Wrestling coach by profession Social Media writer ....... Traveller ...... loves Biking , cooking,

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UP चुनाव

इस्माइल मेरठी (Ismail Meeruti) साहब का एक शेर है ……..

अर्ज किया है ……..

उल्फत का जब मजा है कि वो भी हों बेकरार,
दोनों तरफ हो आग बराबर लगी हुई।

और इसी शेर की तर्ज पे ……..

गठबंधन का तब मज़ा है कि दोनों ही हों बेजार ……..
औ दोनों तरफ हो गाँड …………… बराबर फटी हुई

UP में सपा और congress का गठबंधन होगा ज़रूर ।
क्योंकि दोनों मने अखिलेश औ राहुल ……. मने सपा औ कांग्रेस …….
भाजपा औ मोदी के मारे , दोनों की है गाँड बराबर फटी हुई ।

राहुल बाबा जानते हैं कि अगर गठबंधन न हुआ तो कांग्रेस की 5 सीट नहीं आएगी इस बार UP में ।
और कितना ही विकास का तंबू तान लें , सपा के लिए बिना गठबंधन 50 का आंकड़ा छूना मुश्किल है ।

Congress की जमीनी स्थिति ये है की कांग्रेसी वोटर जैसी कोई चीज़ UP में अब नहीं बची है । कुछ एक सीटों पे कुछ ऐसे लोग है जिनका अपना व्यक्तिगत भोट है …….. वो एक तरह से निर्दल लोग हैं …….. congress छोड़ अगर निर्दल भी लड़ जाएँ तो जीत जाएंगे । ऐसे 5 – 7 लोग कांग्रेस के टिकट पे लड़ के जीत जाते है इसलिए congress का खाता खुल जाता है UP में । ऐसी सीटों पे कुछ भोट उस प्रत्याशी की जात का और कुछ मुस्लिम भोट मिल के वो सीट जीती जाती है ।

मोदी जी ने पिछले 5 साल में सपा से उसका गैर यादव OBC वोट छीन लिया है ।
इसी तरह मायावती के दलित भोट बैंक में से मोदी जी ने गैर चमार – जाटव भोट में बड़ी सेंध लगायी है ।

सपा congress गठबंधन का सबसे बड़ा नुकसान BSP को होगा जहां उसका मुस्लिम भोट खिसक के सपा- cong के साथ आ जाएगा ।
मुस्लिम भोट बेशक एकमुश्त सपा को पड़ेगा जिसकी प्रतिक्रिया में हिन्दू भोट का counter polarization होगा ।

हालफिलहाल स्थिति ये है कि सपा – congress गठबंधन पूरी जोड़ जुगत के बाद भी 26 – 27 % तक पहुँच पायेगा जबकि इस चुनाव में भाजपा शुरुआत ही 34 % भोट के साथ करेगी जो campaign के साथ बढ़ेगा ।

यदि भाजपा ने 30% भोट लिया तो 220 सीट
32 % लिया तो 240 – 250
34% पे 260 से 280
36 % पे 300 +

आज की तारीख में सबसे खराब स्थिति BSP की है ।
यही हालत रही तो हाथी फिर अंडा दे सकता है ।
सिर्फ चमार – जाटव के बल पे तो 10 सीट आनी मुश्किल है ।

फिलहाल इंतज़ार कीजिये ……. टिकट वितरण और नाम वापसी होने दीजिए ।
तभी picture clear होगी ।

Problem Solving का Sandwich Method

Problem Solving का Sandwich Method

उन दिनों हम लखनऊ में रहा करते थे । सबसे छोटा बेटा दानू वहाँ एक स्कूल में 1st में पढता था । स्कूल एक मुस्लिम उद्योगपति की बेटी चलाती थी जिसका जन्म दुबई में हुआ था और वो स्वयं वहाँ दुबई की British Embassy School की student रही थी । एक बेहतरीन school की स्टूडेंट होने के नाते वो अपने स्कूल को भी उसी pattern पे और बहुत ही मेहनत से , बड़े प्यार से चलाती थी । दिन रात मेहनत करती थी । दानू को स्कूल में कोई समस्या थी । उसके समाधान के लिए हम दोनों पति पत्नी स्कूल गए । मामला कुछ ऐसा था कि क्लास teacher को झाड़ पड़नी तय थी और हम दोनों उसे इस situation में डालना नहीं चाहते थे । बड़ा पेचीदा मामला था ।

तो साहब हम दोनों पहुंचे ऑफिस …..

जी कहिये ……

हमने उन्हें कहा की सबसे पहले तो हम आपको ये मुबारकबाद देने आये हैं कि आप एक बेहतरीन स्कूल चलाती हैं ।
बस इतना सुनना था कि मैडम तो फट पड़ीं और उन्होंने तो साहब अपना दिल खोल के धर दिया । और अपने बचपन के वो तमाम अनुभव , British स्कूल के …… सुनाने लगी …..और कैसे कि वो एक बेहतरीन स्कूल का सपना जी रही हैं ……. मैडम आधा घंटा भाव विभोर हो अपना सपना जीती रही ….फिर उन्हें अचानक ख़याल आया ….. अच्छा आप बताइए , आप कैसे आये ?

madam हम दरअसल ये चाहते है की आपका ये बेहतरीन स्कूल और बेहतरीन बने । आपका स्टाफ ….. कितनी मेहनत करते हैं बेचारे । दिन रात लगे रहते हैं ….. और हमारे दानू की मैडम …… कितनी अच्छी लड़की है बेचारी …… बस ये एक छोटी सी समस्या थी ……

मैडम जी ने तुरंत एक्शन लिया …..क्लास टीचर आई और वो समस्या जो कल तक सास बहू के सीरियल की कहानी से भी ज़्यादा पेचीदी थी और जिसपे कल तक तृतीय विश्व युद्ध अवश्यम्भावी लग रहा था चुटकियों में हल हो गयी ।

Problem solving और Criticism की इस कला को Sandwich method कहा जाता है । किसी की आलोचना करने से पहले उसकी सच्ची तारीफ करो । एकदम genuine ….. फिर जब माहौल पूरी तरह positive हो जाए ….. एकदम फुल्टू सौहार्दपूर्ण ….. तो ये कहते हुए कि आपको और अच्छा बनाने के लिए ये फलां फलां काम , ये समस्या ये कमी दुरुस्त करनी चाहिए जिस से कि आप एकदम World Champion हो जाओगे …… Bread के दो pieces के बीच खीरा प्याज टमाटर लगाओ ……

किसी की आलोचना करने के पहले और बाद में उसकी तारीफ करो ……क्योंकि आपका उद्देश्य समस्या को हल करना है …… बढ़ाना नहीं ……..

रेलगाड़ी बना Islamic Terrorism का नया हथियार ।

पाकिस्तान में एक हसन निसार साहब हैं ।
विद्वान् आदमी हैं । इस्लाम में जितनी इजाज़त है उस से ज़्यादा सच बोलते हैं ।
उनके सैकड़ों वीडियो Youtube पे उपलब्ध हैं ।
मुसलमानों को address करते हुए निसार साहब हमेशा एक बात कहते हैं ।
सिवाय दहशतगर्दी के और क्या contribution है इस्लाम का मानवता को ?
धर्म के नाम पे बेगुनाहों को मारने के अलावा कोई और उपलब्धि ?
विज्ञान में कोई कॉन्ट्रिब्यूशन ?
आज तक सुई भी ईजाद की ?
दहशतगर्दी के अलावा कुछ और दिया है दुनिया को ?
कोई Research and Development ?

हाँ ……. दहशतगर्दी , आतंक में ज़रूर research करते रहते हैं ।
हवाईजहाज को मिसाइल बना दो और highjack करके world trade center में लड़ा दो ।
अगर ट्रक चलाते हो तो अपने truck से ही भीड़ को कुचल दो ।
100 – 50 कुछ तो मरेंगे ?

कानपुर में लगातार दो Trains को derail करके सैकड़ों निर्दोष लोगों को मार के दहशतगर्दी की भारी सफलता के बाद अब तीसरी प्रस्तुति ……… जगदलपुर भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस को सफलतापूर्वक derail कर सैकड़ों लोगों को मारने में सफल रहे ।

रेलगाड़ी बना Islamic Terrorism का नया हथियार ।

ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

बहुत पहिले मने 80 के दशक में जब कि राजीव गांधी PM थे अ उनके पास प्रचंड बहुमत था , तो वो अपने अनाड़ीपने अ चुतियापे में बोफोर्स तोप में घिर गए ।
उस समय ई राम जेठमलानी ने उनको बहुत हैरान किया ।
ई जेठमलनिया रोज़ाना राजीव गांधी औ कांग्रेस से 10 सवाल पूछता था जिसका कांग्रेस के पास कोई जवाब न होता । अ यूँ समझ लीजिए कि पूरी कांग्रेस जिसके 410 सांसद थे अ विपक्ष एकदम्मे गायब था , थर्राती थी इस राम जेठमलानी से …….
उन्ही दिनों की बात है , किसी बात पे बाबू चनसेखर सिंह बलिया के बागी से इस राम जेठमलानी की ठन गयी । राम जेठमलनिया उनहूँ से दस सवाल पूछ लिया ।
चनसेखर जी बोले , साला कुक्कुर लोग भोंकता रहता है ……. हम किस किस कुक्कुर का जवाब देंगे ।
जेठ मलानी नहीं माना ……..
चनसेखर जी ने अपने 10 – 5 लौंडों को बोला ……… tommy ……. शू बेटा …… पकड़ साले को ……..
और लौंडों ने राम जेठ मलानी को इसी दिल्ली में पकड़ के , सरेआम , दूरदर्शन के कैमरा के सामने मारा 5- 7 लप्पड़ …….. ज्यादा मारने लायक ऊ था नहीं …….. मने तब भी इतना ही बूढा था जितना आज है ……. मने इसकी expiry date तो कबकी निकल चुकी ।
सो लौंडों ने ज़्यादा मारा नहीं , मने सिर्फ 5 – 7 लप्पड़ मारा , पर कपड़ा ओपड़ा सब फाड़ दिए थे , मने एकदम चिन्दी चिन्दी कर दिए थे ।
इस high profile पिटाई को दूरदर्शन ने अगले दिन बहुत कायदे से कभर किया ।
आशा की जाती थी कि सुप्रीम कोर्ट का इतना बड़ा और नामी वकील , इस सरेआम दिन दहाड़े की गयी पिटाई पे बहुत हाय तौबा मचाएगा पर बुढ़वा चूं तक नहीं किया ……. उसके बाद राम जेठमलानी ऐसा पटाये कि कई साल दिल्ली में दिखाई नहीं दिया ।

मुझको अपने इन भाजपा और RSS नेताओं से बस यही शिकायत है कि ई साले सब जरुरत से जायदे मने गंडुत्व की हद तक शालीन हैं । मने होना तो ऐसा चाहिए कि किसी पत्रकार की हिम्मत ही न पड़े कोई ऐसा वैसा हल्का फुल्का सवाल पूछने की ……. मने ऐसे loaded questions जिनका आप कोई भी जवाब दें विविद होना ही होना …….. ऐसे सवाल पूछने वाले पत्रकार की शाम तक कंबल परेड करा देनी चाहिए ।
मुझे ऐसा ही एक किस्सा मोदी जी का याद आता है ……. जब CM थे गुजरात में ।
किसी function में से बाहर निकलते एक पत्रकार ने उनसे ऐसा ही एक loaded question पूछ लिया …….. मोदी ने कुछ नहीं कहा ……. सिर्फ उसको ताकते रहे …….. यही कोई 10 second ……. फिर बोले क्यों बेटा ? मिल गया जवाब ?
जिस स्कूल में तुम अडमीसन लिए हो न , हम उसके भीसी रिटायर हुआ हूँ ……..
देश के बड़े से बड़े पत्रकार मने वो जो फूल के अंडुआ हुए हैं न , उनकी भी हिम्मत नहीं होती कि मोदी और अमित शाह से कोई हल्का फुल्का सवाल पूछ ले …….. मने ऐसा आँख गिरोर के ताकते हैं कि पूछने वाले की फट के हाथ में आ जाए ।

कल मनमोहन वैद्य से loaded प्रश्न पूछा गया और वैद्य जी ने संघी शालीनता से उसका जवाब दिया जबकि उनको चाहिए था कि सामने आ रहे चुनावों के मद्देनजर उसे खांटी भोजपुरी में बनरसिया जवाब देते …….

ये ज़रूरत से ज़्यादा संस्कृत निष्ठ हिंदी भी नहीं बोलनी चाहिए ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

कहावत है कि बिल्ली को सपने में भी छीछड़े ही दिखते हैं ।
बिल्ली बड़ा नहीं सोच सकती ।
कल एक मित्र कह रहे थे कि भाजपा ने हमारी बिरादरी को आज तक दिया ही क्या है जो ये वहाँ जूते खाने चले जाते हैं ।
जब से भाजपा की लिस्ट आयी है , कुछ लोग चुटकी ले रहे हैं कि भाजपा ने दद्दा को टिकट नहीं दी । दद्दा ने पार्टी की इतनी सेवा की पर अहसान फरामोश भाजपा ने टिकट नहीं दी ।
छीछड़ों के सपने ऐसे ही देखे जाते हैं ।

लोगों को , समूहों को , वर्गों को , जातियों को अपने वोट की कीमत चाहिए ।
हमारी जात ने पार्टी को भोट दिया तो बदले में पार्टी की सरकार ने हमारी जाति को क्या दिया ?
कोई सरकार किसी जाति को अधिक से अधिक क्या दे सकती है ?
अधिक से अधिक आरक्षण ?

मुझे इस पार्टी कार्यकर्ता नामक शब्द से बहुत चिढ है ।
ये कार्यकर्ता आखिर होता क्या है ? क्या करता है ?
जब कोई नेता परेता आता है तो कार्यकर्ता उसी नेता से प्राप्त पैसों से एक दो गाड़ी ठलुए गाँव से भर के रैली में पहुंचा देता है , नेता ने जो पैसा दिया था उसमें से आधा बचा लेता है । सरकार अपनी हो तो थाने और तहसील की दलाली करता है । सड़क पे दो कुत्ते लड़ पड़े हो तो किसी एक के पक्ष में थाने में जा के पैरवी करता है , अनर्गल दबाव डालता है , पुलिस को काम नहीं करने देता , न्याय नहीं करने देता , पुलिस न सुने तो नेता जी से चुगली करो , कान भरो …….. थानेदार ने मेरा पालतू कुत्ता बनने से मना कर दिया ……. गौरतलब है कि ऐसे कार्यकर्ताओं की सेवा निःशुल्क नहीं होती बल्कि वो इसी थाने तहसील की दलाली से ही जीते खाते हैं । इसे कहते हैं जनता के टुकड़ों पे पलना , उसे नोच के खाना ।
थोड़ा बड़ा कार्यकर्ता , जो नेता जी को manpower और money power के साथ muscle power भी उपलब्ध कराता है , वो सरकार आने पे ठेकेदारी करता है । सरकार द्वारा किये गए सभी निर्माण और विकास कार्यों में उसे ठेकेदारी में हिस्सा चाहिए । वो पार्टी को दी गयी अपनी ” सेवा ” की पूरी कीमत वसूलना चाहता है ।
एक आम वोटर अपने वोट की कीमत 100 – 50 रु या एक पव्वा दारू मुर्गा नहीं तो एक सूती साड़ी लगाता है ।
बिकाऊ एक अकेला वोटर भी है , पूरी जाति बिकने को तैयार बैठी है । सवाल है , बदले में क्या देगी पार्टी और उसकी सरकार ?
बिल्ली की समस्या ये कि वो सबको बिल्ली ही समझती है ।
मैं उदयन चलाता हूँ । गाँव में जब उदयन शुरू हुआ तो पहले तो लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है ?
आखिर मुसहरों को घी क्यों पिलाया जा रहा है ?
पहला निष्कर्ष जो लोगों ने निकाला वो ये कि अजीत सिंह परधानी का चुनाव लड़ेंगे । गाँव की गुणा गणित में ये मान लिया गया कि एक प्रत्याशी हमारे परिवार का अवश्य होगा ।
परधानी का चुनाव आया और निकल गया । साल भर कंबल , रजाई , तोसक तकिया , कपड़ा जूता बांटा था , सो लोग समझते थे कि अजीत सिंह मुसहरों का 200 वोट तो एक मुश्त दिलवा ही देंगे ।
इधर अजीत सिंह परधानी के चुनाव से 20 दिन पहिले गाँव छोड़ जालंधर चले गए और जब बिजय जलूस निकल गया और खस्सी कट के बँट गया तब लौटे ।
हमने किसी से नहीं कहा कि फलनवा को भोट देना ।
लोग अब फिर कयास लगा रहे हैं कि अजीत सिंह आखिर क्यों , किस लालच में मुसहरों को घी पिया रहे हैं । उदयन के पीछे सचमुच इस समुदाय के कल्याण की भावना छिपी है यहाँ तक लोग सोच ही नहीं पाते ।
अजीत सिंह दिन रात एक किये हैं सोशल मीडिया पे , मोदी और भाजपा के पक्ष में ……..
किस लालच में ? क्या कीमत वसूलेंगे ? कोई कीमत तो सोची ही होगी ?
निस्वार्थ निर्विकार भाव से भी कोई काम किया जा सकता है , ये लोग सोच ही नहीं पाते ।
खस्सी कटा है तो ज़्यादा नहीं तो छीछड़े तो हमारे हिस्से आने ही चाहिए ???????

अबे छोडो यार छीछड़ों को ……… पूरे बकरे की सोचो ।
हर व्यक्ति अपनी सेवा की कीमत चाहता है ।
वो कर्त्तव्य समझ के कोई काम नहीं करना चाहता ।
व्यक्ति को समाज से , सरकार से और राष्ट्र से अपना हिस्सा चाहिए ।
My pound of flesh ……. Flesh न मिले तो छीछड़े ही सही ।

जैसी हमारी नीयत , मने इस राष्ट्र की collective नीयत , वैसी ही हमारी सरकारों की ।
आखिर सरकार भी तो हमारे ही चरित्र का reflection है ……….
सरकार जानती है कि ये समाज छीछड़े ही चाहता है । इसलिए उसने आज तक हमें छछड़ों पे ही पाला । नारों का slogans का lollypop चुसाती रही ।
एक ईमानदार सरकार अगर आ गयी और उसने कहा कि हम विदेशों में जमा काला धन ले के आएंगे , तो समाज ने तुरंत इसे लपक लिया …….. मेरे हिस्से के छीछड़े ? मेरे 15 लाख मेरे खाते में कब आएंगे ?
छीछड़े बाज आदमी अपने खाते में चाहता है ।
जिसकी निगाह पूरे बकरे पे है वो कहेगा , ठीक है , लाओ कालाधन और उसे राष्ट्र के समग्र विकास में लगाओ …….. मुझे मेरे हिस्से का विकास चाहिए …….
छीछड़े नहीं ।

इसलिए मित्रों , MLA का टिकट मेरे लिए तो छीछड़े से ज़्यादा कुछ नहीं ।
UP का चुनाव सिर पे है । निजी फायदे , निजी स्वार्थ छोड़ समाज के समग्र विकास के लिए भोट कीजिये ।

निगाह पूरे बकरे पे रहे , छीछड़ों पे नहीं ।

सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

बाबरी ढांचा भाजपा ने गिराया ।
ऊपी में तब सरकार भाजपा की थी ।
CM कल्याण सिंह थे पर UP के मुसलमानों ने कांग्रेस को ऐसा लतिआया , ऐसा लतिआया कि आज तक उठ नहीं पायी ।

1984 में कांग्रेस ने स्वर्ण मंदिर में घुस के पहले सिखों का कत्ले आम किया और फिर दिल्ली में इंदिरा की हत्या के बाद कांग्रेसी हत्यारों ने कांग्रेस की केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कत्ले आम में 6000 सिखों को ज़िंदा जला डाला ………

इसके बावजूद ये सोच के आश्चर्य होता है कि पंजाब के सिख आज भी कांग्रेस के लिए भोट करते हैं ????????
जिस परिवार ने स्वर्ण मंदिर की बेइज़्ज़ती की और जिस परिवार ने दिल्ली में 6000 सिखों के गले में जलते हुए टायर डाल के ज़िंदा जलाया , उसी नेहरू गांधी परिवार का पिछवाड़ा चाट रहे हैं सरदार अमरेंद्र सिंह और सरदार नवजोत सिद्धू ……..
लानत है ऐसे सिख पे जो कहता है कि कांग्रेस मेरी माँ है ……. कांग्रेस मेरा असली घर है ???????
सिख कौम इतनी जल्दी भूल गयी 84 के कत्ले आम को ??????

ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?

अरे ओ साम्भा …….
अखिलेसवा तो बोलता था कि लखनऊ वाले शान से चलेंगे अब सम्मान से …….
अ टीभी पे विज्ञापन देखा देखा के कान पका दिया ……..
अ अभी पुष्कर दद्दा बता रहे थे कि अभी तो लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे में बहुत जायदे काम बाकी है । अभी कम से कम दुइ साल लगेगा expressway को पूरा होने में ……..
करे साम्भा ?
भइंस आज धनाई है ……. अभी गाभिन हुई कि नहीं हुई ई महिन्ना भर बाद पता चलेगा ……. अ ई सार जादो जी इन्नर खाये के न्योता पूरे गाँव को अबहियें बाँट दिए बे ……..

अबे ई सुहागरात पे सोहर काहें गा रहा है बे ?
अभी लखनऊ आगरा एस्प्रेस वे का चौथा महिन्ना चल रहा है ।
अभी तो पेटवो नहीं फूला है ।
अ ई ससुरा दाई बुलवा के पानी गर्म करवा रहा है ।

मैंने जीवन में पहली बार देखा है कि आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन किया जा रहा है ।
अपनी पीठ खुद थपथपाई जा रही है ।
जादो जी कब तक चूतिया बना के भोट लोगे ?
Public को और कितना चूतिया बनाओगे दोनों बाप बेटा ?

BiMaRU tag वाले 4 राज्य हुआ करते थे देश में । UP बिहार MP और राजस्थान ।
इन चार में से दो तुमसे मीलों आगे निकल चुके हैं । बिहार पिछले 8 – 10 साल में तुम्हारे बराबर आन खड़ा हुआ है ।
एक ज़माना था कि MP एक बेहद backward state था । वहां की दशा देख रोना आता था ।
आज शिवराज का MP देख के जी खुश हो जाता है ।
MP के state highway 4 lane हैं …… दूर दराज के गाँवों में 24 × 7 बिजली आती है ।
उद्योग धंदे लग रहे हैं । क़ानून बेवस्था दुरुस्त है । लोगों का जीवन स्तर सुधर रहा है । रोज़गार के लिए लोगों का पलायन रुक गया है ।
इसके विपरीत UP की बेहाली का बयान नहीं किया जा सकता ।

ये एक स्थापित सत्य है कि जहां भी , जिन राज्यों में भाजपा की सरकार रही है वहाँ विकास हुआ है और लोगों का जीवन स्तर सुधरा है ।

UP का कल्याण सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही कर सकती है ।
ये बात UP वालों को समझ लेनी चाहिए ।

लंगड़े घोड़े युद्ध में नहीं उतारे जाते ।

एक मित्र हैं
Param Bhagwat …….
उन ने मेरी एक पोस्ट पे कमेंट किया है …….
मुलाहिजा फरमाएं ……..

टिकट बांटना पार्टी अध्यक्ष का अधिकार है, पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को छोड पांच साल सत्ता की मलाई खाने के बाद भाजपा मे आये, दलबदलूओं को टिकट देना कहाँ तक सही है, टिकट कम से कम दो साल पहले पार्टी ज्वाइन करने वालों को ही मिलना चाहिये, चुनाव के समय शामिल होने वालों को नही

देखो भैया , बड़ी कड़वी बात बोल रिया हूँ ।
चुनावी राजनीति में और युद्ध में सिर्फ एक लक्ष्य होता है ……
विजय ……..
By Hook or Crook ……. किसी भी कीमत पे …… विजय
जीतना जरुरी है ……..

ये धर्म युद्ध किताबी बातें हैं ……. युद्ध में धर्म और आदर्श और संस्कार और शराफत …… ये सब कुछ ना चलते ।

सिर्फ एक चीज़ का महत्त्व है ……. विजय ।

टिकट देते समय सिर्फ और सिर्फ एक बात देखी जाती है ……. Winnability .
उम्मीदवार जीतेगा या नहीं ।
टिकट उसको जो जीत के आये ।
अपनी तरफ से पार्टी टिकट सिर्फ और सिर्फ उसको देती है जो उसे लगता है कि सीट निकाल लेगा ।
बाकी यहां मोदी और अमित शाह कोई दान खाता , सदाव्रत और धर्म खाता खोल के नहीं बैठे हैं ।
और मोदी तो इतना निर्मोही कि वो तो अपने बाप कू बी ना दे टिकट ………

हमको तो जीतने वाला घोड़ा चाहिए …… फिर वो काबुल का होय चाहे काठियावाड़ का ………
लंगड़े घोड़े युद्ध में नहीं उतारे जाते ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

पूर्वांचल में बनारस का पडोसी जिला है चंदौली ।
इसे पूरब का Rice bowl कहते हैं । इस से सटे 4 – 5 जिले जैसे कि वाराणसी , गाज़ीपुर , जौनपुर , आज़मगढ़ , मिर्ज़ापुर , भदोही और उधर बिहार के कुछ जिले , इनमे दुनिया का सबसे बेहतरीन धान उगाया जाता है ।
आम तौर पे शहरी लोग चावल की सिर्फ एक variety जानते हैं । बासमती ……. जो अपने स्वाद और लंबे दाने के लिए पसंद किया जाता है और 70 से 150 रु किलो तक में बिकता है । इसके महंगे बिकने का एक कारण तो ये होता है कि इसकी उपज अन्य vatieties से कम होती है ।
पर पूर्वांचल के इन जिलों में कुछ स्थानीय varieties होती हैं , जिनकी उपज भी भरपूर है , मने bumper crop होती है , और स्वाद गुण में बासमती के बाप हैं । स्थानीय बाजार में इन किस्मों की कीमत 20 से 25 रु किलो तक होती है । इनमे ख़ास कर सोनम , मंसूरी ( इसकी 3 varieties हैं , नाटी , मंझली और साम्भा मंसूरी ) , धनरेखा इत्यादि । इसके अलावा एक किस्म है जीरा 32 …….. इसका दाना बहुत छोटा और महीन होता है , एकदम जीरे जैसा । ये है असल में बासमती का बाप । स्थानीय बाजार में 45 रु किलो बिकता है । ऐसी 20 अन्य varieties और हैं जो यहाँ होती हैं ……… और bumper होती हैं ।
ऐसा ही एक rice bowl राजस्थान में भी है । हाड़ौती संभाग में कोटा , बूंदी जिले में । वहाँ भी दुनिया का बेहतरीन बासमती होता है । बताया जाता है कि कोटा बूंदी जिले में 100 से ज़्यादा अत्याधुनिक विशाल Rice Mills और shellers हैं जो इस धान को process कर market में उतरते हैं । आज कोटा बूंदी का बासमती पूरी दुनिया में अपनी धाक मचा रहा है । समूचे Europe , अमेरिका और Middle east में इसकी जबरदस्त मांग है ।

पर स्वाद और उपज के मामले में चंदौली belt का धान कोटा बूंदी से 21 नहीं बल्कि 25 है ।
मने चंदौली की मिट्टी पानी और जलवायु में उपजा धान कोटा बूंदी से लाख दर्जे बेहतर है ………

अब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से एक सवाल ……… अखिलेश जी , चंदौली और इसके आस पास के जिलों में कितनी rice mills हैं ?
आपके 5 साल के शासन काल में चंदौली के इर्द गिर्द कितनी नयी rice mills लगी ?
आपकी सरकार ने चंदौली belt की इन बेहतरीन और इतनी सस्ती मने 20 – 22 रु किलो बिकने वाली varieties को देश भर में promote कर लोकप्रिय बनाने के लिए क्या काम किया ?

वाराणसी मंडल और इसके लगते जिले , हम यहां दुनिया का सबसे स्वादिष्ट दूध पैदा करते हैं …….. जी हां …….. बनारस की मिठाई का स्वाद यहां के दूध और मावे की मिठास और स्वाद से है …….. गाँव के dairy farmer की समस्या है कि उसका सुबह का दूध तो बिक जाता है पर शाम का नहीं बिकता …….. ऊपर से दूध उत्पादन तो अहीरों का मुख्य पेशा है ?
अखिलेश जी , आप बताएँगे कि आपकी सरकार ने पिछले 5 साल में कितने milk processing प्लांट लगाए पूर्वांचल में ? कितने milk collection centers खोले ? कितने chilling plants लगाए ?

अखिलेश जी , UP के यादव तो आपके बंधुआ भोटर हैं न ? Dairy farming बढ़ेगी तो सीधे सीधे उन्हें फायदा होगा ……. आपने पिछले 5 साल में dairy उद्योग के लिए क्या किया ?
बीकानेर जैसा सूखा पानी को तरसता जिला पूरे देश में दूध supply कर सकता है तो पूर्वांचल तो स्वर्ग है हुज़ूर dairy farming के लिए ……. कितनी ग्रोथ हुई पिछले 5 साल में milk production में ?
कितने नए Dairy farms खुले ? कितने farmers ने अपने farms upgrade किये ? आपने कितना ऋण उपलब्ध कराया डेरी फार्मिंग के लिए ?
पूर्वांचल में कितनी sugar mills नयी लगीं ?
जो बंद पड़ी थीं उनमे से कितनी चालू हुई ?
कितने नए cold स्टोर बनाये आपने ?
कितनी नहरें खुदी ?
कौन सी नयी सिचाई परियोजना ले के आये आप ?
कितने नए thermal power projects आपने लगाए प्रदेश में , या मंजूरी दी ……..
नितिन गडकरी के NH छोड़ पूरे पूर्वांचल की कोई एक सड़क बता दीजिए , जो आपने बनवाना या चौड़ा करना तो दूर , जिसका आपने patch work ही करा दिया हो ?
कोई एक सड़क ? कोई एक state हाईवे ?

कोई एक नया उद्योग जो लगा हो पूर्वांचल के इन 40 जिलों में ???????
मिर्ज़ापुर भदोही में दुनिया का सबसे बेहतरीन कालीन बनता है घर घर ……… जिसका सत्यानाश कर मारा कैलाश सत्यार्थी ने ……… उसके revival के लिए क्या किया आपने ?
वाराणसी और मऊ के साडी बुनकर ( जिनमे अधिकाँश मुसलमान है ) उनके लिए क्या किया ?

कोई एक स्कूल कॉलेज बताइये जो आपकी सरकार ने बनवाया हो पिछले 5 साल में ?

किसका विकास किये हो भैया ?
कहाँ किये हो ?

गायत्री प्रजापति रोज़ाना 4 करोड़ रु देता था तुमरी मने प्रतीक गुप्ता जादो की मम्मी को …….. सिर्फ साधना गुप्ता जादो और उनके लौंडे का विकास हुआ है पिछले 5 साल में ।

अखिलेश जादो , विकास का ढोल पीटना बंद करो ……..

फ़ौज में नया नया भर्ती हुए एक फौजी की कहानी ।

फ़ौज में नया नया भर्ती हुए एक फौजी की कहानी ।
मेरे बेटे के साथ के जिला गाज़ीपुर के कुछ लड़के , जो इसके साथ ही पहलवानी करते थे , जब धीरे धीरे जवान हुए तो उन्हें रोज़ी रोज़गार की चिंता सताने लगी ।
खिलाड़ियों के लिए बड़े सीमित विकल्प होते हैं । खिलाड़ी आमतौर पे लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर होते हैं । उनके बस का नहीं कि कोई entrance exam पास कर नौकरी पा लें ।
ऐसे में ले दे के एक sports quota का ही आसरा होता है ।
सो हुआ यूँ कि आज से कोई 5 साल पहले गोंडा में senior national championship हुई तो वहाँ army और Navy के coaches 18 – 19 साल के लड़कों को खोज खोज के भर्ती का offer दे रहे थे ।
नन्हे के साथ का एक लड़का जो बड़ा बेहाल परेशान था , उसने army की एक regimental टीम में भर्ती होना स्वीकार कर लिया ।
हमने उसे बहुत समझाया …….. रहन दो पहलवान ……. तुमरे बस की ना है फ़ौज की नौकरी ……..
साले छुट्टा सांड की तरह खेत खलिहान सीवान में घूमने चरने की तुमको आदत है । फ़ौज की नौकरी तुमको जेल सी लगेगी । अभी कुछ दिन में रेलवे की तमाम vacancy निकलेगी गोरखपुर , मुग़ल सराय , बनारस और DLW में , रेलवे की नौकरी आसान है , तुमसे निभ जायेगी ।
पहलवान परेशान था । decision ले नहीं पाया । थाली में सजा के नौकरी मिल रही है । इसे छोड़ दूं और कहीं वो भी न मिले ? इस से भी जाऊं और वो मिले न ।
अंततः उसने Army ज्वाइन कर ली । इधर उसका फ़ौज में हुआ उधर हमारे पहलवान ने रेलवे join कर ली ।
पूर्वांचल में आजकल unemployed लड़कों की कोई पूछ नहीं matrimony बाज़ार में । हर बाप , चाहे उसकी बिटिया कितनी भी निकम्मी क्यों न हो , उसे दामाद सरकारी नौकर ही चाहिये ।
सरकारी नौकरों में भी , फौजी आखिरी पायदान पे हैं । ससुर जी चाहते हैं कि दामाद या तो राज्य सरकार या केंद्र सरकर में सिविल नौकरी में हो । अगर belt वाली job है तो फिर पुलिस में हो ……. थक हार के जब कोई न मिले तो फौजी ही सही …….
उधर बेरोजगार लौण्डों का भी यही हाल है । अगर एक लड़के के हाथ में आप दो appointment letter रख दें , एक फ़ौज का और दूसरा निगम के सफाई कर्मी का , तो 100 में 90 लौंडे सफाईकर्मी लग जाएंगे , फ़ौज में सिपाही न बनें ।
फिर भी मरा हुआ हाथी भी लाख का …….. सो पूर्वांचल के matrimony बाजार में फौजी भाई का भी ठीक ठाक भाव लग जाता है , मने लाख दो लाख रु नगद और कम से कम एक Bike तो मिल ही जाती है । हमारे पहलवान फौजी भाई को भी मिल गयी । दुलहनिया घर आ गयी ।
अब शुरू हुई असली समस्या । कल तक जिस नौकरी के लिए तरसता था अब वही नौकरी काटने को दौड़ती थी ।
बेरोजगार आदमी को साल भर पगार मिल जाए तो वो बेरोजगारी का सारा दर्द , सारे कष्ट भूल जाता है । हमारे फौजी भाई के साथ भी वही हुआ । घर बैठी नयी नवेली दुल्हन को छोड़ कौन जाना चाहता है बॉडर पे ? अब उसे भी फ़ौज की नौकरी में सौ खामियां दिखने लगी हैं । छुट्टी आता है तो वापस जाना नहीं चाहता । खाना अच्छा नहीं है । अफसरों की गुलामी करनी पड़ती है …….. इसके अलावा और 100 कारण है जिनके कारण वो फ़ौज की नौकरी नहीं करना चाहता ।
25,000 रु तो कैसे भी कमाया जा सकता है ।
फ़ौज की नौकरी नहीं करनी ।

आज जो अचानक बाढ़ आ गयी है सोशल मीडिया पे , फ़ौज और अर्ध सैनिक बलों के जवानों की …….. कोई कह रहा की खाना अच्छा नहीं और कोई छुट्टी का रोना रो रहा , किसी को फ़ौज की सेवादारी बहुत बुरी लग रही …….. ये सब वही लोग हैं जिनसे belt की नौकरी हो नहीं रही , वो जो बेरोजगारी का दर्द और दंश भूल गए हैं ……..

कड़वा सत्य ये है कि आज सेना में कोई नहीं रहना चाहता । सबको मुफ्त की पगार चाहिए , सुविधा सब चाहिए , पर काम न करना पड़े ………