तुम्हें आज तक कितने लोगों ने Touch किया ???????

2011 में डायरेक्टर मिलन लूथरिया ने एक फिल्म बनायी थी ……The Dirty Picture ……. दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग की बहु चर्चित अभिनेत्री Silk Smitha के जीवन पे आधारित थी फिल्म । सिल्क स्मिता दक्षिण की C ग्रेड फिल्मों की अभिनेत्री थी ।
फिल्म का विषय और कथानक bold था पर मिलन लूथरिया ने इस संवेदनशील विषय पे एक बेहतरीन फिल्म बनायी ।
वो जिसे Cinematic Experience कहा जाता है उसके हिसाब से Dirty Picture एक बेहतरीन फिल्म थी ।
Stall में बैठ के soft porn फिल्म देखने वाले दर्शकों की हिरोइन पे बनी फिल्म के कथानक और विषय वस्तु पे शुद्धता वादी लोग नाक भौं सिकोड़ सकते हैं पर नारी देह पे आधारित फिल्म का फिल्मांकन जिस खूबसूरती से मिलन लूथरिया ने किया वो काबिले तारीफ था ।
पूरी फिल्म को उन्होंने कभी भी vulgar नहीं होने दिया ।
फिल्म में विद्या बालन , नसीरुद्दीन शाह और इमरान हाशमी , राजेश शर्मा ने बेहतरीन काम किया ।
मैं तो इसे नसीरुद्दीन शाह की जीवन की सबसे बेहतरीन फिल्म मानता हूँ ।

इसके अलावा फिल्म के लेखन और dialogues भी कमाल के थे ।
गंभीर फिल्मों के शौकीनों के लिए ये एक बेहतरीन Cinematic Experience था ।

फिल्म का एक दृश्य है जिसमे इमरान हाशमी विद्या बालन से पूछता है ।
तुम्हें आज तक कितने लोगों ने Touch किया ???????
विद्या जवाब देती है ……. touch तो बहुतों ने किया पर छुआ आज तक किसी ने नहीं …….

***

मोदी जी ने एक दिन राज्य सभा में सरदार जी को घेर लिया ।
पूछा ……. Dr साब ……. इत्ते दिन कांग्रेस की सेवा में रहे ……. 35 साल ……… कितने लोगों ने पीछे touch किया ?

Dr साब बोले …… न आज तक किसी ने touch किया न छुआ …….
हमेशा Condom इस्तेमाल किया …….. इसीलिए मैं आज तक अनछुई सती साबित्री हूँ …….
न कोई दाग …… न धब्बा …….
Mr Clean ………

संजीव गांधी से संजय गांधी बनने की कहानी

ये नेहरू खानदान आज से नहीं , बहुत पहले से चुदक्कड़ और चिन्दी चोर रहा है ।
इनकी चुदक्कड़ी के किस्से फिर कभी ।
आज इनके चिन्दी चोर चरित्र का एक किस्सा सुन लीजिये ।
हुआ ये कि इंदिरा जी प्रधान मंत्री थीं ।
संजय गांधी उन दिनों कांग्रेस के युवराज थे ।
जैसे आजकल राहुल G हैं युवराज , वैसे ही तब थे संजय गांधी ।
पर तब उनका नाम संजय गांधी नहीं बल्कि संजीव गांधी था ।

इंदिरा को दो बेटे राजीव और संजीव …….. पुराने जमाने में माताएं Rhyming नाम रखा करती थीं । सो दोनों बेटों के नाम रखे राजीव गांधी और संजीव गांधी ……..
इंदिरा गांधी का बड़ा बेटा पायलट था Air India में । उसको राजनीति से कोई मतलब न था ।
छोटा बेटा संजीव गांधी राजनीति में था । एक नंबर का लुक्खा ……. अय्याश …… लौंडिया बाज ……
भ्रष्ट और कमीशन खोर । इस देश में जातीय राजनीति इंदिरा गांधी ने शुरू की ।
पर चोर उचक्के , गिरहकट , चिन्दी चोर , छिनैत , स्थानीय गुंडों को राजनीति में लाने का श्रेय इस संजीव गांधी को ही था ।
ये उस जमाने की बातें हैं , मने 1970 के आसपास की जब कि हमारे देश में बहुत कम कारें हुआ करती थीं । उन दिनों भारत देश में ले दे के कार के सिर्फ दो मॉडल होते थे । एक हिंदुस्तान मोटर की Ambassador और दूसरी Fiat …….. और ये भी पूरे शहर में दो चार ही होती थीं ।
मने जो शहर के बड़े रईस उद्योगपति जमींदार राजा साहब लोग होते थे उनके पास car होती थी और ये संजीव गांधी उन दिनों नयी उम्र का लौंडा होता था । नया नया जवान हुआ था । कार चलाने का शौक था । इनकी अम्मा की सरकार थी । दिल्ली में किसी की औकात न थी की संजीव गांधी को हरामीपन करने से रोक दे …… सो दिल्ली में इसका ये काम था कि जिसकी भी कार दिख जाती , ये श्रीमान जी उठा ले जाते और अपने दोस्तों के साथ उसे खूब दिल्ली की सड़कों पे दौड़ाते और जहां पेट्रोल ख़त्म हो जाता वहीं छोड़ के निकल लेते ।
सो एक बार ये London चले गए । वहाँ एक से बढ़ के एक car देखी सड़क पे ।
अब इनका मन मचलने लगा कि हमहूँ चलाऊँगा बिदेसी मोटर ……. वहाँ किसी car rental agency में गए पर चूँकि इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस न था सो उन ने दी नहीं । इनको आदत पड़ी थी दिल्ली वाली । बाहर निकले । जो पहली गाडी दिखी इन ने उठा ली और निकल लिए ।
घंटे भर दौड़ाई , और उसके बाद वहाँ की पुलिस ने इनको धर लिया …….. कार चोरी में ……. ये सिरिमान जी हवालात में औ पासपोर्ट इनका जप्त …….
तब UK में राजदूत थे कृष्ण मेनन …….
इंदिरा जी ने उनको फून किया …… ए जी सुनो …… हमार बिटवा हवालात में बंद है कार चोरी में …….ओका छुड़ाओ ……. कृष्ण मेनन एक नंबर का कमीना हरामी कांग्रेसी था और कांग्रेसी सब चोरी चकारी हेराफेरी fraud चार सौ बीसी में बहुत तेज होते हैं ……. उसने युवराज की हवालात से जमानत कराई ……. पासपोर्ट तो पुलिस ने जप्त कर लिया था और ये तो खुद्दे राजदूत था सो इसने युवराज का नाम संजीव गांधी से बदल के कर दिया संजय गांधी , 10 मिनट में नया पासपोर्ट बनाया ……. ये वो ज़माना घा जब कि अभी इमीग्रेशन क़ानून बहुत सख्त न थे और इंग्लैंड जाने को तो Visa तक न लगता था …… सो कृष्ण मेनन ने संजीव गांधी को संजय गांधी बना के फ़र्ज़ी पासपोर्ट बनाया और जो पहली flight मिली उसमे लाद के दिल्ली पहुंचा दिया ।
संजीव गांधी आज भी UK में कार चोरी में फरार शुदा मुजरिम के रूप में wanted हैं ।

आगे चल के इस संजय गांधी का कार प्रेम रंग लाया और इसने प्रण किया कि ये भारत में कार बनाने का कारखाना डालेगा और जो कार बनेगी उसका नाम होगा ” मारुती ”
संजय गांधी ने एक कार का prototype तैयार भी कराया पर वो टेस्ट में फेल हो गयी और अपने जीते जी कार बनाने का सपना संजय गांधी पूरा न कर सके और 1980 में दिल्ली के ऊपर एक छोटे हवाईजहाज में कलाबाजियाँ दिखाते एक दुर्घटना में मारे गए ।
उनकी मृत्यु के 4 साल बाद Suzuki कंपनी के साथ collaboration कर मारुती का उसका सपना साकार हुआ ………

मुरादाबाद के ठठेरे की कहानी

1997 में जब की देस दुनिया में ये खबर फैली की प्रियंका गांधी सादी करने जा रही हैं तो हमारे सैदपुर में एक बा0 koऊ साहब हुआ करते थे । बड़े जमींदार थे ।
पुराने कांग्रेसी ……… वो बड़े आहत हुए ।
एक दिन उनका दर्द छलक आया ।
बोले , अरे भाई तनी देखा लोगन …… ई प्रियंकवा कौने ठठेरा से बियाह करे जात हौ ……. अपने मोहल्ला में एक से बढ़िया एक लरिका घुम्मत हउअन …….. ऊ काहें ठठेरा से बियाह करत हिय …….

जब ये खबर आयी कि प्रियंका मुरादाबाद के किसी ठठेरे से बियाह करेंगी तो मुल्क वाकई एक बार सन्न रह गया था । ठठेरा UP की एक बिरादरी होती है जो पुराने जमाने में बर्तन इत्यादि बनाया करते थे ।

उनका असली नाम Robert बढ़ेड़ा था । बढ़ेड़ा पंजाब के खत्री होते हैं ।
उनके पिता का नाम श्री राजेंद्र बढ़ेड़ा था । राजेंद्र जी का जन्म अखंड भारत के मुल्तान में हुआ था । जब 1947 में देश का विभाजन हुआ तो उनका परिवार मुरादाबाद चला आया ।
राजेंद्र जी बाढ़ेड़ा का विवाह Maureen McDonah नामक Scottish मूल की एक ब्रिटिश महिला से हुआ । ये विवाह कब कैसे किन परिस्थितियों में हुआ इसके बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है ।
बहरहाल राजेंद्र भाई बाढ़ेड़ा की Maureen से 3 संतानें हुई ।
Robert , Richard और एक लड़की Michell .
राजेंद्र जी का मुरादाबाद में brass metal यानी पीतल के बर्तनों और कलात्मक वस्तुओं का निर्यात का छोटा मोटा व्यवसाय था । परिवार के हालात बहुत अच्छे न थे और Maureen दिल्ली के एक play school में पढ़ाती थीं । न जाने किन अज्ञात सूत्रों संबंधों के कारण उनके बच्चों का दाखिला दिल्ली के British School में हो गया जिसमें उस समय देश के प्रधान मंत्री की बेटी प्रियंका पढ़ती थी ।
13 साल की प्रियंका और Michell क्लास मेट थीं और मिशेल ने ही रोबर्ट की दोस्ती प्रियंका से कराई ।
स्कूल और स्कूल के बाहर भी प्रियांका सुरक्षा कर्मियों से घिरी रहती थीं ।
शाही परिवार के बच्चों के चूँकि बहुत कम दोस्त थे लिहाजा मिशेल और robert दोनों 10 जनपथ आने जाने लगे । धीरे धीरे Robert की दोस्ती राहुल से भी हो गयी ।
सोनिया निश्चिन्त थीं कि प्रियंका की सहेली मिशेल और राहुल के दोस्त Robert हैं ।
पहली बार सोनिया के सिर पे बम तब फूटा जब एक दिन प्रियंका एक अनाथ आश्रम के बच्चों की सेवा के बहाने घर से निकली और अपनी माँ को बिना बताए Robert के घर मुरादाबाद पहुँच गयी । इधर दिल्ली में चिहाड़ मची । वापस लौटी तो पूछ ताछ हुई । IB ने सोनिया को खबर दी कि आपकी बेटी Robert से इश्क़ लड़ा रही है । जब सोनिया ने मना किया तो प्रियंका ने बगावत कर दी । और अपनी माँ से दो टूक कह दिया कि वो Robert से शादी करने जा रही हैं ।
इस खबर से congress में हड़कंम्प मच गया ।
राजनैतिक जमात में इसे ख़ुदकुशी करार दिया गया ।
प्रियंका को उंच नीच समझाने की जिम्म्मेवारी अहमद पटेल , जनार्दन द्विवेदी और मोतीलाल वोरा को दी गयी । इन सबने प्रियंका को उनके उज्जवल राजनैतिक भविष्य की दुहाई देते हुए समझाया कि किस तरह Robert एक Mr Nobody हैं , एक mismatch हैं और आगे चल के एक liability बन जाएंगे ।
पर ये कम्बख़त इश्क़ …….जब दिल आ जाए गधी पे तो परी क्या चीज़ है ।
इधर प्रियंका अड़ गयी उधर सोनिया टस से मस न होती थीं ।
इसके अलावा राजेंद्र बाढ़ेड़ा के परिवार की IB report भी माकूल न थी ।
परिवार पुराना संघी था ।
राजेंद्र जी का परिवार लंबे अरसे से , मने पाकिस्तान बनने से पहले से ही संघ के सक्रीय सदस्य था ।
इनके परिवार ने मुरादाबाद शहर की अपनी जमीन सरस्वती शिशु मंदिर के लिए दान कर दी थी और राजेंद्र जी के बड़े भाई श्री उस शिशु मंदिर के आज भी ट्रस्टी हैं ।
ऐसे में एक पुराने जनसंघी परिवार में गांधी परिवार के चश्मे चिराग का रिश्ता हो जाए , ये कांग्रेस की लीडरशिप को मंजूर न था । ऐसे में Maureen McDonagh ने न जाने ऐसी कौन सी गोटी चली और अपने ब्रिटिश मूल के Roman Catholic इतिहास का क्या पव्वा लगाया कि अचानक सोनिया गांधी मान गयी । वैसे बताया ये भी जाता है कि उन दिनों भी congress leadership ये जान चुकी थी कि राहुल गांधी बकलोल बकचोद हैं । थोड़ा बहुत चानस इस प्रियंकवा से लिया जा सकता है बशर्ते कि इसकी शादी किसी हिन्दू लीडर के परिवार में करा दी जाए । पर होइहैं वही जो राम रचि राखा ।
शादी इस शर्त पे तय हुई कि राजेंद्र बाढ़ेड़ा का परिवार गान्ही परिवार से किसी किस्म का मेलजोल रिश्तेदारी नहीं रखेगा और इनकी political powers का लाभ उठाने का कोई प्रयास नहीं करेगा ।
अंततः Feb 1997 में प्रियंका गांधी की शादी robert बाढ़ेड़ा से हो गयी ।
सोनिया गांधी को इस बाढ़ेड़ा surname से बहुत चिढ थी । और ये नाम इन्हें politically भी suit न करता था सो सबसे पहले इन ने इसे बदल के बाढ़ेड़ा से Vadra किया । यूँ भी ये परिवार नाम बदल के देश दुनिया को बेवक़ूफ़ बनाने में बहुत माहिर है ।
इस परिवार ने कब कब कैसे कैसे नाम बदल के देस को चूतिया बनाया इसपे पूरी एक पोस्ट बनती है ।

बहरहाल प्रियंकवा की सादी मुरादाबाद के ठठेरे से हो गयी ।
इस बीच Vadra परिवार को ये सख्त हिदायत थी कि वो लोग कभी 10 जनपथ में पैर नहीं रखेंगे ।
अलबत्ता वक़्त ज़रूरत पे प्रियंका गांधी अपनी ससुराल हो आती थीं ।
पर रोबर्ट ” वाड्रा ” को अपने परिवार से तआल्लुक़ रखने की इजाज़त न थी ।
गौर तलाब है कि प्रियंका से Robert की मुलाक़ात Michell ने कराई थी ।
पर अब उसी Michell का प्रवेश भी गांधी household में वर्जित हो गया था ।
फिर एक दिन Michell की एक car दुर्घटना में संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गयी , जब कि वो दिल्ली से जयपुर जा रही थीं ।
उसके चंद दिनों बाद ही एक और अजीब घटना घटी ।
दिल्ली के एक वकील अरुण भारद्वाज ने दिल्ली के दो अख़बारों में Robert Vadraa के हवाले से ये इश्तहार दिया कि मेरे मुवक्किल श्री Robert Vadra का अपने पिता श्री राजेंद्र vadra , और भाई Richard Vadra से कोई सम्बन्ध नहीं है ।

यहां तक तो ठीक था । इसके बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय से AICC के letter pad पे देश के सभी कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों , प्रदेश कांग्रेस कमेटी एवं कांग्रेस legislative पार्टियों को सोनिया गांधी की तरफ से एक पत्र भेजा गया जिसमें सभी को ये स्पष्ट निर्देश था कि मुरादाबाद के हमारे समधी और प्रियंका जी के जेठ जी की किसी सिफारिश पे कोई अमल न किया जाए और उन्हें किसी प्रकार के लाभ न पहुंचाए जाएं । वो बात दीगर है कि आगे चल के इन्ही congi मुख्य मंत्रियों अशोक गहलोत और भूपेंद्र हुड्डा के राज में मुरादाबादी ठठेरा देखते देखते ख़ाकपति से अरब पति व्यवसायी बन गया ।

इस घटना क्रम के कुछ ही महीनों बाद अपनी प्रियंका दीदी के जेठ जी , यानी अपने रोबर्ट जीजू के बड़े भाई Richard भाई ने पंखे से लटक के आत्महत्या कर ली ।
प्रियंका दीदी के ससुर जी , यानी रोबर्ट जीजू के पिता जी , श्री राजेंद्र भाई वाड्रा , जिनसे की robert vadra जीजू ने बाकायदा affidevit दे के संबंध विच्छेद कर लिया था , यानि कि बेटे ने बाप को बेदखल कर दिया था , वो राजेंद्र भाई गुमनामी और मुफलिसी में दिन काटने लगे ।
उनको लिवर सिरोसिस हो गया । उनका इलाज दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफ़दर जंग हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में हुआ । कुछ दिन बाद राजेंद्र वाड्रा सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज ले , दिल्ली में ही AIIMS के नज़दीक एक सस्ते से lodge के एक कमरे में पंखे से लटकते पाये गए । उनकी जेब में सरकारी अस्पतालों की दवाई का एक पुर्जा और 10 रु का एक नोट पाया गया ।
सोनिया गांधी की दिल्ली में पुलिस ने अच्छा किया कि postmortem न कराया वरना पेट में भूख और मुफलिसी के अलावा कुछ न मिलता ।
यूँ बताया जाता है कि जब पुलिस राजेंद्र वाड्रा की लाश उस lodge से ले जाने लगी तो उसके मालिक ने अपना 3 दिन का बकाया किराया सिर्फ इसलिए मुआफ़ कर दिया कि मरहूम शक़्स अपनी प्रियांका दीदी का ससुर था ।

उसी शाम दिल्ली के एक श्मशान में राजेंद्र वाड्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिसमें सिर्फ प्रियंका गांधी , सोनिया गांधी और राहुल बाबा शामिल हुए । शेष लोगों को सुरक्षा कारणों से अंदर नहीं आने दिया गया । Robert तो पहले ही बेदखल कर चुके थे ।

राहुल प्रियंका की कहानी

वंस अपान ए टाइम , किसी नगर में एक माफिया परिवार में एक नया माफिया उग रहा था ।
एक बार उसने औकात से ज़्यादा बड़ी हड्डी गटक ली ।
सो गले में जा फँसी ।

फिर उसकी हत्या कर दी गयी ।
तब जबकि वो अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आया था ।
उसी स्कूल के सामने ही उसे गोलियों से भून दिया गया ।
कुल 20 गोलियां मारी गयी ।
जिस समय उसपे एकदम नज़दीक से गोलियां मारी जा रही थीं , उसके दोनों बच्चे गाडी की पिछली seat पे बैठे थे ।
5 बरस के बच्चे के सामने ताबड़ तोड़ गोलियां बरस रही हों ……. उसके बाप के ऊपर ……. और एक बच्चे का बाप उसके सामने इतनी हिंसक इतनी निर्मम मौत मार दिया जाए , ये एक नन्हे बच्चे के लिए बड़ा Traumatic experience होता है । उसकी Psyche मने उसके मन पे लगे वो घाव आजीवन नहीं भरते ।
ऐसे बच्चों को इस सदमे से उबारने के लिए professional help दी जाती है । इस विषय के विशेषज्ञ Psychiatrist , मनोवैज्ञानिक इन बच्चों को बीसियों सालों तक लगातार counseling देते हैं तब जा के बड़ी मुश्किल से वो इस सदमे से उबर पाते हैं ।

जो लोग राहुल और प्रियंका गांधी को नज़दीक से जानते हैं वो बताते हैं कि ये दोनों भाई बहन Autism नामक बीमारी के रोगी हैं ।
बेचारे इन दोनों बच्चों का बचपन बहुत बुरा बीता ।
1984 में जब इनकी दादी PM थी तो देश में हालात बहुत बुरे थे और इनके परिवार को बहुत ज़्यादा ख़तरा था ।
1982 में इनके चाचा संजय गांधी की अकाल मृत्यु के बाद इनके पापा पायलट गिरी मने हवाई जहाज उड़ाना छोड़ देश उड़ाना सीख रहे थे ।
पंजाब के हालात बहुत ज़्यादा खराब थे ।
ऐसे में इनकी दादी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में फ़ौज भेज Op Blue Star कर दिया ।
उसकी प्रतिक्रिया / प्रतिशोध में इनकी दादी की, PM रहते, इन्ही के घर में , इन्ही के अपने Body Guards ने , ह्त्या कर दी । एकदम नज़दीक से गोलियां बरसाई गयीं । जब इनकी दादी पे गोलियां बरस रही थी , ये दोनों वहाँ से बमुश्किल 20 मीटर दूर घर में थे । गोलियों की आवाज़ सुन दौड़ के बाहर आये । देखा कि दादी खून से लथपथ जमीन पे पड़ी हैं ।
उसके कुछ क्षण बाद उसी घर में फिर गोलियां चलने लगी ।
अब उन sikh bodyguards को मारा जा रहा था ।
पापा south में दौरे पे गए हुए थे ।
Mummy घर में अकेली थीं ।
फिर शाम को पापा आये ।
तीन दिन तक दादी की dead body पे अंतिम दर्शन , फूल माला , और फिर cremation ……. इसके साथ साथ मने इस पूरे घटना क्रम के parallel दिल्ली में दंगे भी चल रहे थे और 6000 सिखों के गले में जलते हुए tyre डाल के उनको ज़िंदा जलाया जा रहा था …….. पूरे देश में मार काट मची थी ……. और ये बेचारे मासूम बच्चे ये सब देख / झेल रहे थे ।
फिर इनके पापा PM बन गए और उन ने sikh radicals के अलावा श्रीलंका के Tamil Tigers से भी पंगा ले लिया ।
अब वो भी इनके खून के प्यासे हो गए ।
इनके परिवार पे security Threat बहुत ज़्यादा बढ़ गया ।
जब ये दोनों बच्चे बड़े हो रहे थे तो इनका परिवार दुनिया का सबसे ज़्यादा असुरक्षित परिवार था और इनकी security इतनी ज़्यादा tight थी कि आप कल्पना नहीं कर सकते ।
देश के PM के बच्चे होने के बावजूद इनको इजाज़त न थी कि ये अपनी मर्जी से अपने bedroom से बाहर आँगन में चले जाएं ।
PM house से बाहर निकलते तो NSG के सुरक्षा घेरे में ।
सुरक्षा कारणों से इनका एडमिशन दिल्ली के British Embassy स्कूल में कराया गया ( यहीं पे मुरादाबाद के ठठेरे Robert Vadra से प्रियंका गांधी की मुलाक़ात / दोस्ती / इश्क़ हुआ )। Rahul गए दून स्कूल ।
इन दोनों की किशोरावस्था NSG के पहरे में बीती ।
मने ये वो पंछी थे जिन्हें घोसले से बाहर निकल के पंख फड़फड़ाने उड़ने की इजाज़त न थी । किसी से मिलने जुलने बात करने की इजाज़त न थी ।
ऐसे में दोनों loner हो गए और 15 साल की प्रियंका गांधी को जो पहला लौंडा दिखा उसी से set हो गयी ।
उसके बाद देस के किसी लौंडे की न औकात थी न हिम्मत कि वो NSG का सुरक्षा घेरा तोड़ प्रियंका गांधी पे लाइन मार सके ।
इधर राहुल G …… ये भी loner थे । न कोई हरामी यार दोस्त , न किशोरावस्था में आज़ाद घूम देस का हरामीपन / कमीना पन / देस के लड़ाई झगड़े / लौंडिया ताड़ना / एक से बढ़ के एक हरामी लौंडों के साथ दोस्ती का सुख ……… इन सबसे वंचित रहे राहुल G …….. स्कूल से निकले तो PM बाप के पव्वे / जुगाड़ से देश के सबसे प्रतिष्ठित कालिज Stephans में Sports कोटे में शूटिंग के एक फर्जी टूर्नामेंट में फ़र्ज़ी Gold मैडल दिया के इनका एडमिशन कराया गया ।
वहाँ एक और लूत ……. NSG के घेरे में श्रीमान जी , college आते तो जिस रस्ते से गुजरते वो पहले खाली करा लिया जाता । क्लास लगती तो किलास की आगे की चार row खाली रखी जाती ।
सबसे आगे अकेले सिरिमान जी बैठते और इनके पीची 8 NSG कमांडो ……. फिर बाकी क्लास ।
Stephans में श्रीमान जी हंसी का पात्र बन गए । पहली समस्या ये कि 12th में 48% के छात्र थे , intellect level कुछ था नहीं ……. ऊपर से ये सुरक्षा नौटंकी …….
बताया जाता है कि उन दिनों Stephans College में एक अजीब सा माहौल हो गया था ।
पूरे कॉलेज को लगता कि इस चूतिये के कारण हम लोग suffer कर रहे हैं ।
बताया जाता है कि उन दिनों कॉलेज में लौंडों ने इसके मुह पे कहना शुरू कर दिया था ……. भाई , तू मत आया कर यार कालिज ? कायकू G मार रिये हो तुम सब मिल के इस कालिज की ??????
राहुल G ने अपने PM बाप से इस बाबत की और उन ने आगे फिर NSG से बात की ……. तो NSG और SPG ने कहा कि तुम दोनों बाप बेटा बहुत बकरचोदी मत पेलो …….. भोसड़ी के कोई टपका जाएगा तो फिर हमको मत बोलना …….. तुम्हारे बाप LTTE वाले नहा धो के पीछे पड़े हैं …….
सिर्फ 4 महीने में राहुल G ने Stephans College छोड़ दिया ।
कुछ दिन बाद इनके पप्पा को LTTE ने श्री पेराम्बुदूर की एक चुनावी रैली में उड़ा दिया ।
Dead body के थीथड़े उड़ गए थे । स्थानीय नेताओं ने शव को Nike के जूतों से पहचाना था ।
दोनों बच्चे अभी दादी की हत्या के trauma से उबरे न थे कि बाप भी मारा गया ।
अब दोनों में Autism के लक्षण दिखने लगे थे ।
प्रियंका गांधी को fits पड़ते थे । Rahul G loner होते चले गए । कुछ साल depression में भी रहे । Stephans कॉलेज के बाद पढ़ने बिदेस भेज दिए गए । यहां गलती कर दी सोनिया जी ने ।
UP बिहार की किसी इनभरसीटी से BA करा देतीं ।
लड़का कुछो लिख दे कॉपी में अंग्रेजी में , पास हो जाता ।
पर हार्वर्ड कैंब्रिज में ऐसे थोड़े न चलेगा ।
Autism के कारण कुछ भी याद रखने , लिखने में दिक्कत होती ।
राहुल गांधी एक लाइन लिख नहीं सकते ( नेपाल एम्बेसी वाला किस्सा याद कीजिये )

ऐसे में कालान्तर में सोनिया जी को कांग्रेस की बागडोर संहालनी पड़ी । मजबूरन स्वयं और बेटे को राजनीति में उतारना पड़ा । आज कांग्रेस की मजबूरी है कि सोनिया G और Rahul G को उसे ढोना पड़ रहा है । राहुल एक लाइन न लिख पढ़ सकते हैं न बोल सकते हैं ।
Autism गन्दी बीमारी है । मानसिक क्षमताओं को सीमित कर देती हैं ।
कुछ भी याद रखना मुश्किल होता है । Comprehension क्षमता बिलकुल नहीं होती ।
ऐसे में मुकाबला मोदी जैसे धुरंधर से ……. वनों और पहाड़ों की कंदराओं में रहने और खुले आकाश में उड़ते गरुड़ सरीखे मोदी जी …….. और सामने मुक़ाबिल हैं बेचारा पिंजरे में बंद तोता जिसे कभी पंख फड़फड़ाने की इजाज़त ही न थी ……..

क्रमशः ………

अमेठी के राजा संजय सिंह के छिनरपन का किस्सा ।

अमेठी सीट पे घमासान मचा है ।
अमेठी एक छोटा मोटा राजघराना रहा है UP का जहां संजय सिंह का खानदान राज करता रहा है ।
इसके अलावा गांधी परिवार वहाँ से सांसद है । पिछले 40 साल से ।
इसके बावजूद UP के सर्वाधिक पिछड़े इलाकों में गिनती होती है अमेठी की ।
सोच के देखिये । देश की ruling party के प्रथम परिवार जो हमेशा PM या उसके समकक्ष रहा हो उनकी constituency का ये हाल ? गरीबी भुखमरी पिछड़ेपन से बेहाल ।
फिलहाल वहाँ से समाजवादी पाल्टी के गायत्री प्रजापति ताल ठोक रहे हैं ।
वही प्रजापति जिनको टेढ़ी नाक वाले अकललेस जादो ने भ्रष्टाचार के आरोप में मंत्रिमंडल से निकाला फिर नामाजवादी नौटंकी में थूक के चाट लिया ।

चोर जार लंपट छिनरे संजय सिंह का क्षेत्र है अमेठी । इनके छिनरपन के किस्से मशहूर हैं ।
लीजिये सुनिये अमेठी के राजा संजय सिंह के छिनरपन का किस्सा ।
बात 1988 की है ।
उन दिनों की जब मैं NIS पटियाला में पढ़ रहा था ।
तभी एक दिन खबर आयी कि विश्व विख्यात Badminton खिलाड़ी सय्यद मोदी की लखनऊ में दिन दहाड़े KD Singh Babu स्टेडियम के सामने गोली मार के ह्त्या कर दी गयी । ह्त्या सुबह 8 बजे हुई जब मोदी सुबह की practice कर badminton hall से बाहर निकल रहे थे ।
हमारे साथ लखनऊ के 3 बैडमिंटन खिलाड़ी भी डिप्लोमा कर रहे थे ।
कौशल खरे और अंसारी ……..
वो तीनों उसी लखनऊ के उसी बैडमिंटन हॉल के खिलाड़ी थे और सय्यद मोदी के साथ ही practice करते थे । उनका मोदी के साथ दिन रात का संग साथ उठना बैठना खाना पीना था ।
Modi की हत्या की खबर सुन इन तीनों के मुह से एक साथ निकला …….. मरवा दिहलस संजय सिंघवा । फिर उन तीनों से उस हत्याकांड का किस्सा सुना ।
सय्यद मोदी की शादी मुम्बई की एक मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी अमिता कुलकर्णी से हुई थी ।
NIS पटियाला उन दिनों भारतीय खेल का केंद्र था और सारे National coaching कैम्प्स वहीं लगा करते थे । उसी पटियाला में मोदी और अमिता कुलकर्णी की जानपहचान , दोस्ती , और शादी हुई थी ।
अमिता कुलकर्णी मुम्बई की पली बढ़ी , फर्राटे से अंग्रेजी बोलने वाली और बड़ी नकचढ़ी किसिम की लड़की थी ( मुझे वो दिन याद है जब वो पटियाला में बिना ब्रा के T Shirt पहन के घूमती थी )
। इधर सय्यद मोदी गोरखपुर का भोजपुरी speaking भैया , सीधा सादा आदमी था ।
रेलवे में welfare inspector लग गया और लखनऊ रहने लगा ।
वहीं संजय सिंह भी आता था बैडमिंटन खेलने । जल्दी ही उसकी दोस्ती मोदी परिवार से हो गयी ।
संजय सिंह और अमिता कुलकर्णी मोदी की दोस्ती ( चुदक्कड़ी ) के किस्से पूरे लखनऊ में मशहूर हो गए । अमिता मोदी कुलकर्णी pregnant हो गयी । सैय्यद मोदी जानते थे कि बच्चा मेरा नहीं बल्कि संजय सिंह का है ।
Delivery से 4 महीना पहले अमिता अपने मायके मुम्बई चली गयी और वहाँ उसे एक लड़की हुई ।
लड़की को मुंबई अपनी माँ के पास छोड़ अमिता वापस लखनऊ आ गयी ।
इसके दो महीने बाद मोदी की हत्या हो गयी ।
मचा बमचक । बड़ा high profile murder था ।
सीधे सीधे संजय सिंह और अमिता मोदी कुलकर्णी पे आरोप था । दोनों की गिरफ्तारी भी हुई । जेल भी गए । पर जल्दी ही जमानत भी हो गयी ।
उन दिनों संजय सिंह केंद्र में VP Singh सरकार में राज्य मंत्री थे ……. शायद telecom में ।
CBI जांच हुई पर कुछ न निकला । सब लीप पोत दिया गया ।
मुझे याद है उन दिनों एक बड़ी मशहूर पत्रिका निकलती थी ” माया ” .उसमे संजय सिंह का interview छापा था ।
संजय सिंह बोला अमिता तो मेरी बहन जैसी है ।
उसी केस में कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह , जी हां यही अखिलेश सिंह जो आजकल TV पे कांग्रेस के प्रवक्ता बने फिरते हैं , ये भी सह अभियुक्त थे । इनपे ह्त्या के लिए shooter और सारा logistic support जुटने , रुपया पैसा , हथियार , गाडी जुटाने का आरोप था ।
खैर कुछ न हुआ ……. सब छूट छटक गए ।
कुछ समय बाद संजय सिंघवा बहिनचोद ने अपनी बहिन से बियाह कर लिया और उनकी बहिन आजकल अमेठी की रानी अमिता सिंह कहलाती हैं ।
संजय सिंह पहले से शादी शुदा था ।
उसकी पत्नी का नाम गरिमा सिंह था जो राजा मांडा VP Singh की सगी भतीजी थीं ।
संजय सिंह ने fraud करके उनसे तलाक़ ले लिया जिसे गरिमा सिंह ने high court से रद्द करा दिया ।
इनका तलाक़ का मुक़द्दमा आज तक court में लंबित है और Amita मोदी कुलकर्णी सिंह की कानूनी हैसियत आज भी एक रखैल live in partner से अधिक कुछ नहीं ।
वो लड़की जो मुम्बई में पैदा हुई , पली बढ़ी उसका नाम आकांक्षा सिंह है ।
जबकि हकीकत ये है कि जब वो पैदा हुई तो उसकी माँ सय्यद मोदी की ब्याहता थी ।

संजय सिंह की पत्नी , वही गरिमा सिंह आज अमेठी से भाजपा प्रत्याशी हैं ।
सपा ने अमेठी की सीट congress को नहीं दी है और गायत्री प्रजापति वहाँ से लड़ रहे हैं ।
इधर संजय सिंह की रखैल भी कांग्रेस से ताल ठोक रही है ।

अमेठी पिछले 50 साल से नकली गांधी परिवार की पालकी ढोती विकास की बाट जोह रही है ।

भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की मुफलिसी का सच ।

भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की मुफलिसी का सच ।

आज से कुछ साल पहले जब कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब जीवित थे , और न सिर्फ जीवित थे बल्कि पूरी तरह fit थे , सक्रिय थे , एक दिन ये खबर आयी कि उस्ताद जी बेहद मुफलिसी में जी रहे हैं । रोटी के लाले पड़े हुए हैं । देश चिंता में डूब गया । कई जगह से इमदाद आने की खबरें आई । भारत सरकार भी सक्रिय हुई । भारत रत्न मुफलिसी में जी रहा ? आनन् फानन में संसद में उनके शहनाई वादन का कार्यक्रम रखा गया । बाकायदे 5 लाख का मेहनताना दिया गया ।
ये सब देख सुन मेरा माथा ठनका ।
मेरे कू बात समझ में न आयी ।
बिस्मिल्लाह खान जैसा super star मुफलिसी में जी रहा ? बात गले उतरती न थी ।
मैं उन दिनों जालंधर की हरिवल्लभ महासभा से जुड़ा हुआ था । ये महासभा हर साल शास्त्रीय संगीत की एक बहुत बड़ी conference बोले तो संगीत सम्मलेन कराती है जो लगभग 140 साल पुराना है ।
पलुस्कर भीमसेन जोशी रविशंकर लगायित कोई ऐसा गवैया न हुआ जो यहाँ न आया हो …….
मैं पहुंचा कपूर साब के पास जो महासभा के secretary हैं ।
मैंने पूछा गुरु क्या मामिला है ? की खाँ साहेब काहें मुफलिसी को प्राप्त हो गए जबकि यहां तो अदना सा नया लौंडा भी जो कि अभी classical संगीत में उभर रहा है वो भी एक performance के 30 हज़ार माँगता है और खाँ साब जैसे सीनियर तो 5 लाख के नीचे बात तक ना करते ……. आज जो सीनियर कलाकार है वो प्रति concert 5 लाख लेते हैं और एक महीने में 10 से 15 दिन बुक रहते हैं ……. तो इनको क्या पिराब्लम हो गिया ?
कपूर साब हल्का सा मुस्किया दिए ।
बोले , लो किस्सा सुनो ।
आज से कोई 10 साल पहले हमने एक बार खाँ साब को बुला लिया हरिबल्लभ में ।
एक लाख में तय था । सुबह पंजाब मेल से आना था । एक गाडी भेज दी स्टेशन पे ।
वहाँ से ड्राइवर का फून आया । sir एक गाडी से काम न चलेगा । पूरी bus भेजो ।
अबे कित्ते आदमी हैं ? हम ये मान के चल रहे थे कि साजिंदे मिला के 4 – 5 आदमी होंगे ।
ड्राइवर बोला अजी बीसियों हैं सब केना मेना चूंची बच्चा मिला के …….
अपना माथा ठनका । होटल में दो कमरे बुक थे । तीन और खुलवाये । एक एक कमरे में 5 – 5 जा घुसे । उस्ताद ने शहनाई जो बजायी , लोग अश अश कर उठे । भाव विभोर …… उस्ताद की उँगलियों में जादू था । तीन दिन जमे तहे उस्ताद सम्मलेन में पूरी फ़ौज के साथ । गाजे बाजे के साथ बिदा हुए ।
होटल का बिल आया तो माथा ठनका । तीन दिन का बिल यही कोई सवा लाख रु ……. क्या कहा ?
सवा लाख ? अबे दिमाग खराब है ?
अजी 25 आदमी थे । मुर्गे के अलावा कुछ नहीं खाते थे । जाते जाते 35 मुर्गे तो रास्ते के लिए pack करा के ले गए । उस दिन महासभा ने कान पकडे । फिर कभी नहीं बुलाया ।
मैंने पूछा 25 आदमी थे कौन जो उनके साथ पधारे थे । अजी उस्ताद जी के अपने एक दर्जन और उन एक दर्जन के आगे एक एक दर्जन ………
पर गुरु आज जितने ये star performers हैं इन सबने अपने अपने बच्चे जीते जी stage पे set कर दिए ……. उस्ताद जी के लौंडों का क्या हाल है ?
अजी सब एक से बढ़ के एक निकम्मे । किसी को शहनाई पे हाथ तक रखना नहीं आता ।
दारू और भांग गांजे से फ़ुरसत होंय तो शहनाई पे हाथ धरे ।
शास्त्रीय संगीत है भैया । 20 – 20 साल तक लोग 10 – 15 घंटे रोज़ाना रियाज़ करते हैं तो कुछ लायक होते हैं । उसमें भी stardom बुढौती में मिलता है । पंडित जसराज को 55 साल हो गए stage पे परफॉर्म करते ।
और इस तरह उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब अपने दर्जन भर से ज़्यादा आवारा लौंडों और उनके आगे 10 दर्जन नाती पोतों का पेट भरने में अपनी सारी कमाई खर्च करते एक दिन उसी मुफलिसी में अल्लाह को प्यारे हो गए ।
उनके सबसे बड़े बेटे को मैंने सबसे पहली बार देखा 2014 में जब की भाजपा ने उनको बनारस में मोदी जी के पर्चा दाखिले में प्रस्तावक बनने के लिए आमंत्रित किया जिसे उन्होंने एक बार स्वीकार कर फिर मुस्लिम समाज के दबाव में ठुकरा दिया ।

फिर पिछले साल खबर आयी कि मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब भारत रत्न की डुमरांव स्थित पुस्तैनी हवेली और जमीन पे कुछ बिहारी गुंडों बाहुबलियों ने कब्जा कर लिया ।
मचा जो बमचक ।
जांच हुई तो पता चला कि उस्ताद के सबसे बड़े बेटे ने खुद ही चोरी छिपे पूरे परिवार को अँधेरे में रख वो जमीन बेच खायी थी ।

फिर पिछले दिनों खबर आयी कि उस्ताद जी की चांदी जड़ी 4 शहनाइयां उनके पैतृक निवास से चोरी हो गयी । बनारस में फिर मचा बमचक ।
तब मेरे मुह से यूँ ही निकला …… अबे कौन चुराएगा ।
खुद बेच खायी होंगी सालों ने ।
आज खबर आयी कि STF ने बनारस में मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहब भारत रत्न के पोते जनाब नज़र ए आलम साहब सुपुत्र जनाब काज़िम खाँ साहिब को दो jewellers के साथ गिरफ्तार कर चारो शहनाइयां बरामद कर लीं ।

काश उस्ताद जी ने किसी साक्षी महाराज type संघी की सलाह मान ली होती और 14 की जगह सिर्फ एक या दो पैदा किये होते तो ये नौबत न आती ।