Wrestling coach by profession Social Media writer ....... Traveller ...... loves Biking , cooking,

Wrestling coach by profession Social Media writer ....... Traveller ...... loves Biking , cooking,

चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

पूर्वांचल में अपने होशो हवास में , भरसक , कोई बाऊ साहब लोगों मने ठाकुरों को कोई दूकान मकान भाड़े पे नहीं देता । मने दूकान खाली पड़ी रहे ऊ मंजूर बाऊ साहब को भाड़ा पे नहीं देंगे ।
और ई रेपुटेसन कोई रातों रात नहीं बन गयी है ……. बाऊ साहब लोग की सैकड़ों साल की चोरकटई से ई रेपुटेसन बना है ……. मने बाऊ साहब को मकान दूकान भाड़े पे दिया त ऊ गयी …..
अब करा लिहा खाली ……. जा लड़ा कोट कचहरी ……. जादो जी लोग का रेपुटेसन कुछ भिन्न है ।
मने जादो जी लोग भड़इता मने किरायेदार बन के मकान दूकान पे कब्जा नहीं करेगा ।
ऊ सब Virgin land खोजता है …… मने खाली पिलाट …….
अगर आपका शहर में कहीं कोई खाली पिलाट पड़ा है ……. तो कोई यदुवंशी उसको कई साल तजबीजता रहेगा …… एकदम बकुल ध्यानं …… मने तब तक इन्तजार करेगा जब तक कि कोई यादवी सरकार सत्ता में न आ जाए ……. और उसको जैसे ही कोई अनुकूल अवसर मिला …… ऊ आपके प्लाट पे 4 ठो गोरु गैया लिया के रातों रात तबेला खोल देगा ……. यादव डेरी फार्म …… इहाँ सांड भैंसा का सुद्ध दूध मिलता है ……. अब आप लाख सिर पटक के मर जाये …… थाना दारोगा कप्तान …… सब कीजिये ……. जादो जी कब्जा नहीं छोड़ेंगे । तब तक जब तक कि कोई नयी सरकार न आ जाए जो आपकी बात सुने और जादो जी को बांस कर दे …….. आज ऊपी में नामाजवादी सरकार के ऊपर सबसे बड़ा कलंक यही है ……. सरकारी और पिराईभेट …… सभी जमीनों पे एकदम निर्विकार भाव से अवैध कब्जा …….. मने किसी की भी संपत्ति में जबरदस्ती घुस जाना और लाठी के बल पे कब्जिया लेना ।

अब आज का लखनऊ का ही किस्सा देख लीजिए ।
सपा कार्यालय पे जबर्दस्ती कब्जा ……. चचा अपदस्थ , बाऊ लिटायर और अमर अंकिल बर्खास्त …….

जादो जी लोग चाहे जौना पोजीसन में आ जाएँ …… अवैध कब्जा का नैसर्गिक गुण सामने आ ही जाता है ।

क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..

Competitive Sports में एक सूत्र वाक्य है ।
क्या करेगी तैयारी , लड़ेगी जी दारी ……..
मने सारी तैयारी के बाद जो चीज़ सबसे महत्वपूर्ण होती है वो है जी दारी ……. मने fighting Spirit , killing Spirit ……. मानसिक दृढ़ता ……..
हमारे यहाँ देसी Indian Style Wrestling जो मिट्टी के अखाड़ों में लड़ी जाती है ……. कुश्ती के दंगल होते हैं । इन इनामी दंगलों में जो सबसे बड़ी ईनामी कुश्ती होती है वो अक्सर लाखों की होती है । हरियाणा ,पंजाब , हिमांचल और महाराष्ट्र में पहली कुश्ती अक्सर लाख डेढ़ लाख की होती है । महाराष्ट्र में तो 5 लाख तक की । इसमें टाइम भी खुला होता है । इसे आर पार की कुश्ती कहते हैं । ऐसी कुश्तियां घंटा डेढ़ घंटा भी चल सकती है । मने जब तक हार जीत न हो तब तक भी चल सकती है । पिछले साल महाराष्ट्र के एक दंगल में ऐसी ही एक कुश्ती साढ़े तीन घंटा चली । पुराने जमाने में ancient Olympics में ऐसी कुश्तियां 10 – 12घंटे तक चल जाया करती थीं ।
modern Olympics में भी 1904 या 1908 वाले olympic में एक कुश्ती 19 घंटे चली बतायी जाती है । पहले दिन दस या 12 घंटे चली । फिर उसमे अवकाश दे दिया गया क्योंकि पहलवान जी लोग तो अखाड़े में खड़े थे पर दर्शक और आयोजक बैठे बैठे थक गए । इसलिए ये तय हुआ कि अब इसमें अवकाश दिया जाए और हार जीत का फैसला कल हो ……. अगले दिन फिर 7 या 9 घंटे हुई तब जा के एक मल्ल ने हार मानी …….. इसके बाद ओलम्पिक आयोजन समिति ने हाथ जोड़ लिए कि भैया …… ई ना चोलबे ……. इसके नियम क़ानून कुछ बदलो और हार जीत तय करने का कोई और नियम बानाओ …… इस तरह धीरे धीरे इस Modern Olympic Style wrestling का विकास हुआ जिसमे हार जीत Points पे होने लगी और कुश्ती का समय सीमित किया गया । इसके अलावा , पहले सिर्फ Heavy Wt wrestling ही होती थी जिसमे सिर्फ भारी भरकम पहलवान ही भाग लेते थे और बेचारे छोटे मोटे आदमी के लिए कोई गुंजाईश न थी । कालान्तर में ये Weight Categories का चलन हुआ ……..परन्तु देसी कुश्ती में आज भी आर पार की कुश्तियाँ होती हैं ……. हालांकि कई आयोजन समितियां अब ये करने लगी हैं कि एक निश्चित समय के बाद point पे कुश्ती करा के हार जीत का फैसला कर लिया जाए जिस से कि सारा दिन लड़ने लड़ाने की नौबत न आये । जैसे 40 मिनट आर पार …… यदि इसमें चित पट न हो तो फिर 5 मिनट point की कुश्ती करा के फैसला अंको के आधार पे ।
हम कोच प्रशिक्षक अपने पहलवानों को हमेशा एक ही बात समझाते हैं कि देखो बेटा ……. जब कुश्ती होती है और जब तुम थक जाते हो …….. तो ये याद रखो कि सामने वाला भी लड़ रहा है ……. उसका भी उतना ही जोर लग रहा जितना तुम्हारा ……. वो भी उतना ही थका हुआ है जितने तुम ……. ऐसे में जीतेगा वो जो जीदारी करेगा ……. वो जिसमे killing spirit कायम रहेगी …….. सारा खेल जीदारी का है …….. लड़ाई में बाकी की सारी physical तैयारी तो coach के हाथ में होती है …… जैसे Strength , endurance , speed , technique , Strategy …….. पर ये जो जीदारी है न ……. ये साली जन्म जात होती है ……. हालांकि इसे भी improve करने की कोशिश तो हम करते ही हैं ……. तभी ये Sports Psychology नामक विज्ञान आया ……. हम इसमें खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं …….. मने इसमें खिलाड़ी को ये समझाने की कोशिश लगातार करते हैं कि भाई अपने आपको पहचान …… तू बहुत तगड़ा है …….
पर ऐसे में बहुत से पहलवान ऐसे होते हैं जो आपकी बात सुन के हाँ हूँ तो करता रहेगा पर उसकी body language ऐसी होती है जो कोच से कह रही होती है ……. अरे कोच साब …… क्यूं चूतिया बणा रहे हो ……. क्यों झूठ धका रहे हो ……
क्यों मने चने के झाड़ पे चढ़ा रहे हो …….. आपणे के बेरा मैं कितना बड़ा गांडू हूँ ……. मने कोच कितना भी जोर लगा ले , जब तक पहलवान जी दारी न धरे ……. वो खुद को गांडू मानना बंद न करे ……. कुछ नहीं हो सकता ……..

ऊपी में भी यही किस्सा दोहराया ना रहा है ……. सामने वाले की फटी पड़ी है ……. उसके पिछवाड़े के चीथड़े उड़े हुए हैं ……. फट के हाथ में आई हुई है ……. कुनबे में घमासान मचा है …… पार्टी दो फाड़ होने को है , पिछले 6 महीने से सुलह की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी है ………. संगठन तितर बितर छिन्न भिन्न हो चुका है …….. voter निराश हताश है और नए ठौर ठिकाने खोज रहा है और इसी दुश्मन को आपने 2014 में नंगा करके मारा है , घसीट घसीट के मारा है ……. आप उस से बेजोड़ तगड़े हैं …….. पर कुछ गांडू किस्म के लोग लगातार यही कह रहे है कि अजीत भाई ……. क्यों चने के झाड़ पे चढ़ा रिये हो …….. आप जानते नाही कि मोलायम और उसका बेटा अखिलेश कितना तगड़ा है और हम कितने बड़े गांडू ……. देख लेना वही जीतेंगे 2017 ……..
क्योंकि वो शेर और हम गांडू ……… इतनी छीछालेदर के बाद भी वही जीतेंगे और इतने तगड़े होने के बाद भी हम ही हारेंगे क्योंकि आप जानते ही नहीं कि हम कितने भयंकर किस्म के गांडू है …….

दुनिया की हर बीमारी का इलाज है , गांडू गर्दी का कोई इलाज नहीं

मोलायम के पास क्या बचेगा ?

Godfather……. Mario Puzo की अनुपम कृति
Francis Ford Coppola की काल जयी रचना ……. विश्व फिल्म इतिहास की महानतम रचना ।

अमेरिका की 5 माफिया families की कहानी है जिसके केंद्र में है Don Corleone की family …….. जिसका Don है Vito Corleone …….. Don का रोल किया था Marlon Brando ने …….. और इस रोल ने उन्हें अमर कर दिया ।
कहानी कुछ यूँ है कि Don एक drug तस्कर Solozzo के साथ काम करने का प्रस्ताव ठुकरा देता । Solozzo को लगता है कि Don पुराने ख्यालों का है जबकि उसका बड़ा बेटा Sonny शायद काम करने का इच्छुक है । इसलिए यदि Don को रास्ते से हटा दिया जाए तो बात बन सकती है ।
Solozzo डॉन पे जानलेवा हमला करा देता है । घायल Don अस्पताल में भर्ती है । इधर Solozzo दुबारा हमला करने की फ़िराक में है ।
उधर Don का गिरोह Solozzo से बदला लेने की तैयारी कर रहा है ।
तय होता है कि Solozzo को सुलह के बहाने बुला के ठोक दिया जाए ।
जो सुलह की बात करने जाएगा वही ठोकेगा ……..
सवाल है कि आखिर सुलह की बात कहाँ होगी ? वो स्थान गुप्त है ……..
हमारी ओर से बात करने कौन जाएगा ?
Solozzo को स्थानीय Police Captain संरक्षण दे रहा है । उसके सामने ह्त्या कैसे होगी ?
कौन करेगा ?
गिरोह इन सवालों से जूझ रहा है ……..
तय होता है कि Don का सबसे छोटा बेटा Michael Corleone जो की इस माफिया गिरी के धंदे में नहीं है और एक War Hero है , वो जाएगा सुलह की बात करने और वही करेगा ह्त्या …….
अब प्रश्न है कि सुलह की बात कहाँ होगी और वहाँ तक हथियार मने Gun कैसे पहुंचेगी ।
Sonny अपने मुखबिरों से पता लगा लेता है कि सुलह की बात एक Italian Restaurant में होगी ।
हथियार पहुंचाने की ड्यूटी Clemenza की है …….
तय ये हुआ कि Michael जब बात करने जाएगा तो Police कप्तान उसकी तालाशी ज़रूर लेगा ।
Michael बिना हथियार के होगा इसलिए दोनों निश्चिन्त हो जायेंगे ।
Michael बियर पिएगा । थोड़ी देर बाद wash room जाएगा । वहाँ flush के पीछे एक पिस्तौल tape से चिपका दिया गया है । Michael wash रूम से वापस आते ही फायर झोंक देगा ……..
Sonny माइकल को समझा रहा है । डरना मत ……. घबराना मत …….
फिर Clemenza से कहता है ……. और पिस्तौल ……. पिस्तौल पहुंचाने की जिम्मेवारी तुम्हारी ……..मैं ये नहीं चाहता कि मेरा भाई वहाँ मूतने के बाद हाथ में अपना *** लिए वापस आये ………

Sonny: Hey, listen, I want somebody good – and I mean very good – to plant that gun. I don’t want my brother coming out of that toilet with just his dick in his hands, alright?

नमाजवादी कुनबे की इस लड़ाई में मुझे ऐसा लगता है कि कुछ दिन बाद जब मोलायम यादव बाहर निकलेंगे तो उनके हाथ में सिर्फ उनका ढीला ढाला *** होगा …….. पार्टी और भोटर तो अखिलेश ले उड़ेंगे ………

He’ll come out with just his limp Dick in his hand ……..

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।

14 December 1903 …….. पहली उड़ान की कोशिश की पर असफल रहे ।
जो तथाकथित मशीन बनायी थी जिसे कहते थे कि हवा में उड़ जायेगी ….. वो टूट फुट गयी ।
17 Dec 1903 ……. उस टूटी फूटी मशीन को ठीक ठाक कर फिर से कोशिश की ।।
पहली उड़ान सिर्फ 120 फीट की थी । जमीन से ऊंचाई सिर्फ 10 फुट थी और गति सिर्फ 30 मील …….
राईट बंधुओं ने अपने पिता को टेलीग्राम भेज के उड़ान की सफलता की सूचना दी और स्थानीय प्रेस को भी सूचित करने को कहा ।
स्थानीय अखबार Dayton Journal ने इसे कोरी गप्प और सफ़ेद झूठ कह के खारिज कर दिया ।
अगले 3 साल राईट बंधुओं को लोगों को ये समझाने में बीत गए कि वाकई उड़ान सफल रही और दुनिया को बदल देने वाला आविष्कार हो चुका है ।
पर कोई मानने को तैयार न था । समूचे यूरोप के अखबार राईट बंधुओं को Bluffers कह के पुकारते थे । राईट बंधुओं ने अमेरिका और यूरोप की सरकारों से संपर्क किया पर किसी ने कोई दिलचस्पी न दिखाई । US Army ने राईट बंधुओं के विमान को कोई महत्त्व न दिया ।
फिर राईट बंधुओं ने किसी तरह पूँजी जुटा के France में एक Air Show आयोजित किया जिसे हज़ारों लोगों ने देखा । तब जा के यूरोपीय अखबारों ने राईट बंधुओं से सार्वजनिक क्षमा याचना की ।
July 1909 में US Army ने राईट बंधुओं से एक करार किया जिसमे वो ऐसा विमान बनाते जिसमे पायलट के साथ एक सहयात्री , 1 घंटे की उड़ान और न्यूनतम गति 40 MPH होनी ज़रूरी थी ।

1913 तक राईट बंधुओं ने US Army के लिए कुल 6 Model C विमान बनाए और वो सारे crash कर गए । कुल 13 आदमी ” शहीद ” हुए ।

कुल मिला के उन दिनों राईट बंधुओं को झूठा , फरेबी , मक्कार , धोखेबाज , Fraud , फेंकू इत्यादि नामों से बुलाया जाता था और हवा में उड़ने वाली मशीन को अफवाह , झूठ का पुलिंदा , और Failure कहा जाता था ।

शेष इतिहास है ।

यूँ सुनते हैं कि नोटबंदी भी फेल हो गयी है और मोदी भी फेंकू , झूठा , मक्कार , धोखेबाज , भ्रष्ट है और नोटबंदी 8 लाख करोड़ रु का mega Scam है ।

वर्तमान के इतिहास बनने तक प्रतीक्षा करें ।

किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ? मोलायम या अकलेस ?

इतिहास खुद को दोहरा रहा है क्या ?
बात 1966 की है ।
लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गाँधी PM बनी थी ।
उनके नेतृत्व में 67 में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया । सिर्फ 283 सीट आई । बहुमत से बमुश्किल 20 सीट ज़्यादा ।
जब शास्त्री जी मरे थे तो इंदिरा उनके मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी । उन्हें गूंगी गुड़िया कहा जाता था । वो सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा भर थी जिसके नाम के आगे गांधी नेहरु लगा था ।
शास्त्री के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कामराज ने तो अपनी तरफ से एक कठपुतली
बैठाई थी कुर्सी पे ……. सत्ता की चाभी उनके पास थी । उनके अलावा मोरारजी भाई देसाई , निजलिंगप्पा , नीलम संजीव रेड्डी , हितेंद्र देसाई , सत्येन्द्र नारायण सिन्हा , चन्द्र भानु गुप्त और वीरेन्द्र पाटिल जैसे दिग्गज थे कांग्रेस में ……… पर PM बनते ही इंदिरा गाँधी ने रंग दिखाना शुरू किया और इन वट वृक्षों की छाया से बाहर आ गयी ।
12 Nov 1969 को तत्कालीन अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने अपनी PM इंदिरा गाँधी को अनुशासन हीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया ……… इंदिरा ने अलग हो के नयी पार्टी बना ली ……. सारे बूढ़े खलीफा एक तरफ , गूंगी गुड़िया अकेली एक तरफ …….. इंदिरा गाँधी की कांग्रेस ( O ) और कामराज वाली Cong ( R ) …….. पार्टी दो फाड़ हो गयी ।
तत्कालीन कांग्रेस working committee के 705 मेंबर्स में से 446 इंदिरा गाँधी के साथ हो गए ।
पुरानी कांग्रेस जिसमे कामराज के साथ सब बूढ़े थे , वो उन दिनों सिंडिकेट कहलाती थी और इंदिरा की कांग्रेस इंडिकेट ……..

1971 में अगले आम चुनाव हुए । इंदिरा गाँधी ने 43.6% भोट के साथ 352 सीट जीत के बम्पर सफलता अर्जित की । सिंडिकेट के बुढवों को जनता ने नकार दिया । उनको सिर्फ 10 % भोट और सिर्फ 16 seats मिली ।
लोकतंत्र में राजा वो जिसके साथ जनता ……. भोटर ।

UP में वही तमाशा चल रहा है ।
पप्पू अखिलेश अपने बूढ़े घाघ बाप और चाचा की छाया से निकल के बाहर आ गया है ।
कल रात शहजादे सलीम ने अकबर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया ।
कहता है कि 265 सीट पे बागी उम्मीदवार लड़ाऊँगा …….. पार्टी मुख्यालय में निष्कासन का पत्र type कर के रखा है । सिर्फ मुलायम के sign होने बाकी हैं ।
सवाल है कि भोटर किसके साथ जाएगा ।
यादव वोटर confused है । बूढ़े बुजुर्ग मुलायम के साथ हैं तो युवा अखिलेश के साथ । जिलों में पुराने नेता मुलायम के साथ हैं तो नए अखिलेश के साथ ।

71 में जनता के सामने विकल्प सीमित थे । या सिंडिकेट या फिर इंडिकेट । उनके लिए चुनाव आसान था । उन्होंने इंदिरा को चुन लिया । आज UP की जनता के सम्मुख 4 विकल्प हैं ।
मोदी , मायावती , मुलायम या अखिलेश ।
आज की स्थिति में अखिलेश 3rd या 4th position के लिए लड़ रहे हैं ।
Gold और Silver मैडल तो तय है ।
सपा के भोटर ……. यादव : 35 % मोलायम , 35 अखिलेश , बाकी 30 % भाजपा ।
मुसलमाँ बेचारा …….. खरबूजा कटेगा और सबमे बंटेगा ……… पहले 3 जगह बँटना था अब 4 जगह बंटेगा । 40 % बसपा बाकी 60 % में 4 हिस्से ……..

असली लड़ाई 2017 के बाद शुरू होगी जब सपा में सिंडिकेट और इंडीकेट होगा ।
किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ?
मोलायम या अकलेस ?

UP में नमाजवादी कलह

नमाजवादी कुनबे की कलह सड़क पे आ गयी है ।
परसों अकलेस जादो ने 403 प्रत्याशियों की सूची अपनी तरफ से मोलायम जादो को सौंप दी थी ।
सिपाल जादो ने उस लिस्ट को अपने संडास में रख दिया । save paper ……. tissue paper के काम आयगा ।
कल सिपाल जादो ने अपनी लिस्ट मोलायम को थमा दी । उस लिस्ट में सिपाल ने कायदे से अकलेस का औकातीकरण किया है । जब मोलायम ने लिस्ट जारी की उस समय CM झांसी में थे । पर मोलायम ने उनकी उपस्थिति ज़रूरी नहीं समझी । सूची जारी कर दी । सूची जारी करते हुए ये भी कहा कि पार्टी का कोई CM चेहरा नहीं है । साथ ही ये भी साफ़ कर दिया कि पार्टी अकेले अपने बूते चुनाव लड़ेगी । किसी से कोई गठबंधन नहीं ।
सूची में ऐसे 107 नाम हैं जिनका टिकट अकलेस ने काट दिया था । उन 107 को सिपाल जादो ने टिकट दे दिया है ।
चुनावी राजनीति का पहला नियम ये है कि Anti Incumbency से निपटने के लिए sitting MLA या MP के टिकट काट दिए जाते हैं । पर अकलेस ने इस मौलिक सिद्धांत की अवहेलना करते हुए 216 sitting MLAs को टिकट दिया था । जो 10 MLA सिपाल जादो के बेहद करीबी थे सिर्फ उनका टिकट काटा । इसमें ओम प्रकाश सिंह , नारद राय और शादाब फातिमा प्रमुख है । नारद राय वो हैं जिन ने मंत्री रहते माफिया Don मुख्तार अंसारी की पार्टी में एंट्री कराई । शादाब फातिमा के लिए कहा जाता है कि वो अकलेस जादो की नयी चाची हैं …….. जाहिर सी बात है कि सिपाल की लिस्ट में चाची का जलवा कायम है ।
एक बात जो गौर करने लायक है वो ये कि महाभ्रष्ट खनन मंत्री गायत्री प्राजापति दोनों की लिस्ट में कायम हैं ।

मोटे तौर पे अकलेस जादो के 100 टिकट काट दिए गए और 107 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जिनका टिकट अकलेस ने काटा था ।

अखिलेश sitting MLAs पे दाव खेल रहे है । इनमे से 200 नाम ऐसे हैं जो आज तो अखिलेश के साथ दीखते हैं पर कल क्या करेंगे अल्लाह जाने ।

इस समय CM house में MLAs की बैठक चल रही है ।
देखिये क्या निकलता है ।

मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे ……

पंकज कुमार नामक एक फेसबुकिया लौंडा इन दिनों ग़दर मचाये हुए है ।
पट्ठे ने धुंआ उठा रखा है । दहेज़ के खिलाफ गज़ब लिख रिया है ।
उसे पढ़ के मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आ गयी ।
बात यूँ है कि मेरी लिस्ट में नित नए मित्र जुड़ते रहते हैं । और फिर 5 ठो id . न जाने किसपे पोस्ट हुई किसने पढ़ी किसने न पढ़ी ……. इसलिए उस पोस्ट को repost न कर फिर से लिख रहा हूँ ।
ये किस्सा मेरे बड़े भाई ने सुनाया था दो साल पहले ।
हुआ ये की मेरी दो बुआ जी और एक सबसे बडकी बहिन मने बड़का बाबू की सबसे बड़ी बेटी बगल के गाँव में बियाही हैं ……. इस रिश्ते से वो पूरा गाँव ही हम सबको मामा बुलाते हैं ……. तो बडकी फुआ के खानदान का ये किस्सा है ……… सो हुआ ये कि उनके खानदान के एक लौंडे का बियाह था । बारात 30 – 40 km दूर जिला आजमगढ़ के किसी गाँव में गयी थी । आजकल हमारे हियाँ भी लोग मॉडर्न हो गए हैं …… सो वो फूल माला वाला बियाह करने लगे हैं । मने वो जिसमे वर वधू वरमाला डाल के बियाह करते हैं । सो आमतौर पे होता ये है कि जब वरमाला घालने की कवायद होती है तो लौंडे को उसके दोस्त और लौंडिया को उसकी सहेलियां घेरे रहती हैं । पर इस बियाह में मामला उलट था ……… गाँव घर के घाघ किसिम के बैठकबाज खलीफा लोगों ने लौंडों को घुड़क के भगा दिया था और वरमाला लिए दूल्हे को घेरे खड़े थे । उधर वधू के साथ भी उसकी सहेलियां बहनें न हो के सब घाघ बुढवे ही खड़े थे ………
दोनों सेनायें युद्ध भूमि में आमने सामने आ डटी ……. अपने पार्थ ने इठलाते हुए वरमाला यूँ उठायी मानो गांडीव हो …….. और आगे बढ़ चला …….. पर जैसे ही उसकी निगाह वधू पे पड़ी ……. वो ठिठक गया ……. अंग प्रत्यंग शिथिल हो गए …… मिरगी के मरीज मतिन हाथ पाँव ऐंठ गए …… गांडीव मने बरमाला हाथ से छूट गयी …… बहुत मोटे दहेज़ के साथ चन्द्रमुखी के सपनों में खोया लौंडा …… जब उसने अपनी होने वाली बीबी की शक्ल देखी तो उसे राजपाट से वैराग्य उत्पन्न हो गया । चन्द्रमुखी के ख्वाब लिए लड़के के सामने साक्षात ज्वालामुखी खड़ी थी ……. इस से पहले कि लौंडा बेहोश हो के गिर जाए और उसे जूता सुंघाना पड़े …… अगल बगल खड़े योगिराज कृष्ण टाइप लोगों ने मोर्चा सम्हाला और दिग्भ्रमित लौंडे को आधुनिक गीता का ज्ञान बांचना शुरू किया ……. मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे …… पर लौंडा टस्स से मस्स्स्स्स न हुआ । उसको तो कटरीना कैफ से बियाह करना था । और सामने वरमाला लिए खड़ी थी साक्षात ललिता पवार ……. उसने कहा हे तात …… क्या रखा है दान दहेज़ में ……. मैं खुद कमा के खा लूंगा ……. blah blah blah …….
इतना सुनते ही एक कृष्ण जी ने रौद्र रूप धारण कर जो अपना विराट स्वरुप जो दिखाया ……..
भोसड़ी वाले ? जिनगी में कभी 30,000 रुपया देखले हउए ? कहाँ से कमा लेबे 30,000 महिन्ना ?
अबे मस्टराइन हौ सरकारी इस्कूल में …… सारी जिनगी मऊज लेबे बे …….. और इस प्रकार कृष्ण ने उसे नाना विधि अर्थशास्त्र , समाजशास्त्र और नागरिक शास्त्र का crash course करवा दिया …….. अतः हे पार्थ …….. चेहरे की चमड़ी पे मत जाओ ……. हर महीने जब 1 तारिख को salary खाते में आ जाती है तो जो अलौकिक सुख मिलता है उसका महत्त्व सिर्फ देव लोक के देवता ही जान पाते हैं ……. इस प्रकार के economics के गुण सूत्र समझ पार्थ के मन मस्तिष्क में कुछ स्फूर्ति का संचार हुआ ….. मूर्छा दूर हुई …… चेतना जगी ……. उसने लपक के गांडीव बोले तो वरमाला उठा ली और जी कड़ा कर कलेजे पे पत्थर रख वधू को वर लिया ।
कालान्तर में पार्थ ने हस्तिनापुर में गिट्टी बालू cement सरिया बेचते हुए सुखपूर्वक जीवन यापन करने लगा ।
वो अलग बात है कि कुछ महीनों बाद शिक्षा मूत्र से मस्टराइन हुई बालिका हाई कोर्ट के आदेश से पुनर्मूशिका भव हो गयी ……
वो बड़ी दर्दनाक कहानी है …… फिर कभी ।

सख्त जान भारत

इस फोटो की आजकल बहुत चर्चा है सोशल मीडिया पे ।
कुछ लोग बहुत ज़्यादा सहानुभूति जता रहे हैं ।
कुछ ने आर्थिक मदद भेजने की पेशकश की है ।
कुछ उस व्यक्ति को गरिया रहे हैं जिसके उत्सव में ये महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण में सर पे भारी बोझ उठाये काम करती दीख रही है ।

परन्तु इस फोटो के प्रति मेरा नज़रिया कुछ और है । जो लोग इसे देख बहुत ज़्यादा उद्वेलित हैं वो वास्तविक जीवन से कटे हुए लोग हैं । उन्होंने न असली जीवन जिया है और न असली भारत देखा है ।

मेरा जन्म एक MH बोले तो Military Hospital में हुआ था । मेरी माँ उस MH के किस्से सुनाया करती थीं । बताती थीं कि उस MH की Matron बड़ी सख्त जान जल्लाद किस्म की औरत थी । labor room में प्रसव के तुरंत बाद मने सिर्फ 10 – 15 मिनट बाद माँ की गोद में बच्चा थमा के खडा कर देती । माँ अगर कोई नखरे दिखाती तो जोर से डांटती ।
क्या हुआ ? क्यों इतने नखरे कर रही है । कौन सा पहाड़ तोड़ा है । चल उठ के काम कर । मने 3 दिन MH में रखती पर सब काम उसी से करवाती । मने अपनी खुद की और बच्चे की देखभाल । उसका idea ये था कि सद्यप्रसूता मानसिक रूप से दृढ हो …… बहुत सुकुमार न हो ……. pregnency और Delivery कोई पहाड़ नहीं ।
हमने बचपन में ऐसे किस्से सुने हैं जब माँ जंगल में गयी घास लेने । वहीं delivery हो गयी । खुद ही हंसिया से नाड़ काटी और पीठ पे बच्चा बाँध सर पे लकड़ी या घास का गट्ठर धरे वापस चली आई ……. इतनी सख्त जान हुआ करती थीं हमारी दादी नानी ।
अगर यकीन न हो तो अपने घर में किसी 70 – 80 साल की महिला से पूछ लीजिये । ऐसे बीसियों किस्से सुना देंगी । मेरी माँ मेरी गर्भवती पत्नी से पूरे घर के पोचे लगवाती थी फर्श पे …… कहती इस से delivery बेहद आसान हो जाती है ।
ग्रामीण भारत आज भी बड़ा सख्त जान है । वहाँ ये चोचले नहीं चलते कि pregnant है तो काम नहीं करेगी । फोटो में दिख रही महिला हट्टी कट्टी स्वस्थ है । working woman है । कमा के खाना चाहती है । मेहनत परिश्रम से भाग नहीं रही ।
करने दो न उसे काम । क्यों जबरदस्ती पंगु बनाना चाहते हो ?

खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।

जो लोग गाँव में रहे हैं या ग्रामीण पृष्ठभूमि से है उन्होंने ये दृश्य देखा होगा ।
शेष अपनी कल्पना से देख लें ।
गाँव में कोई पशु जब बीमारी या वृद्धावस्था से एकदम अशक्त हो जाता है तो बैठ जाता है ।
बार बार उठने की कोशिश करता है पर उठ नहीं पाता ।
खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।
ऐसे में किसान दो चार आदमी जुटाता है और सहारा दे के पशु को खडा कर देते हैं ।
दो आदमी आगे से दो पीछे से और एक पूंछ पकड़ के उठाता है ।
अब आप सोचेंगे पूंछ पकड़ के कैसे उठा सकते है ?
पूंछ जहां पीठ से जुडी होती है , गुदा स्थान ज़े ठीक ऊपर …….. वो बहुत मज़बूत जोड़ होता है ।
जब तक वहाँ से जोर नहीं लगाएगा ……. पशु हो या मनुष्य …… खडा नहीं हो सकता ।
*** तक का जोर लगाना ……. ये कहावत यूँ ही नहीं बनी है ।
*** भीच के जोर न लगाओ तो कोई भी भारी काम हो नहीं सकता ……..
कोई जानवर उठने की कोशिश कर रहा है और आप अकेले हैं , उसकी मदद करना चाहते हैं …….
पूंछ पकड़ के थोड़ा सा सहारा दीजिये , खडा हो जाएगा ।

बचपन का एक किस्सा याद है मुझे ।
एक भैंस थी जिसे सहारा दे के उठाना पड़ता था । भैया आते जाते 2 – 4 लोगों को बुलाते । साथ में हम बच्चे लगते । भैंस खड़ी हो जाती । दो तीन हफ्ते ये सिलसिला चला । फिर वो मर गयी ।
अब उसे एक बैलगाड़ी में लाद के गाँव से दूर सीवान में पहुंचाना था …….. अंतिम यात्रा ।
उसके शव के पास गाड़ी लगाई । भैया आदमी जुटाने लगे । 10 एक आदमी हो गए । पर भैया बोले की 10 – 12 आदमी और जुटाओ । इतने से काम नहीं चलेगा ।
पर रोजाना तो हम 4 – 6 लोग ही मिल के इसे उठा लिया करते थे ?
आज 25 आदमी क्यों लगेंगे ?
क्योंकि तब ये जीवित थी । कितनी भी अशक्त थी पर जीवित थी ।
सच ये है कि तब भी वो अपनी ताकत से अपने प्रयास से अपनी इच्छाशक्ति से खड़ी होती थी ।
हम तो उसे सिर्फ हल्का सा सहारा दिया करते थे ।
पर आज ये मर चुकी है । She’s dead .
और मरा हुआ जीव बहुत भारी हो जाता है । बहुत बहुत भारी । तब उसे उठाना आसान नहीं होता ।
पूरा गाँव जुटाना पड़ता है ।

वो तो सिर्फ भैंस थी ।
हिन्दुओं ……. तुम तो हाथी हो । तुम मर गए तो पूरा गाँव मिल के भी न उठा पायेगा ।
crane मंगानी पड़ेगी ।

बंगाल से आज एक शुभ समाचार मिला । एक शुभ संकेत ।
TMC के हिन्दू कार्यकर्ताओं में एक undercurrent है । आक्रोश है ।
TMC के हिन्दू भोटर और कार्यकर्ता बेचैन हैं ।
उन्हें ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण रास नहीं आ रहा ।

लोहा गर्म हो रहा है । इसे लाल करो ।
लाल लोहा ही shape बदलता है ।

रूरा में किसी ने शांति पाठ तो नहीं किया ??????

पाकिस्तान के एक विद्वान् है । जनाब हसन निसार साहब ।
Youtube पे उनके विडियो बहुत लोकप्रिय हैं ।
सच बोलते हैं । मुसलमानों को आइना दिखाने के लिए कुख्यात हैं । पाकिस्तान के TV channels की debates में बड़ा बेबाक निर्भीक बोलते हैं ।
उनका एक सवाल है ……. पिछले 1400 साल में इस्लाम का contribution क्या है दुनिया को ? Humanity को ?
सिवाय दहशतगर्दी के तुमने दिया क्या है दुनिया को ?
आज तक एक सूई भी ईजाद की ? science Technology में तुम्हारा कोई योगदान पिछले 1400 साल में ? arts और Culture में ?
अलबत्ता terrorism में ज़रूर कुछ R&D करते नज़र आते हैं मुसलमाँ ।
सुन्नी दहशतगर्द इस्लाम के बाकी 71 फिरकों को और शेष काफिरों को मारने के नित नए तरीके इजाद करने की research ज़रूर कर रहे हैं ।
ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मारा जा सके ऐसे हथियार और तरीके develop करने की कोशिश है ।
जहां भी हो , जैसे भी हो , ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मारो …… बेक़सूर मासूम लोगों को मारो ……
जो कुछ भी है हाथ में , उसी को हथियार बनाओ ।
France और Germany में शान्ति दूत truck drivers ने अपने truck को ही शांति फैलाने का हथियार बना लिया है । अपना ट्रक लोगों की भीड़ पे चढ़ा दो ……. कुछ लोगों को कब्रिस्तान के शांतिपूर्ण माहौल में शान्ति से अपनी अपनी कब्र में लिटा दो……..

पिछले एक महीने में कानपुर के आसपास ये दूसरी घटना हो गयी ।
दोनों में ट्रेन सुबह 3 से 5 बजे के बीच पटरी से उतर गयी ।
120 kmph की स्पीड से दौड़ती रेल को derail करने का जुगाड़ सिर्फ 500 रु में बनाया जा सकता है ।
देश भर में फैली हज़ारों km लम्बी रेल पटरियों की रखवाली नहीं की जा सकती ।

कल रात कानपुर के पास रूरा में जो derailment हुआ उसकी इस angle से भी जांच होनी चाहिए कि ये काम शांति दूतों का तो नहीं ।
रूरा में किसी ने शांति पाठ तो नहीं किया ??????