Wrestling coach by profession Social Media writer ....... Traveller ...... loves Biking , cooking,

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साइकिल गयी कबाड़े में हाथी चढ़ गया भाड़े में अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

बॉलीवुड की हिंदी फिल्म का हीरो सर्वगुण संपन्न होता है ।
भलामानस , अव्वल दर्जे का चरित्रवान …… मने फिल्म की हेरोइन और vamp उस से चिपटी रहती हैं , उसे खींच खींच के अपने बेडरूम में ले जाती है पर वो पट्ठा लंगोट का इतना पक्का …… हनुमान जी का ऐसा भगत कि vamp और हेरोइन दोनों को अपनी बहन मानता है ।
हीरो के दो चार यार दोस्त चेले चमाट होते हैं जो हमेशा उसके इर्द गिर्द मंडराते उसकी चम्पी किया करते हैं ।
हीरो एक नंबर का चूतिया , जब लाश से टकराता है तो सीने में घुसे चाकू को पकड़ लेता है ……. और ठीक उसी मौके पे या तो पुलिस आ जाती है या फिर कोई और …… फिर ये पुक्का फार के रोता है कि नहीईईईईईई …….. मैंने खून नहीं किया ……..
फिर जब ये जेल चला जाता है तो उसका वो वफादार दोस्त बार बार एक ही फ़िल्मी डायलॉग बोलता है ……… मेरा दिल कहता है , मेरा दोस्त खूनी नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है …….

मोदी haters को अब भी भरोसा नहीं कि नामाजवादी कुनबे में वाकई जंग छिड़ी है ।
वो कहते हैं ……. नहीं ऐसा नहीं हो सकता …… मेरा दिल कहता है की ऐसा नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है । नामाजवादी कुनबे में झगड़ा नहीं हो सकता ।
17 जनवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
बाप बेटे चचा भतीजा भाई भाई कुत्ते की तरह लड़ रहे हैं ……. एक दुसरे को नोच खसोट रहे ।
मोदी haters को फिर भी लगता है कि कोई बुरा सपना है ……. भ्रम है ……. सुबह जागेंगे तो सब ठीक होगा …….. उधर चुनाव आयोग कंफूज है ।
रामगोपाल 6 पेटी कागच जिनकी संख्या कुल डेढ़ लाख है धर आये चुनाव आयोग में ।
अमर सिंघवा बोल दिया सब फ़र्ज़ी है करो जांच ……..
चुनाव आयोग बोलता है इतना सब कागच जांचने में तो 6 महिन्ना लगेगा । उधर 10 दिन बाद अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
अपने दुआर में कुकुर झौं झौं करने वाले कुत्तों को मालिक चार डंडा मार के दुत्कार देता है । बहुत संभव है कि चुनाव आयोग दोनों बाप बेटा को GPL मार के भगा देगा और चुनाव चिन्ह साइकिल को फ्रीज़ कर देगा मन
अखिलेश कांग्रेस से चुनावी pact के मूड में हैं ।
ऐसे में तय है कि अखिलेश गुट की कम से कम 100 सीट cong को जायेगी मने 100 नामाजवादियों का टिकट कट के कांग्रेसियों को मिलेगा ।
ऐसे में वो 100 क्या चुप बैठेंगे ?
दूसरी तरफ सिपाल मुलायम गुट भी कम से कम 250 से 300 प्रत्याशी मैदान में उतारेगा । UP की हर सीट पे सपा से टिकट मांगते 4 – 6 गंभीर प्रत्याशी हैं । हर सीट पे दो चार करोड़पति टिकट मांग रहे हैं । सिपाल का अब एकमात्र लक्ष्य है ……… अखिलेश को हराना ……..
सिपाल मुलायम अगर किसी को टिकट दे देंगे तो वो 10 – 20 हज़ार भोट तो ले ही मरेगा ।

एक तर्क दिया जा रहा है कि सपा अगर बँटी तो मुसलमान enblock बसपा में shift कर जाएगा ।
काश चुनावी राजनीति में सब कुछ इतना ही सीधा सपाट होता ।
हर मुस्लिम बहुल सीट पे 2 – 3 या 4 प्रत्याशी होंगे । सब वोट काटेंगे ।
2014 के लोस चुनाव में मोदी की सुनामी आती हुई साफ़ दिख रही थी इसके बावजूद मुसलमान एकतरफा enblock voting कर उसे रोक न पाए और बह गए ।

आपको दीखे चाहे न दिखे …….. UP में मोदी की सुनामी आ रही है ……. सब कुछ बहा के ले जाएगी ……. अईकील सईकील आथी हाथी सब बह जाएगा ……..
कोई आजपा भाजपा नहीं ……. कोई कमल नहीं …….. भोट पडेगा मोदी को ……. भोट पडेगा विकास के एजेंडे पे ………. भोट पडेगा भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए …….. भोट पडेगा प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये ……… भोट पडेगा 24 घंटे बिजली के लिए ……. भोट पडेगा शानदार सड़कों के लिए …….. भोट पडेगा गुंडे बदमाशों के खिलाफ ……… भोट पडेगा जातिवाद के खिलाफ ……. भोट पडेगा हिंदुत्व के लिए …….. भोट पडेगा कटुओं की औकात बताने के लिए ।

साइकिल गयी कबाड़े में
हाथी चढ़ गया भाड़े में
अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

Honesty is the best policy

हमरे एक मित्र बड़े भारी बिजनिस मैन उद्योगपति पूँजीपति हैं ।
नोटबंदी के करीब 20 दिन बाद उनसे फोन पे बात हुई ।
बोले सिर खुजाने की फुरसत नहीं ।
जब से मोदी की नोटबंदी हुई , लोग मंदी का रोना रोय रहे । इहाँ ये हाल है कि order पहले की तुलना में तीन गुना ज़्यादा हो गया । प्रोडक्शन रातों रात कैसे हो जाएगा तिगुना । भारी दबाव है । प्लांट 24 घंटे चलाएं तो भी order पूरे नहीं होते ।
मैंने पूछा आखिर ऐसा क्या हुआ ?
बताने लगे , लोग बाग़ बिजनिस मैन अब नोटबंदी के बाद दो नंबर का धंदा छोड़ अब एक नंबर में पूरे बिल पर्चे के साथ काम करने का मन बना रहे हैं । जबकि हमारी फर्म पिछले 10 साल से ही सारा काम एक नंबर में करती आ रही है । हर साल हमारे यहाँ sales tax का छापा पड़ता है । हम उनको हमेशा कहते हैं , अबे हमारी क्या झांट नोचोगे ? सब काम एक नंबर में करते हैं । ल्यो देख ल्यो सब कागच पत्तर …… जो उखाड़ते बने उखाड़ ल्यो ………
सो जब नोटबंदी हुई तो हमारे सब प्रतिद्वंद्वी सब काम धंदा छोड़ जब अपना फटा हुआ लहंगा और सब कागज़ पत्तर सम्हालने में व्यस्त थे तो हम लोग market से आर्डर उठा रहे थे ।
मोदी की नोटबंदी होने वाली है और आने वाले समय में सब काम एक नंबर में करना पड़ेगा …….. ऐसा कोई दिव्य ज्ञान अचानक रातों रात नहीं हुआ । ये एक business हाउस की policy हो सकती है ।
इसके अलावा उनकी एक और policy भी है ।
Quality में compromise नहीं करते । एक नंबर का माल बेचते हैं । बाजार से महँगा बेचते हैं । बाजार कितना भी मजबूर करे , सस्ता घटिया माल मांगे , पर quality में समझौता नहीं करते इसलिए नाम बिकता है । इसलिए आज हालात ये हैं कि जहां बाबा रामदेव की पातंजलि जैसे बड़े brands भी मंदी का रोना रो रहे , आपके पास supply से ज़्यादा demand है ।

पिछले दिनों मैंने एक पोस्ट लिखी थी कि नोटबंदी के बाद Congress , AAP , सपा और बसपा funds की कमी से जूझ रहे हैं । UP में अखिलेश की विकास यात्रा रुक गयी , बहिन जी rally की बजाय press conference कर के काम चला रही हैं ।
पंजाब और गोवा में केजरीवाल के पास मूंगफली खाने को पैसा नहीं है ।
कांग्रेस तो खैर पहले से ही नंग थी ।

मेरे एक मित्र ने सवाल किया कि यदि सबको माने सब पार्टियों को नोटबंदी का असर पड़ा तो आखिर भाजपा को क्यों नहीं पड़ा ।
भाजपा को फर्क इसलिए नहीं पड़ा क्योंकि भाजपा ने राजनाथ सिंह के जमाने से ही policy बना ली थी कि party funds में पारदर्शिता रखेंगे ।
2014 में मोदी के PM बनने के बाद और अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इस नीति का और सख्ती से पालन हुआ । मोदी और अमित शाह की policy एकदम स्पष्ट थी । party funds के सब कागच पत्तर दुरुस्त रखो और पार्टी फण्ड सब एक नंबर में और खाते में रखो ……. दुरुस्त रखो …….. क्यों ?
क्योंकि मोदी जानते थे कि आगे क्या होने वाला है ।
अब आप कहेंगे कि PM मोदी ने भाजपा नेता मोदी को बात leak क्यों की ???????

इस बेईमान दुनिया में भी कुछ लोगों की policy ईमानदारी होती हैं ।
आप ईमानदारी के लिए तो किसी को blame नहीं कर सकते ?

direct और indirect tax कलेक्शन के आंकड़े

वित्त मंत्रालय ने आज देश में direct और indirect tax कलेक्शन के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए ।

1) indirect टैक्स अप्रत्यक्ष कर में Nov 2016 के मुकाबले Dec 2016 में 12.8 % की बढ़ोत्तरी हुई है।

2) April 2016 से Dec 2016 तक indirect tax में 25 % की बढ़ोत्तरी हुई है। ये बढ़ के 6.30 लाख करोड़ हो गया है ।

3) अप्रैल 2016 से Dec 2016 तक Direct टैक्स में 12.01% की बढ़ोत्तरी हुई है।

4) पिछली तीन तिमाही यानी April 2016 से Dec 2016 तक उत्पाद शुल्क यानि excise duty में 43 % की बढ़ोत्तरी हुई है । excise duty का कलेक्शन 1लाख 95 हज़ार करोड़ रु से बढ़ कर दो लाख 79 हज़ार करोड़ रु हो गया है ।

5) नोटबंदी से अधिकतर राज्यों में वैट वसूली भी बढ़ी है। हालांकि, अभी तक प्राप्त डेटा सिर्फ नवंबर तक का है, दिसंबर में हुई वैट वसूली का डेटा करीब 22 जनवरी के बाद मिलेगा।

6) April 2016 से Dec 2016 तक सर्विस टैक्स की वसूली में 23.9 % की बढ़ोत्तरी हुई है। ये 1लाख 48000 करोड़ रु से बढ़ के एक लाख 83000 करोड़ रु हो गया है ।

7) Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले सर्विस टैक्स में 12.4 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

8)Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले उत्पाद शुल्क में 31.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके सबसे अधिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपना योगदान दिया है। गौर तलब है कि जब नोटबंदी के कारण देश में ज़बरदस्त cash crunch था और सभी TV चैनल banks के सामने लंबी लाइन दिखा रहे थे उसी दिसंबर 2016 में factory के gate पे वसूली जाने वाली excise duty मने उत्पाद शुल्क dec 2015 की तुलना में 31% बढ़ गया ।

9) Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले Custom duty की वसूली में 6.3 % की गिरावट आई है। दरअसल, नोटबंदी के दौरान सोने के आयात में भारी कमी दर्ज हुई है और सीमा शुल्क का एक बड़ा हिस्सा सोने पर लगने वाले टैक्स से ही आता है।

10) April 2016 से Dec 2016 तक custom duty में 4.1 % की बढ़ोत्तरी हुई है।

11) Dec 2015 की तुलना में Dec 2016 तक सभी अप्रत्यक्ष करों को एक साथ देखा जाए तो इसमें 14.2% की बढ़ोत्तरी हुई है। यदि सिर्फ december माह की तुलना करें तो central excise में 31.6% और service tax में 12.4% की वृद्धि हुई है । अलबत्ता custom duty में 6.3 % की गिरावट आयी है ।

12) Dec 2016 की तिमाही में कुल 2.82 लाख करोड़ रु advance Tax के रूप में जमा हुआ जो पिछले वर्ष 12015 की इसी तिमाही की तुलना में 14.4% अधिक है ।

13) Corporate advance tax में 10.6% और personal income tax advance में कुल 38.2% टैक्स की वृद्धि हुई है ।

जो भी व्यक्ति नोट बंदी को फेल बताये और economy में manufacturing सेक्टर में slowdown का रोना रोये उसके मुंह पे ये पोस्ट जूते की तरह फेंक के मारो ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

वंस अपान ए टाइम , आंध्र परदेस के राजभवन में एक बड़े भयंकर किसिम के सीनियर कांग्रेसी नेता हुआ करते थे ……. लाट साब गवर्नर श्री नारायण दत्त तिवारी ।
उनकी रग रग में कांग्रेसी खून दौड़ता था । इस से पहले ऊ जिनगी भर ऊपी की राजनीती किये , कांग्रेस के जमाने में कई बार ऊपी के मुख्यमंत्री रहे । फिर जब ऊपी दो भाग में बंट गया और पहाड़ी इलाके काट के उत्तराखंड बन गया तो आप UK के मुख्यमंत्री भये । फिर जब एकदम्मे बुढ़ा गए और किसी काम के न रहे तो सोनिया गांधी ने इनको retirement पिलान के तहत आंध्र प्रदेश का गवर्नर बना के भेज दिया ।
इधर प्रतिभा पाटिल अपनी वार्षिक छुट्टियां मनाने आंध्र प्रदेश जाने वाली थीं ।
Protocol के तहत राष्ट्रपति की अगवानी लाट साब गवर्नर बहादुर किया करते हैं ।
तभी एक स्थानीय news चैनल ने एक वीडियो दिखाना शुरू किया जिसमें 86 साल के बुज़ुर्ग लाट साब गवर्नर बहादुर राज भवन में अपने शयन कक्ष में 35 साल की एक सुन्दर सुशील राजनीतिक कार्यों में दक्ष महिला को सहला रहे हैं ……… अब जो भैया मची जो बमचक ……. राजभवन के सामने महिला संगठन करें हाय हाय मुर्दा बाद …….. नतीजा जे हुआ कि लाट साब गवर्नर बहादुर को रातों रात इस्तीफा दे के बोरिया बिस्तर बाँध के देहरादून जाना पड़ा ……..
अब चूँकि इस type के MMS और भिडियो clips की मार्किट में भोत demand रहती है । इस लिए उस क्लिप की खोजायी शुरू भई ……. इसके अलावा बड़े बड़े धुरंधर वैज्ञानिकों को जांच और शोध का एक एक विषय ये मिल गया कि ई ससुरे कांग्रेसी साले सब ऐसी कौन सी भस्म बूटी खाते हैं कि 86 साल में भी टाइट रहते हैं और ई सुसरे संघी सब भरी जवानी में ही संन्यास और वैराग्य को प्राप्त हुए जाते है ………

खैर जांच कमीसन में ई निष्कर्ष निकाला कि कांग्रेसी की डंडी काम न भी करे तो भी सुहराने अंगुरियाने से बाज नहीं आता ……..

तो भैया हुआ यूँ कि पिछले हफ्ते जब मोलायम जादो दिल्ली पहुंचे तो मेरे जैसे किसी लुच्चे लफंगे ने टोक दिया …… चचा भोत हुआ ……. अब रहन दियो …… आपकी उमर भयी …… अब लड़कन बच्चन कू खेलन खान दियो …….

चचा बोले , अभी मन नहीं भरो है …… अभी कुछ दिन समाजवादी पाल्टी को सुहरा अंगुरिया लेन दियो ।
बेचारी समाजवादी पाल्टी …….. 25 बरस की हो गयी ।
एक तरफ मोलायम सहलाने अंगुरियाने से बाज नहीं आ रहे दूसरी तरफ सिपाल रामगोपाल सिकंदरे आज़म कैप्सूल खाय के ताने खड़े इधर अखिलेश कह रहे कि हमारी तो ब्याहता है समाजवादी पाल्टी …… सिर्फ हमारी ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

नोटबंदी तो एक शिशु का पहला कदम है …….

हमारे प्रेम भैया इधर इक्लेस जादो के भोत जबर फैन हो गए हैं ।
पहले खेजड़ीबाल के फैन हुआ करते थे ।
आजकल इक्लेस जादो के हो गए हैं ।
मोदी से भोत जायदे नाराज रहते हैं ।
गाज़ीपुर जिले में इनकी जमींदारी है । नोटबंदी के कारण ऊ सारा खेतवा परती रह गया ।
परती मने जब कोई खेत न बोया जाए और ऐसे ही छूट जाए उसे हमारे यहां परती कहते हैं ।
सो नोटबंदी के कारण इनको खाद बीज जुताई डीजल नहीं मिला इसलिए सगरी जमींदारी परती रह गयी । राजघाट वाले कोवाटर की छत पे 52 बीघा पुदीना रोप थे सो नोटबंदी के कारण बिना पानी सब झुरा गया । मोदिया देस का सतियानास पीट दिया इसलिए अब प्रेम भैया इक्लेस जादो के फैन हो गये हैं । कहते हैं ……. बाह भाई बाह ……… लड़का का विकास किया है ।
हम पूछे कि ज़रा हमको भी बताओ …… का विकास किया है ?
बोले , देखते नहीं हो , नखलऊ में मेट्रो बनवा दिया । औ नखलउ से आगरा express way ……. आगरा दिल्ली पहिलहीं बहिन जी बनवाय दी थी ……. केतना सुबिधा हो गिया …….. अब गाजीपुर का सब बेरोजगार लड़का लोग जब लेपटाँप पे बिलू फिलिम देख के अघा गिया तो सब खटाक से बनारस से बरेली पसिंजर पकड़ के नखलऊ चला जाएगा । हुआँ से मेट्रो धय के सीधे एस्प्रेस वे पे धाँय से 6 घंटा में दीली ………
अ दीली जा के का करेगा गाजीपुर का सब लड़िका लोग ……….
अरे उहाँ अज़ादपुर का झोपड़पट्टी में 300 रु का खोली भाड़ा पे ले के रहेगा ……. फैट्टरी में काम करेगा ………. मजूरी करेगा …… पेट पालेगा …… जियेगा खायेगा …….. बिकास पुरुष इक्लेस जादो परदेस का विकास किये हैं ……. मोदिया साला देस बर्बाद कर दिया …….. गरीब का सब नोट बन कर दिया औ अपने सब उद्योगपति दोस्त लोग को दे दिया …….हमरी GDP छत्ते पे चढ़ गयी थी बिना सीढ़ी के ……. मोदिया साला उप्पर से धकेल दिया ……. बेचारी GDP गीर गयी ।
इधर GDP गिरी उधर नोटबंदी फेल हो गयी ?

आपको कैसे पता कि नोटबंदी फेल हो गयी ?

सारा पैसा बैंक में वापस आ गया ।

नहीं ……. लगभग 1लाख 40,000 करोड़ नहीं आया ।
इसके अलावा दो करोड़ संदिग्ध खाते 8 Nov नए खोले गये जिनमे लगभग 4 लाख करोड़ रु जमा कराये गए । इन खातों और इन रुपयों की जांच चल रही है ।
इसके अलावा कई लाख करोड़ रुपया तो ऐसा है जो लोगों ने अपने दोस्त मित्र रिश्तेदार और कर्मचारियों के खातों में , इसके अलावा जनधन खातों में जमा करा दिया ……. दो दो ढाई ढाई लाख करके ……. ये सारा वो पैसा था जो की अब तक तहखानों तिजोरियों में दबा हुआ था ……… पर अब नोट बंदी के कारण इसे मजबूरन तहखानों तिजोरियों संदूकों से निकल के बैंक में जमा होना पड़ा ……. system में आना पड़ा ……. लाखों नहीं करोड़ों ऐसे Dormant मने सुसुप्त खाते थे जो अचानक जाग गए और उनमें रातोंरात लाखों रूपये जमा हो गए ।
समाजवादी पाल्टी के एक नेता पूर्व MLA के सुरक्षा गार्ड के खाते में अचानक 100 करोड़ रु जमा हो गए । वो बेचारे रूपये …… आजतक न जाने किस अँधेरे तहखाने तिजोरी में कैद थे ……. अब किसी बैंक खाते की शोभा बढ़ा रहे हैं । सरकार की नजर निगरानी में है ।
कुल 15 लाख करोड़ की currency चलन में है ।
इसमें से ये लगभग 6 से 8 लाख करोड़ रु संदिग्ध है ।
रूपये का कोई रंग नहीं होता । वो अपने आप में काला या सफ़ेद नहीं होता । उसका रंग तो हरा या गुलाबी pink होता है । ITR मने धारक की Income Tax return उसे काला या सफ़ेद बनाती है ।
अब तक जितना पैसा तहखानों तिजोरियों से निकल के बाहर आया वो अब सरकार की आँख के सामने है । अब सरकार एक एक खाते की जांच करेगी …….. और एक पूर्व निर्धारित संवैधानिक कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे काला या सफ़ेद धोषित किया जाएगा जिसमे समय लगेगा ।
अगर आप ये समझते हैं कि इस देश में काला धन ही नहीं था तो आप मूर्ख हैं या जान बूझ के सोच समझ के मूर्ख बन रहे हैं । कोई भी ऐसा व्यक्ति जो ढाई लाख रु से ऊपर की अघोषित रकम दबाये बैठा था वो काला धन था । मोदी की नोटबंदी उसे सबके सामने उजाले में ले आयी है ।
रही बात भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की ……. तो नोटबंदी उस दिशा में उठाया गया पहला छोटा सा कदम है । हम आप सब जानते हैं कि असली काला धन तो बेनामी संपत्तियों और सोने चांदी हीरे जेवरात में छुपा है , मारीशस के रास्ते निवेश में छुपा है और विदेशी tax heavens में छिपा हुआ है ।
भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे एक राष्ट्र को इस दलदल से निकालने की पहली ईमानदार कोशिश किसी सरकार ने की है ।
इन तमाम तथ्यों को नज़रअंदाज़ कर यदि आप सिर्फ 50 दिन में ही इसे फेल घोषित कर देते हैं तो इसका सीधा सा मतलब ये है कि आप pathological Modi Hatred के शिकार हैं और इस घृणा जुगुप्सा के भाव ने आपकी सोचने समझने की शक्ति को कुंद कर दिया है ……… आप मोदी से घृणा के अपने पर्सनल एजेंडा में इस कदर अंधे हो चुके हैं कि राष्ट्र हित आपकी सूचि में कहीं है ही नहीं ।

नोटबंदी तो एक शिशु का पहला कदम है ……. आप बस देखते जाइये ……. अभी तो इसे मीलों जाना है ।

हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ ……

ऐ अकलेस जादो , तुम ये जान लो कि वंस अपान ए टाइम इस परदेस में , जब कि ये पुत्तर परदेस नहीं बल्कि उत्तर परदेस होता था , चरण सिंह नाम के एक नेता हुआ करते थे ।
ई जो तुम्हारे बाप हैं न , मुलायम सिंग , किसी जमाने में ये उनके अँडुआ मने आंड मने testicles हुआ करते थे ……चौ चरण सिंह उत्तर प्रदेश के एक छत्र नेता हुए …… सचमुच के धरती पुत्र और किसान नेता …….. मने इतने बड़े नेता थे कि 1984 में जब कि इंदिरा गांधी की हत्या के उपरान्त उपजी सहानुभूति लहर में जब कि सब कुछ उड़ गया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी हार गए थे , तब भी अकेले चौ चरण सिंह ऐसे थे जो जीते थे । मने इतने बड़े नेता थे चौधरी साहब ……. और आज उसी चौधरी साहब का बेटा ……. उसने अपने मरहूम बाप की पार्टी और उनकी राजनैतिक विरासत का ये हाल बना दिया कि आज वो विधायक की एक सीट को तरस रहा है ।

1984 में जो राजीव गांधी 410 सीट के प्रचंड बहुमत से जीते थे उनका होनहार बिटवा आज उसी पार्टी को 44 सीट तक नीचे ले आया है और अब आगे 4 सीट पे ले जाने की तैयारी में है ।

आगे सुनो ……. एक और हुए हैं ……. भारतीय राजनीति के पितामह कहाये …… पितामह समझते हो ?
दादा । हरियाणा के चौधरी देवी लाल जी …… समूचा हरियाणा उन्हें ताऊ देवी लाल कहता था प्यार से ……… उसी ताऊ देवी लाल के बेटे और पोते आज जेल खट रहे हैं और पार्टी लौड़े के दक्खिन चली गयी ।

इसी हरियाणा के एक और बहुत बड़ी राजनैतिक हस्ती हुए चौधरी भजन लाल । एक ज़माना था कि उनकी एक आवाज़ पे पूरा हरियाणा खड़ा हो जाता था । उनके मरने के बाद उनके दोनों लौंडे भी बाप की राजनैतिक विरासत सम्हाल न पाए और आज कौड़ी के तीन हो के घूम रहे हैं । एक अदद सीट को मोहताज हैं ।

आगे सुनो …… एक हुए बलिया के बागी ……. बलिया के शेर ……. बाऊ चनसेखर सिंह …….. ये वो अज़ीम शख्सियत थे कि जिंदगी में कोई पद ही नहीं लिए …… कहते थे बनूंगा तो सिर्फ PM और एक दिन PM बन के ही दिखाया ……. आज उनके दोनों बेटे तुम्हारा पेल्हर तौलते हैं एक अदद विधायकी सांसदी के लिए ।

उधर मुम्बई में देख लो …… सारी जिंदगी अकेले बाला साहिब दहाड़ते रहे शेर की माफ़िक़ …….. उसी शेर का बेटा आज बकरी की माफ़िक़ मिमिया रहा है …….. और ये तमाम लोग तो वो हैं जिन्हें अपने बाप की विरासत लेने के लिए उसे अपदस्थ बेइज़्ज़त नहीं करना पड़ा । ये सब अपने अपने बाप के स्वाभाविक वारिस थे और उनके आशीर्वाद से गद्दी पे बैठे पर सम्हाल न पाए , और आज कौड़ी के तीन हो घूम रहे हैं ।

इसलिए , हे अखिलेश , तुम भी ये मत भूलो कि आज तुम और राम गोपाल बेशक Hydrocele बने, पानी से फूले हुए आंड मने अंडकोष की माफ़िक़ खरबूजे जैसे बड़े हो गए हो , पर ये मत भूलो कि आंड चाहे जितना बड़ा हो जाए रहता लांड के नीचे ही है …… हाँ ये अलग बात है कि कुछ बिसेस आपातकालीन परिस्थिति में आंड सटक के गले में आ जाते हैं …… पर अंततः तो उसे नीचे आना ही होता है …….. इसलिए हे अखिलेश ……. बेटा …… मान जाओ ……. बाप को ऐसे खोल के मत दिखाओ …… क्योंकि तुम्हारे पास ऐसा कुछ नहीं है जो बाप ने पहले न देखा हो ……. पर बेटा , भगवान् न करे , कि अगर बाप ने खोल के दिखा दिया न किसी दिन …… तो बेहोश हो जाओगे ।

नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ? असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..

वंस अपान ए टाइम , नवाबों के शहर नखलऊ में एक डाग्दर साहब हुआ करते थे ।
Jain साहब । वो नखलऊ के जाने माने गुप्त रोग बिसेसज्ञ मने sexologist हुआ करते थे ।
फिर जब वो नहीं रहे तो उनके लौंडे उनकी जगह sexologist बन गए ।
मने पहले नवाबों के सहर नखलऊ में एक Dr जैन sexologist होते थे , अब दो हो गए ।
अब नखलऊ वालों को बड़ी मुसीबत । किसके पास जाएँ ?
दोनों एक से बढ़ के एक ……. दोनों अपने आपको दावा करें कि असली बड़े वाले डाक् साब वही हैं लिहाजा नक्कालों से सावधान रहे ।

मेरे एक मित्र हैं ……. उन ने इन sexologist डाक्टरों और हकीमों पे बड़ी रिसर्च करी है । वो बताते हैं कि ऐसे झोला छाप हकीम आपको ज़्यादातर मुस्लिम बहुल आबादी वाले शहरों में , मुसलमाँ बस्तियों में ज़्यादा मिलेंगे । इक्का दुक्का sexologist बेशक हिन्दू मिल जाएँ पर बकिया अधिकाँश सब मुसलमाँ मिलेंगे ………. आखिर क्यों ?
मने नखलऊ , भोपाल , पुरानी दिल्ली , राम पुर , बरेली , देवबंद , मेरठ , मुज़फ्फर नगर , सहारनपुर , अमरोहा , बिजनोर ऐसे मुस्लिम बहुल शहरों में मिलेंगे । चंडीगढ़ , अमृतसर , जालंधर , रोहतक , करनाल , सोनीपत में नहीं मिलेंगे । गोरखपुर बनारस में नहीं मिलेंगे । बनारस में अगर कोई छूटा छटका हुआ भी तो मदनपुरा दाल मंडी और बेनियाबाग कज़्ज़ाकपुरा में ही मिलेगा , चौक मैदागिन , गोदौलिया पे नहीं मिलेगा ।
100 में से 99 sexologist मुसलमाँ मिलेंगे ।
100 के 100 झोला छाप फ़र्ज़ी नीम हकीम मिलेंगे ।

आखिर मुसलमानों के बीच ही क्यों प्रचलित है ये गुप्त रोग विशेषज्ञों की जमात ।
इसके मूल में कारण है ये 4 बीबियाँ रखने का रिवाज़ ।
आम तौर पे मियाँ जी लोग की समस्या ये हो जाती है की मियाँ की पहली दूसरी बीबी तो बुढ़िया होती है …….. पोपली पिलपिली …….. पर तीसरी चौथी आ जाती हैं एकदम जवान । अब मियाँ जी स्वयं तो हो गए 45 – 50 या 55 के और बीबी खरीद लाये हैदराबाद से 16 या 18 साल की …… अब मियाँ परेशान ……. अबे 55 साल का अधेड़ 18 साल की लौंडिया को क्या ख़ाक सम्हालेगा …….. तो उसको अपनी मरदाना कमजोरी का अहसास होता है …….. और फिर वो दौड़ता है इन sexologists की तरफ …….. और वो इन्हें सोने चांदी और हीरे की भस्म खिला के वापस जवान बना देने का दावा कर चूतिया बनाते हैं ।
सबसे मजेदार तथ्य ये है कि ये मुस्लिम समाज में sexologist की परंपरा कोई नयी नहीं है बल्कि ठीक उतनी ही पुरानी है जितना इस्लाम । क्योंकि हुज़ूर की जवानी तो बीत गयी अपने से उम्र में 25 साल बड़ी महिला के साथ । फिर जब वो पूरी हुई तो हुज़ूर को पहली बार जवान औरत नसीब हुई । उसके बाद जस जस हुज़ूर की उम्र बढ़ी उनकी बीबियों की उम्र घटती चली गयी और एक समय वो आया कि जब हुज़ूर कब्र में पैर लटकाये थे तो उनकी पत्नी बमुश्किल 20 साल की थीं ।
ऐसे में ये मरदाना कमजोरी की समस्या तो तब भी रही होगी ……..
बहरहाल ……. आज मैंने एक खबर में पढ़ा कि अकलेस और मुलायम दोनों ये कह रहे हैं कि नक्कालों से सावधान ….. आपका ध्यान किधर है ?
असली समाजवादी पाल्टी इधर है ……..
असली बड़े वाले जादो जी …….. हर मंगलवार सैफई में ……..
असली छोटे वाले जादो जी ……. हर सोमवार नखलऊ में …….
हमारी कोई ब्रांच नहीं है ……..

रेगिस्तान का cactus बनो । Cactus कभी नहीं मरते ……..

अभी एक मित्र की पोस्ट पढ़ी fb पे ।
वो बता रहे थे कि पिछले दो महीने में वो कितनी बार bank और ATM की लाइन में कै कै घंटे और कै मिनट खड़े रहे ।
मुझे ध्यान आया , मैं और मेरा पूरा परिवार मने धर्म पत्नी और 3 बच्चों समेत एक भी आदमी इन 60 दिन में किसी बैंक या atm की लाइन में नहीं लगा । बस एक बार दिग्विजय लगा था 15 मिनट के लिए सो यहां पूर्वांचल में 15 मिनट की लाइन को लाइन नहीं माना जाता क्योंकि हमारे यहां सैदपुर में तो शांतिकाल अर्थात नोटबंदी से पूर्व भी ATM की लाइन में डेढ़ दो घंटा खड़े रहना आम बात थी ।
सो सवाल है कि मेरा कुनबा इस भयंकर cash crunch में भी line में खड़े रहने से कैसे बच गया ।
और फिर यही नहीं , मेरा परिवार तो आज तक किसी भी लाइन में कभी नहीं लगा । चाहे जैसी लाइन हो …… रेल बस की होय या कोई अन्य हो , रिजर्वेशन की हो …… मेरे लौंडे या मैं कभी लाइन में ना लगे ……. जानते हैं क्यों ?
मैंने अपने बच्चों को कभी formal शिक्षा मने स्कूली किताबी ज्ञान नहीं दिया ……. बड़का तो फिर भी कुछ दिन स्कूल गया , दोनों छोटे तो कभी स्कूल गए ही नहीं ……. इन सबको मैंने home education दी ……. बिना किसी syllabus curriculam के व्यवहारिक शिक्षा …….. और स्किल के नाम पे सिर्फ एक skill सिखायी ……. survival skill ……. मने इस जंगल में ज़िंदा कैसे रहना है ……… How to survive in this jungle among wolves …….. हमारे इस मुल्क में एक बड़ी जबरदस्त तकनीक है जिसे जुगाड़ तकनीक कहा जाता है । यदि आप इस तकनीक में महारथ हासिल कर लें तो आप छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या का हल चुटकियों में कर सकते हैं । और इस तकनीक को साधने के लिए आपको ज़्यादा से ज़्यादा समय अपने मम्मी पापा के पल्लू और गोद से दूर , घर की comforts से दूर , बिना प्लानिंग के , बिना रिजर्वेशन के , general और cattle class में travel करते बितानी पड़ती है , bare minimum मने न्यूनतम में गुजारा करना …….. जुगाड़ से लंबे समय तक जीना खाना …… मने सिर्फ एक jeans टी शर्ट में 15 दिन गुज़ार देना , ज़रूरत पड़ने पे एक mug पानी में नहा लेना , प्लेटफॉर्म पे अखबार या गमछा और वो भी न हो तो यूँ ही सिर के नीचे जूता रख के सो लेना और बिना पइसा के भर पेट खा लेना …….. जब ये स्किल आपके अंदर आ जाए ……. तो मान लीजिए कि अब आपको जंगल में छोड़ा जा सकता है ……. आप मरेंगे नहीं ………

मैंने अपने बच्चों को हमेशा सिखाया है ……. जलकुम्भी मत बनो ……. रेगिस्तान का cactus बनो ।
Cactus कभी नहीं मरते ……..
रेगिस्तान में उगे cactus में जो फूल खिलते हैं वो सालों नहीं मुरझाते ।

जलकुम्भी महीने दो महीने में सूख जाती है ।

ममता बनर्जी और केजरीवाल का होम्योपैथी इलाज कराओ

pruritus vulvae नामक एक बीमारी होती है ।
अक्सर महिलाओं को हो जाती है ।
इसमें औरतों को योनि में भयंकर खुजली मचती है ।
मने इतनी भयंकर कि अण्ड का बंड बकने लगती हैं …. आँय बाँय साँय चिल्लाने लगती हैं …… आम तौर पे सभ्य सुसंस्कृत महिलाओं को यदा कदा यदि हलकी खुजली हो जाए तो मौके की नजाकत भांप मौक़ा ताड़ प्राइभेसी खोज के हल्का फुल्का खुजला लेती हैं परंतु यदि किसी को ये नामुराद बीमारी pruritus vulvae अगर हो जाए तो औरत सरेबाज़ार लहंगा पेटीकोट उठा के खुजलाती है ……..एकदम ममता बनर्जी की तरह ।
इसी से मिलती जुलती एक और बीमारी होती है जिसे Pruritus Ani कहते हैं । इसमें भी भयंकर चुल्ल और खुजली मचती है पर खुजली का स्थान vulva से सिर्फ एक inch नीचे घसक के Anus हो जाता है । मने इसके रोगी को ***में भयंकर खुजली मचती है । ये खुजली कितना भी खुजला लो कैसे भी खुजला लो …… मने बेशक लहंगा पेटीकोट उठा के खुजला ल्यो , सान्त ना होती । इसके मरीज अक्सर किसी पेड़ या खुरदुरे स्थान पे रगड़ के खुजलाते देखे जाते हैं ।
आमतौर पे ये दोनों बीमारियां अलग अलग होती है पर rarest of rare केस में एक साथ एक ही मरीज में दोनों बीमारियां एक साथ भी हो जाती हैं ।
मने मर्दों को pruritis ani के साथ pruritus vulvae तो हो नहीं सकती , सो उनको pruritus vulvae की जगह pruritus scroti हो जाता है मने उनके scrotum बोले तो आंड खुजलाने लगते हैं ।
मने इतनी भयंकर चुल्ल और खुजली मचती है की आदमी सरेबाज़ार सरेराह कहीं भी माने office meeting मंच मीटिंग में जहां हो वही , पैंट पाजामा अंडरबीयर उतार के कायदे से 15 – 20 मिनट जब खजुआ लेता है तब जा के कुछ तात्कालिक चैन मिलता है ।
ये तो हुए इस बीमारी के लक्षण बोले तो symptoms .
अब इसके कारणों पे नज़र डालें तो एक कारण तो bacterial infection और hygene की कमी हो सकता है ।
हालिया वर्षो में इसके socio politico economic reasons भी देखे गए हैं ।
मने socio economic reasons फार इगजामपुल नोटबंदी माने demonetization …….. नोट बंदी में अगर किसी बड़े नेता या पार्टी का 1000 – 2000 करोड़ रु डूब जाए तो उस पाल्टी के नेता को इस बीमारी के लक्षण उभर सकते हैं ।
Socio political reasons में ऐसे लक्षण तब उभरते हैं जब किसी विपरीत राजनैतिक विचारधारा का व्यक्ति PM बन जाए तो रोगी में इन बीमारियों के लक्षण उभर सकते हैं ।
फिलहाल मोमता बनर्जी और अरबिन्द भोसड़ीवाल जी में इन बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं ।

निदान : वैसे तो सिंपिल साफ़ सफाई रखने से फर्क पड़ जाता है ।
ये पेड़ इत्यादि से नहीं रगड़ना चाहिए । इस से फौरी लाभ तो मिल जाता है पर बाद में बीमारी बढ़ के भगंदर और नासूर हो जाने का ख़तरा उत्पन्न हो जाता है ।
कई बार सत्ता परिवर्तन हो जाए मने जिस आदमी से allergy हो वो कुर्सी से हट जाए तो ये बीमारी अपने आप शांत हो जाती है …….

हिन्दुस्तान तुमारा बाप का नई अमारा बाप का हाय .

भोत पुरानी बात है । 70 के दशक की । हरियाणा और पंजाब नए नए ही अलग हुए थे ।
दोनों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ थी ।
पंजाब का मुख्यमंत्री कौन था ये पता नहीं ( शायद गुरनाम सिंह )पर हरियाणा के बंसीलाल थे ये कन्फर्म है । किसी बात पे दोनों में तकरार हो गयी । दोनों बदतमीज थे । जिसमें बंसीलाल तो हद दर्जे का अक्खड़ बददिमाग और बदतमीज था । हरियाणा से चंडीगढ़ जाने के लिए एकमात्र रोड जो थी वो पंजाब हो के ही चंडीगढ़ में घुसती थी ।
अम्बाला के बाद पंजाब के डेराबस्सी जीरकपुर होते हुए । पंजाब के CM ने बंसी लाल से कहा , चंडीगढ़ में घुसना बंद करा दूंगा …….
अक्खड़ बंसीलाल को बात चुभ गयी । उन्होंने अपने PWD के चीफ इंजीनियर को बुलवाया ।
पूछा , ऐसी कोई रोड बना सकते हो जो बिना पंजाब touch किये चंडीगढ़ घुस जाए ?
Chief इंजीनियर बोला , हाँ जी बन जायेगी । अम्बाला से नारायणगढ़ होते सीधा पंचकूला होते चंडीगढ़ ………
बंसी लाल ने पूछा , कितना टाइम लगेगा ?
जी साल दो साल तो लग ही जायेंगे ।
6 महीने में तैयार चाहिए ।
और हरियाणा ने 6 महीने में वो रोड बना डाली ।
और अभी कच्ची पक्की ही बनी थी कि बंसी लाल ने एक दिन वो पंजाब का वो CM धर लिया । बोल्या , रै झक्खड़ , मैं तो चंडीगढ़ आ जाऊंगा इब तू न्यू बता कि दिल्ली क्युक्कर जागा ? साले जे हरियाणा में बड़ ग्या ना , चूतड़ां में लट्ठ दे दूंगा ।

 

मोदी जी , भाजपा का एकाध महासचिव मेरे जैसा कोई बना दो ।
ये ममता बनर्जी जैसे लोग शुद्ध संस्कृत निष्ठ हिंदी नहीं समझ पाते ।
इनको तो भोजपुरी हरियाणवी या शुद्ध पंजाबी में समझाना पडेगा ।

मोमता दी , हाम तुमारा TMC की गाँड़ में बांस डाल के मुह से निकाल लेगा ।
तुमारा सारा दादागिरी तुमारा चूतड़ों में डाल देगा । सड़क पे पटक के तुमारा माँ चोद देगा ।
हिन्दुस्तान तुमारा बाप का नई अमारा बाप का हाय ……..