आपको ये पता होना चाहिए कि its a jungle out there …….. ये दुनिया एक जंगल सफारी है ।

कुछ दिन पहले टीवी पे एक वीडियो देखा था ।
China की किसी jungle Safari में एक लड़की अपनी car से बाहर निकली ।
भाई शेर खान जी उठा के ले गए और खा डाले ।

अब पीटो छाती ……. करो रुदाली …….. मनाओ मुहर्रम ……. निकालो candle march ……..
गरियाओ शेर खान को …….. कोसो सरकार को …….

इसी तरह सुना है कि कुछ भेड़िये लकड़बग्घे भाई जान लोग ने बंगलुरु की एक और jungle सफारी में एक और बकरी / लड़की दबोच ली बतावें ।
अपन को न पहली लड़की से हमदर्दी न इस दूसरी से ………
हमदर्दी अपन को शेर खान और भेड़ियों लकड़बग्घों से भी नहीं ।
और अपन तो न China Govt. को गारी देंगे न कर्नाटक govt . को ।

अब शेर खा गया तो govt क्या करेगी ? भोत करेगी तो शेर को आदमखोर घोषित कर या तो गोली मार देगी या पकड़ के किसी चिड़ियाघर में बंद कर देगी । दुनिया कि कोई सरकार ……. अबे सरकार छोड़ो , खुद अल्लाह मियाँ शेर खान को सुधार के बकरी ना बना सकते । भाई शेर खान तू सुदर जा …… जे भेड़ बकरी हिरण का शिकार छोड़ तू न्यू कर वेजीटेरियन हो जा …….

आपको ये पता होना चाहिए कि its a jungle out there …….. ये दुनिया एक जंगल सफारी है ।
यहां लाखों करोड़ों भूखे शेर चीते भेड़िये लकड़बग्घे और सियार घूम रहे हैं ।
आपको पता होना चाहिए कि जंगल में कैसे survive करना है ।
शेर चीते ना सुधरने के । कब कौन आदमखोर हो जाएगा कौन जानता है ।
सरकार किस किस को रोकेगी आदमखोर होने से ?
सरकार का रोल तो तब शुरू होगा जब शेर आपको मार के खा जाएगा । फिर वो उसे खोजेगी । खोज के चाहे तो गोली मारे या फिर किसी zoo में बंद करे ।

पर तुम तो शहीद हो गयी न बेटा ????????
इसलिए …….. राजा बेटा ……. ये जान लो कि its a Jungle Out there ……. सवारी अपने सामान की हिफाज़त की जिम्मेवार स्वयं है ।
दुनिया में बहुत कांटे हैं । चारों तरफ कांटे ही कांटे हैं । इन सबको कोई नहीं चुग सकता । सरकार भी नहीं ।

बेहतर होगा कि जूते पहने लें ……….

जो बोया उसे काट रहे बंगाली

ये किस्सा मेरे पिता जी सुनाया करते थे । सत्य घटना है मेरे दादा जी के समय की ।
उस जमाने में मने करीब 100 साल पहले उनकी एक परजा परजुनिया कुम्हार था जिसे अपनी जमीन में ही बसा रखा था ।
उसकी बीबी ……. एक नंबर की नंगिन ……… एक दिन जा के कुएं में कूद गयी ।
ये वो ज़माना था जब कि अभी handpipe और बिजली tubewell और टुल्लू पंप नहीं थे ।
कुआं ही एकमात्र साधन था पेय जल का । और भवानी उसी कुएं में कूद गयी । गाँव में भगदड़ मची । गाँव भर ने जुट के उसे कुएं से निकाला ।
समझाया बुझाया ……
अब उस कुएं का पानी कौन पिए ।
सो टोले मोहल्ले ने जुट के नया कुआं खोदा । हमारे गाँव में हमेशा से ही water level बहुत ऊपर रहा । मने बमुश्किल 10 फुट पे पानी । सो भैया नया कुआं खोदा । पुराना पाट दिया ।
हरामजादी कुछ दिन बाद फिर कुएं में कूद गयी ।
अबकी बार फिर गाँव ला ला करता भगा कुएं की ओर । इधर दादा जी ने उठाया लट्ठ और पहुंचे कुएं पे …….. और बोले , खबरदार जो निकाला किसी ने इसको कुएं से बाहर …… जाओ ढेला लियाओ बीन के ……. लौंडे ढेला चिक्का बीन लियाए खेत से …….. और दादा जे ने वहीं ऊपर से कुएं की जगत पे बैठ के उसको मारना जो शुरू किया ……. ढेला ढेला …… और वो अंदर से रोये गिड़गिड़ाए ……. बाबू बचा लो ……. और बाबू कहें नहीं तू मर ।
मरने का बहुत चाव है न तुझे ? मर …….. और चार चिक्का और मारा उसको कपार पे ……. शाम को कूदी थी …….. सुबह हो गयी ………वहीं अंदर पानी में जार जार रोये ……. सुबह निकाली । हाथ पैर सब पानी में गल गए । थर थर काँप रही …….. दादा जी बोले , क्यों ? हुआ शौक पूरा ख़ुदकुशी का ? अब नहीं देगी जान ?
फिर वो कुआं पाट के नया खोदा । उसका पानी उस कुएं से बंद कर दिया ।
बोले चल अब तेरी यही सजा । जा एक KM दूर से पानी ढो के लिया ।
उसके बाद वो फिर कभी कुएं में नहीं कूदी ।

बंगाल के हिन्दू पिट रहे । TMC के कार्यकर्ता BJP office पे चढ़ के मार रहे ।
यहां लकड़बग्घे पूछते हैं कि मोदी और राजनाथ क्या कर रिये हैं ।
मोदी और राजनाथ सही कर रिये हैं ।
बल्कि मोदी को तो बंगाल से पूरी para military और CRPF वापस बुला लेनी चाहिए और ममता को कान में कह देना चाहिए कि और मारो सालों को ……. अभी कम मारा है …….. सड़क पे घसीट के मारो ……..
अबे मोदी क्या माँ चु*** ????????
तुम्हारी चुनी हुई सरकार को मोदी क्यों बर्खास्त करे ?
लोकतंत्र है भाई ……. तुमने भोट दे के चुना है यार …….. टोकरी भर भर भोट दिया है ।
तुम्ही ने दिया है ।
भोट देने लोग Singapore से थोड़े न आये थे ।
तुमने जो सरकार चुनी वही तुम्हारी रक्षा करेगी ।

You have Sown …….. It’s time to reap ……..

बंगाली हिन्दू TMC की बीबी है …….. मारे चाहे प्यार करे ……. तुम साले कौन ?

मितरों , भाइयों भेनों , सहेले सहेलियों ।
यूँ तो ये किस्सा मैं अपने दोस्तों को पहले सुना चुका हूँ पर क्या है कि मेरे किस्से कहानियां तो पंडित भीमसेन जोशी के राग दरबारी सरीखे । जित्ती बार सुन लओ उत्ता इ कम ।
और दूसरी बात कि मेरे तो सैकड़ों नए दोस्त रोज़ बनते हैं । वो भी पढ़ लेंगे ।

तो बात तब की माने 1984 या 85 की है । तब जबकि मैं अभी student था और पहलवानी करता था । हम कहीं से कोई कुश्ती लड़ के लौट रहे थे । साथ में एक पहलवान दोस्त था …….. रात दो बजे हम अम्बाला स्टेशन पे उतरे और आगे हमें अगली ट्रेन पकड़ के पटियाला जाना था जो सुबह भोर में चलती थी । हम वहीं प्लेटफॉर्म पे इंतज़ार कर रहे थे । सामने एक दंपत्ति बैठे थे और उनका वाक् युद्ध चल रहा था । उन दिनों ये स्मार्ट फोन का ज़माना तो था नहीं सो हमारे समेत सभी लोगों का entertainment हो रहा था । वाक् युद्ध धीरे धीरे गरमा रहा था और पतिदेव सरेआम इज़राइल की माफिक behave कर रहे थे मने फूल दबंगई औ गुंडागर्दी …… पत्नी बेचारी फिलिस्तीन सी …… बेशक कमजोर थी पर जुबान लड़ाने से बाज न आती थी । चपड़ चपड़ बोले जाती थी ।
अंत में पति देव का धैर्य चूक गया औ उनकी मर्दानगी छलक गयी और उन ने बीवी को 2 – 4 हाथ धर दिए । मने इस से पहले कि अमरीका और UN कुछ समझ पाते फिलिस्तीन पिट गया । हम दोनों पहलवान कूद के पहुंचे …… बीच बचाव छूट छुड़इया कराया ……. बीवी बेचारी …… रोती कलपती ……. पिट के भी बोलने से बाज न आयी ।
हम दोनों वापस अपनी जगह आ बिराजे । और वो बीबी , माँ कसम सही जिहादिन थी ……. पिट पिटा के उसका वाक् युद्ध फिर चालू ………. और अबकी बार दोगुने उत्साह से …… पति महोदय भी शुरू हुए …….. बहुत जल्दी वाक् युद्ध फिर असली युद्ध में बदल गया और इबकै पत्नी जी को बालों से पकड़ के घसीट लिया । हम दोनों फिर पहुंचे छुड़ाने । पर उस जल्लाद ने अपनी घरवाली जमीन पे पटक रखी और बाल पकड़ के पीट रहा ……. अब बालों से घिरी औरत को छुड़ाना बड़ा मुश्किल काम ………. और वो पट्ठा ऐसा कि बाल न छोड़े ……. तो भैया मैंने , उसी रेलवे के waiting room में उसकी जो जम के सुताई की ….. दे लात , दे झापड़ , दे घुसण्ड …….. और पति महोदय की सारी मर्दानगी काफूर और वो इराक़ी सेना माफिक surrender …….. धराशाई ……..
पर उसके बाद जो हुआ वो अप्रत्याशित था । पति से पिटी हुई उस महिला के अंदर की शेरनी और क्षत्राणी अचानक जाग गयी और वो भी युद्ध भूमि में तीर तरवार लै कूद गयी और अपने पति की रक्षा को आगे आयी ……. खबरदार जो मेरे पति को हाथ लगाया ……. साले गुंडे बदमाश ……. और उसका रौद्र रूप देख अपन तो सहम गए भैया …… अरे बहिन जी ……. ये आपको मार रहा था हम तो बचाने आये थे ……
खबरदार मेरे पति को कुछ कहा तो ……. भला है बुरा है ….. जैसा भी है
मेरा पति मेरा देवता है । मारे चाहे पीटे , उसकी मर्जी …….. तुम साले कौन ?

अपन ने भैया तुरंत cease fire किया और सेनाएं वापस barrack में आ गयीं ।
उसके बाद भैया , पति पत्नी में जो प्यार उमड़ा ……. सफ़ेद कबूतर उड़ाये जाने लगे …… मने एकदम अमन की आशा हो गयी ……. बीबी ने साड़ी के पल्लू से पिटे हुए पति को धोना पोंछना चाटना पुचकारना जो शुरू किया …….. मेरा वो दोस्त एक नंबर का हंसोड़ विदूषक एकदम कॉमेडियन था ……. उनका ये प्रेमआलाप देख वो हँस हँस के दोहरा हुआ जाता था ……. उधर पति पत्नी प्रेम रस में विभोर …….. दुनिया जमाने की रुसवाइयों से दूर ….. पत्नी पति की सेवा किये जाती थी ।

उधर उज्जैन में सुरेश भाई चिपलूणकर उज्जैन में आक्रोश मार्च निकाल रहे हैं ।
कहते हैं कि मोमता दी के बांग्लादेश में हिन्दू पिट रिया है …… मेरे कू आकरोस हो रिया …… मेरे से हिन्दू की पिटाई देखी नी जा री …… हाय हाय …… मार डाला रे ……. सब लोग मिल के बंगाली हिन्दू के ले रे …… मेरे को बुरा लग रिया ……..

अबे बंगाल का हिन्दू gang bang का मजा ले रिया …… लेने दो उसको …… secularism का मजा ले रिया …… लेने दो …….. पहले ये तो देख लो कि हाय हाय कर रहा है या aaaaah aaaaah ……..
काहे को बेचारे का orgasm खराब कर रहे हो ?
बंगाली हिन्दू TMC की बीबी है …….. मारे चाहे प्यार करे ……. तुम साले कौन ?

Let the Orgy continue ………

बहु कोणीय चुनाव में एक एक भोट माने रखता है

इस समय जब कि मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ , मुलायम सिंह के लखनऊ आवास पे सुलह का अंतिम प्रयास चल रहा है । शिवपाल और अखिलेश दोनों को आमने सामने बैठाया गया है ।
ये कहना बहुत आसान है कि पूरी पार्टी और सभी विधायक अखिलेश के साथ शिफ्ट कर गए हैं और अब वही असली समाजवादी पार्टी हैं ।
काश चुनावी लोकतंत्र में सब कुछ इतना ही सीधा , सरल और सपाट होता ।
माना कि चुनाव में पार्टी का बहुत बड़ा महत्त्व है ।
पर प्रत्याशी भी महत्वपूर्ण होता है ।
और तब जब कि पार्टी विभाजित हो दो फाड़ हो गयी हो तो प्रत्याशी का महत्त्व 100 गुना बढ़ जाता है । चुनाव में जब बहुकोणीय संघर्ष होता है तो एक एक भोट का महत्त्व होता है ।

आपको एक किस्सा सुनाता हूँ । बहुकोणीय संघर्ष में क्या होता है ।
2014 लोस चुनाव होने वाले थे । हमारे गाज़ीपुर लोस क्षेत्र से भाजपा के जुझारू नेता , अरुण सिंह जिन्हें राजनाथ का वरद हस्त था वो एक Gypsy ले के घूमने लगे थे । आश्वस्त थे कि टिकट पक्का है ।
ऐन मौके पे भाजपा ने टिकट मनोज सिन्हा जी को दे दिया और आहत अरुण सिंह बागी हो गए ।
उधर सपा ने डेढ़ साल पहले से बाँट दिया गया एक टिकट काट के शिवकन्या कुशवाहा को साइकिल पे चढ़ा दिया ।
हाथी पे कैलाश नाथ यादव सवार थे ।
उधर संभल से बाहुबली DP Yadav चले आये और मुख्तार अंसारी के समर्थन से चुनाव लड़ गए ।

Final result इस प्रकार रहा ।

Bjp(मनोज सिन्हा ) 3,06,000
SP ( शिवकन्या कुशवाहा ) 2,74,000
Bsp. (कैलाश जादो ) 2,41,000
Dp yadav ( मुख्तार अंसारी ) 59,000
Arun singh बागी 34,000

अब इस मुकाबले का विश्लेषण कीजिये ।
यादव 3 जगह बंटे । सपाई यादव शिवकन्या की झोली में , मौक़ा परस्त बिकाऊ यादव बसपा के कैलाश यादव की झोली में , progressive राष्ट्रवादी विकासवादी यादव मोदी लहर में बह के भाजपा की झोली में जा गिरे ( जी हाँ , 2014 में गाज़ीपुर में भाजपा को यादवों का बम्पर भोट मिला था ) .

कुछ गए गुजरे अहीर DP यादव के टुकड़े भी तोड़ते पाये गए ।
मुसलमान सपा और मुख्तार अंसारी में बंटे पर ज़्यादातर सपा में गिरे । कुछ 10 या 20 % मुख्तार अंसारी समर्थित DP जादो की झोली में गिरे ।
अरुण सिंह भाजपा के बागी हुए और 34,000 भोट का नुक्सान किये । मनोज सिन्हा ने बड़ी मुश्किल से 32,000 की लीड से चुनाव जीता ।

अब सुनिये …… DP Yadav न होते तो सपा जीत जाती ।
अरुण सिंह बागी न होते तो भाजपा के मनोज सिन्हा 70,000 के ठीक ठाक मार्जिन से जीतते ।
बसपा कैलाश यादव को टिकट न दे के अगर किसी अन्य जाति वाले को टिकट दे देती तो शायद सपा ये सीट 2 लाख के भारी अंतर से जीतती ।
अगर गाज़ीपुर से शिवकन्या कुशवाहा को टिकट न देती तो 90% कुशवाहा वोट भाजपा को मिलता पर अब 70 % से ज़्यादा शिवकन्या / सपा की झोली में जा गिरा ।

इस उदाहरण को ध्यान में रखते हुए सपा की वर्तमान कलह पे नज़र दौड़ाइये ।
अगर वाकई अखिलेश शिवपाल में सुलह न हुई तो शिवपाल भी 403 प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे ।
हर सीट पे 2 – 4 सपाई ऐसे हैं जो पिछले 20 साल से दिन रात एक कर जमीनी राजनीति करते हैं और अपनी अपनी जाति बिरादरी समूह वर्ग धर्म में ठीक ठाक पकड़ रखते हैं । ऐसा कोई प्रत्याशी अखिलेश का बागी हो मुलायम सिपाल के आशीर्वाद से चुनाव लड़ जाए तो 10 – 20 या 50,000 वोट ले मारेगा ।
और दो बंदरों की लड़ाई में न जाने कौन सा तीसरा बन्दर बाजी मार जाए ।

सपा की लड़ाई असली है । जो तलवारें निकली वो भी असली हैं । जो खून बहेगा वो भी असली होगा ।
ऊपर से चाहे जो कहें , समझ अखिलेश और सिपाल दोनों रहे हैं ।
मोदी की आंधी नहीं सुनामी आएगी ये भी जानते हैं दोनों ।
इसीलिए सुलह का अंतिम प्रयास हो रहा है ।
पर कुछ भी हो …….. शिवपाल को राजनीति में relevent रहने ज़िंदा रहने के लिए इस बार अखिलेश का सूपड़ा साफ करना बहुत ज़रूरी है ।
इस चुनाव में शिवपाल के आदमी सरेआम भाजपा के लिए भोट मांगते गिराते दिखें तो मुझे ज़रा भी ताज्जुब न होगा ।
मैंने 2009 में इसी बनारस में कांग्रेसी अजय राय को भाजपा के मुरली मनोहर जोशी के लिए भोट गिरवाते देखा है ।