मुलायम के ये लोग ……….

कल चचा सिपाल जादो ने भतीजे अकललेस जादो के पिछवाड़े में खूंटा ठोक दिया है ।

कल जसवंतनगर से साइकिल चुनाव चिन्ह से पर्चा भरने के बाद उन्होंने सरेआम ललकारा कि बेटा अकललेस ये चुनाव तुम जीत लो ( जीत के दिखा दो ) उसके बाद जब 11 मार्च को नतीजे आ जाएंगे तो हम बनाएंगे नयी पार्टी । गौरतलब है कि 11 मार्च को या तो समाजवादी पाल्टी का विजय जलूस निकलेगा या फिर जनाजा ।
विजय जलूस के समय पार्टियां नहीं टूटा करती ।
जाहिर सी बात है कि चचा सिपाल जादो को बोल रहे हैं की ऐ भतीजे …….पहले 11 मार्च को तुमरी G मारेंगे और फिर तुम्हारी उस फटी हुई G में हाथ घुसेड़ के अपने हिस्से की समाजवादी पाल्टी निकाल लेंगे ।

मुलायम और सिपाल ने खुल के बगावत कर दी है ।
कल इटावा में सिविल लाइन्स में , समाजवादी पाल्टी के दफ्तर के ठीक बगल में एक नया दफ्तर खुला ……. उसपे बोर्ड लगा था ” मुलायम के लोग ” । इस दफ्तर का संचालन इटावा के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सुनील यादव कर रहे हैं । सुनील यादव को सिपाल जादो ने जिला अध्यक्ष बनाया था जिसे अकललेस जादो ने हटा दिया ।
इटावा सदर से तीन बार के विधायक रघुराज शाक्य का टिकट भी कलेस जादो ने काट दिया । वो भी अपने समर्थकों के साथ इस ” मुलायम के लोग ” दफ्तर में बैठ रहे हैं ।

आइये अब मैनपुरी चलते हैं ।
मैनपुरी के सपा जिलाध्यक्ष माणिक चंद शाक्य ने भी अपने ( सिपाल जादो के ) 2000 समर्थकों के साथ सपा से इस्तीफा दे के मुलायम के लोग join कर ली है । इन 2000 समर्थकों में 3 जिला पंचायत सदस्य , 40 ग्राम प्रधान , 60 पूर्व प्रधान और कई block प्रमुख हैं ।

इसी तरह कल मैनपुरी में अमित जानी ने शिवपाल यादव यूथ ब्रिगेड का गठन कर दिया ।
अनिल वर्मा ने शिवपाल युवजन सभा का गठन किया ।
Ground report ये है कि इटावा , मैनपुरी , कन्नौज , एटा इत्यादि जिलों में मुलायम शिवपाल को व्यापक जनसमर्थन है । 2012 में इन जिलों में सपा ने 69 में से 55 सीटें जीत ली थीं । खबर है कि इन 67 सीटों पे मुलायम सिपाल ब्रिगेड ने समाजवादी पार्टी – कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराने के लिए कमर कस ली है और भितरघात नहीं बल्कि खुली बगावत कर रहे हैं ।
बहुत संभव है कि ये ” मुलायम के लोग ” के दफ्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में खुल जाएंगे । बताया जा रहा है कि मुलायम के ये लोग कांग्रेस को दी गयी 105 सीटों से निर्दल चुनाव लड़ेंगे और शेष 300 सीटों पे समाजवादी पाल्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ खुली बगावत कर उनके खिला प्रचार करेंगे । इसके अलावा बहुत से ” मुलायम के लोग ” उन 300 सीटों से बागी उम्मीदवार के तौर पे चुनाव भी लड़ेंगे ।

” मुलायम के लोगों ” ने धार लिया है कि इस चुनाव में अखिलेश को नेस्तनाबूद कर देना है । इस दिशा में पहला हमला सपा – Cong गठबंधन पे हमला है । इस खुली बगावत का सीधा सीधा फायदा भाजपा को होने जा रहा है ।
इसके अलावा मुस्लिम भोटर की बेचैनी भी बढ़ गयी है । सपा – cong गठबंधन पे लटकी तलवार और मुलायम सिपाल की खुली बगावत के बाद मुसलमान एक बार फिर ये सोचने को मजबूर हुआ है कि कहाँ जाए ?

बसपा में ? मुस्लिम भोट का बिखराव भी तय है ।
कांग्रेस तो कहीं की न रही । समझौते में 300 सीट अखिलेश ले गए और बाकी 103 मुलायम के ये लोग ……….

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

पूर्वांचल में बनारस का पडोसी जिला है चंदौली ।
इसे पूरब का Rice bowl कहते हैं । इस से सटे 4 – 5 जिले जैसे कि वाराणसी , गाज़ीपुर , जौनपुर , आज़मगढ़ , मिर्ज़ापुर , भदोही और उधर बिहार के कुछ जिले , इनमे दुनिया का सबसे बेहतरीन धान उगाया जाता है ।
आम तौर पे शहरी लोग चावल की सिर्फ एक variety जानते हैं । बासमती ……. जो अपने स्वाद और लंबे दाने के लिए पसंद किया जाता है और 70 से 150 रु किलो तक में बिकता है । इसके महंगे बिकने का एक कारण तो ये होता है कि इसकी उपज अन्य vatieties से कम होती है ।
पर पूर्वांचल के इन जिलों में कुछ स्थानीय varieties होती हैं , जिनकी उपज भी भरपूर है , मने bumper crop होती है , और स्वाद गुण में बासमती के बाप हैं । स्थानीय बाजार में इन किस्मों की कीमत 20 से 25 रु किलो तक होती है । इनमे ख़ास कर सोनम , मंसूरी ( इसकी 3 varieties हैं , नाटी , मंझली और साम्भा मंसूरी ) , धनरेखा इत्यादि । इसके अलावा एक किस्म है जीरा 32 …….. इसका दाना बहुत छोटा और महीन होता है , एकदम जीरे जैसा । ये है असल में बासमती का बाप । स्थानीय बाजार में 45 रु किलो बिकता है । ऐसी 20 अन्य varieties और हैं जो यहाँ होती हैं ……… और bumper होती हैं ।
ऐसा ही एक rice bowl राजस्थान में भी है । हाड़ौती संभाग में कोटा , बूंदी जिले में । वहाँ भी दुनिया का बेहतरीन बासमती होता है । बताया जाता है कि कोटा बूंदी जिले में 100 से ज़्यादा अत्याधुनिक विशाल Rice Mills और shellers हैं जो इस धान को process कर market में उतरते हैं । आज कोटा बूंदी का बासमती पूरी दुनिया में अपनी धाक मचा रहा है । समूचे Europe , अमेरिका और Middle east में इसकी जबरदस्त मांग है ।

पर स्वाद और उपज के मामले में चंदौली belt का धान कोटा बूंदी से 21 नहीं बल्कि 25 है ।
मने चंदौली की मिट्टी पानी और जलवायु में उपजा धान कोटा बूंदी से लाख दर्जे बेहतर है ………

अब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से एक सवाल ……… अखिलेश जी , चंदौली और इसके आस पास के जिलों में कितनी rice mills हैं ?
आपके 5 साल के शासन काल में चंदौली के इर्द गिर्द कितनी नयी rice mills लगी ?
आपकी सरकार ने चंदौली belt की इन बेहतरीन और इतनी सस्ती मने 20 – 22 रु किलो बिकने वाली varieties को देश भर में promote कर लोकप्रिय बनाने के लिए क्या काम किया ?

वाराणसी मंडल और इसके लगते जिले , हम यहां दुनिया का सबसे स्वादिष्ट दूध पैदा करते हैं …….. जी हां …….. बनारस की मिठाई का स्वाद यहां के दूध और मावे की मिठास और स्वाद से है …….. गाँव के dairy farmer की समस्या है कि उसका सुबह का दूध तो बिक जाता है पर शाम का नहीं बिकता …….. ऊपर से दूध उत्पादन तो अहीरों का मुख्य पेशा है ?
अखिलेश जी , आप बताएँगे कि आपकी सरकार ने पिछले 5 साल में कितने milk processing प्लांट लगाए पूर्वांचल में ? कितने milk collection centers खोले ? कितने chilling plants लगाए ?

अखिलेश जी , UP के यादव तो आपके बंधुआ भोटर हैं न ? Dairy farming बढ़ेगी तो सीधे सीधे उन्हें फायदा होगा ……. आपने पिछले 5 साल में dairy उद्योग के लिए क्या किया ?
बीकानेर जैसा सूखा पानी को तरसता जिला पूरे देश में दूध supply कर सकता है तो पूर्वांचल तो स्वर्ग है हुज़ूर dairy farming के लिए ……. कितनी ग्रोथ हुई पिछले 5 साल में milk production में ?
कितने नए Dairy farms खुले ? कितने farmers ने अपने farms upgrade किये ? आपने कितना ऋण उपलब्ध कराया डेरी फार्मिंग के लिए ?
पूर्वांचल में कितनी sugar mills नयी लगीं ?
जो बंद पड़ी थीं उनमे से कितनी चालू हुई ?
कितने नए cold स्टोर बनाये आपने ?
कितनी नहरें खुदी ?
कौन सी नयी सिचाई परियोजना ले के आये आप ?
कितने नए thermal power projects आपने लगाए प्रदेश में , या मंजूरी दी ……..
नितिन गडकरी के NH छोड़ पूरे पूर्वांचल की कोई एक सड़क बता दीजिए , जो आपने बनवाना या चौड़ा करना तो दूर , जिसका आपने patch work ही करा दिया हो ?
कोई एक सड़क ? कोई एक state हाईवे ?

कोई एक नया उद्योग जो लगा हो पूर्वांचल के इन 40 जिलों में ???????
मिर्ज़ापुर भदोही में दुनिया का सबसे बेहतरीन कालीन बनता है घर घर ……… जिसका सत्यानाश कर मारा कैलाश सत्यार्थी ने ……… उसके revival के लिए क्या किया आपने ?
वाराणसी और मऊ के साडी बुनकर ( जिनमे अधिकाँश मुसलमान है ) उनके लिए क्या किया ?

कोई एक स्कूल कॉलेज बताइये जो आपकी सरकार ने बनवाया हो पिछले 5 साल में ?

किसका विकास किये हो भैया ?
कहाँ किये हो ?

गायत्री प्रजापति रोज़ाना 4 करोड़ रु देता था तुमरी मने प्रतीक गुप्ता जादो की मम्मी को …….. सिर्फ साधना गुप्ता जादो और उनके लौंडे का विकास हुआ है पिछले 5 साल में ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

समाजवादी पाल्टी अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रही है ।
करो या मरो …….. चुनाव सिर पे है ।
खबर है कि 1500 करोड़ से ऊपर की चुनाव सामग्री छप के तैयार है । इसमें पार्टी के झंडे banor पोस्टर Tshirt बनियान बिल्ले स्टिकर्स flex boards और hoardings और न जाने क्या क्या है ।
UP जैसे विशाल प्रदेश में , जहां 20 करोड़ की जनसंख्या और 11 करोड़ से ज़्यादा भोटर है ……. जहां 400 से ज़्यादा सीट पे प्रत्याशी उतारे जाने हैं ……. वहाँ पार्टी के दो फाड़ होने का ख़तरा है ।
ऊपर से नेताओं को यही नहीं पता कि उन्हें किस चुनाव चिन्ह पे चुनाव लड़ना है । समस्या ये है की भारी मात्रा में जो चुनाव प्रचार सामग्री छप के तैयार है वो सब साइकिल चुनाव चिन्ह से छपी है । अब इस साइकिल पे ही ख़तरा मंडरा रहा है ।
कल को अगर चुनाव आयोग ने ये साइकिल ही फ्रीज़ कर दी तो दोनों गुटों अर्थात अखिलेश और मुलायम सिपाल दोनों को नए सिंबल पे चुनाव लड़ना पडेगा । नयी प्रचार सामग्री कोई रातों रात तो छप नहीं जायेगी ।
जैसे पति पत्नी बच्चों की वजह से तलाक़ नहीं ले पाते और मजबूरन साथ रहते हैं उसी तरह साइकिल के मोह में मुलायम अकलेस अलग नहीं हो पा रहे । इसके अलावा इक्लेस जादो ने समाजवादी पाल्टी के दोनों बैंक खाते भी seize करा दिए …… मने कंगाली में आटा गीला ।

पकिस्तान भारत के बीच शान्ति रहे इसमें एक बड़ी समस्या ये आती है कि पाकिस्तान में पाक सरकार के अलावा कई Non State actors हैं । Army है , ISI है , उसके बाद विभिन्न जिहादी गुट हैं । आखिर भारत सरकार पाकिस्तान में शान्ति वार्ता करे तो किस से ?
यही हाल समाजवादी पाल्टी का है । अखिलेश मुलायम का बस चले तो दो मिनट में झगड़ा सुलटा लें ।
पर उधर रामगोपाल और इधर सिपाल जादो और अमर सींग …… ये तीन शान्ति और समझौता वार्ता में रोड़ा बने बैठे हैं । इक्लेस जादो और मुलायम जादो को अगर शान्ति स्थापना करनी है तो इन दोनों को रामगोपाल , सिपाल और अमर सींग इन तीनो को GPL मार के पार्टी से 60 साल के लिए निष्कासित कर देना चाहिए । इसके अलावा पार्टी में जितने भाई भतीजे भांजे बहू बेटियां बहन भेनजी भांजी भतीजी बुआ मौसी नानी समधी साले सालियाँ साढ़ू सरहज हैं उन सबकी G पे भी लात मार के party से बाहर कर देना चाहिए । इसके अलावा परतीक गुप्ता जादो और उसकी बीबी अपरना गुप्ता जादो को भी घर और पाल्टी दोनों से G पे लात मार के भगा देना चाहिए । भैंचो पोलिटिकल पाल्टी है कि तबेला ???????

पर काश …… GPL मार के भगा देना इतना ही आसान रहा होता ………. अमर सिंघवा एक नंबर का दलाल नहीं दल्ला है । न जाने किस किस के संग किस किस की रिकॉडिंग रखा होगा …….. और न जाने किस किस मुद्रा में रखा होगा ……. कम्बकब्त सोसल मीडिया का ज़माना है । एक घंटे में 45 लाख शेयर और views हो जाते हैं वीडियो clip के ।
अमर सिंह से पार पाना मुलायम इक्लेस जादो के बस का नहीं ।

समाजवादी पाल्टी का किस्सा खत्म समझ लो ।
बिना सिंबल , बिना प्रचार सामग्री , बिना funds , बिना नेता , हर सीट पे बागी उम्मीदवार , free for all gang bang ……. कब कौन किसकी कहाँ कैसे मार ले क्या पता ?ऊपर से भाजपा और मोदी जैसा सशक्त प्रतिद्वंद्वी ।

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

साइकिल गयी कबाड़े में हाथी चढ़ गया भाड़े में अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

बॉलीवुड की हिंदी फिल्म का हीरो सर्वगुण संपन्न होता है ।
भलामानस , अव्वल दर्जे का चरित्रवान …… मने फिल्म की हेरोइन और vamp उस से चिपटी रहती हैं , उसे खींच खींच के अपने बेडरूम में ले जाती है पर वो पट्ठा लंगोट का इतना पक्का …… हनुमान जी का ऐसा भगत कि vamp और हेरोइन दोनों को अपनी बहन मानता है ।
हीरो के दो चार यार दोस्त चेले चमाट होते हैं जो हमेशा उसके इर्द गिर्द मंडराते उसकी चम्पी किया करते हैं ।
हीरो एक नंबर का चूतिया , जब लाश से टकराता है तो सीने में घुसे चाकू को पकड़ लेता है ……. और ठीक उसी मौके पे या तो पुलिस आ जाती है या फिर कोई और …… फिर ये पुक्का फार के रोता है कि नहीईईईईईई …….. मैंने खून नहीं किया ……..
फिर जब ये जेल चला जाता है तो उसका वो वफादार दोस्त बार बार एक ही फ़िल्मी डायलॉग बोलता है ……… मेरा दिल कहता है , मेरा दोस्त खूनी नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है …….

मोदी haters को अब भी भरोसा नहीं कि नामाजवादी कुनबे में वाकई जंग छिड़ी है ।
वो कहते हैं ……. नहीं ऐसा नहीं हो सकता …… मेरा दिल कहता है की ऐसा नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है । नामाजवादी कुनबे में झगड़ा नहीं हो सकता ।
17 जनवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
बाप बेटे चचा भतीजा भाई भाई कुत्ते की तरह लड़ रहे हैं ……. एक दुसरे को नोच खसोट रहे ।
मोदी haters को फिर भी लगता है कि कोई बुरा सपना है ……. भ्रम है ……. सुबह जागेंगे तो सब ठीक होगा …….. उधर चुनाव आयोग कंफूज है ।
रामगोपाल 6 पेटी कागच जिनकी संख्या कुल डेढ़ लाख है धर आये चुनाव आयोग में ।
अमर सिंघवा बोल दिया सब फ़र्ज़ी है करो जांच ……..
चुनाव आयोग बोलता है इतना सब कागच जांचने में तो 6 महिन्ना लगेगा । उधर 10 दिन बाद अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
अपने दुआर में कुकुर झौं झौं करने वाले कुत्तों को मालिक चार डंडा मार के दुत्कार देता है । बहुत संभव है कि चुनाव आयोग दोनों बाप बेटा को GPL मार के भगा देगा और चुनाव चिन्ह साइकिल को फ्रीज़ कर देगा मन
अखिलेश कांग्रेस से चुनावी pact के मूड में हैं ।
ऐसे में तय है कि अखिलेश गुट की कम से कम 100 सीट cong को जायेगी मने 100 नामाजवादियों का टिकट कट के कांग्रेसियों को मिलेगा ।
ऐसे में वो 100 क्या चुप बैठेंगे ?
दूसरी तरफ सिपाल मुलायम गुट भी कम से कम 250 से 300 प्रत्याशी मैदान में उतारेगा । UP की हर सीट पे सपा से टिकट मांगते 4 – 6 गंभीर प्रत्याशी हैं । हर सीट पे दो चार करोड़पति टिकट मांग रहे हैं । सिपाल का अब एकमात्र लक्ष्य है ……… अखिलेश को हराना ……..
सिपाल मुलायम अगर किसी को टिकट दे देंगे तो वो 10 – 20 हज़ार भोट तो ले ही मरेगा ।

एक तर्क दिया जा रहा है कि सपा अगर बँटी तो मुसलमान enblock बसपा में shift कर जाएगा ।
काश चुनावी राजनीति में सब कुछ इतना ही सीधा सपाट होता ।
हर मुस्लिम बहुल सीट पे 2 – 3 या 4 प्रत्याशी होंगे । सब वोट काटेंगे ।
2014 के लोस चुनाव में मोदी की सुनामी आती हुई साफ़ दिख रही थी इसके बावजूद मुसलमान एकतरफा enblock voting कर उसे रोक न पाए और बह गए ।

आपको दीखे चाहे न दिखे …….. UP में मोदी की सुनामी आ रही है ……. सब कुछ बहा के ले जाएगी ……. अईकील सईकील आथी हाथी सब बह जाएगा ……..
कोई आजपा भाजपा नहीं ……. कोई कमल नहीं …….. भोट पडेगा मोदी को ……. भोट पडेगा विकास के एजेंडे पे ………. भोट पडेगा भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए …….. भोट पडेगा प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये ……… भोट पडेगा 24 घंटे बिजली के लिए ……. भोट पडेगा शानदार सड़कों के लिए …….. भोट पडेगा गुंडे बदमाशों के खिलाफ ……… भोट पडेगा जातिवाद के खिलाफ ……. भोट पडेगा हिंदुत्व के लिए …….. भोट पडेगा कटुओं की औकात बताने के लिए ।

साइकिल गयी कबाड़े में
हाथी चढ़ गया भाड़े में
अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

वंस अपान ए टाइम , आंध्र परदेस के राजभवन में एक बड़े भयंकर किसिम के सीनियर कांग्रेसी नेता हुआ करते थे ……. लाट साब गवर्नर श्री नारायण दत्त तिवारी ।
उनकी रग रग में कांग्रेसी खून दौड़ता था । इस से पहले ऊ जिनगी भर ऊपी की राजनीती किये , कांग्रेस के जमाने में कई बार ऊपी के मुख्यमंत्री रहे । फिर जब ऊपी दो भाग में बंट गया और पहाड़ी इलाके काट के उत्तराखंड बन गया तो आप UK के मुख्यमंत्री भये । फिर जब एकदम्मे बुढ़ा गए और किसी काम के न रहे तो सोनिया गांधी ने इनको retirement पिलान के तहत आंध्र प्रदेश का गवर्नर बना के भेज दिया ।
इधर प्रतिभा पाटिल अपनी वार्षिक छुट्टियां मनाने आंध्र प्रदेश जाने वाली थीं ।
Protocol के तहत राष्ट्रपति की अगवानी लाट साब गवर्नर बहादुर किया करते हैं ।
तभी एक स्थानीय news चैनल ने एक वीडियो दिखाना शुरू किया जिसमें 86 साल के बुज़ुर्ग लाट साब गवर्नर बहादुर राज भवन में अपने शयन कक्ष में 35 साल की एक सुन्दर सुशील राजनीतिक कार्यों में दक्ष महिला को सहला रहे हैं ……… अब जो भैया मची जो बमचक ……. राजभवन के सामने महिला संगठन करें हाय हाय मुर्दा बाद …….. नतीजा जे हुआ कि लाट साब गवर्नर बहादुर को रातों रात इस्तीफा दे के बोरिया बिस्तर बाँध के देहरादून जाना पड़ा ……..
अब चूँकि इस type के MMS और भिडियो clips की मार्किट में भोत demand रहती है । इस लिए उस क्लिप की खोजायी शुरू भई ……. इसके अलावा बड़े बड़े धुरंधर वैज्ञानिकों को जांच और शोध का एक एक विषय ये मिल गया कि ई ससुरे कांग्रेसी साले सब ऐसी कौन सी भस्म बूटी खाते हैं कि 86 साल में भी टाइट रहते हैं और ई सुसरे संघी सब भरी जवानी में ही संन्यास और वैराग्य को प्राप्त हुए जाते है ………

खैर जांच कमीसन में ई निष्कर्ष निकाला कि कांग्रेसी की डंडी काम न भी करे तो भी सुहराने अंगुरियाने से बाज नहीं आता ……..

तो भैया हुआ यूँ कि पिछले हफ्ते जब मोलायम जादो दिल्ली पहुंचे तो मेरे जैसे किसी लुच्चे लफंगे ने टोक दिया …… चचा भोत हुआ ……. अब रहन दियो …… आपकी उमर भयी …… अब लड़कन बच्चन कू खेलन खान दियो …….

चचा बोले , अभी मन नहीं भरो है …… अभी कुछ दिन समाजवादी पाल्टी को सुहरा अंगुरिया लेन दियो ।
बेचारी समाजवादी पाल्टी …….. 25 बरस की हो गयी ।
एक तरफ मोलायम सहलाने अंगुरियाने से बाज नहीं आ रहे दूसरी तरफ सिपाल रामगोपाल सिकंदरे आज़म कैप्सूल खाय के ताने खड़े इधर अखिलेश कह रहे कि हमारी तो ब्याहता है समाजवादी पाल्टी …… सिर्फ हमारी ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ ……

ऐ अकलेस जादो , तुम ये जान लो कि वंस अपान ए टाइम इस परदेस में , जब कि ये पुत्तर परदेस नहीं बल्कि उत्तर परदेस होता था , चरण सिंह नाम के एक नेता हुआ करते थे ।
ई जो तुम्हारे बाप हैं न , मुलायम सिंग , किसी जमाने में ये उनके अँडुआ मने आंड मने testicles हुआ करते थे ……चौ चरण सिंह उत्तर प्रदेश के एक छत्र नेता हुए …… सचमुच के धरती पुत्र और किसान नेता …….. मने इतने बड़े नेता थे कि 1984 में जब कि इंदिरा गांधी की हत्या के उपरान्त उपजी सहानुभूति लहर में जब कि सब कुछ उड़ गया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी हार गए थे , तब भी अकेले चौ चरण सिंह ऐसे थे जो जीते थे । मने इतने बड़े नेता थे चौधरी साहब ……. और आज उसी चौधरी साहब का बेटा ……. उसने अपने मरहूम बाप की पार्टी और उनकी राजनैतिक विरासत का ये हाल बना दिया कि आज वो विधायक की एक सीट को तरस रहा है ।

1984 में जो राजीव गांधी 410 सीट के प्रचंड बहुमत से जीते थे उनका होनहार बिटवा आज उसी पार्टी को 44 सीट तक नीचे ले आया है और अब आगे 4 सीट पे ले जाने की तैयारी में है ।

आगे सुनो ……. एक और हुए हैं ……. भारतीय राजनीति के पितामह कहाये …… पितामह समझते हो ?
दादा । हरियाणा के चौधरी देवी लाल जी …… समूचा हरियाणा उन्हें ताऊ देवी लाल कहता था प्यार से ……… उसी ताऊ देवी लाल के बेटे और पोते आज जेल खट रहे हैं और पार्टी लौड़े के दक्खिन चली गयी ।

इसी हरियाणा के एक और बहुत बड़ी राजनैतिक हस्ती हुए चौधरी भजन लाल । एक ज़माना था कि उनकी एक आवाज़ पे पूरा हरियाणा खड़ा हो जाता था । उनके मरने के बाद उनके दोनों लौंडे भी बाप की राजनैतिक विरासत सम्हाल न पाए और आज कौड़ी के तीन हो के घूम रहे हैं । एक अदद सीट को मोहताज हैं ।

आगे सुनो …… एक हुए बलिया के बागी ……. बलिया के शेर ……. बाऊ चनसेखर सिंह …….. ये वो अज़ीम शख्सियत थे कि जिंदगी में कोई पद ही नहीं लिए …… कहते थे बनूंगा तो सिर्फ PM और एक दिन PM बन के ही दिखाया ……. आज उनके दोनों बेटे तुम्हारा पेल्हर तौलते हैं एक अदद विधायकी सांसदी के लिए ।

उधर मुम्बई में देख लो …… सारी जिंदगी अकेले बाला साहिब दहाड़ते रहे शेर की माफ़िक़ …….. उसी शेर का बेटा आज बकरी की माफ़िक़ मिमिया रहा है …….. और ये तमाम लोग तो वो हैं जिन्हें अपने बाप की विरासत लेने के लिए उसे अपदस्थ बेइज़्ज़त नहीं करना पड़ा । ये सब अपने अपने बाप के स्वाभाविक वारिस थे और उनके आशीर्वाद से गद्दी पे बैठे पर सम्हाल न पाए , और आज कौड़ी के तीन हो घूम रहे हैं ।

इसलिए , हे अखिलेश , तुम भी ये मत भूलो कि आज तुम और राम गोपाल बेशक Hydrocele बने, पानी से फूले हुए आंड मने अंडकोष की माफ़िक़ खरबूजे जैसे बड़े हो गए हो , पर ये मत भूलो कि आंड चाहे जितना बड़ा हो जाए रहता लांड के नीचे ही है …… हाँ ये अलग बात है कि कुछ बिसेस आपातकालीन परिस्थिति में आंड सटक के गले में आ जाते हैं …… पर अंततः तो उसे नीचे आना ही होता है …….. इसलिए हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ …… क्योंकि तुम्हारे पास ऐसा कुछ नहीं है जो बाप ने पहले न देखा हो ……. पर बेटा , भगवान् न करे , कि अगर बाप ने खोल के दिखा दिया न किसी दिन …… तो बेहोश हो जाओगे ।

नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ? असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..

वंस अपान ए टाइम , नवाबों के शहर नखलऊ में एक डाग्दर साहब हुआ करते थे ।
Jain साहब । वो नखलऊ के जाने माने गुप्त रोग बिसेसज्ञ मने sexologist हुआ करते थे ।
फिर जब वो नहीं रहे तो उनके लौंडे उनकी जगह sexologist बन गए ।
मने पहले नवाबों के सहर नखलऊ में एक Dr जैन sexologist होते थे , अब दो हो गए ।
अब नखलऊ वालों को बड़ी मुसीबत । किसके पास जाएँ ?
दोनों एक से बढ़ के एक ……. दोनों अपने आपको दावा करें कि असली बड़े वाले डाक् साब वही हैं लिहाजा नक्कालों से सावधान रहे ।

मेरे एक मित्र हैं ……. उन ने इन sexologist डाक्टरों और हकीमों पे बड़ी रिसर्च करी है । वो बताते हैं कि ऐसे झोला छाप हकीम आपको ज़्यादातर मुस्लिम बहुल आबादी वाले शहरों में , मुसलमाँ बस्तियों में ज़्यादा मिलेंगे । इक्का दुक्का sexologist बेशक हिन्दू मिल जाएँ पर बकिया अधिकाँश सब मुसलमाँ मिलेंगे ………. आखिर क्यों ?
मने नखलऊ , भोपाल , पुरानी दिल्ली , राम पुर , बरेली , देवबंद , मेरठ , मुज़फ्फर नगर , सहारनपुर , अमरोहा , बिजनोर ऐसे मुस्लिम बहुल शहरों में मिलेंगे । चंडीगढ़ , अमृतसर , जालंधर , रोहतक , करनाल , सोनीपत में नहीं मिलेंगे । गोरखपुर बनारस में नहीं मिलेंगे । बनारस में अगर कोई छूटा छटका हुआ भी तो मदनपुरा दाल मंडी और बेनियाबाग कज़्ज़ाकपुरा में ही मिलेगा , चौक मैदागिन , गोदौलिया पे नहीं मिलेगा ।
100 में से 99 sexologist मुसलमाँ मिलेंगे ।
100 के 100 झोला छाप फ़र्ज़ी नीम हकीम मिलेंगे ।

आखिर मुसलमानों के बीच ही क्यों प्रचलित है ये गुप्त रोग विशेषज्ञों की जमात ।
इसके मूल में कारण है ये 4 बीबियाँ रखने का रिवाज़ ।
आम तौर पे मियाँ जी लोग की समस्या ये हो जाती है की मियाँ की पहली दूसरी बीबी तो बुढ़िया होती है …….. पोपली पिलपिली …….. पर तीसरी चौथी आ जाती हैं एकदम जवान । अब मियाँ जी स्वयं तो हो गए 45 – 50 या 55 के और बीबी खरीद लाये हैदराबाद से 16 या 18 साल की …… अब मियाँ परेशान ……. अबे 55 साल का अधेड़ 18 साल की लौंडिया को क्या ख़ाक सम्हालेगा …….. तो उसको अपनी मरदाना कमजोरी का अहसास होता है …….. और फिर वो दौड़ता है इन sexologists की तरफ …….. और वो इन्हें सोने चांदी और हीरे की भस्म खिला के वापस जवान बना देने का दावा कर चूतिया बनाते हैं ।
सबसे मजेदार तथ्य ये है कि ये मुस्लिम समाज में sexologist की परंपरा कोई नयी नहीं है बल्कि ठीक उतनी ही पुरानी है जितना इस्लाम । क्योंकि हुज़ूर की जवानी तो बीत गयी अपने से उम्र में 25 साल बड़ी महिला के साथ । फिर जब वो पूरी हुई तो हुज़ूर को पहली बार जवान औरत नसीब हुई । उसके बाद जस जस हुज़ूर की उम्र बढ़ी उनकी बीबियों की उम्र घटती चली गयी और एक समय वो आया कि जब हुज़ूर कब्र में पैर लटकाये थे तो उनकी पत्नी बमुश्किल 20 साल की थीं ।
ऐसे में ये मरदाना कमजोरी की समस्या तो तब भी रही होगी ……..
बहरहाल ……. आज मैंने एक खबर में पढ़ा कि अकलेस और मुलायम दोनों ये कह रहे हैं कि नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ?
असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..
असली बड़े वाले जादो जी …….. हर मंगलवार सैफई में ……..
असली छोटे वाले जादो जी ……. हर सोमवार नखलऊ में …….
हमारी कोई ब्रांच नहीं है ……..

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

चुनाव आयोग ने ऊपी का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है ।
पहला वोट 11 फरवरी को पडेगा ।
इधर चुनाव आयोग dates declare कर रहा था उधर मुलायम अपने बेटे कलेस को समझा रहे थे कि बेटा मान जाओ नहीं तो साइकिल से उतर के पैदल हो जाना पड़ेगा ।
इधर कुछ लोगों ने दोनों बाप बेटा को समझा दिया है कि भैया ……. जादो जी लोग ……. दो नाव या दो घोड़े की सवारी करने वाले सवार की गाँड फट के flower हो जाया करती है ।
तुम दोनों तो अपने अपने रास्ते चले जाओगे पर हम मने cadre कार्यकर्ता और भोटर ……. हमारा क्या होगा । अबे तुम दोनों के चक्कर में फटेगी तो हमारी ।
उधर आजमखान ने समझाया बतावें कि अगर सपा बँटी और कमजोर हुई तो मुसलमान भोटर तुमको लात मार भेनजी की गोदी में जा बैठेगा ।
मुसलमान 2014 का खार खाये बैठा है । लोस चुनाव में मोदी ने ऐसी मारी बिना तेल के कि अब तक सहला रिये हैं भाई जान । आपको याद होगा कि 2014 में एक भी मुसलमान सांसद UP से जीत के नहीं गया । मुसलमान जानता है कि बँटा तो कटा ………
दोफाड़ सपा मने बसपा को फायदा । इसीलिए मुल्लायम आखिरी कोशिश कर रहे हैं और समझ अखिलेश भी रहे हैं ।
और इस खतरे को समझ भाजपा भी रही है ।
भाजपा शुरू से ही मुलायम और उनकी सपा को मुसलमानों के खिलाफ एक safety valve के रूप में इस्तेमाल करती आई है । मुलायम और मुसलमान का रिश्ता बड़ी प्यार मुहब्बत का रहा है । दोनों 69 में रहे । मुलायम इनको lollypop देते रहे चुसाते रहे । मुसलमान समझ ही न पाए आज तक कि lollypop चूस के आज तक कोई मोटा न हुआ । कड़वा सच है कि मुलायम ने कभी मुसलामानों को बढ़ने न दिया ……. तरक्की की सीढ़ी चढ़ने न दिया ……… हमेशा appeasement का lollypop चुभलाते रहे ।
इधर मुलायम कलेस दोनों जानते हैं कि वो तो हार ही रहे हैं पर ऐसा न हो कि भैंसवती जीत जाए । यही सोच अहीर भोटर की भी है । BMW न आये बेशक भाजपा आ जाए ।

खबर है कि परदे के पीछे सुलह के प्रयास अमित शाह कर रहे हैं । दो फाड़ सपा की बजाय एक कमजोर सपा भाजपा को ज़्यादा मुफीद है ।

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

Beware of the old Fox ……..

नमाजवादी कुनबे में जो घमासान मचा है उसपे मैं पिछले 3 दिन में काफी कुछ लिख चुका हूँ ।
जैसा कि मैंने लिखा था कि इतिहास अपने को दोहरा सकता है ।
जैसे 1969 में इंदिरा गांधी को जब कांग्रेस से निकाल दिया गया तो समूची कांग्रेस मय भोटर उनके साथ चली गयी ।
इंडीकेट ही असली कांग्रेस बन गयी । कामराज और निजलिंगप्पा का सिंडिकेट झंडू कौड़ी के तीन हो के रह गए ।
आज नमाजवादी पार्टी में जो खुली बगावत हुई और रामगोपाल वर्मा और कलेस जादो ने जिस तरह एक असंवैधानिक अवैध अधिवेशन बुला के पार्टी पे अवैध कब्जा कर लिया …….. और सत्ता की चाशनी पे मंडराने वाली मक्खियों की तरह सब विधायक अखिलेश के साथ जा खड़े हुए उस से बहुत ज़्यादा प्रभावित होने की ज़रूरत नहीं ।
क्योंकि अखिलेश इंदिरा गांधी नहीं हैं और मुलायम कामराज नहीं हैं और UP में समाजवादी पार्टी 60 के दशक की कांग्रेस नहीं है ।
60 के दशक की कांग्रेस उस जमाने की कांग्रेस थी जब विपक्ष नाम की कोई चीज़ नहीं थी । पूरे देश पे एक छत्र राज था कांग्रेस का । कांग्रेस के टिकट पे कुत्ता भी खड़ा हो तो जीत जाता था । कांग्रेस के लिए राजनीति खाली मैदान थी ।
आज UP में राजनीति के 4 ध्रुव हैं । भाजपा उफान पे है । सपा को बसपा और भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है । इस त्रिकोणीय संघर्ष में सपा अगर पहले नंबर पे आ सकती है तो तीसरे पे भी खिसक सकती है । सिर्फ एक % का swing हार को जीत में बदल सकता है या फिर सूपड़ा साफ कर सकता है ।
ऐसे में ऐसी खुली बगावत वो भी मुलायम सिंह से ?
मुलायम कामराज नहीं हैं । मुलायम की यूपी के अहीरों में कितनी पैठ और कितनी पकड़ है इसका अंदाज़ा शायद आपको न हो ।
अखिलेश और रामगोपाल को चाहिए कि वो इस बूढ़ी लोमड़ी से सतर्क रहे ।
Beware of the old Fox …….. हो सकता है कि मुलायम बेटे के सामने पसीज जाएँ और झुक जाएँ । पर अगर ……. खुदा न खास्ता …… मुलायम के अहम् को ठेस लगी ……. और उन ने अगर कमर कस ली …….. तो अहिरानी आज भी उनके नाम पे खड़ी हो जायेगी ।
यदि सचमुच मुलायम झोली पसार के अहिरानी में खड़े हो गए ……. और अपने बुढापे का वास्ता दे के एक इमोशनल सी स्पीच ……… सिर्फ एक स्पीच पूरा चुनाव पलट देगी ( सपा के लिए ) और अखिलेश और राम गोपाल जैसों की खटिया खड़ी कर देगी …….. अखिलेश और राम गोपाल की पार्टी की जमानत नहीं बचेगी ।
अब देखना ये है कि मुलायम और शिवपाल कितना fight back करते हैं ।
5 Jan को जो अधिवेशन बुलाया है देखना होगा कि उसमें कौन कौन आता है ।
अगर ये मान भी लिया जाए कि शिवपाल की लिस्ट के सभी 403 प्रत्याशी भी अगर अखिलेश खेमे में चले गए तो भी 150 से ज़्यादा के टिकट कटेंगे । बाकी बची 250 सीटों पे नए प्रत्याशी खोजना शिवपाल के लिए एक दिन का काम है ।
सपा के कुल 3 bank खाते हैं । एक दिल्ली में जिसके signatory राम गोपाल है पर उसमे funds नाम मात्र के हैं । बाकी दो खाते सैफई और लखनऊ में हैं । इसके signatory मुलायम हैं ।
अगले कुछ दिनों में party symbol के लिए लड़ाई होगी । बहुत संभव है कि Cycle मुलायम शिपाल के पास रह जाए और अखिलेश नए symbol पे चुनाव लड़ें ।
ऐसी स्थिति में क्या शिवपाल के वो 400 प्रत्याशी हर सीट पे क्या 5000 वोट भी नहीं काटेंगे ?
चतुष्कोणीय लड़ाई में जबकि भाजपा उफान पे हो और मुसलमान दिग्भ्रमित हो 3 जगह बँट बिखर रहा हो ……. हर सीट पे 5000 भोट का नुक्सान सफाया कर देगा ।
शिवपाल और मुलायम इतने भी गए बीते नहीं जो 5000 भोट को मोहताज हो जाएं ।
मुलायम अगर पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन भी गए तो अकेले शिवपाल भी इतने कमजोर नहीं कि हर सीट पे 5 या 10 हज़ार वोट काट के अखिलेश को औकात न बता दें ………..

नामाजवादी कुनबे की ये लड़ाई कोई नाटक नौटंकी नहीं एकदम असली है ।
तलवारें भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली ही होगा ।

किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ? मोलायम या अकलेस ?

इतिहास खुद को दोहरा रहा है क्या ?
बात 1966 की है ।
लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गाँधी PM बनी थी ।
उनके नेतृत्व में 67 में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया । सिर्फ 283 सीट आई । बहुमत से बमुश्किल 20 सीट ज़्यादा ।
जब शास्त्री जी मरे थे तो इंदिरा उनके मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी । उन्हें गूंगी गुड़िया कहा जाता था । वो सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा भर थी जिसके नाम के आगे गांधी नेहरु लगा था ।
शास्त्री के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कामराज ने तो अपनी तरफ से एक कठपुतली
बैठाई थी कुर्सी पे ……. सत्ता की चाभी उनके पास थी । उनके अलावा मोरारजी भाई देसाई , निजलिंगप्पा , नीलम संजीव रेड्डी , हितेंद्र देसाई , सत्येन्द्र नारायण सिन्हा , चन्द्र भानु गुप्त और वीरेन्द्र पाटिल जैसे दिग्गज थे कांग्रेस में ……… पर PM बनते ही इंदिरा गाँधी ने रंग दिखाना शुरू किया और इन वट वृक्षों की छाया से बाहर आ गयी ।
12 Nov 1969 को तत्कालीन अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने अपनी PM इंदिरा गाँधी को अनुशासन हीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया ……… इंदिरा ने अलग हो के नयी पार्टी बना ली ……. सारे बूढ़े खलीफा एक तरफ , गूंगी गुड़िया अकेली एक तरफ …….. इंदिरा गाँधी की कांग्रेस ( O ) और कामराज वाली Cong ( R ) …….. पार्टी दो फाड़ हो गयी ।
तत्कालीन कांग्रेस working committee के 705 मेंबर्स में से 446 इंदिरा गाँधी के साथ हो गए ।
पुरानी कांग्रेस जिसमे कामराज के साथ सब बूढ़े थे , वो उन दिनों सिंडिकेट कहलाती थी और इंदिरा की कांग्रेस इंडिकेट ……..

1971 में अगले आम चुनाव हुए । इंदिरा गाँधी ने 43.6% भोट के साथ 352 सीट जीत के बम्पर सफलता अर्जित की । सिंडिकेट के बुढवों को जनता ने नकार दिया । उनको सिर्फ 10 % भोट और सिर्फ 16 seats मिली ।
लोकतंत्र में राजा वो जिसके साथ जनता ……. भोटर ।

UP में वही तमाशा चल रहा है ।
पप्पू अखिलेश अपने बूढ़े घाघ बाप और चाचा की छाया से निकल के बाहर आ गया है ।
कल रात शहजादे सलीम ने अकबर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया ।
कहता है कि 265 सीट पे बागी उम्मीदवार लड़ाऊँगा …….. पार्टी मुख्यालय में निष्कासन का पत्र type कर के रखा है । सिर्फ मुलायम के sign होने बाकी हैं ।
सवाल है कि भोटर किसके साथ जाएगा ।
यादव वोटर confused है । बूढ़े बुजुर्ग मुलायम के साथ हैं तो युवा अखिलेश के साथ । जिलों में पुराने नेता मुलायम के साथ हैं तो नए अखिलेश के साथ ।

71 में जनता के सामने विकल्प सीमित थे । या सिंडिकेट या फिर इंडिकेट । उनके लिए चुनाव आसान था । उन्होंने इंदिरा को चुन लिया । आज UP की जनता के सम्मुख 4 विकल्प हैं ।
मोदी , मायावती , मुलायम या अखिलेश ।
आज की स्थिति में अखिलेश 3rd या 4th position के लिए लड़ रहे हैं ।
Gold और Silver मैडल तो तय है ।
सपा के भोटर ……. यादव : 35 % मोलायम , 35 अखिलेश , बाकी 30 % भाजपा ।
मुसलमाँ बेचारा …….. खरबूजा कटेगा और सबमे बंटेगा ……… पहले 3 जगह बँटना था अब 4 जगह बंटेगा । 40 % बसपा बाकी 60 % में 4 हिस्से ……..

असली लड़ाई 2017 के बाद शुरू होगी जब सपा में सिंडिकेट और इंडीकेट होगा ।
किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ?
मोलायम या अकलेस ?