Honesty is the best policy

हमरे एक मित्र बड़े भारी बिजनिस मैन उद्योगपति पूँजीपति हैं ।
नोटबंदी के करीब 20 दिन बाद उनसे फोन पे बात हुई ।
बोले सिर खुजाने की फुरसत नहीं ।
जब से मोदी की नोटबंदी हुई , लोग मंदी का रोना रोय रहे । इहाँ ये हाल है कि order पहले की तुलना में तीन गुना ज़्यादा हो गया । प्रोडक्शन रातों रात कैसे हो जाएगा तिगुना । भारी दबाव है । प्लांट 24 घंटे चलाएं तो भी order पूरे नहीं होते ।
मैंने पूछा आखिर ऐसा क्या हुआ ?
बताने लगे , लोग बाग़ बिजनिस मैन अब नोटबंदी के बाद दो नंबर का धंदा छोड़ अब एक नंबर में पूरे बिल पर्चे के साथ काम करने का मन बना रहे हैं । जबकि हमारी फर्म पिछले 10 साल से ही सारा काम एक नंबर में करती आ रही है । हर साल हमारे यहाँ sales tax का छापा पड़ता है । हम उनको हमेशा कहते हैं , अबे हमारी क्या झांट नोचोगे ? सब काम एक नंबर में करते हैं । ल्यो देख ल्यो सब कागच पत्तर …… जो उखाड़ते बने उखाड़ ल्यो ………
सो जब नोटबंदी हुई तो हमारे सब प्रतिद्वंद्वी सब काम धंदा छोड़ जब अपना फटा हुआ लहंगा और सब कागज़ पत्तर सम्हालने में व्यस्त थे तो हम लोग market से आर्डर उठा रहे थे ।
मोदी की नोटबंदी होने वाली है और आने वाले समय में सब काम एक नंबर में करना पड़ेगा …….. ऐसा कोई दिव्य ज्ञान अचानक रातों रात नहीं हुआ । ये एक business हाउस की policy हो सकती है ।
इसके अलावा उनकी एक और policy भी है ।
Quality में compromise नहीं करते । एक नंबर का माल बेचते हैं । बाजार से महँगा बेचते हैं । बाजार कितना भी मजबूर करे , सस्ता घटिया माल मांगे , पर quality में समझौता नहीं करते इसलिए नाम बिकता है । इसलिए आज हालात ये हैं कि जहां बाबा रामदेव की पातंजलि जैसे बड़े brands भी मंदी का रोना रो रहे , आपके पास supply से ज़्यादा demand है ।

पिछले दिनों मैंने एक पोस्ट लिखी थी कि नोटबंदी के बाद Congress , AAP , सपा और बसपा funds की कमी से जूझ रहे हैं । UP में अखिलेश की विकास यात्रा रुक गयी , बहिन जी rally की बजाय press conference कर के काम चला रही हैं ।
पंजाब और गोवा में केजरीवाल के पास मूंगफली खाने को पैसा नहीं है ।
कांग्रेस तो खैर पहले से ही नंग थी ।

मेरे एक मित्र ने सवाल किया कि यदि सबको माने सब पार्टियों को नोटबंदी का असर पड़ा तो आखिर भाजपा को क्यों नहीं पड़ा ।
भाजपा को फर्क इसलिए नहीं पड़ा क्योंकि भाजपा ने राजनाथ सिंह के जमाने से ही policy बना ली थी कि party funds में पारदर्शिता रखेंगे ।
2014 में मोदी के PM बनने के बाद और अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इस नीति का और सख्ती से पालन हुआ । मोदी और अमित शाह की policy एकदम स्पष्ट थी । party funds के सब कागच पत्तर दुरुस्त रखो और पार्टी फण्ड सब एक नंबर में और खाते में रखो ……. दुरुस्त रखो …….. क्यों ?
क्योंकि मोदी जानते थे कि आगे क्या होने वाला है ।
अब आप कहेंगे कि PM मोदी ने भाजपा नेता मोदी को बात leak क्यों की ???????

इस बेईमान दुनिया में भी कुछ लोगों की policy ईमानदारी होती हैं ।
आप ईमानदारी के लिए तो किसी को blame नहीं कर सकते ?

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