हे मोदी ……. जियो और जीने दो , खाओ और खाने दो

मोदी जी , कायकू बावले हुए जा रिये हो …….
भैन्चो …… न खुद चैन से सोते हो न पब्लिक को सोने देते हो ?
भैन्चो …… जीना हराम कर दिया है लोगों का ……. 18 से 20 घंटे काम करते हो …… खुद को तो नींद आती नहीं ……. दूसरों को तो सोने दो …….
ठीक यही प्रॉब्लम हमारे बाप की थी । न खुद कभी सोया 4 बजे के बाद और न हमको सोने दिया ……. मने सोता हुआ आदमी तो उनसे बर्दाश्त ही न होता था …….
ये सनकी बुड्ढों के साथ यही प्रोब्लम होती है ।
न सोऊँगा न सोने दूंगा ।
न खाउंगा न खाने दूंगा ।
12 बजे सोते हो सुबह 5 बजे उठ जाते हो ।
5 से 6 योग और साढ़े 6 बजे टेबल पे ?
अबे एकाक घंटा आलोम बिलोम कपाल भाति फालतू कर लिया करो …..
7 बजे अफसरों को फून करके पूछते हो disturb तो नहीं किया ?

आधी दुनिया घूम के आ जाते हो फिर भी Jet Lag नहीं होता ?
अबे तुम्हारे बीबी बच्चे नहीं है ……. न सही …… दूसरों के तो हैं ?
कायकू गरीब मार कर रिये हो यार …….
खुद के भाई भतीजे बहन भांजे तो मुफलिसी में जी रहे …….. सगी भतीजी गुजरात में शिक्षा मित्र लगी है सिर्फ 5500 रुपल्ली पे …….. लानत है ऐसे चचा पे …….. हमारे इदर जादो पलिवार की भतीजी होती तो अब तक राज्यसभा में होती या फिर किसी गायत्री परसाद से डेली का 5 – 7 करोड़ का हिसाब लेती ……. हवाई जहाज मने राज्य सरकार के पिलेन से जूता चप्पल सैंडिल और पर्स मंगवाती …….. उसका बी 200 करोड़ का बँगला होता अहमदाबाद सूरत में ……. अपने भी फ़कीर रहे पूरे खानदान को भी फ़कीर बना के रख छोड़े ?
और ये कायकू मरे जा रहे हो ……. डाकुओं का देश है ये …….. अबे किस किस अंगुलिमाल को संत बनाओगे ????? और सुनो ……. सिर्फ तुम्हारे राम बन जाने से मुल्क में राम राज नहीं आ जाएगा ……. जिस देश में सब रावण हों वहाँ अकेला राम क्या करेगा …….. और रावणों के मुल्क में राम राज लाने की ऐसी ज़रूरत भी क्या है ?
जहां हर आदमी रावण का उपासक हो वहाँ राम राज भला क्यों ?
अबे तुमने अकेले देस सुधारने का ठेका लिया है का ?
अकेले पिले पड़े हो ? किस किस को सुधारोगे ? किस किस का जिम्मा लोगे ……
सब तो उन्ही से मिले हैं …… उन्हीं के गुलाम ……. उन्हीं की चाकरी कर रहे …… क्या bank वाले और क्या RBI वाले ? क्या मजदूर क्या गरीब …… सब उन्हीं के लिए तो लाइन में लगे खड़े ……. पहले उनके नोट बदलवाते रहे सिर्फ 300 रु दिहाड़ी पे ……. फिर उनके ढाई लाख अपने खाते में डलवा दिए …… और अब रोजाना ATM के सामने खड़े निकलवा के दे रहे हैं …….
किसके लिए मरे जा रहे हो मोदी ?
इन्ही बिके हुए लोगों के लिए …….
अबे तुम क्या इकलौते PM हुए हो इस देस के ?
तुमसे पहले बीसियों हुए यार …… देखा किसी को इस तरह चिहाड़ मचाते ? अबे सब खाए खेले मस्त रहे …….. और एक तुम हो कि मरे जा रहे हो ……
अबे जैसे सबने आसान रास्ता अपनाया ……. तुम भी अपनाओ ……. जाओ कुछ दिन ……. गोवा टहल आओ ……. कोई सहेली बनाओ ……. जाओ फिजी बाली …… कहीं होनोलुलु में धूप सेक आओ …… बिटामिन D मिलता है सरीर को ……. बहुत दिन धूप न लगे तो हड्डी कमजोर पड़ जाती बतावें …… देखते नही हो अपने राहुल बाबा की हड्डी केतनी मजबूत है …… अबे जाओ तनिक मालिस ओलिस करवाय आओ तुम बी ……. एकाक ठो कविता कहानी लिखना उहाँ ……. इहाँ साले इन छुटभैये नेताओं के साथ अन्ताक्सरी खेल रहे रहे हो ?
जाओ उहाँ …… स्विट्ज़र लैंड ……. एकाक खाता तुम भी खुलवा ल्यो …… बुढापा चैन से कटेगा …….
हे मोदी ……. जियो और जीने दो
खाओ और खाने दो

पिछले 70 साल बनाम अगले 1000 दिन

आज से कुछ एक साल पहले जब कि रतन टाटा ने दिल्ली के Auto Expo में अपनी महत्वाकांक्षी कार Nano की पहली झलक दिखाई …… इस वादे के साथ कि ये आम आदमी की कार होगी , वो जो bike और skooter पे अपनी बीबी और दो बच्चों के साथ शहर में चलता है …… उस आम आदमी के लिए सिर्फ एक लाख रु में कार बनाने का सपना देखा था रतन टाटा ने …….
तब देश में एक नए किस्म की बहस छिड़ गयी थी …… क्या भारत तैयार है इस transformation के लिए …… क्या भारत के शहर कसबे और हमारी सडकें तैयार हैं इसके लिए कि भारत का आम आदमी भी कार में चले ? किस सड़क पे चलेंगी इतनी गाड़ियां और car parking के लिए कहाँ से आएगी इतनी जगह …….
कुछ लोगों ने इस संभावित समस्या का सकारात्मक पहलू देखा और लिखा कि चलो इसी Nano के बहाने हमारे नीति नियंता और हमारे town planners और हमारी सरकार को सुध आएगी और वो कम से कम अब तो सड़कों पे ध्यान देंगे …… अब तो हम 16 lane के express ways बनाने की सोचेंगे ……. Nano की वजह से जो भीड़ सड़कों पे बढ़ेगी वही हमें अपना infrastructure सुधारने के लिए प्रेरित करेगी । खैर Nano ने कितना असर डाला ये तो मैं नहीं कह सकता पर अभी जो नोटबंदी हुई उसने भी ऐसे ही मिलते जुलते सवाल खड़े कर दिए हैं ।
नोटबंदी से उत्पन्न cash crunch ने cashless और Less Cash की बहस छेड़ दी ।
सवाल पूछे जाने लगे कि क्या भारत cashless बनने के लिए तैयार है ।
यदि आप मोदी जी की कार्य शैली से परिचित हों तो ये जानते होंगे कि मोदी जी जब कोई project हाथ में लेते हैं तो उसके लिए 1000 दिन में लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प लेते हैं ।
मोदी जी ने आते ही मने पद गृहण करते ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी । 24 करोड़ परिवारों के जन धन खाते , पूरे देश में OFC मने Optical Fibre Cable का जाल बिछा के पूरे देश के दूर दराज के गाँवों तक Net connectivity पहुंचाने का लक्ष्य ……. ये सारे काम इस cashless समाज की प्राप्ति के लिए ही शुरू किये गए थे ।
अब इस नोटबंदी से एक ही तीर से कई निशाने साधे गए हैं ।
नोटबंदी दो नंबर का धंदा बंद कर सारा व्यापार एक नंबर में करने की दिशा में पहला कदम है ।
cash less और less cash देश के आम आदमी को सारा विनिमय और व्यापार बैंकिंग व्यवस्था के तहत काम करने को प्रेरित / मजबूर करेगा ।
इस से देश का एक बहुत बड़ा वर्ग Tax payer बनेगा और सारा व्यापार एक नम्बर में होने के कारण सरकार के revenue में बेतहाशा वृद्धि होगी जिस से विकास कार्य होंगे ।
cash less होने के लिए हर व्यक्ति के पास एक bank account , debit card , smart fon , और एक reliable High speed Net connection होना आवश्यक है । सरकार निश्चित रूप से अगले कुछ महीनों/सालों में Banking व्यवस्था और Net connectivity के लिए युद्ध स्तर पे कार्य करेगी । मुकेश अम्बानी ने Jio का 4g launch कर इसकी शुरुआत कर दी है और जल्दी ही अन्य सभी कम्पनियों को भी सस्ते 4G के साथ मैदान में उतरना ही होगा । आज सरकार ने cash में लेन देन करने वालों पे 2% surcharge की घोषणा कर दी है । जल्दी ही plastic money और mobile banking प्रयोग करने पे incentives की घोषणाएं शुरू हो जायेंगी । आज जो mobile apps हर transaction पे पैसे काट रहे है बहुत जल्दी ये बीते जमाने की बात हो जायेगी । वो दिन दूर नहीं जब नगद लेन देन महँगा और plastic money और mobile banking सस्ती पड़ने लगेगी ।
मोदी सरकार निकट भविष्य में आम आदमी मने ठेले पे सब्जी बेचने वालों को , रिक्शा चलाने वालों को और सड़क किनारे बैठे मोची को इनकमTax payer बना देगी ……..

नोटबंदी इस दिशा में उठाया गया पहला कदम है ।
भारत बदल रहा है …….
और अगले 1000 दिन में तो भारत इतना बदल जाएगा कि आप शायद पहचान ही न पाएं ।
जितना काम इस देश में पिछले 70 साल में हुआ उस से ज़्यादा अगले 1000 दिन में होगा ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

बड़ी चर्चा है कि नोटबंदी की वजह से ये GDP गिर जायेगी ।
अपने सरदार मौन मोहन सिंह जी उस दिन संसद में उवाच रहे थे कि दरअसल ये नोटबंदी मोदी सरकार की एक सुनियोजित लूट है जिसमे देस की GDP 2% तक गिर जायेगी । वैसे सरदार जी ये बताने से चूक गए कि उनकी सरकार ने अटल जी से विरासत में मिली 8% से ऊपर की GDP को किस सुनियोजित लूट के तहत 4 % तक ले आये ।
बहरहाल ……. नोट बंदी से GDP गिरने की संभावना तो पैदा हो ही गयी है ।
तो मैंने एक वामपंथी मित्र से सवाल किया कि मेरे दोनों लौंडे इस महीने अगर नोटबंदी के कारण 1800 की jeans और 3500 रु का Nike Reebock का जूता न खरीदें तो मेरे 5300 रु बच गए …… मैं सीधे सीधे 5300 रु से अमीर हो गया तो मुल्क कैसे गरीब हो गया ……. मेरे कू ये समझाओ ……
मेरे उन झामपंथी मित्र ने कुछ यूँ समझाया कि हे दद्दे ……. ये GDP दरअसल बड़ी कुत्ती चीज़ है ……. इसको कुछ इस तरह से समझो कि मान लो ये पेड़ जिसके नीचे तुम बैठे हो …… ये देखो कितनी शीतल छाया है इसकी …… कितना सुख देता है …… पेड़ से ही जल है – जीवन है ।
पर ये पेड़ GDP के किसी काम का नहीं । ये हराभरा लहलहाता पेड़ जो दिन रात बढ़ रहा है , फल फूल रहा है देश की GDP में कोई वृद्धि नहीं कर रहा ।
GDP तो भैया तब बढ़ेगी जब इसे काट दोगे । ये कटेगा तो सबसे पहले इस से लकडहारा जो कुल्हाड़ी चलाएगा वो कमाएगा । फिर इसकी छंटाई होगी । पतली लकडियाँ जलावन में चली जायेंगी और मोटी आरा मशीन पे …… इस से आरा मशीन वाला कमाएगा , लकड़ी की टाल वाला कमाएगा ……. कोई trolly वाला कमाएगा …… 4 मजदूर जो लादे उतारेंगे वो कमाएंगे ……. फिर आरे पे चीर के लकड़ी किसी बढई के पास जायेगी तो वो उसका furniture बना के कमाएगा …… फर्नीचर बनेगा तो उसमे फेविकोल कील sunmica लगेगा ……. वार्निश paint होगा ……. फिर उस furniture को कोई दुकानदार बेच के कमाएगा ……. सब लोग मालामाल हो जायेंगे ……. इस तरह देश की GDP बढती है ……. देश की GDP बढाने के लिए इस पेड़ को कुर्बानी तो देनी ही होगी …….

देश तभी बढेगा जब तुमरे लौंडे Lewis की jeans के नीचे reebok का 8500 का जूता पहनेंगे …….. अगर तुम साले देश द्रोही …….. शर्म नहीं आती ……. लौंडो को रोजाना मने करते हो कि jeans और जूते पे फालतू खर्चा न किया करें ।
यदि आप सच्चे देश भक्त हैं तो अपनी बीबी को रेस्ट दीजिये और खाना महंगे Restaurant से मंगा के खाइये ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।

मोदी जी एक किस्सा सुनाया करते थे 2014 से पहले ।
तब जबकि वो गुजरात के CM थे ।
गुजरात सरकार हर वर्ष एक नया कार्यक्रम हाथ में ले के उसपे युद्ध स्तर पे काम करती थी ।
तो एक साल गुजरात ने निर्णय लिया कि इस साल हम शहरी विकास वर्ष मनाएंगे ।
मने गुजरात के शहरों का काया कल्प करेंगे ।
municipal corporations को सुधारेंगे । शहर साफ़ करेंगे । कूदा कचरा निस्तारण ….. यातायात ….. अतिक्रमण हटायेंगे ।
सरकारी घोषणा हो गयी । notification जारी हो गयी ……. करीब 15 दिन बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भागे भागे आये । बोले हुज़ूर गलती हो गयी …….
क्यों ? क्या हुआ ?
हुज़ूर इस साल के अंत में पूरे गुजरात में corporations और स्थानीय निकायों के चुनाव हैं ।
आप सड़कों से अतिक्रमण हटाने जा रहे हैं ……. पूरे प्रदेश में हज़ारों नहीं लाखों लोग प्रभावित होंगे …… विस्थापित होंगे ……. सालों से सड़कों पे काबिज लोग जब हटाये जायेंगे तो बवाल करेंगे …… उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी ……. वोटर नाराज होगा ……. नगर निगम चुनाव में सूपड़ा साफ़ हो जाएगा …….
मोदी जी ने कहा , ये सब तो पहले सोचना था । अब तो तीर निकल गया तरकश से …… अब जाओ और public को समझाओ कि यदि सड़क चौड़ी होगी तो आपका ही फायदा है …….
नगर साफ़ सुथरे होंगे तो आपका ही फायदा है ……..
मोदी संकट को अवसर में बदलने में माहिर हैं ।
उन्होंने जी जान लगा दी । सडकों से अतिक्रमण हटाये गए । अकेले अहमदाबाद में ही सड़कों पे बने सैकड़ों मंदिर मस्जिद पीर मजार तोड़े गए ……. बहुत हाय तौबा मची …… सडकें खाली कराई गयी …… शहरों में सैकड़ों Fly over बनने शुरू हुए ……. द्रुत यातायात के लिए rapid transport lane बनी ……. 6 महीने में यातायात दुरुस्त हो गया ……. शहरियों को पहली बार अहसास हुआ कि हमारे शहर की सड़क इतनी चौड़ी …. साल बीतते बीतते शहर चम् चम् चमकने लगे …….
जनता बेवक़ूफ़ नहीं ……. अपना भला बुरा समझती है ……..
उस साल हुए स्थानीय निकायों और कारपोरेशन चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया …… खाता तक न खुला …….

जब से नोट बंदी हुई उसके बाद जितने भी चुनाव या उपचुनाव हुए देश भर में ……. भाजपा जीती है ।
आज चंडीगढ़ भी जीत लिया ।
जनता अपना भला बुरा सब जानती है ।
मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।
पंजाब की तस्वीर धीरे धीरे साफ़ हो रही है ।

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..

एकदा जम्बू द्वीपे भारत खंडे बंगाल राज्ये एक औरत रहती थी ।
एक दिन एक गुंडा बदमाश बलात्कारी ने उसको पकड़ लिया और लगा उसका बलात्कार करने ।
और वो लगी हाय हाय करने …… ohh my god ……
उसकी ये हाय तौबा चीखो पुकार मेरे जैसे , दूसरों के फटे में टांग अड़ाने वाले ने सुनी …… और उसने भैया ….. उठाया जो लट्ठ ….. और दौड़ा उस बेचारी अबला को बचाने ……
वहाँ पहुँच उस बलात्कारी को उसने दिया जो एक लट्ठ जमा के ……. तो वो तो लोट गया ……. हाय मार डाला रे …… तब तक वो औरत उठी और उसने उस लट्ठ वाले कू धर पकड़ा कालर से …… तू कौन बे ? कायकू मारा तूने इस बेचारे कू …… सारा मजा खराब कर दिया …….
और फिर वो उस बलात्कारी कि सेवा टहल में लग गयी …… आपको चोट तो नहीं आई ? सतियानास जाए इस नासपीटे का ……. इसने आपको डिस्टर्ब किया …….
पिलिज continue ……
तू चल बे …… फूट यहाँ से …… हवा आने दे …… पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते है ……
Sir ….. You please continue ……..

तो मितरों ……. बंगाल के हिन्दू मोमता दी के राज में मजा ले रहे हैं ……लेने दो …..
वो हाय हाय नहीं …… आह आह कर रहे हैं ……. करने दो …….

भीलवाड़ा के मोमिनों ने सिर उठाया ……. कल हिन्दुओं ने पटक के पेल दिया ……
बंगाल के हिन्दुओं को दर्द होगा तो खुद उठेंगे ।
God helps those who help themselves …….
जिसकी फटेगी उसको ही उठ के खुद की सिलनी पड़ेगी …….
हम कब तक सिलेंगे ?

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..

सरकार confused नहीं है इसलिए आप भी भ्रमित न हों

चूतियों की एक विशेषता होती है ।
खुद चूतिया होते हैं इसलिए दूसरों को भी चूतिया ही समझते हैं ।
वो कहते है न …… जाकी रही भावना जैसी , प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ……
इसलिए चूतियों को सारी दुनिया चूतिया ही दिखती है ।
कल फिर कुछ चूतिये शीघ्रपतन का शिकार हो गए ।
सरकार ने घोषणा की कि 500 और हज़ार के पुराने नोट यदि आपके पास हैं तो सारे इकट्ठे एक साथ जमा कर दीजिये । मने लाख दो लाख या करोड़ दो करोड़ , या 100 पचास करोड़ जो है अपने खाते में इकट्ठे जमा कर दीजिये । उसके बाद एक बार में 5000 से ज़्यादा की रकम नहीं ली जायेगी ।
लोग बाग़ दरअसल पुराने नोटों की 50,000 के नीचे की रकम जिसे जमा कराने पे Pan number नहीं देना पड़ता , ले के रोजाना बैंक में line लगा रहे थे ……. ये वो व्यापारी थे जो या तो अब भी पुराने नोटों में बिक्री कर रहे थे या फिर काले धन वालों के पैसे अपने ac में जमा करा के नोट बदल रहे थे ……. इन लोगों के इस गोरखधंदे को रोकने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया ।
इसके अलावा चूतिये ये सवाल भी उठा रहे है कि सरकार रोजाना policy बदल क्यों रही है । सरकार दिग्भ्रमित confused है क्या ?
इसका जवाब अमित शाह ने दिया है …… ये एक युद्ध है ….. काले धन के खिलाफ युद्ध ….. सरकार ने काले धन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है ……. अब जब युद्ध होगा तो सामने वाला पक्ष भी तो लडेगा ? आपने उसकी जीवन भर की काली कमाई पे हाथ डाला है । वो क्या बस यूँ ही surrender कर देगा ? भागने की , बच निकलने की पूरी कोशिश करेगा ….. अपनी काली कमाई को सफ़ेद करने की पूरी कोशिश करेगा । सरकार द्वारा आम आदमी को दी गयी सुविधा का दुरुपयोग करेगा । system में loopholes खोजेगा …… बच निकलने के रास्ते खोजेगा ……. अब सरकार का काम है उन loopholes को बंद करे …… चोरों के बच निकलने के रास्ते बंद करे …… ये तो चोर सिपाही का खेल है जी ….. तू डाल डाल मैं पात पात . जस जस चोर नए रास्ते खोजते हैं सरकार नए नियम बना के वो रास्ता बंद कर देती है ।
सरकार दिग्भ्रमित confused नहीं बल्कि बेहद सतर्क है ।
सरकार पूरे जी जान से काले धन के खिलाफ युद्ध लड़ रही है ।
सरकार confused नहीं है इसलिए आप भी भ्रमित न हों

कश्मीर की तरह पूरे देश में पत्थर बाजी की तैयारी है ।

भीलवाड़ा में अंततः 24 घंटे बाद प्रशासन ने internet पे लगाया प्रतिबन्ध उठा ही लिया ।
ताजा समाचार ये है कि बारावफात पे मोमिनों द्वारा उत्पात , आगजनी और लूटपाट की प्रतिक्रया में कल दोपहर हिन्दू संगठनों में रोष मार्च निकाला । नेतृत्व बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ता कर रहे थे । जलूस जब गायत्री नगर पहुंचा तो मोमिनों ने उसका स्वागत पत्थर बाजी से किया ।
जवाब में बजरंगियों ने मोमिनों को घरों से निकाल के कूटा । कई दुकानों को आग लगा दी ।
पुलिस प्रशासन ने मौके पे लाठियां भांज के और हवाई फायर कर भीड़ को काबू में किया ।
फिलहाल पूरे नगर में धारा 144 लगी हुई है । कल शाम internet सेवाएं बंद कर दी गयी थीं जो आज शाम बहाल हुई ।
आज शाम एक गुप्त स्थान पे हिन्दू संगठनों ने बैठक कर आगे की रणनीति बनायी ।
कल की घटना में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आये ।
मुस्लिम इलाकों में तालाशी लेने पे पुलिस को तकरीबन हर घर की छत पे पत्थर बरामद हुए , ठीक वैसे ही जैसे काश्मीर घाटी में पाए जाते हैं ।
बारावफात पे जो जलूस निकला उसमे झंडे लोहे की rods में लगे थे ।
मोमिन बड़े सुनियोजित ढंग से किसी बड़े दंगे की तैयारी में लगे हैं ।
एक स्थानीय मस्जिद और शहर काज़ी पुलिस राडार पे है ।

इसके अलावा ये घटनाएं किसी बड़ी साज़िश की तरफ इशारा कर रही हैं ।
कश्मीर की तर्ज़ पे पत्थरबाजी की तैयारी पूरे देश में हो रही है क्या ?
क्या इस तैयारी के निर्देश कहीं और से आ रहे हैं ?

आँख कान खुले रखने की ज़रूरत है ।
संगठन में ही शक्ति है ।
कम लिखे को ज़्यादा समझना ।

हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना

भीलवाड़ा राजस्थान का एक औद्योगिक नगर है । यहाँ कपडे की हजारों मिलें हैं।हिन्दू बहुल है । शांति प्रिय समुदाय की आबादी लगभग 20 % है । बहुत बड़ा शहर नहीं है । जनसंख्या होगी यही कोई 4 लाख ।
गत 12 दिसंबर को बारा वफात यानि कि ईद ए मिलाद उल नबी को शान्ति दूतों ने जलूस निकाला । जलूस में रहे होंगे कोई 20 हज़ार लोग । गौर करने वाली बात ये कि जलूस में लोगों के हाथ में जो झंडे थे वो बांस की डंडियों में नहीं बल्कि लोहे के rods में थे । जलूस पूरे शहर में घूमा । खूब भड़काऊ नारे बाजी और भाषण बाजी हुई ……. जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जब माणिक्य नगर पहुंचा तो भीड़ हिंसक हो गयी और सड़क पे मौजूद गाड़ियों को तोड़ने लगी ….. दुकानों पे हमले हुए ……. बाज़ार धड़ा धड़ बंद हो गए । सारा दिन शहर भर में आतंक का माहौल रहा ।
20 हज़ार सशस्त्र हुड़दंगियों के उपद्रव के सामने पुलिस और प्रशासन भी दम साधे खडा रहा और लाचार देखता रहा । शहर तनाव में रहा ।
इसकी प्रतिक्रिया में आज RSS के स्थानीय नेतृत्व के आह्वाहन पे आज लगभग 8000 हिन्दू एकत्र हो कर जिला प्रशासन कलेक्टर और SP police से मिले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की । आमतौर पे ऐसे मामलों में जैसा होता है …… प्रशासन ने कार्यवाही का भरोसा दे के वापस भेज दिया । पर संतोषजनक बात ये है कि 8000 हिन्दू कम से कम घरों से बाहर निकल के एकत्र तो हुए । रोष प्रदर्शन तो किया ……..
शहर के लोग बताते हैं कि आमतौर पे भीलवाड़ा शांत रहने वाला नगर है और यहाँ साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है ।
प्रश्न है कि जिस भीलवाड़ा में आज तक कभी साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा नहीं हुई वहाँ अब क्यों हुई ?
इस बार बारावफात पे सिर्फ भीलवाड़ा ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी सुनियोजित उपद्रव के समाचार मिले है । आखिर शांति दूतों में बेचैनी क्यों है ?
दूसरा सवाल ये कि भीलवाड़ा के शान्ति दूतों के पास झंडे लगाने के लिए बांस की जगह लोहे की rod कहाँ से आई । किसने उपलब्ध कराई ? बताया जाता है कि सारी योजना नगर की मस्जिदों में बनी …… वहीं से लोगों को Rod में लगे झंडे उपलब्ध कराये गए ।
फिर वही सवाल …… आखिर क्यों ?
मोदी सरकार ने तीन तलाक़ के मुद्दे पे शान्तिदूतों को सीधी चुनौती दी है । ये बौखलाहट उसी का नतीजा है । शांति दूत को ऐसे उपद्रव करने के निर्देश मस्जिदों से मिलते हैं जुमे की तक़रीर में ……. मस्जिदें ही इनके हथियार गोली बारूद के गोदाम हैं ……. शांतिदूतों की सारी politics इन्ही मस्जिदों से संचालित होती है । यहीं से वोट देने के फतवे जारी होते हैं । मस्जिदें ही कौम की लड़ाई लड़ रही हैं ।
इधर हमारे मठ मंदिर और हमारे धर्म गुरु हमारे बाबा जी लोग …… ये अपनी दुकानदारी में लगे हैं ।

फिर भी …… आज RSS के आह्वाहन पे 8000 हिन्दुओं ने एकत्र हो के एक शुभ संकेत दिया है । इन 8000 लोगों से संपर्क करने में whatsapp की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
fb और Whatsapp लड़ाई के महत्वपूर्ण हथियार बन रहे हैं ।

  1. हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना वैसे ही रोना पडेगा जैसे बंगाल के हिन्दू रो रहे हैं ।

शिखर तक का सफर तो अभी बाकी है

पिछले दिनों दिल्ली में एक मित्र से मिलने गया ।
कुछ परेशानी में थे । उनके पिता ने अपना घर बेच दिया था और पूरे परिवार को नए घर में शिफ्ट होना था । पर नया घर चूँकि तैयार न था इसलिए दो या तीन महीने किराए के एक मकान में गुज़ारा करना था । मित्र की पत्नी बीमार रहती थीं सो एक घर से दुसरे और फिर तीसरे में shift करने की जिम्मेवारी बेटी पे आन पड़ी थी जो एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जी जान से जुटी हुई थी ……. बेहद confused ……. डरी सहमी सी …… क्या होगा ? कैसे होगा ? कैसे करूंगी ?

मैंने हौसला बढाया …….. अरे …… ये भी कोई समस्या है ? तुम्हारे जैसी बहादुर बच्ची तो ऐसी छोटी मोटी समस्या चुटकियों में हल कर सकती है …….
पर बिटिया को बात समझ न आई । उसे लगा अंकल झूठी तसल्ली दे रहे हैं ….. किताबी ज्ञान …… लड़की नैराश्य से उबरने को तैयार न थी ।
मैंने फोन निकाला । उसे एक लड़की की तस्वीर दिखाई ।
ये सुमेधा है ……. सुमेधा पाठक …….
माना कि तुम्हारे जीवन में बहुत समस्याएं हैं ……. पर इस लड़की को ज़रा ध्यान से देखो ।
कितनी खुश दीखती है ……… है कोई तनाव ?
अब ज़रा इस फोटो को पुनः देखो । सुमेधा wheel chair पे बैठी है । जब ये 10th क्लास में थी तो इसकी रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या हुई और लाख इलाज कराने के बावजूद कोई सुधार न हुआ और धीरे धीरे ये paraplegic हो गई । paraplegic मने कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न लकवा ग्रस्त हो गया ।
देश दुनिया का कोई डाक्टर अस्पताल नहीं छोड़ा । फिर भी कोई सुधार न हुआ । आज 3 साल से ज़्यादा हो गए ……. wheel chair पे है ।
माना कि तुम्हारे जीवन में समस्याएं हैं …… पर सुमेधा से ज़्यादा तो नहीं ?
जानती हो , एक समय ऐसा भी था जब इसे रोजाना 9-9 घंटे physiotherapy करानी पड़ती थी …… स्कूल छूट गया था …… सामने पहाड़ सा जीवन अन्धकार मय दीखता था …… फिर भी , उन्ही विपरीत परिस्थितियों में भी , सिर्फ घर पे self study कर के ही इसने 10th और 12th में 92 -94 % मार्क्स ले के top किया …… आज BHU से BCom कर रही है ……. माना कि जीवन में बहुत समस्याएं हैं फिर भी सुमेधा जितनी तो नहीं ……. आज के बाद जीवन में कभी निराशा हो तो सुमेधा की फोटो देखना और इश्वर को धन्यवाद देना …… हे इश्वर …… thanks …… मैं कम से कम अपने पैरों पे खड़ी तो हो सकती हूँ ……

और अब दो पंक्तियाँ सुमेधा के लिए …… बेटी सुमेधा ….. कभी जीवन में निराशा हो तो Stefan Hawkins की फोटो देखना ……. और इश्वर को धन्यवाद देना ……. हे इश्वर धन्यवाद …… मैं कम से कम कमर के ऊपर तो ठीक हूँ …….
Stephan Hawkins जब सिर्फ 19 साल के थे तो उनको भी वही समस्या हुई जो सुमेधा को है । तमाम इलाज के बावजूद वो भी गर्दन के नीचे लकवाग्रस्त हो गए …… quadriplegic ……. जब उन्हें पहली बार बीमारी का attack हुआ तो वो भी तुम्हारी तरह स्कूल में थे । उनके अगले 8 साल अस्पतालों के चक्कर काटते और physiotherapy कराते ही बीते । उनका paralysis progressive था और धीरे धीरे कमर से होता हुआ गर्दन तक पहुँच गया ।
तमाम दुश्वारियों के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी । एक समय ऐसा भी आया जब doctors ने उनको कहा कि वो सिर्फ 2 साल और जीवित रहेंगे । तब उन्होंने जवाब दिया …… अरे दो साल तो बहुत हैं ….. तब तक तो मैं आराम से अपनी Phd ख़त्म कर लूंगा । बीमारी और गर्दन से नीचे लकवा ग्रस्त शरीर Stephan Hawkins को दुनिया का महानतम वैज्ञानिक Physicist और Cosmologist बनने से नहीं रोक पाया । आज Stephan पूरी दुनिया में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं और उनके शिष्य दुनिया के महानतम वैज्ञानिकों में शुमार होते हैं ……. इसलिए बिटिया सुमेधा ……. जब कभी उदास हो तो Stephan Hawkins को देखना और उनकी जीवनी पढ़ना और इश्वर को धन्यवाद देना …… हे इश्वर …… आभार आपका ……. कमर से ऊपर तो ठीक हूँ …… यदि Stephan Hawkins दुनिया का महानतम वैज्ञानिक बन सकता है तो सुमेधा क्यों नहीं बन सकती एक महान Economist ……..

AAP is loosing punjab .पंजाब में बाजी केजरीवाल के हाथ से खिसक चुकी है

कई मित्रों ने पूछा है की पंजाब के आगामी विस चुनाव के बारे में आपका क्या आकलन है .

सीधी स्पष्ट बात …… इस बार पंजाब में मतपेटी में से भूत निकलेगा . पंजाब इस बार ऐसे छाकायेगा कि अच्छे अच्छे विश्लेषक , राज नीतिज्ञ और Psephologist पानी मांग  जायेंगे .

इसमें कोई दो राय नहीं कि  आज से 6  महीना  पहले AAP का पलड़ा बहुत भारी था और इनकी जबरदस्त हवा थी . पर जैसा कि performance चार्ट में होता है , आपको ठीक समय पे peak करना होता है ……. अगर आप समय से पहले peak कर गए तो फिर उसके आगे ढलान ही होती है …….

कजरी का दुर्भाग्य है की उसका पाला देश के दो धुरंधर राजनीतिज्ञों से पडा है …… एक तरफ तो हैं राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी बादल साहब और उनका बेहद शातिर बेटा ……….और दूसरी तरफ Capt अमरेन्द्र सिंह ……. इन दोनों के सामने केजरीवाल पिद्दी है …….. केजरीवाल की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इनके पास प्रदेश में कोई विश्वसनीय चेहरा नहीं हैं . जहां एक तरफ बादल साहब और अमरेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज हों तो उनके सामने भगवंत मान जैसा B ग्रेड विदूषक और शराबी कबाबी आदमी ?

दूसरी बात है की मुकाबला त्रिकोणीय होने की वजह से ये आकलन बेहद मुश्किल हो गया है कि बादल साहब के खिलाफ कितनी Anti Incumbency  है और वो वोट कहाँ जा रहा है . यादे कजरी मैदान में न होते तो इस बार अकालियों का सूपड़ा साफ होने से भगवान् भी  नहीं बचा पाता …..पर अब ऐसा लगने लगा है कि कहीं केजरीवाल अकालियों का तारणहार बन के तो नहीं आ जाएगा …….

केजरीवाल जितने कमजोर होंगे , अकालियों को उतना फायदा होगा ……

anti  incumbency  वोट जो यूँ कांग्रेस की झोली में जाना था वो AAP  की झोली में जा रहा है …..इसके अलावा आप जितना वोट अकालियों का काट  रही है उस से ज़्यादा कांग्रेस का काट रही है ……कांटे की त्रिकोणीय टक्कर अगर हुई तो अकाली फायदे में रहेंगे क्योंकि एक तो उनका पार्टी संगठन मज़बूत है , दूसरे सत्ताधारी दल होने के नाते धनबल ज़्यादा है …… मोदी की नोट बंदी का सबसे ज़्यादा नुक्सान केजरी और कांग्रेस को ही हुआ है ……. केजरी यूँ ही नहीं बिलबिला रहा है ……..पिछले दो सालों में केजरी ने कनाडा और UK में बैठे खालिस्तानियों से और अरब देशों से पेट्रो डॉलर हवाला माध्यमों से जुटाए थे वो सब मोदी ने मिटटी कर दिए ………. केजरू इनकम टैक्स कर्मी रहा है ……. अन्दर की कहानी सब जानता है …….वो जानता है की मोदी सांस भी नहीं लेने देगा …….. और अब इतने कम समय में इतनी भारी मात्रा में funds नहीं जुटाए जा सकते …….. हवाला पे मोदी की कड़ी नज़र है …… ये भी सुनने में आ रहा है कि Axis Bank वालों ने AAP  का पैसा सफ़ेद करने की कोशिश की थी पर मोदी ने पकड़ लिया ……..

उधर सुखबीर बादल के पास पैसे की कोई कमी नहीं है …….. और ये बड़ी कडवी सच्चाई है की चुनाव में पैसा और शराब पानी की तरह बहेगा ……..एक रात पहले वोट खरीद लिए जायेंगे ……. दूसरा फैक्टर बहिन जी हैं …..मोदिया ने उनको भी कंगाल कर दिया है . चुनाव उनको भी लड़ना है . और उसके लिए पैसा चाहिए और आज उनको पैसा सिर्फ सुखबीर बादल दे सकता है ……. पिछली बार भी दिया था 2012 में ……इस शर्त पे की पंजाब की हर सीट पे बसपा का प्रत्याशी लडेगा और कांग्रेस के वोट काटेगा …….. 2012 में अकालियों की जीत में बहुत बड़ा रोल बसपा और मनप्रीत बादल का था …..इस बार मनप्रीत बादल की जगह केजरू ने ले ली है ……..

देखना सिर्फ ये होगा की केजरू कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा पाता है और खुद का कितना फायदा कर पाता है ……

फिलहाल लड़ाई अकालियों और कांग्रेस के बीच है ……. केजरू पिछड़ चुके हैं …….

ज़्यादा संभावना अकालियों की है …….

त्रिशंकु विधानसभा भी बन सकती है …….

अकाली sweep  भी कर सकते हैं ……..

 

बोला ना ……. मतपेटी से जिन्न निकलेगा