पंजाब में संभावित AAP सरकार के खतरे

पंजाब में मौड़ मंडी – बठिंडा के कांग्रेस प्रत्याशी की रैली में हुए Bomb Blast को पुलिस ने आतंकी हमला करार दिया है ।
इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़ के 6 हो गयी है ।
इस हमले में प्रयुक्त मारुती Alto कार चोरी की है , उसपे लगी नंबर प्लेट एक स्कूटर की है ।
विस्फोट में कार के परखचे उड़ गए ।
पुलिस का कहना है कि इस हमले में एक अत्यंत परिष्कृत बम का उपयोग किया गया , जिसे remote के जरिये उड़ाया गया । वो remote कोई mobile फोन हो सकता है ।
विस्फोट में दो प्रेशर कुकर इस्तेमाल किये गए जिसमे से सिर्फ एक ही फटा ।
अगर दूसरा भी फट जाता तो बहुत ज़्यादा जानें जातीं ।

अब इसमें कोई गुंजाइश नहीं की ये एक आतंकी हमला है ।
जब से पंजाब के राजनैतिक परिदृश्य में AAP का उदय हुआ है , यहां पंजाब में खालिस्तानी तत्वों के वापस सिर उठा लेने की संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ गयी है ।
AAP को धन जन और अब बल का पूरा समर्थन ही खालिस्तानियों से मिल रहा है पर स्थानीय जनता इसे समझ नहीं पा रही है ।

खालिस्तानी आतंकवाद ने पंजाब में दस्तक दे दी है ।
सवाल है कि अगर खालिस्तानी आपियों की सरकार वाकई पंजाब में बन गयी तो क्या होगा ?
बहुत संभव है कि भगवंत मान जैसा एक शराबी कॉमेडियन पंजाब जैसे एक संवेदन शील राज्य का जो कि एक border state है , इसका मुख्यमंत्री बन जाए ।
भगवंत मान या ऐसे किसी भी आपिये नेता को कोई भी प्रशासनिक अनुभव नहीं है जबकि पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य जहां communal forces और communal issues की कोई कमी नहीं , यहाँ राज चलाना बहुत मुश्किल है । पंजाब हमेशा से communal tension के मुहाने पे बैठा रहता है और एक छोटी सी चिंगारी विकराल आग में बदल सकती है ।
पिछले कुछ सालों में हमने कई ऐसे मामले देखे जहां स्थिति बहुत खराब हो गयी थी ……. जैसे की बाबा गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा के मसले , या फिर डेरा सच खंड के बाबा रामानंद दास जी की Vienna में हुई ह्त्या और उस से उपजे तनाव के मसले हों या फिर पिछले दिनों हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से उत्पन्न हुए तनाव के मसले हों …….. ऐसे तमाम मसलों को हल करने और इन communal tensions को control करने के लिए जो प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए वो AAP के किसी नेता के पास नहीं है ।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या है AAP की केंद्र में मोदी सरकार से हमेशा टकराव की नीति ।
दिल्ली में हम देख चुके हैं कि AAP और केजरीवाल हर छोटी छोटी बात पे केंद्र सरकार और मोदी जी से सींग फंसा लेते हैं , हर बात के लिए मोदी सरकार को blame करते हैं । दिल्ली तो पूर्ण राज्य नहीं और वहाँ के CM के हाथ में बहुत कम प्रशासनिक अधिकार हैं और दिल्ली पुलिस चूँकि गृहमंत्रालय के आधीन है इसलिए किसी तरह काम चल जाता है , पर यदि पंजाब जैसे sensitive पूर्ण राज्य और border state में खालिस्तानी समर्थक कोई सरकार अगर काबिज हो जाती है जिसका मुखिया कोई अनाड़ी खालिस्तानी हो तो इसके खतरे आप समझ सकते हैं । विडम्बना ये है कि आज जो युवा पंजाब में AAP समर्थक हुए हैं उन्होंने 80 और 90 के दशक का खालिस्तानी आतंकवाद न देखा है न झेला है । ये इसके खतरों को समझते ही नहीं ।

सिर्फ 2 दिन बाद पंजाब में वोट डाले जाएंगे ।
देखते हैं कि पंजाब की किस्मत में क्या लिखा है ?

पंजाबी समझ नहीं रहे कि वो आग से खेल रहे हैं ।

बात उन दिनों की है जब दिल्ली में अन्ना हज़ारे जनलोकपाल के लिए अनशन पे बैठे हुए थे ।
राम लीला मैदान में उनके जो समर्थक थे उनकी टोपी पे लिखा होता ” मैं भी अन्ना ”
अन्ना का वो आंदोलन कांग्रेस की सरकार के लिए नासूर बना हुआ था इसलिए हम लोगों को बहुत अच्छा लगता था । हम भी अन्ना के मुरीद हो गए ।
और हमरे पिछवाड़े में भी activism का कीड़ा नहीं बल्कि सांप है सो हम भी सपत्नीक पहुँच गए ……. सड़क पे जा खड़े हुए अन्ना के समर्थन में । उन दिनों अन्ना के चेले केजरीवाल और इसकी जो चांडाल चौकड़ी थी उनकी संस्था का नाम था IAC बोले तो India Against Corruption ……..
सो एक दिन जबकि आंदोलन अपने चरम पे था , तो हम दोनों पति पत्नी कुछ safed chart papers और water color ले के स्थीनीय Doaba college के सामने जा डटे और लगे अन्ना और केजरीवाल और AIC के समर्थन में पोस्टर बनाने ।
3 घंटे हम वहाँ रहे । बड़ा ही निराशाजनक अनुभव रहा । कॉलेज से सैकड़ों नहीं बल्कि हज़ारों लड़के लडकियां निकल रहे थे ……किसी ने हमारी तरफ देखा तक नहीं जबकि हम 20 – 25 पोस्टर बना के दीवारों पे लगा चुके थे । कॉलेज के प्राध्यापकों का एक झुण्ड भी हमारे सामने से निकल गया ……..

हमें बड़ी निराशा हुई ……. ये हाल है पंजाब के youth का ?
पंजाब के intelligentsia का ……. इतने ज्वलंत विषय जिसने पूरे देश में तहलका मचा रखा है …… जिस अन्ना केजरीवाल और AIC ने केंद्र की कांग्रेस सरकार की चूलें हिला रखी हैं उस मुद्दे के प्रति पंजाबियों का ये ठंडा response ??????? हम बेहद निराश थे ।

और उसके ठीक एक साल बाद , पूरे पंजाब में AAP और उसकी झाड़ू ही दिखती थी ।
दिल्ली के अलावा सिर्फ और सिर्फ एक प्रदेश ऐसा था जहां AAP के लिए अपार जनसमर्थन दिखा ।
सिर्फ एक साल में ऐसा क्या हुआ कि जिस पंजाब में अन्ना हज़ारे और अरविन्द केजरीवाल को कुत्ता नहीं पूछता था वही पंजाब रातों रात केजरीवाल का दीवाना क्यों हो गया ??????
इतना जनसमर्थन अचानक कहाँ से आया ?
AAP के लिए ये जन समर्थन सिर्फ पंजाब में ही क्यों आया ? देश के अन्य राज्यों में क्यों नहीं आया ?

मेरे लिए ये शोध का विषय था । मैंने चीज़ों को बड़ी बारीकी से देखना शुरू किया । वो कौन लोग हैं जो AAP ज्वाइन कर रहे हैं । कौन इनके नीति नियंता मने think tank हैं ?
Main stream media इनके बारे में क्या लिख रहा है ?
Social media में इनके मुखर समर्थक कौन लोग हैं ?

अंदर झाँकने पे मुझे बड़ी भयावह तस्वीर दिखाई दी ।
सबसे पहला बयान जिस से मैं चौकन्ना हुआ वो पंजाब पुलिस के ex DGP शशिकांत का था जो उसने पटियाला की एक जनसभा में दिया था 2013 में । उसमे उसने कहा की संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले तो एक संत एक सोशल reformer थे और उनके रहते किसी की ये औकात नहीं थी कि drugs का सेवन कर लेता ।
ये बयान पढ़ मेरे कान alsatian कुत्ते की माफ़िक़ खड़े हो गए ।
एक आपिया एक दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी का गुणगान कर रहा है ???????
फिर मैंने पूरे घटनाक्रम को इसी एंगल से देखना शुरू किया ।
UK और Canadaa में बैठे खालिस्तानियों की Fb वाल खंगालनी शुरू की …….
देखा कि AAP को पूरा जनसमर्थन और funding तो खालिस्तानियों से आ रही है ।

AAP के जनसमर्थन को समझने के लिए आपको पहले पंजाब की Socio Economic दशा दिशा को समझना पड़ेगा …….. पंजाब दरअसल एक किस्म का उन्नत बिहार है । जैसे बिहारी दिल्ली मुम्बई सूरत और लुधियाना में आप्रवासी मजदूर बन के जीवन यापन करता है वैसे ही पंजाबी इंग्लैंड अमेरिका कनाडा यूरोप ऑस्ट्रेलिया में जा के आप्रवासी मजदूर बन के खटता है । बिहारी अपने गाँव में बैठी बाप बीवी को मनियाडर भेजता है तो पंजाबी Western Union से । पंजाबी बिहारी को हिकारत से देखता है और इनको ” साला भैया ” बोलता है , तो england अमेरिका वाले इन पंजाबियों को देसी बुलाते हैं ।
पंजाबियों को मलाल रहता है कि साले बिहारियों ने आ के पंजाब गंदा कर दिया , slums में रहते हैं , ठीक उसी तरह वहाँ अंग्रेज इनको गरियाते हैं कि साले पंजाबियों ने आ के इंग्लॅण्ड गंदा कर दिया ।
जिस मोहल्ले में बहुत ज़्यादा पंजाबी रहते हैं , अंग्रेज वहाँ रहना पसंद नहीं करते ।
कहने का मतलब ये कि बिहारी और पंजाबी दोनों मूलतः आप्रवासी मजदूरी करने वाली कौमें हैं ( बिहारी से मेरा आशय हमेशा पूर्वांचल से रहा है , मने anything beyond lucknow )
तो मामला ये है कि यहां पंजाब में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां का लड़का कहीं बिदेस में मजूरी न कर रहा हो और western Union से पैसा न भेजता हो । अब भैया जो मनियाडर भेजता है उसकी बात तो सुननी / माननी पड़ेगी न ???????
और उसकी समस्या ये है कि वो वहाँ England और Canada में खालिस्तानियों से घिरा है …….. उनके influence में है , उसे वहाँ दिन रात खालिस्तान का सपना दिखाया जाता है , गुरुद्वारों में तकरीरें सुनाई जाती हैं कि कैसे वहाँ पंजाब में सिख हिंदुओं की गुलामी कर रहे हैं और ये कि 1947 में नेहरू ने सिखों को धोखा दिया और खालिस्तान बनाने के वादे से मुकर गए । कहने का अर्थ ये कि NRI वहाँ जा के कब खालिस्तानी हो जाता है उसे पता ही नहीं चलता ।
तो 2013 में कनाडा UK में बैठे खालिस्तानियों को ये समझ आ गया कि एक ये नयी पार्टी आ गयी है जिसे पंजाब में मोहरा बनाया जा सकता है । और फिर अचानक ही रातों रात सभी NRI ( कृपया खालिस्तानी पढ़ें ) आपिये बन गए । और उनकी देखा देखी सारा पंजाब आपिया बन गया ।
आज भी आप यहां पंजाब आ के देख लीजिए ।
पंजाब का ये विस चुनाव यहां नहीं बल्कि कनाडा और UK से लड़ा जा रहा है ।
50,000 से ज़्यादा NRI ( खालिस्तानी ) छुट्टी ले के आये हुए हैं ।
वहाँ विदेश में बाकायदा विधानसभा वार चुनाव दफ्तर बाँय हुए हैं जहां बैठे volunteers यहां बैठे लोगों को फोन कर AAP को भोट देने की अपील कर रहे हैं । Fb और whatsapp पे हज़ारों हज़ारों group और pages बनाये गए हैं ।
दरअसल विदेश में बैठे खालिस्तानियों ने बहुत पहले मने 1994 – 95 में ही ये समझ लिया था कि पंजाब में कांग्रेस और अकाली – भाजपा दोनों ही उनकी दाल नहीं गलने देंगे । ऐसे में उनको केजरीवाल और इसकी AAP में एक संभावना दीखती है ।
पर एक बात तय है कि चुनाव बाद वहाँ बैठे खालिस्तानी इनसे बाकायदे इस समर्थन की कीमत वसूलेंगे ।
फिलहाल report ये है कि पंजाब के मालवा belt में AAP का जोर है ।
पिछले एक हफ्ते में इनकी स्थिति में बहुत सुधार हुआ है ।
खालिस्तानियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ।
मूर्ख पंजाबी समझ नहीं रहे कि वो आग से खेल रहे हैं ।

क्रमशः ……….

AAP is loosing punjab .पंजाब में बाजी केजरीवाल के हाथ से खिसक चुकी है

कई मित्रों ने पूछा है की पंजाब के आगामी विस चुनाव के बारे में आपका क्या आकलन है .

सीधी स्पष्ट बात …… इस बार पंजाब में मतपेटी में से भूत निकलेगा . पंजाब इस बार ऐसे छाकायेगा कि अच्छे अच्छे विश्लेषक , राज नीतिज्ञ और Psephologist पानी मांग  जायेंगे .

इसमें कोई दो राय नहीं कि  आज से 6  महीना  पहले AAP का पलड़ा बहुत भारी था और इनकी जबरदस्त हवा थी . पर जैसा कि performance चार्ट में होता है , आपको ठीक समय पे peak करना होता है ……. अगर आप समय से पहले peak कर गए तो फिर उसके आगे ढलान ही होती है …….

कजरी का दुर्भाग्य है की उसका पाला देश के दो धुरंधर राजनीतिज्ञों से पडा है …… एक तरफ तो हैं राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी बादल साहब और उनका बेहद शातिर बेटा ……….और दूसरी तरफ Capt अमरेन्द्र सिंह ……. इन दोनों के सामने केजरीवाल पिद्दी है …….. केजरीवाल की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इनके पास प्रदेश में कोई विश्वसनीय चेहरा नहीं हैं . जहां एक तरफ बादल साहब और अमरेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज हों तो उनके सामने भगवंत मान जैसा B ग्रेड विदूषक और शराबी कबाबी आदमी ?

दूसरी बात है की मुकाबला त्रिकोणीय होने की वजह से ये आकलन बेहद मुश्किल हो गया है कि बादल साहब के खिलाफ कितनी Anti Incumbency  है और वो वोट कहाँ जा रहा है . यादे कजरी मैदान में न होते तो इस बार अकालियों का सूपड़ा साफ होने से भगवान् भी  नहीं बचा पाता …..पर अब ऐसा लगने लगा है कि कहीं केजरीवाल अकालियों का तारणहार बन के तो नहीं आ जाएगा …….

केजरीवाल जितने कमजोर होंगे , अकालियों को उतना फायदा होगा ……

anti  incumbency  वोट जो यूँ कांग्रेस की झोली में जाना था वो AAP  की झोली में जा रहा है …..इसके अलावा आप जितना वोट अकालियों का काट  रही है उस से ज़्यादा कांग्रेस का काट रही है ……कांटे की त्रिकोणीय टक्कर अगर हुई तो अकाली फायदे में रहेंगे क्योंकि एक तो उनका पार्टी संगठन मज़बूत है , दूसरे सत्ताधारी दल होने के नाते धनबल ज़्यादा है …… मोदी की नोट बंदी का सबसे ज़्यादा नुक्सान केजरी और कांग्रेस को ही हुआ है ……. केजरी यूँ ही नहीं बिलबिला रहा है ……..पिछले दो सालों में केजरी ने कनाडा और UK में बैठे खालिस्तानियों से और अरब देशों से पेट्रो डॉलर हवाला माध्यमों से जुटाए थे वो सब मोदी ने मिटटी कर दिए ………. केजरू इनकम टैक्स कर्मी रहा है ……. अन्दर की कहानी सब जानता है …….वो जानता है की मोदी सांस भी नहीं लेने देगा …….. और अब इतने कम समय में इतनी भारी मात्रा में funds नहीं जुटाए जा सकते …….. हवाला पे मोदी की कड़ी नज़र है …… ये भी सुनने में आ रहा है कि Axis Bank वालों ने AAP  का पैसा सफ़ेद करने की कोशिश की थी पर मोदी ने पकड़ लिया ……..

उधर सुखबीर बादल के पास पैसे की कोई कमी नहीं है …….. और ये बड़ी कडवी सच्चाई है की चुनाव में पैसा और शराब पानी की तरह बहेगा ……..एक रात पहले वोट खरीद लिए जायेंगे ……. दूसरा फैक्टर बहिन जी हैं …..मोदिया ने उनको भी कंगाल कर दिया है . चुनाव उनको भी लड़ना है . और उसके लिए पैसा चाहिए और आज उनको पैसा सिर्फ सुखबीर बादल दे सकता है ……. पिछली बार भी दिया था 2012 में ……इस शर्त पे की पंजाब की हर सीट पे बसपा का प्रत्याशी लडेगा और कांग्रेस के वोट काटेगा …….. 2012 में अकालियों की जीत में बहुत बड़ा रोल बसपा और मनप्रीत बादल का था …..इस बार मनप्रीत बादल की जगह केजरू ने ले ली है ……..

देखना सिर्फ ये होगा की केजरू कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा पाता है और खुद का कितना फायदा कर पाता है ……

फिलहाल लड़ाई अकालियों और कांग्रेस के बीच है ……. केजरू पिछड़ चुके हैं …….

ज़्यादा संभावना अकालियों की है …….

त्रिशंकु विधानसभा भी बन सकती है …….

अकाली sweep  भी कर सकते हैं ……..

 

बोला ना ……. मतपेटी से जिन्न निकलेगा