UP में नमाजवादी कलह

नमाजवादी कुनबे की कलह सड़क पे आ गयी है ।
परसों अकलेस जादो ने 403 प्रत्याशियों की सूची अपनी तरफ से मोलायम जादो को सौंप दी थी ।
सिपाल जादो ने उस लिस्ट को अपने संडास में रख दिया । save paper ……. tissue paper के काम आयगा ।
कल सिपाल जादो ने अपनी लिस्ट मोलायम को थमा दी । उस लिस्ट में सिपाल ने कायदे से अकलेस का औकातीकरण किया है । जब मोलायम ने लिस्ट जारी की उस समय CM झांसी में थे । पर मोलायम ने उनकी उपस्थिति ज़रूरी नहीं समझी । सूची जारी कर दी । सूची जारी करते हुए ये भी कहा कि पार्टी का कोई CM चेहरा नहीं है । साथ ही ये भी साफ़ कर दिया कि पार्टी अकेले अपने बूते चुनाव लड़ेगी । किसी से कोई गठबंधन नहीं ।
सूची में ऐसे 107 नाम हैं जिनका टिकट अकलेस ने काट दिया था । उन 107 को सिपाल जादो ने टिकट दे दिया है ।
चुनावी राजनीति का पहला नियम ये है कि Anti Incumbency से निपटने के लिए sitting MLA या MP के टिकट काट दिए जाते हैं । पर अकलेस ने इस मौलिक सिद्धांत की अवहेलना करते हुए 216 sitting MLAs को टिकट दिया था । जो 10 MLA सिपाल जादो के बेहद करीबी थे सिर्फ उनका टिकट काटा । इसमें ओम प्रकाश सिंह , नारद राय और शादाब फातिमा प्रमुख है । नारद राय वो हैं जिन ने मंत्री रहते माफिया Don मुख्तार अंसारी की पार्टी में एंट्री कराई । शादाब फातिमा के लिए कहा जाता है कि वो अकलेस जादो की नयी चाची हैं …….. जाहिर सी बात है कि सिपाल की लिस्ट में चाची का जलवा कायम है ।
एक बात जो गौर करने लायक है वो ये कि महाभ्रष्ट खनन मंत्री गायत्री प्राजापति दोनों की लिस्ट में कायम हैं ।

मोटे तौर पे अकलेस जादो के 100 टिकट काट दिए गए और 107 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया जिनका टिकट अकलेस ने काटा था ।

अखिलेश sitting MLAs पे दाव खेल रहे है । इनमे से 200 नाम ऐसे हैं जो आज तो अखिलेश के साथ दीखते हैं पर कल क्या करेंगे अल्लाह जाने ।

इस समय CM house में MLAs की बैठक चल रही है ।
देखिये क्या निकलता है ।

मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे ……

पंकज कुमार नामक एक फेसबुकिया लौंडा इन दिनों ग़दर मचाये हुए है ।
पट्ठे ने धुंआ उठा रखा है । दहेज़ के खिलाफ गज़ब लिख रिया है ।
उसे पढ़ के मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आ गयी ।
बात यूँ है कि मेरी लिस्ट में नित नए मित्र जुड़ते रहते हैं । और फिर 5 ठो id . न जाने किसपे पोस्ट हुई किसने पढ़ी किसने न पढ़ी ……. इसलिए उस पोस्ट को repost न कर फिर से लिख रहा हूँ ।
ये किस्सा मेरे बड़े भाई ने सुनाया था दो साल पहले ।
हुआ ये की मेरी दो बुआ जी और एक सबसे बडकी बहिन मने बड़का बाबू की सबसे बड़ी बेटी बगल के गाँव में बियाही हैं ……. इस रिश्ते से वो पूरा गाँव ही हम सबको मामा बुलाते हैं ……. तो बडकी फुआ के खानदान का ये किस्सा है ……… सो हुआ ये कि उनके खानदान के एक लौंडे का बियाह था । बारात 30 – 40 km दूर जिला आजमगढ़ के किसी गाँव में गयी थी । आजकल हमारे हियाँ भी लोग मॉडर्न हो गए हैं …… सो वो फूल माला वाला बियाह करने लगे हैं । मने वो जिसमे वर वधू वरमाला डाल के बियाह करते हैं । सो आमतौर पे होता ये है कि जब वरमाला घालने की कवायद होती है तो लौंडे को उसके दोस्त और लौंडिया को उसकी सहेलियां घेरे रहती हैं । पर इस बियाह में मामला उलट था ……… गाँव घर के घाघ किसिम के बैठकबाज खलीफा लोगों ने लौंडों को घुड़क के भगा दिया था और वरमाला लिए दूल्हे को घेरे खड़े थे । उधर वधू के साथ भी उसकी सहेलियां बहनें न हो के सब घाघ बुढवे ही खड़े थे ………
दोनों सेनायें युद्ध भूमि में आमने सामने आ डटी ……. अपने पार्थ ने इठलाते हुए वरमाला यूँ उठायी मानो गांडीव हो …….. और आगे बढ़ चला …….. पर जैसे ही उसकी निगाह वधू पे पड़ी ……. वो ठिठक गया ……. अंग प्रत्यंग शिथिल हो गए …… मिरगी के मरीज मतिन हाथ पाँव ऐंठ गए …… गांडीव मने बरमाला हाथ से छूट गयी …… बहुत मोटे दहेज़ के साथ चन्द्रमुखी के सपनों में खोया लौंडा …… जब उसने अपनी होने वाली बीबी की शक्ल देखी तो उसे राजपाट से वैराग्य उत्पन्न हो गया । चन्द्रमुखी के ख्वाब लिए लड़के के सामने साक्षात ज्वालामुखी खड़ी थी ……. इस से पहले कि लौंडा बेहोश हो के गिर जाए और उसे जूता सुंघाना पड़े …… अगल बगल खड़े योगिराज कृष्ण टाइप लोगों ने मोर्चा सम्हाला और दिग्भ्रमित लौंडे को आधुनिक गीता का ज्ञान बांचना शुरू किया ……. मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे …… पर लौंडा टस्स से मस्स्स्स्स न हुआ । उसको तो कटरीना कैफ से बियाह करना था । और सामने वरमाला लिए खड़ी थी साक्षात ललिता पवार ……. उसने कहा हे तात …… क्या रखा है दान दहेज़ में ……. मैं खुद कमा के खा लूंगा ……. blah blah blah …….
इतना सुनते ही एक कृष्ण जी ने रौद्र रूप धारण कर जो अपना विराट स्वरुप जो दिखाया ……..
भोसड़ी वाले ? जिनगी में कभी 30,000 रुपया देखले हउए ? कहाँ से कमा लेबे 30,000 महिन्ना ?
अबे मस्टराइन हौ सरकारी इस्कूल में …… सारी जिनगी मऊज लेबे बे …….. और इस प्रकार कृष्ण ने उसे नाना विधि अर्थशास्त्र , समाजशास्त्र और नागरिक शास्त्र का crash course करवा दिया …….. अतः हे पार्थ …….. चेहरे की चमड़ी पे मत जाओ ……. हर महीने जब 1 तारिख को salary खाते में आ जाती है तो जो अलौकिक सुख मिलता है उसका महत्त्व सिर्फ देव लोक के देवता ही जान पाते हैं ……. इस प्रकार के economics के गुण सूत्र समझ पार्थ के मन मस्तिष्क में कुछ स्फूर्ति का संचार हुआ ….. मूर्छा दूर हुई …… चेतना जगी ……. उसने लपक के गांडीव बोले तो वरमाला उठा ली और जी कड़ा कर कलेजे पे पत्थर रख वधू को वर लिया ।
कालान्तर में पार्थ ने हस्तिनापुर में गिट्टी बालू cement सरिया बेचते हुए सुखपूर्वक जीवन यापन करने लगा ।
वो अलग बात है कि कुछ महीनों बाद शिक्षा मूत्र से मस्टराइन हुई बालिका हाई कोर्ट के आदेश से पुनर्मूशिका भव हो गयी ……
वो बड़ी दर्दनाक कहानी है …… फिर कभी ।

सख्त जान भारत

इस फोटो की आजकल बहुत चर्चा है सोशल मीडिया पे ।
कुछ लोग बहुत ज़्यादा सहानुभूति जता रहे हैं ।
कुछ ने आर्थिक मदद भेजने की पेशकश की है ।
कुछ उस व्यक्ति को गरिया रहे हैं जिसके उत्सव में ये महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण में सर पे भारी बोझ उठाये काम करती दीख रही है ।

परन्तु इस फोटो के प्रति मेरा नज़रिया कुछ और है । जो लोग इसे देख बहुत ज़्यादा उद्वेलित हैं वो वास्तविक जीवन से कटे हुए लोग हैं । उन्होंने न असली जीवन जिया है और न असली भारत देखा है ।

मेरा जन्म एक MH बोले तो Military Hospital में हुआ था । मेरी माँ उस MH के किस्से सुनाया करती थीं । बताती थीं कि उस MH की Matron बड़ी सख्त जान जल्लाद किस्म की औरत थी । labor room में प्रसव के तुरंत बाद मने सिर्फ 10 – 15 मिनट बाद माँ की गोद में बच्चा थमा के खडा कर देती । माँ अगर कोई नखरे दिखाती तो जोर से डांटती ।
क्या हुआ ? क्यों इतने नखरे कर रही है । कौन सा पहाड़ तोड़ा है । चल उठ के काम कर । मने 3 दिन MH में रखती पर सब काम उसी से करवाती । मने अपनी खुद की और बच्चे की देखभाल । उसका idea ये था कि सद्यप्रसूता मानसिक रूप से दृढ हो …… बहुत सुकुमार न हो ……. pregnency और Delivery कोई पहाड़ नहीं ।
हमने बचपन में ऐसे किस्से सुने हैं जब माँ जंगल में गयी घास लेने । वहीं delivery हो गयी । खुद ही हंसिया से नाड़ काटी और पीठ पे बच्चा बाँध सर पे लकड़ी या घास का गट्ठर धरे वापस चली आई ……. इतनी सख्त जान हुआ करती थीं हमारी दादी नानी ।
अगर यकीन न हो तो अपने घर में किसी 70 – 80 साल की महिला से पूछ लीजिये । ऐसे बीसियों किस्से सुना देंगी । मेरी माँ मेरी गर्भवती पत्नी से पूरे घर के पोचे लगवाती थी फर्श पे …… कहती इस से delivery बेहद आसान हो जाती है ।
ग्रामीण भारत आज भी बड़ा सख्त जान है । वहाँ ये चोचले नहीं चलते कि pregnant है तो काम नहीं करेगी । फोटो में दिख रही महिला हट्टी कट्टी स्वस्थ है । working woman है । कमा के खाना चाहती है । मेहनत परिश्रम से भाग नहीं रही ।
करने दो न उसे काम । क्यों जबरदस्ती पंगु बनाना चाहते हो ?

खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।

जो लोग गाँव में रहे हैं या ग्रामीण पृष्ठभूमि से है उन्होंने ये दृश्य देखा होगा ।
शेष अपनी कल्पना से देख लें ।
गाँव में कोई पशु जब बीमारी या वृद्धावस्था से एकदम अशक्त हो जाता है तो बैठ जाता है ।
बार बार उठने की कोशिश करता है पर उठ नहीं पाता ।
खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।
ऐसे में किसान दो चार आदमी जुटाता है और सहारा दे के पशु को खडा कर देते हैं ।
दो आदमी आगे से दो पीछे से और एक पूंछ पकड़ के उठाता है ।
अब आप सोचेंगे पूंछ पकड़ के कैसे उठा सकते है ?
पूंछ जहां पीठ से जुडी होती है , गुदा स्थान ज़े ठीक ऊपर …….. वो बहुत मज़बूत जोड़ होता है ।
जब तक वहाँ से जोर नहीं लगाएगा ……. पशु हो या मनुष्य …… खडा नहीं हो सकता ।
*** तक का जोर लगाना ……. ये कहावत यूँ ही नहीं बनी है ।
*** भीच के जोर न लगाओ तो कोई भी भारी काम हो नहीं सकता ……..
कोई जानवर उठने की कोशिश कर रहा है और आप अकेले हैं , उसकी मदद करना चाहते हैं …….
पूंछ पकड़ के थोड़ा सा सहारा दीजिये , खडा हो जाएगा ।

बचपन का एक किस्सा याद है मुझे ।
एक भैंस थी जिसे सहारा दे के उठाना पड़ता था । भैया आते जाते 2 – 4 लोगों को बुलाते । साथ में हम बच्चे लगते । भैंस खड़ी हो जाती । दो तीन हफ्ते ये सिलसिला चला । फिर वो मर गयी ।
अब उसे एक बैलगाड़ी में लाद के गाँव से दूर सीवान में पहुंचाना था …….. अंतिम यात्रा ।
उसके शव के पास गाड़ी लगाई । भैया आदमी जुटाने लगे । 10 एक आदमी हो गए । पर भैया बोले की 10 – 12 आदमी और जुटाओ । इतने से काम नहीं चलेगा ।
पर रोजाना तो हम 4 – 6 लोग ही मिल के इसे उठा लिया करते थे ?
आज 25 आदमी क्यों लगेंगे ?
क्योंकि तब ये जीवित थी । कितनी भी अशक्त थी पर जीवित थी ।
सच ये है कि तब भी वो अपनी ताकत से अपने प्रयास से अपनी इच्छाशक्ति से खड़ी होती थी ।
हम तो उसे सिर्फ हल्का सा सहारा दिया करते थे ।
पर आज ये मर चुकी है । She’s dead .
और मरा हुआ जीव बहुत भारी हो जाता है । बहुत बहुत भारी । तब उसे उठाना आसान नहीं होता ।
पूरा गाँव जुटाना पड़ता है ।

वो तो सिर्फ भैंस थी ।
हिन्दुओं ……. तुम तो हाथी हो । तुम मर गए तो पूरा गाँव मिल के भी न उठा पायेगा ।
crane मंगानी पड़ेगी ।

बंगाल से आज एक शुभ समाचार मिला । एक शुभ संकेत ।
TMC के हिन्दू कार्यकर्ताओं में एक undercurrent है । आक्रोश है ।
TMC के हिन्दू भोटर और कार्यकर्ता बेचैन हैं ।
उन्हें ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण रास नहीं आ रहा ।

लोहा गर्म हो रहा है । इसे लाल करो ।
लाल लोहा ही shape बदलता है ।