगाड़ी में लाद के गाँव से दूर सीवान में पहुंचाना था …….. अंतिम यात्रा ।
उसके शव के पास गाड़ी लगाई । भैया आदमी जुटाने लगे । 10 एक आदमी हो गए । पर भैया बोले की 10 – 12 आदमी और जुटाओ । इतने से काम नहीं चलेगा ।
पर रोजाना तो हम 4 – 6 लोग ही मिल के इसे उठा लिया करते थे ?
आज 25 आदमी क्यों लगेंगे ?
क्योंकि तब ये जीवित थी । कितनी भी अशक्त थी पर जीवित थी ।
सच ये है कि तब भी वो अपनी ताकत से अपने प्रयास से अपनी इच्छाशक्ति से खड़ी होती थी ।
हम तो उसे सिर्फ हल्का सा सहारा दिया करते थे ।
पर आज ये मर चुकी है । She’s dead .
और मरा हुआ जीव बहुत भारी हो जाता है । बहुत बहुत भारी । तब उसे उठाना आसान नहीं होता ।
पूरा गाँव जुटाना पड़ता है ।

वो तो सिर्फ भैंस थी ।
हिन्दुओं ……. तुम तो हाथी हो । तुम मर गए तो पूरा गाँव मिल के भी न उठा पायेगा ।
crane मंगानी पड़ेगी ।

बंगाल से आज एक शुभ समाचार मिला । एक शुभ संकेत ।
TMC के हिन्दू कार्यकर्ताओं में एक undercurrent है । आक्रोश है ।
TMC के हिन्दू भोटर और कार्यकर्ता बेचैन हैं ।
उन्हें ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण रास नहीं आ रहा ।

लोहा गर्म हो रहा है । इसे लाल करो ।
लाल लोहा ही shape बदलता है ।