UP चुनाव

इस्माइल मेरठी (Ismail Meeruti) साहब का एक शेर है ……..

अर्ज किया है ……..

उल्फत का जब मजा है कि वो भी हों बेकरार,
दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई।

और इसी शेर की तर्ज पे ……..

गठबंधन का तब मज़ा है कि दोनों ही हों बेजार ……..
औ दोनों तरफ हो गाँड …………… बराबर फटी हुई

UP में सपा और congress का गठबंधन होगा ज़रूर ।
क्योंकि दोनों मने अखिलेश औ राहुल ……. मने सपा औ कांग्रेस …….
भाजपा औ मोदी के मारे , दोनों की है गाँड बराबर फटी हुई ।

राहुल बाबा जानते हैं कि अगर गठबंधन न हुआ तो कांग्रेस की 5 सीट नहीं आएगी इस बार UP में ।
और कितना ही विकास का तंबू तान लें , सपा के लिए बिना गठबंधन 50 का आंकड़ा छूना मुश्किल है ।

Congress की जमीनी स्थिति ये है की कांग्रेसी वोटर जैसी कोई चीज़ UP में अब नहीं बची है । कुछ एक सीटों पे कुछ ऐसे लोग है जिनका अपना व्यक्तिगत भोट है …….. वो एक तरह से निर्दल लोग हैं …….. congress छोड़ अगर निर्दल भी लड़ जाएँ तो जीत जाएंगे । ऐसे 5 – 7 लोग कांग्रेस के टिकट पे लड़ के जीत जाते है इसलिए congress का खाता खुल जाता है UP में । ऐसी सीटों पे कुछ भोट उस प्रत्याशी की जात का और कुछ मुस्लिम भोट मिल के वो सीट जीती जाती है ।

मोदी जी ने पिछले 5 साल में सपा से उसका गैर यादव OBC वोट छीन लिया है ।
इसी तरह मायावती के दलित भोट बैंक में से मोदी जी ने गैर चमार – जाटव भोट में बड़ी सेंध लगायी है ।

सपा congress गठबंधन का सबसे बड़ा नुकसान BSP को होगा जहां उसका मुस्लिम भोट खिसक के सपा- cong के साथ आ जाएगा ।
मुस्लिम भोट बेशक एकमुश्त सपा को पड़ेगा जिसकी प्रतिक्रिया में हिन्दू भोट का counter polarization होगा ।

हालफिलहाल स्थिति ये है कि सपा – congress गठबंधन पूरी जोड़ जुगत के बाद भी 26 – 27 % तक पहुँच पायेगा जबकि इस चुनाव में भाजपा शुरुआत ही 34 % भोट के साथ करेगी जो campaign के साथ बढ़ेगा ।

यदि भाजपा ने 30% भोट लिया तो 220 सीट
32 % लिया तो 240 – 250
34% पे 260 से 280
36 % पे 300 +

आज की तारीख में सबसे खराब स्थिति BSP की है ।
यही हालत रही तो हाथी फिर अंडा दे सकता है ।
सिर्फ चमार – जाटव के बल पे तो 10 सीट आनी मुश्किल है ।

फिलहाल इंतज़ार कीजिये ……. टिकट वितरण और नाम वापसी होने दीजिए ।
तभी picture clear होगी ।

ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

बहुत पहिले मने 80 के दशक में जब कि राजीव गांधी PM थे अ उनके पास प्रचंड बहुमत था , तो वो अपने अनाड़ीपने अ चुतियापे में बोफोर्स तोप में घिर गए ।
उस समय ई राम जेठमलानी ने उनको बहुत हैरान किया ।
ई जेठमलनिया रोज़ाना राजीव गांधी औ कांग्रेस से 10 सवाल पूछता था जिसका कांग्रेस के पास कोई जवाब न होता । अ यूँ समझ लीजिए कि पूरी कांग्रेस जिसके 410 सांसद थे अ विपक्ष एकदम्मे गायब था , थर्राती थी इस राम जेठमलानी से …….
उन्ही दिनों की बात है , किसी बात पे बाबू चनसेखर सिंह बलिया के बागी से इस राम जेठमलानी की ठन गयी । राम जेठमलनिया उनहूँ से दस सवाल पूछ लिया ।
चनसेखर जी बोले , साला कुक्कुर लोग भोंकता रहता है ……. हम किस किस कुक्कुर का जवाब देंगे ।
जेठ मलानी नहीं माना ……..
चनसेखर जी ने अपने 10 – 5 लौंडों को बोला ……… tommy ……. शू बेटा …… पकड़ साले को ……..
और लौंडों ने राम जेठ मलानी को इसी दिल्ली में पकड़ के , सरेआम , दूरदर्शन के कैमरा के सामने मारा 5- 7 लप्पड़ …….. ज्यादा मारने लायक ऊ था नहीं …….. मने तब भी इतना ही बूढा था जितना आज है ……. मने इसकी expiry date तो कबकी निकल चुकी ।
सो लौंडों ने ज़्यादा मारा नहीं , मने सिर्फ 5 – 7 लप्पड़ मारा , पर कपड़ा ओपड़ा सब फाड़ दिए थे , मने एकदम चिन्दी चिन्दी कर दिए थे ।
इस high profile पिटाई को दूरदर्शन ने अगले दिन बहुत कायदे से कभर किया ।
आशा की जाती थी कि सुप्रीम कोर्ट का इतना बड़ा और नामी वकील , इस सरेआम दिन दहाड़े की गयी पिटाई पे बहुत हाय तौबा मचाएगा पर बुढ़वा चूं तक नहीं किया ……. उसके बाद राम जेठमलानी ऐसा पटाये कि कई साल दिल्ली में दिखाई नहीं दिया ।

मुझको अपने इन भाजपा और RSS नेताओं से बस यही शिकायत है कि ई साले सब जरुरत से जायदे मने गंडुत्व की हद तक शालीन हैं । मने होना तो ऐसा चाहिए कि किसी पत्रकार की हिम्मत ही न पड़े कोई ऐसा वैसा हल्का फुल्का सवाल पूछने की ……. मने ऐसे loaded questions जिनका आप कोई भी जवाब दें विविद होना ही होना …….. ऐसे सवाल पूछने वाले पत्रकार की शाम तक कंबल परेड करा देनी चाहिए ।
मुझे ऐसा ही एक किस्सा मोदी जी का याद आता है ……. जब CM थे गुजरात में ।
किसी function में से बाहर निकलते एक पत्रकार ने उनसे ऐसा ही एक loaded question पूछ लिया …….. मोदी ने कुछ नहीं कहा ……. सिर्फ उसको ताकते रहे …….. यही कोई 10 second ……. फिर बोले क्यों बेटा ? मिल गया जवाब ?
जिस स्कूल में तुम अडमीसन लिए हो न , हम उसके भीसी रिटायर हुआ हूँ ……..
देश के बड़े से बड़े पत्रकार मने वो जो फूल के अंडुआ हुए हैं न , उनकी भी हिम्मत नहीं होती कि मोदी और अमित शाह से कोई हल्का फुल्का सवाल पूछ ले …….. मने ऐसा आँख गिरोर के ताकते हैं कि पूछने वाले की फट के हाथ में आ जाए ।

कल मनमोहन वैद्य से loaded प्रश्न पूछा गया और वैद्य जी ने संघी शालीनता से उसका जवाब दिया जबकि उनको चाहिए था कि सामने आ रहे चुनावों के मद्देनजर उसे खांटी भोजपुरी में बनरसिया जवाब देते …….

ये ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

कहावत है कि बिल्ली को सपने में भी छीछड़े ही दिखते हैं ।
बिल्ली बड़ा नहीं सोच सकती ।
कल एक मित्र कह रहे थे कि भाजपा ने हमारी बिरादरी को आज तक दिया ही क्या है जो ये वहाँ जूते खाने चले जाते हैं ।
जब से भाजपा की लिस्ट आयी है , कुछ लोग चुटकी ले रहे हैं कि भाजपा ने दद्दा को टिकट नहीं दी । दद्दा ने पार्टी की इतनी सेवा की पर अहसान फरामोश भाजपा ने टिकट नहीं दी ।
छीछड़ों के सपने ऐसे ही देखे जाते हैं ।

लोगों को , समूहों को , वर्गों को , जातियों को अपने वोट की कीमत चाहिए ।
हमारी जात ने पार्टी को भोट दिया तो बदले में पार्टी की सरकार ने हमारी जाति को क्या दिया ?
कोई सरकार किसी जाति को अधिक से अधिक क्या दे सकती है ?
अधिक से अधिक आरक्षण ?

मुझे इस पार्टी कार्यकर्ता नामक शब्द से बहुत चिढ है ।
ये कार्यकर्ता आखिर होता क्या है ? क्या करता है ?
जब कोई नेता परेता आता है तो कार्यकर्ता उसी नेता से प्राप्त पैसों से एक दो गाड़ी ठलुए गाँव से भर के रैली में पहुंचा देता है , नेता ने जो पैसा दिया था उसमें से आधा बचा लेता है । सरकार अपनी हो तो थाने और तहसील की दलाली करता है । सड़क पे दो कुत्ते लड़ पड़े हो तो किसी एक के पक्ष में थाने में जा के पैरवी करता है , अनर्गल दबाव डालता है , पुलिस को काम नहीं करने देता , न्याय नहीं करने देता , पुलिस न सुने तो नेता जी से चुगली करो , कान भरो …….. थानेदार ने मेरा पालतू कुत्ता बनने से मना कर दिया ……. गौरतलब है कि ऐसे कार्यकर्ताओं की सेवा निःशुल्क नहीं होती बल्कि वो इसी थाने तहसील की दलाली से ही जीते खाते हैं । इसे कहते हैं जनता के टुकड़ों पे पलना , उसे नोच के खाना ।
थोड़ा बड़ा कार्यकर्ता , जो नेता जी को manpower और money power के साथ muscle power भी उपलब्ध कराता है , वो सरकार आने पे ठेकेदारी करता है । सरकार द्वारा किये गए सभी निर्माण और विकास कार्यों में उसे ठेकेदारी में हिस्सा चाहिए । वो पार्टी को दी गयी अपनी ” सेवा ” की पूरी कीमत वसूलना चाहता है ।
एक आम वोटर अपने वोट की कीमत 100 – 50 रु या एक पव्वा दारू मुर्गा नहीं तो एक सूती साड़ी लगाता है ।
बिकाऊ एक अकेला वोटर भी है , पूरी जाति बिकने को तैयार बैठी है । सवाल है , बदले में क्या देगी पार्टी और उसकी सरकार ?
बिल्ली की समस्या ये कि वो सबको बिल्ली ही समझती है ।
मैं उदयन चलाता हूँ । गाँव में जब उदयन शुरू हुआ तो पहले तो लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है ?
आखिर मुसहरों को घी क्यों पिलाया जा रहा है ?
पहला निष्कर्ष जो लोगों ने निकाला वो ये कि अजीत सिंह परधानी का चुनाव लड़ेंगे । गाँव की गुणा गणित में ये मान लिया गया कि एक प्रत्याशी हमारे परिवार का अवश्य होगा ।
परधानी का चुनाव आया और निकल गया । साल भर कंबल , रजाई , तोसक तकिया , कपड़ा जूता बांटा था , सो लोग समझते थे कि अजीत सिंह मुसहरों का 200 वोट तो एक मुश्त दिलवा ही देंगे ।
इधर अजीत सिंह परधानी के चुनाव से 20 दिन पहिले गाँव छोड़ जालंधर चले गए और जब बिजय जलूस निकल गया और खस्सी कट के बँट गया तब लौटे ।
हमने किसी से नहीं कहा कि फलनवा को भोट देना ।
लोग अब फिर कयास लगा रहे हैं कि अजीत सिंह आखिर क्यों , किस लालच में मुसहरों को घी पिया रहे हैं । उदयन के पीछे सचमुच इस समुदाय के कल्याण की भावना छिपी है यहाँ तक लोग सोच ही नहीं पाते ।
अजीत सिंह दिन रात एक किये हैं सोशल मीडिया पे , मोदी और भाजपा के पक्ष में ……..
किस लालच में ? क्या कीमत वसूलेंगे ? कोई कीमत तो सोची ही होगी ?
निस्वार्थ निर्विकार भाव से भी कोई काम किया जा सकता है , ये लोग सोच ही नहीं पाते ।
खस्सी कटा है तो ज़्यादा नहीं तो छीछड़े तो हमारे हिस्से आने ही चाहिए ???????

अबे छोडो यार छीछड़ों को ……… पूरे बकरे की सोचो ।
हर व्यक्ति अपनी सेवा की कीमत चाहता है ।
वो कर्त्तव्य समझ के कोई काम नहीं करना चाहता ।
व्यक्ति को समाज से , सरकार से और राष्ट्र से अपना हिस्सा चाहिए ।
My pound of flesh ……. Flesh न मिले तो छीछड़े ही सही ।

जैसी हमारी नीयत , मने इस राष्ट्र की collective नीयत , वैसी ही हमारी सरकारों की ।
आखिर सरकार भी तो हमारे ही चरित्र का reflection है ……….
सरकार जानती है कि ये समाज छीछड़े ही चाहता है । इसलिए उसने आज तक हमें छछड़ों पे ही पाला । नारों का slogans का lollypop चुसाती रही ।
एक ईमानदार सरकार अगर आ गयी और उसने कहा कि हम विदेशों में जमा काला धन ले के आएंगे , तो समाज ने तुरंत इसे लपक लिया …….. मेरे हिस्से के छीछड़े ? मेरे 15 लाख मेरे खाते में कब आएंगे ?
छीछड़े बाज आदमी अपने खाते में चाहता है ।
जिसकी निगाह पूरे बकरे पे है वो कहेगा , ठीक है , लाओ कालाधन और उसे राष्ट्र के समग्र विकास में लगाओ …….. मुझे मेरे हिस्से का विकास चाहिए …….
छीछड़े नहीं ।

इसलिए मित्रों , MLA का टिकट मेरे लिए तो छीछड़े से ज़्यादा कुछ नहीं ।
UP का चुनाव सिर पे है । निजी फायदे , निजी स्वार्थ छोड़ समाज के समग्र विकास के लिए भोट कीजिये ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

बाबरी ढांचा भाजपा ने गिराया ।
ऊपी में तब सरकार भाजपा की थी ।
CM कल्याण सिंह थे पर UP के मुसलमानों ने कांग्रेस को ऐसा लतिआया , ऐसा लतिआया कि आज तक उठ नहीं पायी ।

1984 में कांग्रेस ने स्वर्ण मंदिर में घुस के पहले सिखों का कत्ले आम किया और फिर दिल्ली में इंदिरा की हत्या के बाद कांग्रेसी हत्यारों ने कांग्रेस की केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कत्ले आम में 6000 सिखों को ज़िंदा जला डाला ………

इसके बावजूद ये सोच के आश्चर्य होता है कि पंजाब के सिख आज भी कांग्रेस के लिए भोट करते हैं ????????
जिस परिवार ने स्वर्ण मंदिर की बेइज़्ज़ती की और जिस परिवार ने दिल्ली में 6000 सिखों के गले में जलते हुए टायर डाल के ज़िंदा जलाया , उसी नेहरू गांधी परिवार का पिछवाड़ा चाट रहे हैं सरदार अमरेंद्र सिंह और सरदार नवजोत सिद्धू ……..
लानत है ऐसे सिख पे जो कहता है कि कांग्रेस मेरी माँ है ……. कांग्रेस मेरा असली घर है ???????
सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?

अरे ओ साम्भा …….
अखिलेसवा तो बोलता था कि लखनऊ वाले शान से चलेंगे अब सम्मान से …….
अ टीभी पे विज्ञापन देखा देखा के कान पका दिया ……..
अ अभी पुष्कर दद्दा बता रहे थे कि अभी तो लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे में बहुत जायदे काम बाकी है । अभी कम से कम दुइ साल लगेगा expressway को पूरा होने में ……..
करे साम्भा ?
भइंस आज धनाई है ……. अभी गाभिन हुई कि नहीं हुई ई महिन्ना भर बाद पता चलेगा ……. अ ई सार जादो जी इन्नर खाये के न्योता पूरे गाँव को अबहियें बाँट दिए बे ……..

अबे ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?
अभी लखनऊ आगरा एस्प्रेस वे का चौथा महिन्ना चल रहा है ।
अभी तो पेटवो नहीं फूला है ।
अ ई ससुरा दाई बुलवा के पानी गर्म करवा रहा है ।

मैंने जीवन में पहली बार देखा है कि आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है ।
अपनी पीठ खुद थपथपाई जा रही है ।
जादो जी कब तक चूतिया बना के भोट लोगे ?
Public को और कितना चूतिया बनाओगे दोनों बाप बेटा ?

BiMaRU tag वाले 4 राज्य हुआ करते थे देश में । UP बिहार MP और राजस्थान ।
इन चार में से दो तुमसे मीलों आगे निकल चुके हैं । बिहार पिछले 8 – 10 साल में तुम्हारे बराबर आन खड़ा हुआ है ।
एक ज़माना था कि MP एक बेहद backward state था । वहां की दशा देख रोना आता था ।
आज शिवराज का MP देख के जी खुश हो जाता है ।
MP के state highway 4 lane हैं …… दूर दराज के गाँवों में 24 × 7 बिजली आती है ।
उद्योग धंदे लग रहे हैं । क़ानून बेवस्था दुरुस्त है । लोगों का जीवन स्तर सुधर रहा है । रोज़गार के लिए लोगों का पलायन रुक गया है ।
इसके विपरीत UP की बेहाली का बयान नहीं किया जा सकता ।

ये एक स्थापित सत्य है कि जहां भी , जिन राज्यों में भाजपा की सरकार रही है वहाँ विकास हुआ है और लोगों का जीवन स्तर सुधरा है ।

UP का कल्याण सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही कर सकती है ।
ये बात UP वालों को समझ लेनी चाहिए ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

पूर्वांचल में बनारस का पडोसी जिला है चंदौली ।
इसे पूरब का Rice bowl कहते हैं । इस से सटे 4 – 5 जिले जैसे कि वाराणसी , गाज़ीपुर , जौनपुर , आज़मगढ़ , मिर्ज़ापुर , भदोही और उधर बिहार के कुछ जिले , इनमे दुनिया का सबसे बेहतरीन धान उगाया जाता है ।
आम तौर पे शहरी लोग चावल की सिर्फ एक variety जानते हैं । बासमती ……. जो अपने स्वाद और लंबे दाने के लिए पसंद किया जाता है और 70 से 150 रु किलो तक में बिकता है । इसके महंगे बिकने का एक कारण तो ये होता है कि इसकी उपज अन्य vatieties से कम होती है ।
पर पूर्वांचल के इन जिलों में कुछ स्थानीय varieties होती हैं , जिनकी उपज भी भरपूर है , मने bumper crop होती है , और स्वाद गुण में बासमती के बाप हैं । स्थानीय बाजार में इन किस्मों की कीमत 20 से 25 रु किलो तक होती है । इनमे ख़ास कर सोनम , मंसूरी ( इसकी 3 varieties हैं , नाटी , मंझली और साम्भा मंसूरी ) , धनरेखा इत्यादि । इसके अलावा एक किस्म है जीरा 32 …….. इसका दाना बहुत छोटा और महीन होता है , एकदम जीरे जैसा । ये है असल में बासमती का बाप । स्थानीय बाजार में 45 रु किलो बिकता है । ऐसी 20 अन्य varieties और हैं जो यहाँ होती हैं ……… और bumper होती हैं ।
ऐसा ही एक rice bowl राजस्थान में भी है । हाड़ौती संभाग में कोटा , बूंदी जिले में । वहाँ भी दुनिया का बेहतरीन बासमती होता है । बताया जाता है कि कोटा बूंदी जिले में 100 से ज़्यादा अत्याधुनिक विशाल Rice Mills और shellers हैं जो इस धान को process कर market में उतरते हैं । आज कोटा बूंदी का बासमती पूरी दुनिया में अपनी धाक मचा रहा है । समूचे Europe , अमेरिका और Middle east में इसकी जबरदस्त मांग है ।

पर स्वाद और उपज के मामले में चंदौली belt का धान कोटा बूंदी से 21 नहीं बल्कि 25 है ।
मने चंदौली की मिट्टी पानी और जलवायु में उपजा धान कोटा बूंदी से लाख दर्जे बेहतर है ………

अब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से एक सवाल ……… अखिलेश जी , चंदौली और इसके आस पास के जिलों में कितनी rice mills हैं ?
आपके 5 साल के शासन काल में चंदौली के इर्द गिर्द कितनी नयी rice mills लगी ?
आपकी सरकार ने चंदौली belt की इन बेहतरीन और इतनी सस्ती मने 20 – 22 रु किलो बिकने वाली varieties को देश भर में promote कर लोकप्रिय बनाने के लिए क्या काम किया ?

वाराणसी मंडल और इसके लगते जिले , हम यहां दुनिया का सबसे स्वादिष्ट दूध पैदा करते हैं …….. जी हां …….. बनारस की मिठाई का स्वाद यहां के दूध और मावे की मिठास और स्वाद से है …….. गाँव के dairy farmer की समस्या है कि उसका सुबह का दूध तो बिक जाता है पर शाम का नहीं बिकता …….. ऊपर से दूध उत्पादन तो अहीरों का मुख्य पेशा है ?
अखिलेश जी , आप बताएँगे कि आपकी सरकार ने पिछले 5 साल में कितने milk processing प्लांट लगाए पूर्वांचल में ? कितने milk collection centers खोले ? कितने chilling plants लगाए ?

अखिलेश जी , UP के यादव तो आपके बंधुआ भोटर हैं न ? Dairy farming बढ़ेगी तो सीधे सीधे उन्हें फायदा होगा ……. आपने पिछले 5 साल में dairy उद्योग के लिए क्या किया ?
बीकानेर जैसा सूखा पानी को तरसता जिला पूरे देश में दूध supply कर सकता है तो पूर्वांचल तो स्वर्ग है हुज़ूर dairy farming के लिए ……. कितनी ग्रोथ हुई पिछले 5 साल में milk production में ?
कितने नए Dairy farms खुले ? कितने farmers ने अपने farms upgrade किये ? आपने कितना ऋण उपलब्ध कराया डेरी फार्मिंग के लिए ?
पूर्वांचल में कितनी sugar mills नयी लगीं ?
जो बंद पड़ी थीं उनमे से कितनी चालू हुई ?
कितने नए cold स्टोर बनाये आपने ?
कितनी नहरें खुदी ?
कौन सी नयी सिचाई परियोजना ले के आये आप ?
कितने नए thermal power projects आपने लगाए प्रदेश में , या मंजूरी दी ……..
नितिन गडकरी के NH छोड़ पूरे पूर्वांचल की कोई एक सड़क बता दीजिए , जो आपने बनवाना या चौड़ा करना तो दूर , जिसका आपने patch work ही करा दिया हो ?
कोई एक सड़क ? कोई एक state हाईवे ?

कोई एक नया उद्योग जो लगा हो पूर्वांचल के इन 40 जिलों में ???????
मिर्ज़ापुर भदोही में दुनिया का सबसे बेहतरीन कालीन बनता है घर घर ……… जिसका सत्यानाश कर मारा कैलाश सत्यार्थी ने ……… उसके revival के लिए क्या किया आपने ?
वाराणसी और मऊ के साडी बुनकर ( जिनमे अधिकाँश मुसलमान है ) उनके लिए क्या किया ?

कोई एक स्कूल कॉलेज बताइये जो आपकी सरकार ने बनवाया हो पिछले 5 साल में ?

किसका विकास किये हो भैया ?
कहाँ किये हो ?

गायत्री प्रजापति रोज़ाना 4 करोड़ रु देता था तुमरी मने प्रतीक गुप्ता जादो की मम्मी को …….. सिर्फ साधना गुप्ता जादो और उनके लौंडे का विकास हुआ है पिछले 5 साल में ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

न अपना जन्म दिन मनाऊंगा न मनाने दूंगा ।

न खाऊंगा न खाने दूंगा ।
न अपना जन्म दिन मनाऊंगा न मनाने दूंगा ।
न अपने जन्म दिन पे रंडी नचाऊंगा और न भोसड़ी वाले नकटेढ़वा तोतले को नचाने दूंगा ।
अपने जन्म दिन पे दो हज़ार के नोट की माला pink माला न खुद पहनूंगा न भैंसवती को पहनने दूंगा ।
अपने तो लाखों लोगों की रैली करूंगा पर इन भोसडीवालों को सिर्फ PC बोले तो press conference से काम चलाने पे मजबूर कर दूंगा ।

नोट बंदी का असर साफ़ दिख रहा है ।
चुनाव में सिर्फ एक महीना बचा है ।
पिछले 30 दिन में UP में कितनी rally हुई हैं ?
सपा की आखिरी rally कब हुई थी ?
बसपा की ?
Congress की बहराइच रैली को कितने दिन हुए ।
आज BMW का हैप्पी बड्डे है । कल्पना कीजिये कि नोटबंदी न हुई होती तो आज मायावती ने कितनी बड़ी रैली की होती UP में और कितना नगद चन्दा , कैसी कैसी माला पहनी होती और कैसे कैसे हीरे जड़े मुकुट पहने होते …….. आज भैंस वती कह रही थी कि मैं अपना जन्म दिन सादगी से मना रही हूँ । अबे यूँ कह न कि मोदिया साला भिखारी बना दिया । चड्ढी छोड़ सब ले गया ।
इतना बड़ा चुनाव ……. UP का …… मिनी General election ……..
और ऐसा सन्नाटा ?

ये नोटबंदी का असर नहीं तो क्या है ?

ये हाल के वर्षों में जब से ये धनबल बाहुबल की राजनीति शुरू हुई है , ये सबसे सस्ता चुनाव होने जा रहा है ।

भारत बदल रहा है ।

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

समाजवादी पाल्टी अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रही है ।
करो या मरो …….. चुनाव सिर पे है ।
खबर है कि 1500 करोड़ से ऊपर की चुनाव सामग्री छप के तैयार है । इसमें पार्टी के झंडे banor पोस्टर Tshirt बनियान बिल्ले स्टिकर्स flex boards और hoardings और न जाने क्या क्या है ।
UP जैसे विशाल प्रदेश में , जहां 20 करोड़ की जनसंख्या और 11 करोड़ से ज़्यादा भोटर है ……. जहां 400 से ज़्यादा सीट पे प्रत्याशी उतारे जाने हैं ……. वहाँ पार्टी के दो फाड़ होने का ख़तरा है ।
ऊपर से नेताओं को यही नहीं पता कि उन्हें किस चुनाव चिन्ह पे चुनाव लड़ना है । समस्या ये है की भारी मात्रा में जो चुनाव प्रचार सामग्री छप के तैयार है वो सब साइकिल चुनाव चिन्ह से छपी है । अब इस साइकिल पे ही ख़तरा मंडरा रहा है ।
कल को अगर चुनाव आयोग ने ये साइकिल ही फ्रीज़ कर दी तो दोनों गुटों अर्थात अखिलेश और मुलायम सिपाल दोनों को नए सिंबल पे चुनाव लड़ना पडेगा । नयी प्रचार सामग्री कोई रातों रात तो छप नहीं जायेगी ।
जैसे पति पत्नी बच्चों की वजह से तलाक़ नहीं ले पाते और मजबूरन साथ रहते हैं उसी तरह साइकिल के मोह में मुलायम अकलेस अलग नहीं हो पा रहे । इसके अलावा इक्लेस जादो ने समाजवादी पाल्टी के दोनों बैंक खाते भी seize करा दिए …… मने कंगाली में आटा गीला ।

पकिस्तान भारत के बीच शान्ति रहे इसमें एक बड़ी समस्या ये आती है कि पाकिस्तान में पाक सरकार के अलावा कई Non State actors हैं । Army है , ISI है , उसके बाद विभिन्न जिहादी गुट हैं । आखिर भारत सरकार पाकिस्तान में शान्ति वार्ता करे तो किस से ?
यही हाल समाजवादी पाल्टी का है । अखिलेश मुलायम का बस चले तो दो मिनट में झगड़ा सुलटा लें ।
पर उधर रामगोपाल और इधर सिपाल जादो और अमर सींग …… ये तीन शान्ति और समझौता वार्ता में रोड़ा बने बैठे हैं । इक्लेस जादो और मुलायम जादो को अगर शान्ति स्थापना करनी है तो इन दोनों को रामगोपाल , सिपाल और अमर सींग इन तीनो को GPL मार के पार्टी से 60 साल के लिए निष्कासित कर देना चाहिए । इसके अलावा पार्टी में जितने भाई भतीजे भांजे बहू बेटियां बहन भेनजी भांजी भतीजी बुआ मौसी नानी समधी साले सालियाँ साढ़ू सरहज हैं उन सबकी G पे भी लात मार के party से बाहर कर देना चाहिए । इसके अलावा परतीक गुप्ता जादो और उसकी बीबी अपरना गुप्ता जादो को भी घर और पाल्टी दोनों से G पे लात मार के भगा देना चाहिए । भैंचो पोलिटिकल पाल्टी है कि तबेला ???????

पर काश …… GPL मार के भगा देना इतना ही आसान रहा होता ………. अमर सिंघवा एक नंबर का दलाल नहीं दल्ला है । न जाने किस किस के संग किस किस की रिकॉडिंग रखा होगा …….. और न जाने किस किस मुद्रा में रखा होगा ……. कम्बकब्त सोसल मीडिया का ज़माना है । एक घंटे में 45 लाख शेयर और views हो जाते हैं वीडियो clip के ।
अमर सिंह से पार पाना मुलायम इक्लेस जादो के बस का नहीं ।

समाजवादी पाल्टी का किस्सा खत्म समझ लो ।
बिना सिंबल , बिना प्रचार सामग्री , बिना funds , बिना नेता , हर सीट पे बागी उम्मीदवार , free for all gang bang ……. कब कौन किसकी कहाँ कैसे मार ले क्या पता ?ऊपर से भाजपा और मोदी जैसा सशक्त प्रतिद्वंद्वी ।

समाजवादी पाल्टी तो डूबी ही डूबी ।

BSF जवान के भूखे मरने वाले वीडियो का सच क्या है ?

सोशल मीडिया पे इन दिनों BSF के एक जवान का वीडियो viral हुआ जाता है ।
बेचारा जवान भूखा मर रिया है ।
वो बेचारा सारा दिन बर्फ में खड़ा duty देता है और पीछे से उसका घी Commandant साहब खा जाते हैं ।
मैंने कल वो वीडियो देखा तो मेरा तो खून खौल उठा ।
देस की तो आज़ादी खतरे में है भाई ।
गाली महोत्सव तो बनता है । पर इसके लिए गाली पर्रीकर को नहीं राजनाथ सिंह को दो ।
BSF एवं अन्य para military forces MHA बोले तो ministry of Home affairs के अंतर्गत आते हैं ।

अब मेरी चूँकि भारत सरकार में एकदम ऊपर तक बात है सो मैंने तुरंत फून लगाया ……. बात कराओ साले से …….. क्यूँ बे मलेच्छ …… BSF का राशन खा गया बे साले चोर ? भुक्खड़ ?

By god की कसम ……. खाजनाथ वहीं धोती में मूत दिए ……. बोले गुस्सा थूक दीजिये मालिक …….. राशन supply फ़ौज में होती है मालिक । वहाँ ये सब चोरी चकारी चलती है ।
बाकी para military forces में हम लोग Ration Money देते हैं हुज़ूर …….. वो ration money सिपाही की पगार के साथ उसको दे दी जाती है ।
अब उस पैसे को वो कैसे खर्च करते हैं ये उनकी regiment या battalion जाने ।
उनका commandant जाने ।
हमने तुरंत commandant को फून लगाया …….. क्यों बे साले चोरकट ……. चिन्दी चोर …… साले तनख्वाह में पेट नहीं भरता बे ? साले जवानों का राशन खा जाता है ?
अब जब उसको पता चला कि सोसल मीडिया मने फेसबुक के इतने बड्डे मठाधीस का फून आया है …… माँ कसम थर थर कांपने लगा commandant …….. बोला सर गलती हो गयी जी ……. पर मेरी बात तो सुन ल्यो हुजूर ………
Sir जी , system नयूं है जी कि BSF या किसी भी para military force में Ration की supply नहीं होती । मैं यानि कि commandant महीने में एक बार पूरी battalion की एक open meeting लेता हूँ जिसे दरबार कहा जाता है । उस दरबार में एक mess committee बनायी जाती है ।
इसमें एक Inspector , एक sub inspector , एक HC बोले तो head कांस्टेबल और 6 सिपाही रहते हैं । हर महीने नयी कमेटी बनती है । कमेटी का चयन मैं नहीं बल्कि battalion के जवान खुद मनोनीत करते हैं ।
फिर वो कमेटी जिसमे इंस्पेक्टर से ले के कांस्टेबल तक सब होते है बाज़ार से खुद जा के local purchase करते हैं Ration की ……. आटा , चावल, दालें ,तेल ,मसाला , दूध , घी , मक्खन, bread ,अंडे ,पनीर , Meat सब कुछ local market से खरीदा जाता है । LPG भी ……. batallion में cook होते हैं । ज़रूरत पड़ने पे local helper भी वेतन पे रख लिया जाता है ।
क्या खाना है कैसे खाना है देसी घी में दाल छौंकनी है या काजू बादाम खाने हैं इसका निर्णय सब वही कमेटी लेती है …….. सबकी मने खाने वालों की सलाह या demand के अनुसार ।
Commandant बीच बीच में देखता ताकता रहता है । कोशिश यही रहती है कि हर जवान का mess bill कम से कम इतना ज़रूर आये जितनी उसकी ration money है । मने बेशक उसकी जेब से 100 -200 लग जाए पर वो ration money में से पैसा बचाने न लगे ……..

आज सुबह मैंने कुछ मित्रों जानकारों से फोन पे बात की । ऐसे लोगों से जो BSF , CRPF या CISF में हैं । एक मित्र ने बताया कि उनकी battalion जम्मू के पास posted है ।
हमारा सारा राशन अखनूर रोड स्थित wallmart से आता है ।
सारा सामान A ग्रेड उच्च quality …….. खुद हमारे अपने cook बनाते हैं । हम लोग खुद हिसाब किताब रखते हैं । मेरी regiment में mess कमेटी हर महीने बदलती है ।
Commandant साहब खुद हमसे पूछते हैं कि किसको रखना चाहते हो कमेटी में ………
एक HC हमारा फेवरिट है । हमने जब उसी को continue करने की बात कही तो साहब नहीं माने क्योंकि हर महीने आदमी बदलने का rule है । अगले महीने जब फिर दरबार सजा तो जवानों ने फिर उसी HC की मांग की ……. साहब ने पूछा , आखिर इसकी इतनी demand क्यों है। जवानों ने बताया कि इसके management में सबसे बढ़िया खाना बनता है । हर के साहब ने उसे फिर मनोनीत कर दिया ।

अब जब ऐसी व्यवस्था है तो फिर ये जवान सोशल मीडिया में ऐसी बात क्यों कह रहा है ये जांच का विषय है ।
मैंने ये पोस्ट जो लिखी है वो विभिन्न forces के अलग अलग लोगों से बात करके लिखी है ।
यदि इसके तथ्य गलत हैं तो लोग स्वयं बताएँगे ।

सत्य सामने आना ही चाहिए ।

साइकिल गयी कबाड़े में हाथी चढ़ गया भाड़े में अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

बॉलीवुड की हिंदी फिल्म का हीरो सर्वगुण संपन्न होता है ।
भलामानस , अव्वल दर्जे का चरित्रवान …… मने फिल्म की हेरोइन और vamp उस से चिपटी रहती हैं , उसे खींच खींच के अपने बेडरूम में ले जाती है पर वो पट्ठा लंगोट का इतना पक्का …… हनुमान जी का ऐसा भगत कि vamp और हेरोइन दोनों को अपनी बहन मानता है ।
हीरो के दो चार यार दोस्त चेले चमाट होते हैं जो हमेशा उसके इर्द गिर्द मंडराते उसकी चम्पी किया करते हैं ।
हीरो एक नंबर का चूतिया , जब लाश से टकराता है तो सीने में घुसे चाकू को पकड़ लेता है ……. और ठीक उसी मौके पे या तो पुलिस आ जाती है या फिर कोई और …… फिर ये पुक्का फार के रोता है कि नहीईईईईईई …….. मैंने खून नहीं किया ……..
फिर जब ये जेल चला जाता है तो उसका वो वफादार दोस्त बार बार एक ही फ़िल्मी डायलॉग बोलता है ……… मेरा दिल कहता है , मेरा दोस्त खूनी नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है …….

मोदी haters को अब भी भरोसा नहीं कि नामाजवादी कुनबे में वाकई जंग छिड़ी है ।
वो कहते हैं ……. नहीं ऐसा नहीं हो सकता …… मेरा दिल कहता है की ऐसा नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है । नामाजवादी कुनबे में झगड़ा नहीं हो सकता ।
17 जनवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
बाप बेटे चचा भतीजा भाई भाई कुत्ते की तरह लड़ रहे हैं ……. एक दुसरे को नोच खसोट रहे ।
मोदी haters को फिर भी लगता है कि कोई बुरा सपना है ……. भ्रम है ……. सुबह जागेंगे तो सब ठीक होगा …….. उधर चुनाव आयोग कंफूज है ।
रामगोपाल 6 पेटी कागच जिनकी संख्या कुल डेढ़ लाख है धर आये चुनाव आयोग में ।
अमर सिंघवा बोल दिया सब फ़र्ज़ी है करो जांच ……..
चुनाव आयोग बोलता है इतना सब कागच जांचने में तो 6 महिन्ना लगेगा । उधर 10 दिन बाद अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
अपने दुआर में कुकुर झौं झौं करने वाले कुत्तों को मालिक चार डंडा मार के दुत्कार देता है । बहुत संभव है कि चुनाव आयोग दोनों बाप बेटा को GPL मार के भगा देगा और चुनाव चिन्ह साइकिल को फ्रीज़ कर देगा मन
अखिलेश कांग्रेस से चुनावी pact के मूड में हैं ।
ऐसे में तय है कि अखिलेश गुट की कम से कम 100 सीट cong को जायेगी मने 100 नामाजवादियों का टिकट कट के कांग्रेसियों को मिलेगा ।
ऐसे में वो 100 क्या चुप बैठेंगे ?
दूसरी तरफ सिपाल मुलायम गुट भी कम से कम 250 से 300 प्रत्याशी मैदान में उतारेगा । UP की हर सीट पे सपा से टिकट मांगते 4 – 6 गंभीर प्रत्याशी हैं । हर सीट पे दो चार करोड़पति टिकट मांग रहे हैं । सिपाल का अब एकमात्र लक्ष्य है ……… अखिलेश को हराना ……..
सिपाल मुलायम अगर किसी को टिकट दे देंगे तो वो 10 – 20 हज़ार भोट तो ले ही मरेगा ।

एक तर्क दिया जा रहा है कि सपा अगर बँटी तो मुसलमान enblock बसपा में shift कर जाएगा ।
काश चुनावी राजनीति में सब कुछ इतना ही सीधा सपाट होता ।
हर मुस्लिम बहुल सीट पे 2 – 3 या 4 प्रत्याशी होंगे । सब वोट काटेंगे ।
2014 के लोस चुनाव में मोदी की सुनामी आती हुई साफ़ दिख रही थी इसके बावजूद मुसलमान एकतरफा enblock voting कर उसे रोक न पाए और बह गए ।

आपको दीखे चाहे न दिखे …….. UP में मोदी की सुनामी आ रही है ……. सब कुछ बहा के ले जाएगी ……. अईकील सईकील आथी हाथी सब बह जाएगा ……..
कोई आजपा भाजपा नहीं ……. कोई कमल नहीं …….. भोट पडेगा मोदी को ……. भोट पडेगा विकास के एजेंडे पे ………. भोट पडेगा भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए …….. भोट पडेगा प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये ……… भोट पडेगा 24 घंटे बिजली के लिए ……. भोट पडेगा शानदार सड़कों के लिए …….. भोट पडेगा गुंडे बदमाशों के खिलाफ ……… भोट पडेगा जातिवाद के खिलाफ ……. भोट पडेगा हिंदुत्व के लिए …….. भोट पडेगा कटुओं की औकात बताने के लिए ।

साइकिल गयी कबाड़े में
हाथी चढ़ गया भाड़े में
अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………