GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

बड़ी चर्चा है कि नोटबंदी की वजह से ये GDP गिर जायेगी ।
अपने सरदार मौन मोहन सिंह जी उस दिन संसद में उवाच रहे थे कि दरअसल ये नोटबंदी मोदी सरकार की एक सुनियोजित लूट है जिसमे देस की GDP 2% तक गिर जायेगी । वैसे सरदार जी ये बताने से चूक गए कि उनकी सरकार ने अटल जी से विरासत में मिली 8% से ऊपर की GDP को किस सुनियोजित लूट के तहत 4 % तक ले आये ।
बहरहाल ……. नोट बंदी से GDP गिरने की संभावना तो पैदा हो ही गयी है ।
तो मैंने एक वामपंथी मित्र से सवाल किया कि मेरे दोनों लौंडे इस महीने अगर नोटबंदी के कारण 1800 की jeans और 3500 रु का Nike Reebock का जूता न खरीदें तो मेरे 5300 रु बच गए …… मैं सीधे सीधे 5300 रु से अमीर हो गया तो मुल्क कैसे गरीब हो गया ……. मेरे कू ये समझाओ ……
मेरे उन झामपंथी मित्र ने कुछ यूँ समझाया कि हे दद्दे ……. ये GDP दरअसल बड़ी कुत्ती चीज़ है ……. इसको कुछ इस तरह से समझो कि मान लो ये पेड़ जिसके नीचे तुम बैठे हो …… ये देखो कितनी शीतल छाया है इसकी …… कितना सुख देता है …… पेड़ से ही जल है – जीवन है ।
पर ये पेड़ GDP के किसी काम का नहीं । ये हराभरा लहलहाता पेड़ जो दिन रात बढ़ रहा है , फल फूल रहा है देश की GDP में कोई वृद्धि नहीं कर रहा ।
GDP तो भैया तब बढ़ेगी जब इसे काट दोगे । ये कटेगा तो सबसे पहले इस से लकडहारा जो कुल्हाड़ी चलाएगा वो कमाएगा । फिर इसकी छंटाई होगी । पतली लकडियाँ जलावन में चली जायेंगी और मोटी आरा मशीन पे …… इस से आरा मशीन वाला कमाएगा , लकड़ी की टाल वाला कमाएगा ……. कोई trolly वाला कमाएगा …… 4 मजदूर जो लादे उतारेंगे वो कमाएंगे ……. फिर आरे पे चीर के लकड़ी किसी बढई के पास जायेगी तो वो उसका furniture बना के कमाएगा …… फर्नीचर बनेगा तो उसमे फेविकोल कील sunmica लगेगा ……. वार्निश paint होगा ……. फिर उस furniture को कोई दुकानदार बेच के कमाएगा ……. सब लोग मालामाल हो जायेंगे ……. इस तरह देश की GDP बढती है ……. देश की GDP बढाने के लिए इस पेड़ को कुर्बानी तो देनी ही होगी …….

देश तभी बढेगा जब तुमरे लौंडे Lewis की jeans के नीचे reebok का 8500 का जूता पहनेंगे …….. अगर तुम साले देश द्रोही …….. शर्म नहीं आती ……. लौंडो को रोजाना मने करते हो कि jeans और जूते पे फालतू खर्चा न किया करें ।
यदि आप सच्चे देश भक्त हैं तो अपनी बीबी को रेस्ट दीजिये और खाना महंगे Restaurant से मंगा के खाइये ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

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राघव त्रिपाठी

ले बेंच जितनी अधिक होगी जीडीपी उतनी अधिक होती है। मतलब मुद्रा स्थिर रहेगी तो जीडीपी नीचे आणि है।

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