छोटे short cuts अक्सर कहीं नहीं पहुँचते ।

हम हिंदुस्तानी बाप लोग का एक फेवरिट डायलाक होता है ……..
बेटा , बाप के पैसे पे ऐश मत करो ।
अभी मौक़ा है …….. पढ़ लिख लो ।
वरना भीख मांगोगे । साले तुमको तो कोई भीख भी न देगा ।
हिन्दुस्तान का हर होनहार लौंडा अपने खडूस बाप के ये डायलॉग सुन सुन के ही जवान होता है ।

पर रोहित वेमुला की किस्मत में बाप न था ।
शायद इसीलिए रोहित वेमुला पलायन वादी हो गया ।
उसने जीवन भर short cuts खोजे ।
आसान रास्ते ।
काश उसको भी कोई समझाने वाला मिला होता कि बेटा …….. ज़िन्दगी में there is nothing like a free lunch ……
.मुफ़्त में कुछ नहीं मिलता बेटा । ये ज़िन्दगी है , कोई आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं , जो हर चीज़ मुफ़्त में दे देगी ।
रोहित ने हमेशा short cut लिया । सिर्फ short cut ही नहीं लिया , बल्कि छोटे से भी छोटा short cut लिया । वो ज़िन्दगी भर short cuts ही खोजता रहा ।
था OBC पर उसने short Cut लिया । दलित बन गया । मर्द होता तो जनरल बनता ।
हिन्दू था , पर यहां भी उसने short cut लिया । ईसाई बन गया ।
पिछड़े हिन्दू से दलित ईसाई बन गया ।
नेता गिरी भी की तो दलितों की । हमारे यहां तो दलित पिछड़ों की तो नेतागीरी भी आसान है । सवर्णों की नेतागीरी करने में तो भैया दांत से पसीना आ जाता है ।

पढ़ लिख के कुछ बन जाता , कुछ हासिल कर लेता , कहीं किसी मोटे तगड़े भारी भरकम package वाली नौकरी करता , मोटे पैसे कमाता , और फिर ज़िन्दगी भर ऐश करता । पर उसने यहां भी short cut लिया । fellowship के पैसे से ही ऐश करने लगा । फ़ेलोशिप indiscipline और गुंडागिरी के कारण बंद हो गयी तो कर्ज़ा ले के जीने लगा …….. once again छोटा short cut ……..

जब hostel से निष्कासन हुआ , और जब university के इस फैसले के खिलाफ अनशन पे बैठे , तो कुछ दिन एकांत लाभ मिला । एकांत लाभ यूँ मिला कि अनशन जैसे बोरिंग काम से तमाशबीन बहुत जल्दी ऊब जाते हैं । अकसर देखा जाता है कि अनशनकारी अकेले पड़े रहते हैं । कोई मूतने भी नहीं आता । सो उस एकांत वास में इन ने जब introspection किया तो पाया कि ज़िन्दगी में तमाम short cuts मार के भी उनकी ज़िन्दगी की गाडी कही पहुँच नहीं रही ।
Phd अटक गयी । और अब तक जो पढ़ाई की उस से कुछ मिलेगा नहीं ।
Hostel था , fellowship थी तो ज़्यादा नहीं तो साल दो साल का जुगाड़ तो था ?
अब इस नेता गिरी में तो वो भी गया ।
Short cut मार के भी ज़िन्दगी कहीं पहुँचती नहीं दिखी तो उन ने इसका हल जानते हैं क्या खोजा ?
एक और Short Cut ।
एक और छोटा Short Cut ………

जनाब पंखे से लटक गए ।
आज एक पोस्ट पे मेरे एक मित्र comment box में पिले पड़े थे और उसके OBC से दलित बन जाने को justify कर रहे थे । तर्क संगत और न्याय संगत बता रहे थे ।
ये पोस्ट बस उन्ही के उस कुतर्क को समर्पित है ।

ज़िन्दगी में छोटे short cut अक्सर बहुत लंबे हो जाते हैं ।
इसलिए जो सच है और जो सही है , उसी मार्ग पर चलो ।
क्योंकि छोटे short cuts अक्सर कहीं नहीं पहुँचते ।

पिछले साल की पोस्ट …….

रेगिस्तान का cactus बनो । Cactus कभी नहीं मरते ……..

अभी एक मित्र की पोस्ट पढ़ी fb पे ।
वो बता रहे थे कि पिछले दो महीने में वो कितनी बार bank और ATM की लाइन में कै कै घंटे और कै मिनट खड़े रहे ।
मुझे ध्यान आया , मैं और मेरा पूरा परिवार मने धर्म पत्नी और 3 बच्चों समेत एक भी आदमी इन 60 दिन में किसी बैंक या atm की लाइन में नहीं लगा । बस एक बार दिग्विजय लगा था 15 मिनट के लिए सो यहां पूर्वांचल में 15 मिनट की लाइन को लाइन नहीं माना जाता क्योंकि हमारे यहां सैदपुर में तो शांतिकाल अर्थात नोटबंदी से पूर्व भी ATM की लाइन में डेढ़ दो घंटा खड़े रहना आम बात थी ।
सो सवाल है कि मेरा कुनबा इस भयंकर cash crunch में भी line में खड़े रहने से कैसे बच गया ।
और फिर यही नहीं , मेरा परिवार तो आज तक किसी भी लाइन में कभी नहीं लगा । चाहे जैसी लाइन हो …… रेल बस की होय या कोई अन्य हो , रिजर्वेशन की हो …… मेरे लौंडे या मैं कभी लाइन में ना लगे ……. जानते हैं क्यों ?
मैंने अपने बच्चों को कभी formal शिक्षा मने स्कूली किताबी ज्ञान नहीं दिया ……. बड़का तो फिर भी कुछ दिन स्कूल गया , दोनों छोटे तो कभी स्कूल गए ही नहीं ……. इन सबको मैंने home education दी ……. बिना किसी syllabus curriculam के व्यवहारिक शिक्षा …….. और स्किल के नाम पे सिर्फ एक skill सिखायी ……. survival skill ……. मने इस जंगल में ज़िंदा कैसे रहना है ……… How to survive in this jungle among wolves …….. हमारे इस मुल्क में एक बड़ी जबरदस्त तकनीक है जिसे जुगाड़ तकनीक कहा जाता है । यदि आप इस तकनीक में महारथ हासिल कर लें तो आप छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या का हल चुटकियों में कर सकते हैं । और इस तकनीक को साधने के लिए आपको ज़्यादा से ज़्यादा समय अपने मम्मी पापा के पल्लू और गोद से दूर , घर की comforts से दूर , बिना प्लानिंग के , बिना रिजर्वेशन के , general और cattle class में travel करते बितानी पड़ती है , bare minimum मने न्यूनतम में गुजारा करना …….. जुगाड़ से लंबे समय तक जीना खाना …… मने सिर्फ एक jeans टी शर्ट में 15 दिन गुज़ार देना , ज़रूरत पड़ने पे एक mug पानी में नहा लेना , प्लेटफॉर्म पे अखबार या गमछा और वो भी न हो तो यूँ ही सिर के नीचे जूता रख के सो लेना और बिना पइसा के भर पेट खा लेना …….. जब ये स्किल आपके अंदर आ जाए ……. तो मान लीजिए कि अब आपको जंगल में छोड़ा जा सकता है ……. आप मरेंगे नहीं ………

मैंने अपने बच्चों को हमेशा सिखाया है ……. जलकुम्भी मत बनो ……. रेगिस्तान का cactus बनो ।
Cactus कभी नहीं मरते ……..
रेगिस्तान में उगे cactus में जो फूल खिलते हैं वो सालों नहीं मुरझाते ।

जलकुम्भी महीने दो महीने में सूख जाती है ।

सख्त जान भारत

इस फोटो की आजकल बहुत चर्चा है सोशल मीडिया पे ।
कुछ लोग बहुत ज़्यादा सहानुभूति जता रहे हैं ।
कुछ ने आर्थिक मदद भेजने की पेशकश की है ।
कुछ उस व्यक्ति को गरिया रहे हैं जिसके उत्सव में ये महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण में सर पे भारी बोझ उठाये काम करती दीख रही है ।

परन्तु इस फोटो के प्रति मेरा नज़रिया कुछ और है । जो लोग इसे देख बहुत ज़्यादा उद्वेलित हैं वो वास्तविक जीवन से कटे हुए लोग हैं । उन्होंने न असली जीवन जिया है और न असली भारत देखा है ।

मेरा जन्म एक MH बोले तो Military Hospital में हुआ था । मेरी माँ उस MH के किस्से सुनाया करती थीं । बताती थीं कि उस MH की Matron बड़ी सख्त जान जल्लाद किस्म की औरत थी । labor room में प्रसव के तुरंत बाद मने सिर्फ 10 – 15 मिनट बाद माँ की गोद में बच्चा थमा के खडा कर देती । माँ अगर कोई नखरे दिखाती तो जोर से डांटती ।
क्या हुआ ? क्यों इतने नखरे कर रही है । कौन सा पहाड़ तोड़ा है । चल उठ के काम कर । मने 3 दिन MH में रखती पर सब काम उसी से करवाती । मने अपनी खुद की और बच्चे की देखभाल । उसका idea ये था कि सद्यप्रसूता मानसिक रूप से दृढ हो …… बहुत सुकुमार न हो ……. pregnency और Delivery कोई पहाड़ नहीं ।
हमने बचपन में ऐसे किस्से सुने हैं जब माँ जंगल में गयी घास लेने । वहीं delivery हो गयी । खुद ही हंसिया से नाड़ काटी और पीठ पे बच्चा बाँध सर पे लकड़ी या घास का गट्ठर धरे वापस चली आई ……. इतनी सख्त जान हुआ करती थीं हमारी दादी नानी ।
अगर यकीन न हो तो अपने घर में किसी 70 – 80 साल की महिला से पूछ लीजिये । ऐसे बीसियों किस्से सुना देंगी । मेरी माँ मेरी गर्भवती पत्नी से पूरे घर के पोचे लगवाती थी फर्श पे …… कहती इस से delivery बेहद आसान हो जाती है ।
ग्रामीण भारत आज भी बड़ा सख्त जान है । वहाँ ये चोचले नहीं चलते कि pregnant है तो काम नहीं करेगी । फोटो में दिख रही महिला हट्टी कट्टी स्वस्थ है । working woman है । कमा के खाना चाहती है । मेहनत परिश्रम से भाग नहीं रही ।
करने दो न उसे काम । क्यों जबरदस्ती पंगु बनाना चाहते हो ?

शिखर तक का सफर तो अभी बाकी है

पिछले दिनों दिल्ली में एक मित्र से मिलने गया ।
कुछ परेशानी में थे । उनके पिता ने अपना घर बेच दिया था और पूरे परिवार को नए घर में शिफ्ट होना था । पर नया घर चूँकि तैयार न था इसलिए दो या तीन महीने किराए के एक मकान में गुज़ारा करना था । मित्र की पत्नी बीमार रहती थीं सो एक घर से दुसरे और फिर तीसरे में shift करने की जिम्मेवारी बेटी पे आन पड़ी थी जो एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जी जान से जुटी हुई थी ……. बेहद confused ……. डरी सहमी सी …… क्या होगा ? कैसे होगा ? कैसे करूंगी ?

मैंने हौसला बढाया …….. अरे …… ये भी कोई समस्या है ? तुम्हारे जैसी बहादुर बच्ची तो ऐसी छोटी मोटी समस्या चुटकियों में हल कर सकती है …….
पर बिटिया को बात समझ न आई । उसे लगा अंकल झूठी तसल्ली दे रहे हैं ….. किताबी ज्ञान …… लड़की नैराश्य से उबरने को तैयार न थी ।
मैंने फोन निकाला । उसे एक लड़की की तस्वीर दिखाई ।
ये सुमेधा है ……. सुमेधा पाठक …….
माना कि तुम्हारे जीवन में बहुत समस्याएं हैं ……. पर इस लड़की को ज़रा ध्यान से देखो ।
कितनी खुश दीखती है ……… है कोई तनाव ?
अब ज़रा इस फोटो को पुनः देखो । सुमेधा wheel chair पे बैठी है । जब ये 10th क्लास में थी तो इसकी रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या हुई और लाख इलाज कराने के बावजूद कोई सुधार न हुआ और धीरे धीरे ये paraplegic हो गई । paraplegic मने कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न लकवा ग्रस्त हो गया ।
देश दुनिया का कोई डाक्टर अस्पताल नहीं छोड़ा । फिर भी कोई सुधार न हुआ । आज 3 साल से ज़्यादा हो गए ……. wheel chair पे है ।
माना कि तुम्हारे जीवन में समस्याएं हैं …… पर सुमेधा से ज़्यादा तो नहीं ?
जानती हो , एक समय ऐसा भी था जब इसे रोजाना 9-9 घंटे physiotherapy करानी पड़ती थी …… स्कूल छूट गया था …… सामने पहाड़ सा जीवन अन्धकार मय दीखता था …… फिर भी , उन्ही विपरीत परिस्थितियों में भी , सिर्फ घर पे self study कर के ही इसने 10th और 12th में 92 -94 % मार्क्स ले के top किया …… आज BHU से BCom कर रही है ……. माना कि जीवन में बहुत समस्याएं हैं फिर भी सुमेधा जितनी तो नहीं ……. आज के बाद जीवन में कभी निराशा हो तो सुमेधा की फोटो देखना और इश्वर को धन्यवाद देना …… हे इश्वर …… thanks …… मैं कम से कम अपने पैरों पे खड़ी तो हो सकती हूँ ……

और अब दो पंक्तियाँ सुमेधा के लिए …… बेटी सुमेधा ….. कभी जीवन में निराशा हो तो Stefan Hawkins की फोटो देखना ……. और इश्वर को धन्यवाद देना ……. हे इश्वर धन्यवाद …… मैं कम से कम कमर के ऊपर तो ठीक हूँ …….
Stephan Hawkins जब सिर्फ 19 साल के थे तो उनको भी वही समस्या हुई जो सुमेधा को है । तमाम इलाज के बावजूद वो भी गर्दन के नीचे लकवाग्रस्त हो गए …… quadriplegic ……. जब उन्हें पहली बार बीमारी का attack हुआ तो वो भी तुम्हारी तरह स्कूल में थे । उनके अगले 8 साल अस्पतालों के चक्कर काटते और physiotherapy कराते ही बीते । उनका paralysis progressive था और धीरे धीरे कमर से होता हुआ गर्दन तक पहुँच गया ।
तमाम दुश्वारियों के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी । एक समय ऐसा भी आया जब doctors ने उनको कहा कि वो सिर्फ 2 साल और जीवित रहेंगे । तब उन्होंने जवाब दिया …… अरे दो साल तो बहुत हैं ….. तब तक तो मैं आराम से अपनी Phd ख़त्म कर लूंगा । बीमारी और गर्दन से नीचे लकवा ग्रस्त शरीर Stephan Hawkins को दुनिया का महानतम वैज्ञानिक Physicist और Cosmologist बनने से नहीं रोक पाया । आज Stephan पूरी दुनिया में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं और उनके शिष्य दुनिया के महानतम वैज्ञानिकों में शुमार होते हैं ……. इसलिए बिटिया सुमेधा ……. जब कभी उदास हो तो Stephan Hawkins को देखना और उनकी जीवनी पढ़ना और इश्वर को धन्यवाद देना …… हे इश्वर …… आभार आपका ……. कमर से ऊपर तो ठीक हूँ …… यदि Stephan Hawkins दुनिया का महानतम वैज्ञानिक बन सकता है तो सुमेधा क्यों नहीं बन सकती एक महान Economist ……..

नोट बंदी

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बात तब की है जब अभी मोदी जी की नोट बंदी बस हुई ही थी ।
उस दिन मैं अदिति गुप्ता नामक लौंडे का गुदा भंजन कर अलीगढ से वापस दिल्ली लौट रहा था । अलीगढ से मैंने UP roadways की AC बस पकड़ी ।
कंडक्टर ने टिकट बनाने शुरू किये ।
मेरे पास आया तो मैंने उसे 1000 का नोट थमाया ।
उसने कहा ये नहीं चलेगा ।
क्यों नहीं चलेगा भाई ?
1000 और 500 के नोट सरकार ने बंद कर दिए ।
अरे वो तो मुझे भी पता है कि 1000 – 500 के नोट बंद कर दिए पर ये भी तो कहा है कि रेल , बस , metro में चलेंगे अभी कुछ दिन ……..
नहीं , ये नहीं चलेगा ……. हमारे Depot Manager ने मना किया है ।

भाई ……. ये देश तेरे depot manager के कहने से चलेगा या प्रधान मंत्री मोदी के कहने से चलेगा ?

वो बोला ……. देश कैसे चलेगा ये तो पता नहीं पर ये बस तो depot manager के कहने से ही चलेगी ।

तो फिर हमारे पास तो पईसे ना हैं भाई ……. हम ना लेते टिकट …….. ईब तो हम बिना टिकट ही जावेंगे दिल्ली तक …….. अपने depot मेनेजर को बता दे कि यू पहलवान ना लेता टिकट ……
ना लेता टिकट तो उतर जा ……..

अबे चल न …. न टिकट लूंगा न उतरूंगा ………..

पहलवान जी आप तो जबरदस्ती कर रहे हो ……..

अबे जबरदस्ती मैं कर रिया हूँ कि तू …….. देश का वित्त मंत्री तू और तेरा मेनेजर हो गया ????????

अच्छा लाओ ……. वही दो हज़ार का ……..
नहीं ……. वो नहीं चलेगा अब …….. मोदी ने बंद कर दिया …….

अरे दे दो न …….

नहीं भाई …….. कैसे दे दूं ? वो नोट चलेगा ही नहीं …….. तेरे मेनेजर ने मने करी है 1000 का नोट लेण ते ………

दे दो न भाई साहब ……. आप तो दुखी कर रहे हो …….. प्लीज़ …….. कंडक्टर अब घिघियाने गिडगिडाने की मुद्रा में आ गया था ।

मैंने उस से कहा ……. क्यों ? आ गया न लाइन पे ?

कल एक मित्र ने एक पोस्ट पे comment किया कि उनके बच्चे की फीस स्कूल वाले चेक से नहीं ले रहे ………

क्या कहा ? चेक नहीं ले रहे ?
इनती माँ ती तूत ……. कैसे नहीं लेंगे चेक …….. अबे इनका तो मरा हुआ बाप भी लेगा ……… फ़ैल जाओ स्कूल में …….. बोल दो चेक लेते हो तो लो नहीं तो मैं चला …….. और फिर ले लेना फीस ……. साले 12वीं तक यही पढ़ाऊँगा लौंडे को और झांट एक पैसा फीस नहीं दूंगा …… और खबर दार जो लौंडे से एक बार भी फीस का तगादा कर दिया तो ……..
भैया …… गान्ही बाबा मरे तो हमको बहुत बड़ा हथियार दे गए …….
सत्याग्रह ……… मने सत्य का आग्रह …….
सत्य में बहुत बड़ी ताक़त होती है ।
अगर आप सच्चे हैं तो तुरंत फ़ैल जाओ …….. पूरा रायता फैला दो ……. सामने वाले के लिए समेटना मुश्किल हो जाता है ……..

हर उस प्रतिष्ठान में , जहां आप अक्सर जाते हैं ……. या आप जिसके permanent ग्राहक हैं ……. उसको ultimatum दे दीजिये …….. भैया App से पैसे लेना शुरू कर दे नहीं तो हम ना देने के cash ……. और जबरदस्ती चाय पियेंगे …… पैसे झांट नहीं देंगे ……. खाते में लिख ले …… जब cash होगा दे देंगे …….

सामने वाले को मजबूर कर दो कि वो नगद लेन देन बंद कर E Banking से काम करे ।