Wrestling coach by profession Social Media writer ....... Traveller ...... loves Biking , cooking,

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UP में आंधी चल रही है । सब उड़ा ले जायेगी ।

मैं जब भी UP के आगामी विस चुनाव का विश्लेषण करता हूँ तो कहता हूँ ……. BJP क्लीन स्वीप करेगी । यदि कोई महाठगबंधन न हुआ ……. ऐसा ठगबंधन जिसमे हाथी साइकिल पे चढ़ जाए और उस हाथी पे राहुल बाबा बैठे हों ……. यदि ऐसा हो तभी BJP रुकेगी वरना UP में माया मुलायम का सूपड़ा साफ़ है .
मेरे मित्र पूछते हैं कि आपके इस आशावाद का कारण क्या है ?
दो कारण हैं ।
पहला जातीय समीकरण ।
UP में कोई व्यक्ति किसी पार्टी को भोट नहीं देता ।
जातियों के समूह किसी पार्टी को भोट करते हैं । व्यक्तिगत भोट मायने नहीं रखता । वो नगण्य होता है । चुनाव से पहले ये पता चल जाता है कि कौन सी जाति किस क्षेत्र में किसे वोट कर रही है । 2017 की विशेषता ये है कि भाजपा ने ये जातीय समीकरण साध लिए है ।
सवर्ण और गैर यादव OBC भाजपा खेमे में आ गए हैं । इसके अलावा दलितों में भी गैर चमार जाटव दलित भोट बैंक में भाजपा ने बहुत बड़ी सेंध लगाई है ।
अब बचे यादव और चमार जाटव ……. तो पूर्वी UP की ये दशा है कि 20 से 30 % यादव चमार भी भाजपा को भोट देने का मन बना चुके हैं । भाजपा ने 2014 की तुलना में अपना जातीय जनाधार बढाया है । इसके अलावा Floating भोट का भी एक बहुत बड़ा हिस्सा POK में surgical Strike और नोटबंदी के बाद भाजपा के पक्ष में आया है । सवाल उठता है कि नोटबंदी से उपजी परिस्थितियाँ और उस से उत्पन्न मंदी कितना असर डालती है । वैसे यदि चंडीगढ़ के हालिया चुनावों का रुझान देखा जाए तो नोटबंदी से भाजपा को लाभ हुआ है और पंजाब की anti incumbency के बावजूद congress का सूपड़ा साफ़ हो गया जबकि केजरीवाल ने बेहद शातिराना चाल चलते हुए चुनाव से withdraw कर congress को walk over दे दिया था जिस से कि भाजपा विरोधी भोट का बँटवारा न हो और सारा भोट congress को मिले ……..
इसके बावजूद कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया चंडीगढ़ में । इस से पता चलता है कि नोटबंदी से भाजपा को फायदा है नुकसान नहीं ।

अब मेरे आशावाद का दूसरा कारण है समाजवादी कुनबे की कलह ।
नोटबंदी के बाद अचानक जादो कुनबे के कलह के समाचार आने बंद हो गए ।
पर कल अकललेस जादो ने फिर एटा में ताल ठोक दिया ।
उन ने अपने खेमे के 70 युवा MLAs से कही ……. टिकट की चिंता मति करो …… जाओ …… अपने अपने क्षेत्र में जाओ और सरकार के कामकाज का परचार परसार करो ……..
ये चचा सिपाल जादो को खुली धमकी है ।
माना जा रहा है कि ये भतीजे की ओर से बगावत का बिगुल है ।
ऐसे कयास लग रहे हैं कि अगर टिकट वितरण में अखिलेश की न चली तो सपा के कम से कम 200 बागी खड़े होंगे और जहां बागी नहीं भी होंगे वहाँ चाचा भतीजा भितरघात कर एक दुसरे को हरवायेंगे ।
इसमें पेंच ये है कि सपा के गैर मुस्लिम वोटर की पहली स्वाभाविक गैरसपा पसंद भाजपा है न कि बसपा ।
इस भितरघात से सपा votebank का एक बड़ा हिस्सा भाजपा में shift हो सकता है ।

इसके अलावा नोटबंदी के बाद से देश में जो माहौल है और सरकारी एजेंसियां जैसे बेरहमी से ताबड़ तोड़ छापे मार कार्यवाही कर रही हैं उस से जादो कुनबे में खलबली है । मोदिया कब घुस आयेगा घर में क्या पता ??????
ऐसे में सपा समर्थक एक बहुत बड़ी पूंजीपति लॉबी neutral हो गयी है । कयास तो यहाँ तक हैं कि अमित शाह का प्रेमपत्र पहुँच चुका है ।
भोजपुरी में कहावत है ……
आन्ही आवै बइठ गंवावे …….
मने जब जोर की आंधी आये तो कुछ सर सामान बटोरने के कोशिश नहीं करनी चाहिए ……. जो उड़ता है उड़ जाने दो ……. कहीं किसी कोने में दुबक के पहले जान बचाओ ….. जान बची रही तो फिर देखेंगे खोजेंगे ……
क्या गया क्या बचा ……
UP में आंधी चल रही है । सब उड़ा ले जायेगी ।

teacher प्रिंसिपल जल्लाद जैसा नहीं होना चाहिए

बात 1970 की है । यानी आज से कोई 46 साल पहले की ।
आप बीती है ।
जो खुद पे बीती हो , first hand experiences ……. जीवन के अनुभव ही सब कुछ सिखाते हैं ।
मेरी उम्र 5 साल की थी ।
सिकंदराबाद के फौजी इलाके त्रिमलगिरी की फौजी बैरक में उन दिनों KV चलता था ।
KV बोले तो केंद्रीय विद्यालय ।
उसमे 1st क्लास में मेरा एडमिशन हुआ । मेरी क्लास टीचर एक तेलुगू महिला थी । उसके दांत बाहर को निकले हुए थे । शायद उस जमाने में अभी Orthodontistry अभी नहीं आई थी वरना वो भी अपने दांत ठीक करा लेती ।
तो वो मेरे जीवन का पहला अनुभव था स्कूल जाने का ।
कुछ दिनों बाद की बात है …… तब जब कि हम स्कूल के उस माहौल में हिलमिल गए थे ……. क्लास ख़त्म हुई थी …… क्लास टीचर को बच्चों ने घेर रखा था । और कुछ parents भी थे शायद …… कुछ बच्चों की मम्मियाँ थीं ……… और मैं अपनी मैडम से कुछ कहना चाहता था । पर वो इतने लोगों से घिरी हुई थी कि मेरी बात सुन नहीं रही थी ।
तो मैंने ठीक वही काम किया जो मैं अपनी माँ के साथ करता था , ऐसी परिस्थिति में , जब वो मेरी बात नहीं सुनती थीं । मैंने उनकी ठुड्डी ( chin )पकड़ के अपनी तरफ खीच ली ……. पहले मेरी बात सुनो ……. मेरा ऐसा करना था कि उस class teacher ने मुझे बहुत बुरी तरह झिड़क दिया ।
Hey ……. don’t touch me ……. don’t you ever touch me ……..
उस दिन मझे जिंदगी का एक बहुत बड़ा सबक मिला …….. दुनिया में सिर्फ एक औरत है जो तुम्हारी माँ है ……. उसके अलावा और कोई नहीं जिस से तुम्हें माँ का स्नेह और वात्सल्य मिलेगा ……..
मैं दरअसल अपनी class teacher को माँ समझने की भूल कर बैठा था ।
उसके बाद फिर कभी मुझे अपनी किसी टीचर के प्रति माँ जैसी feeling नहीं आई ।
फिर कालान्तर में नियति स्वयं मुझे और मेरी पत्नी को शिक्षण कार्य में घसीट लायी ।
हमारा स्कूल कोई traditional स्कूल न था । हम दोनों education के लिए formally trained भी न थे । और कोई बताने सिखाने वाला भी न था । जो कुछ भी सीखा समझा खुद ही ठोकरें खा खा के trial n error method से सीखा । सीखने में बहुत समय भी लगा ।
शुरुआत पूर्वी उत्तरप्रदेश के एक गाँव से की थी जहां पेड़ के नीचे बैठा के पढ़ाया करते थे । फिर नियति जैसे दिल्ली से माहपुर ले गयी थी वैसे ही माहपुर से जालंधर ले आई ।
यहाँ का set up माहपुर से कुछ अलग था ।
यहाँ मेरी पत्नी ने एक स्कूल में principal के रूप में काम करना शुरू किया ।
मुझे ये कहते हुए गर्व होता है कि मेरी पत्नी मेरी सबसे होनहार student रही । उसने मुझसे सबसे ज़्यादा सीखा है । शायद समय भी उसी को सबसे ज़्यादा मिला …… तो हमें लगा कि इन स्कूलों में आखिर प्रिंसिपल की इमेज जल्लाद वाली क्यों होती है । बच्चों के लिए भी और स्टाफ के लिए भी ……. प्रिंसिपल मने जल्लाद …….
सो स्कूल में मैडम जी की कार्य शैली पहले दिन से ही एक माँ वाली रही । नया नया स्कूल था । बच्चे सब छोटे थे । सो मैडम जी उन बच्चों को गोद में उठाये दिन भर घूमती ……. सारा दिन चुम्मियां लेती ……. एक दिन एक बच्चे के माँ बाप आ गए जी स्कूल ….. शिकायत ले के …… हमको लगता है कि बच्चे के साथ स्कूल में कोई abuse हो रहा है …… कल बच्चे के गाल लाल थे ……. मैडम जी ने बताया कि बात सही है जी …… वाकई abuse हो रहा है और खुद मैडम ही abuse कर रही हैं …….. ऐसे …… और उन्होंने फिर उसे उठा के 5 -7 चुम्मियां ले डाली …….. पूरे गाल पे लिपस्टिक लग गयी ……
parents हथप्रभ …….
बच्चे जब भी मैडम को देखते भाग के लिपट जाते । फिर कुछ साल बाद एक बच्चे ने घर जा के शिकायत की …… ppl मैडम हूण प्यार नी करदी ……. उसकी माँ एक दिन office में आई …… बोली , मैडम टाइम निकाल के कभी कभी एक आधी चुम्मी ले लिया करो …… कहता है मैडम हूण प्यार नी करदी । मैडम ने हंस के जवाब दिया ……. अब 4th में हो गया है । आजकल गोदी में nursery LKG वाले चढ़े रहते हैं ।
वो तमाम बच्चे 10th के बाद जब दुसरे स्कूल में गए तो उन्होंने अपने parents को बताया कि इस स्कूल में वो माहौल नहीं जो उसमे था । यहाँ के टीचर्स अजनबियों सा व्यवहार करते हैं । मानो Aliens हों । कोई भावना जैसे है ही नहीं । बेजान पत्थरों से ………

teacher student में एक bond होना चाहिए जो उन्हें भावनात्मक स्तर पे जोड़े ……. यदि वो bond develop नहीं हुआ तो education होगी ही नहीं । शिक्षा का प्रवाह teacher से student तक होगा ही नहीं ……..
खासकर primary और secondary शिक्षा में तो ये bond होना बहुत ही ज़रूरी है ।
ये वो पहली condition है जो बच्चे के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास के लिए नीव का काम करती है ।

भीलवाड़ा की पप्पू की कचोरी

पिछले एक साल में 3 बार भीलवाड़ा राजस्थान जाने का मौक़ा मिला ।
मैंने अबतक जो थोड़ा बहुत हिन्दुस्तान घूमा देखा …….. और खाया पीया …….
मैं कह सकता हूँ कि भारतीय भोजन में राजस्थानी cuisine अद्भुत है ।
मज़े की बात ये कि राजस्थान में भी विभिन्न क्षेत्रों यथा मेवाड़ मारवाड़ शेखावटी हाड़ौती ……. सबका रहन सहन खान पान अलग है । ढेर सारी समानताओं के बाद भी बहुत भिन्न ।
एक समानता तो ये दिखी कि घी तेल का मुक्त हस्त से और विशाल ह्रदय से प्रयोग । मने राजस्थानी भोजन बहुत रंग बिरंगा होता है । हल्दी और मिर्च का प्रयोग ज़्यादा होता है । अब चूँकि घी तेल खूब है और उसमे हल्दी और लाल मिर्च ठोक के पड़ी हो तो dish तो रंगीन बनेगी ही ।
मिर्च के प्रति राजस्थान की दीवानगी मुझे बहुत fascinate करती है ।
उसमे भी खासकर भीलवाड़ा ……. यूँ तो पूरे राजस्थान में ही मिर्च खूब खायी जाती है पर भीलवाड़ा की तो बात ही निराली है । आप मिर्च खाने के कितने भी शौक़ीन हों पर भीलवाड़ा में आपको अपने मेजबान से कहना ही पड़ता है ……. भैया …. बहिन जी …… मिर्च ज़रा सम्हाल के …….
भीलवाड़ा में तो बाकायदा एक मिर्ची बाज़ार है । सब्जी मंडी में और किराना बाज़ार में बीसियों किस्म की हरी मिर्च और लाल मिर्च मिलती हैं । सिर्फ रंग वाली , हल्की तीखी , तीखी , और बेहद तीखी …… इसी तरह हरी मिर्च में भी विभिन्न प्रयोगों में आने वाली मिर्च मिलेगी आपको । फीकी , बहुत हलकी तीखी , सामान्य और ज़हर जैसी तीखी …….. सब्जी मंडी में मिर्च की जो variety मैंने भीलवाड़ा में देखी वो हिन्दुस्तान में और कहीं नहीं देखी । यूँ मिर्च खाने के शौक़ीन तो जोधपुर वाले भी कम नहीं पर भीलवाड़ा की बात ही कुछ और है ।
तो इस बार भैया हुआ यूँ कि भीलवाड़ा जा के करेला नीम चढ़ गया ।
मिर्च का शौक़ीन मैं और मेरी होस्ट लक्ष्मी दी ……. वो मुझसे बहुत आगे ।
पिछली बार जब गए तो उन्होंने हमारे लिए राजस्थानी कचोरी मंगाई । साथ में थे भाई राजेश जी सेहरावत , पुष्कर भाई और अवनीश जी ……
लक्ष्मी ने कचोरी परोसी ……. तो राजेश भाई चूँकि हरियाणवी ठहरे …… और हरियाणा वाले तो मिर्च के नज़दीक से भी न गुजरते । उन ने surrender कर दिया ……. म्हारे बस की ना है ।
पुष्कर भाई लखनवी मिजाज़ के हैं …… लखनऊ में तीखेपन की कोई जगह नहीं ……..
अवनीश बेशक गोरखपुर के हैं और गोरखपुरिये मिर्च खा लेते हैं पर उन्होंने भी थोड़ी सी खा के हाथ खड़े कर दिए ( शायद पान मसाले के कारण )
अपन पूरी खा गए और ये भी कहा कि अबे क्या ख़ाक तीखी है …….. एक दम सामान्य मिर्च है …….
लक्ष्मी ने कहा , दादा ये तो बिना मिर्च की थी ।
अभी मंगाती हूँ भीलवाड़ा की मशहूर पप्पू की कचोरी ……..
और आई जो भैया पप्पू की कचोरी …….
पहला टुकडा खाया ……. हाँ …… इसे कहते हैं तीखी कचोरी …….
वाह क्या बात है ….. वाह ……
आधी कचोरी खाते खाते वो अपना रंग दिखाने लगी …….. और फिर उसके बाद तो आँख नाक से पानी और कानों से धुआँ ……. वाह क्या कचोरी थी …….. किसी तरह खा के ख़तम की …….
फिर शुरू हुआ उसका postmortom बोले तो विश्लेषण …….
क्या खासियत है पप्पू की कचोरी की ……..
उसकी पीठी बोले तो filling में बढ़िया हींग , और बेसन , मूंग की दाल , अदरक , लाल मिर्च , लौंग और ढेर सारी काली मिर्च ……. खूब सारी ……. वो तीखापन लाल मिर्च का नहीं बल्कि काली मिर्च का था ……..
आपको भी यदि कभी भीलवाड़ा जाने का मौक़ा मिले तो पप्पू की कचोरी ज़रूर try कीजिये ।
पूरी न सही …… एक टुकडा ही सही …….

अगली स्ट्राइक के लिए मोदी की सेना तैयार है 

आजकल कांग्रेस के युवराज चूतिया नंदन श्री राहुल गांधी जी महाराज लोगों को ये बताते फिर रहे हैं की cash के रूप में कालाधन सिर्फ 6% है । शेष काला धन तो भैया property , gold और विदेशी tax heavens में जमा है ……..
अब ये कोई ऐसा भी गुप्त ज्ञान नहीं जो चूतियानंदन को पता हो पर सरकार को न पता हो ?
सरकार बखूबी जानती है जनाब । और ये जो कहा जा रहा है न , कि सरकार ने नोटबंदी से पहले तैयारी नहीं की …….. अजी जनाब , खूब तैयारी की …… बड़ी कायदे से तैयारी की …….
बाबा रामदेव के साथ रह के मैंने जो देखा समझा , उस से मुझे ये समझ आया कि इस नोट बंदी की तैयारी मोदी जी ने 2011 में शुरू कर दी थी । जी हाँ 2011 से । जब कि अभी वो गुजरात के CM थे उन्होंने देश का अगला PM बनने की तैयारी शुरू कर दी थी । देश की समस्याओं को समझना और उनके समाधान खोजना शुरू कर दिया था ।
मेरे पास बड़ी पुख्ता जानकारी है कि देश के एक मूर्धन्य economist जो कुछ दिनों के लिए पातंजलि आये हुए थे और बाबा रामदेव को economics का एक crash course करा रहे थे , उन्ही दिनों वो गुजरात में मोदी जी के भी वित्तीय सलाहकार थे ……. मोदी ने तैयारी 2011 से ही शुरू कर दी थी …… उन्होंने इन मामलों की गहरी समझ हासिल की है …… समस्या को समझा और फिर समाधान खोजे ।
2014 में शपथ लेते ही मोदी ने पूरे देश में जो गरीबों के जन धन खाते खोलने शुरू किये वो इसी नोटबंदी का हिस्सा था । पूरे देश में जो डेढ़ लाख किलोमीटर optical fibre cable बिछाने का जो काम हुआ वो देश को cashless बनाने के लिए net connectivity देने का एक हिस्सा है ।
काले धन पे स्ट्राइक कैसे होगी इसकी पूरी तैयारी की है मोदी ने ।
नोटबंदी के बाद अब अगला हमला बेनामी संपत्ति पे होना है ।
इसकी बिसात भी बिछ चुकी है ।
Benami Transactions (prohibition) Amendment Bill 2015 में लोकसभा ने पास कर दिया । 2014 में ही देश के सभी Sub Registrar को और Development Authorities को आदेश दे दिए गए कि 2006 के बाद से 30 लाख से ऊपर की सभी properties की registry का ब्योरा आयकर विभाग को भेजा जाए । ख़ास तौर पे High ways के किनारे खरीदी गयी संपत्तियों पे focus किया गया । सरकार के पास ऐसी पुख्ता जानकारियाँ थीं की Agra Delhi Highway , NH 24 और कुंडली मानेसर पलवल express way के किनारे किसानों की ज़मीनें औने पौने दामों में खरीद के बहुत मोटे मुनाफे के साथ बेचीं गयी हैं । ये सारी property बेनामी है । 2006-7 और 2011-12 में जब property बाज़ार में boom था तो उस समय registered सारी संपत्ति का 30 % से ज़्यादा बेनामी है ……..
सरकार ने बेनामी संपत्ति पे surgical Strike की तैयारी पूरी कर ली है ।
नया क़ानून बेहद सख्त है जिसमे बेनामी संपत्ति को जप्त करने के अलावा 25% panelty के साथ 7 साल की सज़ा का भी प्रावधान है । इसका मतलब ये कि यदि किसी ने अपने नौकर के नाम एक करोड़ का flat लिया है तो उस flat में तो अब मोदी जी रहेंगे , सेठ जी 25 लाख panelty देंगे और फिर खुद 7 साल जेल खटेंगे ।
आयकर विभाग ने 200 teams का गठन कर लिया है और वो बेनामी संपत्ति पे surgical strike के लिए एकदम तैयार हैं ।
इसके अलावा आजकल जो कालेधन पे छापेमारी चल रही है उसकी कागज़ी कार्यवाही के लिए सवा लाख retired आयकर अफसरों को संविदा पे नियुक्त किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त एक लाख से अधिक नयी नियुक्तियां भी आयकर विभाग में की जा रही हैं ।
सरकार ने दागी बैंक कर्मियों और RBI कर्मियों की पहचान कर ली है । इसके अलावा 8 Nov के बाद जमा धन राशियों और सम्बंधित बैंक खातों को भी पहचान के black money धारकों और काले को सफ़ेद करने वालों की पहचान भी हो गयी है । आयकर विभाग अगले कई साल तक बेहद व्यस्त रहेगा ।
अगली सर्जिकल स्ट्राइक कभी भी हो सकती है ।
कभी भी ……. 1 जनवरी को भी …….
देश के प्रॉपर्टी बाज़ार मे पहले ही 30 % की गिरावट थी । मने 100 का माल 70 में बिक रहा था । इस स्ट्राइक के बाद 30 % और गिरेगा ।
मने 100 का माल 40 में बिकेगा ।
That will be the right time to invest in property ……
अगर आपके पास white money हो तो ……..
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काश करीना कपूर ने ये इतिहास पढ़ा होता तो बेटे का नाम अजीत , जूझार , जोरावर या फ़तेह रखती .

इतिहास में बहुत कम मिसालें मिलेंगी ……. जब किसी बाप ने कौम के लिए ……. राष्ट्र के लिए …….. एक हफ्ते में अपने 4 – 4 बेटे क़ुर्बान कर दिए हों ।
आज पूस का वो आठवां दिन था जब दशम् गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के दो साहबजादे चमकौर साहब के युद्ध में शहीद हो गए । बड़े साहबजादे श्री अजीत सिंह जी की आयु मात्र 17 वर्ष थी । और छोटे साहबजादे श्री जूझार सिंह जी की आयु मात्र 14 वर्ष थी ।


सिखों के आदेश (गुरुमत्ता) की पालना में गुरु साहब ने गढ़ी खाली कर दी और सुरक्षित निकल गए ।

पिछली रात माता गूजरी दोनों छोटे साहिबजादों के साथ गंगू के घर पे थीं ।
उधर चमकौर साहिब में युद्ध चल रहा था और इधर गनी खां और मनी खां ने माता गूजरी समेत दोनों छोटे साहिबजादों को गिरफ्तार कर लिया ।

अगले दिन यानि पूस की 9 को उन्हें सरहिंद के किले में ठन्डे बुर्ज में रखा गया ।

10 पूस को तीनों को नवाब वजीर खां की कचहरी में पेश किया गया ।
शर्त रखी …….इस्लाम कबूल कर लो ……वरना …….
वरना क्या ?????
मौत की सज़ा मिलेगी ……

पूस का 13वां दिन ……. नवाब वजीर खां ने फिर पूछा ……. बोलो इस्लाम कबूल करते हो ?
छोटे साहिबजादे फ़तेह सिंह जी आयु 6 वर्ष ने पूछा ……. अगर मुसलमाँ हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न ?
वजीर खां अवाक रह गया ……. उसके मुह से जवाब न फूटा …….
तो साहिबजादे ने जवाब दिया कि जब मुसलमाँ हो के भी मरना ही है तो अपने धर्म में ही अपने धर्म की खातिर क्यों न मरें ……..

दोनों साहिबजादों को ज़िंदा दीवार में चिनवाने का आदेश हुआ ।
दीवार चीनी जाने लगी । जब दीवार 6 वर्षीय फ़तेह सिंह की गर्दन तक आ गयी तो 8 वर्षीय जोरावर सिंह रोने लगा ……..
फ़तेह ने पूछा , जोरावर रोता क्यों है ?
जोरावर बोला , रो इसलिए रहा हूँ कि आया मैं पहले था पर कौम के लिए शहीद तू पहले हो रहा है ……
उसी रात माता गूजरी ने भी ठन्डे बुर्ज में प्राण त्याग दिए ।

गुरु साहब का पूरा परिवार ……. 6 पूस से 13 पूस …… इस एक सप्ताह में ……. कौम के लिए …… धर्म के लिए …… राष्ट्र के लिए शहीद हो गया ।

जब गुरु साहब को इसकी सूचना मिली तो उनके मुह से बस इतना निकला …….

इन पुत्रन के कारने , वार दिए सुत चार ।
चार मुए तो क्या हुआ , जब जीवें कई हज़ार ।

मित्रो …… आज यानी 22 December पूस की 8 -9 है …….
दोनों बड़े साहिबजादों , अजीत सिंह और जुझार सिंह जी का शहीदी दिवस ……..

कितनी जल्दी भुला दिया हमने इस शहादत को ?
सुनी आपने कहीं कोई चर्चा ? किसी TV चैनल पे या किसी अखबार में …….
4 बेटे और माँ की  शहादत ……. एक सप्ताह में …….

पृथ्वीराज कपूर की नवासी ने अगर ये इतिहास पढ़ा होता तो शायद अपने बेटे का नाम तैमूर न रखती ।

अजीत , जूझार , जोरावर या फ़तेह सिंह रखती

कोई नहीं बचेगा ……. जाल बिछ गया है

मोमता दी बंगाल में हलक फाड़ के चिल्ला रही हैं ……. ये संघीय ढाँचे पे प्रहार है ……. मोदी सरकार राज्यों के  चीफ सेक्रेटरी के घर दफ्तर पे छापे मार के करोड़ों रु के नोट और सौ सौ किलो सोना बरामद कर रही है ……… बेनामी संपत्तियों के कागज़ात जप्त किये जा रहे हैं ………… ये तो मोदी सरकार का संघीय ढाँचे पे प्रहार है …………मोमता दी कहती हैं की चोर चीफ सेक्रेटरी को पकड़ने से पहले राज्य सरकार को विश्वास में लेना चाहिए ……….

गौर तलब है की तमिल नाडू के चीफ सेक्रेटरी P Ram Mohan Rao के घर दफ्तर पे जब इनकम टैक्स विभाग ने छापा मारा तो उनके साथ सुरक्षा के लिए तमिल नाडु पुलिस की जगह CRPF का सशस्त्र बल था …….. आज समाचार मिल रहे हैं कि राम मोहन राव के बेटे विजय राव के संस्थानों पे भी छापे मारे जा रहे हैं …………

राजनीतिक हलकों में ये सवाल भी पूछा जा रहां है कि अगर जय ललिता आज जीवित होतीं तो भी क्या इनकम टैक्स विभाग तमिल नाडु के चीफ सेक्रेटरी पे इस तरह दबिश देता ? राम मोहन राव की नियुक्ति स्वयं जयललिता ने की थी ………शाही पनीर सेलवम को तो राव विरासत में मिले ………  चीफ सेक्रेटरी राज्य की कैबिनेट के विश्वास पर्यंत पद पे रहता है ……… चीफ सेक्रेटरी पे दाग राज्य की कैबिनेट पे दाग माना जाता है ………. राजनीतिक हलकों में इसे मोदी सरकार का एक अत्यंत दुस्साहसिक कदम माना जा रहा है ……… सवाल ये है कि इतनी बड़ी मछली पे हाथ डालने से पहले विभाग ने अपने विभाग के सर्वोच्च अधिकारियों और राजनैतिक आकाओं को संज्ञान में लिया था ? यानि जेटली साहब की आज्ञा से छापे मारे गए ? जेटली ने मोदी को संज्ञान में लिया होगा ?

भोजपुरी में कहावत है …….. भैंस बियाती है तो बैलों की *** फटती है …….. छापा तमिलनाडु में पडा पर फटी समता , ममता , माया की पड़ी है …….. फटी जादो परिवार की पडी है ……. गांधी परिवार की फटी पड़ी है …….. इन सबकी गर्दन पे तलवार लटकी पड़ी है ……..

टीम मोदी नोटबंदी को एक राजनैतिक हथियार के तौर पे इस्तेमाल कर रही है ……. टीवी में दिन रात इनकम टैक्स की छापेमारी और काले धन की बरामदगी दिखाई जा रही है …….. P Ram Mohan Rao पे हाथ डाल के मोदी सरकार ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं …….. बड़ी मछलियाँ जाल में फसने लगी है …….. बड़ी मछलियों को सन्देश पहुँच गया है ……. कोई नहीं बचेगा ……..

लगता है कि कांग्रेस 44 से 4 पे आएगी ……. राहुल गांधी के नेतृत्व में ।

 

आपको याद होगा , उड़ी हमले के बाद मोदी जी की लोकप्रियता का ग्राफ अचानक बहुत तेजी से नीचे गिरा । पूरे देश में उडी हमले को ले के आक्रोश था । मोदी समर्थक ( भक्त )निराश थे और अनाप शनाप बक रहे थे । मोदी विरोधी तो बाकायदा उड़ी हमले को celebrate कर रहे थे । उन्हें देश से कोई मतलब नहीं । उड़ी हमले के रूप में उन्हें वो छड़ी मिल गयी थी जिससे वो मोदी को पीट सकते थे । उनका तर्क कुछ यूँ था ……. देख लो , फेंकू मोदी भी हिजड़ा निकला ……. हमारी तरह ।
लोग चुनाव सभाओं में मोदी के वक्तव्य शेयर करने लगे । ख़ास तौर पे वो clipping जो मोदी जी ने रजत शर्मा के कार्यक्रम आज की अदालत में बोला था …… घर में घुस के मारूंगा . लोग वही क्लिपिंग दिखा के कटाक्ष कर रहे थे ।
और फिर जब मोदी जी ने POK में घुस के surgical strike कर दी तो सब हक्के बक्के रह गए ।
अवाक् ……. भक्त ख़ुशी से नाचने लगे और विरोधियों के मुह खुले रह गए । उनके मुह से बस यही निकला …….. नहीईईईईईईई…….. ऐसा नहीं हो सकता …….. कह दो कि ये झूठ है …… झूठ है …… झूठ है ……. कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई ……. प्रूफ दिखाओ ……. army झूठ बोलती है …… मोदी झूठ बोलता है ……. हम ऐसे कैसे POK में घुस के मार सकते हैं ??????
उड़ी हमला मोदी के लिए एक credibility issue बन गया था । मोदी की साख दाव पे लगी थी ।
POK में हमला कर मोदी ने वो साख बचा ली ……. आम भारतीय के मन में मोदी जी के प्रति विश्वास दृढ हुआ ……. मोदी जुबान का पक्का है ……. जो कहता है वो करता है ।
मोदी की credibility नोटबंदी के बाद और बढ़ी है । अब पूरा देश और मोदी के कट्टर विरोधी भी ये मानने लगे हैं कि मोदी एक ज़बरदस्त नेता है ……. साहसिक निर्णय ले सकता है ……. आज मोदी की साख एक ऐसे नेता की है जो राष्ट्रभक्त है …… राष्ट्र को समर्पित है ……

मोदी की यही credibility विपक्षी नेताओं के लिए मुसीबत बनी हुई है । इसके विपरीत राहुल गाँधी की credibility देश में zero है । वो सिर्फ एक चुटकुला बन के रह गए हैं । समस्या ये है कि वो उल जुलूल बयानबाजी और झूठे तथ्यहीन आधारहीन आरोप लगा के अपना और ज़्यादा मज़ाक बनवा रहे हैं ।
राहुल को चाहिए कि वो अपनी विश्वसनीयता बहाल करें ……… मोदी पे झूठे आरोप लगा के वो अपनी साख को मिट्टी में मिला रहे हैं ।
जिस प्रकार मोदी दिनों दिन ऊपर उठ रहे हैं और राहुल गांधी नीचे गिर रहे हैं , लगता है कि कांग्रेस 44 से 4 पे आएगी ……. राहुल गांधी के नेतृत्व में ।

मोदी गुज्जू व्यापारी है । एक पैसे के लिये जान दे देगा

किस्सा 1990 का है । तब जबकि मैं 25 साल का था और मातृभूमि राष्ट्र भक्ति देशप्रेम जैसे चूतिया चक्करों में पड़ के , SAI की 3 महीने पुरानी Central govt job को लतिया के , पंजाब के जालंधर शहर की जन्मी पली नव विवाहिता पत्नी को लिए ऊपी के जिला गाजीपुर चला आया । धर्म पत्नी ने दिल्ली में पूछा , हे पतिदेव , प्राण नाथ ……. कहाँ चले ? मैंने कहा प्रिये , दिल मेरा लगता नहीं इस बेदिल बेजान शहर में …. चल गाँव चलें । पेड़ के नीचे बैठा के बच्चे पढ़ाएंगे । और ये भी आज्ञाकारी पत्नी की तरह पीछे पीछे चल पड़ी । April May june की भीषण गर्मी ……. पुत्तर परदेस में बिजली तब भी 6 घंटे ही आती थी …….. हमने 25 जून 1990 को अपने घर के आँगन में एक पेड़ के नीचे ……. ठीक वहीं जहां आज उदयन चलता है ……. गाँव गिरांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया । कुछ दिन में लगभग 200 से ज़्यादा बच्चे आने लगे ……. परिवार भी पालना था …… फीस रखी 20 रु ……. स्वयं KV में पढ़े थे सो हूबहू KV ही चला दिया । NCERT का syllabus और books ……. 20 रु में …….
साल बीता । बच्चे बढ़ के 300 हो गए । कुछ local teachers भी रख लिए । उनको वेतन भी देना था । सो फीस 10 रु बढानी पड़ी । 30 रु …….
फिर गाँव वालों ने गणित लगाया …… 300 ×30 = 9000

अरे ई अजीत सिंघवा हमहन से 9000 रु कमाए लागल ……. लूट है जी लूट …… बहुत बड़ा षड्यंत्र है जी ……. देखते ही देखते आधे बच्चे गायब हो गए । धीरे धीरे ये स्थिति आ गयी कि 200 बच्चों में से 150 बच्चे 8 km दूर सैदपुर से आते थे और अगल बगल के गाँव से सिर्फ 20 बच्चे । उसमे भी हमारे गाँव माहपुर जिसकी आबादी 1200 थी उसमे से सिर्फ 3 बच्चे । यहाँ तक कि मेरे अपने परिवार (extended family) का एक भी बच्चा नहीं पढता था ।
3 साल तक यूँ ही चलता रहा । अंत में सैदपुर के parents ने दबाव डालना शुरू किया कि आप लोग यहाँ क्या कर रहे हैं । 200 बच्चे इतनी दूर से कष्ट सह के यहाँ आते हैं ……आप लोग वहीं चलिए ….. सैदपुर । और इस तरह Mahpur Public School माहपुर छोड़ सैदपुर चला गया ।
MPS का पहला छात्र 5 वर्षीय आशुतोष था जो आज Army में Major है । कुल 8 साल यानी 1st से 8th तक पढ़ा हमसे । उसके अलावा सैकड़ों हज़ारों बच्चे आज बेहद सफल हैं । कुछ FB पे भी हैं मेरी लिस्ट में ……. जिन बच्चों को उनके माँ बाप ने साल भर बाद 30 रु बचाने के लिए हटा लिया उनपे कोई टिप्पणी उचित नहीं ……..

आज देख रहा हूँ …… फिर वही कहानी दोहराई जा रही है …..

मोदी जी देश को cashless बनाने का सपना देख रहे हैं तो कुछ लोग कम्पनियों का कमीशन जोड़ रहे है । अरे भाई मोदी गुज्जू है …… एक पैसे के लिए जान दे देगा …… गुज्जू है …… उसका गणित और उसकी व्यापारिक बुद्धि हमसे आपसे बहुत तेज़ है । वो debit card और mobile banking कम्पनियों को चूस लेगा …… आप निश्चिन्त रहिये ।
कौन क्या कमा लेगा इसे छोडिये । cashless होने में देश को क्या फायदा है ये सोचिये ।

 

वेश्या चाहती है कि दुनिया की हर औरत वेश्या बना दी जाए

वेश्या की एक समस्या होती है ।
मोहल्ले में इज्ज़त ……. मान सम्मान ।
समाज में सिर उठा के नहीं चल सकती ।
उसका मुकाबला रहता है समाज की इज्ज़तदार औरतों से । अगर ये न होती तो उसे कोई समस्या न होती । वेश्याओं के जब मोहल्ले बस जाते हैं ……. नगर के नगर ……. तब किसी वेश्या को कोई दिक्कत नहीं होती ……
जैसे Bangkok ……… सुना है कि पूरा देश ही वेश्याओं का है । वहाँ तो सुना है कि वेश्या न होना समस्या बन जाता है ……..
बहरहाल ……. भारत जैसे देश में , वेश्या अपनी सभी समस्याओं का एक ही हल खोज पाती है । पूरे शहर की हर औरत को वेश्या बना दो …….. सभी सुहागनों , सभी ब्याहताएं वेश्या घोषित कर दो …….

आज राहुल गाँधी ने यही किया । खुद अपनी माँ के साथ National Herald के केस में 5000 करोड़ की धोखाधड़ी गबन भ्रष्टाचार के केस में जमानत पे है …… 10 साल तक जिस सरकार के unconstitutional सुप्रीमो रहे वो 12 लाख करोड़ रु के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी है ……. Augusta Wasteland केस में इटली की सर्वोच्च अदालत में रिश्वत लेने के आरोप सिद्ध हुए हैं …….. वाहे वेश्या पुत्र राहुल गाँधी आज नरेन्द्र मोदी पे भ्रष्टाचार के झूठे फर्जी तथ्यहीन आरोप लगाते देखे गए ।
नोटबंदी को 8 लाख करोड़ का भ्रष्टाचार बताते फिर रहे हैं ।

वेश्या पुत्र चाहता है कि समाज में हर कोई वेश्या हो जाए जिस से कि उसके परिवार की कालिख न दिखे ।

 

नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

Ford motors के मालिक Henry Ford निपट अंगूठा टेक अनपढ़ थे । जब वो अपनी सफलता के शिखर पे थे तो एक स्थानीय अखबार ने अपने एक लेख में उनको अनपढ़ लिख दिया । Ford को ये बड़ा नागवार गुजरा और उन्होंने उस अखबार पे मानहानि का मुकद्दमा ठोक दिया ।
सुनवाई शुरू हुई । Ford के वकील ने अखबार पे अपना आरोप दोहराया । आपने Mr Ford को अनपढ़ कहा ? सम्पादक बोला , हाँ कहा ……. और ठीक ही तो कहा …… अनपढ़ ही तो हैं Mr Ford . बुलाओ कटघरे में ……. अभी दो मिनट में सिद्ध कर देंगे कि अनपढ़ हैं ।
Ford कटघरे में आये तो सम्पादक ने उनसे किताबी सामान्य ज्ञान मने GK के कुछ सवाल पूछे । जाहिर सी बात है उनमे से एक का भी जवाब Ford के पास न था । सम्पादक ने जज से कहा …… अब और क्या प्रमाण चाहिए ?
Ford ने जवाब दिया ……. जज साहब ये माना कि मुझे इन सवालों के जवाब नहीं आते । ऐसे भी बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब इन सम्पादक महोदय को नहीं पता होंगे ।
पर मुझे हे पता है कि इन सवालों के जवाब कहाँ मिलेंगे ? कौन देगा इनका जवाब ?किस सवाल को कैसे हल करना है या करवाना है ……. मुझे ये पता है । मैं उन आदमियों को जानता हूँ जिन्हें इन सवालों के जवाब मालूम है । यदि आप आज्ञा दें तो मैं अभी एक मिनट में इन सभी सवालों के जवाब देने वालों की फ़ौज खड़ी कर सकता हूँ ।
मुझे सवालों के जवाब खोजना आता है ।
अपनी जिंदगी का तो शुरू से ही एक फलसफा रहा ।
समस्याओं का रोना मत रोओ । समाधान खोजो ।
Don’t discuss the problems . Find Solutions .
समस्याओं का क्या है ? वो तो लगी रहेंगी ।
सवाल पे focus मत करो । अपनी सारी ऊर्जा उसका हल खोजने में लगाओ ।
एक progressive समाज यही करता है । उस समाज के leaders सवालों और समस्याओं पे अपनी ऊर्जा और समय नष्ट नहीं करते बल्कि समाधान खोजने में करते हैं ।
माना कि नोटबंदी ने सवाल खड़े किये ……. समस्याएं पैदा की ……
8 Nov के बाद से हमारे leaders , हमारी press , हमारे institutions सिर्फ इस से उत्पन्न समस्याओं का रोना रो रहे हैं ……… हाय मर गए …… cash नहीं है ……. नेता और प्रेस सिर्फ और सिर्फ bank और ATM की लाइन में खड़े लोगों के कष्ट दिखा सुना रहे हैं ……. कोई ये नहीं सुझा रहा कि आखिर हल क्या है । समस्या का समाधान क्या है ?
विकल्प क्या हैं ?
cash अगर नहीं है तो कैसे survive करें ?
कैसे काम चलायें ?
cashless या less cash कैसे हुआ जाए ?

TV का पत्रकार लाइन में खड़े आदमी से पूछता है कब से खड़े हो ? कितने दिन से खड़े हो ? कितना कष्ट है ?
मैं पत्रकार होता तो पूछता …….. यहाँ क्यों खड़े हो ?
क्यों चाहिए cash ?
चेक से काम क्यों नहीं करते ?
लाओ अपना फोन दो , मैं सिखाऊँ कैसे करते हैं Net banking और Mobile बैंकिंग ……… cash अगर नहीं है तो विकल्प क्या हैं ? शिक्षा और समाचार माध्यमों को इसपे focus करना चाहिए । leaders को इसपे focus करना चाहिए ।
पर इसके विपरीत वो देश की जनता को ये समझाने में लगे हैं कि हम क्यों खोजें समाधान ?

आखिर ये समाधान हमपे क्यों थोपे जा रहे हैं ?
हम अपने पुराने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ क्यों अपनाएं नयी तकनीक ?
तुम सिर्फ cash दो ……. हमको नहीं चाहिए तुम्हारी नयी तकनीक ……
आज देश की विपक्षी पार्टियां लोगों को भड़का रही हैं …. विद्रोह कर दो ……. दंगा फसाद करो cash के लिए …….. मत होवो cashless या less cash …….. net banking और mobile banking मने समाधान के नुक्सान गिनाये जा रहे हैं ……. खतरे गिनाये जा रहे हैं ……… मोबाइल बैंकिंग को कुछ कम्पनियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया जा रहा है ।

नोट बंदी भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है ……… भविष्य में एक उन्नत भारत का रास्ता इसी नोटबंदी से निकलेगा ……. इसे एक संकट के नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख के इसका समाधान खोजना चाहिए युद्ध स्तर पे ।
नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है