ये चुनाव सपा के लिए तो ख़तम है ………

नामाजवादी कुनबे में तलवारें फिर खीच गयी हैं ……..

भतीजे अकलेस जादो ने चचा सिपाल जादो को खोल के दिखा दिया है ……लो चचा पकड़ लो …….

हम ना मानते तुमको औ तुमाई अध्यक्सी कू …….. अपनी अध्यक्सी भीतर घाल लओ ……… भोत देखे आँ तुमाए जैसे अध्यक्स ……. तुम औ तुमाई पालटी ………

आज भतीजे ने पालटी अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए …….खुल्लम खुल्ला  विद्रोह करते हुए अपने 403 प्रत्याशी घोषित कर दिए ……..

अब अकलेस जादो खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे ……..और दुनिया से नहीं डरेंगे ……..

अकलेस किसी से न डर रहे हैं न किसी का लाज लिहाज रह गया है ……… उन्होंने जीरो मने शून्य से शुरू करने का मन बना लिया है . दरअसल अखिलेश के पास खोने के लिए कुछ नहीं है . परिवार खानदान की धन संपदा वो त्याग चुके हैं . अगर आपको याद हो तो लखनऊ की माता कैकयी ने सैफई के राजा दसरथ से कही कि हमाए बेटे का का होगा . राजा दसरथ ने बँटवारा कुछ यूँ किया कि देखो कैकयी , धन संपदा बिजनिस और चोरी चकारी से आज तक जो कमाया वो तुमाए बेटे परतीक कू दिया ……. और राजनैतिक पूँजी और विरासत अकलेस कू ……. पर परतीक जादो का पेट उतने से कहाँ भरने वाला था सो उन ने गायत्री प्रसाद प्ररजापती जैसे मन्तरी पाल लिए जो रोजाना दो चार डी रुपिया कमा के दे रहे थे खनन विभाग से …….

उधर राजपाट में हिस्सा बंटाने के लिए 36 ठो चचा भतीजा थे ………  बेचारे अकलेस जादो दोनों पैरों में बाप और चचा चक्की बाँध के राज किये ऊपी में . पर बर्दाश्त की भी हद होती है …….. विद्रोह के अलावा कोई चारा न था …….

इधर मुलायम जादो और सिपाल जादो न मोदी और अमित शाह के सामने हथियार डाल दिये हैं .

मुलायम ने मोदी से कहा ………. याद है ? हम दोनों भाई मने मैं और सिपाल , कहाँ से उठे हैं ? किस फुटपाथ मने सैफई के किस तबेले से उठे थे ? हमाए बाप के पास टूटी साइकिल न होती थी …….हम दोनों भाई पैदल ही ढोर चराया करते थे …….. और देख लो ….हमने सैफई से ढोर चराना शुरू किया और 30 – 40 सालों में पूरा ऊपी चर डाला ……… आज क्या नहीं है हमाए पास ……. अरबों खरबों की बेनामी संपत्ति है ……. स्विस बैंक में अकाउंट है ……. हमाए 36 ठो भाई भतीजा MP , MLA  हैं ……… तुमाए पास क्या है ? सिवाय 5 – 7 कुर्ता पजामा के ……… वो बी साले तुम फिरी में सिलवा लेते हो गांधीनगर से ? क्या हैं तुमाए भाई भतीजे ? एक रासन की दूकान चलाता है दुसरा 7000 की नोकरी करता है ……. भतीजी तुमाई शिक्षा मित्र लगी है गुजरात में ? अबे हमसे सीखे होते तो आज शिक्षा मंत्री होती सेण्टर में ……..

क्या है तुमाए पास ?

मोदी ने कहा ……. भोसड़ी के ……. मेरे पास इनकम टैक्स deptt है …….. CBI है , Enforcement directorate है , CBDT है , DRI है …….. और साथ में CRPF भी है ……… तिहाड़ जेल है …….

मुलायम बोले , मोदी भाई मैं तो मजाक कर रिया था …….. ये सीबीआई और IT वालों का नाम ले के काहे डराते हो …….. मेरे भाई तुम जहां कहोगे मेरा भाई सिपाल साइन कर देगा ……… बना लो यार तुम्ही बनाओ सरकार इस बार ऊपी में …….

उधर अकलेस कहता है …….. मैं मोदी को अपने हाथ पे नहीं लिखने दूंगा की मेरा बाप और चाचा चोर है …… मैं इन दोनों को GPL मार के पालटी से निकाल दूंगा या खुद निकल जाउंगा ……… सच ये है की अकलेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है ……. धन संपदा वो प्रतीक जादो को दे चुके हैं …….. ले दे के राजनैतिक विरासत है जिसपे सिपाल कब्जा जमाये बैठे हैं ……. कल शाम अखिलेश ने 403 सीटों पे अपने प्रत्याशी घोषित कर अंतिम सन्देश दे दिया है …….. सिपाल जादो की लिस्ट में 181 सीट अतीक और मुख्तार अंसारी जैसे चोर बदमाश डाकू माफिया को दी गयी है ……… अखिलेश की ये बगावत बता रही है कि उन्होंने सब कुछ zero से शुरू करने का मन बना लिया है ……. पार्टी टूटती है टूट जाए ……ख़तम होती है हो जाए ……. नए सिरे से शुरू करेंगे …… इंदिरा गाँधी ने भी तो ऐसा ही किया था कभी … इन्डिकेट ले के अलग हो गयी , सिंडिकेट ख़तम हो गया ……. भोटर सब इंदिरा के पास आ गया …….. पार्टी उसकी जिसके साथ भोटर …….

ये चुनाव तो सपा के लिए ख़तम है ……… अब देखते हैं  17 के बाद किसके पास क्या बचता है ………

शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर

बहुत साल पहले की बात है ।
मैं और धर्म पत्नी …… हम लोग लखनऊ के चारबाग स्टेशन से बाहर निकल रहे थे ।
जैसा कि अक्सर होता है । स्टेशन से बाहर आते यात्रियों को Auto rikshaw और Taxi वाले टोक के पूछ लेते हैं …… Auto Rikshaw Sir ?
एक दो को तो मैंने बर्दाश्त किया । फिर जब तीसरा आया तो उसे मैंने बड़ी बेरहमी से झिड़क दिया ।
हम थोड़ा आगे बढे । तो इन्होने पूछा ……. इतनी जल्दी नाराज क्यों हो जाते हो ?
Disturb करते हैं साले ……..
रात के 11 बजे ये आदमी यहाँ रेलवे स्टेशन पे सवारी जोह रहा है ।
कायदन इसे इस समय अपने बीबी बच्चों के पास होना चाहिए ।
फिर भी , उनका पेट पालने के लिए , उन्हें एक बेहतर जीवन देने के लिए ……. ये आदमी रात 11 बजे सड़क पे है । कितनी हाड़ तोड़ मेहनत कर रहा है । कम से कम भीख तो नहीं मांग रहा । चोरी चकारी तो नहीं कर रहा । crime तो नहीं कर रहा । इज्ज़त से रोज़ी कमा रहा है ।
आपको तो appreciate करना चाहिए उसे ।
यकीन मानिए ……. बात मेरे दिल को छू गयी । और इस एक घटना ने मेरे जीवन का पूरा नज़रिया ही बदल दिया । और वो दिन और आज का दिन ……. मैं हर मेहनतकश आदमी का मुस्कुरा के स्वागत करता हूँ । अब जब स्टेशन पे रिक्शा वाले टोकते हैं तो मुस्कुरा के उन्हें जवाब देता हूँ …….. हाथ खाली हों तो हाथ भी मिलाता हूँ ।
इसी तरह जब कभी रिक्शा लेना हो तो पहले तो एक झड़प रिक्शे वाले से होना लाज़मी है । 40 नहीं 30 लगते है । और फिर जब गंतव्य तक पहुँचने लगते हैं तो खुद को guilt होने लगता है । और जब रिक्शे वाला सामान उतारता है …… और जब उसके माथे पे चमकती बूँदें देखता हूँ पसीने की ……. तो 30 की जगह 50 ही देता हूँ । ये नियम है …… मेरी जिंदगी का ……. धर्म पत्नी हमेशा पूछती है …… जब 50 ही देने थे …… तो पहले बहस क्यों की ?
नहीं जायज़ तो 30 ही बनते थे ………
फिर 50 क्यों दिए ……. वो तो उसके पसीने ……. उसके श्रम उसके जीवट का सम्मान किया …….
तो ये सम्मान पहले ही कर लेते ……. bargain क्यों किया ।
वो इसलिए …… कि वो मन से 30 लेने के लिए तैयार था …….. पर जब मैंने उसे 50 दिए …… तो जो हलकी सी मुस्कान …… मोनालिज़ा सी ……. वो जो उसके चेहरे पे आती है …… वो बड़ा सुख देती है ।

इसी तरह जब कभी मैं किसी ढाबे या रेस्त्रां में खाना खाता हूँ ……. तो एक point ऐसा आता है …… हमेशा ……. जो मुझे उद्विग्न कर देता है । Rush Hours में जब बहुत से ग्राहक़ हों तो service बड़ा श्रमसाध्य कार्य है । ऊपर से 3 – 4 घंटे लगातार दौड़ते भागते किसी को भोजन परोसना ……. ऐसे में मुझे हमेशा ये guilt हो जाता है ……. कि इस बेचारे ने …… ये जो हमें खाना परोस रहा है ……. इसने खाना खाया ? कब से खडा है ? कितनी भाग दौड़ है ????? एक भूखा आदमी आपको 36 तरह के पकवान खिला रहा है ……. उस समय उसकी खुद की क्या मनोदशा होती होगी ……. ये सवाल मुझे बेहद परेशान कर देते हैं …….. इसलिए मैंने अपने जीवन का ये नियम बना रखा है ……. always leave a very very generous Tip on the Table …….. कई बार तो मैं अपने साथ वाले मित्रों को टोक देता हूँ …… 10 – 20 नहीं ……. Tip कम से कम 50 या 100 ……. कर के देखिये ……. भोजन में जो आनंद आयेगा ……..

ये इतनी लम्बी पोस्ट आज इसलिए लिख मारी कि Youtube पे भ्रमण करते music सुनते आज Brass Band वालों की एक विडियो दिख गयी …… जब देखा सुना ……. महसूस किया ……. तो आज जीवन में 51 बरस बाद समझ आया कि यार ये Band वाले भी इंसान होते हैं …… और इंसान नहीं ….. कलाकार होते हैं भाई …… वरना आज तक तो इन्हें हिकारत से ही देखते आये …… अजीबो गरीब से कपडे पहने ……. बेढंगे से instruments बजाते …… एलियन सी शक्ल वाले लोग ……. पर आज जब उन्हें सुना Youtube पे …… तो अहसास हुआ ……. इंसान है भाई ये भी …… जीते जागते हाड़ मांस के पुतले ……. Sax और trumpets पे धुनें बजाते …….
दुनिया हमें वैसी ही दीखती है जैसी हमारी अंतर्दृष्टि होती है ।
ये दुनिया बेहद खूबसूरत है ……. अंतर्दृष्टि पैदा कीजिये ।

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर