लड़ाई बसपा भाजपा में हैं ।

मुझे याद है ।
2012 के चुनावी दिन थे ।
कांग्रेस का tempo high था ।
2009 में UPA2 ने अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी और कांग्रेस तो UP में लोकसभा की 22 सीट जीत के सातवें आसमान पे थी ।
राहुल गांधी UP की जीत में दूल्हा बने घूम रहे थे ।
उधर भाजपा का all time Low चल रहा था ।
UP में बमुश्किल 10 सीट …….
रालोद जैसी पार्टियां जिनकी गिनती न तीन में है न तेरह में , वो भी 5 सीट जीत के भाजपा से बराबरी का दम भर रही थीं …….
ऐसे माहौल में 2012 का विधान सभा चुनाव आया UP में ।
राहुल बाबा के नेतृत्व में कांग्रेस बम बम थी ।
माहौल ऐसे बनाया जा रहा था मानो अबकी बार कांग्रेस सरकार ।
यूँ लगता था मानो कांग्रेस का वनवास इस बार समाप्त हो ही जाएगा ।
कांग्रेसी नेताओं में इस बात को ले के खींच तान शुरू हो गयी कि कौन बनेगा मुख्य मंत्री ???????

पर जब नतीजा आया तो फुसस्सससस्स ……..
कुल जमा 28सीट पे सिमट के रह गयी कांग्रेस ।
भाजपा की भी दुर्दशा हुई । कुल जमा 47 सीट आयी ।
कहने का मतलब ये की उन दिनों भाजपा की औकात रालोद और कांग्रेस जैसी थी UP में ।
2012 में बसपा को हरा के सपा चुनाव जीती । अखिलेश भैया की साइकिल आसमान में उड़ी जा रही थी । अहीरों ने पूरे UP में बमचक मचा रखा था ।
ऐसे में मोदी जी ने गुजरात में लगातार तीसरी बार चुनाव जीता और कूद पड़े राष्ट्रीय राजनीति में ……. और प्रधान मंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी ……
उस समय , जबकि UP में भाजपा अभी ताजा ताजा अपनी मिट्टी पलीद करा के बैठी थी , राजनीति के पंडितों ने सवाल उछाला …….. हम्ममम्म ……. प्रधान मंत्री बनोगे ???????
कहाँ से लियाओगे सीट ?
जानते हो …….. 272 सीट लगता है परधान मंतरी बनने को …….
कहाँ से लियाओगे हेतना सीट ?

मोदी जी ने जवाब दिया ……. अब लड़ेंगे तो सीट भी आ ही जाएगा ………
अच्छा ??????? आ जाएगा ? अबे ठेले पे बिकता है का ? जो आ जाएगा ???????
अच्छा ई बताओ …….. ऊपी में केतना सीट जीत के PM बनोगे ।
तब IBTL में एक लेख छपा ।
IBTL कुछ right wing टाइप पोर्टल था । उसने कहा कि भाजपा UP में 20 सीट जीतेगी ।
20 सीट सुन के सेक्युलर leftist मीडिया और जनता ने खूब मज़ाक बनाया ……. ये मुह और मसूर की दाल ? Huhhhhh ……. 20 सीट …… सीट मानो पेड़ पे लगती है ……. गए और तोड़ लाये ।
खैर …….. मोदी जी भाजपा के अंदर खुद को PM प्रत्याशी घोषित करने के लिए संघर्षरत थे । उधर देश में आपकी लोकप्रियता का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा था ।
2012 में UP में भाजपा की ये समस्या थी कि इनके पास UP में सिर्फ और सिर्फ बनिया / सुनार वोट बचा था । यहां गक कि मजबूरी में ठाकुर तक छोड़ गए थे ।
2013 में जब मोदी जी PM प्रत्याशी के तौर पे उभरने लगे तो भाजपा में सबसे पहले जो वर्ग लौटा वो ठाकुर थे । जिनके साथ साथ ही ब्राह्मण और भूमिहार भी आ चढ़े । अब समस्त सवर्ण और बनिया व्यापारी भाजपा के साथ था ।
ऐसे में IBTL में फिर एक लेख छापा ……… UP में भाजपा 35 सीट ।
Leftist सेक्युलर मीडिया ने फिर खारिज कर दिया ।
Mid 2013 ……. मोदी जी को भाजपा ने तमाम खींच तान उठा पटक के बाद PM प्रत्याशी घोषित कर सिया । IBTL ने लिखा …….. UP में भाजपा 45 सीट …….. लोगों ने कहा पागल हैं …….
मीडिया अब भी भाजपा को 160 सीट दे रहा था देस भर में ……. और सवाल पूछता था कि समर्थन कहाँ से जुटाओगे ……. मोदी तो अछूत है …… आडवाणी होते तो शायद जुटा भी लेते ।
UP में भाजपा की समस्या ये थी कि इसकी पहचान शहरी और सवर्ण और बनियों की पार्टी के रूप में थी । OBC और दलित वोट नदारद थे ।
ऐसे में अमित शाह जी ने UP की कमान सम्हाली और मृत पड़े संगठन को ज़िंदा करना शुरू किया । भयंकर गुट बाजी थी । बीसियों नेता थे और सब के सब PM और CM material थे । नेता भारी भरकम और औकात इतनी भी नहीं कि अपनी सीट निकाल लें । ऐसे मृतप्राय संगठन में अमित शाह और मोदी जी ने जान फूंकी ।
बड़े नेताओं को धीरे धीरे दरकिनार किया ……. नहा नेतृत्व खड़ा किया ……. माहौल बनने लगा । गरमाने लगा । पर अब IBTL की हिम्मत न हुई कि वो 45 से ऊपर जाए ।
ऐसे में हमारे जैसों ने SM पे लिखना शुरू किया ……… 55
सो मेरे एक मित्र हैं । वो हैदराबाद के एक हिंदी अखबार के उप संपादक हैं ।
बोले …… का पहलवान ? भांग खाये हो का ? 55 ??????
मने राम लहर से भी आगे ……..
मैंने उन्हें जवाब दिया ……. राम लहर क्या थी ??????
यहां सुनामी बह रही है ।
चुनाव सिर पे था । टिकट वितरण की उठापटक के बाद जब तस्वीर साफ हुई तो मैंने एक दिन लिखा ……… क्या इस बार हम गाज़ीपुर भी जीत रहे हैं क्या ???????????
क्योंकि लक्षण मिलने लगे थे । और गाज़ीपुर की सीट पूरी UP में भाजपा के लिए सबसे कठिन सीट है ……. जातीय समीकरण ही ऐसे हैं ।
चुनाव में बमुश्किल 10 दिन थे
अंतिम चरण चल रहा था ।मैंने अपने जिले की वोटिंग से कोई 4 दिन पहले लिखा कि हम गाज़ीपुर जीत रहे हैं …….. जल प्रलय होगी ………
Result आया तो सब बह गया । सुनामी सब बहा ले गयी ।
73 सीट …….. सीटें वाकई पेड़ पे लगती हैं ।
पर उस पेड़ को सीचना सहेजना पड़ता है ।

बहरहाल ……. चुनावी मंच फिर सजा है UP में ।
वही अमित शाह हैं और वही मोदी जी हैं ।
और leftist secular मीडिया की वही जड़ता है ।
आज भी राजनीति के पंडितों को भरोसा नहीं ।
या यूँ कहिये कि भरोसा करना नहीं चाहते ।
हालांकि विधान सभा का चुनाव लोक सभा से अलग होता है ……. मुद्दे अलग होते हैं ……. क्षेत्र छोटे होते हैं , स्थानीय factors होते हैं …….. हार जीत का मार्जिन बहुत कम होता है ……. बहुकोणीय मुकाबला हो तो आकलन मुश्किल हो जाता है ……… पर इसके बावजूद ……. चुनाव के basics नहीं बदलते ।
अब जबकि UP में पहले चरण की voting में सिर्फ दो दिन बचे हैं ………..
सवाल है कितनी सीटें ????????
220 में दाग नहीं है ।
जस जस चुनाव होता जाएगा , आकलन ये होगा कि 220 से कितना ऊपर ।
मने 240 ????????
260 ?????????
या 280 ???????????
या फिर 300 ???????

पर इतना तय है कि पिछले 3 दिन में सपा पिछड़ी है और बसपा ने improve किया है ।
आज भाजपा की लड़ाई बसपा से है ।
कांग्रेस से गठबंधन कर सपा पीछे छूट गयी ।
कांग्रेस इतनी भारी है कि वो सपा को ले डूबेगी ।
लड़ाई बसपा भाजपा में हैं ।
परिदृश्य रोज़ बदल रहा है ।
इंतज़ार कीजिये ।

UP में आंधी चल रही है । सब उड़ा ले जायेगी ।

मैं जब भी UP के आगामी विस चुनाव का विश्लेषण करता हूँ तो कहता हूँ ……. BJP क्लीन स्वीप करेगी । यदि कोई महाठगबंधन न हुआ ……. ऐसा ठगबंधन जिसमे हाथी साइकिल पे चढ़ जाए और उस हाथी पे राहुल बाबा बैठे हों ……. यदि ऐसा हो तभी BJP रुकेगी वरना UP में माया मुलायम का सूपड़ा साफ़ है .
मेरे मित्र पूछते हैं कि आपके इस आशावाद का कारण क्या है ?
दो कारण हैं ।
पहला जातीय समीकरण ।
UP में कोई व्यक्ति किसी पार्टी को भोट नहीं देता ।
जातियों के समूह किसी पार्टी को भोट करते हैं । व्यक्तिगत भोट मायने नहीं रखता । वो नगण्य होता है । चुनाव से पहले ये पता चल जाता है कि कौन सी जाति किस क्षेत्र में किसे वोट कर रही है । 2017 की विशेषता ये है कि भाजपा ने ये जातीय समीकरण साध लिए है ।
सवर्ण और गैर यादव OBC भाजपा खेमे में आ गए हैं । इसके अलावा दलितों में भी गैर चमार जाटव दलित भोट बैंक में भाजपा ने बहुत बड़ी सेंध लगाई है ।
अब बचे यादव और चमार जाटव ……. तो पूर्वी UP की ये दशा है कि 20 से 30 % यादव चमार भी भाजपा को भोट देने का मन बना चुके हैं । भाजपा ने 2014 की तुलना में अपना जातीय जनाधार बढाया है । इसके अलावा Floating भोट का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा POK में surgical Strike और नोटबंदी के बाद भाजपा के पक्ष में आया है । सवाल उठता है कि नोटबंदी से उपजी परिस्थितियाँ और उस से उत्पन्न मंदी कितना असर डालती है । वैसे यदि चंडीगढ़ के हालिया चुनावों का रुझान देखा जाए तो नोटबंदी से भाजपा को लाभ हुआ है और पंजाब की anti incumbency के बावजूद congress का सूपड़ा साफ़ हो गया जबकि केजरीवाल ने बेहद शातिराना चाल चलते हुए चुनाव से withdraw कर congress को walk over दे दिया था जिस से कि भाजपा विरोधी भोट का बँटवारा न हो और सारा भोट congress को मिले ……..
इसके बावजूद कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया चंडीगढ़ में । इस से पता चलता है कि नोटबंदी से भाजपा को फायदा है नुकसान नहीं ।

अब मेरे आशावाद का दूसरा कारण है समाजवादी कुनबे की कलह ।
नोटबंदी के बाद अचानक जादो कुनबे के कलह के समाचार आने बंद हो गए ।
पर कल अकललेस जादो ने फिर एटा में ताल ठोक दिया ।
उन ने अपने खेमे के 70 युवा MLAs से कही ……. टिकट की चिंता मति करो …… जाओ …… अपने अपने क्षेत्र में जाओ और सरकार के कामकाज का परचार परसार करो ……..
ये चचा सिपाल जादो को खुली धमकी है ।
माना जा रहा है कि ये भतीजे की ओर से बगावत का बिगुल है ।
ऐसे कयास लग रहे हैं कि अगर टिकट वितरण में अखिलेश की न चली तो सपा के कम से कम 200 बागी खड़े होंगे और जहां बागी नहीं भी होंगे वहाँ चाचा भतीजा भितरघात कर एक दुसरे को हरवायेंगे ।
इसमें पेंच ये है कि सपा के गैर मुस्लिम वोटर की पहली स्वाभाविक गैरसपा पसंद भाजपा है न कि बसपा ।
इस भितरघात से सपा votebank का एक बड़ा हिस्सा भाजपा में shift हो सकता है ।

इसके अलावा नोटबंदी के बाद से देश में जो माहौल है और सरकारी एजेंसियां जैसे बेरहमी से ताबड़ तोड़ छापे मार कार्यवाही कर रही हैं उस से जादो कुनबे में खलबली है । मोदिया कब घुस आयेगा घर में क्या पता ??????
ऐसे में सपा समर्थक एक बहुत बड़ी पूंजीपति लॉबी neutral हो गयी है । कयास तो यहाँ तक हैं कि अमित शाह का प्रेमपत्र पहुँच चुका है ।
भोजपुरी में कहावत है ……
आन्ही आवै बइठ गंवावे …….
मने जब जोर की आंधी आये तो कुछ सर सामान बटोरने के कोशिश नहीं करनी चाहिए ……. जो उड़ता है उड़ जाने दो ……. कहीं किसी कोने में दुबक के पहले जान बचाओ ….. जान बची रही तो फिर देखेंगे खोजेंगे ……
क्या गया क्या बचा ……
UP में आंधी चल रही है । सब उड़ा ले जायेगी ।