जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती हैं ।

देश में सिखों के चुटकुले बड़े चाव से सुने सुनाये जाते हैं ।
हंसी मज़ाक और मखौल के पात्र रहे हैं सिख इस देश में ।
कहा जाता है कि सिखों का दिमाग दोपहर 12 बजे खराब हो जाता है ।

मिति 8 पौष ……. चमकौर साहिब …… वर्तमान पंजाब का फतेहगढ़ साहिब जिला ……..
दो दिन पहले यानी 6 पौष , सिखी के संस्थापक दशम् गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने आनंद पुर साहब का किला खाली कर दिया ।
उनके साथ उनका पूरा परिवार मने 4 बेटे , माता गूजरी ……… और लगभग 40 सिख योद्धा थे ।
आनंदपुर साहिब से कुछ मील की दूरी पे किन्ही कारणों से परिवार उनसे बिछुड़ गया ।
दोनों बड़े बेटे 17 वर्षीय अजीत सिंह जी और 14 वर्षीय जूझार सिंह जी उनके साथ रह गए और दोनों छोटे साहिबजादे 8 वर्षीय जोरावर सिंह और 6 वर्षीय फ़तेह सिंह जी माता गूजरी के साथ रह गए ।
जिस स्थान पे परिवार अलग हुआ आज वहाँ गुरुद्वारा परिवार विछोड़ा साहिब स्थापित हैं ……..

वो रात गुरु साहब ने रोपड़ के पास कोटला निहंग खां के पास गुजारी ।
माता गूजरी दोनों छोटे साहिबजादों के साथ कुम्भे मश्की की झुग्गी में रहीं ।

अगले दिन यानि 7 पौष ……. गुरु साहिब जी चमकौर साहिब पहुंचे …….
माता गूजरी और दोनों छोटे बच्चों को गंगू अपने साथ अपने गाँव ले गया ।

अगले दिन सुबह ……. यानि पूस माह की 8 तारीख को चमकौर साहब का ऐतीहासिक युद्ध शुरू हुआ । गुरु साहब के साथ दोनों साहिबजादे और लगभग 40 सिख योद्धा थे । उधर मुग़लों की विशाल सेना ।
दोनों साहिबजादे और सिख योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए ।
शेष बचे सिखों ने गुरु जी को सुरक्षित निकल जाने को कहा …….. बताया जाता है कि जब युद्ध भूमि से निकलने लगे तो एक सिख योद्धा का पैर बड़े साहिबजादे अजित सिंह जी के मृत शरीर से टकराया । सिख ने अपनी कमर में बंधा वस्त्र खोल के उनका मुख ढक दिया ।
गुरु साहब ने जब ये देखा तो बोले …….. वापस उठा लो ये कपड़ा ……..
कफ़न या तो सभी सिखों को ओढाओ नहीं तो इसे भी खुला ही छोड़ दो …….
आखिर बाकी 40 जो शहीद हुए वो भी तो मेरे पुत्र ही हैं ……..

17 साल और 14 साल ……… क्षत्रिय के लिए कहा जाता है कि उसकी आयु ईश्वर के यहाँ से 18 वर्ष ही लिख़ के आती है । युद्ध भूमि में क्षत्रिय 18 बरस से ऊपर जिए तो ऐसे जीवन को धिक्कार ………

गुरु गोबिंद सिंह जी जब 9 साल के थे तो उनके पिता श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी शहीद हो गए ।
सिर्फ 41 वर्ष की आयु में स्वयं गुरु जी शहीद हुए ।
4 बेटे न्योछावर कर दिए देश कौम और धर्म के लिए ………

सही कहते हैं …….. ऐसी कुर्बानियां तो कोई दीवाना पागल ही दे सकता है …….
वो जिसका दिमाग 12 बजे सटक जाता हो ……..
गुरु साहब ने अगर जीवन में आसान रास्ता चुना होता तो कम से कम सिखों को ये चुटकुले तो न सुनने पड़ते ?

मुंबई में छत्रपति शिवा जी महाराज की मूर्ति स्थापित होने जा रही है ।
कुछ लोगों को ये tax payers के पैसे की wastage लगती है ।
भारत ने अपना इतिहास भुला दिया ।
ये जो सप्ताह अभी चल रहा है …… यानि 20 दिसम्बर से ले के 27 दिसम्बर तक …….. इन्ही 7 दिनों में गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था ।
इधर हिन्दुस्तान Christmas के जश्न में डूबा एक दूसरे को बधाइयां दे रहा है ।
एक ज़माना था जब यहाँ पंजाब में इस हफ्ते …….. सब लोग ज़मीन पे सोते थे …….. क्योंकि माता गूजरी ने वो रात , दोनों छोटे साहिबजादों के साथ , नवाब वजीर खां की गिरफ्त में , सरहिन्द के किले में , ठंडी बुर्ज में गुजारी थी …….. ये सप्ताह सिख इतिहास में शोक का सप्ताह होता है …….. पर आज देखता हूँ कि पंजाब समेत पूरा हिन्दुस्तान जश्न में डूबा है ……..
गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस अहसान फरामोश मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया …….. जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है ।

सिर्फ 3200 करोड़ में बन रही है मूर्ति शिवा जी की ???????
गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों की भी मूर्तियाँ बननी चाहिए यहाँ आनंदपुर साहिब और फतेहगढ़ साहिब में ……..

Lest we forget ……..

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

आज से कुछ साल पहले मेरी पैर में fracture हो गया ।
पंजे में ।
पहले तो मैंने उसे मामूली मोच समझ ignore किया । खिलाड़ियों को ऐसी मोच आना आम बात है । जब एक डेढ़ महीने तक भी दर्द न गया तो XRay कराया । Dr ने बताया जनाब कायदे से टूटी हुई है हड्डी …… प्लास्टर लगा डेढ़ महीने …… मने 3 महीने मैं लंगडा के चला । मित्रों ने लंगडा लंगडा कह के बुलाना शुरू कर दिया । फिर वो लंगडा तैमुर लंगडा हो गया ।
धीरे धीरे मेरा नाम ही रख दिया गया तैमूर लंगडा ।
ये वो दिन थे जब हम computer illiterate हुआ करते थे ।
मुझे आज भी वो दिन याद है जब हमने जालंधर में काम करना शुरू किया तो एक सहयोगी ने कहा अपना email देना …… हम दोनों मियाँ बीवी भेड़िया बाँय …… तय हुआ कि अब तो email account बनवाना पडेगा । मुझे आज भी याद है , model town के उस cyber cafe में एक लौंडे ने 30 रु लिए थे email Id बनाने के । और फिर जब मेरी छोटी बहन ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित करना शुरू किया तो उसी ने मेरा blog account और Fb account बनाया । ये वो दिन थे जब मैं ब्लॉग लिख तो लेता था पर उसे copy paste करना नहीं आता था fb पे । वो भी बड़ा मशहूर चुटकुला ही बन गया जब मैंने अपने एक कम्पूटर ज्ञाता मित्र से कहा कि भाई मैं महीना दो महीना तेरे पास लगा ले रिया हूँ ….. तू मेरे कू ये copy paste करना तो सिखा ही दे । तो उसी दौर में मेरे उसी मित्र ने मेरा एक Gmail ac बनाया …….. taimur.lang27@gmail.com
ये कम्बखत आज भी मेरा google ac है ।
ये तो जब ये करीना कपूर के बच्चे के नाम पे चिहाड़ मची तो मुझे मामले की गंभीरता का अहसास हुआ । मुद्दे की बात ये कि इस से पहले आज तक न मुझे खुद कभी अहसास हुआ और न मैंने कभी खुद सोचा कि मेरे नाम के साथ …… चाहे मज़ाक में ही सही ……. इतने भयानक कातिल का नाम क्यों जुड़ा है ?
सच बताऊँ ?
हालांकि मैं खुद को पढ़ा लिखा जागरूक जाग्रत व्यक्ति मानता हूँ पर सच ये है कि मुझे तैमूर लंग और ऐसे ही हज़ारों कातिलों के बारे में कोई जानकारी है ही नहीं …….
दोष किसका है ?
हमारे education system ने secularism के चक्कर में इन इस्लामिक कातिलों की करतूत कभी हमारे सामने आने ही नहीं दी गयी । history को dilute कर दिया गया । अकबर महान हो गए । औरग्ज़ेब सूफी संत ……. गजनी गोरी महान योद्धा …… और बाकी सब सेक्युलर इतिहासकारों की बाजीगरी जादूगरी में गायब कर दिए गए ।

Dr राजीव भाई ( लन्दन ) ने सवाल उठाया …….. हॉलीवुड में Holocaust पे और 2nd WW पे इतनी फिल्में क्यों बनती हैं ……. इसलिए बनती हैं कि आत्मा को झकझोरते रहे । Jews Hitler को कभी मरने नहीं देंगे । कुछ ज़ख्म ऐसे होने चाहिए कि कभी न भरें …….. हिन्दुओं ने वो तमाम क़त्लेआम वो तमाम अत्याचार भुला दिए जो उनपे हुए 1400 साल तक …….. हिन्दू भूल गए …….
भूल गए तैमूर , चंगेज़ खां , गजनी , गोरी और बाबर हुमायूं अकबर औरंगजेब को ……. भूल गए चित्तौड़ के जौहर को …….

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक:
****************************
कुछ वर्ष पहले की बात है। एक साधारण पृष्ठभूमि का नवयुवक बिहार के सुदूर उत्तर-पूर्वी छोर से दिल्ली आ रहा था ट्रेन से। दिल्ली में रहते हुए, वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता था।
ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागती जा रही थी। ट्रेन के अंदर सब कुछ सामान्य-सा ही चल रहा था। सभी यात्री अपनी ही धुन में खोये हुए थे। पर तभी अचानक से नवयुवक चौंका..!!

नवयुवक ने देखा कि उसके डब्बे में दरवाजे के पास एक 20-22 साल की लड़की धीमे-धीमे सुबक रही थी!! एक लोफ़र-सा दिखने वाला लड़का सम्भवतः उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा था। पर लड़की थी कि रोये जा रही थी।
यह देख नवयुवक चौकन्ना हो उठा..!! उसे लग गया कि हो न हो, कुछ तो गड़बड़ है। वह एकदम से उस लड़की के पास गया और सबसे पहले तो उस लोफ़र से लड़के को वहाँ से भगाया। फिर उस लड़की से तमाम जानकारियाँ ली।

पता चला कि वह लड़की बिहार के बेगुसराय से थी। किसी बात पर अपने पिता की डाँट से दुःखी हो, घर से भाग कर वह भी इसी ट्रेन में सवार हो गयी थी, और वह भी बेटिकट।
सब जानने-समझने के बाद नवयुवक ने उस लड़की को भरोसा दिलाया और सुरक्षित उसे अपने पास बिठा लिया। लड़की को भी तब तक अंदाज़ा हो गया था कि यह नवयुवक एक भलामानुष इंसान है।

तब तक ट्रेन अपनी रफ़्तार से इलाहाबाद को पार कर चुकी थी। पर अभी इस कहानी का अंत यही नहीं होना था। अभी तो कहानी में एक और ट्विस्ट आना था..!! यह तो महज़ इंटरवल था।

नवयुवक ने दोबारा से नोटिस किया कि उसी डब्बे में एक और छोटी-सी, संभवतः 15-16 साल की, लड़की भी अकेले सफ़र कर रही थी। हे भगवान यह क्या..?? इस छोटी-सी लड़की की आँखों से भी गँगा-जमुना बही जा रही थीं निर्बाध..!!

अब नवयुवक के ललाट पर सिलवटें पड़नी शुरू हो गयी थीं। पर फिर भी वह नवयुवक इस छोटी-सी लड़की के पास जाने से खुद को रोक न सका। पूछताछ की, तो पता चला कि यह दूसरी लड़की इलाहाबाद से थी।

अपनी सौतेली माँ के निरंतर मारपीट से परेशान होकर और पिता की बेरुखी के चलते यह भी अपने बाबुल का घर असमय ही छोड़ चुकी थी!!
पर यह छोटी-सी लड़की अब तय कर चुकी थी कि चाहे जान चली जाए, पर वापस अपने घर नहीं जाना। नवयुवक पड़ा भारी फेरे में ! खुद किसी तरह दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर पा रहा था, ऊपर से ये दो-दो असहाय लड़कियाँ बिन बुलाये मेहमान की तरह ट्रेन में मिल गयीं थीं और उस पर तुर्रा यह कि दोनों की दोनों अपने-अपने घरों से भागी हुई!! अब भलामानुष करे तो क्या करे??
पर जहाँ चाह वहाँ राह। अगर विपरीत परिस्थितियों में आप न घबराएँ तथा आपके इरादें दृढ़ हों और नेकनीयत वाले हों, तो फिर ईश्वर भी साक्षात् आपकी मदद करते हैं। सौभाग्य से उसी डब्बे में हरियाणा का एक मारवाड़ी परिवार भी यात्रा कर रहा था। अब तक के सफ़र के दौरान नवयुवक तथा मारवाड़ी परिवार एक-दूसरे से थोड़े खुल से गए थे।

नवयुवक ने मारवाड़ी परिवार को सारी व्यथा समझायी। दोनों मामलों को भलीभाँति समझने के बाद, उदार मारवाड़ी परिवार उन दोनों में से छोटी लड़की को अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया, क्योंकि वह अपने पिता के घर इलाहबाद किसी कीमत पर नहीं जाना चाहती थी।

छोटी लड़की भी मारवाड़ी परिवार के साथ जाने को तैयार हो गयी। तब नवयुवक ने एक आवश्यक शर्त रखी कि भई, मारवाड़ी परिवार उस लड़की को अवश्य पढ़ायेगा तथा साथ ही साथ नियमित अंतराल पर फ़ोन द्वारा उसकी बात उस छोटी लड़की से करायेगा भी, ताकि वह आश्वस्त हो सके कि लड़की सुरक्षित है।

मारवाड़ी परिवार भी सभ्य, उदारवादी व भला परिवार था। अतः उन लोगों ने अपनी सहमति दे दी तथा नवयुवक को आश्वस्त किया कि वे उस छोटी लड़की को अपनी बेटी की तरह रखेंगे। तब नवयुवक ने छोटी लड़की को मारवाड़ी परिवार के हाथों सौंप दिया। साथ ही उस छोटी लड़की को अपना फ़ोन नंबर भी दिया ताकि उसे जब भी जरुरत लगे, वह उस से संपर्क कर सके।
अब बच गयी 20-22 साल वाली बेगुसराय वाली पहली लड़की, जो अपने पिता की डाँट बर्दाश्त न कर सकी और बिना कुछ सोचे, घर से निकल भागी थी! वह तो उसकी किस्मत अच्छी थी कि गलत हाथों में जाते-जाते, वह सुरक्षित हाथों में आ गयी थी।

इस तमाम आपाधापी में ट्रेन कब दिल्ली पहुँच गयी, कुछ पता ही न चला। तनावग्रस्त नवयुवक डरते-डरते, इस लड़की को दिल्ली स्थित किराये के अपने साधारण से तंग कमरे पे ले आया! नवयुवक डर इसलिए रहा था कि कहीं लड़की बीच रास्ते रोने-धोने न लगे, तो फिर लेनी के देने पड़ जाते।

कमरे पर पहुँच कर नवयुवक ने सबसे पहले पड़ोस की एक परिचित महिला को बुलाया, सारी बात समझायी। फिर महिला से निवेदन किया कि जब तक लड़की यहाँ है, कृपया आप साथ रहिये। खुद के कम पैसों में से ही नवयुवक ने लड़की को नये कपड़े दिलवाए , क्योंकि लड़की के शरीर पर चढ़े कपड़े जर्जर अवस्था में थे। जब तक लड़की उसके कमरे में रही, नवयुवक बगल में अपने दोस्त के यहाँ रहा।

अब नवयुवक ने फौरन से लड़की से उसके पिता का फ़ोन नम्बर ले, उसके पिता से संपर्क साधा और बताया कि उनकी लड़की उसके पास पूरी तरह सुरक्षित यहाँ दिल्ली में है। फौरन आएं और अपनी बेटी को ले जाएँ। साथ ही समझाया भी कि भविष्य में अपनी लड़की को डाँटना मत, वरन प्यार से कोई बात समझाना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी बैठ के रोते रहोगे।
लड़की के पिता को तो इधर लगा जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मिल गयी हो!! तब तक रोते-रोते लड़की के माता-पिता की हालत खराब हो गयी थी। परन्तु अब शब्द नहीं थे लड़की के पिता के पास कि किन शब्दों में वह नवयुवक के प्रति आभार प्रकट करें..!!

दो दिनों में लड़की के पिता उसको सुरक्षित लेकर वापस गए। कुछ दिनों बाद, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उस लड़की ने भाई से भी बढ़कर फ़र्ज़ निभाने वाले उस नवयुवक को राखी भेजी!!
छोटी लड़की जिसे वो मारवाड़ी परिवार ले गया था आज भी उनके पास रहती है . उसे भी उसके माँ बाप के पास वापस भेजने के प्रयास किये गए पर उन्होंने उसे वापस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई .

आगे चलकर यही भलामानुष नवयुवक तमाम झंझावातों को झेलता हुआ, महज़ चन्द वर्ष पहले, बिना किसी कोचिंग की सहायता के और वह भी हिंदी माध्यम से तैयारी कर, उत्तर प्रदेश काडर का आईपीएस (IPS) बना!! आजकल पूर्वी उत्तर प्रदेश में एडीशनल SP के पद पे कार्य रत हैं . आखिर हाड़तोड़ मेहनत और नेकनीयती का फल तो मिलना ही था। मुझे फ़ख्र है अपने इस दोस्त पर। इन्ही लोगों के चलते, आज भी इंसानियत पर भरोसा कायम है।

– कुमार प्रियांक

भीलवाड़ा की पप्पू की कचोरी

पिछले एक साल में 3 बार भीलवाड़ा राजस्थान जाने का मौक़ा मिला ।
मैंने अबतक जो थोड़ा बहुत हिन्दुस्तान घूमा देखा …….. और खाया पीया …….
मैं कह सकता हूँ कि भारतीय भोजन में राजस्थानी cuisine अद्भुत है ।
मज़े की बात ये कि राजस्थान में भी विभिन्न क्षेत्रों यथा मेवाड़ मारवाड़ शेखावटी हाड़ौती ……. सबका रहन सहन खान पान अलग है । ढेर सारी समानताओं के बाद भी बहुत भिन्न ।
एक समानता तो ये दिखी कि घी तेल का मुक्त हस्त से और विशाल ह्रदय से प्रयोग । मने राजस्थानी भोजन बहुत रंग बिरंगा होता है । हल्दी और मिर्च का प्रयोग ज़्यादा होता है । अब चूँकि घी तेल खूब है और उसमे हल्दी और लाल मिर्च ठोक के पड़ी हो तो dish तो रंगीन बनेगी ही ।
मिर्च के प्रति राजस्थान की दीवानगी मुझे बहुत fascinate करती है ।
उसमे भी खासकर भीलवाड़ा ……. यूँ तो पूरे राजस्थान में ही मिर्च खूब खायी जाती है पर भीलवाड़ा की तो बात ही निराली है । आप मिर्च खाने के कितने भी शौक़ीन हों पर भीलवाड़ा में आपको अपने मेजबान से कहना ही पड़ता है ……. भैया …. बहिन जी …… मिर्च ज़रा सम्हाल के …….
भीलवाड़ा में तो बाकायदा एक मिर्ची बाज़ार है । सब्जी मंडी में और किराना बाज़ार में बीसियों किस्म की हरी मिर्च और लाल मिर्च मिलती हैं । सिर्फ रंग वाली , हल्की तीखी , तीखी , और बेहद तीखी …… इसी तरह हरी मिर्च में भी विभिन्न प्रयोगों में आने वाली मिर्च मिलेगी आपको । फीकी , बहुत हलकी तीखी , सामान्य और ज़हर जैसी तीखी …….. सब्जी मंडी में मिर्च की जो variety मैंने भीलवाड़ा में देखी वो हिन्दुस्तान में और कहीं नहीं देखी । यूँ मिर्च खाने के शौक़ीन तो जोधपुर वाले भी कम नहीं पर भीलवाड़ा की बात ही कुछ और है ।
तो इस बार भैया हुआ यूँ कि भीलवाड़ा जा के करेला नीम चढ़ गया ।
मिर्च का शौक़ीन मैं और मेरी होस्ट लक्ष्मी दी ……. वो मुझसे बहुत आगे ।
पिछली बार जब गए तो उन्होंने हमारे लिए राजस्थानी कचोरी मंगाई । साथ में थे भाई राजेश जी सेहरावत , पुष्कर भाई और अवनीश जी ……
लक्ष्मी ने कचोरी परोसी ……. तो राजेश भाई चूँकि हरियाणवी ठहरे …… और हरियाणा वाले तो मिर्च के नज़दीक से भी न गुजरते । उन ने surrender कर दिया ……. म्हारे बस की ना है ।
पुष्कर भाई लखनवी मिजाज़ के हैं …… लखनऊ में तीखेपन की कोई जगह नहीं ……..
अवनीश बेशक गोरखपुर के हैं और गोरखपुरिये मिर्च खा लेते हैं पर उन्होंने भी थोड़ी सी खा के हाथ खड़े कर दिए ( शायद पान मसाले के कारण )
अपन पूरी खा गए और ये भी कहा कि अबे क्या ख़ाक तीखी है …….. एक दम सामान्य मिर्च है …….
लक्ष्मी ने कहा , दादा ये तो बिना मिर्च की थी ।
अभी मंगाती हूँ भीलवाड़ा की मशहूर पप्पू की कचोरी ……..
और आई जो भैया पप्पू की कचोरी …….
पहला टुकडा खाया ……. हाँ …… इसे कहते हैं तीखी कचोरी …….
वाह क्या बात है ….. वाह ……
आधी कचोरी खाते खाते वो अपना रंग दिखाने लगी …….. और फिर उसके बाद तो आँख नाक से पानी और कानों से धुआँ ……. वाह क्या कचोरी थी …….. किसी तरह खा के ख़तम की …….
फिर शुरू हुआ उसका postmortom बोले तो विश्लेषण …….
क्या खासियत है पप्पू की कचोरी की ……..
उसकी पीठी बोले तो filling में बढ़िया हींग , और बेसन , मूंग की दाल , अदरक , लाल मिर्च , लौंग और ढेर सारी काली मिर्च ……. खूब सारी ……. वो तीखापन लाल मिर्च का नहीं बल्कि काली मिर्च का था ……..
आपको भी यदि कभी भीलवाड़ा जाने का मौक़ा मिले तो पप्पू की कचोरी ज़रूर try कीजिये ।
पूरी न सही …… एक टुकडा ही सही …….

अगली स्ट्राइक के लिए मोदी की सेना तैयार है 

आजकल कांग्रेस के युवराज चूतिया नंदन श्री राहुल गांधी जी महाराज लोगों को ये बताते फिर रहे हैं की cash के रूप में कालाधन सिर्फ 6% है । शेष काला धन तो भैया property , gold और विदेशी tax heavens में जमा है ……..
अब ये कोई ऐसा भी गुप्त ज्ञान नहीं जो चूतियानंदन को पता हो पर सरकार को न पता हो ?
सरकार बखूबी जानती है जनाब । और ये जो कहा जा रहा है न , कि सरकार ने नोटबंदी से पहले तैयारी नहीं की …….. अजी जनाब , खूब तैयारी की …… बड़ी कायदे से तैयारी की …….
बाबा रामदेव के साथ रह के मैंने जो देखा समझा , उस से मुझे ये समझ आया कि इस नोट बंदी की तैयारी मोदी जी ने 2011 में शुरू कर दी थी । जी हाँ 2011 से । जब कि अभी वो गुजरात के CM थे उन्होंने देश का अगला PM बनने की तैयारी शुरू कर दी थी । देश की समस्याओं को समझना और उनके समाधान खोजना शुरू कर दिया था ।
मेरे पास बड़ी पुख्ता जानकारी है कि देश के एक मूर्धन्य economist जो कुछ दिनों के लिए पातंजलि आये हुए थे और बाबा रामदेव को economics का एक crash course करा रहे थे , उन्ही दिनों वो गुजरात में मोदी जी के भी वित्तीय सलाहकार थे ……. मोदी ने तैयारी 2011 से ही शुरू कर दी थी …… उन्होंने इन मामलों की गहरी समझ हासिल की है …… समस्या को समझा और फिर समाधान खोजे ।
2014 में शपथ लेते ही मोदी ने पूरे देश में जो गरीबों के जन धन खाते खोलने शुरू किये वो इसी नोटबंदी का हिस्सा था । पूरे देश में जो डेढ़ लाख किलोमीटर optical fibre cable बिछाने का जो काम हुआ वो देश को cashless बनाने के लिए net connectivity देने का एक हिस्सा है ।
काले धन पे स्ट्राइक कैसे होगी इसकी पूरी तैयारी की है मोदी ने ।
नोटबंदी के बाद अब अगला हमला बेनामी संपत्ति पे होना है ।
इसकी बिसात भी बिछ चुकी है ।
Benami Transactions (prohibition) Amendment Bill 2015 में लोकसभा ने पास कर दिया । 2014 में ही देश के सभी Sub Registrar को और Development Authorities को आदेश दे दिए गए कि 2006 के बाद से 30 लाख से ऊपर की सभी properties की registry का ब्योरा आयकर विभाग को भेजा जाए । ख़ास तौर पे High ways के किनारे खरीदी गयी संपत्तियों पे focus किया गया । सरकार के पास ऐसी पुख्ता जानकारियाँ थीं की Agra Delhi Highway , NH 24 और कुंडली मानेसर पलवल express way के किनारे किसानों की ज़मीनें औने पौने दामों में खरीद के बहुत मोटे मुनाफे के साथ बेचीं गयी हैं । ये सारी property बेनामी है । 2006-7 और 2011-12 में जब property बाज़ार में boom था तो उस समय registered सारी संपत्ति का 30 % से ज़्यादा बेनामी है ……..
सरकार ने बेनामी संपत्ति पे surgical Strike की तैयारी पूरी कर ली है ।
नया क़ानून बेहद सख्त है जिसमे बेनामी संपत्ति को जप्त करने के अलावा 25% panelty के साथ 7 साल की सज़ा का भी प्रावधान है । इसका मतलब ये कि यदि किसी ने अपने नौकर के नाम एक करोड़ का flat लिया है तो उस flat में तो अब मोदी जी रहेंगे , सेठ जी 25 लाख panelty देंगे और फिर खुद 7 साल जेल खटेंगे ।
आयकर विभाग ने 200 teams का गठन कर लिया है और वो बेनामी संपत्ति पे surgical strike के लिए एकदम तैयार हैं ।
इसके अलावा आजकल जो कालेधन पे छापेमारी चल रही है उसकी कागज़ी कार्यवाही के लिए सवा लाख retired आयकर अफसरों को संविदा पे नियुक्त किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त एक लाख से अधिक नयी नियुक्तियां भी आयकर विभाग में की जा रही हैं ।
सरकार ने दागी बैंक कर्मियों और RBI कर्मियों की पहचान कर ली है । इसके अलावा 8 Nov के बाद जमा धन राशियों और सम्बंधित बैंक खातों को भी पहचान के black money धारकों और काले को सफ़ेद करने वालों की पहचान भी हो गयी है । आयकर विभाग अगले कई साल तक बेहद व्यस्त रहेगा ।
अगली सर्जिकल स्ट्राइक कभी भी हो सकती है ।
कभी भी ……. 1 जनवरी को भी …….
देश के प्रॉपर्टी बाज़ार मे पहले ही 30 % की गिरावट थी । मने 100 का माल 70 में बिक रहा था । इस स्ट्राइक के बाद 30 % और गिरेगा ।
मने 100 का माल 40 में बिकेगा ।
That will be the right time to invest in property ……
अगर आपके पास white money हो तो ……..
Continue reading अगली स्ट्राइक के लिए मोदी की सेना तैयार है 

काश करीना कपूर ने ये इतिहास पढ़ा होता तो बेटे का नाम अजीत , जूझार , जोरावर या फ़तेह रखती .

इतिहास में बहुत कम मिसालें मिलेंगी ……. जब किसी बाप ने कौम के लिए ……. राष्ट्र के लिए …….. एक हफ्ते में अपने 4 – 4 बेटे क़ुर्बान कर दिए हों ।
आज पूस का वो आठवां दिन था जब दशम् गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के दो साहबजादे चमकौर साहब के युद्ध में शहीद हो गए । बड़े साहबजादे श्री अजीत सिंह जी की आयु मात्र 17 वर्ष थी । और छोटे साहबजादे श्री जूझार सिंह जी की आयु मात्र 14 वर्ष थी ।


सिखों के आदेश (गुरुमत्ता) की पालना में गुरु साहब ने गढ़ी खाली कर दी और सुरक्षित निकल गए ।

पिछली रात माता गूजरी दोनों छोटे साहिबजादों के साथ गंगू के घर पे थीं ।
उधर चमकौर साहिब में युद्ध चल रहा था और इधर गनी खां और मनी खां ने माता गूजरी समेत दोनों छोटे साहिबजादों को गिरफ्तार कर लिया ।

अगले दिन यानि पूस की 9 को उन्हें सरहिंद के किले में ठन्डे बुर्ज में रखा गया ।

10 पूस को तीनों को नवाब वजीर खां की कचहरी में पेश किया गया ।
शर्त रखी …….इस्लाम कबूल कर लो ……वरना …….
वरना क्या ?????
मौत की सज़ा मिलेगी ……

पूस का 13वां दिन ……. नवाब वजीर खां ने फिर पूछा ……. बोलो इस्लाम कबूल करते हो ?
छोटे साहिबजादे फ़तेह सिंह जी आयु 6 वर्ष ने पूछा ……. अगर मुसलमाँ हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न ?
वजीर खां अवाक रह गया ……. उसके मुह से जवाब न फूटा …….
तो साहिबजादे ने जवाब दिया कि जब मुसलमाँ हो के भी मरना ही है तो अपने धर्म में ही अपने धर्म की खातिर क्यों न मरें ……..

दोनों साहिबजादों को ज़िंदा दीवार में चिनवाने का आदेश हुआ ।
दीवार चीनी जाने लगी । जब दीवार 6 वर्षीय फ़तेह सिंह की गर्दन तक आ गयी तो 8 वर्षीय जोरावर सिंह रोने लगा ……..
फ़तेह ने पूछा , जोरावर रोता क्यों है ?
जोरावर बोला , रो इसलिए रहा हूँ कि आया मैं पहले था पर कौम के लिए शहीद तू पहले हो रहा है ……
उसी रात माता गूजरी ने भी ठन्डे बुर्ज में प्राण त्याग दिए ।

गुरु साहब का पूरा परिवार ……. 6 पूस से 13 पूस …… इस एक सप्ताह में ……. कौम के लिए …… धर्म के लिए …… राष्ट्र के लिए शहीद हो गया ।

जब गुरु साहब को इसकी सूचना मिली तो उनके मुह से बस इतना निकला …….

इन पुत्रन के कारने , वार दिए सुत चार ।
चार मुए तो क्या हुआ , जब जीवें कई हज़ार ।

मित्रो …… आज यानी 22 December पूस की 8 -9 है …….
दोनों बड़े साहिबजादों , अजीत सिंह और जुझार सिंह जी का शहीदी दिवस ……..

कितनी जल्दी भुला दिया हमने इस शहादत को ?
सुनी आपने कहीं कोई चर्चा ? किसी TV चैनल पे या किसी अखबार में …….
4 बेटे और माँ की  शहादत ……. एक सप्ताह में …….

पृथ्वीराज कपूर की नवासी ने अगर ये इतिहास पढ़ा होता तो शायद अपने बेटे का नाम तैमूर न रखती ।

अजीत , जूझार , जोरावर या फ़तेह सिंह रखती

कोई नहीं बचेगा ……. जाल बिछ गया है

मोमता दी बंगाल में हलक फाड़ के चिल्ला रही हैं ……. ये संघीय ढाँचे पे प्रहार है ……. मोदी सरकार राज्यों के  चीफ सेक्रेटरी के घर दफ्तर पे छापे मार के करोड़ों रु के नोट और सौ सौ किलो सोना बरामद कर रही है ……… बेनामी संपत्तियों के कागज़ात जप्त किये जा रहे हैं ………… ये तो मोदी सरकार का संघीय ढाँचे पे प्रहार है …………मोमता दी कहती हैं की चोर चीफ सेक्रेटरी को पकड़ने से पहले राज्य सरकार को विश्वास में लेना चाहिए ……….

गौर तलब है की तमिल नाडू के चीफ सेक्रेटरी P Ram Mohan Rao के घर दफ्तर पे जब इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा तो उनके साथ सुरक्षा के लिए तमिल नाडु पुलिस की जगह CRPF का सशस्त्र बल था …….. आज समाचार मिल रहे हैं कि राम मोहन राव के बेटे विजय राव के संस्थानों पे भी छापे मारे जा रहे हैं …………

राजनीतिक हलकों में ये सवाल भी पूछा जा रहां है कि अगर जय ललिता आज जीवित होतीं तो भी क्या इनकम टैक्स विभाग तमिल नाडु के चीफ सेक्रेटरी पे इस तरह दबिश देता ? राम मोहन राव की नियुक्ति स्वयं जयललिता ने की थी ………शाही पनीर सेलवम को तो राव विरासत में मिले ………  चीफ सेक्रेटरी राज्य की कैबिनेट के विश्वास पर्यंत पद पे रहता है ……… चीफ सेक्रेटरी पे दाग राज्य की कैबिनेट पे दाग माना जाता है ………. राजनीतिक हलकों में इसे मोदी सरकार का एक अत्यंत दुस्साहसिक कदम माना जा रहा है ……… सवाल ये है कि इतनी बड़ी मछली पे हाथ डालने से पहले विभाग ने अपने विभाग के सर्वोच्च अधिकारियों और राजनैतिक आकाओं को संज्ञान में लिया था ? यानि जेटली साहब की आज्ञा से छापे मारे गए ? जेटली ने मोदी को संज्ञान में लिया होगा ?

भोजपुरी में कहावत है …….. भैंस बियाती है तो बैलों की *** फटती है …….. छापा तमिलनाडु में पडा पर फटी समता , ममता , माया की पड़ी है …….. फटी जादो परिवार की पडी है ……. गांधी परिवार की फटी पड़ी है …….. इन सबकी गर्दन पे तलवार लटकी पड़ी है ……..

टीम मोदी नोटबंदी को एक राजनैतिक हथियार के तौर पे इस्तेमाल कर रही है ……. टीवी में दिन रात इनकम टैक्स की छापेमारी और काले धन की बरामदगी दिखाई जा रही है …….. P Ram Mohan Rao पे हाथ डाल के मोदी सरकार ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं …….. बड़ी मछलियाँ जाल में फसने लगी है …….. बड़ी मछलियों को सन्देश पहुँच गया है ……. कोई नहीं बचेगा ……..

मोदी गुज्जू व्यापारी है । एक पैसे के लिये जान दे देगा

किस्सा 1990 का है । तब जबकि मैं 25 साल का था और मातृभूमि राष्ट्र भक्ति देशप्रेम जैसे चूतिया चक्करों में पड़ के , SAI की 3 महीने पुरानी Central govt job को लतिया के , पंजाब के जालंधर शहर की जन्मी पली नव विवाहिता पत्नी को लिए ऊपी के जिला गाजीपुर चला आया । धर्म पत्नी ने दिल्ली में पूछा , हे पतिदेव , प्राण नाथ ……. कहाँ चले ? मैंने कहा प्रिये , दिल मेरा लगता नहीं इस बेदिल बेजान शहर में …. चल गाँव चलें । पेड़ के नीचे बैठा के बच्चे पढ़ाएंगे । और ये भी आज्ञाकारी पत्नी की तरह पीछे पीछे चल पड़ी । April May june की भीषण गर्मी ……. पुत्तर परदेस में बिजली तब भी 6 घंटे ही आती थी …….. हमने 25 जून 1990 को अपने घर के आँगन में एक पेड़ के नीचे ……. ठीक वहीं जहां आज उदयन चलता है ……. गाँव गिरांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया । कुछ दिन में लगभग 200 से ज़्यादा बच्चे आने लगे ……. परिवार भी पालना था …… फीस रखी 20 रु ……. स्वयं KV में पढ़े थे सो हूबहू KV ही चला दिया । NCERT का syllabus और books ……. 20 रु में …….
साल बीता । बच्चे बढ़ के 300 हो गए । कुछ local teachers भी रख लिए । उनको वेतन भी देना था । सो फीस 10 रु बढानी पड़ी । 30 रु …….
फिर गाँव वालों ने गणित लगाया …… 300 ×30 = 9000

अरे ई अजीत सिंघवा हमहन से 9000 रु कमाए लागल ……. लूट है जी लूट …… बहुत बड़ा षड्यंत्र है जी ……. देखते ही देखते आधे बच्चे गायब हो गए । धीरे धीरे ये स्थिति आ गयी कि 200 बच्चों में से 150 बच्चे 8 km दूर सैदपुर से आते थे और अगल बगल के गाँव से सिर्फ 20 बच्चे । उसमे भी हमारे गाँव माहपुर जिसकी आबादी 1200 थी उसमे से सिर्फ 3 बच्चे । यहाँ तक कि मेरे अपने परिवार (extended family) का एक भी बच्चा नहीं पढता था ।
3 साल तक यूँ ही चलता रहा । अंत में सैदपुर के parents ने दबाव डालना शुरू किया कि आप लोग यहाँ क्या कर रहे हैं । 200 बच्चे इतनी दूर से कष्ट सह के यहाँ आते हैं ……आप लोग वहीं चलिए ….. सैदपुर । और इस तरह Mahpur Public School माहपुर छोड़ सैदपुर चला गया ।
MPS का पहला छात्र 5 वर्षीय आशुतोष था जो आज Army में Major है । कुल 8 साल यानी 1st से 8th तक पढ़ा हमसे । उसके अलावा सैकड़ों हज़ारों बच्चे आज बेहद सफल हैं । कुछ FB पे भी हैं मेरी लिस्ट में ……. जिन बच्चों को उनके माँ बाप ने साल भर बाद 30 रु बचाने के लिए हटा लिया उनपे कोई टिप्पणी उचित नहीं ……..

आज देख रहा हूँ …… फिर वही कहानी दोहराई जा रही है …..

मोदी जी देश को cashless बनाने का सपना देख रहे हैं तो कुछ लोग कम्पनियों का कमीशन जोड़ रहे है । अरे भाई मोदी गुज्जू है …… एक पैसे के लिए जान दे देगा …… गुज्जू है …… उसका गणित और उसकी व्यापारिक बुद्धि हमसे आपसे बहुत तेज़ है । वो debit card और mobile banking कम्पनियों को चूस लेगा …… आप निश्चिन्त रहिये ।
कौन क्या कमा लेगा इसे छोडिये । cashless होने में देश को क्या फायदा है ये सोचिये ।

 

नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

Ford motors के मालिक Henry Ford निपट अंगूठा टेक अनपढ़ थे । जब वो अपनी सफलता के शिखर पे थे तो एक स्थानीय अखबार ने अपने एक लेख में उनको अनपढ़ लिख दिया । Ford को ये बड़ा नागवार गुजरा और उन्होंने उस अखबार पे मानहानि का मुकद्दमा ठोक दिया ।
सुनवाई शुरू हुई । Ford के वकील ने अखबार पे अपना आरोप दोहराया । आपने Mr Ford को अनपढ़ कहा ? सम्पादक बोला , हाँ कहा ……. और ठीक ही तो कहा …… अनपढ़ ही तो हैं Mr Ford . बुलाओ कटघरे में ……. अभी दो मिनट में सिद्ध कर देंगे कि अनपढ़ हैं ।
Ford कटघरे में आये तो सम्पादक ने उनसे किताबी सामान्य ज्ञान मने GK के कुछ सवाल पूछे । जाहिर सी बात है उनमे से एक का भी जवाब Ford के पास न था । सम्पादक ने जज से कहा …… अब और क्या प्रमाण चाहिए ?
Ford ने जवाब दिया ……. जज साहब ये माना कि मुझे इन सवालों के जवाब नहीं आते । ऐसे भी बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब इन सम्पादक महोदय को नहीं पता होंगे ।
पर मुझे हे पता है कि इन सवालों के जवाब कहाँ मिलेंगे ? कौन देगा इनका जवाब ?किस सवाल को कैसे हल करना है या करवाना है ……. मुझे ये पता है । मैं उन आदमियों को जानता हूँ जिन्हें इन सवालों के जवाब मालूम है । यदि आप आज्ञा दें तो मैं अभी एक मिनट में इन सभी सवालों के जवाब देने वालों की फ़ौज खड़ी कर सकता हूँ ।
मुझे सवालों के जवाब खोजना आता है ।
अपनी जिंदगी का तो शुरू से ही एक फलसफा रहा ।
समस्याओं का रोना मत रोओ । समाधान खोजो ।
Don’t discuss the problems . Find Solutions .
समस्याओं का क्या है ? वो तो लगी रहेंगी ।
सवाल पे focus मत करो । अपनी सारी ऊर्जा उसका हल खोजने में लगाओ ।
एक progressive समाज यही करता है । उस समाज के leaders सवालों और समस्याओं पे अपनी ऊर्जा और समय नष्ट नहीं करते बल्कि समाधान खोजने में करते हैं ।
माना कि नोटबंदी ने सवाल खड़े किये ……. समस्याएं पैदा की ……
8 Nov के बाद से हमारे leaders , हमारी press , हमारे institutions सिर्फ इस से उत्पन्न समस्याओं का रोना रो रहे हैं ……… हाय मर गए …… cash नहीं है ……. नेता और प्रेस सिर्फ और सिर्फ bank और ATM की लाइन में खड़े लोगों के कष्ट दिखा सुना रहे हैं ……. कोई ये नहीं सुझा रहा कि आखिर हल क्या है । समस्या का समाधान क्या है ?
विकल्प क्या हैं ?
cash अगर नहीं है तो कैसे survive करें ?
कैसे काम चलायें ?
cashless या less cash कैसे हुआ जाए ?

TV का पत्रकार लाइन में खड़े आदमी से पूछता है कब से खड़े हो ? कितने दिन से खड़े हो ? कितना कष्ट है ?
मैं पत्रकार होता तो पूछता …….. यहाँ क्यों खड़े हो ?
क्यों चाहिए cash ?
चेक से काम क्यों नहीं करते ?
लाओ अपना फोन दो , मैं सिखाऊँ कैसे करते हैं Net banking और Mobile बैंकिंग ……… cash अगर नहीं है तो विकल्प क्या हैं ? शिक्षा और समाचार माध्यमों को इसपे focus करना चाहिए । leaders को इसपे focus करना चाहिए ।
पर इसके विपरीत वो देश की जनता को ये समझाने में लगे हैं कि हम क्यों खोजें समाधान ?

आखिर ये समाधान हमपे क्यों थोपे जा रहे हैं ?
हम अपने पुराने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ क्यों अपनाएं नयी तकनीक ?
तुम सिर्फ cash दो ……. हमको नहीं चाहिए तुम्हारी नयी तकनीक ……
आज देश की विपक्षी पार्टियां लोगों को भड़का रही हैं …. विद्रोह कर दो ……. दंगा फसाद करो cash के लिए …….. मत होवो cashless या less cash …….. net banking और mobile banking मने समाधान के नुक्सान गिनाये जा रहे हैं ……. खतरे गिनाये जा रहे हैं ……… मोबाइल बैंकिंग को कुछ कम्पनियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया जा रहा है ।

नोट बंदी भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है ……… भविष्य में एक उन्नत भारत का रास्ता इसी नोटबंदी से निकलेगा ……. इसे एक संकट के नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख के इसका समाधान खोजना चाहिए युद्ध स्तर पे ।
नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

हे मोदी ……. जियो और जीने दो , खाओ और खाने दो

मोदी जी , कायकू बावले हुए जा रिये हो …….
भैन्चो …… न खुद चैन से सोते हो न पब्लिक को सोने देते हो ?
भैन्चो …… जीना हराम कर दिया है लोगों का ……. 18 से 20 घंटे काम करते हो …… खुद को तो नींद आती नहीं ……. दूसरों को तो सोने दो …….
ठीक यही प्रॉब्लम हमारे बाप की थी । न खुद कभी सोया 4 बजे के बाद और न हमको सोने दिया ……. मने सोता हुआ आदमी तो उनसे बर्दाश्त ही न होता था …….
ये सनकी बुड्ढों के साथ यही प्रोब्लम होती है ।
न सोऊँगा न सोने दूंगा ।
न खाउंगा न खाने दूंगा ।
12 बजे सोते हो सुबह 5 बजे उठ जाते हो ।
5 से 6 योग और साढ़े 6 बजे टेबल पे ?
अबे एकाक घंटा आलोम बिलोम कपाल भाति फालतू कर लिया करो …..
7 बजे अफसरों को फून करके पूछते हो disturb तो नहीं किया ?

आधी दुनिया घूम के आ जाते हो फिर भी Jet Lag नहीं होता ?
अबे तुम्हारे बीबी बच्चे नहीं है ……. न सही …… दूसरों के तो हैं ?
कायकू गरीब मार कर रिये हो यार …….
खुद के भाई भतीजे बहन भांजे तो मुफलिसी में जी रहे …….. सगी भतीजी गुजरात में शिक्षा मित्र लगी है सिर्फ 5500 रुपल्ली पे …….. लानत है ऐसे चचा पे …….. हमारे इदर जादो पलिवार की भतीजी होती तो अब तक राज्यसभा में होती या फिर किसी गायत्री परसाद से डेली का 5 – 7 करोड़ का हिसाब लेती ……. हवाई जहाज मने राज्य सरकार के पिलेन से जूता चप्पल सैंडिल और पर्स मंगवाती …….. उसका बी 200 करोड़ का बँगला होता अहमदाबाद सूरत में ……. अपने भी फ़कीर रहे पूरे खानदान को भी फ़कीर बना के रख छोड़े ?
और ये कायकू मरे जा रहे हो ……. डाकुओं का देश है ये …….. अबे किस किस अंगुलिमाल को संत बनाओगे ????? और सुनो ……. सिर्फ तुम्हारे राम बन जाने से मुल्क में राम राज नहीं आ जाएगा ……. जिस देश में सब रावण हों वहाँ अकेला राम क्या करेगा …….. और रावणों के मुल्क में राम राज लाने की ऐसी ज़रूरत भी क्या है ?
जहां हर आदमी रावण का उपासक हो वहाँ राम राज भला क्यों ?
अबे तुमने अकेले देस सुधारने का ठेका लिया है का ?
अकेले पिले पड़े हो ? किस किस को सुधारोगे ? किस किस का जिम्मा लोगे ……
सब तो उन्ही से मिले हैं …… उन्हीं के गुलाम ……. उन्हीं की चाकरी कर रहे …… क्या bank वाले और क्या RBI वाले ? क्या मजदूर क्या गरीब …… सब उन्हीं के लिए तो लाइन में लगे खड़े ……. पहले उनके नोट बदलवाते रहे सिर्फ 300 रु दिहाड़ी पे ……. फिर उनके ढाई लाख अपने खाते में डलवा दिए …… और अब रोजाना ATM के सामने खड़े निकलवा के दे रहे हैं …….
किसके लिए मरे जा रहे हो मोदी ?
इन्ही बिके हुए लोगों के लिए …….
अबे तुम क्या इकलौते PM हुए हो इस देस के ?
तुमसे पहले बीसियों हुए यार …… देखा किसी को इस तरह चिहाड़ मचाते ? अबे सब खाए खेले मस्त रहे …….. और एक तुम हो कि मरे जा रहे हो ……
अबे जैसे सबने आसान रास्ता अपनाया ……. तुम भी अपनाओ ……. जाओ कुछ दिन ……. गोवा टहल आओ ……. कोई सहेली बनाओ ……. जाओ फिजी बाली …… कहीं होनोलुलु में धूप सेक आओ …… बिटामिन D मिलता है सरीर को ……. बहुत दिन धूप न लगे तो हड्डी कमजोर पड़ जाती बतावें …… देखते नही हो अपने राहुल बाबा की हड्डी केतनी मजबूत है …… अबे जाओ तनिक मालिस ओलिस करवाय आओ तुम बी ……. एकाक ठो कविता कहानी लिखना उहाँ ……. इहाँ साले इन छुटभैये नेताओं के साथ अन्ताक्सरी खेल रहे रहे हो ?
जाओ उहाँ …… स्विट्ज़र लैंड ……. एकाक खाता तुम भी खुलवा ल्यो …… बुढापा चैन से कटेगा …….
हे मोदी ……. जियो और जीने दो
खाओ और खाने दो