बहु कोणीय चुनाव में एक एक भोट माने रखता है

इस समय जब कि मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ , मुलायम सिंह के लखनऊ आवास पे सुलह का अंतिम प्रयास चल रहा है । शिवपाल और अखिलेश दोनों को आमने सामने बैठाया गया है ।
ये कहना बहुत आसान है कि पूरी पार्टी और सभी विधायक अखिलेश के साथ शिफ्ट कर गए हैं और अब वही असली समाजवादी पार्टी हैं ।
काश चुनावी लोकतंत्र में सब कुछ इतना ही सीधा , सरल और सपाट होता ।
माना कि चुनाव में पार्टी का बहुत बड़ा महत्त्व है ।
पर प्रत्याशी भी महत्वपूर्ण होता है ।
और तब जब कि पार्टी विभाजित हो दो फाड़ हो गयी हो तो प्रत्याशी का महत्त्व 100 गुना बढ़ जाता है । चुनाव में जब बहुकोणीय संघर्ष होता है तो एक एक भोट का महत्त्व होता है ।

आपको एक किस्सा सुनाता हूँ । बहुकोणीय संघर्ष में क्या होता है ।
2014 लोस चुनाव होने वाले थे । हमारे गाज़ीपुर लोस क्षेत्र से भाजपा के जुझारू नेता , अरुण सिंह जिन्हें राजनाथ का वरद हस्त था वो एक Gypsy ले के घूमने लगे थे । आश्वस्त थे कि टिकट पक्का है ।
ऐन मौके पे भाजपा ने टिकट मनोज सिन्हा जी को दे दिया और आहत अरुण सिंह बागी हो गए ।
उधर सपा ने डेढ़ साल पहले से बाँट दिया गया एक टिकट काट के शिवकन्या कुशवाहा को साइकिल पे चढ़ा दिया ।
हाथी पे कैलाश नाथ यादव सवार थे ।
उधर संभल से बाहुबली DP Yadav चले आये और मुख्तार अंसारी के समर्थन से चुनाव लड़ गए ।

Final result इस प्रकार रहा ।

Bjp(मनोज सिन्हा ) 3,06,000
SP ( शिवकन्या कुशवाहा ) 2,74,000
Bsp. (कैलाश जादो ) 2,41,000
Dp yadav ( मुख्तार अंसारी ) 59,000
Arun singh बागी 34,000

अब इस मुकाबले का विश्लेषण कीजिये ।
यादव 3 जगह बंटे । सपाई यादव शिवकन्या की झोली में , मौक़ा परस्त बिकाऊ यादव बसपा के कैलाश यादव की झोली में , progressive राष्ट्रवादी विकासवादी यादव मोदी लहर में बह के भाजपा की झोली में जा गिरे ( जी हाँ , 2014 में गाज़ीपुर में भाजपा को यादवों का बम्पर भोट मिला था ) .

कुछ गए गुजरे अहीर DP यादव के टुकड़े भी तोड़ते पाये गए ।
मुसलमान सपा और मुख्तार अंसारी में बंटे पर ज़्यादातर सपा में गिरे । कुछ 10 या 20 % मुख्तार अंसारी समर्थित DP जादो की झोली में गिरे ।
अरुण सिंह भाजपा के बागी हुए और 34,000 भोट का नुक्सान किये । मनोज सिन्हा ने बड़ी मुश्किल से 32,000 की लीड से चुनाव जीता ।

अब सुनिये …… DP Yadav न होते तो सपा जीत जाती ।
अरुण सिंह बागी न होते तो भाजपा के मनोज सिन्हा 70,000 के ठीक ठाक मार्जिन से जीतते ।
बसपा कैलाश यादव को टिकट न दे के अगर किसी अन्य जाति वाले को टिकट दे देती तो शायद सपा ये सीट 2 लाख के भारी अंतर से जीतती ।
अगर गाज़ीपुर से शिवकन्या कुशवाहा को टिकट न देती तो 90% कुशवाहा वोट भाजपा को मिलता पर अब 70 % से ज़्यादा शिवकन्या / सपा की झोली में जा गिरा ।

इस उदाहरण को ध्यान में रखते हुए सपा की वर्तमान कलह पे नज़र दौड़ाइये ।
अगर वाकई अखिलेश शिवपाल में सुलह न हुई तो शिवपाल भी 403 प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे ।
हर सीट पे 2 – 4 सपाई ऐसे हैं जो पिछले 20 साल से दिन रात एक कर जमीनी राजनीति करते हैं और अपनी अपनी जाति बिरादरी समूह वर्ग धर्म में ठीक ठाक पकड़ रखते हैं । ऐसा कोई प्रत्याशी अखिलेश का बागी हो मुलायम सिपाल के आशीर्वाद से चुनाव लड़ जाए तो 10 – 20 या 50,000 वोट ले मारेगा ।
और दो बंदरों की लड़ाई में न जाने कौन सा तीसरा बन्दर बाजी मार जाए ।

सपा की लड़ाई असली है । जो तलवारें निकली वो भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली होगा ।
ऊपर से चाहे जो कहें , समझ अखिलेश और सिपाल दोनों रहे हैं ।
मोदी की आंधी नहीं सुनामी आएगी ये भी जानते हैं दोनों ।
इसीलिए सुलह का अंतिम प्रयास हो रहा है ।
पर कुछ भी हो …….. शिवपाल को राजनीति में relevent रहने ज़िंदा रहने के लिए इस बार अखिलेश का सूपड़ा साफ करना बहुत ज़रूरी है ।
इस चुनाव में शिवपाल के आदमी सरेआम भाजपा के लिए भोट मांगते गिराते दिखें तो मुझे ज़रा भी ताज्जुब न होगा ।
मैंने 2009 में इसी बनारस में कांग्रेसी अजय राय को भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के लिए भोट गिरवाते देखा है ।

Beware of the old Fox ……..

नमाजवादी कुनबे में जो घमासान मचा है उसपे मैं पिछले 3 दिन में काफी कुछ लिख चुका हूँ ।
जैसा कि मैंने लिखा था कि इतिहास अपने को दोहरा सकता है ।
जैसे 1969 में इंदिरा गांधी को जब कांग्रेस से निकाल दिया गया तो समूची कांग्रेस मय भोटर उनके साथ चली गयी ।
इंडीकेट ही असली कांग्रेस बन गयी । कामराज और निजलिंगप्पा का सिंडिकेट झंडू कौड़ी के तीन हो के रह गए ।
आज नमाजवादी पार्टी में जो खुली बगावत हुई और रामगोपाल वर्मा और कलेस जादो ने जिस तरह एक असंवैधानिक अवैध अधिवेशन बुला के पार्टी पे अवैध कब्जा कर लिया …….. और सत्ता की चाशनी पे मंडराने वाली मक्खियों की तरह सब विधायक अखिलेश के साथ जा खड़े हुए उस से बहुत ज़्यादा प्रभावित होने की ज़रूरत नहीं ।
क्योंकि अखिलेश इंदिरा गांधी नहीं हैं और मुलायम कामराज नहीं हैं और UP में समाजवादी पार्टी 60 के दशक की कांग्रेस नहीं है ।
60 के दशक की कांग्रेस उस जमाने की कांग्रेस थी जब विपक्ष नाम की कोई चीज़ नहीं थी । पूरे देश पे एक छत्र राज था कांग्रेस का । कांग्रेस के टिकट पे कुत्ता भी खड़ा हो तो जीत जाता था । कांग्रेस के लिए राजनीति खाली मैदान थी ।
आज UP में राजनीति के 4 ध्रुव हैं । भाजपा उफान पे है । सपा को बसपा और भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है । इस त्रिकोणीय संघर्ष में सपा अगर पहले नंबर पे आ सकती है तो तीसरे पे भी खिसक सकती है । सिर्फ एक % का swing हार को जीत में बदल सकता है या फिर सूपड़ा साफ कर सकता है ।
ऐसे में ऐसी खुली बगावत वो भी मुलायम सिंह से ?
मुलायम कामराज नहीं हैं । मुलायम की यूपी के अहीरों में कितनी पैठ और कितनी पकड़ है इसका अंदाज़ा शायद आपको न हो ।
अखिलेश और रामगोपाल को चाहिए कि वो इस बूढ़ी लोमड़ी से सतर्क रहे ।
Beware of the old Fox …….. हो सकता है कि मुलायम बेटे के सामने पसीज जाएँ और झुक जाएँ । पर अगर ……. खुदा न खास्ता …… मुलायम के अहम् को ठेस लगी ……. और उन ने अगर कमर कस ली …….. तो अहिरानी आज भी उनके नाम पे खड़ी हो जायेगी ।
यदि सचमुच मुलायम झोली पसार के अहिरानी में खड़े हो गए ……. और अपने बुढापे का वास्ता दे के एक इमोशनल सी स्पीच ……… सिर्फ एक स्पीच पूरा चुनाव पलट देगी ( सपा के लिए ) और अखिलेश और राम गोपाल जैसों की खटिया खड़ी कर देगी …….. अखिलेश और राम गोपाल की पार्टी की जमानत नहीं बचेगी ।
अब देखना ये है कि मुलायम और शिवपाल कितना fight back करते हैं ।
5 Jan को जो अधिवेशन बुलाया है देखना होगा कि उसमें कौन कौन आता है ।
अगर ये मान भी लिया जाए कि शिवपाल की लिस्ट के सभी 403 प्रत्याशी भी अगर अखिलेश खेमे में चले गए तो भी 150 से ज़्यादा के टिकट कटेंगे । बाकी बची 250 सीटों पे नए प्रत्याशी खोजना शिवपाल के लिए एक दिन का काम है ।
सपा के कुल 3 bank खाते हैं । एक दिल्ली में जिसके signatory राम गोपाल है पर उसमे funds नाम मात्र के हैं । बाकी दो खाते सैफई और लखनऊ में हैं । इसके signatory मुलायम हैं ।
अगले कुछ दिनों में party symbol के लिए लड़ाई होगी । बहुत संभव है कि Cycle मुलायम शिपाल के पास रह जाए और अखिलेश नए symbol पे चुनाव लड़ें ।
ऐसी स्थिति में क्या शिवपाल के वो 400 प्रत्याशी हर सीट पे क्या 5000 वोट भी नहीं काटेंगे ?
चतुष्कोणीय लड़ाई में जबकि भाजपा उफान पे हो और मुसलमान दिग्भ्रमित हो 3 जगह बँट बिखर रहा हो ……. हर सीट पे 5000 भोट का नुक्सान सफाया कर देगा ।
शिवपाल और मुलायम इतने भी गए बीते नहीं जो 5000 भोट को मोहताज हो जाएं ।
मुलायम अगर पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन भी गए तो अकेले शिवपाल भी इतने कमजोर नहीं कि हर सीट पे 5 या 10 हज़ार वोट काट के अखिलेश को औकात न बता दें ………..

नामाजवादी कुनबे की ये लड़ाई कोई नाटक नौटंकी नहीं एकदम असली है ।
तलवारें भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली ही होगा ।

चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

पूर्वांचल में अपने होशो हवास में , भरसक , कोई बाऊ साहब लोगों मने ठाकुरों को कोई दूकान मकान भाड़े पे नहीं देता । मने दूकान खाली पड़ी रहे ऊ मंजूर बाऊ साहब को भाड़ा पे नहीं देंगे ।
और ई रेपुटेसन कोई रातों रात नहीं बन गयी है ……. बाऊ साहब लोग की सैकड़ों साल की चोरकटई से ई रेपुटेसन बना है ……. मने बाऊ साहब को मकान दूकान भाड़े पे दिया त ऊ गयी …..
अब करा लिहा खाली ……. जा लड़ा कोट कचहरी ……. जादो जी लोग का रेपुटेसन कुछ भिन्न है ।
मने जादो जी लोग भड़इता मने किरायेदार बन के मकान दूकान पे कब्जा नहीं करेगा ।
ऊ सब Virgin land खोजता है …… मने खाली पिलाट …….
अगर आपका शहर में कहीं कोई खाली पिलाट पड़ा है ……. तो कोई यदुवंशी उसको कई साल तजबीजता रहेगा …… एकदम बकुल ध्यानं …… मने तब तक इन्तजार करेगा जब तक कि कोई यादवी सरकार सत्ता में न आ जाए ……. और उसको जैसे ही कोई अनुकूल अवसर मिला …… ऊ आपके प्लाट पे 4 ठो गोरु गैया लिया के रातों रात तबेला खोल देगा ……. यादव डेरी फार्म …… इहाँ सांड भैंसा का सुद्ध दूध मिलता है ……. अब आप लाख सिर पटक के मर जाये …… थाना दारोगा कप्तान …… सब कीजिये ……. जादो जी कब्जा नहीं छोड़ेंगे । तब तक जब तक कि कोई नयी सरकार न आ जाए जो आपकी बात सुने और जादो जी को बांस कर दे …….. आज ऊपी में नामाजवादी सरकार के ऊपर सबसे बड़ा कलंक यही है ……. सरकारी और पिराईभेट …… सभी जमीनों पे एकदम निर्विकार भाव से अवैध कब्जा …….. मने किसी की भी संपत्ति में जबरदस्ती घुस जाना और लाठी के बल पे कब्जिया लेना ।

अब आज का लखनऊ का ही किस्सा देख लीजिए ।
सपा कार्यालय पे जबर्दस्ती कब्जा ……. चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

जादो जी लोग चाहे जौना पोजीसन में आ जाएँ …… अवैध कब्जा का नैसर्गिक गुण सामने आ ही जाता है ।

क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..

Competitive Sports में एक सूत्र वाक्य है ।
क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..
मने सारी तैयारी के बाद जो चीज़ सबसे महत्वपूर्ण होती है वो है जी दारी ……. मने fighting Spirit , killing Spirit ……. मानसिक दृढ़ता ……..
हमारे यहाँ देसी Indian Style Wrestling जो मिट्टी के अखाड़ों में लड़ी जाती है ……. कुश्ती के दंगल होते हैं । इन इनामी दंगलों में जो सबसे बड़ी ईनामी कुश्ती होती है वो अक्सर लाखों की होती है । हरियाणा ,पंजाब , हिमांचल और महाराष्ट्र में पहली कुश्ती अक्सर लाख डेढ़ लाख की होती है । महाराष्ट्र में तो 5 लाख तक की । इसमें टाइम भी खुला होता है । इसे आर पार की कुश्ती कहते हैं । ऐसी कुश्तियां घंटा डेढ़ घंटा भी चल सकती है । मने जब तक हार जीत न हो तब तक भी चल सकती है । पिछले साल महाराष्ट्र के एक दंगल में ऐसी ही एक कुश्ती साढ़े तीन घंटा चली । पुराने जमाने में ancient Olympics में ऐसी कुश्तियां 10 – 12घंटे तक चल जाया करती थीं ।
modern Olympics में भी 1904 या 1908 वाले olympic में एक कुश्ती 19 घंटे चली बतायी जाती है । पहले दिन दस या 12 घंटे चली । फिर उसमे अवकाश दे दिया गया क्योंकि पहलवान जी लोग तो अखाड़े में खड़े थे पर दर्शक और आयोजक बैठे बैठे थक गए । इसलिए ये तय हुआ कि अब इसमें अवकाश दिया जाए और हार जीत का फैसला कल हो ……. अगले दिन फिर 7 या 9 घंटे हुई तब जा के एक मल्ल ने हार मानी …….. इसके बाद ओलम्पिक आयोजन समिति ने हाथ जोड़ लिए कि भैया …… ई ना चोलबे ……. इसके नियम क़ानून कुछ बदलो और हार जीत तय करने का कोई और नियम बानाओ …… इस तरह धीरे धीरे इस Modern Olympic Style wrestling का विकास हुआ जिसमे हार जीत Points पे होने लगी और कुश्ती का समय सीमित किया गया । इसके अलावा , पहले सिर्फ Heavy Wt wrestling ही होती थी जिसमे सिर्फ भारी भरकम पहलवान ही भाग लेते थे और बेचारे छोटे मोटे आदमी के लिए कोई गुंजाईश न थी । कालान्तर में ये Weight Categories का चलन हुआ ……..परन्तु देसी कुश्ती में आज भी आर पार की कुश्तियाँ होती हैं ……. हालांकि कई आयोजन समितियां अब ये करने लगी हैं कि एक निश्चित समय के बाद point पे कुश्ती करा के हार जीत का फैसला कर लिया जाए जिस से कि सारा दिन लड़ने लड़ाने की नौबत न आये । जैसे 40 मिनट आर पार …… यदि इसमें चित पट न हो तो फिर 5 मिनट point की कुश्ती करा के फैसला अंको के आधार पे ।
हम कोच प्रशिक्षक अपने पहलवानों को हमेशा एक ही बात समझाते हैं कि देखो बेटा ……. जब कुश्ती होती है और जब तुम थक जाते हो …….. तो ये याद रखो कि सामने वाला भी लड़ रहा है ……. उसका भी उतना ही जोर लग रहा जितना तुम्हारा ……. वो भी उतना ही थका हुआ है जितने तुम ……. ऐसे में जीतेगा वो जो जीदारी करेगा ……. वो जिसमे killing spirit कायम रहेगी …….. सारा खेल जीदारी का है …….. लड़ाई में बाकी की सारी physical तैयारी तो coach के हाथ में होती है …… जैसे Strength , endurance , speed , technique , Strategy …….. पर ये जो जीदारी है न ……. ये साली जन्म जात होती है ……. हालांकि इसे भी improve करने की कोशिश तो हम करते ही हैं ……. तभी ये Sports Psychology नामक विज्ञान आया ……. हम इसमें खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं …….. मने इसमें खिलाड़ी को ये समझाने की कोशिश लगातार करते हैं कि भाई अपने आपको पहचान …… तू बहुत तगड़ा है …….
पर ऐसे में बहुत से पहलवान ऐसे होते हैं जो आपकी बात सुन के हाँ हूँ तो करता रहेगा पर उसकी body language ऐसी होती है जो कोच से कह रही होती है ……. अरे कोच साब …… क्यूं चूतिया बणा रहे हो ……. क्यों झूठ धका रहे हो ……
क्यों मने चने के झाड़ पे चढ़ा रहे हो …….. आपणे के बेरा मैं कितना बड़ा गांडू हूँ ……. मने कोच कितना भी जोर लगा ले , जब तक पहलवान जी दारी न धरे ……. वो खुद को गांडू मानना बंद न करे ……. कुछ नहीं हो सकता ……..

ऊपी में भी यही किस्सा दोहराया ना रहा है ……. सामने वाले की फटी पड़ी है ……. उसके पिछवाड़े के चीथड़े उड़े हुए हैं ……. फट के हाथ में आई हुई है ……. कुनबे में घमासान मचा है …… पार्टी दो फाड़ होने को है , पिछले 6 महीने से सुलह की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी है ………. संगठन तितर बितर छिन्न भिन्न हो चुका है …….. voter निराश हताश है और नए ठौर ठिकाने खोज रहा है और इसी दुश्मन को आपने 2014 में नंगा करके मारा है , घसीट घसीट के मारा है ……. आप उस से बेजोड़ तगड़े हैं …….. पर कुछ गांडू किस्म के लोग लगातार यही कह रहे है कि अजीत भाई ……. क्यों चने के झाड़ पे चढ़ा रिये हो …….. आप जानते नाही कि मोलायम और उसका बेटा अखिलेश कितना तगड़ा है और हम कितने बड़े गांडू ……. देख लेना वही जीतेंगे 2017 ……..
क्योंकि वो शेर और हम गांडू ……… इतनी छीछालेदर के बाद भी वही जीतेंगे और इतने तगड़े होने के बाद भी हम ही हारेंगे क्योंकि आप जानते ही नहीं कि हम कितने भयंकर किस्म के गांडू है …….

दुनिया की हर बीमारी का इलाज है , गांडू गर्दी का कोई इलाज नहीं

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।

14 December 1903 …….. पहली उड़ान की कोशिश की पर असफल रहे ।
जो तथाकथित मशीन बनायी थी जिसे कहते थे कि हवा में उड़ जायेगी ….. वो टूट फुट गयी ।
17 Dec 1903 ……. उस टूटी फूटी मशीन को ठीक ठाक कर फिर से कोशिश की ।।
पहली उड़ान सिर्फ 120 फीट की थी । जमीन से ऊंचाई सिर्फ 10 फुट थी और गति सिर्फ 30 मील …….
राईट बंधुओं ने अपने पिता को टेलीग्राम भेज के उड़ान की सफलता की सूचना दी और स्थानीय प्रेस को भी सूचित करने को कहा ।
स्थानीय अखबार Dayton Journal ने इसे कोरी गप्प और सफ़ेद झूठ कह के खारिज कर दिया ।
अगले 3 साल राईट बंधुओं को लोगों को ये समझाने में बीत गए कि वाकई उड़ान सफल रही और दुनिया को बदल देने वाला आविष्कार हो चुका है ।
पर कोई मानने को तैयार न था । समूचे यूरोप के अखबार राईट बंधुओं को Bluffers कह के पुकारते थे । राईट बंधुओं ने अमेरिका और यूरोप की सरकारों से संपर्क किया पर किसी ने कोई दिलचस्पी न दिखाई । US Army ने राईट बंधुओं के विमान को कोई महत्त्व न दिया ।
फिर राईट बंधुओं ने किसी तरह पूँजी जुटा के France में एक Air Show आयोजित किया जिसे हज़ारों लोगों ने देखा । तब जा के यूरोपीय अखबारों ने राईट बंधुओं से सार्वजनिक क्षमा याचना की ।
July 1909 में US Army ने राईट बंधुओं से एक करार किया जिसमे वो ऐसा विमान बनाते जिसमे पायलट के साथ एक सहयात्री , 1 घंटे की उड़ान और न्यूनतम गति 40 MPH होनी ज़रूरी थी ।

1913 तक राईट बंधुओं ने US Army के लिए कुल 6 Model C विमान बनाए और वो सारे crash कर गए । कुल 13 आदमी ” शहीद ” हुए ।

कुल मिला के उन दिनों राईट बंधुओं को झूठा , फरेबी , मक्कार , धोखेबाज , Fraud , फेंकू इत्यादि नामों से बुलाया जाता था और हवा में उड़ने वाली मशीन को अफवाह , झूठ का पुलिंदा , और Failure कहा जाता था ।

शेष इतिहास है ।

यूँ सुनते हैं कि नोटबंदी भी फेल हो गयी है और मोदी भी फेंकू , झूठा , मक्कार , धोखेबाज , भ्रष्ट है और नोटबंदी 8 लाख करोड़ रु का mega Scam है ।

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।

किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ? मोलायम या अकलेस ?

इतिहास खुद को दोहरा रहा है क्या ?
बात 1966 की है ।
लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गाँधी PM बनी थी ।
उनके नेतृत्व में 67 में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया । सिर्फ 283 सीट आई । बहुमत से बमुश्किल 20 सीट ज़्यादा ।
जब शास्त्री जी मरे थे तो इंदिरा उनके मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी । उन्हें गूंगी गुड़िया कहा जाता था । वो सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा भर थी जिसके नाम के आगे गांधी नेहरु लगा था ।
शास्त्री के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कामराज ने तो अपनी तरफ से एक कठपुतली
बैठाई थी कुर्सी पे ……. सत्ता की चाभी उनके पास थी । उनके अलावा मोरारजी भाई देसाई , निजलिंगप्पा , नीलम संजीव रेड्डी , हितेंद्र देसाई , सत्येन्द्र नारायण सिन्हा , चन्द्र भानु गुप्त और वीरेन्द्र पाटिल जैसे दिग्गज थे कांग्रेस में ……… पर PM बनते ही इंदिरा गाँधी ने रंग दिखाना शुरू किया और इन वट वृक्षों की छाया से बाहर आ गयी ।
12 Nov 1969 को तत्कालीन अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने अपनी PM इंदिरा गाँधी को अनुशासन हीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया ……… इंदिरा ने अलग हो के नयी पार्टी बना ली ……. सारे बूढ़े खलीफा एक तरफ , गूंगी गुड़िया अकेली एक तरफ …….. इंदिरा गाँधी की कांग्रेस ( O ) और कामराज वाली Cong ( R ) …….. पार्टी दो फाड़ हो गयी ।
तत्कालीन कांग्रेस working committee के 705 मेंबर्स में से 446 इंदिरा गाँधी के साथ हो गए ।
पुरानी कांग्रेस जिसमे कामराज के साथ सब बूढ़े थे , वो उन दिनों सिंडिकेट कहलाती थी और इंदिरा की कांग्रेस इंडिकेट ……..

1971 में अगले आम चुनाव हुए । इंदिरा गाँधी ने 43.6% भोट के साथ 352 सीट जीत के बम्पर सफलता अर्जित की । सिंडिकेट के बुढवों को जनता ने नकार दिया । उनको सिर्फ 10 % भोट और सिर्फ 16 seats मिली ।
लोकतंत्र में राजा वो जिसके साथ जनता ……. भोटर ।

UP में वही तमाशा चल रहा है ।
पप्पू अखिलेश अपने बूढ़े घाघ बाप और चाचा की छाया से निकल के बाहर आ गया है ।
कल रात शहजादे सलीम ने अकबर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया ।
कहता है कि 265 सीट पे बागी उम्मीदवार लड़ाऊँगा …….. पार्टी मुख्यालय में निष्कासन का पत्र type कर के रखा है । सिर्फ मुलायम के sign होने बाकी हैं ।
सवाल है कि भोटर किसके साथ जाएगा ।
यादव वोटर confused है । बूढ़े बुजुर्ग मुलायम के साथ हैं तो युवा अखिलेश के साथ । जिलों में पुराने नेता मुलायम के साथ हैं तो नए अखिलेश के साथ ।

71 में जनता के सामने विकल्प सीमित थे । या सिंडिकेट या फिर इंडिकेट । उनके लिए चुनाव आसान था । उन्होंने इंदिरा को चुन लिया । आज UP की जनता के सम्मुख 4 विकल्प हैं ।
मोदी , मायावती , मुलायम या अखिलेश ।
आज की स्थिति में अखिलेश 3rd या 4th position के लिए लड़ रहे हैं ।
Gold और Silver मैडल तो तय है ।
सपा के भोटर ……. यादव : 35 % मोलायम , 35 अखिलेश , बाकी 30 % भाजपा ।
मुसलमाँ बेचारा …….. खरबूजा कटेगा और सबमे बंटेगा ……… पहले 3 जगह बँटना था अब 4 जगह बंटेगा । 40 % बसपा बाकी 60 % में 4 हिस्से ……..

असली लड़ाई 2017 के बाद शुरू होगी जब सपा में सिंडिकेट और इंडीकेट होगा ।
किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ?
मोलायम या अकलेस ?

UP में नमाजवादी कलह

नमाजवादी कुनबे की कलह सड़क पे आ गयी है ।
परसों अकलेस जादो ने 403 प्रत्याशियों की सूची अपनी तरफ से मोलायम जादो को सौंप दी थी ।
सिपाल जादो ने उस लिस्ट को अपने संडास में रख दिया । save paper ……. tissue paper के काम आयगा ।
कल सिपाल जादो ने अपनी लिस्ट मोलायम को थमा दी । उस लिस्ट में सिपाल ने कायदे से अकलेस का औकातीकरण किया है । जब मोलायम ने लिस्ट जारी की उस समय CM झांसी में थे । पर मोलायम ने उनकी उपस्थिति ज़रूरी नहीं समझी । सूची जारी कर दी । सूची जारी करते हुए ये भी कहा कि पार्टी का कोई CM चेहरा नहीं है । साथ ही ये भी साफ़ कर दिया कि पार्टी अकेले अपने बूते चुनाव लड़ेगी । किसी से कोई गठबंधन नहीं ।
सूची में ऐसे 107 नाम हैं जिनका टिकट अकलेस ने काट दिया था । उन 107 को सिपाल जादो ने टिकट दे दिया है ।
चुनावी राजनीति का पहला नियम ये है कि Anti Incumbency से निपटने के लिए sitting MLA या MP के टिकट काट दिए जाते हैं । पर अकलेस ने इस मौलिक सिद्धांत की अवहेलना करते हुए 216 sitting MLAs को टिकट दिया था । जो 10 MLA सिपाल जादो के बेहद करीबी थे सिर्फ उनका टिकट काटा । इसमें ओम प्रकाश सिंह , नारद राय और शादाब फातिमा प्रमुख है । नारद राय वो हैं जिन ने मंत्री रहते माफिया Don मुख्तार अंसारी की पार्टी में एंट्री कराई । शादाब फातिमा के लिए कहा जाता है कि वो अकलेस जादो की नयी चाची हैं …….. जाहिर सी बात है कि सिपाल की लिस्ट में चाची का जलवा कायम है ।
एक बात जो गौर करने लायक है वो ये कि महाभ्रष्ट खनन मंत्री गायत्री प्राजापति दोनों की लिस्ट में कायम हैं ।

मोटे तौर पे अकलेस जादो के 100 टिकट काट दिए गए और 107 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जिनका टिकट अकलेस ने काटा था ।

अखिलेश sitting MLAs पे दाव खेल रहे है । इनमे से 200 नाम ऐसे हैं जो आज तो अखिलेश के साथ दीखते हैं पर कल क्या करेंगे अल्लाह जाने ।

इस समय CM house में MLAs की बैठक चल रही है ।
देखिये क्या निकलता है ।

रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

हमारे इदर एक कहावत कहते है
बिल्ली को सपने में बी छीछ्ड़े दीखते हैं ।
छीछ्ड़े ……. मने कसाई जब मांस बेचता है तो उसमे से कुछ टुकड़े जो बेकार बच जाते हैं उन्हें छीछ्ड़े कहते हैं । एक अच्छी बिल्ली को हमेशा छीछ्ड़े पे focus करना चाहिए । बकरे पे नहीं ।

मोदी जी ने 2014 के लोस चुनाव के run up में कहा कि विदेशों में इतना काला धन जमा है कि उसे अगर देश में वापस ला के विकास कार्यों पे खर्च किया जाए तो हर हिन्दुस्तानी के हिस्से 15 लाख रु आयेगा ।
बस दीख गया बिल्ली को छीछ्ड़ा ……. मोदी हर आदमी के खाते में 15 लाख रु जमा कराएगा ।

मोदी ने 2014 में कहा ……. 5 करोड़ लोगों को रोजगार …….. बिल्ली को दीख गया छीछ्ड़ा ……..
पूछ रहे हैं कब मिलेगी 5 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी ? बिल्ली की dictionary में रोजगार मने सरकारी नौकरी ।

इधर मोदी जी का मूलमन्त्र है ……. विकास से रोजगार ।
skill development करो रोजगार पाओ ।
उद्यम करो ……. रोजगार पाओ ।
मुद्रा बैंक से 50,000 से ले के 10 लाख तक का लोन लो …….. स्वरोजगार करो ……. entrepreneur बनो ……. खुद रोजगार पाओ , समाज में 10 और लोगों को रोजगार दो ।
infrastructure बनाओ ……. उस से अपने आप रोजगार का सृजन होगा ।
गुजरात में पटेल की मूर्ति …….
मुंबई में शिवा जी की मूर्ति …..
ये दोनों बहुत बड़े tourist attraction होंगे । हर साल लाखों tourist आयेंगे इन्हें देखने । कितना रोजगार मिलेगा लोगों को ?

उत्तराखंड की पूरी economy ही चारधाम पे निर्भर करती है ।
चारधाम मने बदरीनाथ केदारनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री ……… ऋषिकेश से आगे ये चारों धाम कुल 900 km की यात्रा है । आज तक इस पूरे रूट की इतनी दुर्दशा थी कि पूछो मत । सड़कों का बुरा हाल । यात्रा पे हमेशा अनिश्चितता की तलवार लटकी रहती है । कब रास्ता बंद हो जाएगा , कब आपकी गाडी खड्ड में चली जायेगी , कब आपके ऊपर पूरा पहाड़ आ गिरेगा , कब पूरी की पूरी सड़क सैलाब में बह जायेगी ……. सब राम भरोसे ।
इसके बाद भी लाखों लाखों श्रद्धालु हर साल आते हैं उत्तराखंड ……. चार धाम की यात्रा करने …….
tourist जब आता है तो उस से समाज का हर वर्ग कमाता है । सड़क किनारे एक अंगीठी रख के चाय बेचता चाय वाला भी , भुट्टा भून के बेचने वाला भी , लाख रु down payment दे के किश्तों पे गाड़ी खरीद taxi चलाने वाला युवक भी और 3star 5 star hotel का मालिक भी ……..
सब कमाते हैं ……. सबको रोज़गार मिलता है ।
2013 की केदारनाथ त्रासदी ने उत्तराखंड को बर्बाद करके रख दिया । सडकें सैलाब में बह गयी ।
हज़ारों सैलानी मारे गए । श्रद्धालुओं ने चारधाम से मुह मोड़ लिया । पूरे प्रदेश की economy तहस नहस हो गयी । सैलानी को confidence ही न रहा । कौन जान देने जाएगा वहाँ । जान है तो जहान है ।
कल मोदी जी ने चारधाम express way परियोजना की आधारशिला रखी ।
900 km लम्बी चारधाम महामार्ग विकास परियोजना कुल 12000 करोड़ रु की लागत से बनेगी जिसमे मुख्य शहरों कस्बों के bye pass , Tunnels , Bridge और Flyover बनेंगे ।
इस परियोजना का सामरिक महत्त्व भी है क्योंकि गंगोत्री बद्रीनाथ रूट से indo china बॉर्डर पे सामरिक deployment और supply का अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य होगा ।
सरकार ने इसे 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है ।

ये परियोजना उत्तराखंड के लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराएगी ।

मोदी जी जानते हैं कि 125 करोड़ लोगों के देश में सबको सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती पर सबको रोज़गार ज़रूर दिया जा सकता है ।
रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

ये चुनाव सपा के लिए तो ख़तम है ………

नामाजवादी कुनबे में तलवारें फिर खीच गयी हैं ……..

भतीजे अकलेस जादो ने चचा सिपाल जादो को खोल के दिखा दिया है ……लो चचा पकड़ लो …….

हम ना मानते तुमको औ तुमाई अध्यक्सी कू …….. अपनी अध्यक्सी भीतर घाल लओ ……… भोत देखे आँ तुमाए जैसे अध्यक्स ……. तुम औ तुमाई पालटी ………

आज भतीजे ने पालटी अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए …….खुल्लम खुल्ला  विद्रोह करते हुए अपने 403 प्रत्याशी घोषित कर दिए ……..

अब अकलेस जादो खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे ……..और दुनिया से नहीं डरेंगे ……..

अकलेस किसी से न डर रहे हैं न किसी का लाज लिहाज रह गया है ……… उन्होंने जीरो मने शून्य से शुरू करने का मन बना लिया है . दरअसल अखिलेश के पास खोने के लिए कुछ नहीं है . परिवार खानदान की धन संपदा वो त्याग चुके हैं . अगर आपको याद हो तो लखनऊ की माता कैकयी ने सैफई के राजा दसरथ से कही कि हमाए बेटे का का होगा . राजा दसरथ ने बँटवारा कुछ यूँ किया कि देखो कैकयी , धन संपदा बिजनिस और चोरी चकारी से आज तक जो कमाया वो तुमाए बेटे परतीक कू दिया ……. और राजनैतिक पूँजी और विरासत अकलेस कू ……. पर परतीक जादो का पेट उतने से कहाँ भरने वाला था सो उन ने गायत्री प्रसाद प्ररजापती जैसे मन्तरी पाल लिए जो रोजाना दो चार डी रुपिया कमा के दे रहे थे खनन विभाग से …….

उधर राजपाट में हिस्सा बंटाने के लिए 36 ठो चचा भतीजा थे ………  बेचारे अकलेस जादो दोनों पैरों में बाप और चचा चक्की बाँध के राज किये ऊपी में . पर बर्दाश्त की भी हद होती है …….. विद्रोह के अलावा कोई चारा न था …….

इधर मुलायम जादो और सिपाल जादो न मोदी और अमित शाह के सामने हथियार डाल दिये हैं .

मुलायम ने मोदी से कहा ………. याद है ? हम दोनों भाई मने मैं और सिपाल , कहाँ से उठे हैं ? किस फुटपाथ मने सैफई के किस तबेले से उठे थे ? हमाए बाप के पास टूटी साइकिल न होती थी …….हम दोनों भाई पैदल ही ढोर चराया करते थे …….. और देख लो ….हमने सैफई से ढोर चराना शुरू किया और 30 – 40 सालों में पूरा ऊपी चर डाला ……… आज क्या नहीं है हमाए पास ……. अरबों खरबों की बेनामी संपत्ति है ……. स्विस बैंक में अकाउंट है ……. हमाए 36 ठो भाई भतीजा MP , MLA  हैं ……… तुमाए पास क्या है ? सिवाय 5 – 7 कुर्ता पजामा के ……… वो बी साले तुम फिरी में सिलवा लेते हो गांधीनगर से ? क्या हैं तुमाए भाई भतीजे ? एक रासन की दूकान चलाता है दुसरा 7000 की नोकरी करता है ……. भतीजी तुमाई शिक्षा मित्र लगी है गुजरात में ? अबे हमसे सीखे होते तो आज शिक्षा मंत्री होती सेण्टर में ……..

क्या है तुमाए पास ?

मोदी ने कहा ……. भोसड़ी के ……. मेरे पास इनकम टैक्स deptt है …….. CBI है , Enforcement directorate है , CBDT है , DRI है …….. और साथ में CRPF भी है ……… तिहाड़ जेल है …….

मुलायम बोले , मोदी भाई मैं तो मजाक कर रिया था …….. ये सीबीआई और IT वालों का नाम ले के काहे डराते हो …….. मेरे भाई तुम जहां कहोगे मेरा भाई सिपाल साइन कर देगा ……… बना लो यार तुम्ही बनाओ सरकार इस बार ऊपी में …….

उधर अकलेस कहता है …….. मैं मोदी को अपने हाथ पे नहीं लिखने दूंगा की मेरा बाप और चाचा चोर है …… मैं इन दोनों को GPL मार के पालटी से निकाल दूंगा या खुद निकल जाउंगा ……… सच ये है की अकलेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है ……. धन संपदा वो प्रतीक जादो को दे चुके हैं …….. ले दे के राजनैतिक विरासत है जिसपे सिपाल कब्जा जमाये बैठे हैं ……. कल शाम अखिलेश ने 403 सीटों पे अपने प्रत्याशी घोषित कर अंतिम सन्देश दे दिया है …….. सिपाल जादो की लिस्ट में 181 सीट अतीक और मुख्तार अंसारी जैसे चोर बदमाश डाकू माफिया को दी गयी है ……… अखिलेश की ये बगावत बता रही है कि उन्होंने सब कुछ zero से शुरू करने का मन बना लिया है ……. पार्टी टूटती है टूट जाए ……ख़तम होती है हो जाए ……. नए सिरे से शुरू करेंगे …… इंदिरा गाँधी ने भी तो ऐसा ही किया था कभी … इन्डिकेट ले के अलग हो गयी , सिंडिकेट ख़तम हो गया ……. भोटर सब इंदिरा के पास आ गया …….. पार्टी उसकी जिसके साथ भोटर …….

ये चुनाव तो सपा के लिए ख़तम है ……… अब देखते हैं  17 के बाद किसके पास क्या बचता है ………

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

आज से कुछ साल पहले मेरी पैर में fracture हो गया ।
पंजे में ।
पहले तो मैंने उसे मामूली मोच समझ ignore किया । खिलाड़ियों को ऐसी मोच आना आम बात है । जब एक डेढ़ महीने तक भी दर्द न गया तो XRay कराया । Dr ने बताया जनाब कायदे से टूटी हुई है हड्डी …… प्लास्टर लगा डेढ़ महीने …… मने 3 महीने मैं लंगडा के चला । मित्रों ने लंगडा लंगडा कह के बुलाना शुरू कर दिया । फिर वो लंगडा तैमुर लंगडा हो गया ।
धीरे धीरे मेरा नाम ही रख दिया गया तैमूर लंगडा ।
ये वो दिन थे जब हम computer illiterate हुआ करते थे ।
मुझे आज भी वो दिन याद है जब हमने जालंधर में काम करना शुरू किया तो एक सहयोगी ने कहा अपना email देना …… हम दोनों मियाँ बीवी भेड़िया बाँय …… तय हुआ कि अब तो email account बनवाना पडेगा । मुझे आज भी याद है , model town के उस cyber cafe में एक लौंडे ने 30 रु लिए थे email Id बनाने के । और फिर जब मेरी छोटी बहन ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित करना शुरू किया तो उसी ने मेरा blog account और Fb account बनाया । ये वो दिन थे जब मैं ब्लॉग लिख तो लेता था पर उसे copy paste करना नहीं आता था fb पे । वो भी बड़ा मशहूर चुटकुला ही बन गया जब मैंने अपने एक कम्पूटर ज्ञाता मित्र से कहा कि भाई मैं महीना दो महीना तेरे पास लगा ले रिया हूँ ….. तू मेरे कू ये copy paste करना तो सिखा ही दे । तो उसी दौर में मेरे उसी मित्र ने मेरा एक Gmail ac बनाया …….. taimur.lang27@gmail.com
ये कम्बखत आज भी मेरा google ac है ।
ये तो जब ये करीना कपूर के बच्चे के नाम पे चिहाड़ मची तो मुझे मामले की गंभीरता का अहसास हुआ । मुद्दे की बात ये कि इस से पहले आज तक न मुझे खुद कभी अहसास हुआ और न मैंने कभी खुद सोचा कि मेरे नाम के साथ …… चाहे मज़ाक में ही सही ……. इतने भयानक कातिल का नाम क्यों जुड़ा है ?
सच बताऊँ ?
हालांकि मैं खुद को पढ़ा लिखा जागरूक जाग्रत व्यक्ति मानता हूँ पर सच ये है कि मुझे तैमूर लंग और ऐसे ही हज़ारों कातिलों के बारे में कोई जानकारी है ही नहीं …….
दोष किसका है ?
हमारे education system ने secularism के चक्कर में इन इस्लामिक कातिलों की करतूत कभी हमारे सामने आने ही नहीं दी गयी । history को dilute कर दिया गया । अकबर महान हो गए । औरग्ज़ेब सूफी संत ……. गजनी गोरी महान योद्धा …… और बाकी सब सेक्युलर इतिहासकारों की बाजीगरी जादूगरी में गायब कर दिए गए ।

Dr राजीव भाई ( लन्दन ) ने सवाल उठाया …….. हॉलीवुड में Holocaust पे और 2nd WW पे इतनी फिल्में क्यों बनती हैं ……. इसलिए बनती हैं कि आत्मा को झकझोरते रहे । Jews Hitler को कभी मरने नहीं देंगे । कुछ ज़ख्म ऐसे होने चाहिए कि कभी न भरें …….. हिन्दुओं ने वो तमाम क़त्लेआम वो तमाम अत्याचार भुला दिए जो उनपे हुए 1400 साल तक …….. हिन्दू भूल गए …….
भूल गए तैमूर , चंगेज़ खां , गजनी , गोरी और बाबर हुमायूं अकबर औरंगजेब को ……. भूल गए चित्तौड़ के जौहर को …….

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।