वेश्या चाहती है कि दुनिया की हर औरत वेश्या बना दी जाए

वेश्या की एक समस्या होती है ।
मोहल्ले में इज्ज़त ……. मान सम्मान ।
समाज में सिर उठा के नहीं चल सकती ।
उसका मुकाबला रहता है समाज की इज्ज़तदार औरतों से । अगर ये न होती तो उसे कोई समस्या न होती । वेश्याओं के जब मोहल्ले बस जाते हैं ……. नगर के नगर ……. तब किसी वेश्या को कोई दिक्कत नहीं होती ……
जैसे Bangkok ……… सुना है कि पूरा देश ही वेश्याओं का है । वहाँ तो सुना है कि वेश्या न होना समस्या बन जाता है ……..
बहरहाल ……. भारत जैसे देश में , वेश्या अपनी सभी समस्याओं का एक ही हल खोज पाती है । पूरे शहर की हर औरत को वेश्या बना दो …….. सभी सुहागनों , सभी ब्याहताएं वेश्या घोषित कर दो …….

आज राहुल गाँधी ने यही किया । खुद अपनी माँ के साथ National Herald के केस में 5000 करोड़ की धोखाधड़ी गबन भ्रष्टाचार के केस में जमानत पे है …… 10 साल तक जिस सरकार के unconstitutional सुप्रीमो रहे वो 12 लाख करोड़ रु के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी है ……. Augusta Wasteland केस में इटली की सर्वोच्च अदालत में रिश्वत लेने के आरोप सिद्ध हुए हैं …….. वाहे वेश्या पुत्र राहुल गाँधी आज नरेन्द्र मोदी पे भ्रष्टाचार के झूठे फर्जी तथ्यहीन आरोप लगाते देखे गए ।
नोटबंदी को 8 लाख करोड़ का भ्रष्टाचार बताते फिर रहे हैं ।

वेश्या पुत्र चाहता है कि समाज में हर कोई वेश्या हो जाए जिस से कि उसके परिवार की कालिख न दिखे ।

 

नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

Ford motors के मालिक Henry Ford निपट अंगूठा टेक अनपढ़ थे । जब वो अपनी सफलता के शिखर पे थे तो एक स्थानीय अखबार ने अपने एक लेख में उनको अनपढ़ लिख दिया । Ford को ये बड़ा नागवार गुजरा और उन्होंने उस अखबार पे मानहानि का मुकद्दमा ठोक दिया ।
सुनवाई शुरू हुई । Ford के वकील ने अखबार पे अपना आरोप दोहराया । आपने Mr Ford को अनपढ़ कहा ? सम्पादक बोला , हाँ कहा ……. और ठीक ही तो कहा …… अनपढ़ ही तो हैं Mr Ford . बुलाओ कटघरे में ……. अभी दो मिनट में सिद्ध कर देंगे कि अनपढ़ हैं ।
Ford कटघरे में आये तो सम्पादक ने उनसे किताबी सामान्य ज्ञान मने GK के कुछ सवाल पूछे । जाहिर सी बात है उनमे से एक का भी जवाब Ford के पास न था । सम्पादक ने जज से कहा …… अब और क्या प्रमाण चाहिए ?
Ford ने जवाब दिया ……. जज साहब ये माना कि मुझे इन सवालों के जवाब नहीं आते । ऐसे भी बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब इन सम्पादक महोदय को नहीं पता होंगे ।
पर मुझे हे पता है कि इन सवालों के जवाब कहाँ मिलेंगे ? कौन देगा इनका जवाब ?किस सवाल को कैसे हल करना है या करवाना है ……. मुझे ये पता है । मैं उन आदमियों को जानता हूँ जिन्हें इन सवालों के जवाब मालूम है । यदि आप आज्ञा दें तो मैं अभी एक मिनट में इन सभी सवालों के जवाब देने वालों की फ़ौज खड़ी कर सकता हूँ ।
मुझे सवालों के जवाब खोजना आता है ।
अपनी जिंदगी का तो शुरू से ही एक फलसफा रहा ।
समस्याओं का रोना मत रोओ । समाधान खोजो ।
Don’t discuss the problems . Find Solutions .
समस्याओं का क्या है ? वो तो लगी रहेंगी ।
सवाल पे focus मत करो । अपनी सारी ऊर्जा उसका हल खोजने में लगाओ ।
एक progressive समाज यही करता है । उस समाज के leaders सवालों और समस्याओं पे अपनी ऊर्जा और समय नष्ट नहीं करते बल्कि समाधान खोजने में करते हैं ।
माना कि नोटबंदी ने सवाल खड़े किये ……. समस्याएं पैदा की ……
8 Nov के बाद से हमारे leaders , हमारी press , हमारे institutions सिर्फ इस से उत्पन्न समस्याओं का रोना रो रहे हैं ……… हाय मर गए …… cash नहीं है ……. नेता और प्रेस सिर्फ और सिर्फ bank और ATM की लाइन में खड़े लोगों के कष्ट दिखा सुना रहे हैं ……. कोई ये नहीं सुझा रहा कि आखिर हल क्या है । समस्या का समाधान क्या है ?
विकल्प क्या हैं ?
cash अगर नहीं है तो कैसे survive करें ?
कैसे काम चलायें ?
cashless या less cash कैसे हुआ जाए ?

TV का पत्रकार लाइन में खड़े आदमी से पूछता है कब से खड़े हो ? कितने दिन से खड़े हो ? कितना कष्ट है ?
मैं पत्रकार होता तो पूछता …….. यहाँ क्यों खड़े हो ?
क्यों चाहिए cash ?
चेक से काम क्यों नहीं करते ?
लाओ अपना फोन दो , मैं सिखाऊँ कैसे करते हैं Net banking और Mobile बैंकिंग ……… cash अगर नहीं है तो विकल्प क्या हैं ? शिक्षा और समाचार माध्यमों को इसपे focus करना चाहिए । leaders को इसपे focus करना चाहिए ।
पर इसके विपरीत वो देश की जनता को ये समझाने में लगे हैं कि हम क्यों खोजें समाधान ?

आखिर ये समाधान हमपे क्यों थोपे जा रहे हैं ?
हम अपने पुराने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ क्यों अपनाएं नयी तकनीक ?
तुम सिर्फ cash दो ……. हमको नहीं चाहिए तुम्हारी नयी तकनीक ……
आज देश की विपक्षी पार्टियां लोगों को भड़का रही हैं …. विद्रोह कर दो ……. दंगा फसाद करो cash के लिए …….. मत होवो cashless या less cash …….. net banking और mobile banking मने समाधान के नुक्सान गिनाये जा रहे हैं ……. खतरे गिनाये जा रहे हैं ……… मोबाइल बैंकिंग को कुछ कम्पनियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया जा रहा है ।

नोट बंदी भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है ……… भविष्य में एक उन्नत भारत का रास्ता इसी नोटबंदी से निकलेगा ……. इसे एक संकट के नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख के इसका समाधान खोजना चाहिए युद्ध स्तर पे ।
नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

हे मोदी ……. जियो और जीने दो , खाओ और खाने दो

मोदी जी , कायकू बावले हुए जा रिये हो …….
भैन्चो …… न खुद चैन से सोते हो न पब्लिक को सोने देते हो ?
भैन्चो …… जीना हराम कर दिया है लोगों का ……. 18 से 20 घंटे काम करते हो …… खुद को तो नींद आती नहीं ……. दूसरों को तो सोने दो …….
ठीक यही प्रॉब्लम हमारे बाप की थी । न खुद कभी सोया 4 बजे के बाद और न हमको सोने दिया ……. मने सोता हुआ आदमी तो उनसे बर्दाश्त ही न होता था …….
ये सनकी बुड्ढों के साथ यही प्रोब्लम होती है ।
न सोऊँगा न सोने दूंगा ।
न खाउंगा न खाने दूंगा ।
12 बजे सोते हो सुबह 5 बजे उठ जाते हो ।
5 से 6 योग और साढ़े 6 बजे टेबल पे ?
अबे एकाक घंटा आलोम बिलोम कपाल भाति फालतू कर लिया करो …..
7 बजे अफसरों को फून करके पूछते हो disturb तो नहीं किया ?

आधी दुनिया घूम के आ जाते हो फिर भी Jet Lag नहीं होता ?
अबे तुम्हारे बीबी बच्चे नहीं है ……. न सही …… दूसरों के तो हैं ?
कायकू गरीब मार कर रिये हो यार …….
खुद के भाई भतीजे बहन भांजे तो मुफलिसी में जी रहे …….. सगी भतीजी गुजरात में शिक्षा मित्र लगी है सिर्फ 5500 रुपल्ली पे …….. लानत है ऐसे चचा पे …….. हमारे इदर जादो पलिवार की भतीजी होती तो अब तक राज्यसभा में होती या फिर किसी गायत्री परसाद से डेली का 5 – 7 करोड़ का हिसाब लेती ……. हवाई जहाज मने राज्य सरकार के पिलेन से जूता चप्पल सैंडिल और पर्स मंगवाती …….. उसका बी 200 करोड़ का बँगला होता अहमदाबाद सूरत में ……. अपने भी फ़कीर रहे पूरे खानदान को भी फ़कीर बना के रख छोड़े ?
और ये कायकू मरे जा रहे हो ……. डाकुओं का देश है ये …….. अबे किस किस अंगुलिमाल को संत बनाओगे ????? और सुनो ……. सिर्फ तुम्हारे राम बन जाने से मुल्क में राम राज नहीं आ जाएगा ……. जिस देश में सब रावण हों वहाँ अकेला राम क्या करेगा …….. और रावणों के मुल्क में राम राज लाने की ऐसी ज़रूरत भी क्या है ?
जहां हर आदमी रावण का उपासक हो वहाँ राम राज भला क्यों ?
अबे तुमने अकेले देस सुधारने का ठेका लिया है का ?
अकेले पिले पड़े हो ? किस किस को सुधारोगे ? किस किस का जिम्मा लोगे ……
सब तो उन्ही से मिले हैं …… उन्हीं के गुलाम ……. उन्हीं की चाकरी कर रहे …… क्या bank वाले और क्या RBI वाले ? क्या मजदूर क्या गरीब …… सब उन्हीं के लिए तो लाइन में लगे खड़े ……. पहले उनके नोट बदलवाते रहे सिर्फ 300 रु दिहाड़ी पे ……. फिर उनके ढाई लाख अपने खाते में डलवा दिए …… और अब रोजाना ATM के सामने खड़े निकलवा के दे रहे हैं …….
किसके लिए मरे जा रहे हो मोदी ?
इन्ही बिके हुए लोगों के लिए …….
अबे तुम क्या इकलौते PM हुए हो इस देस के ?
तुमसे पहले बीसियों हुए यार …… देखा किसी को इस तरह चिहाड़ मचाते ? अबे सब खाए खेले मस्त रहे …….. और एक तुम हो कि मरे जा रहे हो ……
अबे जैसे सबने आसान रास्ता अपनाया ……. तुम भी अपनाओ ……. जाओ कुछ दिन ……. गोवा टहल आओ ……. कोई सहेली बनाओ ……. जाओ फिजी बाली …… कहीं होनोलुलु में धूप सेक आओ …… बिटामिन D मिलता है सरीर को ……. बहुत दिन धूप न लगे तो हड्डी कमजोर पड़ जाती बतावें …… देखते नही हो अपने राहुल बाबा की हड्डी केतनी मजबूत है …… अबे जाओ तनिक मालिस ओलिस करवाय आओ तुम बी ……. एकाक ठो कविता कहानी लिखना उहाँ ……. इहाँ साले इन छुटभैये नेताओं के साथ अन्ताक्सरी खेल रहे रहे हो ?
जाओ उहाँ …… स्विट्ज़र लैंड ……. एकाक खाता तुम भी खुलवा ल्यो …… बुढापा चैन से कटेगा …….
हे मोदी ……. जियो और जीने दो
खाओ और खाने दो

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

बड़ी चर्चा है कि नोटबंदी की वजह से ये GDP गिर जायेगी ।
अपने सरदार मौन मोहन सिंह जी उस दिन संसद में उवाच रहे थे कि दरअसल ये नोटबंदी मोदी सरकार की एक सुनियोजित लूट है जिसमे देस की GDP 2% तक गिर जायेगी । वैसे सरदार जी ये बताने से चूक गए कि उनकी सरकार ने अटल जी से विरासत में मिली 8% से ऊपर की GDP को किस सुनियोजित लूट के तहत 4 % तक ले आये ।
बहरहाल ……. नोट बंदी से GDP गिरने की संभावना तो पैदा हो ही गयी है ।
तो मैंने एक वामपंथी मित्र से सवाल किया कि मेरे दोनों लौंडे इस महीने अगर नोटबंदी के कारण 1800 की jeans और 3500 रु का Nike Reebock का जूता न खरीदें तो मेरे 5300 रु बच गए …… मैं सीधे सीधे 5300 रु से अमीर हो गया तो मुल्क कैसे गरीब हो गया ……. मेरे कू ये समझाओ ……
मेरे उन झामपंथी मित्र ने कुछ यूँ समझाया कि हे दद्दे ……. ये GDP दरअसल बड़ी कुत्ती चीज़ है ……. इसको कुछ इस तरह से समझो कि मान लो ये पेड़ जिसके नीचे तुम बैठे हो …… ये देखो कितनी शीतल छाया है इसकी …… कितना सुख देता है …… पेड़ से ही जल है – जीवन है ।
पर ये पेड़ GDP के किसी काम का नहीं । ये हराभरा लहलहाता पेड़ जो दिन रात बढ़ रहा है , फल फूल रहा है देश की GDP में कोई वृद्धि नहीं कर रहा ।
GDP तो भैया तब बढ़ेगी जब इसे काट दोगे । ये कटेगा तो सबसे पहले इस से लकडहारा जो कुल्हाड़ी चलाएगा वो कमाएगा । फिर इसकी छंटाई होगी । पतली लकडियाँ जलावन में चली जायेंगी और मोटी आरा मशीन पे …… इस से आरा मशीन वाला कमाएगा , लकड़ी की टाल वाला कमाएगा ……. कोई trolly वाला कमाएगा …… 4 मजदूर जो लादे उतारेंगे वो कमाएंगे ……. फिर आरे पे चीर के लकड़ी किसी बढई के पास जायेगी तो वो उसका furniture बना के कमाएगा …… फर्नीचर बनेगा तो उसमे फेविकोल कील sunmica लगेगा ……. वार्निश paint होगा ……. फिर उस furniture को कोई दुकानदार बेच के कमाएगा ……. सब लोग मालामाल हो जायेंगे ……. इस तरह देश की GDP बढती है ……. देश की GDP बढाने के लिए इस पेड़ को कुर्बानी तो देनी ही होगी …….

देश तभी बढेगा जब तुमरे लौंडे Lewis की jeans के नीचे reebok का 8500 का जूता पहनेंगे …….. अगर तुम साले देश द्रोही …….. शर्म नहीं आती ……. लौंडो को रोजाना मने करते हो कि jeans और जूते पे फालतू खर्चा न किया करें ।
यदि आप सच्चे देश भक्त हैं तो अपनी बीबी को रेस्ट दीजिये और खाना महंगे Restaurant से मंगा के खाइये ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।

मोदी जी एक किस्सा सुनाया करते थे 2014 से पहले ।
तब जबकि वो गुजरात के CM थे ।
गुजरात सरकार हर वर्ष एक नया कार्यक्रम हाथ में ले के उसपे युद्ध स्तर पे काम करती थी ।
तो एक साल गुजरात ने निर्णय लिया कि इस साल हम शहरी विकास वर्ष मनाएंगे ।
मने गुजरात के शहरों का काया कल्प करेंगे ।
municipal corporations को सुधारेंगे । शहर साफ़ करेंगे । कूदा कचरा निस्तारण ….. यातायात ….. अतिक्रमण हटायेंगे ।
सरकारी घोषणा हो गयी । notification जारी हो गयी ……. करीब 15 दिन बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भागे भागे आये । बोले हुज़ूर गलती हो गयी …….
क्यों ? क्या हुआ ?
हुज़ूर इस साल के अंत में पूरे गुजरात में corporations और स्थानीय निकायों के चुनाव हैं ।
आप सड़कों से अतिक्रमण हटाने जा रहे हैं ……. पूरे प्रदेश में हज़ारों नहीं लाखों लोग प्रभावित होंगे …… विस्थापित होंगे ……. सालों से सड़कों पे काबिज लोग जब हटाये जायेंगे तो बवाल करेंगे …… उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी ……. वोटर नाराज होगा ……. नगर निगम चुनाव में सूपड़ा साफ़ हो जाएगा …….
मोदी जी ने कहा , ये सब तो पहले सोचना था । अब तो तीर निकल गया तरकश से …… अब जाओ और public को समझाओ कि यदि सड़क चौड़ी होगी तो आपका ही फायदा है …….
नगर साफ़ सुथरे होंगे तो आपका ही फायदा है ……..
मोदी संकट को अवसर में बदलने में माहिर हैं ।
उन्होंने जी जान लगा दी । सडकों से अतिक्रमण हटाये गए । अकेले अहमदाबाद में ही सड़कों पे बने सैकड़ों मंदिर मस्जिद पीर मजार तोड़े गए ……. बहुत हाय तौबा मची …… सडकें खाली कराई गयी …… शहरों में सैकड़ों Fly over बनने शुरू हुए ……. द्रुत यातायात के लिए rapid transport lane बनी ……. 6 महीने में यातायात दुरुस्त हो गया ……. शहरियों को पहली बार अहसास हुआ कि हमारे शहर की सड़क इतनी चौड़ी …. साल बीतते बीतते शहर चम् चम् चमकने लगे …….
जनता बेवक़ूफ़ नहीं ……. अपना भला बुरा समझती है ……..
उस साल हुए स्थानीय निकायों और कारपोरेशन चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया …… खाता तक न खुला …….

जब से नोट बंदी हुई उसके बाद जितने भी चुनाव या उपचुनाव हुए देश भर में ……. भाजपा जीती है ।
आज चंडीगढ़ भी जीत लिया ।
जनता अपना भला बुरा सब जानती है ।
मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।
पंजाब की तस्वीर धीरे धीरे साफ़ हो रही है ।

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..

एकदा जम्बू द्वीपे भारत खंडे बंगाल राज्ये एक औरत रहती थी ।
एक दिन एक गुंडा बदमाश बलात्कारी ने उसको पकड़ लिया और लगा उसका बलात्कार करने ।
और वो लगी हाय हाय करने …… ohh my god ……
उसकी ये हाय तौबा चीखो पुकार मेरे जैसे , दूसरों के फटे में टांग अड़ाने वाले ने सुनी …… और उसने भैया ….. उठाया जो लट्ठ ….. और दौड़ा उस बेचारी अबला को बचाने ……
वहाँ पहुँच उस बलात्कारी को उसने दिया जो एक लट्ठ जमा के ……. तो वो तो लोट गया ……. हाय मार डाला रे …… तब तक वो औरत उठी और उसने उस लट्ठ वाले कू धर पकड़ा कालर से …… तू कौन बे ? कायकू मारा तूने इस बेचारे कू …… सारा मजा खराब कर दिया …….
और फिर वो उस बलात्कारी कि सेवा टहल में लग गयी …… आपको चोट तो नहीं आई ? सतियानास जाए इस नासपीटे का ……. इसने आपको डिस्टर्ब किया …….
पिलिज continue ……
तू चल बे …… फूट यहाँ से …… हवा आने दे …… पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते है ……
Sir ….. You please continue ……..

तो मितरों ……. बंगाल के हिन्दू मोमता दी के राज में मजा ले रहे हैं ……लेने दो …..
वो हाय हाय नहीं …… आह आह कर रहे हैं ……. करने दो …….

भीलवाड़ा के मोमिनों ने सिर उठाया ……. कल हिन्दुओं ने पटक के पेल दिया ……
बंगाल के हिन्दुओं को दर्द होगा तो खुद उठेंगे ।
God helps those who help themselves …….
जिसकी फटेगी उसको ही उठ के खुद की सिलनी पड़ेगी …….
हम कब तक सिलेंगे ?

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..

सरकार confused नहीं है इसलिए आप भी भ्रमित न हों

चूतियों की एक विशेषता होती है ।
खुद चूतिया होते हैं इसलिए दूसरों को भी चूतिया ही समझते हैं ।
वो कहते है न …… जाकी रही भावना जैसी , प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ……
इसलिए चूतियों को सारी दुनिया चूतिया ही दिखती है ।
कल फिर कुछ चूतिये शीघ्रपतन का शिकार हो गए ।
सरकार ने घोषणा की कि 500 और हज़ार के पुराने नोट यदि आपके पास हैं तो सारे इकट्ठे एक साथ जमा कर दीजिये । मने लाख दो लाख या करोड़ दो करोड़ , या 100 पचास करोड़ जो है अपने खाते में इकट्ठे जमा कर दीजिये । उसके बाद एक बार में 5000 से ज़्यादा की रकम नहीं ली जायेगी ।
लोग बाग़ दरअसल पुराने नोटों की 50,000 के नीचे की रकम जिसे जमा कराने पे Pan number नहीं देना पड़ता , ले के रोजाना बैंक में line लगा रहे थे ……. ये वो व्यापारी थे जो या तो अब भी पुराने नोटों में बिक्री कर रहे थे या फिर काले धन वालों के पैसे अपने ac में जमा करा के नोट बदल रहे थे ……. इन लोगों के इस गोरखधंदे को रोकने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया ।
इसके अलावा चूतिये ये सवाल भी उठा रहे है कि सरकार रोजाना policy बदल क्यों रही है । सरकार दिग्भ्रमित confused है क्या ?
इसका जवाब अमित शाह ने दिया है …… ये एक युद्ध है ….. काले धन के खिलाफ युद्ध ….. सरकार ने काले धन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है ……. अब जब युद्ध होगा तो सामने वाला पक्ष भी तो लडेगा ? आपने उसकी जीवन भर की काली कमाई पे हाथ डाला है । वो क्या बस यूँ ही surrender कर देगा ? भागने की , बच निकलने की पूरी कोशिश करेगा ….. अपनी काली कमाई को सफ़ेद करने की पूरी कोशिश करेगा । सरकार द्वारा आम आदमी को दी गयी सुविधा का दुरुपयोग करेगा । system में loopholes खोजेगा …… बच निकलने के रास्ते खोजेगा ……. अब सरकार का काम है उन loopholes को बंद करे …… चोरों के बच निकलने के रास्ते बंद करे …… ये तो चोर सिपाही का खेल है जी ….. तू डाल डाल मैं पात पात . जस जस चोर नए रास्ते खोजते हैं सरकार नए नियम बना के वो रास्ता बंद कर देती है ।
सरकार दिग्भ्रमित confused नहीं बल्कि बेहद सतर्क है ।
सरकार पूरे जी जान से काले धन के खिलाफ युद्ध लड़ रही है ।
सरकार confused नहीं है इसलिए आप भी भ्रमित न हों

हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना

भीलवाड़ा राजस्थान का एक औद्योगिक नगर है । यहाँ कपडे की हजारों मिलें हैं।हिन्दू बहुल है । शांति प्रिय समुदाय की आबादी लगभग 20 % है । बहुत बड़ा शहर नहीं है । जनसंख्या होगी यही कोई 4 लाख ।
गत 12 दिसंबर को बारा वफात यानि कि ईद ए मिलाद उल नबी को शान्ति दूतों ने जलूस निकाला । जलूस में रहे होंगे कोई 20 हज़ार लोग । गौर करने वाली बात ये कि जलूस में लोगों के हाथ में जो झंडे थे वो बांस की डंडियों में नहीं बल्कि लोहे के rods में थे । जलूस पूरे शहर में घूमा । खूब भड़काऊ नारे बाजी और भाषण बाजी हुई ……. जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जब माणिक्य नगर पहुंचा तो भीड़ हिंसक हो गयी और सड़क पे मौजूद गाड़ियों को तोड़ने लगी ….. दुकानों पे हमले हुए ……. बाज़ार धड़ा धड़ बंद हो गए । सारा दिन शहर भर में आतंक का माहौल रहा ।
20 हज़ार सशस्त्र हुड़दंगियों के उपद्रव के सामने पुलिस और प्रशासन भी दम साधे खडा रहा और लाचार देखता रहा । शहर तनाव में रहा ।
इसकी प्रतिक्रिया में आज RSS के स्थानीय नेतृत्व के आह्वाहन पे आज लगभग 8000 हिन्दू एकत्र हो कर जिला प्रशासन कलेक्टर और SP police से मिले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की । आमतौर पे ऐसे मामलों में जैसा होता है …… प्रशासन ने कार्यवाही का भरोसा दे के वापस भेज दिया । पर संतोषजनक बात ये है कि 8000 हिन्दू कम से कम घरों से बाहर निकल के एकत्र तो हुए । रोष प्रदर्शन तो किया ……..
शहर के लोग बताते हैं कि आमतौर पे भीलवाड़ा शांत रहने वाला नगर है और यहाँ साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है ।
प्रश्न है कि जिस भीलवाड़ा में आज तक कभी साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा नहीं हुई वहाँ अब क्यों हुई ?
इस बार बारावफात पे सिर्फ भीलवाड़ा ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी सुनियोजित उपद्रव के समाचार मिले है । आखिर शांति दूतों में बेचैनी क्यों है ?
दूसरा सवाल ये कि भीलवाड़ा के शान्ति दूतों के पास झंडे लगाने के लिए बांस की जगह लोहे की rod कहाँ से आई । किसने उपलब्ध कराई ? बताया जाता है कि सारी योजना नगर की मस्जिदों में बनी …… वहीं से लोगों को Rod में लगे झंडे उपलब्ध कराये गए ।
फिर वही सवाल …… आखिर क्यों ?
मोदी सरकार ने तीन तलाक़ के मुद्दे पे शान्तिदूतों को सीधी चुनौती दी है । ये बौखलाहट उसी का नतीजा है । शांति दूत को ऐसे उपद्रव करने के निर्देश मस्जिदों से मिलते हैं जुमे की तक़रीर में ……. मस्जिदें ही इनके हथियार गोली बारूद के गोदाम हैं ……. शांतिदूतों की सारी politics इन्ही मस्जिदों से संचालित होती है । यहीं से वोट देने के फतवे जारी होते हैं । मस्जिदें ही कौम की लड़ाई लड़ रही हैं ।
इधर हमारे मठ मंदिर और हमारे धर्म गुरु हमारे बाबा जी लोग …… ये अपनी दुकानदारी में लगे हैं ।

फिर भी …… आज RSS के आह्वाहन पे 8000 हिन्दुओं ने एकत्र हो के एक शुभ संकेत दिया है । इन 8000 लोगों से संपर्क करने में whatsapp की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
fb और Whatsapp लड़ाई के महत्वपूर्ण हथियार बन रहे हैं ।

  1. हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना वैसे ही रोना पडेगा जैसे बंगाल के हिन्दू रो रहे हैं ।

नोट बंदी

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बात तब की है जब अभी मोदी जी की नोट बंदी बस हुई ही थी ।
उस दिन मैं अदिति गुप्ता नामक लौंडे का गुदा भंजन कर अलीगढ से वापस दिल्ली लौट रहा था । अलीगढ से मैंने UP roadways की AC बस पकड़ी ।
कंडक्टर ने टिकट बनाने शुरू किये ।
मेरे पास आया तो मैंने उसे 1000 का नोट थमाया ।
उसने कहा ये नहीं चलेगा ।
क्यों नहीं चलेगा भाई ?
1000 और 500 के नोट सरकार ने बंद कर दिए ।
अरे वो तो मुझे भी पता है कि 1000 – 500 के नोट बंद कर दिए पर ये भी तो कहा है कि रेल , बस , metro में चलेंगे अभी कुछ दिन ……..
नहीं , ये नहीं चलेगा ……. हमारे Depot Manager ने मना किया है ।

भाई ……. ये देश तेरे depot manager के कहने से चलेगा या प्रधान मंत्री मोदी के कहने से चलेगा ?

वो बोला ……. देश कैसे चलेगा ये तो पता नहीं पर ये बस तो depot manager के कहने से ही चलेगी ।

तो फिर हमारे पास तो पईसे ना हैं भाई ……. हम ना लेते टिकट …….. ईब तो हम बिना टिकट ही जावेंगे दिल्ली तक …….. अपने depot मेनेजर को बता दे कि यू पहलवान ना लेता टिकट ……
ना लेता टिकट तो उतर जा ……..

अबे चल न …. न टिकट लूंगा न उतरूंगा ………..

पहलवान जी आप तो जबरदस्ती कर रहे हो ……..

अबे जबरदस्ती मैं कर रिया हूँ कि तू …….. देश का वित्त मंत्री तू और तेरा मेनेजर हो गया ????????

अच्छा लाओ ……. वही दो हज़ार का ……..
नहीं ……. वो नहीं चलेगा अब …….. मोदी ने बंद कर दिया …….

अरे दे दो न …….

नहीं भाई …….. कैसे दे दूं ? वो नोट चलेगा ही नहीं …….. तेरे मेनेजर ने मने करी है 1000 का नोट लेण ते ………

दे दो न भाई साहब ……. आप तो दुखी कर रहे हो …….. प्लीज़ …….. कंडक्टर अब घिघियाने गिडगिडाने की मुद्रा में आ गया था ।

मैंने उस से कहा ……. क्यों ? आ गया न लाइन पे ?

कल एक मित्र ने एक पोस्ट पे comment किया कि उनके बच्चे की फीस स्कूल वाले चेक से नहीं ले रहे ………

क्या कहा ? चेक नहीं ले रहे ?
इनती माँ ती तूत ……. कैसे नहीं लेंगे चेक …….. अबे इनका तो मरा हुआ बाप भी लेगा ……… फ़ैल जाओ स्कूल में …….. बोल दो चेक लेते हो तो लो नहीं तो मैं चला …….. और फिर ले लेना फीस ……. साले 12वीं तक यही पढ़ाऊँगा लौंडे को और झांट एक पैसा फीस नहीं दूंगा …… और खबर दार जो लौंडे से एक बार भी फीस का तगादा कर दिया तो ……..
भैया …… गान्ही बाबा मरे तो हमको बहुत बड़ा हथियार दे गए …….
सत्याग्रह ……… मने सत्य का आग्रह …….
सत्य में बहुत बड़ी ताक़त होती है ।
अगर आप सच्चे हैं तो तुरंत फ़ैल जाओ …….. पूरा रायता फैला दो ……. सामने वाले के लिए समेटना मुश्किल हो जाता है ……..

हर उस प्रतिष्ठान में , जहां आप अक्सर जाते हैं ……. या आप जिसके permanent ग्राहक हैं ……. उसको ultimatum दे दीजिये …….. भैया App से पैसे लेना शुरू कर दे नहीं तो हम ना देने के cash ……. और जबरदस्ती चाय पियेंगे …… पैसे झांट नहीं देंगे ……. खाते में लिख ले …… जब cash होगा दे देंगे …….

सामने वाले को मजबूर कर दो कि वो नगद लेन देन बंद कर E Banking से काम करे ।

बाबा और क्रांति

अपना तो एक नियम है.

ठंडा करके खाओ. गर्म गर्म खाने में मुंह जल जाता है.

किसी भी घटना पर लिखने से पहले कम से कम 48 घंटे का cooling period दें.

मैं बाबा राम देव प्रकरण पर लिखने से पहले 48 घंटे इंतज़ार करना चाहता था.

इस बीच मित्र अश्विनी कुमार वर्मा ने ठीक वहीं बातें लिख दीं जो मैं समझ रहा था.

पढ़िए क्या लिखते हैं वे –

एक व्यापारी कभी संत नहीं हो सकता, क्योंकि संतों का धर्म लाभ-हानि की चिंता किए बगैर सत्य बोलना है.

लेकिन व्यापारी का धर्म अलग होता है. उसका धर्म ये है कि लाभ-हानि की चिंता करते हुए व्यवहार करे.

यदि वो ऐसा नहीं करता तो अर्थ खतरे में पड़ता है और जब अर्थ खतरे में पड़ता है तो धर्म भी खतरे में पड़ता है.

मैं पुनः अपनी पुरानी बात दोहरा रहा हूँ कि बाबा रामदेव एक साथ संत व व्यापारी दोनों बनना चाह रहे हैं और यही संकट का मुख्य कारण है.

कोई हैरानी नहीं यदि कल को उनका पतंजलि भी संकट में पड़ जाये. और इसी कारण आज मीडिया ने उन्हें अपने लपेटे में ले ही लिया.

बाबा रामदेव कोलकाता में मोदी जी की सराहना कर रहे थे लेकिन जब ममता, लालू पर प्रश्न पूछे गए तो उनकी भी तारीफ कर दी.

वो बोलने लगे कि वो सभी के साथ हैं. पतंजलि के विस्तार के लिए दिन-रात एक किए हुए व्यापारी से आप क्या उम्मीद करते हैं?

हम यही उम्मीद कर रहे थे न कि बाबा सच बोलें? कहाँ से बोलेंगे? बिहार और बंगाल में पतंजलि के विस्तार का क्या होगा? लेकिन बावजूद इसके हम उनसे उम्मीद लगा बैठते हैं.

और इसमें कमी किसी और की नहीं बल्कि बाबा रामदेव की ही है क्योंकि उन्होंने नाहक अपनी छवि संतों की बना रखी है, रह-रह के क्रांतिकारी हो जाते हैं, राजनैतिक टीका-टिप्पणी में समय गंवाते हैं.

मीडिया प्रश्नों का जाल फेंकता है और जवाब देने के चक्कर में वो फँस जाते हैं. इस बार भी मीडिया ने उन्हे फँसा दिया.

उन्होने एक व्यापारी धर्म निभाते हुए सभी नेताओं की तारीफ की लेकिन मीडिया ने अर्थ का अनर्थ कर डाला, लेकिन इसके जिम्मेदार बाबा रामदेव खुद हैं.

कल्पना कीजिये कि यदि मुकेश अंबानी से या रतन टाटा या किसी अन्य उद्योगपति से मीडिया ऐसे सवाल करता तो वो क्या जवाब देते?

वो यही बोलते कि वो राजनेता नहीं है, अतः ऐसे सवालों के जवाब नहीं देंगे, उनसे केवल बिज़नस से जुड़े सवाल ही पूछे जाएँ.

बाबा रामदेव ने ऐसा नहीं किया! बल्कि एक हाथ आगे जाकर वो राष्ट्रसंत की भाँति बयान देने लगे.

बाबा रामदेव ने राजीव दीक्षित जैसे संत के प्रवचन को अपने अर्थ के पुरुषार्थ से जिस प्रकार प्रचारित करवाया कि उन्होने एक आदर्श व धर्मनिष्ठ उद्यमी की भूमिका निभाई, (वैसे भी बिना अर्थ के धर्म का विस्तार नहीं होता, ऐसे हमारे शास्त्र कहते हैं), बदले में बाबा को स्वदेशी का सबसे बड़ा मार्केट उस संत के आशीर्वाद स्वरूप प्राप्त हुआ.

पहली बार बाबा रामदेव सुर्खियों में भी एक व्यापारी के रूप में ही आए थे, हमेशा उन्होने बिना लाग लपेट व्यापार के ही बारे में बात की, उच्च गुणवत्ता के स्वदेशी उत्पाद उपलब्ध कराए. लोगों को रोजगार भी मिला. देश को आत्मनिर्भरता भी. इसमें कोई बुराई नहीं थी. उन्हे व्यापार ही करना चाहिए.

बुराई ये है कि आप बार-बार संतों कि भूमिका में आकार वर्णसंकट पैदा कर डाल रहे हैं, फिर न इधर के, न उधर के. इधर भी कबाड़ा और उधर भी.

बेहतर होता कि बाबा रामदेव कैमरे से ओझल होके चुपचाप व्यापार करते, अखिलेश, मुलायम, लालू, माया, ममता सबकी तारीफ करें, व्यापार की तरक्की के लिए अच्छे संबंध बनाए लेकिन कैमरे के पीछे, जैसे बाकी के उद्योगपति करते हैं, वैसे ही.

कोई उद्योगपति फिजूल बयानबाजी नहीं करता. बाबा रामदेव के ऐसा करने से समर्थकों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, भ्रम फैलता है, देश का भी नुकसान हो सकता है और साथ ही इससे किसी और को नहीं बल्कि स्वयं इनके पतंजलि को भी नुकसान पहुँच रहा है.

लेकिन पतंजलि के उत्पादों के बहिष्कार का कोई तुक नहीं है, क्योंकि बाबा रामदेव के नीयत में कोई खोट नहीं दिखाई पड़ता, केवल नीति में ही कमी जान पड़ती है.

फिर भी बॉयकॉट के स्लोगन तो अभी से आने शुरू हो गए हैं, शायद ये उन्हें जल्द ही अपनी नीति को सही करने में मदद करे.