BSF जवान के भूखे मरने वाले वीडियो का सच क्या है ?

सोशल मीडिया पे इन दिनों BSF के एक जवान का वीडियो viral हुआ जाता है ।
बेचारा जवान भूखा मर रिया है ।
वो बेचारा सारा दिन बर्फ में खड़ा duty देता है और पीछे से उसका घी Commandant साहब खा जाते हैं ।
मैंने कल वो वीडियो देखा तो मेरा तो खून खौल उठा ।
देस की तो आज़ादी खतरे में है भाई ।
गाली महोत्सव तो बनता है । पर इसके लिए गाली पर्रीकर को नहीं राजनाथ सिंह को दो ।
BSF एवं अन्य para military forces MHA बोले तो ministry of Home affairs के अंतर्गत आते हैं ।

अब मेरी चूँकि भारत सरकार में एकदम ऊपर तक बात है सो मैंने तुरंत फून लगाया ……. बात कराओ साले से …….. क्यूँ बे मलेच्छ …… BSF का राशन खा गया बे साले चोर ? भुक्खड़ ?

By god की कसम ……. खाजनाथ वहीं धोती में मूत दिए ……. बोले गुस्सा थूक दीजिये मालिक …….. राशन supply फ़ौज में होती है मालिक । वहाँ ये सब चोरी चकारी चलती है ।
बाकी para military forces में हम लोग Ration Money देते हैं हुज़ूर …….. वो ration money सिपाही की पगार के साथ उसको दे दी जाती है ।
अब उस पैसे को वो कैसे खर्च करते हैं ये उनकी regiment या battalion जाने ।
उनका commandant जाने ।
हमने तुरंत commandant को फून लगाया …….. क्यों बे साले चोरकट ……. चिन्दी चोर …… साले तनख्वाह में पेट नहीं भरता बे ? साले जवानों का राशन खा जाता है ?
अब जब उसको पता चला कि सोसल मीडिया मने फेसबुक के इतने बड्डे मठाधीस का फून आया है …… माँ कसम थर थर कांपने लगा commandant …….. बोला सर गलती हो गयी जी ……. पर मेरी बात तो सुन ल्यो हुजूर ………
Sir जी , system नयूं है जी कि BSF या किसी भी para military force में Ration की supply नहीं होती । मैं यानि कि commandant महीने में एक बार पूरी battalion की एक open meeting लेता हूँ जिसे दरबार कहा जाता है । उस दरबार में एक mess committee बनायी जाती है ।
इसमें एक Inspector , एक sub inspector , एक HC बोले तो head कांस्टेबल और 6 सिपाही रहते हैं । हर महीने नयी कमेटी बनती है । कमेटी का चयन मैं नहीं बल्कि battalion के जवान खुद मनोनीत करते हैं ।
फिर वो कमेटी जिसमे इंस्पेक्टर से ले के कांस्टेबल तक सब होते है बाज़ार से खुद जा के local purchase करते हैं Ration की ……. आटा , चावल, दालें ,तेल ,मसाला , दूध , घी , मक्खन, bread ,अंडे ,पनीर , Meat सब कुछ local market से खरीदा जाता है । LPG भी ……. batallion में cook होते हैं । ज़रूरत पड़ने पे local helper भी वेतन पे रख लिया जाता है ।
क्या खाना है कैसे खाना है देसी घी में दाल छौंकनी है या काजू बादाम खाने हैं इसका निर्णय सब वही कमेटी लेती है …….. सबकी मने खाने वालों की सलाह या demand के अनुसार ।
Commandant बीच बीच में देखता ताकता रहता है । कोशिश यही रहती है कि हर जवान का mess bill कम से कम इतना ज़रूर आये जितनी उसकी ration money है । मने बेशक उसकी जेब से 100 -200 लग जाए पर वो ration money में से पैसा बचाने न लगे ……..

आज सुबह मैंने कुछ मित्रों जानकारों से फोन पे बात की । ऐसे लोगों से जो BSF , CRPF या CISF में हैं । एक मित्र ने बताया कि उनकी battalion जम्मू के पास posted है ।
हमारा सारा राशन अखनूर रोड स्थित wallmart से आता है ।
सारा सामान A ग्रेड उच्च quality …….. खुद हमारे अपने cook बनाते हैं । हम लोग खुद हिसाब किताब रखते हैं । मेरी regiment में mess कमेटी हर महीने बदलती है ।
Commandant साहब खुद हमसे पूछते हैं कि किसको रखना चाहते हो कमेटी में ………
एक HC हमारा फेवरिट है । हमने जब उसी को continue करने की बात कही तो साहब नहीं माने क्योंकि हर महीने आदमी बदलने का rule है । अगले महीने जब फिर दरबार सजा तो जवानों ने फिर उसी HC की मांग की ……. साहब ने पूछा , आखिर इसकी इतनी demand क्यों है। जवानों ने बताया कि इसके management में सबसे बढ़िया खाना बनता है । हर के साहब ने उसे फिर मनोनीत कर दिया ।

अब जब ऐसी व्यवस्था है तो फिर ये जवान सोशल मीडिया में ऐसी बात क्यों कह रहा है ये जांच का विषय है ।
मैंने ये पोस्ट जो लिखी है वो विभिन्न forces के अलग अलग लोगों से बात करके लिखी है ।
यदि इसके तथ्य गलत हैं तो लोग स्वयं बताएँगे ।

सत्य सामने आना ही चाहिए ।

The tale of a dog ……… Daisy की कहानी भाग 2

The tale of a dog ……… Daisy की कहानी भाग 2

नए घर में वो बात न थी ।
सबसे पहले तो माँ न थी । हालांकि माँ तो पहले ही छिन गयी थी , जब से युग आया था ।पर फिर भी इतना संतोष तो रहता था कि वो आसपास ही हैं । उनकी गंध तो मिलती रहती थी । आवाज़ भी सुनाई देती थी ।
अब बेशक उनके कमरे में जाने की इजाज़त न थी ……. फिर भी वो ऊपर आती थीं ……. रोज़ाना …… खाना खिलाने …… दुलारने पुचकारने ।
पर नए घर में आयी तो माँ पीछे छूट गयी ।
पर नए घर में भी उसने जल्दी ही adjust कर लिया । यहां भी , उसे अंदर घर में आने की इजाज़त न थी । खाना समय पे मिल जाता था । पर न कोई बात करने वाला था , न कोई दुलारने पुचकारने वाला ……. न कोई बाहर घुमाने फिराने वाला ……… नयी मालिकिन बहुत व्यस्त रहती थी । यूँ भी उसे और बहुत से काम थे , कुत्तों को पुचकारने के अलावा …….. सो उसी घर में मेरी पहली मुलाक़ात हुई Daisy से । बड़ी गुमसुम सी लगी । उदास सी । हम पहली बार मिले । हेल्लो हाय हुई ।
मैंने उसे सहलाया पुचकारा ……. उसने कोई ख़ास response न दिया ।
फिर मेरी पत्नी आयीं । मोनिका ।
Daisy जल्दी ही उनके साथ घुल मिल गयी ।
यूँ तो daisy को घर में घुसने की मनाही थी पर जैसे ही मोनिका घर आतीं , वो उसे घर में घुसा लेती । अपने साथ बैठा लेती । खूब दुलारती पुचकारती । सोफे पे भी अपने बगल में बैठा लेतीं । इस तरह मोनिका के साथ daisy की घनिष्ठता बढ़ने लगी । पर Daisy की ये मौज तभी तक रहती जब तक मोनिका रहतीं । उनके जाते ही तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता ।
साल में तीन चार बार ऐसा होता कि हमारी बहिन जी पहाड़ों पे चली जातीं ……. कभी घूमने टहलने तो कभी विपश्यना करने ……..उस दौरान Daisy बिलकुल अकेली हो जाती । उन दिनों विभिन्न लोगों की duty लगायी जाती कि वो पीछे से आकर एक ताला बंद gate के उस पार Daisy के लिए कुछ बिस्किट या bread फेंक देते ……. वहाँ एक नलके के नीचे एक बाल्टी में बूँद बूँद कर टपकता पानी ……. और उस तनहाई में जेल काटती Daisy ।
सच कहूँ तो वो दो तीन साल Daisy के जीवन के सबसे बुरे दिन बीते । अकेले ……. तन्हां …….
हालांकि इस बीच पन्ना दीदी अक्सर मिलने आती रहती थीं ……. और उन्हें देख के हर बार Daisy ऐसे मिलती …….. छाती पे चढ़ जाती ….. रोती …… उन्हें चूमती चाटती …….. पर ये सुख कभी कभार ही नसीब होता ……. महीने दो महीने में कभी एकाध बार …… सच बताऊँ तो उन दिनों मुझसे Daisy का ये कष्ट देखा न जाता था । मेरा मन करता कि मैं इसे इस अकेलेपन से , इस उपेक्षा से , इस कष्ट से हमेशा के लिए दूर कर दूं …….
खैर किसी तरह समय बीतता गया ।
3 -4 साल इसी तरह निकल गए ।

फिर एक बार ……… गर्मियों की बात है । जून का महीना था । हम दोनों पति पत्नी का प्रोग्राम बना , मनाली जा के वहाँ AVIMAS मने Atal Bihari Institute of Mountaineering and Allied Sports में जा के Basic Mountaineering Course करने का । एक महीने का course था । seats बुक करा ली गईं । जाने की तैयारी हो गयी । ऐन मौके पे न जाने क्या हुआ कि मेरा प्रोग्राम रद्द हो गया और मेरी जगह मेरी बेटी नंदिनी का जाना तय हुआ ।
मने अब माँ बेटी जाएंगी ……. basic mountaineering करने ।
शाम के चार बज रहे थे । 5 बजे की बस थी ।
तभी नंदिनी ने कहा ……. मौसी आप भी चलिए न ?
और मौसी झट से तैयार ।
पर फिर ख़याल आया …….. Daisy ?
वो कहाँ रहेगी ? उसकी देखभाल …… उसको कौन रोटी डालेगा पीछे से ?
मैंने मौसी से पूछा …….. you wanna go ? If you have to go …… Go …….
Daisy मेरे भरोसे ।
इत्तेफ़ाक़ से मैं उन दिनों अपने दोनों बेटों के साथ पटियाला में रहता था ……. अखाड़े में ।
मैंने इन तीनों मने माँ बेटी और मौसी को तो बस में चढ़ा दिया मनाली के लिए और Daisy को गाडी में लाद के पटियाला ले आया ……… अखाड़े में ……..
और यहां से Daisy के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ ।

The tale of a dog ……. part 1

The tale of a dog

उसका नाम daisy था ।
जन्म उसका होशियारपुर पंजाब के एक मशहूर ब्रीडर के kennel में हुआ था ।
जालंधर के एक निःसंतान खानदानी रईस उसे खरीद लाये । साथ में उसका एक जोड़ीदार Sparky भी था । ये आज से कोई 13 साल पहले की बात है ।
ऐसा सुना है कि आज से 13 साल पहले यानी कि 2003 में ये dobberman जोड़ा शायद 60 या 70 हज़ार में खरीदा गया था ।
बाजार में दो किस्म के कुत्ते बिकते हैं । एक होते हैं pet क्लास ……. pet class मने सामान्य घर में पालने के लिए किसी भी नस्ल का pure bred …….. ऐसे pups नस्ल की डिमांड के अनुसार 2000 से ले के 8-10,000 तक के मिल जाते हैं ।
दूसरा प्रकार होता है Show क्लास ……. अर्थात वो pups जो बहुत मशहूर award winning dogs की pedegree केE होते हैं ……. वो जिनके parents ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय Dog Shows में award जीते हैं । ऐसे माँ बाप का जब कोई litter आता है तो ये ज़रूरी नहीं कि उसमें हर पिल्ला Show class ही निकले । कुछ एकदम सामान्य भी निकल सकते हैं । और कुछ बेहद शानदार show class निकलते हैं ।
ऐसे Show Class pups को पहचानना भी कोई आसान काम नहीं । उसके लिए भी experts होते हैं । बड़े अनुभवी लोग …….. तो ऐसे ही एक breeder हैं होशियारपुर में ……. उनसे कहा गया कि एक शानदार जोड़ा हमारे लिए book करो । booking amount जमा हुआ । उसके करीब 3 माह बाद सूचना आयी …….. आपके pups तैयार हैं ……. ले जाइए ।
और इस तरह Daisy और Sparky होशियारपुर से जालंधर आ गए ……. राजन भाई और पन्ना दीदी के घर । पन्ना दीदी निःसंतान थीं । उनकी गोद में मानो दो बच्चे आ गए । और इस तरह Daisy और Sparky उनके घर में उनकी गोद में पलने लगे ।
राजन भाई ने पहले दिन से ही तय कर लिया था कि daisy को मातृत्व सुख नहीं देना है । इसलिए बहुत छुटपन में ही उसकी surgery करा दी गयी ।
धीरे धीरे दोनों पन्ना दीदी की गोद में बढे पले । पन्ना दीदी उन्हें अपने हाथ से गर्मा गर्म रोटियां बना के खिलाया करती दूध से । दिन रात का साथ । उन दोनों से उनका सम्बन्ध वही माँ बच्चों वाला ।
पन्ना दी तो यूँ भी ममता और वात्सल्य की मूरत हैं ।
दोनों pups जवान हुए , तो इतने खूबसूरत , कि देखने वाले देखते रह जाते । पंजाब में यूँ भी लोग शौक़ीन हैं । अच्छी महंगी pedegree वाले dogs पालने के शौक़ीन । लोग Daisy और Sparky को देखते तो देखते रह जाते ।

पर ईश्वर को कुछ और ही मंज़ूर था । शायद इन दोनों pups का ही पुण्य प्रताप था , या फिर इन दोनों के प्रति उमड़ा पन्ना दी का वात्सल्य उनकी ममता …….. एकदम अपने बच्चों की सी देखभाल लाड़ दुलार प्यार ……… और 48 – 50 साल की उम्र में उनके भीतर न जाने ऐसे कौन से hormonal changes आये कि उन्होंने इस उम्र में जबकि अधिकाँश महिलाओं को menopause हो जाता है , उन्होंने conceive कर लिया । 48 साल की आयु में उनकी कोख में संतान आयी ।
उनकी pregnancy बड़े कष्ट में बीती ……. एक एक दिन पहाड़ सा ……. ईश्वर भी न जाने कौन सी परीक्षा ले रहा था । कई बार तो ऐसा लगा कि miscarriage हो जाएगा ।
पर अंततः युग का जन्म हुआ । 50 साल की उम्र में बेटा हुआ ……. घर में दीवाली मनी ……. घर में चिराग रौशन हुआ …….. इधर Daisy और Sparky ……. दोनों लगभग 2 साल के हो चले थे …….. युग के आने से वो दोनों परेशान ……. ये कौन आ गया हमारी माँ की गोद में ……. अब ये दोनों लगे jealous फील करने ……. युग को देखें तो गुर्रायें …….. पहले जहां दिन रात पन्ना दी की गोद में घुसे रहते थे , वहाँ अब उनके कमरे में भी घुसने की मनाही ।
अब दोनों को नीचे से ऊपर पहुंचा दिया गया था ……… नवजात शिशु को infection का डर जो था ……… दोनों ऊपर से अपनी माँ को टुकुर टुकुर ताकते रहते ……. भौंकते गुर्राते । जिसमे Sparky कुछ ज़्यादा ही परेशान हो गया था । उसने बात दिल से लगा ली थी । एक दिन वो न जाने कैसे ऊपर से छुड़ा के नीचे आ गया …… बेहद violent हो गया …… ज़बरदस्ती कमरे में घुसने की कोशिश करने लगा …….. सब लोग घबरा गए ……. बच्चे की सुरक्षा को ले के चिंतित …….. ऊपर से dobberman नस्ल ……… ये सब कभी कभी अत्यधिक violent होने के लिए कुख्यात हैं ……. परिवार ने तय किया कि कुछ दिन के लिए दोनों को हटा दिया जाए । बच्चे की सुरक्षा से कोई रिस्क नहीं ।
Daisy और Sparky के लिए नए घर खोजे जाने लगे ।
Sparky तो गया दूर मोगा ……..
Daisy को मेरी साली साहिबा ले आईं । उनका राजन भाई और पन्ना दी के घर आना जाना था …… बड़े पारिवारिक घनिष्ठ संबंध थे ।
वहाँ मैंने daisy को पहली बार देखा ।
पूछा , इसे कहाँ से ले आयी ?
क्या करोगी इसका ?
जानती हो कुत्ता पालना कितना दुरूह दुष्कर कार्य है ? कितनी care करनी पड़ती है । कितना खर्चीला होता है ।
बहिन जी ने कंधे उचका दिए ।
Daisy को नया घर मिल गया था ।
पर इस नए घर में वो पुरानी बात न थी ।
नया घर अकेला सा था । सुनसान ……. यहां कोई जोड़ीदार भी न था । न कोई खेलने के लिए साथी न कोई बोलने बतियाने के लिए । और न कोई दुलारने पुचकारने वाला ……..

क्रमशः …….. Continued……..
लंबी कहानी है ……. सत्य कथा …… कई भागों में ख़त्म होगी
पढ़ते रहिये

साइकिल गयी कबाड़े में हाथी चढ़ गया भाड़े में अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

बॉलीवुड की हिंदी फिल्म का हीरो सर्वगुण संपन्न होता है ।
भलामानस , अव्वल दर्जे का चरित्रवान …… मने फिल्म की हेरोइन और vamp उस से चिपटी रहती हैं , उसे खींच खींच के अपने बेडरूम में ले जाती है पर वो पट्ठा लंगोट का इतना पक्का …… हनुमान जी का ऐसा भगत कि vamp और हेरोइन दोनों को अपनी बहन मानता है ।
हीरो के दो चार यार दोस्त चेले चमाट होते हैं जो हमेशा उसके इर्द गिर्द मंडराते उसकी चम्पी किया करते हैं ।
हीरो एक नंबर का चूतिया , जब लाश से टकराता है तो सीने में घुसे चाकू को पकड़ लेता है ……. और ठीक उसी मौके पे या तो पुलिस आ जाती है या फिर कोई और …… फिर ये पुक्का फार के रोता है कि नहीईईईईईई …….. मैंने खून नहीं किया ……..
फिर जब ये जेल चला जाता है तो उसका वो वफादार दोस्त बार बार एक ही फ़िल्मी डायलॉग बोलता है ……… मेरा दिल कहता है , मेरा दोस्त खूनी नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है …….

मोदी haters को अब भी भरोसा नहीं कि नामाजवादी कुनबे में वाकई जंग छिड़ी है ।
वो कहते हैं ……. नहीं ऐसा नहीं हो सकता …… मेरा दिल कहता है की ऐसा नहीं हो सकता ……. कह दो कि ये झूठ है । नामाजवादी कुनबे में झगड़ा नहीं हो सकता ।
17 जनवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
बाप बेटे चचा भतीजा भाई भाई कुत्ते की तरह लड़ रहे हैं ……. एक दुसरे को नोच खसोट रहे ।
मोदी haters को फिर भी लगता है कि कोई बुरा सपना है ……. भ्रम है ……. सुबह जागेंगे तो सब ठीक होगा …….. उधर चुनाव आयोग कंफूज है ।
रामगोपाल 6 पेटी कागच जिनकी संख्या कुल डेढ़ लाख है धर आये चुनाव आयोग में ।
अमर सिंघवा बोल दिया सब फ़र्ज़ी है करो जांच ……..
चुनाव आयोग बोलता है इतना सब कागच जांचने में तो 6 महिन्ना लगेगा । उधर 10 दिन बाद अधिसूचना जारी हो जायेगी ।
अपने दुआर में कुकुर झौं झौं करने वाले कुत्तों को मालिक चार डंडा मार के दुत्कार देता है । बहुत संभव है कि चुनाव आयोग दोनों बाप बेटा को GPL मार के भगा देगा और चुनाव चिन्ह साइकिल को फ्रीज़ कर देगा मन
अखिलेश कांग्रेस से चुनावी pact के मूड में हैं ।
ऐसे में तय है कि अखिलेश गुट की कम से कम 100 सीट cong को जायेगी मने 100 नामाजवादियों का टिकट कट के कांग्रेसियों को मिलेगा ।
ऐसे में वो 100 क्या चुप बैठेंगे ?
दूसरी तरफ सिपाल मुलायम गुट भी कम से कम 250 से 300 प्रत्याशी मैदान में उतारेगा । UP की हर सीट पे सपा से टिकट मांगते 4 – 6 गंभीर प्रत्याशी हैं । हर सीट पे दो चार करोड़पति टिकट मांग रहे हैं । सिपाल का अब एकमात्र लक्ष्य है ……… अखिलेश को हराना ……..
सिपाल मुलायम अगर किसी को टिकट दे देंगे तो वो 10 – 20 हज़ार भोट तो ले ही मरेगा ।

एक तर्क दिया जा रहा है कि सपा अगर बँटी तो मुसलमान enblock बसपा में shift कर जाएगा ।
काश चुनावी राजनीति में सब कुछ इतना ही सीधा सपाट होता ।
हर मुस्लिम बहुल सीट पे 2 – 3 या 4 प्रत्याशी होंगे । सब वोट काटेंगे ।
2014 के लोस चुनाव में मोदी की सुनामी आती हुई साफ़ दिख रही थी इसके बावजूद मुसलमान एकतरफा enblock voting कर उसे रोक न पाए और बह गए ।

आपको दीखे चाहे न दिखे …….. UP में मोदी की सुनामी आ रही है ……. सब कुछ बहा के ले जाएगी ……. अईकील सईकील आथी हाथी सब बह जाएगा ……..
कोई आजपा भाजपा नहीं ……. कोई कमल नहीं …….. भोट पडेगा मोदी को ……. भोट पडेगा विकास के एजेंडे पे ………. भोट पडेगा भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए …….. भोट पडेगा प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये ……… भोट पडेगा 24 घंटे बिजली के लिए ……. भोट पडेगा शानदार सड़कों के लिए …….. भोट पडेगा गुंडे बदमाशों के खिलाफ ……… भोट पडेगा जातिवाद के खिलाफ ……. भोट पडेगा हिंदुत्व के लिए …….. भोट पडेगा कटुओं की औकात बताने के लिए ।

साइकिल गयी कबाड़े में
हाथी चढ़ गया भाड़े में
अब कोई नहीं अखाड़े में …….. सिर्फ मोदी ………

Honesty is the best policy

हमरे एक मित्र बड़े भारी बिजनिस मैन उद्योगपति पूँजीपति हैं ।
नोटबंदी के करीब 20 दिन बाद उनसे फोन पे बात हुई ।
बोले सिर खुजाने की फुरसत नहीं ।
जब से मोदी की नोटबंदी हुई , लोग मंदी का रोना रोय रहे । इहाँ ये हाल है कि order पहले की तुलना में तीन गुना ज़्यादा हो गया । प्रोडक्शन रातों रात कैसे हो जाएगा तिगुना । भारी दबाव है । प्लांट 24 घंटे चलाएं तो भी order पूरे नहीं होते ।
मैंने पूछा आखिर ऐसा क्या हुआ ?
बताने लगे , लोग बाग़ बिजनिस मैन अब नोटबंदी के बाद दो नंबर का धंदा छोड़ अब एक नंबर में पूरे बिल पर्चे के साथ काम करने का मन बना रहे हैं । जबकि हमारी फर्म पिछले 10 साल से ही सारा काम एक नंबर में करती आ रही है । हर साल हमारे यहाँ sales tax का छापा पड़ता है । हम उनको हमेशा कहते हैं , अबे हमारी क्या झांट नोचोगे ? सब काम एक नंबर में करते हैं । ल्यो देख ल्यो सब कागच पत्तर …… जो उखाड़ते बने उखाड़ ल्यो ………
सो जब नोटबंदी हुई तो हमारे सब प्रतिद्वंद्वी सब काम धंदा छोड़ जब अपना फटा हुआ लहंगा और सब कागज़ पत्तर सम्हालने में व्यस्त थे तो हम लोग market से आर्डर उठा रहे थे ।
मोदी की नोटबंदी होने वाली है और आने वाले समय में सब काम एक नंबर में करना पड़ेगा …….. ऐसा कोई दिव्य ज्ञान अचानक रातों रात नहीं हुआ । ये एक business हाउस की policy हो सकती है ।
इसके अलावा उनकी एक और policy भी है ।
Quality में compromise नहीं करते । एक नंबर का माल बेचते हैं । बाजार से महँगा बेचते हैं । बाजार कितना भी मजबूर करे , सस्ता घटिया माल मांगे , पर quality में समझौता नहीं करते इसलिए नाम बिकता है । इसलिए आज हालात ये हैं कि जहां बाबा रामदेव की पातंजलि जैसे बड़े brands भी मंदी का रोना रो रहे , आपके पास supply से ज़्यादा demand है ।

पिछले दिनों मैंने एक पोस्ट लिखी थी कि नोटबंदी के बाद Congress , AAP , सपा और बसपा funds की कमी से जूझ रहे हैं । UP में अखिलेश की विकास यात्रा रुक गयी , बहिन जी rally की बजाय press conference कर के काम चला रही हैं ।
पंजाब और गोवा में केजरीवाल के पास मूंगफली खाने को पैसा नहीं है ।
कांग्रेस तो खैर पहले से ही नंग थी ।

मेरे एक मित्र ने सवाल किया कि यदि सबको माने सब पार्टियों को नोटबंदी का असर पड़ा तो आखिर भाजपा को क्यों नहीं पड़ा ।
भाजपा को फर्क इसलिए नहीं पड़ा क्योंकि भाजपा ने राजनाथ सिंह के जमाने से ही policy बना ली थी कि party funds में पारदर्शिता रखेंगे ।
2014 में मोदी के PM बनने के बाद और अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इस नीति का और सख्ती से पालन हुआ । मोदी और अमित शाह की policy एकदम स्पष्ट थी । party funds के सब कागच पत्तर दुरुस्त रखो और पार्टी फण्ड सब एक नंबर में और खाते में रखो ……. दुरुस्त रखो …….. क्यों ?
क्योंकि मोदी जानते थे कि आगे क्या होने वाला है ।
अब आप कहेंगे कि PM मोदी ने भाजपा नेता मोदी को बात leak क्यों की ???????

इस बेईमान दुनिया में भी कुछ लोगों की policy ईमानदारी होती हैं ।
आप ईमानदारी के लिए तो किसी को blame नहीं कर सकते ?

direct और indirect tax कलेक्शन के आंकड़े

वित्त मंत्रालय ने आज देश में direct और indirect tax कलेक्शन के आंकड़े सार्वजनिक कर दिए ।

1) indirect टैक्स अप्रत्यक्ष कर में Nov 2016 के मुकाबले Dec 2016 में 12.8 % की बढ़ोत्तरी हुई है।

2) April 2016 से Dec 2016 तक indirect tax में 25 % की बढ़ोत्तरी हुई है। ये बढ़ के 6.30 लाख करोड़ हो गया है ।

3) अप्रैल 2016 से Dec 2016 तक Direct टैक्स में 12.01% की बढ़ोत्तरी हुई है।

4) पिछली तीन तिमाही यानी April 2016 से Dec 2016 तक उत्पाद शुल्क यानि excise duty में 43 % की बढ़ोत्तरी हुई है । excise duty का कलेक्शन 1लाख 95 हज़ार करोड़ रु से बढ़ कर दो लाख 79 हज़ार करोड़ रु हो गया है ।

5) नोटबंदी से अधिकतर राज्यों में वैट वसूली भी बढ़ी है। हालांकि, अभी तक प्राप्त डेटा सिर्फ नवंबर तक का है, दिसंबर में हुई वैट वसूली का डेटा करीब 22 जनवरी के बाद मिलेगा।

6) April 2016 से Dec 2016 तक सर्विस टैक्स की वसूली में 23.9 % की बढ़ोत्तरी हुई है। ये 1लाख 48000 करोड़ रु से बढ़ के एक लाख 83000 करोड़ रु हो गया है ।

7) Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले सर्विस टैक्स में 12.4 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

8)Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले उत्पाद शुल्क में 31.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके सबसे अधिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपना योगदान दिया है। गौर तलब है कि जब नोटबंदी के कारण देश में ज़बरदस्त cash crunch था और सभी TV चैनल banks के सामने लंबी लाइन दिखा रहे थे उसी दिसंबर 2016 में factory के gate पे वसूली जाने वाली excise duty मने उत्पाद शुल्क dec 2015 की तुलना में 31% बढ़ गया ।

9) Dec 2016 में Dec 2015 के मुकाबले Custom duty की वसूली में 6.3 % की गिरावट आई है। दरअसल, नोटबंदी के दौरान सोने के आयात में भारी कमी दर्ज हुई है और सीमा शुल्क का एक बड़ा हिस्सा सोने पर लगने वाले टैक्स से ही आता है।

10) April 2016 से Dec 2016 तक custom duty में 4.1 % की बढ़ोत्तरी हुई है।

11) Dec 2015 की तुलना में Dec 2016 तक सभी अप्रत्यक्ष करों को एक साथ देखा जाए तो इसमें 14.2% की बढ़ोत्तरी हुई है। यदि सिर्फ december माह की तुलना करें तो central excise में 31.6% और service tax में 12.4% की वृद्धि हुई है । अलबत्ता custom duty में 6.3 % की गिरावट आयी है ।

12) Dec 2016 की तिमाही में कुल 2.82 लाख करोड़ रु advance Tax के रूप में जमा हुआ जो पिछले वर्ष 12015 की इसी तिमाही की तुलना में 14.4% अधिक है ।

13) Corporate advance tax में 10.6% और personal income tax advance में कुल 38.2% टैक्स की वृद्धि हुई है ।

जो भी व्यक्ति नोट बंदी को फेल बताये और economy में manufacturing सेक्टर में slowdown का रोना रोये उसके मुंह पे ये पोस्ट जूते की तरह फेंक के मारो ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

वंस अपान ए टाइम , आंध्र परदेस के राजभवन में एक बड़े भयंकर किसिम के सीनियर कांग्रेसी नेता हुआ करते थे ……. लाट साब गवर्नर श्री नारायण दत्त तिवारी ।
उनकी रग रग में कांग्रेसी खून दौड़ता था । इस से पहले ऊ जिनगी भर ऊपी की राजनीती किये , कांग्रेस के जमाने में कई बार ऊपी के मुख्यमंत्री रहे । फिर जब ऊपी दो भाग में बंट गया और पहाड़ी इलाके काट के उत्तराखंड बन गया तो आप UK के मुख्यमंत्री भये । फिर जब एकदम्मे बुढ़ा गए और किसी काम के न रहे तो सोनिया गांधी ने इनको retirement पिलान के तहत आंध्र प्रदेश का गवर्नर बना के भेज दिया ।
इधर प्रतिभा पाटिल अपनी वार्षिक छुट्टियां मनाने आंध्र प्रदेश जाने वाली थीं ।
Protocol के तहत राष्ट्रपति की अगवानी लाट साब गवर्नर बहादुर किया करते हैं ।
तभी एक स्थानीय news चैनल ने एक वीडियो दिखाना शुरू किया जिसमें 86 साल के बुज़ुर्ग लाट साब गवर्नर बहादुर राज भवन में अपने शयन कक्ष में 35 साल की एक सुन्दर सुशील राजनीतिक कार्यों में दक्ष महिला को सहला रहे हैं ……… अब जो भैया मची जो बमचक ……. राजभवन के सामने महिला संगठन करें हाय हाय मुर्दा बाद …….. नतीजा जे हुआ कि लाट साब गवर्नर बहादुर को रातों रात इस्तीफा दे के बोरिया बिस्तर बाँध के देहरादून जाना पड़ा ……..
अब चूँकि इस type के MMS और भिडियो clips की मार्किट में भोत demand रहती है । इस लिए उस क्लिप की खोजायी शुरू भई ……. इसके अलावा बड़े बड़े धुरंधर वैज्ञानिकों को जांच और शोध का एक एक विषय ये मिल गया कि ई ससुरे कांग्रेसी साले सब ऐसी कौन सी भस्म बूटी खाते हैं कि 86 साल में भी टाइट रहते हैं और ई सुसरे संघी सब भरी जवानी में ही संन्यास और वैराग्य को प्राप्त हुए जाते है ………

खैर जांच कमीसन में ई निष्कर्ष निकाला कि कांग्रेसी की डंडी काम न भी करे तो भी सुहराने अंगुरियाने से बाज नहीं आता ……..

तो भैया हुआ यूँ कि पिछले हफ्ते जब मोलायम जादो दिल्ली पहुंचे तो मेरे जैसे किसी लुच्चे लफंगे ने टोक दिया …… चचा भोत हुआ ……. अब रहन दियो …… आपकी उमर भयी …… अब लड़कन बच्चन कू खेलन खान दियो …….

चचा बोले , अभी मन नहीं भरो है …… अभी कुछ दिन समाजवादी पाल्टी को सुहरा अंगुरिया लेन दियो ।
बेचारी समाजवादी पाल्टी …….. 25 बरस की हो गयी ।
एक तरफ मोलायम सहलाने अंगुरियाने से बाज नहीं आ रहे दूसरी तरफ सिपाल रामगोपाल सिकंदरे आज़म कैप्सूल खाय के ताने खड़े इधर अखिलेश कह रहे कि हमारी तो ब्याहता है समाजवादी पाल्टी …… सिर्फ हमारी ।

बेचारी समाजवादी पाल्टी ……. किस किस को kiss करे ?

नोटबंदी तो एक शिशु का पहला कदम है …….

हमारे प्रेम भैया इधर इक्लेस जादो के भोत जबर फैन हो गए हैं ।
पहले खेजड़ीबाल के फैन हुआ करते थे ।
आजकल इक्लेस जादो के हो गए हैं ।
मोदी से भोत जायदे नाराज रहते हैं ।
गाज़ीपुर जिले में इनकी जमींदारी है । नोटबंदी के कारण ऊ सारा खेतवा परती रह गया ।
परती मने जब कोई खेत न बोया जाए और ऐसे ही छूट जाए उसे हमारे यहां परती कहते हैं ।
सो नोटबंदी के कारण इनको खाद बीज जुताई डीजल नहीं मिला इसलिए सगरी जमींदारी परती रह गयी । राजघाट वाले कोवाटर की छत पे 52 बीघा पुदीना रोप थे सो नोटबंदी के कारण बिना पानी सब झुरा गया । मोदिया देस का सतियानास पीट दिया इसलिए अब प्रेम भैया इक्लेस जादो के फैन हो गये हैं । कहते हैं ……. बाह भाई बाह ……… लड़का का विकास किया है ।
हम पूछे कि ज़रा हमको भी बताओ …… का विकास किया है ?
बोले , देखते नहीं हो , नखलऊ में मेट्रो बनवा दिया । औ नखलउ से आगरा express way ……. आगरा दिल्ली पहिलहीं बहिन जी बनवाय दी थी ……. केतना सुबिधा हो गिया …….. अब गाजीपुर का सब बेरोजगार लड़का लोग जब लेपटाँप पे बिलू फिलिम देख के अघा गिया तो सब खटाक से बनारस से बरेली पसिंजर पकड़ के नखलऊ चला जाएगा । हुआँ से मेट्रो धय के सीधे एस्प्रेस वे पे धाँय से 6 घंटा में दीली ………
अ दीली जा के का करेगा गाजीपुर का सब लड़िका लोग ……….
अरे उहाँ अज़ादपुर का झोपड़पट्टी में 300 रु का खोली भाड़ा पे ले के रहेगा ……. फैट्टरी में काम करेगा ………. मजूरी करेगा …… पेट पालेगा …… जियेगा खायेगा …….. बिकास पुरुष इक्लेस जादो परदेस का विकास किये हैं ……. मोदिया साला देस बर्बाद कर दिया …….. गरीब का सब नोट बन कर दिया औ अपने सब उद्योगपति दोस्त लोग को दे दिया …….हमरी GDP छत्ते पे चढ़ गयी थी बिना सीढ़ी के ……. मोदिया साला उप्पर से धकेल दिया ……. बेचारी GDP गीर गयी ।
इधर GDP गिरी उधर नोटबंदी फेल हो गयी ?

आपको कैसे पता कि नोटबंदी फेल हो गयी ?

सारा पैसा बैंक में वापस आ गया ।

नहीं ……. लगभग 1लाख 40,000 करोड़ नहीं आया ।
इसके अलावा दो करोड़ संदिग्ध खाते 8 Nov नए खोले गये जिनमे लगभग 4 लाख करोड़ रु जमा कराये गए । इन खातों और इन रुपयों की जांच चल रही है ।
इसके अलावा कई लाख करोड़ रुपया तो ऐसा है जो लोगों ने अपने दोस्त मित्र रिश्तेदार और कर्मचारियों के खातों में , इसके अलावा जनधन खातों में जमा करा दिया ……. दो दो ढाई ढाई लाख करके ……. ये सारा वो पैसा था जो की अब तक तहखानों तिजोरियों में दबा हुआ था ……… पर अब नोट बंदी के कारण इसे मजबूरन तहखानों तिजोरियों संदूकों से निकल के बैंक में जमा होना पड़ा ……. system में आना पड़ा ……. लाखों नहीं करोड़ों ऐसे Dormant मने सुसुप्त खाते थे जो अचानक जाग गए और उनमें रातोंरात लाखों रूपये जमा हो गए ।
समाजवादी पाल्टी के एक नेता पूर्व MLA के सुरक्षा गार्ड के खाते में अचानक 100 करोड़ रु जमा हो गए । वो बेचारे रूपये …… आजतक न जाने किस अँधेरे तहखाने तिजोरी में कैद थे ……. अब किसी बैंक खाते की शोभा बढ़ा रहे हैं । सरकार की नजर निगरानी में है ।
कुल 15 लाख करोड़ की currency चलन में है ।
इसमें से ये लगभग 6 से 8 लाख करोड़ रु संदिग्ध है ।
रूपये का कोई रंग नहीं होता । वो अपने आप में काला या सफ़ेद नहीं होता । उसका रंग तो हरा या गुलाबी pink होता है । ITR मने धारक की Income Tax return उसे काला या सफ़ेद बनाती है ।
अब तक जितना पैसा तहखानों तिजोरियों से निकल के बाहर आया वो अब सरकार की आँख के सामने है । अब सरकार एक एक खाते की जांच करेगी …….. और एक पूर्व निर्धारित संवैधानिक कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे काला या सफ़ेद धोषित किया जाएगा जिसमे समय लगेगा ।
अगर आप ये समझते हैं कि इस देश में काला धन ही नहीं था तो आप मूर्ख हैं या जान बूझ के सोच समझ के मूर्ख बन रहे हैं । कोई भी ऐसा व्यक्ति जो ढाई लाख रु से ऊपर की अघोषित रकम दबाये बैठा था वो काला धन था । मोदी की नोटबंदी उसे सबके सामने उजाले में ले आयी है ।
रही बात भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की ……. तो नोटबंदी उस दिशा में उठाया गया पहला छोटा सा कदम है । हम आप सब जानते हैं कि असली काला धन तो बेनामी संपत्तियों और सोने चांदी हीरे जेवरात में छुपा है , मारीशस के रास्ते निवेश में छुपा है और विदेशी tax heavens में छिपा हुआ है ।
भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे एक राष्ट्र को इस दलदल से निकालने की पहली ईमानदार कोशिश किसी सरकार ने की है ।
इन तमाम तथ्यों को नज़रअंदाज़ कर यदि आप सिर्फ 50 दिन में ही इसे फेल घोषित कर देते हैं तो इसका सीधा सा मतलब ये है कि आप pathological Modi Hatred के शिकार हैं और इस घृणा जुगुप्सा के भाव ने आपकी सोचने समझने की शक्ति को कुंद कर दिया है ……… आप मोदी से घृणा के अपने पर्सनल एजेंडा में इस कदर अंधे हो चुके हैं कि राष्ट्र हित आपकी सूचि में कहीं है ही नहीं ।

नोटबंदी तो एक शिशु का पहला कदम है ……. आप बस देखते जाइये ……. अभी तो इसे मीलों जाना है ।