रूरा में किसी ने शांति पाठ तो नहीं किया ??????

पाकिस्तान के एक विद्वान् है । जनाब हसन निसार साहब ।
Youtube पे उनके विडियो बहुत लोकप्रिय हैं ।
सच बोलते हैं । मुसलमानों को आइना दिखाने के लिए कुख्यात हैं । पाकिस्तान के TV channels की debates में बड़ा बेबाक निर्भीक बोलते हैं ।
उनका एक सवाल है ……. पिछले 1400 साल में इस्लाम का contribution क्या है दुनिया को ? Humanity को ?
सिवाय दहशतगर्दी के तुमने दिया क्या है दुनिया को ?
आज तक एक सूई भी ईजाद की ? science Technology में तुम्हारा कोई योगदान पिछले 1400 साल में ? arts और Culture में ?
अलबत्ता terrorism में ज़रूर कुछ R&D करते नज़र आते हैं मुसलमाँ ।
सुन्नी दहशतगर्द इस्लाम के बाकी 71 फिरकों को और शेष काफिरों को मारने के नित नए तरीके इजाद करने की research ज़रूर कर रहे हैं ।
ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मारा जा सके ऐसे हथियार और तरीके develop करने की कोशिश है ।
जहां भी हो , जैसे भी हो , ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मारो …… बेक़सूर मासूम लोगों को मारो ……
जो कुछ भी है हाथ में , उसी को हथियार बनाओ ।
France और Germany में शान्ति दूत truck drivers ने अपने truck को ही शांति फैलाने का हथियार बना लिया है । अपना ट्रक लोगों की भीड़ पे चढ़ा दो ……. कुछ लोगों को कब्रिस्तान के शांतिपूर्ण माहौल में शान्ति से अपनी अपनी कब्र में लिटा दो……..

पिछले एक महीने में कानपुर के आसपास ये दूसरी घटना हो गयी ।
दोनों में ट्रेन सुबह 3 से 5 बजे के बीच पटरी से उतर गयी ।
120 kmph की स्पीड से दौड़ती रेल को derail करने का जुगाड़ सिर्फ 500 रु में बनाया जा सकता है ।
देश भर में फैली हज़ारों km लम्बी रेल पटरियों की रखवाली नहीं की जा सकती ।

कल रात कानपुर के पास रूरा में जो derailment हुआ उसकी इस angle से भी जांच होनी चाहिए कि ये काम शांति दूतों का तो नहीं ।
रूरा में किसी ने शांति पाठ तो नहीं किया ??????

रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

हमारे इदर एक कहावत कहते है
बिल्ली को सपने में बी छीछ्ड़े दीखते हैं ।
छीछ्ड़े ……. मने कसाई जब मांस बेचता है तो उसमे से कुछ टुकड़े जो बेकार बच जाते हैं उन्हें छीछ्ड़े कहते हैं । एक अच्छी बिल्ली को हमेशा छीछ्ड़े पे focus करना चाहिए । बकरे पे नहीं ।

मोदी जी ने 2014 के लोस चुनाव के run up में कहा कि विदेशों में इतना काला धन जमा है कि उसे अगर देश में वापस ला के विकास कार्यों पे खर्च किया जाए तो हर हिन्दुस्तानी के हिस्से 15 लाख रु आयेगा ।
बस दीख गया बिल्ली को छीछ्ड़ा ……. मोदी हर आदमी के खाते में 15 लाख रु जमा कराएगा ।

मोदी ने 2014 में कहा ……. 5 करोड़ लोगों को रोजगार …….. बिल्ली को दीख गया छीछ्ड़ा ……..
पूछ रहे हैं कब मिलेगी 5 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी ? बिल्ली की dictionary में रोजगार मने सरकारी नौकरी ।

इधर मोदी जी का मूलमन्त्र है ……. विकास से रोजगार ।
skill development करो रोजगार पाओ ।
उद्यम करो ……. रोजगार पाओ ।
मुद्रा बैंक से 50,000 से ले के 10 लाख तक का लोन लो …….. स्वरोजगार करो ……. entrepreneur बनो ……. खुद रोजगार पाओ , समाज में 10 और लोगों को रोजगार दो ।
infrastructure बनाओ ……. उस से अपने आप रोजगार का सृजन होगा ।
गुजरात में पटेल की मूर्ति …….
मुंबई में शिवा जी की मूर्ति …..
ये दोनों बहुत बड़े tourist attraction होंगे । हर साल लाखों tourist आयेंगे इन्हें देखने । कितना रोजगार मिलेगा लोगों को ?

उत्तराखंड की पूरी economy ही चारधाम पे निर्भर करती है ।
चारधाम मने बदरीनाथ केदारनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री ……… ऋषिकेश से आगे ये चारों धाम कुल 900 km की यात्रा है । आज तक इस पूरे रूट की इतनी दुर्दशा थी कि पूछो मत । सड़कों का बुरा हाल । यात्रा पे हमेशा अनिश्चितता की तलवार लटकी रहती है । कब रास्ता बंद हो जाएगा , कब आपकी गाडी खड्ड में चली जायेगी , कब आपके ऊपर पूरा पहाड़ आ गिरेगा , कब पूरी की पूरी सड़क सैलाब में बह जायेगी ……. सब राम भरोसे ।
इसके बाद भी लाखों लाखों श्रद्धालु हर साल आते हैं उत्तराखंड ……. चार धाम की यात्रा करने …….
tourist जब आता है तो उस से समाज का हर वर्ग कमाता है । सड़क किनारे एक अंगीठी रख के चाय बेचता चाय वाला भी , भुट्टा भून के बेचने वाला भी , लाख रु down payment दे के किश्तों पे गाड़ी खरीद taxi चलाने वाला युवक भी और 3star 5 star hotel का मालिक भी ……..
सब कमाते हैं ……. सबको रोज़गार मिलता है ।
2013 की केदारनाथ त्रासदी ने उत्तराखंड को बर्बाद करके रख दिया । सडकें सैलाब में बह गयी ।
हज़ारों सैलानी मारे गए । श्रद्धालुओं ने चारधाम से मुह मोड़ लिया । पूरे प्रदेश की economy तहस नहस हो गयी । सैलानी को confidence ही न रहा । कौन जान देने जाएगा वहाँ । जान है तो जहान है ।
कल मोदी जी ने चारधाम express way परियोजना की आधारशिला रखी ।
900 km लम्बी चारधाम महामार्ग विकास परियोजना कुल 12000 करोड़ रु की लागत से बनेगी जिसमे मुख्य शहरों कस्बों के bye pass , Tunnels , Bridge और Flyover बनेंगे ।
इस परियोजना का सामरिक महत्त्व भी है क्योंकि गंगोत्री बद्रीनाथ रूट से indo china बॉर्डर पे सामरिक deployment और supply का अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य होगा ।
सरकार ने इसे 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है ।

ये परियोजना उत्तराखंड के लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराएगी ।

मोदी जी जानते हैं कि 125 करोड़ लोगों के देश में सबको सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती पर सबको रोज़गार ज़रूर दिया जा सकता है ।
रोज़गार का रास्ता विकास से निकलता है ।

मीडिया हरमजदगी कर रहा है ।

माँ कसम , ये गुज्जू दढ़ियल ……. भोत कमीना आदमी है ।
अगर आप समझते हैं कि इन्ने ये नोटबंदी 8 Nov को करी ….. अगर आप वाकई ऐसा समझते हैं तो आप भारी चूतिया ।
अजी ये तो इस से पहले कई बार कर चुका नोटबंदी ।
हमारे एक मित्र हैं । लखनऊ में रहते हैं । जात के कायस्थ हैं ।
पहले बैंक में थे । वहाँ से VRS ले ली ।
लोगों को देस परेम देस भकती का कीड़ा होता है ।
इनको देस भकती का अजगर था ।
2013 – 14 की बात है ।
बोले खेती करूंगा ।
लोगों ने समझा भांग के अंटे का असर है । सुबह तक उतर जाएगा ।
पर जब सुबह ए अवध हुई तो नशा और चढ़ गिया ।
भाई साब सपरिवार पहुँच गए लखनऊ से बाहर एक गाँव में ।
एक किसान से 2 एकड़ जमीन खरीद ली । दो चार एकड़ lease पे ली ।
और लगे भैया सब्जी की खेती करने ।
and यू know ये मोदी कम्बखत …… वहीं गुजरात से बैठ के सिरबास्तो जी की खेती पे नजर रखे हुए था । इधर सिर्बास्तो जी के खेत में पत्ता गोभी बोले तो Cabbage की फसल लहलहा रही थी …….. सिरबास्तो जी सपरिवार कंधे पे हल रखे सपरिवार ग्रुप song गाते थे …….. मेरे पुत्तर परदेस की धरती सोना उगले , उगले हीरे मोती ……. उत् परदेस की धरती ……. पर मोदी से सिरबास्तो जी के पलिवार की खुसी देखी न गयी । और उन्ने वहीं गाँधी नगर में ही बैठे बैठे ( उस समय CM थे ) कम्बखत यहाँ लखनऊ में नोट बंदी कर दी ।
और भैया नोटबंदी होते ही जो पत्ता गोभी हज़रत गंज के AC showrooms में 50 रु किलो बिक रही थी वो 50 पैसे किलो बिकने लगी । इस दाम में तो लदाई मने cartage मने खेत से सब्जी मंडी तक लाने का tractor trolly का भाडा तो छोडो खेत में तुड़ाई तक नहीं निकलती …….. अब सिरबास्तो जी के सामने विकट समस्या …… इस पत्ता गोभी का करें तो क्या करें ?
तय हुआ कि tractor से जुतवा दो खेत में ही …….. कम से कम सड़ के खाद तो बनेगी ।
पर उस से पहले गाँव के पशुओं को न्योत आये ……. पहले ढोर डंगर चर लें तो फिर जुतवायें ।
4 दिन गाँव गिरांव की गाय भैंसों ने दुई एकड़ पत्ता गोभी की दावत उड़ायी । फिर सारी फसल मिट्टी में मिला दी गयी ।
मित्रों ……. जो देवेन्द्र श्रीवास्तव जी के साथ हुआ वो कोई नयी बात नहीं । ऐसा हर साल होता है ।
आप कितनी भी उन्नत कृषि कर लें , प्रकृति अपना काम करेगी ।
कभी bumper crop आएगी कभी एक एक दाने को तरस जाएगा किसान ।
एक बार हमने प्याज लगाए । इतने छोटे छोटे प्याज हुए कि मुफ्त में भी कोई न ले ।
और एक बार उसी खेत में इतनी फसल हुई कि रखने की जगह न बची ।
और ये तकरीबन हर फसल में होता है । और मंडी में दाम तो भैया सीधे सीधे demand and supply पे निर्भर करती है । मुझे वो दिन भी याद है जब 1990 में पटियाला के बाज़ार में अंगूर 2 रु किलो बिका था । कारण ये था कि बगल के जिले संगरूर के अंगूर किसानों के पास इतनी bumper crop हुई कि अंगूर 2 रु किलो बिका ।
खेती किसानी में भाव का ऊपर नीचे होना आम बात है ।
किसी भी किसान से बात करके देखिये । किसान कभी Bumper crop की कामना नहीं करता ।
दाम हमेशा moderate yield में ही मिलता है ।
मैंने लखनऊ में वो दिन भी देखे हैं जब आज से 3 या 4 साल पहले लखनऊ की सड़कों पे A grade दसहरी आम 6 रु किलो बिका था ।

आज देश में कुछ मंडियों में अगर टमाटर सड़कों पे फेंका जा रहा है तो उसमे नोटबंदी का कोई रोल नहीं ।
मीडिया हरमजदगी कर रहा है ।