रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

हमारे इदर एक कहावत कहते है
बिल्ली को सपने में बी छीछ्ड़े दीखते हैं ।
छीछ्ड़े ……. मने कसाई जब मांस बेचता है तो उसमे से कुछ टुकड़े जो बेकार बच जाते हैं उन्हें छीछ्ड़े कहते हैं । एक अच्छी बिल्ली को हमेशा छीछ्ड़े पे focus करना चाहिए । बकरे पे नहीं ।

मोदी जी ने 2014 के लोस चुनाव के run up में कहा कि विदेशों में इतना काला धन जमा है कि उसे अगर देश में वापस ला के विकास कार्यों पे खर्च किया जाए तो हर हिन्दुस्तानी के हिस्से 15 लाख रु आयेगा ।
बस दीख गया बिल्ली को छीछ्ड़ा ……. मोदी हर आदमी के खाते में 15 लाख रु जमा कराएगा ।

मोदी ने 2014 में कहा ……. 5 करोड़ लोगों को रोजगार …….. बिल्ली को दीख गया छीछ्ड़ा ……..
पूछ रहे हैं कब मिलेगी 5 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी ? बिल्ली की dictionary में रोजगार मने सरकारी नौकरी ।

इधर मोदी जी का मूलमन्त्र है ……. विकास से रोजगार ।
skill development करो रोजगार पाओ ।
उद्यम करो ……. रोजगार पाओ ।
मुद्रा बैंक से 50,000 से ले के 10 लाख तक का लोन लो …….. स्वरोजगार करो ……. entrepreneur बनो ……. खुद रोजगार पाओ , समाज में 10 और लोगों को रोजगार दो ।
infrastructure बनाओ ……. उस से अपने आप रोजगार का सृजन होगा ।
गुजरात में पटेल की मूर्ति …….
मुंबई में शिवा जी की मूर्ति …..
ये दोनों बहुत बड़े tourist attraction होंगे । हर साल लाखों tourist आयेंगे इन्हें देखने । कितना रोजगार मिलेगा लोगों को ?

उत्तराखंड की पूरी economy ही चारधाम पे निर्भर करती है ।
चारधाम मने बदरीनाथ केदारनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री ……… ऋषिकेश से आगे ये चारों धाम कुल 900 km की यात्रा है । आज तक इस पूरे रूट की इतनी दुर्दशा थी कि पूछो मत । सड़कों का बुरा हाल । यात्रा पे हमेशा अनिश्चितता की तलवार लटकी रहती है । कब रास्ता बंद हो जाएगा , कब आपकी गाडी खड्ड में चली जायेगी , कब आपके ऊपर पूरा पहाड़ आ गिरेगा , कब पूरी की पूरी सड़क सैलाब में बह जायेगी ……. सब राम भरोसे ।
इसके बाद भी लाखों लाखों श्रद्धालु हर साल आते हैं उत्तराखंड ……. चार धाम की यात्रा करने …….
tourist जब आता है तो उस से समाज का हर वर्ग कमाता है । सड़क किनारे एक अंगीठी रख के चाय बेचता चाय वाला भी , भुट्टा भून के बेचने वाला भी , लाख रु down payment दे के किश्तों पे गाड़ी खरीद taxi चलाने वाला युवक भी और 3star 5 star hotel का मालिक भी ……..
सब कमाते हैं ……. सबको रोज़गार मिलता है ।
2013 की केदारनाथ त्रासदी ने उत्तराखंड को बर्बाद करके रख दिया । सडकें सैलाब में बह गयी ।
हज़ारों सैलानी मारे गए । श्रद्धालुओं ने चारधाम से मुह मोड़ लिया । पूरे प्रदेश की economy तहस नहस हो गयी । सैलानी को confidence ही न रहा । कौन जान देने जाएगा वहाँ । जान है तो जहान है ।
कल मोदी जी ने चारधाम express way परियोजना की आधारशिला रखी ।
900 km लम्बी चारधाम महामार्ग विकास परियोजना कुल 12000 करोड़ रु की लागत से बनेगी जिसमे मुख्य शहरों कस्बों के bye pass , Tunnels , Bridge और Flyover बनेंगे ।
इस परियोजना का सामरिक महत्त्व भी है क्योंकि गंगोत्री बद्रीनाथ रूट से indo china बॉर्डर पे सामरिक deployment और supply का अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य होगा ।
सरकार ने इसे 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है ।

ये परियोजना उत्तराखंड के लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराएगी ।

मोदी जी जानते हैं कि 125 करोड़ लोगों के देश में सबको सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती पर सबको रोज़गार ज़रूर दिया जा सकता है ।
रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

मीडिया हरमजदगी कर रहा है ।

माँ कसम , ये गुज्जू दढ़ियल ……. भोत कमीना आदमी है ।
अगर आप समझते हैं कि इन्ने ये नोटबंदी 8 Nov को करी ….. अगर आप वाकई ऐसा समझते हैं तो आप भारी चूतिया ।
अजी ये तो इस से पहले कई बार कर चुका नोटबंदी ।
हमारे एक मित्र हैं । लखनऊ में रहते हैं । जात के कायस्थ हैं ।
पहले बैंक में थे । वहाँ से VRS ले ली ।
लोगों को देस परेम देस भकती का कीड़ा होता है ।
इनको देस भकती का अजगर था ।
2013 – 14 की बात है ।
बोले खेती करूंगा ।
लोगों ने समझा भांग के अंटे का असर है । सुबह तक उतर जाएगा ।
पर जब सुबह ए अवध हुई तो नशा और चढ़ गिया ।
भाई साब सपरिवार पहुँच गए लखनऊ से बाहर एक गाँव में ।
एक किसान से 2 एकड़ जमीन खरीद ली । दो चार एकड़ lease पे ली ।
और लगे भैया सब्जी की खेती करने ।
and यू know ये मोदी कम्बखत …… वहीं गुजरात से बैठ के सिरबास्तो जी की खेती पे नजर रखे हुए था । इधर सिर्बास्तो जी के खेत में पत्ता गोभी बोले तो Cabbage की फसल लहलहा रही थी …….. सिरबास्तो जी सपरिवार कंधे पे हल रखे सपरिवार ग्रुप song गाते थे …….. मेरे पुत्तर परदेस की धरती सोना उगले , उगले हीरे मोती ……. उत् परदेस की धरती ……. पर मोदी से सिरबास्तो जी के पलिवार की खुसी देखी न गयी । और उन्ने वहीं गाँधी नगर में ही बैठे बैठे ( उस समय CM थे ) कम्बखत यहाँ लखनऊ में नोट बंदी कर दी ।
और भैया नोटबंदी होते ही जो पत्ता गोभी हज़रत गंज के AC showrooms में 50 रु किलो बिक रही थी वो 50 पैसे किलो बिकने लगी । इस दाम में तो लदाई मने cartage मने खेत से सब्जी मंडी तक लाने का tractor trolly का भाडा तो छोडो खेत में तुड़ाई तक नहीं निकलती …….. अब सिरबास्तो जी के सामने विकट समस्या …… इस पत्ता गोभी का करें तो क्या करें ?
तय हुआ कि tractor से जुतवा दो खेत में ही …….. कम से कम सड़ के खाद तो बनेगी ।
पर उस से पहले गाँव के पशुओं को न्योत आये ……. पहले ढोर डंगर चर लें तो फिर जुतवायें ।
4 दिन गाँव गिरांव की गाय भैंसों ने दुई एकड़ पत्ता गोभी की दावत उड़ायी । फिर सारी फसल मिट्टी में मिला दी गयी ।
मित्रों ……. जो देवेन्द्र श्रीवास्तव जी के साथ हुआ वो कोई नयी बात नहीं । ऐसा हर साल होता है ।
आप कितनी भी उन्नत कृषि कर लें , प्रकृति अपना काम करेगी ।
कभी bumper crop आएगी कभी एक एक दाने को तरस जाएगा किसान ।
एक बार हमने प्याज लगाए । इतने छोटे छोटे प्याज हुए कि मुफ्त में भी कोई न ले ।
और एक बार उसी खेत में इतनी फसल हुई कि रखने की जगह न बची ।
और ये तकरीबन हर फसल में होता है । और मंडी में दाम तो भैया सीधे सीधे demand and supply पे निर्भर करती है । मुझे वो दिन भी याद है जब 1990 में पटियाला के बाज़ार में अंगूर 2 रु किलो बिका था । कारण ये था कि बगल के जिले संगरूर के अंगूर किसानों के पास इतनी bumper crop हुई कि अंगूर 2 रु किलो बिका ।
खेती किसानी में भाव का ऊपर नीचे होना आम बात है ।
किसी भी किसान से बात करके देखिये । किसान कभी Bumper crop की कामना नहीं करता ।
दाम हमेशा moderate yield में ही मिलता है ।
मैंने लखनऊ में वो दिन भी देखे हैं जब आज से 3 या 4 साल पहले लखनऊ की सड़कों पे A grade दसहरी आम 6 रु किलो बिका था ।

आज देश में कुछ मंडियों में अगर टमाटर सड़कों पे फेंका जा रहा है तो उसमे नोटबंदी का कोई रोल नहीं ।
मीडिया हरमजदगी कर रहा है ।

Men’s empowerment

ऐ Md Shami ……..
अपनी बीबी से कहो कि परदे में रहे ।
ऐ Md Shami तुम ये जान लो कि
तुम्हारी बीबी तुम्हारी खेती है ( 2:223)
तुमरी बीबी तुमरी slave है ( 4:24 )
तुम ऐसी 3 ठो और लिया सकते हो ( 4:3)
तुम अपनी बीबी से superior हो और वो तुमसे inferior ( 2:228 )
तुम मर्द हो और मर्द की तुलना में औरत का हिस्सा आधा होता है ( 4:11 )
तुमरी बीबी की गवाही तुमसे आधी है ( 2:282 )
तुम जब चाहो उस से पिंड छुडा सकते हो ( 4:129 )
तुमरी बात न माने तो हलकी पिटाई कर सकते हो ( 4:34 )
ऐसी औरतें तो तुम जितनी मर्जी चाहो sex slave बना के रख लो (33:50 )

इसलिए ऐ Md Shami अपने अधिकारों को जानो और अपनी बीबी से कहो कि कायदे से रहे …….

ये चुनाव सपा के लिए तो ख़तम है ………

नामाजवादी कुनबे में तलवारें फिर खीच गयी हैं ……..

भतीजे अकलेस जादो ने चचा सिपाल जादो को खोल के दिखा दिया है ……लो चचा पकड़ लो …….

हम ना मानते तुमको औ तुमाई अध्यक्सी कू …….. अपनी अध्यक्सी भीतर घाल लओ ……… भोत देखे आँ तुमाए जैसे अध्यक्स ……. तुम औ तुमाई पालटी ………

आज भतीजे ने पालटी अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए …….खुल्लम खुल्ला  विद्रोह करते हुए अपने 403 प्रत्याशी घोषित कर दिए ……..

अब अकलेस जादो खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे ……..और दुनिया से नहीं डरेंगे ……..

अकलेस किसी से न डर रहे हैं न किसी का लाज लिहाज रह गया है ……… उन्होंने जीरो मने शून्य से शुरू करने का मन बना लिया है . दरअसल अखिलेश के पास खोने के लिए कुछ नहीं है . परिवार खानदान की धन संपदा वो त्याग चुके हैं . अगर आपको याद हो तो लखनऊ की माता कैकयी ने सैफई के राजा दसरथ से कही कि हमाए बेटे का का होगा . राजा दसरथ ने बँटवारा कुछ यूँ किया कि देखो कैकयी , धन संपदा बिजनिस और चोरी चकारी से आज तक जो कमाया वो तुमाए बेटे परतीक कू दिया ……. और राजनैतिक पूँजी और विरासत अकलेस कू ……. पर परतीक जादो का पेट उतने से कहाँ भरने वाला था सो उन ने गायत्री प्रसाद प्ररजापती जैसे मन्तरी पाल लिए जो रोजाना दो चार डी रुपिया कमा के दे रहे थे खनन विभाग से …….

उधर राजपाट में हिस्सा बंटाने के लिए 36 ठो चचा भतीजा थे ………  बेचारे अकलेस जादो दोनों पैरों में बाप और चचा चक्की बाँध के राज किये ऊपी में . पर बर्दाश्त की भी हद होती है …….. विद्रोह के अलावा कोई चारा न था …….

इधर मुलायम जादो और सिपाल जादो न मोदी और अमित शाह के सामने हथियार डाल दिये हैं .

मुलायम ने मोदी से कहा ………. याद है ? हम दोनों भाई मने मैं और सिपाल , कहाँ से उठे हैं ? किस फुटपाथ मने सैफई के किस तबेले से उठे थे ? हमाए बाप के पास टूटी साइकिल न होती थी …….हम दोनों भाई पैदल ही ढोर चराया करते थे …….. और देख लो ….हमने सैफई से ढोर चराना शुरू किया और 30 – 40 सालों में पूरा ऊपी चर डाला ……… आज क्या नहीं है हमाए पास ……. अरबों खरबों की बेनामी संपत्ति है ……. स्विस बैंक में अकाउंट है ……. हमाए 36 ठो भाई भतीजा MP , MLA  हैं ……… तुमाए पास क्या है ? सिवाय 5 – 7 कुर्ता पजामा के ……… वो बी साले तुम फिरी में सिलवा लेते हो गांधीनगर से ? क्या हैं तुमाए भाई भतीजे ? एक रासन की दूकान चलाता है दुसरा 7000 की नोकरी करता है ……. भतीजी तुमाई शिक्षा मित्र लगी है गुजरात में ? अबे हमसे सीखे होते तो आज शिक्षा मंत्री होती सेण्टर में ……..

क्या है तुमाए पास ?

मोदी ने कहा ……. भोसड़ी के ……. मेरे पास इनकम टैक्स deptt है …….. CBI है , Enforcement directorate है , CBDT है , DRI है …….. और साथ में CRPF भी है ……… तिहाड़ जेल है …….

मुलायम बोले , मोदी भाई मैं तो मजाक कर रिया था …….. ये सीबीआई और IT वालों का नाम ले के काहे डराते हो …….. मेरे भाई तुम जहां कहोगे मेरा भाई सिपाल साइन कर देगा ……… बना लो यार तुम्ही बनाओ सरकार इस बार ऊपी में …….

उधर अकलेस कहता है …….. मैं मोदी को अपने हाथ पे नहीं लिखने दूंगा की मेरा बाप और चाचा चोर है …… मैं इन दोनों को GPL मार के पालटी से निकाल दूंगा या खुद निकल जाउंगा ……… सच ये है की अकलेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है ……. धन संपदा वो प्रतीक जादो को दे चुके हैं …….. ले दे के राजनैतिक विरासत है जिसपे सिपाल कब्जा जमाये बैठे हैं ……. कल शाम अखिलेश ने 403 सीटों पे अपने प्रत्याशी घोषित कर अंतिम सन्देश दे दिया है …….. सिपाल जादो की लिस्ट में 181 सीट अतीक और मुख्तार अंसारी जैसे चोर बदमाश डाकू माफिया को दी गयी है ……… अखिलेश की ये बगावत बता रही है कि उन्होंने सब कुछ zero से शुरू करने का मन बना लिया है ……. पार्टी टूटती है टूट जाए ……ख़तम होती है हो जाए ……. नए सिरे से शुरू करेंगे …… इंदिरा गाँधी ने भी तो ऐसा ही किया था कभी … इन्डिकेट ले के अलग हो गयी , सिंडिकेट ख़तम हो गया ……. भोटर सब इंदिरा के पास आ गया …….. पार्टी उसकी जिसके साथ भोटर …….

ये चुनाव तो सपा के लिए ख़तम है ……… अब देखते हैं  17 के बाद किसके पास क्या बचता है ………

शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर

बहुत साल पहले की बात है ।
मैं और धर्म पत्नी …… हम लोग लखनऊ के चारबाग स्टेशन से बाहर निकल रहे थे ।
जैसा कि अक्सर होता है । स्टेशन से बाहर आते यात्रियों को Auto rikshaw और Taxi वाले टोक के पूछ लेते हैं …… Auto Rikshaw Sir ?
एक दो को तो मैंने बर्दाश्त किया । फिर जब तीसरा आया तो उसे मैंने बड़ी बेरहमी से झिड़क दिया ।
हम थोड़ा आगे बढे । तो इन्होने पूछा ……. इतनी जल्दी नाराज क्यों हो जाते हो ?
Disturb करते हैं साले ……..
रात के 11 बजे ये आदमी यहाँ रेलवे स्टेशन पे सवारी जोह रहा है ।
कायदन इसे इस समय अपने बीबी बच्चों के पास होना चाहिए ।
फिर भी , उनका पेट पालने के लिए , उन्हें एक बेहतर जीवन देने के लिए ……. ये आदमी रात 11 बजे सड़क पे है । कितनी हाड़ तोड़ मेहनत कर रहा है । कम से कम भीख तो नहीं मांग रहा । चोरी चकारी तो नहीं कर रहा । crime तो नहीं कर रहा । इज्ज़त से रोज़ी कमा रहा है ।
आपको तो appreciate करना चाहिए उसे ।
यकीन मानिए ……. बात मेरे दिल को छू गयी । और इस एक घटना ने मेरे जीवन का पूरा नज़रिया ही बदल दिया । और वो दिन और आज का दिन ……. मैं हर मेहनतकश आदमी का मुस्कुरा के स्वागत करता हूँ । अब जब स्टेशन पे रिक्शा वाले टोकते हैं तो मुस्कुरा के उन्हें जवाब देता हूँ …….. हाथ खाली हों तो हाथ भी मिलाता हूँ ।
इसी तरह जब कभी रिक्शा लेना हो तो पहले तो एक झड़प रिक्शे वाले से होना लाज़मी है । 40 नहीं 30 लगते है । और फिर जब गंतव्य तक पहुँचने लगते हैं तो खुद को guilt होने लगता है । और जब रिक्शे वाला सामान उतारता है …… और जब उसके माथे पे चमकती बूँदें देखता हूँ पसीने की ……. तो 30 की जगह 50 ही देता हूँ । ये नियम है …… मेरी जिंदगी का ……. धर्म पत्नी हमेशा पूछती है …… जब 50 ही देने थे …… तो पहले बहस क्यों की ?
नहीं जायज़ तो 30 ही बनते थे ………
फिर 50 क्यों दिए ……. वो तो उसके पसीने ……. उसके श्रम उसके जीवट का सम्मान किया …….
तो ये सम्मान पहले ही कर लेते ……. bargain क्यों किया ।
वो इसलिए …… कि वो मन से 30 लेने के लिए तैयार था …….. पर जब मैंने उसे 50 दिए …… तो जो हलकी सी मुस्कान …… मोनालिज़ा सी ……. वो जो उसके चेहरे पे आती है …… वो बड़ा सुख देती है ।

इसी तरह जब कभी मैं किसी ढाबे या रेस्त्रां में खाना खाता हूँ ……. तो एक point ऐसा आता है …… हमेशा ……. जो मुझे उद्विग्न कर देता है । Rush Hours में जब बहुत से ग्राहक़ हों तो service बड़ा श्रमसाध्य कार्य है । ऊपर से 3 – 4 घंटे लगातार दौड़ते भागते किसी को भोजन परोसना ……. ऐसे में मुझे हमेशा ये guilt हो जाता है ……. कि इस बेचारे ने …… ये जो हमें खाना परोस रहा है ……. इसने खाना खाया ? कब से खडा है ? कितनी भाग दौड़ है ????? एक भूखा आदमी आपको 36 तरह के पकवान खिला रहा है ……. उस समय उसकी खुद की क्या मनोदशा होती होगी ……. ये सवाल मुझे बेहद परेशान कर देते हैं …….. इसलिए मैंने अपने जीवन का ये नियम बना रखा है ……. always leave a very very generous Tip on the Table …….. कई बार तो मैं अपने साथ वाले मित्रों को टोक देता हूँ …… 10 – 20 नहीं ……. Tip कम से कम 50 या 100 ……. कर के देखिये ……. भोजन में जो आनंद आयेगा ……..

ये इतनी लम्बी पोस्ट आज इसलिए लिख मारी कि Youtube पे भ्रमण करते music सुनते आज Brass Band वालों की एक विडियो दिख गयी …… जब देखा सुना ……. महसूस किया ……. तो आज जीवन में 51 बरस बाद समझ आया कि यार ये Band वाले भी इंसान होते हैं …… और इंसान नहीं ….. कलाकार होते हैं भाई …… वरना आज तक तो इन्हें हिकारत से ही देखते आये …… अजीबो गरीब से कपडे पहने ……. बेढंगे से instruments बजाते …… एलियन सी शक्ल वाले लोग ……. पर आज जब उन्हें सुना Youtube पे …… तो अहसास हुआ ……. इंसान है भाई ये भी …… जीते जागते हाड़ मांस के पुतले ……. Sax और trumpets पे धुनें बजाते …….
दुनिया हमें वैसी ही दीखती है जैसी हमारी अंतर्दृष्टि होती है ।
ये दुनिया बेहद खूबसूरत है ……. अंतर्दृष्टि पैदा कीजिये ।

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर

जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती हैं ।

देश में सिखों के चुटकुले बड़े चाव से सुने सुनाये जाते हैं ।
हंसी मज़ाक और मखौल के पात्र रहे हैं सिख इस देश में ।
कहा जाता है कि सिखों का दिमाग दोपहर 12 बजे खराब हो जाता है ।

मिति 8 पौष ……. चमकौर साहिब …… वर्तमान पंजाब का फतेहगढ़ साहिब जिला ……..
दो दिन पहले यानी 6 पौष , सिखी के संस्थापक दशम् गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने आनंद पुर साहब का किला खाली कर दिया ।
उनके साथ उनका पूरा परिवार मने 4 बेटे , माता गूजरी ……… और लगभग 40 सिख योद्धा थे ।
आनंदपुर साहिब से कुछ मील की दूरी पे किन्ही कारणों से परिवार उनसे बिछुड़ गया ।
दोनों बड़े बेटे 17 वर्षीय अजीत सिंह जी और 14 वर्षीय जूझार सिंह जी उनके साथ रह गए और दोनों छोटे साहिबजादे 8 वर्षीय जोरावर सिंह और 6 वर्षीय फ़तेह सिंह जी माता गूजरी के साथ रह गए ।
जिस स्थान पे परिवार अलग हुआ आज वहाँ गुरुद्वारा परिवार विछोड़ा साहिब स्थापित हैं ……..

वो रात गुरु साहब ने रोपड़ के पास कोटला निहंग खां के पास गुजारी ।
माता गूजरी दोनों छोटे साहिबजादों के साथ कुम्भे मश्की की झुग्गी में रहीं ।

अगले दिन यानि 7 पौष ……. गुरु साहिब जी चमकौर साहिब पहुंचे …….
माता गूजरी और दोनों छोटे बच्चों को गंगू अपने साथ अपने गाँव ले गया ।

अगले दिन सुबह ……. यानि पूस माह की 8 तारीख को चमकौर साहब का ऐतीहासिक युद्ध शुरू हुआ । गुरु साहब के साथ दोनों साहिबजादे और लगभग 40 सिख योद्धा थे । उधर मुग़लों की विशाल सेना ।
दोनों साहिबजादे और सिख योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए ।
शेष बचे सिखों ने गुरु जी को सुरक्षित निकल जाने को कहा …….. बताया जाता है कि जब युद्ध भूमि से निकलने लगे तो एक सिख योद्धा का पैर बड़े साहिबजादे अजित सिंह जी के मृत शरीर से टकराया । सिख ने अपनी कमर में बंधा वस्त्र खोल के उनका मुख ढक दिया ।
गुरु साहब ने जब ये देखा तो बोले …….. वापस उठा लो ये कपड़ा ……..
कफ़न या तो सभी सिखों को ओढाओ नहीं तो इसे भी खुला ही छोड़ दो …….
आखिर बाकी 40 जो शहीद हुए वो भी तो मेरे पुत्र ही हैं ……..

17 साल और 14 साल ……… क्षत्रिय के लिए कहा जाता है कि उसकी आयु ईश्वर के यहाँ से 18 वर्ष ही लिख़ के आती है । युद्ध भूमि में क्षत्रिय 18 बरस से ऊपर जिए तो ऐसे जीवन को धिक्कार ………

गुरु गोबिंद सिंह जी जब 9 साल के थे तो उनके पिता श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी शहीद हो गए ।
सिर्फ 41 वर्ष की आयु में स्वयं गुरु जी शहीद हुए ।
4 बेटे न्योछावर कर दिए देश कौम और धर्म के लिए ………

सही कहते हैं …….. ऐसी कुर्बानियां तो कोई दीवाना पागल ही दे सकता है …….
वो जिसका दिमाग 12 बजे सटक जाता हो ……..
गुरु साहब ने अगर जीवन में आसान रास्ता चुना होता तो कम से कम सिखों को ये चुटकुले तो न सुनने पड़ते ?

मुंबई में छत्रपति शिवा जी महाराज की मूर्ति स्थापित होने जा रही है ।
कुछ लोगों को ये tax payers के पैसे की wastage लगती है ।
भारत ने अपना इतिहास भुला दिया ।
ये जो सप्ताह अभी चल रहा है …… यानि 20 दिसम्बर से ले के 27 दिसम्बर तक …….. इन्ही 7 दिनों में गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था ।
इधर हिन्दुस्तान Christmas के जश्न में डूबा एक दूसरे को बधाइयां दे रहा है ।
एक ज़माना था जब यहाँ पंजाब में इस हफ्ते …….. सब लोग ज़मीन पे सोते थे …….. क्योंकि माता गूजरी ने वो रात , दोनों छोटे साहिबजादों के साथ , नवाब वजीर खां की गिरफ्त में , सरहिन्द के किले में , ठंडी बुर्ज में गुजारी थी …….. ये सप्ताह सिख इतिहास में शोक का सप्ताह होता है …….. पर आज देखता हूँ कि पंजाब समेत पूरा हिन्दुस्तान जश्न में डूबा है ……..
गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस अहसान फरामोश मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया …….. जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है ।

सिर्फ 3200 करोड़ में बन रही है मूर्ति शिवा जी की ???????
गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों की भी मूर्तियाँ बननी चाहिए यहाँ आनंदपुर साहिब और फतेहगढ़ साहिब में ……..

Lest we forget ……..

माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले

यूँ तो मैं ये किस्सा कई बार सुना चुका हूँ पर आज फिर मौक़ा है ।
एक बार और सुन लीजिये ।
तो हुआ ये कि बहुत पहले यानि कि कोई हज़ार एक साल पहले की बात है ।
किसी गाँव पे डाकुओं ने धावा बोल दिया । मर्दों को मार दिया ।
औरतों लड़कियों को उठा ले गए ।
महीनों सालों बलात्कार करते रहे । कुछ औरतों को इस बलात्कार से गर्भ ठहर गया ।
उस गर्भ से एक लड़का पैदा हुआ ।
बिन बाप का वो लड़का किसी तरह गाँव में पलने बढ़ने लगा ।
एक दिन , जब वो कुछ सयाना हुआ तो उसने अपनी माँ से पूछा ……. माँ मेरे पिता जी कौन हैं ? वो कहाँ हैं ?
माँ ने कहा ……. बेटा …… बड़ी दर्द भरी कहानी है । सुन पायेगा तू ?
हाँ माँ सुना ……
बेटा …….. तेरे पिता जी इस गाँव के जमींदार थे ।
फिर डाकुओं ने उन्हें मार दिया और मुझे अपने अड्डे पे उठा ले गए ……. कई साल वो डाकुओं का गिरोह मुझसे बलात्कार करता रहा । उसी बलात्कार से तेरा जन्म हुआ ?

माँ ……. वो डाकू कौन थे ? कहाँ है उनका अड्डा ?
बेटा ……. उनका अड्डा उस रेगिस्तान के उस पार है ……..
और फिर वो लड़का निकल पडा अपनी माँ के बलात्कारियों की खोज में …….
महीने दो महीने बाद लौटा तो दाढ़ी बढ़ी हुई थी …… मूछें सफा चट्ट ……. कुर्ता लंबा और पजामा टखनों से ऊपर चढ़ा जाता था ……. अब उसने अपने बाप के कातिलों और माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहना शुरू कर दिया था ……. वो अपनी माँ के बलात्कारियों पे मुसलसल ईमान ले आया था …….

माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले चाहते हैं कि मुंबई में उनके अब्बू की मज़ार हो …… पिता जी की मूर्ती न लगे । माँ के बलात्कारियों के नाम पे अपनी औलादों के नाम रखना उनका धार्मिक अधिकार है ।

 

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

आज से कुछ साल पहले मेरी पैर में fracture हो गया ।
पंजे में ।
पहले तो मैंने उसे मामूली मोच समझ ignore किया । खिलाड़ियों को ऐसी मोच आना आम बात है । जब एक डेढ़ महीने तक भी दर्द न गया तो XRay कराया । Dr ने बताया जनाब कायदे से टूटी हुई है हड्डी …… प्लास्टर लगा डेढ़ महीने …… मने 3 महीने मैं लंगडा के चला । मित्रों ने लंगडा लंगडा कह के बुलाना शुरू कर दिया । फिर वो लंगडा तैमुर लंगडा हो गया ।
धीरे धीरे मेरा नाम ही रख दिया गया तैमूर लंगडा ।
ये वो दिन थे जब हम computer illiterate हुआ करते थे ।
मुझे आज भी वो दिन याद है जब हमने जालंधर में काम करना शुरू किया तो एक सहयोगी ने कहा अपना email देना …… हम दोनों मियाँ बीवी भेड़िया बाँय …… तय हुआ कि अब तो email account बनवाना पडेगा । मुझे आज भी याद है , model town के उस cyber cafe में एक लौंडे ने 30 रु लिए थे email Id बनाने के । और फिर जब मेरी छोटी बहन ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित करना शुरू किया तो उसी ने मेरा blog account और Fb account बनाया । ये वो दिन थे जब मैं ब्लॉग लिख तो लेता था पर उसे copy paste करना नहीं आता था fb पे । वो भी बड़ा मशहूर चुटकुला ही बन गया जब मैंने अपने एक कम्पूटर ज्ञाता मित्र से कहा कि भाई मैं महीना दो महीना तेरे पास लगा ले रिया हूँ ….. तू मेरे कू ये copy paste करना तो सिखा ही दे । तो उसी दौर में मेरे उसी मित्र ने मेरा एक Gmail ac बनाया …….. taimur.lang27@gmail.com
ये कम्बखत आज भी मेरा google ac है ।
ये तो जब ये करीना कपूर के बच्चे के नाम पे चिहाड़ मची तो मुझे मामले की गंभीरता का अहसास हुआ । मुद्दे की बात ये कि इस से पहले आज तक न मुझे खुद कभी अहसास हुआ और न मैंने कभी खुद सोचा कि मेरे नाम के साथ …… चाहे मज़ाक में ही सही ……. इतने भयानक कातिल का नाम क्यों जुड़ा है ?
सच बताऊँ ?
हालांकि मैं खुद को पढ़ा लिखा जागरूक जाग्रत व्यक्ति मानता हूँ पर सच ये है कि मुझे तैमूर लंग और ऐसे ही हज़ारों कातिलों के बारे में कोई जानकारी है ही नहीं …….
दोष किसका है ?
हमारे education system ने secularism के चक्कर में इन इस्लामिक कातिलों की करतूत कभी हमारे सामने आने ही नहीं दी गयी । history को dilute कर दिया गया । अकबर महान हो गए । औरग्ज़ेब सूफी संत ……. गजनी गोरी महान योद्धा …… और बाकी सब सेक्युलर इतिहासकारों की बाजीगरी जादूगरी में गायब कर दिए गए ।

Dr राजीव भाई ( लन्दन ) ने सवाल उठाया …….. हॉलीवुड में Holocaust पे और 2nd WW पे इतनी फिल्में क्यों बनती हैं ……. इसलिए बनती हैं कि आत्मा को झकझोरते रहे । Jews Hitler को कभी मरने नहीं देंगे । कुछ ज़ख्म ऐसे होने चाहिए कि कभी न भरें …….. हिन्दुओं ने वो तमाम क़त्लेआम वो तमाम अत्याचार भुला दिए जो उनपे हुए 1400 साल तक …….. हिन्दू भूल गए …….
भूल गए तैमूर , चंगेज़ खां , गजनी , गोरी और बाबर हुमायूं अकबर औरंगजेब को ……. भूल गए चित्तौड़ के जौहर को …….

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक:
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कुछ वर्ष पहले की बात है। एक साधारण पृष्ठभूमि का नवयुवक बिहार के सुदूर उत्तर-पूर्वी छोर से दिल्ली आ रहा था ट्रेन से। दिल्ली में रहते हुए, वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता था।
ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागती जा रही थी। ट्रेन के अंदर सब कुछ सामान्य-सा ही चल रहा था। सभी यात्री अपनी ही धुन में खोये हुए थे। पर तभी अचानक से नवयुवक चौंका..!!

नवयुवक ने देखा कि उसके डब्बे में दरवाजे के पास एक 20-22 साल की लड़की धीमे-धीमे सुबक रही थी!! एक लोफ़र-सा दिखने वाला लड़का सम्भवतः उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा था। पर लड़की थी कि रोये जा रही थी।
यह देख नवयुवक चौकन्ना हो उठा..!! उसे लग गया कि हो न हो, कुछ तो गड़बड़ है। वह एकदम से उस लड़की के पास गया और सबसे पहले तो उस लोफ़र से लड़के को वहाँ से भगाया। फिर उस लड़की से तमाम जानकारियाँ ली।

पता चला कि वह लड़की बिहार के बेगुसराय से थी। किसी बात पर अपने पिता की डाँट से दुःखी हो, घर से भाग कर वह भी इसी ट्रेन में सवार हो गयी थी, और वह भी बेटिकट।
सब जानने-समझने के बाद नवयुवक ने उस लड़की को भरोसा दिलाया और सुरक्षित उसे अपने पास बिठा लिया। लड़की को भी तब तक अंदाज़ा हो गया था कि यह नवयुवक एक भलामानुष इंसान है।

तब तक ट्रेन अपनी रफ़्तार से इलाहाबाद को पार कर चुकी थी। पर अभी इस कहानी का अंत यही नहीं होना था। अभी तो कहानी में एक और ट्विस्ट आना था..!! यह तो महज़ इंटरवल था।

नवयुवक ने दोबारा से नोटिस किया कि उसी डब्बे में एक और छोटी-सी, संभवतः 15-16 साल की, लड़की भी अकेले सफ़र कर रही थी। हे भगवान यह क्या..?? इस छोटी-सी लड़की की आँखों से भी गँगा-जमुना बही जा रही थीं निर्बाध..!!

अब नवयुवक के ललाट पर सिलवटें पड़नी शुरू हो गयी थीं। पर फिर भी वह नवयुवक इस छोटी-सी लड़की के पास जाने से खुद को रोक न सका। पूछताछ की, तो पता चला कि यह दूसरी लड़की इलाहाबाद से थी।

अपनी सौतेली माँ के निरंतर मारपीट से परेशान होकर और पिता की बेरुखी के चलते यह भी अपने बाबुल का घर असमय ही छोड़ चुकी थी!!
पर यह छोटी-सी लड़की अब तय कर चुकी थी कि चाहे जान चली जाए, पर वापस अपने घर नहीं जाना। नवयुवक पड़ा भारी फेरे में ! खुद किसी तरह दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर पा रहा था, ऊपर से ये दो-दो असहाय लड़कियाँ बिन बुलाये मेहमान की तरह ट्रेन में मिल गयीं थीं और उस पर तुर्रा यह कि दोनों की दोनों अपने-अपने घरों से भागी हुई!! अब भलामानुष करे तो क्या करे??
पर जहाँ चाह वहाँ राह। अगर विपरीत परिस्थितियों में आप न घबराएँ तथा आपके इरादें दृढ़ हों और नेकनीयत वाले हों, तो फिर ईश्वर भी साक्षात् आपकी मदद करते हैं। सौभाग्य से उसी डब्बे में हरियाणा का एक मारवाड़ी परिवार भी यात्रा कर रहा था। अब तक के सफ़र के दौरान नवयुवक तथा मारवाड़ी परिवार एक-दूसरे से थोड़े खुल से गए थे।

नवयुवक ने मारवाड़ी परिवार को सारी व्यथा समझायी। दोनों मामलों को भलीभाँति समझने के बाद, उदार मारवाड़ी परिवार उन दोनों में से छोटी लड़की को अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया, क्योंकि वह अपने पिता के घर इलाहबाद किसी कीमत पर नहीं जाना चाहती थी।

छोटी लड़की भी मारवाड़ी परिवार के साथ जाने को तैयार हो गयी। तब नवयुवक ने एक आवश्यक शर्त रखी कि भई, मारवाड़ी परिवार उस लड़की को अवश्य पढ़ायेगा तथा साथ ही साथ नियमित अंतराल पर फ़ोन द्वारा उसकी बात उस छोटी लड़की से करायेगा भी, ताकि वह आश्वस्त हो सके कि लड़की सुरक्षित है।

मारवाड़ी परिवार भी सभ्य, उदारवादी व भला परिवार था। अतः उन लोगों ने अपनी सहमति दे दी तथा नवयुवक को आश्वस्त किया कि वे उस छोटी लड़की को अपनी बेटी की तरह रखेंगे। तब नवयुवक ने छोटी लड़की को मारवाड़ी परिवार के हाथों सौंप दिया। साथ ही उस छोटी लड़की को अपना फ़ोन नंबर भी दिया ताकि उसे जब भी जरुरत लगे, वह उस से संपर्क कर सके।
अब बच गयी 20-22 साल वाली बेगुसराय वाली पहली लड़की, जो अपने पिता की डाँट बर्दाश्त न कर सकी और बिना कुछ सोचे, घर से निकल भागी थी! वह तो उसकी किस्मत अच्छी थी कि गलत हाथों में जाते-जाते, वह सुरक्षित हाथों में आ गयी थी।

इस तमाम आपाधापी में ट्रेन कब दिल्ली पहुँच गयी, कुछ पता ही न चला। तनावग्रस्त नवयुवक डरते-डरते, इस लड़की को दिल्ली स्थित किराये के अपने साधारण से तंग कमरे पे ले आया! नवयुवक डर इसलिए रहा था कि कहीं लड़की बीच रास्ते रोने-धोने न लगे, तो फिर लेनी के देने पड़ जाते।

कमरे पर पहुँच कर नवयुवक ने सबसे पहले पड़ोस की एक परिचित महिला को बुलाया, सारी बात समझायी। फिर महिला से निवेदन किया कि जब तक लड़की यहाँ है, कृपया आप साथ रहिये। खुद के कम पैसों में से ही नवयुवक ने लड़की को नये कपड़े दिलवाए , क्योंकि लड़की के शरीर पर चढ़े कपड़े जर्जर अवस्था में थे। जब तक लड़की उसके कमरे में रही, नवयुवक बगल में अपने दोस्त के यहाँ रहा।

अब नवयुवक ने फौरन से लड़की से उसके पिता का फ़ोन नम्बर ले, उसके पिता से संपर्क साधा और बताया कि उनकी लड़की उसके पास पूरी तरह सुरक्षित यहाँ दिल्ली में है। फौरन आएं और अपनी बेटी को ले जाएँ। साथ ही समझाया भी कि भविष्य में अपनी लड़की को डाँटना मत, वरन प्यार से कोई बात समझाना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी बैठ के रोते रहोगे।
लड़की के पिता को तो इधर लगा जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मिल गयी हो!! तब तक रोते-रोते लड़की के माता-पिता की हालत खराब हो गयी थी। परन्तु अब शब्द नहीं थे लड़की के पिता के पास कि किन शब्दों में वह नवयुवक के प्रति आभार प्रकट करें..!!

दो दिनों में लड़की के पिता उसको सुरक्षित लेकर वापस गए। कुछ दिनों बाद, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उस लड़की ने भाई से भी बढ़कर फ़र्ज़ निभाने वाले उस नवयुवक को राखी भेजी!!
छोटी लड़की जिसे वो मारवाड़ी परिवार ले गया था आज भी उनके पास रहती है . उसे भी उसके माँ बाप के पास वापस भेजने के प्रयास किये गए पर उन्होंने उसे वापस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई .

आगे चलकर यही भलामानुष नवयुवक तमाम झंझावातों को झेलता हुआ, महज़ चन्द वर्ष पहले, बिना किसी कोचिंग की सहायता के और वह भी हिंदी माध्यम से तैयारी कर, उत्तर प्रदेश काडर का आईपीएस (IPS) बना!! आजकल पूर्वी उत्तर प्रदेश में एडीशनल SP के पद पे कार्य रत हैं . आखिर हाड़तोड़ मेहनत और नेकनीयती का फल तो मिलना ही था। मुझे फ़ख्र है अपने इस दोस्त पर। इन्ही लोगों के चलते, आज भी इंसानियत पर भरोसा कायम है।

– कुमार प्रियांक

मूर्ती या तो ओरनजेब भाई जान की लगेगी वरना नई लगेगी ।

पृथ्वी राज कपूर की नवासी करीना कपूर ने अपने नवजात बेटे का नाम रख दिया तैमूर ।
फेसबुक पे चिहाड़ मची है । इतने कुख्यात हत्यारे के नाम पे अपने बच्चे का नाम रखता है कोई भला ?

उधर महाराष्ट्र सरकार मुंबई में महाराज छत्रपति शिवाजी की मूर्ति / स्मारक बनवाने जा रही है ……. 3600 करोड़ रु खर्च होंगे ।

टीवी पे चिहाड़ मची है । सुबह से मुहर्रम मनाया जा रहा है । बड़े बड़े दिग्गज धुरंधर इसे tax payers के पैसे का collosal .misuse मने करदाताओं के पैसे की भारी …… भोत भारी मने भोत भोत जादे भारी …… मने विराट दुरुपयोग हो रिया है ।

बात भी सही है …… 500 साल पहले पैदा हुआ और मर मरा गया …… ऐसे आदमी की मूर्ती लगाने की चूतियापंती क्यों कर रहा है देश ?
अबे मूर्ती लगानी है तो भेन मायावती की लगाओ …… उनके गुरु कांशी राम की लगाओ …… भोत करो तो आंबेडकर की लगा दो ……. ये राणा परताप और सिबा जी की क्यों लगाते हो ?
अबे मोतीलाल नेहरू की लगाओ , जवाहर लाल की लगाओ , इंदिरा गाँधी की लगाओ , राजीव गांधी की लगाओ , अबे सोनिया गाँधी की मूर्ती लगाओ ……. ये सेक्युलर लोग हैं ….. ये शिवा जी और राणा प्रताप जैसे third class outdated आदमियों की मूर्ती लगाओगे ? दोनों कम्बखत साम्प्रदायिक आदमी थे …… एक अकबर से लड़ता रहा ता उम्र …… दूसरा औरन्ज़ेब से …… बताओ कित्ता सरीफ लौंडा था अपना औरन्जेब ……. सो सिम्पिल man …… सिम्पिल लिभिंग हाई थिंकिंग …. एंड सो सेक्युलर ??????
टोपी सिल के जीता था …… ऐसे निहायत सरीफ लौंडे से लड़ाई करता था जे सिवा जी ……. और उसकी मूर्ती लगाते हो बे ? ब्लडी कमूनल पीपुल ……. अपने अकललेस भैया को अभी पता चल जाए कि ओरनजेब भाई जान को ऐसे harass किया इस सिबा जी ने तो अबी के अबी गुंडा act और MISA लगा के बंद कर दें और ओरनजेब भाई जान को एक करोड़ मुआवजा …….. लौंडो के लिए 4 flat और नोकरी दे दें अबी के अबी ……. और ये मोदी ….. ये ऐसे कमूनल पीपुल जो देस की गंगा जमुनी तहजीब को डिस्टर्ब कर रेला था …… उसका फोटो लगाता है साला मुंबई में …….
अबे मूर्ती और फोटू लगाना है तो ओरनजेब भाई जान का लगाओ न जो बेचारा विक्टिम था ? बेचारा minorty अल्पसंख्यक …….

अपुन लोग ये सिबा जी की खड़ी निंदा कर रेला है ।
मूर्ती या तो ओरनजेब भाई जान की लगेगी वरना नई लगेगी ।