उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

चुनाव आयोग ने ऊपी का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है ।
पहला वोट 11 फरवरी को पडेगा ।
इधर चुनाव आयोग dates declare कर रहा था उधर मुलायम अपने बेटे कलेस को समझा रहे थे कि बेटा मान जाओ नहीं तो साइकिल से उतर के पैदल हो जाना पड़ेगा ।
इधर कुछ लोगों ने दोनों बाप बेटा को समझा दिया है कि भैया ……. जादो जी लोग ……. दो नाव या दो घोड़े की सवारी करने वाले सवार की गाँड फट के flower हो जाया करती है ।
तुम दोनों तो अपने अपने रास्ते चले जाओगे पर हम मने cadre कार्यकर्ता और भोटर ……. हमारा क्या होगा । अबे तुम दोनों के चक्कर में फटेगी तो हमारी ।
उधर आजमखान ने समझाया बतावें कि अगर सपा बँटी और कमजोर हुई तो मुसलमान भोटर तुमको लात मार भेनजी की गोदी में जा बैठेगा ।
मुसलमान 2014 का खार खाये बैठा है । लोस चुनाव में मोदी ने ऐसी मारी बिना तेल के कि अब तक सहला रिये हैं भाई जान । आपको याद होगा कि 2014 में एक भी मुसलमान सांसद UP से जीत के नहीं गया । मुसलमान जानता है कि बँटा तो कटा ………
दोफाड़ सपा मने बसपा को फायदा । इसीलिए मुल्लायम आखिरी कोशिश कर रहे हैं और समझ अखिलेश भी रहे हैं ।
और इस खतरे को समझ भाजपा भी रही है ।
भाजपा शुरू से ही मुलायम और उनकी सपा को मुसलमानों के खिलाफ एक safety valve के रूप में इस्तेमाल करती आई है । मुलायम और मुसलमान का रिश्ता बड़ी प्यार मुहब्बत का रहा है । दोनों 69 में रहे । मुलायम इनको lollypop देते रहे चुसाते रहे । मुसलमान समझ ही न पाए आज तक कि lollypop चूस के आज तक कोई मोटा न हुआ । कड़वा सच है कि मुलायम ने कभी मुसलामानों को बढ़ने न दिया ……. तरक्की की सीढ़ी चढ़ने न दिया ……… हमेशा appeasement का lollypop चुभलाते रहे ।
इधर मुलायम कलेस दोनों जानते हैं कि वो तो हार ही रहे हैं पर ऐसा न हो कि भैंसवती जीत जाए । यही सोच अहीर भोटर की भी है । BMW न आये बेशक भाजपा आ जाए ।

खबर है कि परदे के पीछे सुलह के प्रयास अमित शाह कर रहे हैं । दो फाड़ सपा की बजाय एक कमजोर सपा भाजपा को ज़्यादा मुफीद है ।

उम्मीद है कि आज शाम तक सुलह हो जायेगी ।

आपको ये पता होना चाहिए कि its a jungle out there …….. ये दुनिया एक जंगल सफारी है ।

कुछ दिन पहले टीवी पे एक वीडियो देखा था ।
China की किसी jungle Safari में एक लड़की अपनी car से बाहर निकली ।
भाई शेर खान जी उठा के ले गए और खा डाले ।

अब पीटो छाती ……. करो रुदाली …….. मनाओ मुहर्रम ……. निकालो candle march ……..
गरियाओ शेर खान को …….. कोसो सरकार को …….

इसी तरह सुना है कि कुछ भेड़िये लकड़बग्घे भाई जान लोग ने बंगलुरु की एक और jungle सफारी में एक और बकरी / लड़की दबोच ली बतावें ।
अपन को न पहली लड़की से हमदर्दी न इस दूसरी से ………
हमदर्दी अपन को शेर खान और भेड़ियों लकड़बग्घों से भी नहीं ।
और अपन तो न China Govt. को गारी देंगे न कर्नाटक govt . को ।

अब शेर खा गया तो govt क्या करेगी ? भोत करेगी तो शेर को आदमखोर घोषित कर या तो गोली मार देगी या पकड़ के किसी चिड़ियाघर में बंद कर देगी । दुनिया कि कोई सरकार ……. अबे सरकार छोड़ो , खुद अल्लाह मियाँ शेर खान को सुधार के बकरी ना बना सकते । भाई शेर खान तू सुदर जा …… जे भेड़ बकरी हिरण का शिकार छोड़ तू न्यू कर वेजीटेरियन हो जा …….

आपको ये पता होना चाहिए कि its a jungle out there …….. ये दुनिया एक जंगल सफारी है ।
यहां लाखों करोड़ों भूखे शेर चीते भेड़िये लकड़बग्घे और सियार घूम रहे हैं ।
आपको पता होना चाहिए कि जंगल में कैसे survive करना है ।
शेर चीते ना सुधरने के । कब कौन आदमखोर हो जाएगा कौन जानता है ।
सरकार किस किस को रोकेगी आदमखोर होने से ?
सरकार का रोल तो तब शुरू होगा जब शेर आपको मार के खा जाएगा । फिर वो उसे खोजेगी । खोज के चाहे तो गोली मारे या फिर किसी zoo में बंद करे ।

पर तुम तो शहीद हो गयी न बेटा ????????
इसलिए …….. राजा बेटा ……. ये जान लो कि its a Jungle Out there ……. सवारी अपने सामान की हिफाज़त की जिम्मेवार स्वयं है ।
दुनिया में बहुत कांटे हैं । चारों तरफ कांटे ही कांटे हैं । इन सबको कोई नहीं चुग सकता । सरकार भी नहीं ।

बेहतर होगा कि जूते पहने लें ……….

जो बोया उसे काट रहे बंगाली

ये किस्सा मेरे पिता जी सुनाया करते थे । सत्य घटना है मेरे दादा जी के समय की ।
उस जमाने में मने करीब 100 साल पहले उनकी एक परजा परजुनिया कुम्हार था जिसे अपनी जमीन में ही बसा रखा था ।
उसकी बीबी ……. एक नंबर की नंगिन ……… एक दिन जा के कुएं में कूद गयी ।
ये वो ज़माना था जब कि अभी handpipe और बिजली tubewell और टुल्लू पंप नहीं थे ।
कुआं ही एकमात्र साधन था पेय जल का । और भवानी उसी कुएं में कूद गयी । गाँव में भगदड़ मची । गाँव भर ने जुट के उसे कुएं से निकाला ।
समझाया बुझाया ……
अब उस कुएं का पानी कौन पिए ।
सो टोले मोहल्ले ने जुट के नया कुआं खोदा । हमारे गाँव में हमेशा से ही water level बहुत ऊपर रहा । मने बमुश्किल 10 फुट पे पानी । सो भैया नया कुआं खोदा । पुराना पाट दिया ।
हरामजादी कुछ दिन बाद फिर कुएं में कूद गयी ।
अबकी बार फिर गाँव ला ला करता भगा कुएं की ओर । इधर दादा जी ने उठाया लट्ठ और पहुंचे कुएं पे …….. और बोले , खबरदार जो निकाला किसी ने इसको कुएं से बाहर …… जाओ ढेला लियाओ बीन के ……. लौंडे ढेला चिक्का बीन लियाए खेत से …….. और दादा जे ने वहीं ऊपर से कुएं की जगत पे बैठ के उसको मारना जो शुरू किया ……. ढेला ढेला …… और वो अंदर से रोये गिड़गिड़ाए ……. बाबू बचा लो ……. और बाबू कहें नहीं तू मर ।
मरने का बहुत चाव है न तुझे ? मर …….. और चार चिक्का और मारा उसको कपार पे ……. शाम को कूदी थी …….. सुबह हो गयी ………वहीं अंदर पानी में जार जार रोये ……. सुबह निकाली । हाथ पैर सब पानी में गल गए । थर थर काँप रही …….. दादा जी बोले , क्यों ? हुआ शौक पूरा ख़ुदकुशी का ? अब नहीं देगी जान ?
फिर वो कुआं पाट के नया खोदा । उसका पानी उस कुएं से बंद कर दिया ।
बोले चल अब तेरी यही सजा । जा एक KM दूर से पानी ढो के लिया ।
उसके बाद वो फिर कभी कुएं में नहीं कूदी ।

बंगाल के हिन्दू पिट रहे । TMC के कार्यकर्ता BJP office पे चढ़ के मार रहे ।
यहां लकड़बग्घे पूछते हैं कि मोदी और राजनाथ क्या कर रिये हैं ।
मोदी और राजनाथ सही कर रिये हैं ।
बल्कि मोदी को तो बंगाल से पूरी para military और CRPF वापस बुला लेनी चाहिए और ममता को कान में कह देना चाहिए कि और मारो सालों को ……. अभी कम मारा है …….. सड़क पे घसीट के मारो ……..
अबे मोदी क्या माँ चु*** ????????
तुम्हारी चुनी हुई सरकार को मोदी क्यों बर्खास्त करे ?
लोकतंत्र है भाई ……. तुमने भोट दे के चुना है यार …….. टोकरी भर भर भोट दिया है ।
तुम्ही ने दिया है ।
भोट देने लोग Singapore से थोड़े न आये थे ।
तुमने जो सरकार चुनी वही तुम्हारी रक्षा करेगी ।

You have Sown …….. It’s time to reap ……..

बंगाली हिन्दू TMC की बीबी है …….. मारे चाहे प्यार करे ……. तुम साले कौन ?

मितरों , भाइयों भेनों , सहेले सहेलियों ।
यूँ तो ये किस्सा मैं अपने दोस्तों को पहले सुना चुका हूँ पर क्या है कि मेरे किस्से कहानियां तो पंडित भीमसेन जोशी के राग दरबारी सरीखे । जित्ती बार सुन लओ उत्ता इ कम ।
और दूसरी बात कि मेरे तो सैकड़ों नए दोस्त रोज़ बनते हैं । वो भी पढ़ लेंगे ।

तो बात तब की माने 1984 या 85 की है । तब जबकि मैं अभी student था और पहलवानी करता था । हम कहीं से कोई कुश्ती लड़ के लौट रहे थे । साथ में एक पहलवान दोस्त था …….. रात दो बजे हम अम्बाला स्टेशन पे उतरे और आगे हमें अगली ट्रेन पकड़ के पटियाला जाना था जो सुबह भोर में चलती थी । हम वहीं प्लेटफॉर्म पे इंतज़ार कर रहे थे । सामने एक दंपत्ति बैठे थे और उनका वाक् युद्ध चल रहा था । उन दिनों ये स्मार्ट फोन का ज़माना तो था नहीं सो हमारे समेत सभी लोगों का entertainment हो रहा था । वाक् युद्ध धीरे धीरे गरमा रहा था और पतिदेव सरेआम इज़राइल की माफिक behave कर रहे थे मने फूल दबंगई औ गुंडागर्दी …… पत्नी बेचारी फिलिस्तीन सी …… बेशक कमजोर थी पर जुबान लड़ाने से बाज न आती थी । चपड़ चपड़ बोले जाती थी ।
अंत में पति देव का धैर्य चूक गया औ उनकी मर्दानगी छलक गयी और उन ने बीवी को 2 – 4 हाथ धर दिए । मने इस से पहले कि अमरीका और UN कुछ समझ पाते फिलिस्तीन पिट गया । हम दोनों पहलवान कूद के पहुंचे …… बीच बचाव छूट छुड़इया कराया ……. बीवी बेचारी …… रोती कलपती ……. पिट के भी बोलने से बाज न आयी ।
हम दोनों वापस अपनी जगह आ बिराजे । और वो बीबी , माँ कसम सही जिहादिन थी ……. पिट पिटा के उसका वाक् युद्ध फिर चालू ………. और अबकी बार दोगुने उत्साह से …… पति महोदय भी शुरू हुए …….. बहुत जल्दी वाक् युद्ध फिर असली युद्ध में बदल गया और इबकै पत्नी जी को बालों से पकड़ के घसीट लिया । हम दोनों फिर पहुंचे छुड़ाने । पर उस जल्लाद ने अपनी घरवाली जमीन पे पटक रखी और बाल पकड़ के पीट रहा ……. अब बालों से घिरी औरत को छुड़ाना बड़ा मुश्किल काम ………. और वो पट्ठा ऐसा कि बाल न छोड़े ……. तो भैया मैंने , उसी रेलवे के waiting room में उसकी जो जम के सुताई की ….. दे लात , दे झापड़ , दे घुसण्ड …….. और पति महोदय की सारी मर्दानगी काफूर और वो इराक़ी सेना माफिक surrender …….. धराशाई ……..
पर उसके बाद जो हुआ वो अप्रत्याशित था । पति से पिटी हुई उस महिला के अंदर की शेरनी और क्षत्राणी अचानक जाग गयी और वो भी युद्ध भूमि में तीर तरवार लै कूद गयी और अपने पति की रक्षा को आगे आयी ……. खबरदार जो मेरे पति को हाथ लगाया ……. साले गुंडे बदमाश ……. और उसका रौद्र रूप देख अपन तो सहम गए भैया …… अरे बहिन जी ……. ये आपको मार रहा था हम तो बचाने आये थे ……
खबरदार मेरे पति को कुछ कहा तो ……. भला है बुरा है ….. जैसा भी है
मेरा पति मेरा देवता है । मारे चाहे पीटे , उसकी मर्जी …….. तुम साले कौन ?

अपन ने भैया तुरंत cease fire किया और सेनाएं वापस barrack में आ गयीं ।
उसके बाद भैया , पति पत्नी में जो प्यार उमड़ा ……. सफ़ेद कबूतर उड़ाये जाने लगे …… मने एकदम अमन की आशा हो गयी ……. बीबी ने साड़ी के पल्लू से पिटे हुए पति को धोना पोंछना चाटना पुचकारना जो शुरू किया …….. मेरा वो दोस्त एक नंबर का हंसोड़ विदूषक एकदम कॉमेडियन था ……. उनका ये प्रेमआलाप देख वो हँस हँस के दोहरा हुआ जाता था ……. उधर पति पत्नी प्रेम रस में विभोर …….. दुनिया जमाने की रुसवाइयों से दूर ….. पत्नी पति की सेवा किये जाती थी ।

उधर उज्जैन में सुरेश भाई चिपलूणकर उज्जैन में आक्रोश मार्च निकाल रहे हैं ।
कहते हैं कि मोमता दी के बांग्लादेश में हिन्दू पिट रिया है …… मेरे कू आकरोस हो रिया …… मेरे से हिन्दू की पिटाई देखी नी जा री …… हाय हाय …… मार डाला रे ……. सब लोग मिल के बंगाली हिन्दू के ले रे …… मेरे को बुरा लग रिया ……..

अबे बंगाल का हिन्दू gang bang का मजा ले रिया …… लेने दो उसको …… secularism का मजा ले रिया …… लेने दो …….. पहले ये तो देख लो कि हाय हाय कर रहा है या aaaaah aaaaah ……..
काहे को बेचारे का orgasm खराब कर रहे हो ?
बंगाली हिन्दू TMC की बीबी है …….. मारे चाहे प्यार करे ……. तुम साले कौन ?

Let the Orgy continue ………

बहु कोणीय चुनाव में एक एक भोट माने रखता है

इस समय जब कि मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ , मुलायम सिंह के लखनऊ आवास पे सुलह का अंतिम प्रयास चल रहा है । शिवपाल और अखिलेश दोनों को आमने सामने बैठाया गया है ।
ये कहना बहुत आसान है कि पूरी पार्टी और सभी विधायक अखिलेश के साथ शिफ्ट कर गए हैं और अब वही असली समाजवादी पार्टी हैं ।
काश चुनावी लोकतंत्र में सब कुछ इतना ही सीधा , सरल और सपाट होता ।
माना कि चुनाव में पार्टी का बहुत बड़ा महत्त्व है ।
पर प्रत्याशी भी महत्वपूर्ण होता है ।
और तब जब कि पार्टी विभाजित हो दो फाड़ हो गयी हो तो प्रत्याशी का महत्त्व 100 गुना बढ़ जाता है । चुनाव में जब बहुकोणीय संघर्ष होता है तो एक एक भोट का महत्त्व होता है ।

आपको एक किस्सा सुनाता हूँ । बहुकोणीय संघर्ष में क्या होता है ।
2014 लोस चुनाव होने वाले थे । हमारे गाज़ीपुर लोस क्षेत्र से भाजपा के जुझारू नेता , अरुण सिंह जिन्हें राजनाथ का वरद हस्त था वो एक Gypsy ले के घूमने लगे थे । आश्वस्त थे कि टिकट पक्का है ।
ऐन मौके पे भाजपा ने टिकट मनोज सिन्हा जी को दे दिया और आहत अरुण सिंह बागी हो गए ।
उधर सपा ने डेढ़ साल पहले से बाँट दिया गया एक टिकट काट के शिवकन्या कुशवाहा को साइकिल पे चढ़ा दिया ।
हाथी पे कैलाश नाथ यादव सवार थे ।
उधर संभल से बाहुबली DP Yadav चले आये और मुख्तार अंसारी के समर्थन से चुनाव लड़ गए ।

Final result इस प्रकार रहा ।

Bjp(मनोज सिन्हा ) 3,06,000
SP ( शिवकन्या कुशवाहा ) 2,74,000
Bsp. (कैलाश जादो ) 2,41,000
Dp yadav ( मुख्तार अंसारी ) 59,000
Arun singh बागी 34,000

अब इस मुकाबले का विश्लेषण कीजिये ।
यादव 3 जगह बंटे । सपाई यादव शिवकन्या की झोली में , मौक़ा परस्त बिकाऊ यादव बसपा के कैलाश यादव की झोली में , progressive राष्ट्रवादी विकासवादी यादव मोदी लहर में बह के भाजपा की झोली में जा गिरे ( जी हाँ , 2014 में गाज़ीपुर में भाजपा को यादवों का बम्पर भोट मिला था ) .

कुछ गए गुजरे अहीर DP यादव के टुकड़े भी तोड़ते पाये गए ।
मुसलमान सपा और मुख्तार अंसारी में बंटे पर ज़्यादातर सपा में गिरे । कुछ 10 या 20 % मुख्तार अंसारी समर्थित DP जादो की झोली में गिरे ।
अरुण सिंह भाजपा के बागी हुए और 34,000 भोट का नुक्सान किये । मनोज सिन्हा ने बड़ी मुश्किल से 32,000 की लीड से चुनाव जीता ।

अब सुनिये …… DP Yadav न होते तो सपा जीत जाती ।
अरुण सिंह बागी न होते तो भाजपा के मनोज सिन्हा 70,000 के ठीक ठाक मार्जिन से जीतते ।
बसपा कैलाश यादव को टिकट न दे के अगर किसी अन्य जाति वाले को टिकट दे देती तो शायद सपा ये सीट 2 लाख के भारी अंतर से जीतती ।
अगर गाज़ीपुर से शिवकन्या कुशवाहा को टिकट न देती तो 90% कुशवाहा वोट भाजपा को मिलता पर अब 70 % से ज़्यादा शिवकन्या / सपा की झोली में जा गिरा ।

इस उदाहरण को ध्यान में रखते हुए सपा की वर्तमान कलह पे नज़र दौड़ाइये ।
अगर वाकई अखिलेश शिवपाल में सुलह न हुई तो शिवपाल भी 403 प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे ।
हर सीट पे 2 – 4 सपाई ऐसे हैं जो पिछले 20 साल से दिन रात एक कर जमीनी राजनीति करते हैं और अपनी अपनी जाति बिरादरी समूह वर्ग धर्म में ठीक ठाक पकड़ रखते हैं । ऐसा कोई प्रत्याशी अखिलेश का बागी हो मुलायम सिपाल के आशीर्वाद से चुनाव लड़ जाए तो 10 – 20 या 50,000 वोट ले मारेगा ।
और दो बंदरों की लड़ाई में न जाने कौन सा तीसरा बन्दर बाजी मार जाए ।

सपा की लड़ाई असली है । जो तलवारें निकली वो भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली होगा ।
ऊपर से चाहे जो कहें , समझ अखिलेश और सिपाल दोनों रहे हैं ।
मोदी की आंधी नहीं सुनामी आएगी ये भी जानते हैं दोनों ।
इसीलिए सुलह का अंतिम प्रयास हो रहा है ।
पर कुछ भी हो …….. शिवपाल को राजनीति में relevent रहने ज़िंदा रहने के लिए इस बार अखिलेश का सूपड़ा साफ करना बहुत ज़रूरी है ।
इस चुनाव में शिवपाल के आदमी सरेआम भाजपा के लिए भोट मांगते गिराते दिखें तो मुझे ज़रा भी ताज्जुब न होगा ।
मैंने 2009 में इसी बनारस में कांग्रेसी अजय राय को भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के लिए भोट गिरवाते देखा है ।

Beware of the old Fox ……..

नमाजवादी कुनबे में जो घमासान मचा है उसपे मैं पिछले 3 दिन में काफी कुछ लिख चुका हूँ ।
जैसा कि मैंने लिखा था कि इतिहास अपने को दोहरा सकता है ।
जैसे 1969 में इंदिरा गांधी को जब कांग्रेस से निकाल दिया गया तो समूची कांग्रेस मय भोटर उनके साथ चली गयी ।
इंडीकेट ही असली कांग्रेस बन गयी । कामराज और निजलिंगप्पा का सिंडिकेट झंडू कौड़ी के तीन हो के रह गए ।
आज नमाजवादी पार्टी में जो खुली बगावत हुई और रामगोपाल वर्मा और कलेस जादो ने जिस तरह एक असंवैधानिक अवैध अधिवेशन बुला के पार्टी पे अवैध कब्जा कर लिया …….. और सत्ता की चाशनी पे मंडराने वाली मक्खियों की तरह सब विधायक अखिलेश के साथ जा खड़े हुए उस से बहुत ज़्यादा प्रभावित होने की ज़रूरत नहीं ।
क्योंकि अखिलेश इंदिरा गांधी नहीं हैं और मुलायम कामराज नहीं हैं और UP में समाजवादी पार्टी 60 के दशक की कांग्रेस नहीं है ।
60 के दशक की कांग्रेस उस जमाने की कांग्रेस थी जब विपक्ष नाम की कोई चीज़ नहीं थी । पूरे देश पे एक छत्र राज था कांग्रेस का । कांग्रेस के टिकट पे कुत्ता भी खड़ा हो तो जीत जाता था । कांग्रेस के लिए राजनीति खाली मैदान थी ।
आज UP में राजनीति के 4 ध्रुव हैं । भाजपा उफान पे है । सपा को बसपा और भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है । इस त्रिकोणीय संघर्ष में सपा अगर पहले नंबर पे आ सकती है तो तीसरे पे भी खिसक सकती है । सिर्फ एक % का swing हार को जीत में बदल सकता है या फिर सूपड़ा साफ कर सकता है ।
ऐसे में ऐसी खुली बगावत वो भी मुलायम सिंह से ?
मुलायम कामराज नहीं हैं । मुलायम की यूपी के अहीरों में कितनी पैठ और कितनी पकड़ है इसका अंदाज़ा शायद आपको न हो ।
अखिलेश और रामगोपाल को चाहिए कि वो इस बूढ़ी लोमड़ी से सतर्क रहे ।
Beware of the old Fox …….. हो सकता है कि मुलायम बेटे के सामने पसीज जाएँ और झुक जाएँ । पर अगर ……. खुदा न खास्ता …… मुलायम के अहम् को ठेस लगी ……. और उन ने अगर कमर कस ली …….. तो अहिरानी आज भी उनके नाम पे खड़ी हो जायेगी ।
यदि सचमुच मुलायम झोली पसार के अहिरानी में खड़े हो गए ……. और अपने बुढापे का वास्ता दे के एक इमोशनल सी स्पीच ……… सिर्फ एक स्पीच पूरा चुनाव पलट देगी ( सपा के लिए ) और अखिलेश और राम गोपाल जैसों की खटिया खड़ी कर देगी …….. अखिलेश और राम गोपाल की पार्टी की जमानत नहीं बचेगी ।
अब देखना ये है कि मुलायम और शिवपाल कितना fight back करते हैं ।
5 Jan को जो अधिवेशन बुलाया है देखना होगा कि उसमें कौन कौन आता है ।
अगर ये मान भी लिया जाए कि शिवपाल की लिस्ट के सभी 403 प्रत्याशी भी अगर अखिलेश खेमे में चले गए तो भी 150 से ज़्यादा के टिकट कटेंगे । बाकी बची 250 सीटों पे नए प्रत्याशी खोजना शिवपाल के लिए एक दिन का काम है ।
सपा के कुल 3 bank खाते हैं । एक दिल्ली में जिसके signatory राम गोपाल है पर उसमे funds नाम मात्र के हैं । बाकी दो खाते सैफई और लखनऊ में हैं । इसके signatory मुलायम हैं ।
अगले कुछ दिनों में party symbol के लिए लड़ाई होगी । बहुत संभव है कि Cycle मुलायम शिपाल के पास रह जाए और अखिलेश नए symbol पे चुनाव लड़ें ।
ऐसी स्थिति में क्या शिवपाल के वो 400 प्रत्याशी हर सीट पे क्या 5000 वोट भी नहीं काटेंगे ?
चतुष्कोणीय लड़ाई में जबकि भाजपा उफान पे हो और मुसलमान दिग्भ्रमित हो 3 जगह बँट बिखर रहा हो ……. हर सीट पे 5000 भोट का नुक्सान सफाया कर देगा ।
शिवपाल और मुलायम इतने भी गए बीते नहीं जो 5000 भोट को मोहताज हो जाएं ।
मुलायम अगर पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन भी गए तो अकेले शिवपाल भी इतने कमजोर नहीं कि हर सीट पे 5 या 10 हज़ार वोट काट के अखिलेश को औकात न बता दें ………..

नामाजवादी कुनबे की ये लड़ाई कोई नाटक नौटंकी नहीं एकदम असली है ।
तलवारें भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली ही होगा ।

चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

पूर्वांचल में अपने होशो हवास में , भरसक , कोई बाऊ साहब लोगों मने ठाकुरों को कोई दूकान मकान भाड़े पे नहीं देता । मने दूकान खाली पड़ी रहे ऊ मंजूर बाऊ साहब को भाड़ा पे नहीं देंगे ।
और ई रेपुटेसन कोई रातों रात नहीं बन गयी है ……. बाऊ साहब लोग की सैकड़ों साल की चोरकटई से ई रेपुटेसन बना है ……. मने बाऊ साहब को मकान दूकान भाड़े पे दिया त ऊ गयी …..
अब करा लिहा खाली ……. जा लड़ा कोट कचहरी ……. जादो जी लोग का रेपुटेसन कुछ भिन्न है ।
मने जादो जी लोग भड़इता मने किरायेदार बन के मकान दूकान पे कब्जा नहीं करेगा ।
ऊ सब Virgin land खोजता है …… मने खाली पिलाट …….
अगर आपका शहर में कहीं कोई खाली पिलाट पड़ा है ……. तो कोई यदुवंशी उसको कई साल तजबीजता रहेगा …… एकदम बकुल ध्यानं …… मने तब तक इन्तजार करेगा जब तक कि कोई यादवी सरकार सत्ता में न आ जाए ……. और उसको जैसे ही कोई अनुकूल अवसर मिला …… ऊ आपके प्लाट पे 4 ठो गोरु गैया लिया के रातों रात तबेला खोल देगा ……. यादव डेरी फार्म …… इहाँ सांड भैंसा का सुद्ध दूध मिलता है ……. अब आप लाख सिर पटक के मर जाये …… थाना दारोगा कप्तान …… सब कीजिये ……. जादो जी कब्जा नहीं छोड़ेंगे । तब तक जब तक कि कोई नयी सरकार न आ जाए जो आपकी बात सुने और जादो जी को बांस कर दे …….. आज ऊपी में नामाजवादी सरकार के ऊपर सबसे बड़ा कलंक यही है ……. सरकारी और पिराईभेट …… सभी जमीनों पे एकदम निर्विकार भाव से अवैध कब्जा …….. मने किसी की भी संपत्ति में जबरदस्ती घुस जाना और लाठी के बल पे कब्जिया लेना ।

अब आज का लखनऊ का ही किस्सा देख लीजिए ।
सपा कार्यालय पे जबर्दस्ती कब्जा ……. चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

जादो जी लोग चाहे जौना पोजीसन में आ जाएँ …… अवैध कब्जा का नैसर्गिक गुण सामने आ ही जाता है ।

क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..

Competitive Sports में एक सूत्र वाक्य है ।
क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..
मने सारी तैयारी के बाद जो चीज़ सबसे महत्वपूर्ण होती है वो है जी दारी ……. मने fighting Spirit , killing Spirit ……. मानसिक दृढ़ता ……..
हमारे यहाँ देसी Indian Style Wrestling जो मिट्टी के अखाड़ों में लड़ी जाती है ……. कुश्ती के दंगल होते हैं । इन इनामी दंगलों में जो सबसे बड़ी ईनामी कुश्ती होती है वो अक्सर लाखों की होती है । हरियाणा ,पंजाब , हिमांचल और महाराष्ट्र में पहली कुश्ती अक्सर लाख डेढ़ लाख की होती है । महाराष्ट्र में तो 5 लाख तक की । इसमें टाइम भी खुला होता है । इसे आर पार की कुश्ती कहते हैं । ऐसी कुश्तियां घंटा डेढ़ घंटा भी चल सकती है । मने जब तक हार जीत न हो तब तक भी चल सकती है । पिछले साल महाराष्ट्र के एक दंगल में ऐसी ही एक कुश्ती साढ़े तीन घंटा चली । पुराने जमाने में ancient Olympics में ऐसी कुश्तियां 10 – 12घंटे तक चल जाया करती थीं ।
modern Olympics में भी 1904 या 1908 वाले olympic में एक कुश्ती 19 घंटे चली बतायी जाती है । पहले दिन दस या 12 घंटे चली । फिर उसमे अवकाश दे दिया गया क्योंकि पहलवान जी लोग तो अखाड़े में खड़े थे पर दर्शक और आयोजक बैठे बैठे थक गए । इसलिए ये तय हुआ कि अब इसमें अवकाश दिया जाए और हार जीत का फैसला कल हो ……. अगले दिन फिर 7 या 9 घंटे हुई तब जा के एक मल्ल ने हार मानी …….. इसके बाद ओलम्पिक आयोजन समिति ने हाथ जोड़ लिए कि भैया …… ई ना चोलबे ……. इसके नियम क़ानून कुछ बदलो और हार जीत तय करने का कोई और नियम बानाओ …… इस तरह धीरे धीरे इस Modern Olympic Style wrestling का विकास हुआ जिसमे हार जीत Points पे होने लगी और कुश्ती का समय सीमित किया गया । इसके अलावा , पहले सिर्फ Heavy Wt wrestling ही होती थी जिसमे सिर्फ भारी भरकम पहलवान ही भाग लेते थे और बेचारे छोटे मोटे आदमी के लिए कोई गुंजाईश न थी । कालान्तर में ये Weight Categories का चलन हुआ ……..परन्तु देसी कुश्ती में आज भी आर पार की कुश्तियाँ होती हैं ……. हालांकि कई आयोजन समितियां अब ये करने लगी हैं कि एक निश्चित समय के बाद point पे कुश्ती करा के हार जीत का फैसला कर लिया जाए जिस से कि सारा दिन लड़ने लड़ाने की नौबत न आये । जैसे 40 मिनट आर पार …… यदि इसमें चित पट न हो तो फिर 5 मिनट point की कुश्ती करा के फैसला अंको के आधार पे ।
हम कोच प्रशिक्षक अपने पहलवानों को हमेशा एक ही बात समझाते हैं कि देखो बेटा ……. जब कुश्ती होती है और जब तुम थक जाते हो …….. तो ये याद रखो कि सामने वाला भी लड़ रहा है ……. उसका भी उतना ही जोर लग रहा जितना तुम्हारा ……. वो भी उतना ही थका हुआ है जितने तुम ……. ऐसे में जीतेगा वो जो जीदारी करेगा ……. वो जिसमे killing spirit कायम रहेगी …….. सारा खेल जीदारी का है …….. लड़ाई में बाकी की सारी physical तैयारी तो coach के हाथ में होती है …… जैसे Strength , endurance , speed , technique , Strategy …….. पर ये जो जीदारी है न ……. ये साली जन्म जात होती है ……. हालांकि इसे भी improve करने की कोशिश तो हम करते ही हैं ……. तभी ये Sports Psychology नामक विज्ञान आया ……. हम इसमें खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं …….. मने इसमें खिलाड़ी को ये समझाने की कोशिश लगातार करते हैं कि भाई अपने आपको पहचान …… तू बहुत तगड़ा है …….
पर ऐसे में बहुत से पहलवान ऐसे होते हैं जो आपकी बात सुन के हाँ हूँ तो करता रहेगा पर उसकी body language ऐसी होती है जो कोच से कह रही होती है ……. अरे कोच साब …… क्यूं चूतिया बणा रहे हो ……. क्यों झूठ धका रहे हो ……
क्यों मने चने के झाड़ पे चढ़ा रहे हो …….. आपणे के बेरा मैं कितना बड़ा गांडू हूँ ……. मने कोच कितना भी जोर लगा ले , जब तक पहलवान जी दारी न धरे ……. वो खुद को गांडू मानना बंद न करे ……. कुछ नहीं हो सकता ……..

ऊपी में भी यही किस्सा दोहराया ना रहा है ……. सामने वाले की फटी पड़ी है ……. उसके पिछवाड़े के चीथड़े उड़े हुए हैं ……. फट के हाथ में आई हुई है ……. कुनबे में घमासान मचा है …… पार्टी दो फाड़ होने को है , पिछले 6 महीने से सुलह की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी है ………. संगठन तितर बितर छिन्न भिन्न हो चुका है …….. voter निराश हताश है और नए ठौर ठिकाने खोज रहा है और इसी दुश्मन को आपने 2014 में नंगा करके मारा है , घसीट घसीट के मारा है ……. आप उस से बेजोड़ तगड़े हैं …….. पर कुछ गांडू किस्म के लोग लगातार यही कह रहे है कि अजीत भाई ……. क्यों चने के झाड़ पे चढ़ा रिये हो …….. आप जानते नाही कि मोलायम और उसका बेटा अखिलेश कितना तगड़ा है और हम कितने बड़े गांडू ……. देख लेना वही जीतेंगे 2017 ……..
क्योंकि वो शेर और हम गांडू ……… इतनी छीछालेदर के बाद भी वही जीतेंगे और इतने तगड़े होने के बाद भी हम ही हारेंगे क्योंकि आप जानते ही नहीं कि हम कितने भयंकर किस्म के गांडू है …….

दुनिया की हर बीमारी का इलाज है , गांडू गर्दी का कोई इलाज नहीं

मोलायम के पास क्या बचेगा ?

Godfather……. Mario Puzo की अनुपम कृति
Francis Ford Coppola की काल जयी रचना ……. विश्व फिल्म इतिहास की महानतम रचना ।

अमेरिका की 5 माफिया families की कहानी है जिसके केंद्र में है Don Corleone की family …….. जिसका Don है Vito Corleone …….. Don का रोल किया था Marlon Brando ने …….. और इस रोल ने उन्हें अमर कर दिया ।
कहानी कुछ यूँ है कि Don एक drug तस्कर Solozzo के साथ काम करने का प्रस्ताव ठुकरा देता । Solozzo को लगता है कि Don पुराने ख्यालों का है जबकि उसका बड़ा बेटा Sonny शायद काम करने का इच्छुक है । इसलिए यदि Don को रास्ते से हटा दिया जाए तो बात बन सकती है ।
Solozzo डॉन पे जानलेवा हमला करा देता है । घायल Don अस्पताल में भर्ती है । इधर Solozzo दुबारा हमला करने की फ़िराक में है ।
उधर Don का गिरोह Solozzo से बदला लेने की तैयारी कर रहा है ।
तय होता है कि Solozzo को सुलह के बहाने बुला के ठोक दिया जाए ।
जो सुलह की बात करने जाएगा वही ठोकेगा ……..
सवाल है कि आखिर सुलह की बात कहाँ होगी ? वो स्थान गुप्त है ……..
हमारी ओर से बात करने कौन जाएगा ?
Solozzo को स्थानीय Police Captain संरक्षण दे रहा है । उसके सामने ह्त्या कैसे होगी ?
कौन करेगा ?
गिरोह इन सवालों से जूझ रहा है ……..
तय होता है कि Don का सबसे छोटा बेटा Michael Corleone जो की इस माफिया गिरी के धंदे में नहीं है और एक War Hero है , वो जाएगा सुलह की बात करने और वही करेगा ह्त्या …….
अब प्रश्न है कि सुलह की बात कहाँ होगी और वहाँ तक हथियार मने Gun कैसे पहुंचेगी ।
Sonny अपने मुखबिरों से पता लगा लेता है कि सुलह की बात एक Italian Restaurant में होगी ।
हथियार पहुंचाने की ड्यूटी Clemenza की है …….
तय ये हुआ कि Michael जब बात करने जाएगा तो Police कप्तान उसकी तालाशी ज़रूर लेगा ।
Michael बिना हथियार के होगा इसलिए दोनों निश्चिन्त हो जायेंगे ।
Michael बियर पिएगा । थोड़ी देर बाद wash room जाएगा । वहाँ flush के पीछे एक पिस्तौल tape से चिपका दिया गया है । Michael wash रूम से वापस आते ही फायर झोंक देगा ……..
Sonny माइकल को समझा रहा है । डरना मत ……. घबराना मत …….
फिर Clemenza से कहता है ……. और पिस्तौल ……. पिस्तौल पहुंचाने की जिम्मेवारी तुम्हारी ……..मैं ये नहीं चाहता कि मेरा भाई वहाँ मूतने के बाद हाथ में अपना *** लिए वापस आये ………

Sonny: Hey, listen, I want somebody good – and I mean very good – to plant that gun. I don’t want my brother coming out of that toilet with just his dick in his hands, alright?

नमाजवादी कुनबे की इस लड़ाई में मुझे ऐसा लगता है कि कुछ दिन बाद जब मोलायम यादव बाहर निकलेंगे तो उनके हाथ में सिर्फ उनका ढीला ढाला *** होगा …….. पार्टी और भोटर तो अखिलेश ले उड़ेंगे ………

He’ll come out with just his limp Dick in his hand ……..

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।

14 December 1903 …….. पहली उड़ान की कोशिश की पर असफल रहे ।
जो तथाकथित मशीन बनायी थी जिसे कहते थे कि हवा में उड़ जायेगी ….. वो टूट फुट गयी ।
17 Dec 1903 ……. उस टूटी फूटी मशीन को ठीक ठाक कर फिर से कोशिश की ।।
पहली उड़ान सिर्फ 120 फीट की थी । जमीन से ऊंचाई सिर्फ 10 फुट थी और गति सिर्फ 30 मील …….
राईट बंधुओं ने अपने पिता को टेलीग्राम भेज के उड़ान की सफलता की सूचना दी और स्थानीय प्रेस को भी सूचित करने को कहा ।
स्थानीय अखबार Dayton Journal ने इसे कोरी गप्प और सफ़ेद झूठ कह के खारिज कर दिया ।
अगले 3 साल राईट बंधुओं को लोगों को ये समझाने में बीत गए कि वाकई उड़ान सफल रही और दुनिया को बदल देने वाला आविष्कार हो चुका है ।
पर कोई मानने को तैयार न था । समूचे यूरोप के अखबार राईट बंधुओं को Bluffers कह के पुकारते थे । राईट बंधुओं ने अमेरिका और यूरोप की सरकारों से संपर्क किया पर किसी ने कोई दिलचस्पी न दिखाई । US Army ने राईट बंधुओं के विमान को कोई महत्त्व न दिया ।
फिर राईट बंधुओं ने किसी तरह पूँजी जुटा के France में एक Air Show आयोजित किया जिसे हज़ारों लोगों ने देखा । तब जा के यूरोपीय अखबारों ने राईट बंधुओं से सार्वजनिक क्षमा याचना की ।
July 1909 में US Army ने राईट बंधुओं से एक करार किया जिसमे वो ऐसा विमान बनाते जिसमे पायलट के साथ एक सहयात्री , 1 घंटे की उड़ान और न्यूनतम गति 40 MPH होनी ज़रूरी थी ।

1913 तक राईट बंधुओं ने US Army के लिए कुल 6 Model C विमान बनाए और वो सारे crash कर गए । कुल 13 आदमी ” शहीद ” हुए ।

कुल मिला के उन दिनों राईट बंधुओं को झूठा , फरेबी , मक्कार , धोखेबाज , Fraud , फेंकू इत्यादि नामों से बुलाया जाता था और हवा में उड़ने वाली मशीन को अफवाह , झूठ का पुलिंदा , और Failure कहा जाता था ।

शेष इतिहास है ।

यूँ सुनते हैं कि नोटबंदी भी फेल हो गयी है और मोदी भी फेंकू , झूठा , मक्कार , धोखेबाज , भ्रष्ट है और नोटबंदी 8 लाख करोड़ रु का mega Scam है ।

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।