पंजाब में संभावित AAP सरकार के खतरे

पंजाब में मौड़ मंडी – बठिंडा के कांग्रेस प्रत्याशी की रैली में हुए Bomb Blast को पुलिस ने आतंकी हमला करार दिया है ।
इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़ के 6 हो गयी है ।
इस हमले में प्रयुक्त मारुती Alto कार चोरी की है , उसपे लगी नंबर प्लेट एक स्कूटर की है ।
विस्फोट में कार के परखचे उड़ गए ।
पुलिस का कहना है कि इस हमले में एक अत्यंत परिष्कृत बम का उपयोग किया गया , जिसे remote के जरिये उड़ाया गया । वो remote कोई mobile फोन हो सकता है ।
विस्फोट में दो प्रेशर कुकर इस्तेमाल किये गए जिसमे से सिर्फ एक ही फटा ।
अगर दूसरा भी फट जाता तो बहुत ज़्यादा जानें जातीं ।

अब इसमें कोई गुंजाइश नहीं की ये एक आतंकी हमला है ।
जब से पंजाब के राजनैतिक परिदृश्य में AAP का उदय हुआ है , यहां पंजाब में खालिस्तानी तत्वों के वापस सिर उठा लेने की संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ गयी है ।
AAP को धन जन और अब बल का पूरा समर्थन ही खालिस्तानियों से मिल रहा है पर स्थानीय जनता इसे समझ नहीं पा रही है ।

खालिस्तानी आतंकवाद ने पंजाब में दस्तक दे दी है ।
सवाल है कि अगर खालिस्तानी आपियों की सरकार वाकई पंजाब में बन गयी तो क्या होगा ?
बहुत संभव है कि भगवंत मान जैसा एक शराबी कॉमेडियन पंजाब जैसे एक संवेदन शील राज्य का जो कि एक border state है , इसका मुख्यमंत्री बन जाए ।
भगवंत मान या ऐसे किसी भी आपिये नेता को कोई भी प्रशासनिक अनुभव नहीं है जबकि पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य जहां communal forces और communal issues की कोई कमी नहीं , यहाँ राज चलाना बहुत मुश्किल है । पंजाब हमेशा से communal tension के मुहाने पे बैठा रहता है और एक छोटी सी चिंगारी विकराल आग में बदल सकती है ।
पिछले कुछ सालों में हमने कई ऐसे मामले देखे जहां स्थिति बहुत खराब हो गयी थी ……. जैसे की बाबा गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा के मसले , या फिर डेरा सच खंड के बाबा रामानंद दास जी की Vienna में हुई ह्त्या और उस से उपजे तनाव के मसले हों या फिर पिछले दिनों हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से उत्पन्न हुए तनाव के मसले हों …….. ऐसे तमाम मसलों को हल करने और इन communal tensions को control करने के लिए जो प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए वो AAP के किसी नेता के पास नहीं है ।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या है AAP की केंद्र में मोदी सरकार से हमेशा टकराव की नीति ।
दिल्ली में हम देख चुके हैं कि AAP और केजरीवाल हर छोटी छोटी बात पे केंद्र सरकार और मोदी जी से सींग फंसा लेते हैं , हर बात के लिए मोदी सरकार को blame करते हैं । दिल्ली तो पूर्ण राज्य नहीं और वहाँ के CM के हाथ में बहुत कम प्रशासनिक अधिकार हैं और दिल्ली पुलिस चूँकि गृहमंत्रालय के आधीन है इसलिए किसी तरह काम चल जाता है , पर यदि पंजाब जैसे sensitive पूर्ण राज्य और border state में खालिस्तानी समर्थक कोई सरकार अगर काबिज हो जाती है जिसका मुखिया कोई अनाड़ी खालिस्तानी हो तो इसके खतरे आप समझ सकते हैं । विडम्बना ये है कि आज जो युवा पंजाब में AAP समर्थक हुए हैं उन्होंने 80 और 90 के दशक का खालिस्तानी आतंकवाद न देखा है न झेला है । ये इसके खतरों को समझते ही नहीं ।

सिर्फ 2 दिन बाद पंजाब में वोट डाले जाएंगे ।
देखते हैं कि पंजाब की किस्मत में क्या लिखा है ?

मुलायम के ये लोग ……….

कल चचा सिपाल जादो ने भतीजे अकललेस जादो के पिछवाड़े में खूंटा ठोक दिया है ।

कल जसवंतनगर से साइकिल चुनाव चिन्ह से पर्चा भरने के बाद उन्होंने सरेआम ललकारा कि बेटा अकललेस ये चुनाव तुम जीत लो ( जीत के दिखा दो ) उसके बाद जब 11 मार्च को नतीजे आ जाएंगे तो हम बनाएंगे नयी पार्टी । गौरतलब है कि 11 मार्च को या तो समाजवादी पाल्टी का विजय जलूस निकलेगा या फिर जनाजा ।
विजय जलूस के समय पार्टियां नहीं टूटा करती ।
जाहिर सी बात है कि चचा सिपाल जादो को बोल रहे हैं की ऐ भतीजे …….पहले 11 मार्च को तुमरी G मारेंगे और फिर तुम्हारी उस फटी हुई G में हाथ घुसेड़ के अपने हिस्से की समाजवादी पाल्टी निकाल लेंगे ।

मुलायम और सिपाल ने खुल के बगावत कर दी है ।
कल इटावा में सिविल लाइन्स में , समाजवादी पाल्टी के दफ्तर के ठीक बगल में एक नया दफ्तर खुला ……. उसपे बोर्ड लगा था ” मुलायम के लोग ” । इस दफ्तर का संचालन इटावा के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष सुनील यादव कर रहे हैं । सुनील यादव को सिपाल जादो ने जिला अध्यक्ष बनाया था जिसे अकललेस जादो ने हटा दिया ।
इटावा सदर से तीन बार के विधायक रघुराज शाक्य का टिकट भी कलेस जादो ने काट दिया । वो भी अपने समर्थकों के साथ इस ” मुलायम के लोग ” दफ्तर में बैठ रहे हैं ।

आइये अब मैनपुरी चलते हैं ।
मैनपुरी के सपा जिलाध्यक्ष माणिक चंद शाक्य ने भी अपने ( सिपाल जादो के ) 2000 समर्थकों के साथ सपा से इस्तीफा दे के मुलायम के लोग join कर ली है । इन 2000 समर्थकों में 3 जिला पंचायत सदस्य , 40 ग्राम प्रधान , 60 पूर्व प्रधान और कई block प्रमुख हैं ।

इसी तरह कल मैनपुरी में अमित जानी ने शिवपाल यादव यूथ ब्रिगेड का गठन कर दिया ।
अनिल वर्मा ने शिवपाल युवजन सभा का गठन किया ।
Ground report ये है कि इटावा , मैनपुरी , कन्नौज , एटा इत्यादि जिलों में मुलायम शिवपाल को व्यापक जनसमर्थन है । 2012 में इन जिलों में सपा ने 69 में से 55 सीटें जीत ली थीं । खबर है कि इन 67 सीटों पे मुलायम सिपाल ब्रिगेड ने समाजवादी पार्टी – कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराने के लिए कमर कस ली है और भितरघात नहीं बल्कि खुली बगावत कर रहे हैं ।
बहुत संभव है कि ये ” मुलायम के लोग ” के दफ्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में खुल जाएंगे । बताया जा रहा है कि मुलायम के ये लोग कांग्रेस को दी गयी 105 सीटों से निर्दल चुनाव लड़ेंगे और शेष 300 सीटों पे समाजवादी पाल्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ खुली बगावत कर उनके खिला प्रचार करेंगे । इसके अलावा बहुत से ” मुलायम के लोग ” उन 300 सीटों से बागी उम्मीदवार के तौर पे चुनाव भी लड़ेंगे ।

” मुलायम के लोगों ” ने धार लिया है कि इस चुनाव में अखिलेश को नेस्तनाबूद कर देना है । इस दिशा में पहला हमला सपा – Cong गठबंधन पे हमला है । इस खुली बगावत का सीधा सीधा फायदा भाजपा को होने जा रहा है ।
इसके अलावा मुस्लिम भोटर की बेचैनी भी बढ़ गयी है । सपा – cong गठबंधन पे लटकी तलवार और मुलायम सिपाल की खुली बगावत के बाद मुसलमान एक बार फिर ये सोचने को मजबूर हुआ है कि कहाँ जाए ?

बसपा में ? मुस्लिम भोट का बिखराव भी तय है ।
कांग्रेस तो कहीं की न रही । समझौते में 300 सीट अखिलेश ले गए और बाकी 103 मुलायम के ये लोग ……….

संजीव गांधी से संजय गांधी बनने की कहानी

ये नेहरू खानदान आज से नहीं , बहुत पहले से चुदक्कड़ और चिन्दी चोर रहा है ।
इनकी चुदक्कड़ी के किस्से फिर कभी ।
आज इनके चिन्दी चोर चरित्र का एक किस्सा सुन लीजिये ।
हुआ ये कि इंदिरा जी प्रधान मंत्री थीं ।
संजय गांधी उन दिनों कांग्रेस के युवराज थे ।
जैसे आजकल राहुल G हैं युवराज , वैसे ही तब थे संजय गांधी ।
पर तब उनका नाम संजय गांधी नहीं बल्कि संजीव गांधी था ।

इंदिरा को दो बेटे राजीव और संजीव …….. पुराने जमाने में माताएं Rhyming नाम रखा करती थीं । सो दोनों बेटों के नाम रखे राजीव गांधी और संजीव गांधी ……..
इंदिरा गांधी का बड़ा बेटा पायलट था Air India में । उसको राजनीति से कोई मतलब न था ।
छोटा बेटा संजीव गांधी राजनीति में था । एक नंबर का लुक्खा ……. अय्याश …… लौंडिया बाज ……
भ्रष्ट और कमीशन खोर । इस देश में जातीय राजनीति इंदिरा गांधी ने शुरू की ।
पर चोर उचक्के , गिरहकट , चिन्दी चोर , छिनैत , स्थानीय गुंडों को राजनीति में लाने का श्रेय इस संजीव गांधी को ही था ।
ये उस जमाने की बातें हैं , मने 1970 के आसपास की जब कि हमारे देश में बहुत कम कारें हुआ करती थीं । उन दिनों भारत देश में ले दे के कार के सिर्फ दो मॉडल होते थे । एक हिंदुस्तान मोटर की Ambassador और दूसरी Fiat …….. और ये भी पूरे शहर में दो चार ही होती थीं ।
मने जो शहर के बड़े रईस उद्योगपति जमींदार राजा साहब लोग होते थे उनके पास car होती थी और ये संजीव गांधी उन दिनों नयी उम्र का लौंडा होता था । नया नया जवान हुआ था । कार चलाने का शौक था । इनकी अम्मा की सरकार थी । दिल्ली में किसी की औकात न थी की संजीव गांधी को हरामीपन करने से रोक दे …… सो दिल्ली में इसका ये काम था कि जिसकी भी कार दिख जाती , ये श्रीमान जी उठा ले जाते और अपने दोस्तों के साथ उसे खूब दिल्ली की सड़कों पे दौड़ाते और जहां पेट्रोल ख़त्म हो जाता वहीं छोड़ के निकल लेते ।
सो एक बार ये London चले गए । वहाँ एक से बढ़ के एक car देखी सड़क पे ।
अब इनका मन मचलने लगा कि हमहूँ चलाऊँगा बिदेसी मोटर ……. वहाँ किसी car rental agency में गए पर चूँकि इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस न था सो उन ने दी नहीं । इनको आदत पड़ी थी दिल्ली वाली । बाहर निकले । जो पहली गाडी दिखी इन ने उठा ली और निकल लिए ।
घंटे भर दौड़ाई , और उसके बाद वहाँ की पुलिस ने इनको धर लिया …….. कार चोरी में ……. ये सिरिमान जी हवालात में औ पासपोर्ट इनका जप्त …….
तब UK में राजदूत थे कृष्ण मेनन …….
इंदिरा जी ने उनको फून किया …… ए जी सुनो …… हमार बिटवा हवालात में बंद है कार चोरी में …….ओका छुड़ाओ ……. कृष्ण मेनन एक नंबर का कमीना हरामी कांग्रेसी था और कांग्रेसी सब चोरी चकारी हेराफेरी fraud चार सौ बीसी में बहुत तेज होते हैं ……. उसने युवराज की हवालात से जमानत कराई ……. पासपोर्ट तो पुलिस ने जप्त कर लिया था और ये तो खुद्दे राजदूत था सो इसने युवराज का नाम संजीव गांधी से बदल के कर दिया संजय गांधी , 10 मिनट में नया पासपोर्ट बनाया ……. ये वो ज़माना घा जब कि अभी इमीग्रेशन क़ानून बहुत सख्त न थे और इंग्लैंड जाने को तो Visa तक न लगता था …… सो कृष्ण मेनन ने संजीव गांधी को संजय गांधी बना के फ़र्ज़ी पासपोर्ट बनाया और जो पहली flight मिली उसमे लाद के दिल्ली पहुंचा दिया ।
संजीव गांधी आज भी UK में कार चोरी में फरार शुदा मुजरिम के रूप में wanted हैं ।

आगे चल के इस संजय गांधी का कार प्रेम रंग लाया और इसने प्रण किया कि ये भारत में कार बनाने का कारखाना डालेगा और जो कार बनेगी उसका नाम होगा ” मारुती ”
संजय गांधी ने एक कार का prototype तैयार भी कराया पर वो टेस्ट में फेल हो गयी और अपने जीते जी कार बनाने का सपना संजय गांधी पूरा न कर सके और 1980 में दिल्ली के ऊपर एक छोटे हवाईजहाज में कलाबाजियाँ दिखाते एक दुर्घटना में मारे गए ।
उनकी मृत्यु के 4 साल बाद Suzuki कंपनी के साथ collaboration कर मारुती का उसका सपना साकार हुआ ………

पंजाबी समझ नहीं रहे कि वो आग से खेल रहे हैं ।

बात उन दिनों की है जब दिल्ली में अन्ना हज़ारे जनलोकपाल के लिए अनशन पे बैठे हुए थे ।
राम लीला मैदान में उनके जो समर्थक थे उनकी टोपी पे लिखा होता ” मैं भी अन्ना ”
अन्ना का वो आंदोलन कांग्रेस की सरकार के लिए नासूर बना हुआ था इसलिए हम लोगों को बहुत अच्छा लगता था । हम भी अन्ना के मुरीद हो गए ।
और हमरे पिछवाड़े में भी activism का कीड़ा नहीं बल्कि सांप है सो हम भी सपत्नीक पहुँच गए ……. सड़क पे जा खड़े हुए अन्ना के समर्थन में । उन दिनों अन्ना के चेले केजरीवाल और इसकी जो चांडाल चौकड़ी थी उनकी संस्था का नाम था IAC बोले तो India Against Corruption ……..
सो एक दिन जबकि आंदोलन अपने चरम पे था , तो हम दोनों पति पत्नी कुछ safed chart papers और water color ले के स्थीनीय Doaba college के सामने जा डटे और लगे अन्ना और केजरीवाल और AIC के समर्थन में पोस्टर बनाने ।
3 घंटे हम वहाँ रहे । बड़ा ही निराशाजनक अनुभव रहा । कॉलेज से सैकड़ों नहीं बल्कि हज़ारों लड़के लडकियां निकल रहे थे ……किसी ने हमारी तरफ देखा तक नहीं जबकि हम 20 – 25 पोस्टर बना के दीवारों पे लगा चुके थे । कॉलेज के प्राध्यापकों का एक झुण्ड भी हमारे सामने से निकल गया ……..

हमें बड़ी निराशा हुई ……. ये हाल है पंजाब के youth का ?
पंजाब के intelligentsia का ……. इतने ज्वलंत विषय जिसने पूरे देश में तहलका मचा रखा है …… जिस अन्ना केजरीवाल और AIC ने केंद्र की कांग्रेस सरकार की चूलें हिला रखी हैं उस मुद्दे के प्रति पंजाबियों का ये ठंडा response ??????? हम बेहद निराश थे ।

और उसके ठीक एक साल बाद , पूरे पंजाब में AAP और उसकी झाड़ू ही दिखती थी ।
दिल्ली के अलावा सिर्फ और सिर्फ एक प्रदेश ऐसा था जहां AAP के लिए अपार जनसमर्थन दिखा ।
सिर्फ एक साल में ऐसा क्या हुआ कि जिस पंजाब में अन्ना हज़ारे और अरविन्द केजरीवाल को कुत्ता नहीं पूछता था वही पंजाब रातों रात केजरीवाल का दीवाना क्यों हो गया ??????
इतना जनसमर्थन अचानक कहाँ से आया ?
AAP के लिए ये जन समर्थन सिर्फ पंजाब में ही क्यों आया ? देश के अन्य राज्यों में क्यों नहीं आया ?

मेरे लिए ये शोध का विषय था । मैंने चीज़ों को बड़ी बारीकी से देखना शुरू किया । वो कौन लोग हैं जो AAP ज्वाइन कर रहे हैं । कौन इनके नीति नियंता मने think tank हैं ?
Main stream media इनके बारे में क्या लिख रहा है ?
Social media में इनके मुखर समर्थक कौन लोग हैं ?

अंदर झाँकने पे मुझे बड़ी भयावह तस्वीर दिखाई दी ।
सबसे पहला बयान जिस से मैं चौकन्ना हुआ वो पंजाब पुलिस के ex DGP शशिकांत का था जो उसने पटियाला की एक जनसभा में दिया था 2013 में । उसमे उसने कहा की संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले तो एक संत एक सोशल reformer थे और उनके रहते किसी की ये औकात नहीं थी कि drugs का सेवन कर लेता ।
ये बयान पढ़ मेरे कान alsatian कुत्ते की माफ़िक़ खड़े हो गए ।
एक आपिया एक दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादी का गुणगान कर रहा है ???????
फिर मैंने पूरे घटनाक्रम को इसी एंगल से देखना शुरू किया ।
UK और Canadaa में बैठे खालिस्तानियों की Fb वाल खंगालनी शुरू की …….
देखा कि AAP को पूरा जनसमर्थन और funding तो खालिस्तानियों से आ रही है ।

AAP के जनसमर्थन को समझने के लिए आपको पहले पंजाब की Socio Economic दशा दिशा को समझना पड़ेगा …….. पंजाब दरअसल एक किस्म का उन्नत बिहार है । जैसे बिहारी दिल्ली मुम्बई सूरत और लुधियाना में आप्रवासी मजदूर बन के जीवन यापन करता है वैसे ही पंजाबी इंग्लैंड अमेरिका कनाडा यूरोप ऑस्ट्रेलिया में जा के आप्रवासी मजदूर बन के खटता है । बिहारी अपने गाँव में बैठी बाप बीवी को मनियाडर भेजता है तो पंजाबी Western Union से । पंजाबी बिहारी को हिकारत से देखता है और इनको ” साला भैया ” बोलता है , तो england अमेरिका वाले इन पंजाबियों को देसी बुलाते हैं ।
पंजाबियों को मलाल रहता है कि साले बिहारियों ने आ के पंजाब गंदा कर दिया , slums में रहते हैं , ठीक उसी तरह वहाँ अंग्रेज इनको गरियाते हैं कि साले पंजाबियों ने आ के इंग्लॅण्ड गंदा कर दिया ।
जिस मोहल्ले में बहुत ज़्यादा पंजाबी रहते हैं , अंग्रेज वहाँ रहना पसंद नहीं करते ।
कहने का मतलब ये कि बिहारी और पंजाबी दोनों मूलतः आप्रवासी मजदूरी करने वाली कौमें हैं ( बिहारी से मेरा आशय हमेशा पूर्वांचल से रहा है , मने anything beyond lucknow )
तो मामला ये है कि यहां पंजाब में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां का लड़का कहीं बिदेस में मजूरी न कर रहा हो और western Union से पैसा न भेजता हो । अब भैया जो मनियाडर भेजता है उसकी बात तो सुननी / माननी पड़ेगी न ???????
और उसकी समस्या ये है कि वो वहाँ England और Canada में खालिस्तानियों से घिरा है …….. उनके influence में है , उसे वहाँ दिन रात खालिस्तान का सपना दिखाया जाता है , गुरुद्वारों में तकरीरें सुनाई जाती हैं कि कैसे वहाँ पंजाब में सिख हिंदुओं की गुलामी कर रहे हैं और ये कि 1947 में नेहरू ने सिखों को धोखा दिया और खालिस्तान बनाने के वादे से मुकर गए । कहने का अर्थ ये कि NRI वहाँ जा के कब खालिस्तानी हो जाता है उसे पता ही नहीं चलता ।
तो 2013 में कनाडा UK में बैठे खालिस्तानियों को ये समझ आ गया कि एक ये नयी पार्टी आ गयी है जिसे पंजाब में मोहरा बनाया जा सकता है । और फिर अचानक ही रातों रात सभी NRI ( कृपया खालिस्तानी पढ़ें ) आपिये बन गए । और उनकी देखा देखी सारा पंजाब आपिया बन गया ।
आज भी आप यहां पंजाब आ के देख लीजिए ।
पंजाब का ये विस चुनाव यहां नहीं बल्कि कनाडा और UK से लड़ा जा रहा है ।
50,000 से ज़्यादा NRI ( खालिस्तानी ) छुट्टी ले के आये हुए हैं ।
वहाँ विदेश में बाकायदा विधानसभा वार चुनाव दफ्तर बाँय हुए हैं जहां बैठे volunteers यहां बैठे लोगों को फोन कर AAP को भोट देने की अपील कर रहे हैं । Fb और whatsapp पे हज़ारों हज़ारों group और pages बनाये गए हैं ।
दरअसल विदेश में बैठे खालिस्तानियों ने बहुत पहले मने 1994 – 95 में ही ये समझ लिया था कि पंजाब में कांग्रेस और अकाली – भाजपा दोनों ही उनकी दाल नहीं गलने देंगे । ऐसे में उनको केजरीवाल और इसकी AAP में एक संभावना दीखती है ।
पर एक बात तय है कि चुनाव बाद वहाँ बैठे खालिस्तानी इनसे बाकायदे इस समर्थन की कीमत वसूलेंगे ।
फिलहाल report ये है कि पंजाब के मालवा belt में AAP का जोर है ।
पिछले एक हफ्ते में इनकी स्थिति में बहुत सुधार हुआ है ।
खालिस्तानियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ।
मूर्ख पंजाबी समझ नहीं रहे कि वो आग से खेल रहे हैं ।

क्रमशः ……….

मुरादाबाद के ठठेरे की कहानी

1997 में जब की देस दुनिया में ये खबर फैली की प्रियंका गांधी सादी करने जा रही हैं तो हमारे सैदपुर में एक बा0 koऊ साहब हुआ करते थे । बड़े जमींदार थे ।
पुराने कांग्रेसी ……… वो बड़े आहत हुए ।
एक दिन उनका दर्द छलक आया ।
बोले , अरे भाई तनी देखा लोगन …… ई प्रियंकवा कौने ठठेरा से बियाह करे जात हौ ……. अपने मोहल्ला में एक से बढ़िया एक लरिका घुम्मत हउअन …….. ऊ काहें ठठेरा से बियाह करत हिय …….

जब ये खबर आयी कि प्रियंका मुरादाबाद के किसी ठठेरे से बियाह करेंगी तो मुल्क वाकई एक बार सन्न रह गया था । ठठेरा UP की एक बिरादरी होती है जो पुराने जमाने में बर्तन इत्यादि बनाया करते थे ।

उनका असली नाम Robert बढ़ेड़ा था । बढ़ेड़ा पंजाब के खत्री होते हैं ।
उनके पिता का नाम श्री राजेंद्र बढ़ेड़ा था । राजेंद्र जी का जन्म अखंड भारत के मुल्तान में हुआ था । जब 1947 में देश का विभाजन हुआ तो उनका परिवार मुरादाबाद चला आया ।
राजेंद्र जी बाढ़ेड़ा का विवाह Maureen McDonah नामक Scottish मूल की एक ब्रिटिश महिला से हुआ । ये विवाह कब कैसे किन परिस्थितियों में हुआ इसके बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है ।
बहरहाल राजेंद्र भाई बाढ़ेड़ा की Maureen से 3 संतानें हुई ।
Robert , Richard और एक लड़की Michell .
राजेंद्र जी का मुरादाबाद में brass metal यानी पीतल के बर्तनों और कलात्मक वस्तुओं का निर्यात का छोटा मोटा व्यवसाय था । परिवार के हालात बहुत अच्छे न थे और Maureen दिल्ली के एक play school में पढ़ाती थीं । न जाने किन अज्ञात सूत्रों संबंधों के कारण उनके बच्चों का दाखिला दिल्ली के British School में हो गया जिसमें उस समय देश के प्रधान मंत्री की बेटी प्रियंका पढ़ती थी ।
13 साल की प्रियंका और Michell क्लास मेट थीं और मिशेल ने ही रोबर्ट की दोस्ती प्रियंका से कराई ।
स्कूल और स्कूल के बाहर भी प्रियांका सुरक्षा कर्मियों से घिरी रहती थीं ।
शाही परिवार के बच्चों के चूँकि बहुत कम दोस्त थे लिहाजा मिशेल और robert दोनों 10 जनपथ आने जाने लगे । धीरे धीरे Robert की दोस्ती राहुल से भी हो गयी ।
सोनिया निश्चिन्त थीं कि प्रियंका की सहेली मिशेल और राहुल के दोस्त Robert हैं ।
पहली बार सोनिया के सिर पे बम तब फूटा जब एक दिन प्रियंका एक अनाथ आश्रम के बच्चों की सेवा के बहाने घर से निकली और अपनी माँ को बिना बताए Robert के घर मुरादाबाद पहुँच गयी । इधर दिल्ली में चिहाड़ मची । वापस लौटी तो पूछ ताछ हुई । IB ने सोनिया को खबर दी कि आपकी बेटी Robert से इश्क़ लड़ा रही है । जब सोनिया ने मना किया तो प्रियंका ने बगावत कर दी । और अपनी माँ से दो टूक कह दिया कि वो Robert से शादी करने जा रही हैं ।
इस खबर से congress में हड़कंम्प मच गया ।
राजनैतिक जमात में इसे ख़ुदकुशी करार दिया गया ।
प्रियंका को उंच नीच समझाने की जिम्म्मेवारी अहमद पटेल , जनार्दन द्विवेदी और मोतीलाल वोरा को दी गयी । इन सबने प्रियंका को उनके उज्जवल राजनैतिक भविष्य की दुहाई देते हुए समझाया कि किस तरह Robert एक Mr Nobody हैं , एक mismatch हैं और आगे चल के एक liability बन जाएंगे ।
पर ये कम्बख़त इश्क़ …….जब दिल आ जाए गधी पे तो परी क्या चीज़ है ।
इधर प्रियंका अड़ गयी उधर सोनिया टस से मस न होती थीं ।
इसके अलावा राजेंद्र बाढ़ेड़ा के परिवार की IB report भी माकूल न थी ।
परिवार पुराना संघी था ।
राजेंद्र जी का परिवार लंबे अरसे से , मने पाकिस्तान बनने से पहले से ही संघ के सक्रीय सदस्य था ।
इनके परिवार ने मुरादाबाद शहर की अपनी जमीन सरस्वती शिशु मंदिर के लिए दान कर दी थी और राजेंद्र जी के बड़े भाई श्री उस शिशु मंदिर के आज भी ट्रस्टी हैं ।
ऐसे में एक पुराने जनसंघी परिवार में गांधी परिवार के चश्मे चिराग का रिश्ता हो जाए , ये कांग्रेस की लीडरशिप को मंजूर न था । ऐसे में Maureen McDonagh ने न जाने ऐसी कौन सी गोटी चली और अपने ब्रिटिश मूल के Roman Catholic इतिहास का क्या पव्वा लगाया कि अचानक सोनिया गांधी मान गयी । वैसे बताया ये भी जाता है कि उन दिनों भी congress leadership ये जान चुकी थी कि राहुल गांधी बकलोल बकचोद हैं । थोड़ा बहुत चानस इस प्रियंकवा से लिया जा सकता है बशर्ते कि इसकी शादी किसी हिन्दू लीडर के परिवार में करा दी जाए । पर होइहैं वही जो राम रचि राखा ।
शादी इस शर्त पे तय हुई कि राजेंद्र बाढ़ेड़ा का परिवार गान्ही परिवार से किसी किस्म का मेलजोल रिश्तेदारी नहीं रखेगा और इनकी political powers का लाभ उठाने का कोई प्रयास नहीं करेगा ।
अंततः Feb 1997 में प्रियंका गांधी की शादी robert बाढ़ेड़ा से हो गयी ।
सोनिया गांधी को इस बाढ़ेड़ा surname से बहुत चिढ थी । और ये नाम इन्हें politically भी suit न करता था सो सबसे पहले इन ने इसे बदल के बाढ़ेड़ा से Vadra किया । यूँ भी ये परिवार नाम बदल के देश दुनिया को बेवक़ूफ़ बनाने में बहुत माहिर है ।
इस परिवार ने कब कब कैसे कैसे नाम बदल के देस को चूतिया बनाया इसपे पूरी एक पोस्ट बनती है ।

बहरहाल प्रियंकवा की सादी मुरादाबाद के ठठेरे से हो गयी ।
इस बीच Vadra परिवार को ये सख्त हिदायत थी कि वो लोग कभी 10 जनपथ में पैर नहीं रखेंगे ।
अलबत्ता वक़्त ज़रूरत पे प्रियंका गांधी अपनी ससुराल हो आती थीं ।
पर रोबर्ट ” वाड्रा ” को अपने परिवार से तआल्लुक़ रखने की इजाज़त न थी ।
गौर तलाब है कि प्रियंका से Robert की मुलाक़ात Michell ने कराई थी ।
पर अब उसी Michell का प्रवेश भी गांधी household में वर्जित हो गया था ।
फिर एक दिन Michell की एक car दुर्घटना में संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गयी , जब कि वो दिल्ली से जयपुर जा रही थीं ।
उसके चंद दिनों बाद ही एक और अजीब घटना घटी ।
दिल्ली के एक वकील अरुण भारद्वाज ने दिल्ली के दो अख़बारों में Robert Vadraa के हवाले से ये इश्तहार दिया कि मेरे मुवक्किल श्री Robert Vadra का अपने पिता श्री राजेंद्र vadra , और भाई Richard Vadra से कोई सम्बन्ध नहीं है ।

यहां तक तो ठीक था । इसके बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय से AICC के letter pad पे देश के सभी कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों , प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं कांग्रेस legislative पार्टियों को सोनिया गांधी की तरफ से एक पत्र भेजा गया जिसमें सभी को ये स्पष्ट निर्देश था कि मुरादाबाद के हमारे समधी और प्रियंका जी के जेठ जी की किसी सिफारिश पे कोई अमल न किया जाए और उन्हें किसी प्रकार के लाभ न पहुंचाए जाएं । वो बात दीगर है कि आगे चल के इन्ही congi मुख्य मंत्रियों अशोक गहलोत और भूपेंद्र हुड्डा के राज में मुरादाबादी ठठेरा देखते देखते ख़ाकपति से अरब पति व्यवसायी बन गया ।

इस घटना क्रम के कुछ ही महीनों बाद अपनी प्रियंका दीदी के जेठ जी , यानी अपने रोबर्ट जीजू के बड़े भाई Richard भाई ने पंखे से लटक के आत्महत्या कर ली ।
प्रियंका दीदी के ससुर जी , यानी रोबर्ट जीजू के पिता जी , श्री राजेंद्र भाई वाड्रा , जिनसे की robert vadra जीजू ने बाकायदा affidevit दे के संबंध विच्छेद कर लिया था , यानि कि बेटे ने बाप को बेदखल कर दिया था , वो राजेंद्र भाई गुमनामी और मुफलिसी में दिन काटने लगे ।
उनको लिवर सिरोसिस हो गया । उनका इलाज दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफ़दर जंग हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में हुआ । कुछ दिन बाद राजेंद्र वाड्रा सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज ले , दिल्ली में ही AIIMS के नज़दीक एक सस्ते से lodge के एक कमरे में पंखे से लटकते पाये गए । उनकी जेब में सरकारी अस्पतालों की दवाई का एक पुर्जा और 10 रु का एक नोट पाया गया ।
सोनिया गांधी की दिल्ली में पुलिस ने अच्छा किया कि postmortem न कराया वरना पेट में भूख और मुफलिसी के अलावा कुछ न मिलता ।
यूँ बताया जाता है कि जब पुलिस राजेंद्र वाड्रा की लाश उस lodge से ले जाने लगी तो उसके मालिक ने अपना 3 दिन का बकाया किराया सिर्फ इसलिए मुआफ़ कर दिया कि मरहूम शक़्स अपनी प्रियांका दीदी का ससुर था ।

उसी शाम दिल्ली के एक श्मशान में राजेंद्र वाड्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिसमें सिर्फ प्रियंका गांधी , सोनिया गांधी और राहुल बाबा शामिल हुए । शेष लोगों को सुरक्षा कारणों से अंदर नहीं आने दिया गया । Robert तो पहले ही बेदखल कर चुके थे ।

ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

बहुत पहिले मने 80 के दशक में जब कि राजीव गांधी PM थे अ उनके पास प्रचंड बहुमत था , तो वो अपने अनाड़ीपने अ चुतियापे में बोफोर्स तोप में घिर गए ।
उस समय ई राम जेठमलानी ने उनको बहुत हैरान किया ।
ई जेठमलनिया रोज़ाना राजीव गांधी औ कांग्रेस से 10 सवाल पूछता था जिसका कांग्रेस के पास कोई जवाब न होता । अ यूँ समझ लीजिए कि पूरी कांग्रेस जिसके 410 सांसद थे अ विपक्ष एकदम्मे गायब था , थर्राती थी इस राम जेठमलानी से …….
उन्ही दिनों की बात है , किसी बात पे बाबू चनसेखर सिंह बलिया के बागी से इस राम जेठमलानी की ठन गयी । राम जेठमलनिया उनहूँ से दस सवाल पूछ लिया ।
चनसेखर जी बोले , साला कुक्कुर लोग भोंकता रहता है ……. हम किस किस कुक्कुर का जवाब देंगे ।
जेठ मलानी नहीं माना ……..
चनसेखर जी ने अपने 10 – 5 लौंडों को बोला ……… tommy ……. शू बेटा …… पकड़ साले को ……..
और लौंडों ने राम जेठ मलानी को इसी दिल्ली में पकड़ के , सरेआम , दूरदर्शन के कैमरा के सामने मारा 5- 7 लप्पड़ …….. ज्यादा मारने लायक ऊ था नहीं …….. मने तब भी इतना ही बूढा था जितना आज है ……. मने इसकी expiry date तो कबकी निकल चुकी ।
सो लौंडों ने ज़्यादा मारा नहीं , मने सिर्फ 5 – 7 लप्पड़ मारा , पर कपड़ा ओपड़ा सब फाड़ दिए थे , मने एकदम चिन्दी चिन्दी कर दिए थे ।
इस high profile पिटाई को दूरदर्शन ने अगले दिन बहुत कायदे से कभर किया ।
आशा की जाती थी कि सुप्रीम कोर्ट का इतना बड़ा और नामी वकील , इस सरेआम दिन दहाड़े की गयी पिटाई पे बहुत हाय तौबा मचाएगा पर बुढ़वा चूं तक नहीं किया ……. उसके बाद राम जेठमलानी ऐसा पटाये कि कई साल दिल्ली में दिखाई नहीं दिया ।

मुझको अपने इन भाजपा और RSS नेताओं से बस यही शिकायत है कि ई साले सब जरुरत से जायदे मने गंडुत्व की हद तक शालीन हैं । मने होना तो ऐसा चाहिए कि किसी पत्रकार की हिम्मत ही न पड़े कोई ऐसा वैसा हल्का फुल्का सवाल पूछने की ……. मने ऐसे loaded questions जिनका आप कोई भी जवाब दें विविद होना ही होना …….. ऐसे सवाल पूछने वाले पत्रकार की शाम तक कंबल परेड करा देनी चाहिए ।
मुझे ऐसा ही एक किस्सा मोदी जी का याद आता है ……. जब CM थे गुजरात में ।
किसी function में से बाहर निकलते एक पत्रकार ने उनसे ऐसा ही एक loaded question पूछ लिया …….. मोदी ने कुछ नहीं कहा ……. सिर्फ उसको ताकते रहे …….. यही कोई 10 second ……. फिर बोले क्यों बेटा ? मिल गया जवाब ?
जिस स्कूल में तुम अडमीसन लिए हो न , हम उसके भीसी रिटायर हुआ हूँ ……..
देश के बड़े से बड़े पत्रकार मने वो जो फूल के अंडुआ हुए हैं न , उनकी भी हिम्मत नहीं होती कि मोदी और अमित शाह से कोई हल्का फुल्का सवाल पूछ ले …….. मने ऐसा आँख गिरोर के ताकते हैं कि पूछने वाले की फट के हाथ में आ जाए ।

कल मनमोहन वैद्य से loaded प्रश्न पूछा गया और वैद्य जी ने संघी शालीनता से उसका जवाब दिया जबकि उनको चाहिए था कि सामने आ रहे चुनावों के मद्देनजर उसे खांटी भोजपुरी में बनरसिया जवाब देते …….

ये ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

कहावत है कि बिल्ली को सपने में भी छीछड़े ही दिखते हैं ।
बिल्ली बड़ा नहीं सोच सकती ।
कल एक मित्र कह रहे थे कि भाजपा ने हमारी बिरादरी को आज तक दिया ही क्या है जो ये वहाँ जूते खाने चले जाते हैं ।
जब से भाजपा की लिस्ट आयी है , कुछ लोग चुटकी ले रहे हैं कि भाजपा ने दद्दा को टिकट नहीं दी । दद्दा ने पार्टी की इतनी सेवा की पर अहसान फरामोश भाजपा ने टिकट नहीं दी ।
छीछड़ों के सपने ऐसे ही देखे जाते हैं ।

लोगों को , समूहों को , वर्गों को , जातियों को अपने वोट की कीमत चाहिए ।
हमारी जात ने पार्टी को भोट दिया तो बदले में पार्टी की सरकार ने हमारी जाति को क्या दिया ?
कोई सरकार किसी जाति को अधिक से अधिक क्या दे सकती है ?
अधिक से अधिक आरक्षण ?

मुझे इस पार्टी कार्यकर्ता नामक शब्द से बहुत चिढ है ।
ये कार्यकर्ता आखिर होता क्या है ? क्या करता है ?
जब कोई नेता परेता आता है तो कार्यकर्ता उसी नेता से प्राप्त पैसों से एक दो गाड़ी ठलुए गाँव से भर के रैली में पहुंचा देता है , नेता ने जो पैसा दिया था उसमें से आधा बचा लेता है । सरकार अपनी हो तो थाने और तहसील की दलाली करता है । सड़क पे दो कुत्ते लड़ पड़े हो तो किसी एक के पक्ष में थाने में जा के पैरवी करता है , अनर्गल दबाव डालता है , पुलिस को काम नहीं करने देता , न्याय नहीं करने देता , पुलिस न सुने तो नेता जी से चुगली करो , कान भरो …….. थानेदार ने मेरा पालतू कुत्ता बनने से मना कर दिया ……. गौरतलब है कि ऐसे कार्यकर्ताओं की सेवा निःशुल्क नहीं होती बल्कि वो इसी थाने तहसील की दलाली से ही जीते खाते हैं । इसे कहते हैं जनता के टुकड़ों पे पलना , उसे नोच के खाना ।
थोड़ा बड़ा कार्यकर्ता , जो नेता जी को manpower और money power के साथ muscle power भी उपलब्ध कराता है , वो सरकार आने पे ठेकेदारी करता है । सरकार द्वारा किये गए सभी निर्माण और विकास कार्यों में उसे ठेकेदारी में हिस्सा चाहिए । वो पार्टी को दी गयी अपनी ” सेवा ” की पूरी कीमत वसूलना चाहता है ।
एक आम वोटर अपने वोट की कीमत 100 – 50 रु या एक पव्वा दारू मुर्गा नहीं तो एक सूती साड़ी लगाता है ।
बिकाऊ एक अकेला वोटर भी है , पूरी जाति बिकने को तैयार बैठी है । सवाल है , बदले में क्या देगी पार्टी और उसकी सरकार ?
बिल्ली की समस्या ये कि वो सबको बिल्ली ही समझती है ।
मैं उदयन चलाता हूँ । गाँव में जब उदयन शुरू हुआ तो पहले तो लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है ?
आखिर मुसहरों को घी क्यों पिलाया जा रहा है ?
पहला निष्कर्ष जो लोगों ने निकाला वो ये कि अजीत सिंह परधानी का चुनाव लड़ेंगे । गाँव की गुणा गणित में ये मान लिया गया कि एक प्रत्याशी हमारे परिवार का अवश्य होगा ।
परधानी का चुनाव आया और निकल गया । साल भर कंबल , रजाई , तोसक तकिया , कपड़ा जूता बांटा था , सो लोग समझते थे कि अजीत सिंह मुसहरों का 200 वोट तो एक मुश्त दिलवा ही देंगे ।
इधर अजीत सिंह परधानी के चुनाव से 20 दिन पहिले गाँव छोड़ जालंधर चले गए और जब बिजय जलूस निकल गया और खस्सी कट के बँट गया तब लौटे ।
हमने किसी से नहीं कहा कि फलनवा को भोट देना ।
लोग अब फिर कयास लगा रहे हैं कि अजीत सिंह आखिर क्यों , किस लालच में मुसहरों को घी पिया रहे हैं । उदयन के पीछे सचमुच इस समुदाय के कल्याण की भावना छिपी है यहाँ तक लोग सोच ही नहीं पाते ।
अजीत सिंह दिन रात एक किये हैं सोशल मीडिया पे , मोदी और भाजपा के पक्ष में ……..
किस लालच में ? क्या कीमत वसूलेंगे ? कोई कीमत तो सोची ही होगी ?
निस्वार्थ निर्विकार भाव से भी कोई काम किया जा सकता है , ये लोग सोच ही नहीं पाते ।
खस्सी कटा है तो ज़्यादा नहीं तो छीछड़े तो हमारे हिस्से आने ही चाहिए ???????

अबे छोडो यार छीछड़ों को ……… पूरे बकरे की सोचो ।
हर व्यक्ति अपनी सेवा की कीमत चाहता है ।
वो कर्त्तव्य समझ के कोई काम नहीं करना चाहता ।
व्यक्ति को समाज से , सरकार से और राष्ट्र से अपना हिस्सा चाहिए ।
My pound of flesh ……. Flesh न मिले तो छीछड़े ही सही ।

जैसी हमारी नीयत , मने इस राष्ट्र की collective नीयत , वैसी ही हमारी सरकारों की ।
आखिर सरकार भी तो हमारे ही चरित्र का reflection है ……….
सरकार जानती है कि ये समाज छीछड़े ही चाहता है । इसलिए उसने आज तक हमें छछड़ों पे ही पाला । नारों का slogans का lollypop चुसाती रही ।
एक ईमानदार सरकार अगर आ गयी और उसने कहा कि हम विदेशों में जमा काला धन ले के आएंगे , तो समाज ने तुरंत इसे लपक लिया …….. मेरे हिस्से के छीछड़े ? मेरे 15 लाख मेरे खाते में कब आएंगे ?
छीछड़े बाज आदमी अपने खाते में चाहता है ।
जिसकी निगाह पूरे बकरे पे है वो कहेगा , ठीक है , लाओ कालाधन और उसे राष्ट्र के समग्र विकास में लगाओ …….. मुझे मेरे हिस्से का विकास चाहिए …….
छीछड़े नहीं ।

इसलिए मित्रों , MLA का टिकट मेरे लिए तो छीछड़े से ज़्यादा कुछ नहीं ।
UP का चुनाव सिर पे है । निजी फायदे , निजी स्वार्थ छोड़ समाज के समग्र विकास के लिए भोट कीजिये ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

बाबरी ढांचा भाजपा ने गिराया ।
ऊपी में तब सरकार भाजपा की थी ।
CM कल्याण सिंह थे पर UP के मुसलमानों ने कांग्रेस को ऐसा लतिआया , ऐसा लतिआया कि आज तक उठ नहीं पायी ।

1984 में कांग्रेस ने स्वर्ण मंदिर में घुस के पहले सिखों का कत्ले आम किया और फिर दिल्ली में इंदिरा की हत्या के बाद कांग्रेसी हत्यारों ने कांग्रेस की केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कत्ले आम में 6000 सिखों को ज़िंदा जला डाला ………

इसके बावजूद ये सोच के आश्चर्य होता है कि पंजाब के सिख आज भी कांग्रेस के लिए भोट करते हैं ????????
जिस परिवार ने स्वर्ण मंदिर की बेइज़्ज़ती की और जिस परिवार ने दिल्ली में 6000 सिखों के गले में जलते हुए टायर डाल के ज़िंदा जलाया , उसी नेहरू गांधी परिवार का पिछवाड़ा चाट रहे हैं सरदार अमरेंद्र सिंह और सरदार नवजोत सिद्धू ……..
लानत है ऐसे सिख पे जो कहता है कि कांग्रेस मेरी माँ है ……. कांग्रेस मेरा असली घर है ???????
सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?

अरे ओ साम्भा …….
अखिलेसवा तो बोलता था कि लखनऊ वाले शान से चलेंगे अब सम्मान से …….
अ टीभी पे विज्ञापन देखा देखा के कान पका दिया ……..
अ अभी पुष्कर दद्दा बता रहे थे कि अभी तो लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे में बहुत जायदे काम बाकी है । अभी कम से कम दुइ साल लगेगा expressway को पूरा होने में ……..
करे साम्भा ?
भइंस आज धनाई है ……. अभी गाभिन हुई कि नहीं हुई ई महिन्ना भर बाद पता चलेगा ……. अ ई सार जादो जी इन्नर खाये के न्योता पूरे गाँव को अबहियें बाँट दिए बे ……..

अबे ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?
अभी लखनऊ आगरा एस्प्रेस वे का चौथा महिन्ना चल रहा है ।
अभी तो पेटवो नहीं फूला है ।
अ ई ससुरा दाई बुलवा के पानी गर्म करवा रहा है ।

मैंने जीवन में पहली बार देखा है कि आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है ।
अपनी पीठ खुद थपथपाई जा रही है ।
जादो जी कब तक चूतिया बना के भोट लोगे ?
Public को और कितना चूतिया बनाओगे दोनों बाप बेटा ?

BiMaRU tag वाले 4 राज्य हुआ करते थे देश में । UP बिहार MP और राजस्थान ।
इन चार में से दो तुमसे मीलों आगे निकल चुके हैं । बिहार पिछले 8 – 10 साल में तुम्हारे बराबर आन खड़ा हुआ है ।
एक ज़माना था कि MP एक बेहद backward state था । वहां की दशा देख रोना आता था ।
आज शिवराज का MP देख के जी खुश हो जाता है ।
MP के state highway 4 lane हैं …… दूर दराज के गाँवों में 24 × 7 बिजली आती है ।
उद्योग धंदे लग रहे हैं । क़ानून बेवस्था दुरुस्त है । लोगों का जीवन स्तर सुधर रहा है । रोज़गार के लिए लोगों का पलायन रुक गया है ।
इसके विपरीत UP की बेहाली का बयान नहीं किया जा सकता ।

ये एक स्थापित सत्य है कि जहां भी , जिन राज्यों में भाजपा की सरकार रही है वहाँ विकास हुआ है और लोगों का जीवन स्तर सुधरा है ।

UP का कल्याण सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही कर सकती है ।
ये बात UP वालों को समझ लेनी चाहिए ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

पूर्वांचल में बनारस का पडोसी जिला है चंदौली ।
इसे पूरब का Rice bowl कहते हैं । इस से सटे 4 – 5 जिले जैसे कि वाराणसी , गाज़ीपुर , जौनपुर , आज़मगढ़ , मिर्ज़ापुर , भदोही और उधर बिहार के कुछ जिले , इनमे दुनिया का सबसे बेहतरीन धान उगाया जाता है ।
आम तौर पे शहरी लोग चावल की सिर्फ एक variety जानते हैं । बासमती ……. जो अपने स्वाद और लंबे दाने के लिए पसंद किया जाता है और 70 से 150 रु किलो तक में बिकता है । इसके महंगे बिकने का एक कारण तो ये होता है कि इसकी उपज अन्य vatieties से कम होती है ।
पर पूर्वांचल के इन जिलों में कुछ स्थानीय varieties होती हैं , जिनकी उपज भी भरपूर है , मने bumper crop होती है , और स्वाद गुण में बासमती के बाप हैं । स्थानीय बाजार में इन किस्मों की कीमत 20 से 25 रु किलो तक होती है । इनमे ख़ास कर सोनम , मंसूरी ( इसकी 3 varieties हैं , नाटी , मंझली और साम्भा मंसूरी ) , धनरेखा इत्यादि । इसके अलावा एक किस्म है जीरा 32 …….. इसका दाना बहुत छोटा और महीन होता है , एकदम जीरे जैसा । ये है असल में बासमती का बाप । स्थानीय बाजार में 45 रु किलो बिकता है । ऐसी 20 अन्य varieties और हैं जो यहाँ होती हैं ……… और bumper होती हैं ।
ऐसा ही एक rice bowl राजस्थान में भी है । हाड़ौती संभाग में कोटा , बूंदी जिले में । वहाँ भी दुनिया का बेहतरीन बासमती होता है । बताया जाता है कि कोटा बूंदी जिले में 100 से ज़्यादा अत्याधुनिक विशाल Rice Mills और shellers हैं जो इस धान को process कर market में उतरते हैं । आज कोटा बूंदी का बासमती पूरी दुनिया में अपनी धाक मचा रहा है । समूचे Europe , अमेरिका और Middle east में इसकी जबरदस्त मांग है ।

पर स्वाद और उपज के मामले में चंदौली belt का धान कोटा बूंदी से 21 नहीं बल्कि 25 है ।
मने चंदौली की मिट्टी पानी और जलवायु में उपजा धान कोटा बूंदी से लाख दर्जे बेहतर है ………

अब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से एक सवाल ……… अखिलेश जी , चंदौली और इसके आस पास के जिलों में कितनी rice mills हैं ?
आपके 5 साल के शासन काल में चंदौली के इर्द गिर्द कितनी नयी rice mills लगी ?
आपकी सरकार ने चंदौली belt की इन बेहतरीन और इतनी सस्ती मने 20 – 22 रु किलो बिकने वाली varieties को देश भर में promote कर लोकप्रिय बनाने के लिए क्या काम किया ?

वाराणसी मंडल और इसके लगते जिले , हम यहां दुनिया का सबसे स्वादिष्ट दूध पैदा करते हैं …….. जी हां …….. बनारस की मिठाई का स्वाद यहां के दूध और मावे की मिठास और स्वाद से है …….. गाँव के dairy farmer की समस्या है कि उसका सुबह का दूध तो बिक जाता है पर शाम का नहीं बिकता …….. ऊपर से दूध उत्पादन तो अहीरों का मुख्य पेशा है ?
अखिलेश जी , आप बताएँगे कि आपकी सरकार ने पिछले 5 साल में कितने milk processing प्लांट लगाए पूर्वांचल में ? कितने milk collection centers खोले ? कितने chilling plants लगाए ?

अखिलेश जी , UP के यादव तो आपके बंधुआ भोटर हैं न ? Dairy farming बढ़ेगी तो सीधे सीधे उन्हें फायदा होगा ……. आपने पिछले 5 साल में dairy उद्योग के लिए क्या किया ?
बीकानेर जैसा सूखा पानी को तरसता जिला पूरे देश में दूध supply कर सकता है तो पूर्वांचल तो स्वर्ग है हुज़ूर dairy farming के लिए ……. कितनी ग्रोथ हुई पिछले 5 साल में milk production में ?
कितने नए Dairy farms खुले ? कितने farmers ने अपने farms upgrade किये ? आपने कितना ऋण उपलब्ध कराया डेरी फार्मिंग के लिए ?
पूर्वांचल में कितनी sugar mills नयी लगीं ?
जो बंद पड़ी थीं उनमे से कितनी चालू हुई ?
कितने नए cold स्टोर बनाये आपने ?
कितनी नहरें खुदी ?
कौन सी नयी सिचाई परियोजना ले के आये आप ?
कितने नए thermal power projects आपने लगाए प्रदेश में , या मंजूरी दी ……..
नितिन गडकरी के NH छोड़ पूरे पूर्वांचल की कोई एक सड़क बता दीजिए , जो आपने बनवाना या चौड़ा करना तो दूर , जिसका आपने patch work ही करा दिया हो ?
कोई एक सड़क ? कोई एक state हाईवे ?

कोई एक नया उद्योग जो लगा हो पूर्वांचल के इन 40 जिलों में ???????
मिर्ज़ापुर भदोही में दुनिया का सबसे बेहतरीन कालीन बनता है घर घर ……… जिसका सत्यानाश कर मारा कैलाश सत्यार्थी ने ……… उसके revival के लिए क्या किया आपने ?
वाराणसी और मऊ के साडी बुनकर ( जिनमे अधिकाँश मुसलमान है ) उनके लिए क्या किया ?

कोई एक स्कूल कॉलेज बताइये जो आपकी सरकार ने बनवाया हो पिछले 5 साल में ?

किसका विकास किये हो भैया ?
कहाँ किये हो ?

गायत्री प्रजापति रोज़ाना 4 करोड़ रु देता था तुमरी मने प्रतीक गुप्ता जादो की मम्मी को …….. सिर्फ साधना गुप्ता जादो और उनके लौंडे का विकास हुआ है पिछले 5 साल में ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..