जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती हैं ।

देश में सिखों के चुटकुले बड़े चाव से सुने सुनाये जाते हैं ।
हंसी मज़ाक और मखौल के पात्र रहे हैं सिख इस देश में ।
कहा जाता है कि सिखों का दिमाग दोपहर 12 बजे खराब हो जाता है ।

मिति 8 पौष ……. चमकौर साहिब …… वर्तमान पंजाब का फतेहगढ़ साहिब जिला ……..
दो दिन पहले यानी 6 पौष , सिखी के संस्थापक दशम् गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने आनंद पुर साहब का किला खाली कर दिया ।
उनके साथ उनका पूरा परिवार मने 4 बेटे , माता गूजरी ……… और लगभग 40 सिख योद्धा थे ।
आनंदपुर साहिब से कुछ मील की दूरी पे किन्ही कारणों से परिवार उनसे बिछुड़ गया ।
दोनों बड़े बेटे 17 वर्षीय अजीत सिंह जी और 14 वर्षीय जूझार सिंह जी उनके साथ रह गए और दोनों छोटे साहिबजादे 8 वर्षीय जोरावर सिंह और 6 वर्षीय फ़तेह सिंह जी माता गूजरी के साथ रह गए ।
जिस स्थान पे परिवार अलग हुआ आज वहाँ गुरुद्वारा परिवार विछोड़ा साहिब स्थापित हैं ……..

वो रात गुरु साहब ने रोपड़ के पास कोटला निहंग खां के पास गुजारी ।
माता गूजरी दोनों छोटे साहिबजादों के साथ कुम्भे मश्की की झुग्गी में रहीं ।

अगले दिन यानि 7 पौष ……. गुरु साहिब जी चमकौर साहिब पहुंचे …….
माता गूजरी और दोनों छोटे बच्चों को गंगू अपने साथ अपने गाँव ले गया ।

अगले दिन सुबह ……. यानि पूस माह की 8 तारीख को चमकौर साहब का ऐतीहासिक युद्ध शुरू हुआ । गुरु साहब के साथ दोनों साहिबजादे और लगभग 40 सिख योद्धा थे । उधर मुग़लों की विशाल सेना ।
दोनों साहिबजादे और सिख योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए ।
शेष बचे सिखों ने गुरु जी को सुरक्षित निकल जाने को कहा …….. बताया जाता है कि जब युद्ध भूमि से निकलने लगे तो एक सिख योद्धा का पैर बड़े साहिबजादे अजित सिंह जी के मृत शरीर से टकराया । सिख ने अपनी कमर में बंधा वस्त्र खोल के उनका मुख ढक दिया ।
गुरु साहब ने जब ये देखा तो बोले …….. वापस उठा लो ये कपड़ा ……..
कफ़न या तो सभी सिखों को ओढाओ नहीं तो इसे भी खुला ही छोड़ दो …….
आखिर बाकी 40 जो शहीद हुए वो भी तो मेरे पुत्र ही हैं ……..

17 साल और 14 साल ……… क्षत्रिय के लिए कहा जाता है कि उसकी आयु ईश्वर के यहाँ से 18 वर्ष ही लिख़ के आती है । युद्ध भूमि में क्षत्रिय 18 बरस से ऊपर जिए तो ऐसे जीवन को धिक्कार ………

गुरु गोबिंद सिंह जी जब 9 साल के थे तो उनके पिता श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी शहीद हो गए ।
सिर्फ 41 वर्ष की आयु में स्वयं गुरु जी शहीद हुए ।
4 बेटे न्योछावर कर दिए देश कौम और धर्म के लिए ………

सही कहते हैं …….. ऐसी कुर्बानियां तो कोई दीवाना पागल ही दे सकता है …….
वो जिसका दिमाग 12 बजे सटक जाता हो ……..
गुरु साहब ने अगर जीवन में आसान रास्ता चुना होता तो कम से कम सिखों को ये चुटकुले तो न सुनने पड़ते ?

मुंबई में छत्रपति शिवा जी महाराज की मूर्ति स्थापित होने जा रही है ।
कुछ लोगों को ये tax payers के पैसे की wastage लगती है ।
भारत ने अपना इतिहास भुला दिया ।
ये जो सप्ताह अभी चल रहा है …… यानि 20 दिसम्बर से ले के 27 दिसम्बर तक …….. इन्ही 7 दिनों में गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था ।
इधर हिन्दुस्तान Christmas के जश्न में डूबा एक दूसरे को बधाइयां दे रहा है ।
एक ज़माना था जब यहाँ पंजाब में इस हफ्ते …….. सब लोग ज़मीन पे सोते थे …….. क्योंकि माता गूजरी ने वो रात , दोनों छोटे साहिबजादों के साथ , नवाब वजीर खां की गिरफ्त में , सरहिन्द के किले में , ठंडी बुर्ज में गुजारी थी …….. ये सप्ताह सिख इतिहास में शोक का सप्ताह होता है …….. पर आज देखता हूँ कि पंजाब समेत पूरा हिन्दुस्तान जश्न में डूबा है ……..
गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस अहसान फरामोश मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया …….. जो कौमें अपना इतिहास अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है ।

सिर्फ 3200 करोड़ में बन रही है मूर्ति शिवा जी की ???????
गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों की भी मूर्तियाँ बननी चाहिए यहाँ आनंदपुर साहिब और फतेहगढ़ साहिब में ……..

Lest we forget ……..

माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले

यूँ तो मैं ये किस्सा कई बार सुना चुका हूँ पर आज फिर मौक़ा है ।
एक बार और सुन लीजिये ।
तो हुआ ये कि बहुत पहले यानि कि कोई हज़ार एक साल पहले की बात है ।
किसी गाँव पे डाकुओं ने धावा बोल दिया । मर्दों को मार दिया ।
औरतों लड़कियों को उठा ले गए ।
महीनों सालों बलात्कार करते रहे । कुछ औरतों को इस बलात्कार से गर्भ ठहर गया ।
उस गर्भ से एक लड़का पैदा हुआ ।
बिन बाप का वो लड़का किसी तरह गाँव में पलने बढ़ने लगा ।
एक दिन , जब वो कुछ सयाना हुआ तो उसने अपनी माँ से पूछा ……. माँ मेरे पिता जी कौन हैं ? वो कहाँ हैं ?
माँ ने कहा ……. बेटा …… बड़ी दर्द भरी कहानी है । सुन पायेगा तू ?
हाँ माँ सुना ……
बेटा …….. तेरे पिता जी इस गाँव के जमींदार थे ।
फिर डाकुओं ने उन्हें मार दिया और मुझे अपने अड्डे पे उठा ले गए ……. कई साल वो डाकुओं का गिरोह मुझसे बलात्कार करता रहा । उसी बलात्कार से तेरा जन्म हुआ ?

माँ ……. वो डाकू कौन थे ? कहाँ है उनका अड्डा ?
बेटा ……. उनका अड्डा उस रेगिस्तान के उस पार है ……..
और फिर वो लड़का निकल पडा अपनी माँ के बलात्कारियों की खोज में …….
महीने दो महीने बाद लौटा तो दाढ़ी बढ़ी हुई थी …… मूछें सफा चट्ट ……. कुर्ता लंबा और पजामा टखनों से ऊपर चढ़ा जाता था ……. अब उसने अपने बाप के कातिलों और माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहना शुरू कर दिया था ……. वो अपनी माँ के बलात्कारियों पे मुसलसल ईमान ले आया था …….

माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले चाहते हैं कि मुंबई में उनके अब्बू की मज़ार हो …… पिता जी की मूर्ती न लगे । माँ के बलात्कारियों के नाम पे अपनी औलादों के नाम रखना उनका धार्मिक अधिकार है ।

 

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

आज से कुछ साल पहले मेरी पैर में fracture हो गया ।
पंजे में ।
पहले तो मैंने उसे मामूली मोच समझ ignore किया । खिलाड़ियों को ऐसी मोच आना आम बात है । जब एक डेढ़ महीने तक भी दर्द न गया तो XRay कराया । Dr ने बताया जनाब कायदे से टूटी हुई है हड्डी …… प्लास्टर लगा डेढ़ महीने …… मने 3 महीने मैं लंगडा के चला । मित्रों ने लंगडा लंगडा कह के बुलाना शुरू कर दिया । फिर वो लंगडा तैमुर लंगडा हो गया ।
धीरे धीरे मेरा नाम ही रख दिया गया तैमूर लंगडा ।
ये वो दिन थे जब हम computer illiterate हुआ करते थे ।
मुझे आज भी वो दिन याद है जब हमने जालंधर में काम करना शुरू किया तो एक सहयोगी ने कहा अपना email देना …… हम दोनों मियाँ बीवी भेड़िया बाँय …… तय हुआ कि अब तो email account बनवाना पडेगा । मुझे आज भी याद है , model town के उस cyber cafe में एक लौंडे ने 30 रु लिए थे email Id बनाने के । और फिर जब मेरी छोटी बहन ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित करना शुरू किया तो उसी ने मेरा blog account और Fb account बनाया । ये वो दिन थे जब मैं ब्लॉग लिख तो लेता था पर उसे copy paste करना नहीं आता था fb पे । वो भी बड़ा मशहूर चुटकुला ही बन गया जब मैंने अपने एक कम्पूटर ज्ञाता मित्र से कहा कि भाई मैं महीना दो महीना तेरे पास लगा ले रिया हूँ ….. तू मेरे कू ये copy paste करना तो सिखा ही दे । तो उसी दौर में मेरे उसी मित्र ने मेरा एक Gmail ac बनाया …….. taimur.lang27@gmail.com
ये कम्बखत आज भी मेरा google ac है ।
ये तो जब ये करीना कपूर के बच्चे के नाम पे चिहाड़ मची तो मुझे मामले की गंभीरता का अहसास हुआ । मुद्दे की बात ये कि इस से पहले आज तक न मुझे खुद कभी अहसास हुआ और न मैंने कभी खुद सोचा कि मेरे नाम के साथ …… चाहे मज़ाक में ही सही ……. इतने भयानक कातिल का नाम क्यों जुड़ा है ?
सच बताऊँ ?
हालांकि मैं खुद को पढ़ा लिखा जागरूक जाग्रत व्यक्ति मानता हूँ पर सच ये है कि मुझे तैमूर लंग और ऐसे ही हज़ारों कातिलों के बारे में कोई जानकारी है ही नहीं …….
दोष किसका है ?
हमारे education system ने secularism के चक्कर में इन इस्लामिक कातिलों की करतूत कभी हमारे सामने आने ही नहीं दी गयी । history को dilute कर दिया गया । अकबर महान हो गए । औरग्ज़ेब सूफी संत ……. गजनी गोरी महान योद्धा …… और बाकी सब सेक्युलर इतिहासकारों की बाजीगरी जादूगरी में गायब कर दिए गए ।

Dr राजीव भाई ( लन्दन ) ने सवाल उठाया …….. हॉलीवुड में Holocaust पे और 2nd WW पे इतनी फिल्में क्यों बनती हैं ……. इसलिए बनती हैं कि आत्मा को झकझोरते रहे । Jews Hitler को कभी मरने नहीं देंगे । कुछ ज़ख्म ऐसे होने चाहिए कि कभी न भरें …….. हिन्दुओं ने वो तमाम क़त्लेआम वो तमाम अत्याचार भुला दिए जो उनपे हुए 1400 साल तक …….. हिन्दू भूल गए …….
भूल गए तैमूर , चंगेज़ खां , गजनी , गोरी और बाबर हुमायूं अकबर औरंगजेब को ……. भूल गए चित्तौड़ के जौहर को …….

कुछ ज़ख्म कभी भरने नहीं चाहिए ।

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक:
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कुछ वर्ष पहले की बात है। एक साधारण पृष्ठभूमि का नवयुवक बिहार के सुदूर उत्तर-पूर्वी छोर से दिल्ली आ रहा था ट्रेन से। दिल्ली में रहते हुए, वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता था।
ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागती जा रही थी। ट्रेन के अंदर सब कुछ सामान्य-सा ही चल रहा था। सभी यात्री अपनी ही धुन में खोये हुए थे। पर तभी अचानक से नवयुवक चौंका..!!

नवयुवक ने देखा कि उसके डब्बे में दरवाजे के पास एक 20-22 साल की लड़की धीमे-धीमे सुबक रही थी!! एक लोफ़र-सा दिखने वाला लड़का सम्भवतः उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा था। पर लड़की थी कि रोये जा रही थी।
यह देख नवयुवक चौकन्ना हो उठा..!! उसे लग गया कि हो न हो, कुछ तो गड़बड़ है। वह एकदम से उस लड़की के पास गया और सबसे पहले तो उस लोफ़र से लड़के को वहाँ से भगाया। फिर उस लड़की से तमाम जानकारियाँ ली।

पता चला कि वह लड़की बिहार के बेगुसराय से थी। किसी बात पर अपने पिता की डाँट से दुःखी हो, घर से भाग कर वह भी इसी ट्रेन में सवार हो गयी थी, और वह भी बेटिकट।
सब जानने-समझने के बाद नवयुवक ने उस लड़की को भरोसा दिलाया और सुरक्षित उसे अपने पास बिठा लिया। लड़की को भी तब तक अंदाज़ा हो गया था कि यह नवयुवक एक भलामानुष इंसान है।

तब तक ट्रेन अपनी रफ़्तार से इलाहाबाद को पार कर चुकी थी। पर अभी इस कहानी का अंत यही नहीं होना था। अभी तो कहानी में एक और ट्विस्ट आना था..!! यह तो महज़ इंटरवल था।

नवयुवक ने दोबारा से नोटिस किया कि उसी डब्बे में एक और छोटी-सी, संभवतः 15-16 साल की, लड़की भी अकेले सफ़र कर रही थी। हे भगवान यह क्या..?? इस छोटी-सी लड़की की आँखों से भी गँगा-जमुना बही जा रही थीं निर्बाध..!!

अब नवयुवक के ललाट पर सिलवटें पड़नी शुरू हो गयी थीं। पर फिर भी वह नवयुवक इस छोटी-सी लड़की के पास जाने से खुद को रोक न सका। पूछताछ की, तो पता चला कि यह दूसरी लड़की इलाहाबाद से थी।

अपनी सौतेली माँ के निरंतर मारपीट से परेशान होकर और पिता की बेरुखी के चलते यह भी अपने बाबुल का घर असमय ही छोड़ चुकी थी!!
पर यह छोटी-सी लड़की अब तय कर चुकी थी कि चाहे जान चली जाए, पर वापस अपने घर नहीं जाना। नवयुवक पड़ा भारी फेरे में ! खुद किसी तरह दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर पा रहा था, ऊपर से ये दो-दो असहाय लड़कियाँ बिन बुलाये मेहमान की तरह ट्रेन में मिल गयीं थीं और उस पर तुर्रा यह कि दोनों की दोनों अपने-अपने घरों से भागी हुई!! अब भलामानुष करे तो क्या करे??
पर जहाँ चाह वहाँ राह। अगर विपरीत परिस्थितियों में आप न घबराएँ तथा आपके इरादें दृढ़ हों और नेकनीयत वाले हों, तो फिर ईश्वर भी साक्षात् आपकी मदद करते हैं। सौभाग्य से उसी डब्बे में हरियाणा का एक मारवाड़ी परिवार भी यात्रा कर रहा था। अब तक के सफ़र के दौरान नवयुवक तथा मारवाड़ी परिवार एक-दूसरे से थोड़े खुल से गए थे।

नवयुवक ने मारवाड़ी परिवार को सारी व्यथा समझायी। दोनों मामलों को भलीभाँति समझने के बाद, उदार मारवाड़ी परिवार उन दोनों में से छोटी लड़की को अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया, क्योंकि वह अपने पिता के घर इलाहबाद किसी कीमत पर नहीं जाना चाहती थी।

छोटी लड़की भी मारवाड़ी परिवार के साथ जाने को तैयार हो गयी। तब नवयुवक ने एक आवश्यक शर्त रखी कि भई, मारवाड़ी परिवार उस लड़की को अवश्य पढ़ायेगा तथा साथ ही साथ नियमित अंतराल पर फ़ोन द्वारा उसकी बात उस छोटी लड़की से करायेगा भी, ताकि वह आश्वस्त हो सके कि लड़की सुरक्षित है।

मारवाड़ी परिवार भी सभ्य, उदारवादी व भला परिवार था। अतः उन लोगों ने अपनी सहमति दे दी तथा नवयुवक को आश्वस्त किया कि वे उस छोटी लड़की को अपनी बेटी की तरह रखेंगे। तब नवयुवक ने छोटी लड़की को मारवाड़ी परिवार के हाथों सौंप दिया। साथ ही उस छोटी लड़की को अपना फ़ोन नंबर भी दिया ताकि उसे जब भी जरुरत लगे, वह उस से संपर्क कर सके।
अब बच गयी 20-22 साल वाली बेगुसराय वाली पहली लड़की, जो अपने पिता की डाँट बर्दाश्त न कर सकी और बिना कुछ सोचे, घर से निकल भागी थी! वह तो उसकी किस्मत अच्छी थी कि गलत हाथों में जाते-जाते, वह सुरक्षित हाथों में आ गयी थी।

इस तमाम आपाधापी में ट्रेन कब दिल्ली पहुँच गयी, कुछ पता ही न चला। तनावग्रस्त नवयुवक डरते-डरते, इस लड़की को दिल्ली स्थित किराये के अपने साधारण से तंग कमरे पे ले आया! नवयुवक डर इसलिए रहा था कि कहीं लड़की बीच रास्ते रोने-धोने न लगे, तो फिर लेनी के देने पड़ जाते।

कमरे पर पहुँच कर नवयुवक ने सबसे पहले पड़ोस की एक परिचित महिला को बुलाया, सारी बात समझायी। फिर महिला से निवेदन किया कि जब तक लड़की यहाँ है, कृपया आप साथ रहिये। खुद के कम पैसों में से ही नवयुवक ने लड़की को नये कपड़े दिलवाए , क्योंकि लड़की के शरीर पर चढ़े कपड़े जर्जर अवस्था में थे। जब तक लड़की उसके कमरे में रही, नवयुवक बगल में अपने दोस्त के यहाँ रहा।

अब नवयुवक ने फौरन से लड़की से उसके पिता का फ़ोन नम्बर ले, उसके पिता से संपर्क साधा और बताया कि उनकी लड़की उसके पास पूरी तरह सुरक्षित यहाँ दिल्ली में है। फौरन आएं और अपनी बेटी को ले जाएँ। साथ ही समझाया भी कि भविष्य में अपनी लड़की को डाँटना मत, वरन प्यार से कोई बात समझाना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी बैठ के रोते रहोगे।
लड़की के पिता को तो इधर लगा जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मिल गयी हो!! तब तक रोते-रोते लड़की के माता-पिता की हालत खराब हो गयी थी। परन्तु अब शब्द नहीं थे लड़की के पिता के पास कि किन शब्दों में वह नवयुवक के प्रति आभार प्रकट करें..!!

दो दिनों में लड़की के पिता उसको सुरक्षित लेकर वापस गए। कुछ दिनों बाद, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उस लड़की ने भाई से भी बढ़कर फ़र्ज़ निभाने वाले उस नवयुवक को राखी भेजी!!
छोटी लड़की जिसे वो मारवाड़ी परिवार ले गया था आज भी उनके पास रहती है . उसे भी उसके माँ बाप के पास वापस भेजने के प्रयास किये गए पर उन्होंने उसे वापस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई .

आगे चलकर यही भलामानुष नवयुवक तमाम झंझावातों को झेलता हुआ, महज़ चन्द वर्ष पहले, बिना किसी कोचिंग की सहायता के और वह भी हिंदी माध्यम से तैयारी कर, उत्तर प्रदेश काडर का आईपीएस (IPS) बना!! आजकल पूर्वी उत्तर प्रदेश में एडीशनल SP के पद पे कार्य रत हैं . आखिर हाड़तोड़ मेहनत और नेकनीयती का फल तो मिलना ही था। मुझे फ़ख्र है अपने इस दोस्त पर। इन्ही लोगों के चलते, आज भी इंसानियत पर भरोसा कायम है।

– कुमार प्रियांक

मूर्ती या तो ओरनजेब भाई जान की लगेगी वरना नई लगेगी ।

पृथ्वी राज कपूर की नवासी करीना कपूर ने अपने नवजात बेटे का नाम रख दिया तैमूर ।
फेसबुक पे चिहाड़ मची है । इतने कुख्यात हत्यारे के नाम पे अपने बच्चे का नाम रखता है कोई भला ?

उधर महाराष्ट्र सरकार मुंबई में महाराज छत्रपति शिवाजी की मूर्ति / स्मारक बनवाने जा रही है ……. 3600 करोड़ रु खर्च होंगे ।

टीवी पे चिहाड़ मची है । सुबह से मुहर्रम मनाया जा रहा है । बड़े बड़े दिग्गज धुरंधर इसे tax payers के पैसे का collosal .misuse मने करदाताओं के पैसे की भारी …… भोत भारी मने भोत भोत जादे भारी …… मने विराट दुरुपयोग हो रिया है ।

बात भी सही है …… 500 साल पहले पैदा हुआ और मर मरा गया …… ऐसे आदमी की मूर्ती लगाने की चूतियापंती क्यों कर रहा है देश ?
अबे मूर्ती लगानी है तो भेन मायावती की लगाओ …… उनके गुरु कांशी राम की लगाओ …… भोत करो तो आंबेडकर की लगा दो ……. ये राणा परताप और सिबा जी की क्यों लगाते हो ?
अबे मोतीलाल नेहरू की लगाओ , जवाहर लाल की लगाओ , इंदिरा गाँधी की लगाओ , राजीव गांधी की लगाओ , अबे सोनिया गाँधी की मूर्ती लगाओ ……. ये सेक्युलर लोग हैं ….. ये शिवा जी और राणा प्रताप जैसे third class outdated आदमियों की मूर्ती लगाओगे ? दोनों कम्बखत साम्प्रदायिक आदमी थे …… एक अकबर से लड़ता रहा ता उम्र …… दूसरा औरन्ज़ेब से …… बताओ कित्ता सरीफ लौंडा था अपना औरन्जेब ……. सो सिम्पिल man …… सिम्पिल लिभिंग हाई थिंकिंग …. एंड सो सेक्युलर ??????
टोपी सिल के जीता था …… ऐसे निहायत सरीफ लौंडे से लड़ाई करता था जे सिवा जी ……. और उसकी मूर्ती लगाते हो बे ? ब्लडी कमूनल पीपुल ……. अपने अकललेस भैया को अभी पता चल जाए कि ओरनजेब भाई जान को ऐसे harass किया इस सिबा जी ने तो अबी के अबी गुंडा act और MISA लगा के बंद कर दें और ओरनजेब भाई जान को एक करोड़ मुआवजा …….. लौंडो के लिए 4 flat और नोकरी दे दें अबी के अबी ……. और ये मोदी ….. ये ऐसे कमूनल पीपुल जो देस की गंगा जमुनी तहजीब को डिस्टर्ब कर रेला था …… उसका फोटो लगाता है साला मुंबई में …….
अबे मूर्ती और फोटू लगाना है तो ओरनजेब भाई जान का लगाओ न जो बेचारा विक्टिम था ? बेचारा minorty अल्पसंख्यक …….

अपुन लोग ये सिबा जी की खड़ी निंदा कर रेला है ।
मूर्ती या तो ओरनजेब भाई जान की लगेगी वरना नई लगेगी ।