स्वाति सिंह

Richard Hadley अपने जमाने के महान गेंदबाज हुए ।
किसी जमाने में उनके नाम सर्वाधिक test wicket लेने का record था ।
मैंने एक बार उनका एक interview देखा था ।
उनसे पूछा गया कि एक गेंदबाज के रूप में आपकी सफलता का राज क्या है ?
उन्होंने बताया कि मैं हर गेंद पे batsman को shot खेलने के लिए ललचाता हूँ । मैं ऐसी गेंद फेंकता हूँ कि बल्लेबाज उसपे shot खेलने का लोभ संवरण न कर पाए ।
यदि बल्लेबाज ने आपकी गेंद छोड़ दी तो उसके out होने की संभावना ख़त्म ?
अच्छे बल्लेबाज अच्छी या खतरनाक गेंदों को छोड़ दिया करते हैं ।

खेला खाया पत्रकार भोत हरामी होता है ।
वो सामने बैठे नेता को अपने सवालों में फंसा लेता है ।
कल अक्ललेस जादो और राहुल G की joint press conference में पत्रकारों ने राहुल G को फिर फंसा लिया ।
पूछा , गठबंधन क्यों ?
राहुल G ने जवाब दिया भाजपा को रोकने के लिए ।
लोगों ने सुना मोदी जी को रोकने के लिए ।
अब कांग्रेस को लोगों को ये बताना समझाना पडेगा कि वो मोदी को क्यों रोकना चाहती है ।

आज से कोई 6 महीना पहले , लोगों ने दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को पहली बार TV पे गरजते बरसते शेरनी की माफ़िक़ दहाड़ते देखा ।
इस से पहले उनको कोई जानता नहीं था । वो तो एक सामान्य गृहणी थीं ……. घर परिवार के कामों में उलझी ।
दयाशंकर सिंह भी भाजपा के एक स्थानीय नेता थे ।
एक पत्रकार के सवाल के जवाब में उनकी एक slip of tongue ने बवाल खड़ा कर दिया जब कि उन्होंने भेन मायावती द्वारा पैसे ले के टिकट बांटने को वेश्याकर्म बता दिया । तब ऐसा लगा कि दयाशंकर सिंह ने भाजपा का बहुत बड़ा नुकसान कर दिया । भाजपा ने तुरंत damage control करते हुए उन्हें पार्टी से बर्खास्त किया । फिर भी damage तो हो ही चुका था ।
अब दयाशंकर सिंह की इस बदज़ुबानी का पोलिटिकल लाभ उठाने में बसपा जो जुटी तो जोश जोश में उनके नेता नसीमुद्दीन ने दयाशंकर सिंह को अपनी बेटी पेश करने के नारे लगवा दिए ।

उनके इस एक नारे ने भाजपा का सारा damage control कर दिया और जो भाजपा कल तक defensive थी अचानक offensive हो गयी ।
भाजपा के managers ने तुरंत स्वाति सिंह को समझा बुझा पढ़ा लिखा के मैदान में उतार दिया ।
अब स्वाति सिंह National TV पे थीं और दहाड़ रही थीं …….. उस दिन लोगों ने उनमे एक घायल शेरनी देखी । उन्होंने सीधे सीधे पूछ लिया …….. बोलो नसीमुद्दीन …….. कहाँ पेश करूँ अपनी बेटी ?

TV पे पत्रकार उनसे बड़े तीखे सवाल पूछ रहे थे । वो live debate में थीं । माहौल बेहद गर्म और तल्ख़ था । स्वाति सिंह को seasoned politician नहीं थी । पर इसके बावजूद वो एक भी सवाल में फंसी नहीं , फिसली नहीं ।
न उनकी कभी जुबां लड़खड़ाई ……… और उनके तेवर ऐसे कि दुनिया दीवानी हो गयी । और देश के सामान्य आदमी ने भी उनमे एक नेत्री खोज ली ।
भाजपा भी गदगद थी । उन्हें बैठे बिठाये एक star मिल गया था ।
स्वाति सिंह ने अपनी योग्यता दुनिया को दिखा दी थी । और ये तभी तय हो गया था कि उनको पार्टी कोई बड़ी भूमिका देने जा रही है ।
पहले प्रदेश की महिला मोर्चा की अध्यक्ष , फिर National TV पे पार्टी का प्रतिनिधित्व , उसके बाद परिवर्तन यात्रा में उनको सबसे आगे रखना और अब लखनऊ की safe seat सरोजिनी नगर से टिकट ………

स्वाति सिंह की political यात्रा शुरू हो चुकी है ।
चुनाव बाद वो और आगे जाएंगी ।

स्वाति सिंह को शुभकामनायें ………

मुरादाबाद के ठठेरे की कहानी

1997 में जब की देस दुनिया में ये खबर फैली की प्रियंका गांधी सादी करने जा रही हैं तो हमारे सैदपुर में एक बा0 koऊ साहब हुआ करते थे । बड़े जमींदार थे ।
पुराने कांग्रेसी ……… वो बड़े आहत हुए ।
एक दिन उनका दर्द छलक आया ।
बोले , अरे भाई तनी देखा लोगन …… ई प्रियंकवा कौने ठठेरा से बियाह करे जात हौ ……. अपने मोहल्ला में एक से बढ़िया एक लरिका घुम्मत हउअन …….. ऊ काहें ठठेरा से बियाह करत हिय …….

जब ये खबर आयी कि प्रियंका मुरादाबाद के किसी ठठेरे से बियाह करेंगी तो मुल्क वाकई एक बार सन्न रह गया था । ठठेरा UP की एक बिरादरी होती है जो पुराने जमाने में बर्तन इत्यादि बनाया करते थे ।

उनका असली नाम Robert बढ़ेड़ा था । बढ़ेड़ा पंजाब के खत्री होते हैं ।
उनके पिता का नाम श्री राजेंद्र बढ़ेड़ा था । राजेंद्र जी का जन्म अखंड भारत के मुल्तान में हुआ था । जब 1947 में देश का विभाजन हुआ तो उनका परिवार मुरादाबाद चला आया ।
राजेंद्र जी बाढ़ेड़ा का विवाह Maureen McDonah नामक Scottish मूल की एक ब्रिटिश महिला से हुआ । ये विवाह कब कैसे किन परिस्थितियों में हुआ इसके बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है ।
बहरहाल राजेंद्र भाई बाढ़ेड़ा की Maureen से 3 संतानें हुई ।
Robert , Richard और एक लड़की Michell .
राजेंद्र जी का मुरादाबाद में brass metal यानी पीतल के बर्तनों और कलात्मक वस्तुओं का निर्यात का छोटा मोटा व्यवसाय था । परिवार के हालात बहुत अच्छे न थे और Maureen दिल्ली के एक play school में पढ़ाती थीं । न जाने किन अज्ञात सूत्रों संबंधों के कारण उनके बच्चों का दाखिला दिल्ली के British School में हो गया जिसमें उस समय देश के प्रधान मंत्री की बेटी प्रियंका पढ़ती थी ।
13 साल की प्रियंका और Michell क्लास मेट थीं और मिशेल ने ही रोबर्ट की दोस्ती प्रियंका से कराई ।
स्कूल और स्कूल के बाहर भी प्रियांका सुरक्षा कर्मियों से घिरी रहती थीं ।
शाही परिवार के बच्चों के चूँकि बहुत कम दोस्त थे लिहाजा मिशेल और robert दोनों 10 जनपथ आने जाने लगे । धीरे धीरे Robert की दोस्ती राहुल से भी हो गयी ।
सोनिया निश्चिन्त थीं कि प्रियंका की सहेली मिशेल और राहुल के दोस्त Robert हैं ।
पहली बार सोनिया के सिर पे बम तब फूटा जब एक दिन प्रियंका एक अनाथ आश्रम के बच्चों की सेवा के बहाने घर से निकली और अपनी माँ को बिना बताए Robert के घर मुरादाबाद पहुँच गयी । इधर दिल्ली में चिहाड़ मची । वापस लौटी तो पूछ ताछ हुई । IB ने सोनिया को खबर दी कि आपकी बेटी Robert से इश्क़ लड़ा रही है । जब सोनिया ने मना किया तो प्रियंका ने बगावत कर दी । और अपनी माँ से दो टूक कह दिया कि वो Robert से शादी करने जा रही हैं ।
इस खबर से congress में हड़कंम्प मच गया ।
राजनैतिक जमात में इसे ख़ुदकुशी करार दिया गया ।
प्रियंका को उंच नीच समझाने की जिम्म्मेवारी अहमद पटेल , जनार्दन द्विवेदी और मोतीलाल वोरा को दी गयी । इन सबने प्रियंका को उनके उज्जवल राजनैतिक भविष्य की दुहाई देते हुए समझाया कि किस तरह Robert एक Mr Nobody हैं , एक mismatch हैं और आगे चल के एक liability बन जाएंगे ।
पर ये कम्बख़त इश्क़ …….जब दिल आ जाए गधी पे तो परी क्या चीज़ है ।
इधर प्रियंका अड़ गयी उधर सोनिया टस से मस न होती थीं ।
इसके अलावा राजेंद्र बाढ़ेड़ा के परिवार की IB report भी माकूल न थी ।
परिवार पुराना संघी था ।
राजेंद्र जी का परिवार लंबे अरसे से , मने पाकिस्तान बनने से पहले से ही संघ के सक्रीय सदस्य था ।
इनके परिवार ने मुरादाबाद शहर की अपनी जमीन सरस्वती शिशु मंदिर के लिए दान कर दी थी और राजेंद्र जी के बड़े भाई श्री उस शिशु मंदिर के आज भी ट्रस्टी हैं ।
ऐसे में एक पुराने जनसंघी परिवार में गांधी परिवार के चश्मे चिराग का रिश्ता हो जाए , ये कांग्रेस की लीडरशिप को मंजूर न था । ऐसे में Maureen McDonagh ने न जाने ऐसी कौन सी गोटी चली और अपने ब्रिटिश मूल के Roman Catholic इतिहास का क्या पव्वा लगाया कि अचानक सोनिया गांधी मान गयी । वैसे बताया ये भी जाता है कि उन दिनों भी congress leadership ये जान चुकी थी कि राहुल गांधी बकलोल बकचोद हैं । थोड़ा बहुत चानस इस प्रियंकवा से लिया जा सकता है बशर्ते कि इसकी शादी किसी हिन्दू लीडर के परिवार में करा दी जाए । पर होइहैं वही जो राम रचि राखा ।
शादी इस शर्त पे तय हुई कि राजेंद्र बाढ़ेड़ा का परिवार गान्ही परिवार से किसी किस्म का मेलजोल रिश्तेदारी नहीं रखेगा और इनकी political powers का लाभ उठाने का कोई प्रयास नहीं करेगा ।
अंततः Feb 1997 में प्रियंका गांधी की शादी robert बाढ़ेड़ा से हो गयी ।
सोनिया गांधी को इस बाढ़ेड़ा surname से बहुत चिढ थी । और ये नाम इन्हें politically भी suit न करता था सो सबसे पहले इन ने इसे बदल के बाढ़ेड़ा से Vadra किया । यूँ भी ये परिवार नाम बदल के देश दुनिया को बेवक़ूफ़ बनाने में बहुत माहिर है ।
इस परिवार ने कब कब कैसे कैसे नाम बदल के देस को चूतिया बनाया इसपे पूरी एक पोस्ट बनती है ।

बहरहाल प्रियंकवा की सादी मुरादाबाद के ठठेरे से हो गयी ।
इस बीच Vadra परिवार को ये सख्त हिदायत थी कि वो लोग कभी 10 जनपथ में पैर नहीं रखेंगे ।
अलबत्ता वक़्त ज़रूरत पे प्रियंका गांधी अपनी ससुराल हो आती थीं ।
पर रोबर्ट ” वाड्रा ” को अपने परिवार से तआल्लुक़ रखने की इजाज़त न थी ।
गौर तलाब है कि प्रियंका से Robert की मुलाक़ात Michell ने कराई थी ।
पर अब उसी Michell का प्रवेश भी गांधी household में वर्जित हो गया था ।
फिर एक दिन Michell की एक car दुर्घटना में संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गयी , जब कि वो दिल्ली से जयपुर जा रही थीं ।
उसके चंद दिनों बाद ही एक और अजीब घटना घटी ।
दिल्ली के एक वकील अरुण भारद्वाज ने दिल्ली के दो अख़बारों में Robert Vadraa के हवाले से ये इश्तहार दिया कि मेरे मुवक्किल श्री Robert Vadra का अपने पिता श्री राजेंद्र vadra , और भाई Richard Vadra से कोई सम्बन्ध नहीं है ।

यहां तक तो ठीक था । इसके बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय से AICC के letter pad पे देश के सभी कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों , प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं कांग्रेस legislative पार्टियों को सोनिया गांधी की तरफ से एक पत्र भेजा गया जिसमें सभी को ये स्पष्ट निर्देश था कि मुरादाबाद के हमारे समधी और प्रियंका जी के जेठ जी की किसी सिफारिश पे कोई अमल न किया जाए और उन्हें किसी प्रकार के लाभ न पहुंचाए जाएं । वो बात दीगर है कि आगे चल के इन्ही congi मुख्य मंत्रियों अशोक गहलोत और भूपेंद्र हुड्डा के राज में मुरादाबादी ठठेरा देखते देखते ख़ाकपति से अरब पति व्यवसायी बन गया ।

इस घटना क्रम के कुछ ही महीनों बाद अपनी प्रियंका दीदी के जेठ जी , यानी अपने रोबर्ट जीजू के बड़े भाई Richard भाई ने पंखे से लटक के आत्महत्या कर ली ।
प्रियंका दीदी के ससुर जी , यानी रोबर्ट जीजू के पिता जी , श्री राजेंद्र भाई वाड्रा , जिनसे की robert vadra जीजू ने बाकायदा affidevit दे के संबंध विच्छेद कर लिया था , यानि कि बेटे ने बाप को बेदखल कर दिया था , वो राजेंद्र भाई गुमनामी और मुफलिसी में दिन काटने लगे ।
उनको लिवर सिरोसिस हो गया । उनका इलाज दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफ़दर जंग हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में हुआ । कुछ दिन बाद राजेंद्र वाड्रा सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज ले , दिल्ली में ही AIIMS के नज़दीक एक सस्ते से lodge के एक कमरे में पंखे से लटकते पाये गए । उनकी जेब में सरकारी अस्पतालों की दवाई का एक पुर्जा और 10 रु का एक नोट पाया गया ।
सोनिया गांधी की दिल्ली में पुलिस ने अच्छा किया कि postmortem न कराया वरना पेट में भूख और मुफलिसी के अलावा कुछ न मिलता ।
यूँ बताया जाता है कि जब पुलिस राजेंद्र वाड्रा की लाश उस lodge से ले जाने लगी तो उसके मालिक ने अपना 3 दिन का बकाया किराया सिर्फ इसलिए मुआफ़ कर दिया कि मरहूम शक़्स अपनी प्रियांका दीदी का ससुर था ।

उसी शाम दिल्ली के एक श्मशान में राजेंद्र वाड्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिसमें सिर्फ प्रियंका गांधी , सोनिया गांधी और राहुल बाबा शामिल हुए । शेष लोगों को सुरक्षा कारणों से अंदर नहीं आने दिया गया । Robert तो पहले ही बेदखल कर चुके थे ।

राहुल प्रियंका की कहानी

वंस अपान ए टाइम , किसी नगर में एक माफिया परिवार में एक नया माफिया उग रहा था ।
एक बार उसने औकात से ज़्यादा बड़ी हड्डी गटक ली ।
सो गले में जा फँसी ।

फिर उसकी हत्या कर दी गयी ।
तब जबकि वो अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आया था ।
उसी स्कूल के सामने ही उसे गोलियों से भून दिया गया ।
कुल 20 गोलियां मारी गयी ।
जिस समय उसपे एकदम नज़दीक से गोलियां मारी जा रही थीं , उसके दोनों बच्चे गाडी की पिछली seat पे बैठे थे ।
5 बरस के बच्चे के सामने ताबड़ तोड़ गोलियां बरस रही हों ……. उसके बाप के ऊपर ……. और एक बच्चे का बाप उसके सामने इतनी हिंसक इतनी निर्मम मौत मार दिया जाए , ये एक नन्हे बच्चे के लिए बड़ा Traumatic experience होता है । उसकी Psyche मने उसके मन पे लगे वो घाव आजीवन नहीं भरते ।
ऐसे बच्चों को इस सदमे से उबारने के लिए professional help दी जाती है । इस विषय के विशेषज्ञ Psychiatrist , मनोवैज्ञानिक इन बच्चों को बीसियों सालों तक लगातार counseling देते हैं तब जा के बड़ी मुश्किल से वो इस सदमे से उबर पाते हैं ।

जो लोग राहुल और प्रियंका गांधी को नज़दीक से जानते हैं वो बताते हैं कि ये दोनों भाई बहन Autism नामक बीमारी के रोगी हैं ।
बेचारे इन दोनों बच्चों का बचपन बहुत बुरा बीता ।
1984 में जब इनकी दादी PM थी तो देश में हालात बहुत बुरे थे और इनके परिवार को बहुत ज़्यादा ख़तरा था ।
1982 में इनके चाचा संजय गांधी की अकाल मृत्यु के बाद इनके पापा पायलट गिरी मने हवाई जहाज उड़ाना छोड़ देश उड़ाना सीख रहे थे ।
पंजाब के हालात बहुत ज़्यादा खराब थे ।
ऐसे में इनकी दादी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में फ़ौज भेज Op Blue Star कर दिया ।
उसकी प्रतिक्रिया / प्रतिशोध में इनकी दादी की, PM रहते, इन्ही के घर में , इन्ही के अपने Body Guards ने , ह्त्या कर दी । एकदम नज़दीक से गोलियां बरसाई गयीं । जब इनकी दादी पे गोलियां बरस रही थी , ये दोनों वहाँ से बमुश्किल 20 मीटर दूर घर में थे । गोलियों की आवाज़ सुन दौड़ के बाहर आये । देखा कि दादी खून से लथपथ जमीन पे पड़ी हैं ।
उसके कुछ क्षण बाद उसी घर में फिर गोलियां चलने लगी ।
अब उन sikh bodyguards को मारा जा रहा था ।
पापा south में दौरे पे गए हुए थे ।
Mummy घर में अकेली थीं ।
फिर शाम को पापा आये ।
तीन दिन तक दादी की dead body पे अंतिम दर्शन , फूल माला , और फिर cremation ……. इसके साथ साथ मने इस पूरे घटना क्रम के parallel दिल्ली में दंगे भी चल रहे थे और 6000 सिखों के गले में जलते हुए tyre डाल के उनको ज़िंदा जलाया जा रहा था …….. पूरे देश में मार काट मची थी ……. और ये बेचारे मासूम बच्चे ये सब देख / झेल रहे थे ।
फिर इनके पापा PM बन गए और उन ने sikh radicals के अलावा श्रीलंका के Tamil Tigers से भी पंगा ले लिया ।
अब वो भी इनके खून के प्यासे हो गए ।
इनके परिवार पे security Threat बहुत ज़्यादा बढ़ गया ।
जब ये दोनों बच्चे बड़े हो रहे थे तो इनका परिवार दुनिया का सबसे ज़्यादा असुरक्षित परिवार था और इनकी security इतनी ज़्यादा tight थी कि आप कल्पना नहीं कर सकते ।
देश के PM के बच्चे होने के बावजूद इनको इजाज़त न थी कि ये अपनी मर्जी से अपने bedroom से बाहर आँगन में चले जाएं ।
PM house से बाहर निकलते तो NSG के सुरक्षा घेरे में ।
सुरक्षा कारणों से इनका एडमिशन दिल्ली के British Embassy स्कूल में कराया गया ( यहीं पे मुरादाबाद के ठठेरे Robert Vadra से प्रियंका गांधी की मुलाक़ात / दोस्ती / इश्क़ हुआ )। Rahul गए दून स्कूल ।
इन दोनों की किशोरावस्था NSG के पहरे में बीती ।
मने ये वो पंछी थे जिन्हें घोसले से बाहर निकल के पंख फड़फड़ाने उड़ने की इजाज़त न थी । किसी से मिलने जुलने बात करने की इजाज़त न थी ।
ऐसे में दोनों loner हो गए और 15 साल की प्रियंका गांधी को जो पहला लौंडा दिखा उसी से set हो गयी ।
उसके बाद देस के किसी लौंडे की न औकात थी न हिम्मत कि वो NSG का सुरक्षा घेरा तोड़ प्रियंका गांधी पे लाइन मार सके ।
इधर राहुल G …… ये भी loner थे । न कोई हरामी यार दोस्त , न किशोरावस्था में आज़ाद घूम देस का हरामीपन / कमीना पन / देस के लड़ाई झगड़े / लौंडिया ताड़ना / एक से बढ़ के एक हरामी लौंडों के साथ दोस्ती का सुख ……… इन सबसे वंचित रहे राहुल G …….. स्कूल से निकले तो PM बाप के पव्वे / जुगाड़ से देश के सबसे प्रतिष्ठित कालिज Stephans में Sports कोटे में शूटिंग के एक फर्जी टूर्नामेंट में फ़र्ज़ी Gold मैडल दिया के इनका एडमिशन कराया गया ।
वहाँ एक और लूत ……. NSG के घेरे में श्रीमान जी , college आते तो जिस रस्ते से गुजरते वो पहले खाली करा लिया जाता । क्लास लगती तो किलास की आगे की चार row खाली रखी जाती ।
सबसे आगे अकेले सिरिमान जी बैठते और इनके पीची 8 NSG कमांडो ……. फिर बाकी क्लास ।
Stephans में श्रीमान जी हंसी का पात्र बन गए । पहली समस्या ये कि 12th में 48% के छात्र थे , intellect level कुछ था नहीं ……. ऊपर से ये सुरक्षा नौटंकी …….
बताया जाता है कि उन दिनों Stephans College में एक अजीब सा माहौल हो गया था ।
पूरे कॉलेज को लगता कि इस चूतिये के कारण हम लोग suffer कर रहे हैं ।
बताया जाता है कि उन दिनों कॉलेज में लौंडों ने इसके मुह पे कहना शुरू कर दिया था ……. भाई , तू मत आया कर यार कालिज ? कायकू G मार रिये हो तुम सब मिल के इस कालिज की ??????
राहुल G ने अपने PM बाप से इस बाबत की और उन ने आगे फिर NSG से बात की ……. तो NSG और SPG ने कहा कि तुम दोनों बाप बेटा बहुत बकरचोदी मत पेलो …….. भोसड़ी के कोई टपका जाएगा तो फिर हमको मत बोलना …….. तुम्हारे बाप LTTE वाले नहा धो के पीछे पड़े हैं …….
सिर्फ 4 महीने में राहुल G ने Stephans College छोड़ दिया ।
कुछ दिन बाद इनके पप्पा को LTTE ने श्री पेराम्बुदूर की एक चुनावी रैली में उड़ा दिया ।
Dead body के थीथड़े उड़ गए थे । स्थानीय नेताओं ने शव को Nike के जूतों से पहचाना था ।
दोनों बच्चे अभी दादी की हत्या के trauma से उबरे न थे कि बाप भी मारा गया ।
अब दोनों में Autism के लक्षण दिखने लगे थे ।
प्रियंका गांधी को fits पड़ते थे । Rahul G loner होते चले गए । कुछ साल depression में भी रहे । Stephans कॉलेज के बाद पढ़ने बिदेस भेज दिए गए । यहां गलती कर दी सोनिया जी ने ।
UP बिहार की किसी इनभरसीटी से BA करा देतीं ।
लड़का कुछो लिख दे कॉपी में अंग्रेजी में , पास हो जाता ।
पर हार्वर्ड कैंब्रिज में ऐसे थोड़े न चलेगा ।
Autism के कारण कुछ भी याद रखने , लिखने में दिक्कत होती ।
राहुल गांधी एक लाइन लिख नहीं सकते ( नेपाल एम्बेसी वाला किस्सा याद कीजिये )

ऐसे में कालान्तर में सोनिया जी को कांग्रेस की बागडोर संहालनी पड़ी । मजबूरन स्वयं और बेटे को राजनीति में उतारना पड़ा । आज कांग्रेस की मजबूरी है कि सोनिया G और Rahul G को उसे ढोना पड़ रहा है । राहुल एक लाइन न लिख पढ़ सकते हैं न बोल सकते हैं ।
Autism गन्दी बीमारी है । मानसिक क्षमताओं को सीमित कर देती हैं ।
कुछ भी याद रखना मुश्किल होता है । Comprehension क्षमता बिलकुल नहीं होती ।
ऐसे में मुकाबला मोदी जैसे धुरंधर से ……. वनों और पहाड़ों की कंदराओं में रहने और खुले आकाश में उड़ते गरुड़ सरीखे मोदी जी …….. और सामने मुक़ाबिल हैं बेचारा पिंजरे में बंद तोता जिसे कभी पंख फड़फड़ाने की इजाज़त ही न थी ……..

क्रमशः ………

अमेठी के राजा संजय सिंह के छिनरपन का किस्सा ।

अमेठी सीट पे घमासान मचा है ।
अमेठी एक छोटा मोटा राजघराना रहा है UP का जहां संजय सिंह का खानदान राज करता रहा है ।
इसके अलावा गांधी परिवार वहाँ से सांसद है । पिछले 40 साल से ।
इसके बावजूद UP के सर्वाधिक पिछड़े इलाकों में गिनती होती है अमेठी की ।
सोच के देखिये । देश की ruling party के प्रथम परिवार जो हमेशा PM या उसके समकक्ष रहा हो उनकी constituency का ये हाल ? गरीबी भुखमरी पिछड़ेपन से बेहाल ।
फिलहाल वहाँ से समाजवादी पाल्टी के गायत्री प्रजापति ताल ठोक रहे हैं ।
वही प्रजापति जिनको टेढ़ी नाक वाले अकललेस जादो ने भ्रष्टाचार के आरोप में मंत्रिमंडल से निकाला फिर नामाजवादी नौटंकी में थूक के चाट लिया ।

चोर जार लंपट छिनरे संजय सिंह का क्षेत्र है अमेठी । इनके छिनरपन के किस्से मशहूर हैं ।
लीजिये सुनिये अमेठी के राजा संजय सिंह के छिनरपन का किस्सा ।
बात 1988 की है ।
उन दिनों की जब मैं NIS पटियाला में पढ़ रहा था ।
तभी एक दिन खबर आयी कि विश्व विख्यात Badminton खिलाड़ी सय्यद मोदी की लखनऊ में दिन दहाड़े KD Singh Babu स्टेडियम के सामने गोली मार के ह्त्या कर दी गयी । ह्त्या सुबह 8 बजे हुई जब मोदी सुबह की practice कर badminton hall से बाहर निकल रहे थे ।
हमारे साथ लखनऊ के 3 बैडमिंटन खिलाड़ी भी डिप्लोमा कर रहे थे ।
कौशल खरे और अंसारी ……..
वो तीनों उसी लखनऊ के उसी बैडमिंटन हॉल के खिलाड़ी थे और सय्यद मोदी के साथ ही practice करते थे । उनका मोदी के साथ दिन रात का संग साथ उठना बैठना खाना पीना था ।
Modi की हत्या की खबर सुन इन तीनों के मुह से एक साथ निकला …….. मरवा दिहलस संजय सिंघवा । फिर उन तीनों से उस हत्याकांड का किस्सा सुना ।
सय्यद मोदी की शादी मुम्बई की एक मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी अमिता कुलकर्णी से हुई थी ।
NIS पटियाला उन दिनों भारतीय खेल का केंद्र था और सारे National coaching कैम्प्स वहीं लगा करते थे । उसी पटियाला में मोदी और अमिता कुलकर्णी की जानपहचान , दोस्ती , और शादी हुई थी ।
अमिता कुलकर्णी मुम्बई की पली बढ़ी , फर्राटे से अंग्रेजी बोलने वाली और बड़ी नकचढ़ी किसिम की लड़की थी ( मुझे वो दिन याद है जब वो पटियाला में बिना ब्रा के T Shirt पहन के घूमती थी )
। इधर सय्यद मोदी गोरखपुर का भोजपुरी speaking भैया , सीधा सादा आदमी था ।
रेलवे में welfare inspector लग गया और लखनऊ रहने लगा ।
वहीं संजय सिंह भी आता था बैडमिंटन खेलने । जल्दी ही उसकी दोस्ती मोदी परिवार से हो गयी ।
संजय सिंह और अमिता कुलकर्णी मोदी की दोस्ती ( चुदक्कड़ी ) के किस्से पूरे लखनऊ में मशहूर हो गए । अमिता मोदी कुलकर्णी pregnant हो गयी । सैय्यद मोदी जानते थे कि बच्चा मेरा नहीं बल्कि संजय सिंह का है ।
Delivery से 4 महीना पहले अमिता अपने मायके मुम्बई चली गयी और वहाँ उसे एक लड़की हुई ।
लड़की को मुंबई अपनी माँ के पास छोड़ अमिता वापस लखनऊ आ गयी ।
इसके दो महीने बाद मोदी की हत्या हो गयी ।
मचा बमचक । बड़ा high profile murder था ।
सीधे सीधे संजय सिंह और अमिता मोदी कुलकर्णी पे आरोप था । दोनों की गिरफ्तारी भी हुई । जेल भी गए । पर जल्दी ही जमानत भी हो गयी ।
उन दिनों संजय सिंह केंद्र में VP Singh सरकार में राज्य मंत्री थे ……. शायद telecom में ।
CBI जांच हुई पर कुछ न निकला । सब लीप पोत दिया गया ।
मुझे याद है उन दिनों एक बड़ी मशहूर पत्रिका निकलती थी ” माया ” .उसमे संजय सिंह का interview छापा था ।
संजय सिंह बोला अमिता तो मेरी बहन जैसी है ।
उसी केस में कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह , जी हां यही अखिलेश सिंह जो आजकल TV पे कांग्रेस के प्रवक्ता बने फिरते हैं , ये भी सह अभियुक्त थे । इनपे ह्त्या के लिए shooter और सारा logistic support जुटने , रुपया पैसा , हथियार , गाडी जुटाने का आरोप था ।
खैर कुछ न हुआ ……. सब छूट छटक गए ।
कुछ समय बाद संजय सिंघवा बहिनचोद ने अपनी बहिन से बियाह कर लिया और उनकी बहिन आजकल अमेठी की रानी अमिता सिंह कहलाती हैं ।
संजय सिंह पहले से शादी शुदा था ।
उसकी पत्नी का नाम गरिमा सिंह था जो राजा मांडा VP Singh की सगी भतीजी थीं ।
संजय सिंह ने fraud करके उनसे तलाक़ ले लिया जिसे गरिमा सिंह ने high court से रद्द करा दिया ।
इनका तलाक़ का मुक़द्दमा आज तक court में लंबित है और Amita मोदी कुलकर्णी सिंह की कानूनी हैसियत आज भी एक रखैल live in partner से अधिक कुछ नहीं ।
वो लड़की जो मुम्बई में पैदा हुई , पली बढ़ी उसका नाम आकांक्षा सिंह है ।
जबकि हकीकत ये है कि जब वो पैदा हुई तो उसकी माँ सय्यद मोदी की ब्याहता थी ।

संजय सिंह की पत्नी , वही गरिमा सिंह आज अमेठी से भाजपा प्रत्याशी हैं ।
सपा ने अमेठी की सीट congress को नहीं दी है और गायत्री प्रजापति वहाँ से लड़ रहे हैं ।
इधर संजय सिंह की रखैल भी कांग्रेस से ताल ठोक रही है ।

अमेठी पिछले 50 साल से नकली गांधी परिवार की पालकी ढोती विकास की बाट जोह रही है ।

बौद्धिक आतंकवाद …..पहचानिये , सावधान रहिये।

पिछले कुछ दिनों से बंगाल के बारे में एक खबर लगातार अखबारों में छप रही है। खबर छोटी है और कहीं पर भी चर्चा में नहीं आयी।

कुछ दिन पहले 17 या 18 जनवरी को बंगाल के 24 परगना जिले में सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस फायरिंग में 2 लोग मारे गए।

मामूली खबर जिसमे किसी की रूचि नहीं हुई। देश में दर्जनों लोग रोज मारे जा रहे हैं। फिर ऐसी घटना का संज्ञान क्यों लिया जाए।

खैर ……..

कहानी कुछ यूँ है की कुछ साल पहले एक योजना बनी। जिसमे फरक्का बिजलीघर से बिजली की सप्लाई बिहार के कुछ औद्योगिक इलाकों में की जानी थी। इसके लिए पॉवर ग्रिड को ट्रांसिमिशन लाइन बिछानी थी। और कुछ पावर सब स्टेशन बनाने थे।

ऐसे तमाम पावर स्टेशन में से एक बंगाल के 24 परगना जिले के बांगुर में बनना था। करीब दो साल पहले बंगाल की ममता सरकार ने इस गांव में 16 एकड़ जमीन अधिग्रहित की। इस जमीन में पावर सब स्टेशन और वहां के लोगों के लिए घर बनने थे। 16 एकड़ वैसे कोई बहुत बड़ी जगह होती भी नहीं है।

ये जमीन कृषि जमीन थी। किसानों को सरकार ने ठीक से कंपनसेशन भी दिया। प्रोजेक्ट सरकारी था। कहीं कोई दिक्कत नहीं थी। पावर ग्रिड ने निर्माण का काम शुरू कर दिया।

लेकिन फिर दिक्कत आयी।

एक नामालूम सा संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( माले) ( रेड स्टार) के कुछ कार्यकर्त्ता उस गांव में पहुंचे।

सीपीआई या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक संसदीय संघटन है। सीपीआई ( माले) पहले बिहार में एक नक्सल संगठन था , लेकिन हिंसा छोड़कर वो अब संसदीय पार्टी बन चुका है।

सीपीआई माले ( रेड स्टार) एक नया संगठन है जो कहने को इनकी तरह ही संसदीय पार्टी है। लेकिन उसके तार माओइस्ट संगठनों से नक्सल आतंकवादियो से भी जुड़े हैं।

सीपीआई माले रेड स्टार के कार्यकर्ताओ ने किसानों ग्रामीणों को भड़काना संगठित करना शुरू किया। ग्रामीणों को समझाया गया की ये पावर सब स्टेशन नहीं पावर प्लांट बनाने की योजना है। जिसमे लाखों वोल्ट बिजली होगी जो आस पास की फसलो को तबाह कर देगी। लोगों के स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचाएगी।

The effects of the electromagnetic fields generated by this massive power plant on human health, livelihood, and ecology have not been taken into account. These effects will cause havoc on the livelihoods of the people.

उपरोक्त लाइने उस दुष्प्रचार का हिस्सा हैं जो बंगाल के ग्रामीणों को समझाई गयी। एक मामूली पावर सब स्टेशन को इन लोगों ने मैसिव पावर प्लांट में बदल दिया।

और फिर इस महीने की शुरुआत में ग्रामीणों ने अपना विरोध शुरू किया। विरोध की खबर पाते ही ममता सरकार ने पावर ग्रिड को काम रोकने का आदेश दिया। सरकारी अधिकारियों और ग्रामीणों की बैठक हुई , जिसमे सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीणों को वस्तुस्थिति समझाने का प्रयास किया।

लेकिन गांव वालों ने जमीन वापस करने की मांग रखी और पावर सब स्टेशन को गांव से हटाने को कहा।

जाहिर था की ये मांगे सरकार नहीं मान सकती थी , न ही मानी जानी चाहिए।

खैर ममता सरकार ने इस विरोध के मुखिया को पुलिस द्वारा रात में उठवा लिया। जिसके नतीजे में अगले दिन ग्रामीणों ने सड़क रोक कर विरोध शुरू किया। सरकार ने भारी पुलिस बल को भेजा ताकि रास्ता खुलवाया जा सके।

ग्रामीणों और पुलिस में हिंसक संघर्ष हुआ। दो ग्रामीण गोली लगने से मारे गए , दर्जनों गांव वाले और पुलिस वाले घायल हुए। तमाम वाहन जिसमे पुलिस के वाहन भी थे आग के हवाले हो गए।

इसके बाद मामले का राजनीतिकरण हुआ।

प्रसंगवश उसी समय कलकत्ता के साल्ट लेक में बंगाल ग्लोबल इन्वेस्टर मीट चल रही थी जिसमे विदेश और देसी दोनों तरह के बड़े लोग आये हुए थे।

सीपीआई के नेताओ और कार्यकर्ताओ ने इन्वेस्टर मीट के वेन्यू के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जवाब में ममता सरकार ने उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

सीपीआई ने ममता सरकार पर किसानों की जमीन लूटने का आरोप लगाया। जवाब में ममता ने सीपीआई को सिंगुर याद दिलाया। सिंगूर में सीपीआई सरकार द्वारा किये गए जुल्मो की याद दिलाई।

कांग्रेस ने ममता सरकार पर किसान मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया।

और मैं सोच रहा था की मोदी सरकार अम्बानी अडानी की सरकार है। यही दो साल पहले यही पार्टियां मोदी सरकार पर जमीन अधिग्रहण कानून को लेकर बड़े बड़े आरोप लगा रही थीं। बेसिकली इसी विधेयक के बाद मोदी सरकार को बौद्धिकों ने अम्बानी अडानी की सरकार घोषित किया था।

लेकिन एक बेसिक बात पर तब भी और आज भी कोई ध्यान नहीं देता की जमीन राज्य सरकार अधग्रहीत करती है और केंद्र सरकार मॉडल कानून बनाती है। हर राज्य के जमीन अधिग्रहण के कानून अलग हो सकते हैं , होते हैं।

खैर कहानी अभी ख़तम नहीं हुई। कुछ दिनों पहले सीपीआई माले रेड स्टार के एक बड़े नेता केरल से कलकत्ता पहुंचे और पहुँचते ही रेलवे स्टेशन से किडनैप हो गए। तीन दिन बाद वो दिल्ली में मिले। उन्होंने बताया की उन्हें कुछ इंटेलिजेंस के लोगों ने उठा लिया था। दो दिन पूछताछ के बाद उन्हें दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में बिठाकर छोड़ दिया गया।

इन साहब ने किडनैपिंग का आरोप ममता दी पर लगाया , मोदी सरकार पर नहीं।

गांव अभी भी जल रहा है। गांव की सीमा पर ग्रामीण पहरा दे रहे हैं सिर्फ पत्रकारों को गांव में जाने दिया जा रहा है। इस सीमा के दूसरी तरफ भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात है।

सिर्फ एक चिंगारी की जरूरत है। और इस चिंगारी को सुलझाने के लिए तमाम एक्टिविस्ट , नक्सली और माओवादी वहां मौजूद हैं।

आतंकवाद सिर्फ इस्लामिक नहीं होता , बौद्धिक आतंकवाद भी होता है। ज्यादा निर्मम , ज्यादा खतरनाक। जो लोगों को भड़का रहा है। सिस्टम और सरकार के खिलाफ कर रहा है।

ऐसे बहुत से आतंकवादी इसी फेसबुक पर हमारे आस पास भी हैं। पहचानिये , सावधान रहिये।

Sharad Shrivastav जी की पोस्ट

सपा कांग्रेस गठबंधन क्या गुल खिलाता है ?

UP और बिहार की राजनीति का एक मूल तत्व है ।
जातीय भोट बैंक ।

पिछले दिनों मैं राजस्थान में था ।
एक मित्र बताने लगे के वसुंधरा जी के प्रति आमतौर पे नाराजगी है इसलिए अगली बार यहाँ कांग्रेस की वापसी तय है ।
मैंने उनसे पूछा , राजस्थान के राजपूत और जाट किसे भोट देते हैं ?
किसी को नहीं देते …….. और सबको देते हैं ।
हर चुनाव में एक नयी पार्टी को भोट देते हैं राजस्थान के लोग ।
यहां कोई जाति किसी एक पार्टी की बंधुआ भोटर नहीं ।

जब किसी राज्य में लोगों की ऐसी राजनैतिक सोच होती है , AAP जैसी नयी parties को पैर जमाने की ज़मीन मिल जाती है ।

UP और बिहार में ऐसा नहीं है ।
वहाँ कोई व्यक्ति किसी पार्टी को भोट नहीं देता ।
एक जाति भोट देती है ।
अहीर सब सपाई हैं ।
चमार हरिजन जाटव सब भेन मायावती के बंधुआ भोटर हैं । पहले किसी ज़माने में कांग्रेस के थे ।
पिछले 20 साल से ठाकुर मूलतः भाजपाई हैं । बहुत मजबूरी में जब भाजपा के पराभव के दिन थे तो इधर उधर सपा बसपा में मुह मार लेते थे पर इनका मूल चरित्र भाजपा का है । यूँ इसे भाजपा नहीं बल्कि Anti congress कह सकते हैं । क्योंकि 70 के दशक में UP के ठाकुर चौधरी चरण सिंह जी को नेता मानते थे । फिर जनता पार्टी , जनता दल , VP सिंह से होते हुए भाजपा तक आये ।
ब्राह्मण मूलतः कांग्रेसी हैं । कांग्रेस का जब से पराभव हुआ , बेचारे ब्राह्मण लाचार अनाथ टूअर बने विचर रहे हैं । मूल चरित्र कांग्रेसी है पर TINA factor के कारण कभी बसपाई बन जाते हैं तो कभी भाजपाई ।
2007 में एक मुश्त सतीश चंद्र मिसिर के नेतृत्व में बहिन जी की गोद में जा बैठे । 2012 में अखिलेश की गोद में , 2014 में भाजपाई हुए और अभी फिलहाल भाजपा में हैं । कल क्या करेंगे राम जाने ।
पूर्वी UP के पटेलों ने ” अपना दल ” बना रखा है ।
राजभर समाज की अलग पाल्टी है ।
भूमिहार , वैश्य समुदाय सब भाजपाई हैं । हालांकि नोटबंदी के बाद व्यापारी वर्ग / वणिक समुदाय कुछ निराश नाराज है और इनका कुछ प्रतिशत भोट सपा बसपा में जा सकता है पर बहुत ज़्यादा नुक्सान नहीं होगा । आखिर दशकों की निष्ठा भी कोई चीज़ होती है । अलबत्ता स्वर्णकार-सुनार 1% excise को ले के बहुत ज़्यादा नाराज हैं । अब देखना ये है कि भोट देंगे या नहीं ।

2014 से पहले UP में भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी ये थी कि इसके ऊपर बणियों और सवर्णों शहरियों की पार्टी का ठप्पा लगा हुआ था ।
मोदी जी के नेतृत्व में 2014 में पहली बार भाजपा OBC मने तथा कथित पिछड़ों और दलितों में पैठ बनाने में कामयाब रही ।
आज लगभग समूचा गैर यादव OBC और काफी हद तक गैर चमार-जाटव दलित भाजपा के साथ है ।
पश्चिम का जाट समाज जो पारंपरिक तौर पे चौ. चरण सिंह के साथ रहा अब ( फिलहाल ) तो भाजपाई है । आगे राम जाने ।

भाजपा की कामयाबी और सपा बसपा कांग्रेस की कमजोरी का यही मूल कारण है ……… जातीय समीकरण । 1990 से 2012 तक सपा बसपा की कामयाबी का जो दौर चला उसका मूल कारण था कि सपा के पास मुस्लिम यादव के अलावा लगभग समूचा OBC और कुछ सवर्ण भोट रहा और बसपा के साथ समूचा दलित , tactical voting के कारण मुसलमान , और एक बार ब्राह्मण भोट रहा ।
2009 में जब कांग्रेस UP से 22 सांसद जिता ले गयी तब इसके पीछे मुसलमानों की सपा से नाराजगी ( कल्याण सिंह को ले के ) के कारण पश्चिमी UP में मिला भोट था । इस तात्कालिक सफलता से कांग्रेस को ऐसी ग़लतफ़हमी हुई कि वो 2012 में UP में सरकार बनाने तक के सपने लेने लगी थी और कांग्रेसियों में मुख्य मंत्री पद को ले के खींच तान गुटबंदी शुरू हो गयी थी । नतीजे शर्मनाक आये क्योंकि मोमिन सब वापस सपाई हो गए ।

UP की राजनीति के इसी चरित्र को देखते हुए मैं 2017 के इस विस् चुनाव में भाजपा की सफलता को ले के बहुत ज़्यादा आश्वस्त हूँ ।
भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ 2014 में लगभग 44 % भोट ले चुकी है । इसमें कमोबेश कोई ख़ास कमी नहीं आयी है बल्कि कुछ जातियों में इज़ाफ़ा ही हुआ है ।
बेशक नामाजवादी नौटंकी से वो यादव भोटर जो 2014 में भाजपा के साथ आया था वो वापस सपाई हो गया । बाकी सब intact है ।
चूँकि विस् और लोकसभा चुनावों का मूल चरित्र अलग होता है और विस में स्थानीय मुद्दे और local candidate का भी महत्त्व होता है फिर भी हम ये मान के चल रहे हैं कि 17 में भाजपा 44 % से नीचे आ के 34% से शुरू करेगी । जस जस चुनाव गरमाएगा , पिक्चर क्लियर होगी ।
Final result कुछ ऐसा होगा ।
अगर भाजपा ने
30% भोट लिया तो 220 सीट
32% पे 250
34 % पे 280
36 % पे 310
और अगर 38% या उस से भी ज़्यादा पायी तो जल प्रलय होगी ।

देखना सिर्फ ये है कि सपा कांग्रेस गठबंधन क्या गुल खिलाता है ?

फ़ौज के ये अर्दली

कुछ साल पुरानी पोस्ट है पर सामयिक है .

अक्सर अखबारों में ऐसी खबरें पढने को मिल जाती हैं की  फलां फलां जगह पे बेटों ने बाप को पीट दिया या मार डाला …….सो लोग इसे , कलयुग है ……कह के पल्ला झाड लेते हैं ……सो अब खबर आयी  कि वहाँ दूर लेह लद्दाख में फ़ौज के जवानों ने अपनी पलटन  के अफसरों को दौड़ा दौड़ा के ……खोज खोज  के पीटा. आज सेना के एक प्रवक्ता का बयान आया है की घबराने की कोई विशेष बात नहीं है …..कोई सैन्य विद्रोह नहीं हुआ है ….बस यूँ ही थोड़ी तकरार हुई है . मैंने बीसियों साल फ़ौज को बड़े नज़दीक से देखा है ……….बहुत कुछ महसूस किया है ….पढ़ा है , लिखा भी है . अब सेना की लीडरशिप को ये मामूली सी बात लग सकती है पर ज़रा सोच के देखिये ……..मैंने जान बूझ के ये anology दी है …… बाप को पीट  कर बेटों को कैसा महसूस होता होगा ….या फिर बच्चों से पिट के बाप को क्या फील होता होगा …….क्या उनमे से किसी  को डूब मरने का ख़याल आता होगा ……..यकीन मानिए मुझे इस घटना से बहुत ज्यादा शर्मिंदगी हुई है ……..फिर मैंने शर्माते शर्माते इस घटना की  ज्यादा जानकारी जुटाई तो मुझे ये समझ आया की वहां लेह से कोई 120 किलोमीटर आगे  एक firing range पे सैन्य युद्धाभ्यास को अफसरों ने पारिवारिक पिकनिक में तब्दील कर दिया था और एक Major साब की धर्म पत्नी ने पतिदेव से अर्दली ( घरेलू नौकर ) की शिकायत की . सो साहब नाराज़ हो गए और उन्होंने उस सिपाही ….जवान ….अर्दली …..या घरेलू नौकर ( आप चाहे जिस नाम से बुला लें ) को पीट दिया ……फिर उसे फौजी अस्पताल भी नहीं जाने दिया की कही बात खुल न जाए ……..इसपे बाकी के जवान भड़क गए …..उनकी अफसरों से तकरार होने लगे जो जल्दी ही बढ़ते बढ़ते मारपीट में तब्दील हो गयी और बात यहाँ तक पहुँच गयी की जब कमांडिंग ऑफीसर ……कर्नल साहब ……आये , और सुनते हैं की उन्होंने जवानों का पक्ष लिया तो अफसरों ने उन्हें भी मारा और ये देख के जवान और भड़क गए और फिर उन्होंने पूरी रेजिमेंट  के अफसरों को खोज खोज के दौड़ा दौड़ा के पीटा ……… एक दम फ़िल्मी सीन हो गया …….

अब अर्दली की बात पे मुझे अपना बचपन याद आ गया …….तब जब हम फौजी माहौल में पल बढ़ रहे थे ….पिता जी फ़ौज में JCO थे ……हमारे घर  में भी एक अर्दली आया करता था ……बात है 1975 की ……..राम स्वरुप नाम था उसका ……घर का झाड़ू पोंछा साफ़ सफाई सब करता था ….बड़े मनोयोग से करता था ……..फर्श पे बैठ के पूरे जोर से घिस घिस के पोंछा लगाता था ….सब्जी भी काटता था ……..कपडे भी सुखाता था ……..उसका पूरा व्यक्तित्व ही घरेलू नौकर का था ……फिर पिता जी की अगली पोस्टिंग में एक नया अर्दली आया …वो एक स्मार्ट सजीला नौजवान था ……उसका अर्दली के रूप में काम करने का वो पहला अनुभव था सो वो असहज रहता था पर जल्दी ही वो इस काम में रम गया ……कुछ महीने बाद  उसे किसी अन्य अफसर के घर लगा दिया गया ………….फिर लगभग दो साल बाद एक दिन मुझे वो दिखा ….उसका पूरा व्यक्तित्व बदल गया था और वो  सजीला फौजी नौजवान एक घरेलू नौकर में तब्दील हो गया था ……फिर कुछ साल बाद एक बार हमारे घर एक नया अर्दली आया ……..और आते ही वो पिता जी के सामने पेश हुआ और सम्मान पूर्वक पर पूरी दृढ़ता से उसने कहा की वो किसी भी कीमत पे अर्दली ( घरेलू नौकर )  की ड्यूटी नहीं करेगा  .सो बिना किसी हील हुज्जत के उसे बदल कर एक अन्य अनुभवी अर्दली को लगा दिया गया …….

सो अब इस ताज़ा तरीन झगडे की शुरुआत भी एक ऐसे फौजी जवान से हुई जिसे ज़बरदस्ती जवान से नौकर बनाया जा रहा था और उसके प्रतिकार  कीवजह से इतनी बड़ी घटना हो गयी …….इस घटना  से मुझे एक और फौजी अर्दली की कहानी  याद आती है ….सिपाही जगमाल सिंह की …….जो वहाँ कारगिल युद्ध में कैप्टेन विजयंत थापर का अर्दली था और उस रात 28 जून की रात 17000 फुट पे उस बर्फीली चोटी पे सबसे पहले शहीद हुआ था  …..और फिर याद आती है उस फौजी अफसर की कहानी ……Capt विक्रम बत्रा की ……जो पूरे युद्ध में अपने जवानों से आगे आगे चला , ये कहता हुआ की तू पीछे चल ……तू बाल बच्चे दार है ……….जगमाल सिंह को वो गोली लगी जो विजयंत थापर के लिए चली थी और विक्रम बत्रा ने वो गोली खाई जो सूबेदार रघुनाथ सिंह के लिए चली थी ……..

फ़ौज के प्रवक्ता ने कहा है की मामूली सी घटना है ……… हो सकता है की वाकई मामूली सी बात हो , पर मुझे दुःख इस बात का है की जो मान दंड सिपाही जगमाल सिंह और Capt बत्रा ने स्थापित किये थे…. वहाँ उस रात कारगिल में ………उन्हें तहस नहस कर दिया गया उस शाम लेह में ……..

 

सुनते हैं की मारपीट के बाद तोपचियों की उस पलटन को लेह में न्योमा से हटा के वापस नीचे भेज दिया गया है

(हथियार सब जब्त कर लिए  हैं , और आबरू भी ) ………

उसी सड़क पे कुछ नीचे …….वहाँ द्रास में ……

संगे मरमर  के कुछ पत्थरों पे उन 542  शहीदों के नाम खुदे हैं ,

जो सुनते हैं की उन सुनसान , उजाड़ , बीहड़ पत्थरों को ,

पाकिस्तानी घुसपैठियों के कब्जे से छुडाने और इज्ज़त बहाल करने के चक्कर में मर मिटे ……….

और वहीं कुछ ऊपर , उस चोटी के ऊपर से , झांकती है वो पोस्ट……….

Batra top कहते हैं जिसे ………

वहाँ से साफ़ नज़र आती है वो सड़क , जिस से गुज़र के तुम्हे जाना है ……….

वहाँ से ज़रा जल्दी निकल लेना ………..

खाम खाह शर्मिंदगी होगी उन्हें ……….

 

 

 

 

बच्चों को संघर्ष करने दो

 

बचपन में एक गुरूजी थे ….वो एक कहानी सुनाते थे ……यूँ कि एक biology  क्लास में गुरूजी बच्चों को दिखा रहे थे कि कैसे एक तितली अंडे को  फोड़ के बाहर निकलती है ……सब बच्चे बड़े गौर से देख रहे थे ……कई सारे अंडे थे …….तितलियाँ  अण्डों  को तोड़ कर बाहर आने के लिए संघर्ष कर रही थीं ……… पंख फडफडा रही थी ….हाथ  पैर चला रही थी ………बहुत देर तक ये जद्दो जहद चलती रही ….तभी एक बच्चे को ये देख कर दया आ गयी ……उसने एक अंडे को तोड़ दिया …और वो तितली आज़ाद हो गयी और बाहर आ गयी …………..पर बाकी सब तितलियाँ इतनी खुशनसीब न थीं ………क्योंकि बाकी बच्चे सब इतने  दयालु  न थे ….सो उन बेचारियों  का संघर्ष चलता रहा  , चलता रहा ………..खैर  समय  होने  पर वो सब भी एक एक कर के अपने अण्डों को तोड़ कर बाहर निकल  आयीं ………..पूरी क्लास रूम में तितलियाँ ही तितलियाँ थीं ….रंग बिरंगी खूबसूरत तितलियाँ ……….सब तितलियाँ धीरे धीरे उड़ने लगी और फिर उड़ते हुए बाहर पार्क में चली गयीं ……..पर एक तितली थी जो कोशिश करने पर भी उड़ नहीं पा रही थी ………वो वहीं टेबल पर ही बैठी थी ………कुछ देर उसने कोशिश की  पर नहीं उड़ पाई …और फिर थोड़ी देर बाद मर गयी ………टीचर भी हैरान था और बच्चे भी समझ नहीं पा  रहे थे कि ऐसा क्यों हुआ …….फिर उस लड़के ने बताया कि ये वही तितली थी जिसका अंडा उस लड़के ने फोड़ दिया था ………..तब टीचर ने उन्हें बताया कि तुमने उस पर दया कर के अपनी नादानी से उसकी  जान ले ली …………उस अंडे के भीतर जब वो संघर्ष कर रही थी …हाथ पैर मार रही थी …..पंख फडफडा रही थी …..उसी संघर्ष से उसके हाथों पैरों और पंखों  में इतनी ताकत आती कि वो जीवन भर उनसे उडती रहती ………..तुमने वो मौक़ा उससे छीन लिया ……..नतीजा तुम्हारे सामने है ………….

 

मेरा शहर जालंधर बड़ा ही खूबसूरत शहर है …….साफ़ सुथरा सा …….खूब खुली चौड़ी चौड़ी सडकें हैं ……….पिछले एक साल में 5  नए fly  over  बन गए हैं ….इस से अब traffic  की भीड़ भाड़ भी कम हो गयी है ……….हर कालोनी में बड़े बड़े पार्क हैं जिनमे खूबसूरत फूल पौधे और मखमली घास लगी है ………नगर निगम हर पार्क की देख रेख करता है …..हर पार्क में बुजुर्गों  के टहलने  के लिए बाकायदा cemented  ट्रैक बना हुआ है ……………… बच्चों के लिए झूले लगे हुए हैं …………..पर उनके खेलने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है …………..मौज मस्ती के लिए तो है ……पर खेलने के लिए नहीं ………….यानी कि अगर वो फुटबाल , volleyball या ऐसी कोई गेम खेलना चाहें तो इतने बड़े पार्क में कोई जगह नहीं ……….पर बच्चे तो आखिर बच्चे ठहरे …..वो कहाँ बाज आते हैं ……पर पार्क में खेलना मना  है …..क्यों भैया …..इस से घास और फूल पौधे खराब होते हैं …….अब हमारे घर के पास एक पार्क है …..वहां कालोनी की welfare  association  के प्रधान  एक retired  colonel  साहब हैं  …वो पार्क के रख रखाव पे बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं …..क्या मजाल कि कोई बच्चा कोई फुटबाल ले आये ………..अब समस्या ये की वो भी खडूस और मैं भी खडूस …..मैं उनसे भिड़ गया …………..मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की………के जनाब  ये बच्चे हैं ,  इस उम्र में इनके लिए ये बहुत ज़रूरी है की ये खूब भागें दौडें ………….medical  science  भी कहती है कि एक स्वस्थ बच्चे को कम से कम दो घंटे ऐसी physical  activity  करनी चाहिए कि उसकी heart  beat 120  per minute से ऊपर रहे ….इससे उसका  heart  , lungs , muscles  और पूरी body , strong और fit  होगी ………अब आज के शहरी जीवन में बेचारे बच्चे वैसे ही पढाई के बोझ के मारे …….उनके पास पहले ही टाइम नहीं ……..न खेल उनकी और उनके parents  की प्राथमिकता ……..और अब अगर वो थोडा बहुत खेलना भी चाहें तो आप नहीं खेलने देंगे ………उन्होंने तर्क दिया कि खेलना है तो stadium  जाएँ ……..अजी जनाब 6  किलो मीटर दूर है stadium  ………फिर इतना टाइम कहाँ है बच्चे के पास ……….दूसरे पूरे शहर के लिए सिर्फ एक stadium  ……..सोच के देखिये …शहर का हर बच्चा stadium  जा सकता है क्या ??????? 30  – 40  बच्चों के लिए एक फुटबाल ground  जितनी जगह चाहिए ……..शहर में 50  stadium  भी कम पड़ जायेंगे ………..हर कालोनी में इतना बड़ा पार्क है ….हज़ारों पार्क हैं जालंधर में …………. साले बुड्ढे ………कब्र में तेरे पाँव लटके हैं ……पर तुझे अपने टहलने के लिए हर पार्क में एक ट्रैक चाहिए ………..पर हर पार्क में तू एक बास्केटबाल कोर्ट नहीं बनवा सकता ………तुझे इन फूल पौधों की तो चिंता है ….कहीं ये पौधा खराब न हो जाए ……….पर ये जो फूल से बच्चे ….जो बेचारे सारा दिन बस्ते के बोझ तले दबे ……..जंक फ़ूड खा के मोटाते बच्चे ……..सारा दिन विडियो गेम खेल रहे हैं ………..इनकी भी थोड़ी चिंता कर ले यार …………

मुझे तरस आता है इन ,  तथा कथित पढ़े लिखे समझदार ……बुद्धिजीवियों पर ……………….देश के बच्चों के प्रति इनके रवैये पर ……..मैं काफी समय से इनके बीच काम कर रहा हूँ ……..हमारे देश में शहरी बच्चों की फिटनेस बहुत खराब है ………बच्चे मोटे हो रहे हैं या under weight  हैं ……उनकी eating habits बहुत खराब हैं ….पर parents बेखबर हैं ……..या लापरवाह हैं …..या यूँ कह लीजिये लाचार हैं ………….पश्चिमी देशों में स्कूल में physical  activity  पे बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता है ………….यहाँ जालंधर में एक नया स्कूल खुला …..उसका प्रिंसिपल एक अँगरेज़ था ……उसने स्कूल uniform    बदल के track suit और sports shoes कर दी ………और सुबह एक घंटा की vigourous  physical  activity cumpulsory कर दी ……..हमारे बेहद समझदार परेंट्स को ये बात समझ न आयी और मैनेजमेंट ने उस प्रिंसिपल को भगा दिया …………..अब सारे बच्चे टाई लगा के स्कूल आते हैं  और सारा दिन खूब मन लगा के पढ़ते हैं …………

हमारी कालोनी के उस कर्नल साहब को ये बात अब तक समझ नहीं आयी है ………वो सुबह hat लगा के और हाथ में छोटा सा डंडा ले के उस पार्क में morning  walk करता है …..कालोनी के बच्चे अपने PC पे विडियो गेम खेल कर सेहत बना रहे हैं ………………पर मैंने भी कर्नल  से पक्की दोस्ती  कर ली है और मैं उसे रोज़ समझाता हूँ कि हर कालोनी में एक पार्क होना  चाहिए ……जिसमे एक भी फूल पौधा नहीं होना चाहिए …..पर ढेर सारे बच्चे होने चाहिए ………ground  होने चाहिए ………जहां बच्चे खूब दौड़े भागें ……खेले कूदें ……….धूल मिट्टी में , पसीने से लथपथ ……होने दो अगर गंदे होते हैं कपडे ……….फूटने दो घुटने ……..बहने  दो पसीना , और थोडा बहुत खून ………….और सुबह सडकें खाली होती हैं …..तुम साले बुढवे ………वहाँ जा के टहला करो , अगर बहुर शौक है टहलने का ….और कम्पनी बाग़ में खूब फूल पत्ती है …वहाँ जा के सूंघ गुलाब का फूल ….इन  तितलियों को संघर्ष करने दो …..हाथ पाँव से मज़बूत होने दो ……….क्योंकि कल सारी दुनिया फतह करनी है इन्हें …..कालोनी के उस पार्क में यही फूल खिलते अच्छे लगेंगे ………….

UP चुनाव

इस्माइल मेरठी (Ismail Meeruti) साहब का एक शेर है ……..

अर्ज किया है ……..

उल्फत का जब मजा है कि वो भी हों बेकरार,
दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई।

और इसी शेर की तर्ज पे ……..

गठबंधन का तब मज़ा है कि दोनों ही हों बेजार ……..
औ दोनों तरफ हो गाँड …………… बराबर फटी हुई

UP में सपा और congress का गठबंधन होगा ज़रूर ।
क्योंकि दोनों मने अखिलेश औ राहुल ……. मने सपा औ कांग्रेस …….
भाजपा औ मोदी के मारे , दोनों की है गाँड बराबर फटी हुई ।

राहुल बाबा जानते हैं कि अगर गठबंधन न हुआ तो कांग्रेस की 5 सीट नहीं आएगी इस बार UP में ।
और कितना ही विकास का तंबू तान लें , सपा के लिए बिना गठबंधन 50 का आंकड़ा छूना मुश्किल है ।

Congress की जमीनी स्थिति ये है की कांग्रेसी वोटर जैसी कोई चीज़ UP में अब नहीं बची है । कुछ एक सीटों पे कुछ ऐसे लोग है जिनका अपना व्यक्तिगत भोट है …….. वो एक तरह से निर्दल लोग हैं …….. congress छोड़ अगर निर्दल भी लड़ जाएँ तो जीत जाएंगे । ऐसे 5 – 7 लोग कांग्रेस के टिकट पे लड़ के जीत जाते है इसलिए congress का खाता खुल जाता है UP में । ऐसी सीटों पे कुछ भोट उस प्रत्याशी की जात का और कुछ मुस्लिम भोट मिल के वो सीट जीती जाती है ।

मोदी जी ने पिछले 5 साल में सपा से उसका गैर यादव OBC वोट छीन लिया है ।
इसी तरह मायावती के दलित भोट बैंक में से मोदी जी ने गैर चमार – जाटव भोट में बड़ी सेंध लगायी है ।

सपा congress गठबंधन का सबसे बड़ा नुकसान BSP को होगा जहां उसका मुस्लिम भोट खिसक के सपा- cong के साथ आ जाएगा ।
मुस्लिम भोट बेशक एकमुश्त सपा को पड़ेगा जिसकी प्रतिक्रिया में हिन्दू भोट का counter polarization होगा ।

हालफिलहाल स्थिति ये है कि सपा – congress गठबंधन पूरी जोड़ जुगत के बाद भी 26 – 27 % तक पहुँच पायेगा जबकि इस चुनाव में भाजपा शुरुआत ही 34 % भोट के साथ करेगी जो campaign के साथ बढ़ेगा ।

यदि भाजपा ने 30% भोट लिया तो 220 सीट
32 % लिया तो 240 – 250
34% पे 260 से 280
36 % पे 300 +

आज की तारीख में सबसे खराब स्थिति BSP की है ।
यही हालत रही तो हाथी फिर अंडा दे सकता है ।
सिर्फ चमार – जाटव के बल पे तो 10 सीट आनी मुश्किल है ।

फिलहाल इंतज़ार कीजिये ……. टिकट वितरण और नाम वापसी होने दीजिए ।
तभी picture clear होगी ।

Problem Solving का Sandwich Method

Problem Solving का Sandwich Method

उन दिनों हम लखनऊ में रहा करते थे । सबसे छोटा बेटा दानू वहाँ एक स्कूल में 1st में पढता था । स्कूल एक मुस्लिम उद्योगपति की बेटी चलाती थी जिसका जन्म दुबई में हुआ था और वो स्वयं वहाँ दुबई की British Embassy School की student रही थी । एक बेहतरीन school की स्टूडेंट होने के नाते वो अपने स्कूल को भी उसी pattern पे और बहुत ही मेहनत से , बड़े प्यार से चलाती थी । दिन रात मेहनत करती थी । दानू को स्कूल में कोई समस्या थी । उसके समाधान के लिए हम दोनों पति पत्नी स्कूल गए । मामला कुछ ऐसा था कि क्लास teacher को झाड़ पड़नी तय थी और हम दोनों उसे इस situation में डालना नहीं चाहते थे । बड़ा पेचीदा मामला था ।

तो साहब हम दोनों पहुंचे ऑफिस …..

जी कहिये ……

हमने उन्हें कहा की सबसे पहले तो हम आपको ये मुबारकबाद देने आये हैं कि आप एक बेहतरीन स्कूल चलाती हैं ।
बस इतना सुनना था कि मैडम तो फट पड़ीं और उन्होंने तो साहब अपना दिल खोल के धर दिया । और अपने बचपन के वो तमाम अनुभव , British स्कूल के …… सुनाने लगी …..और कैसे कि वो एक बेहतरीन स्कूल का सपना जी रही हैं ……. मैडम आधा घंटा भाव विभोर हो अपना सपना जीती रही ….फिर उन्हें अचानक ख़याल आया ….. अच्छा आप बताइए , आप कैसे आये ?

madam हम दरअसल ये चाहते है की आपका ये बेहतरीन स्कूल और बेहतरीन बने । आपका स्टाफ ….. कितनी मेहनत करते हैं बेचारे । दिन रात लगे रहते हैं ….. और हमारे दानू की मैडम …… कितनी अच्छी लड़की है बेचारी …… बस ये एक छोटी सी समस्या थी ……

मैडम जी ने तुरंत एक्शन लिया …..क्लास टीचर आई और वो समस्या जो कल तक सास बहू के सीरियल की कहानी से भी ज़्यादा पेचीदी थी और जिसपे कल तक तृतीय विश्व युद्ध अवश्यम्भावी लग रहा था चुटकियों में हल हो गयी ।

Problem solving और Criticism की इस कला को Sandwich method कहा जाता है । किसी की आलोचना करने से पहले उसकी सच्ची तारीफ करो । एकदम genuine ….. फिर जब माहौल पूरी तरह positive हो जाए ….. एकदम फुल्टू सौहार्दपूर्ण ….. तो ये कहते हुए कि आपको और अच्छा बनाने के लिए ये फलां फलां काम , ये समस्या ये कमी दुरुस्त करनी चाहिए जिस से कि आप एकदम World Champion हो जाओगे …… Bread के दो pieces के बीच खीरा प्याज टमाटर लगाओ ……

किसी की आलोचना करने के पहले और बाद में उसकी तारीफ करो ……क्योंकि आपका उद्देश्य समस्या को हल करना है …… बढ़ाना नहीं ……..