नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

Ford motors के मालिक Henry Ford निपट अंगूठा टेक अनपढ़ थे । जब वो अपनी सफलता के शिखर पे थे तो एक स्थानीय अखबार ने अपने एक लेख में उनको अनपढ़ लिख दिया । Ford को ये बड़ा नागवार गुजरा और उन्होंने उस अखबार पे मानहानि का मुकद्दमा ठोक दिया ।
सुनवाई शुरू हुई । Ford के वकील ने अखबार पे अपना आरोप दोहराया । आपने Mr Ford को अनपढ़ कहा ? सम्पादक बोला , हाँ कहा ……. और ठीक ही तो कहा …… अनपढ़ ही तो हैं Mr Ford . बुलाओ कटघरे में ……. अभी दो मिनट में सिद्ध कर देंगे कि अनपढ़ हैं ।
Ford कटघरे में आये तो सम्पादक ने उनसे किताबी सामान्य ज्ञान मने GK के कुछ सवाल पूछे । जाहिर सी बात है उनमे से एक का भी जवाब Ford के पास न था । सम्पादक ने जज से कहा …… अब और क्या प्रमाण चाहिए ?
Ford ने जवाब दिया ……. जज साहब ये माना कि मुझे इन सवालों के जवाब नहीं आते । ऐसे भी बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब इन सम्पादक महोदय को नहीं पता होंगे ।
पर मुझे हे पता है कि इन सवालों के जवाब कहाँ मिलेंगे ? कौन देगा इनका जवाब ?किस सवाल को कैसे हल करना है या करवाना है ……. मुझे ये पता है । मैं उन आदमियों को जानता हूँ जिन्हें इन सवालों के जवाब मालूम है । यदि आप आज्ञा दें तो मैं अभी एक मिनट में इन सभी सवालों के जवाब देने वालों की फ़ौज खड़ी कर सकता हूँ ।
मुझे सवालों के जवाब खोजना आता है ।
अपनी जिंदगी का तो शुरू से ही एक फलसफा रहा ।
समस्याओं का रोना मत रोओ । समाधान खोजो ।
Don’t discuss the problems . Find Solutions .
समस्याओं का क्या है ? वो तो लगी रहेंगी ।
सवाल पे focus मत करो । अपनी सारी ऊर्जा उसका हल खोजने में लगाओ ।
एक progressive समाज यही करता है । उस समाज के leaders सवालों और समस्याओं पे अपनी ऊर्जा और समय नष्ट नहीं करते बल्कि समाधान खोजने में करते हैं ।
माना कि नोटबंदी ने सवाल खड़े किये ……. समस्याएं पैदा की ……
8 Nov के बाद से हमारे leaders , हमारी press , हमारे institutions सिर्फ इस से उत्पन्न समस्याओं का रोना रो रहे हैं ……… हाय मर गए …… cash नहीं है ……. नेता और प्रेस सिर्फ और सिर्फ bank और ATM की लाइन में खड़े लोगों के कष्ट दिखा सुना रहे हैं ……. कोई ये नहीं सुझा रहा कि आखिर हल क्या है । समस्या का समाधान क्या है ?
विकल्प क्या हैं ?
cash अगर नहीं है तो कैसे survive करें ?
कैसे काम चलायें ?
cashless या less cash कैसे हुआ जाए ?

TV का पत्रकार लाइन में खड़े आदमी से पूछता है कब से खड़े हो ? कितने दिन से खड़े हो ? कितना कष्ट है ?
मैं पत्रकार होता तो पूछता …….. यहाँ क्यों खड़े हो ?
क्यों चाहिए cash ?
चेक से काम क्यों नहीं करते ?
लाओ अपना फोन दो , मैं सिखाऊँ कैसे करते हैं Net banking और Mobile बैंकिंग ……… cash अगर नहीं है तो विकल्प क्या हैं ? शिक्षा और समाचार माध्यमों को इसपे focus करना चाहिए । leaders को इसपे focus करना चाहिए ।
पर इसके विपरीत वो देश की जनता को ये समझाने में लगे हैं कि हम क्यों खोजें समाधान ?

आखिर ये समाधान हमपे क्यों थोपे जा रहे हैं ?
हम अपने पुराने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ क्यों अपनाएं नयी तकनीक ?
तुम सिर्फ cash दो ……. हमको नहीं चाहिए तुम्हारी नयी तकनीक ……
आज देश की विपक्षी पार्टियां लोगों को भड़का रही हैं …. विद्रोह कर दो ……. दंगा फसाद करो cash के लिए …….. मत होवो cashless या less cash …….. net banking और mobile banking मने समाधान के नुक्सान गिनाये जा रहे हैं ……. खतरे गिनाये जा रहे हैं ……… मोबाइल बैंकिंग को कुछ कम्पनियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया जा रहा है ।

नोट बंदी भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है ……… भविष्य में एक उन्नत भारत का रास्ता इसी नोटबंदी से निकलेगा ……. इसे एक संकट के नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख के इसका समाधान खोजना चाहिए युद्ध स्तर पे ।
नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

समझे Mr चमन चू*या ?

एक चमन चूतिये ने ये पोस्ट लिखी है fb पे ।
***
रिज़र्व बैंक से मेरा सवाल ??

नए नियम के अनुसार में अगर 500 और 1000 के पुराने नोट 5000 से ज्यादा जमा करूँ तो मुझे बैंक मेनेजर को ये जवाब देना होगा कि *अब तक मेने ये पुराने नोट जमा क्यों नही करवाए???*

अगर में कह दूँ कि
खुद पीएम ने कहा है 30 दिसंबर तक जमा करवा सकते हो…..
इसलिये नही करवाए तो क्या बैंक का मेनेजर मेरे इस जवाब से संतुष्ट होगा ???

*एक आम भारतीय नागरिक*

***
ऐ Mr चमन चूतिया …….
RBI तुम्हारी तरह चूतिया नहीं है ।
अगर तुम 8 nov के बाद पहली बार bank में पुराने 1000 और 500 के नोट लाये हो जमा कराने तो बैंक मेनेजर तुमसे कोई सवाल जवाब नहीं करेगा ।
ये सवाल जवाब सिर्फ उनसे होगा जो 8 Nov के बाद अब तक कई बार बैंक में 1000 – 500 के नोट जमा करा चुके हैं ……. जब भी आते हैं तो 49000 रु जमा करा के ( बिना pan card का नंबर लिखाए ) कट लेते हैं ……. ऐसे आदमियों से बैंक मेनेजर पूछेगा ……. भैया ….. ई का रोज रोज पुराने नोट ले के आते हो …….. एक ही बार में *दवा लो अपनी *यया ……. ई रोज रोज चु**ना अच्छी बात नहीं ……… एक दिन तसल्ली से चु*वा लो …….
समझे Mr चमन चूतिया ?

हे मोदी ……. जियो और जीने दो , खाओ और खाने दो

मोदी जी , कायकू बावले हुए जा रिये हो …….
भैन्चो …… न खुद चैन से सोते हो न पब्लिक को सोने देते हो ?
भैन्चो …… जीना हराम कर दिया है लोगों का ……. 18 से 20 घंटे काम करते हो …… खुद को तो नींद आती नहीं ……. दूसरों को तो सोने दो …….
ठीक यही प्रॉब्लम हमारे बाप की थी । न खुद कभी सोया 4 बजे के बाद और न हमको सोने दिया ……. मने सोता हुआ आदमी तो उनसे बर्दाश्त ही न होता था …….
ये सनकी बुड्ढों के साथ यही प्रोब्लम होती है ।
न सोऊँगा न सोने दूंगा ।
न खाउंगा न खाने दूंगा ।
12 बजे सोते हो सुबह 5 बजे उठ जाते हो ।
5 से 6 योग और साढ़े 6 बजे टेबल पे ?
अबे एकाक घंटा आलोम बिलोम कपाल भाति फालतू कर लिया करो …..
7 बजे अफसरों को फून करके पूछते हो disturb तो नहीं किया ?

आधी दुनिया घूम के आ जाते हो फिर भी Jet Lag नहीं होता ?
अबे तुम्हारे बीबी बच्चे नहीं है ……. न सही …… दूसरों के तो हैं ?
कायकू गरीब मार कर रिये हो यार …….
खुद के भाई भतीजे बहन भांजे तो मुफलिसी में जी रहे …….. सगी भतीजी गुजरात में शिक्षा मित्र लगी है सिर्फ 5500 रुपल्ली पे …….. लानत है ऐसे चचा पे …….. हमारे इदर जादो पलिवार की भतीजी होती तो अब तक राज्यसभा में होती या फिर किसी गायत्री परसाद से डेली का 5 – 7 करोड़ का हिसाब लेती ……. हवाई जहाज मने राज्य सरकार के पिलेन से जूता चप्पल सैंडिल और पर्स मंगवाती …….. उसका बी 200 करोड़ का बँगला होता अहमदाबाद सूरत में ……. अपने भी फ़कीर रहे पूरे खानदान को भी फ़कीर बना के रख छोड़े ?
और ये कायकू मरे जा रहे हो ……. डाकुओं का देश है ये …….. अबे किस किस अंगुलिमाल को संत बनाओगे ????? और सुनो ……. सिर्फ तुम्हारे राम बन जाने से मुल्क में राम राज नहीं आ जाएगा ……. जिस देश में सब रावण हों वहाँ अकेला राम क्या करेगा …….. और रावणों के मुल्क में राम राज लाने की ऐसी ज़रूरत भी क्या है ?
जहां हर आदमी रावण का उपासक हो वहाँ राम राज भला क्यों ?
अबे तुमने अकेले देस सुधारने का ठेका लिया है का ?
अकेले पिले पड़े हो ? किस किस को सुधारोगे ? किस किस का जिम्मा लोगे ……
सब तो उन्ही से मिले हैं …… उन्हीं के गुलाम ……. उन्हीं की चाकरी कर रहे …… क्या bank वाले और क्या RBI वाले ? क्या मजदूर क्या गरीब …… सब उन्हीं के लिए तो लाइन में लगे खड़े ……. पहले उनके नोट बदलवाते रहे सिर्फ 300 रु दिहाड़ी पे ……. फिर उनके ढाई लाख अपने खाते में डलवा दिए …… और अब रोजाना ATM के सामने खड़े निकलवा के दे रहे हैं …….
किसके लिए मरे जा रहे हो मोदी ?
इन्ही बिके हुए लोगों के लिए …….
अबे तुम क्या इकलौते PM हुए हो इस देस के ?
तुमसे पहले बीसियों हुए यार …… देखा किसी को इस तरह चिहाड़ मचाते ? अबे सब खाए खेले मस्त रहे …….. और एक तुम हो कि मरे जा रहे हो ……
अबे जैसे सबने आसान रास्ता अपनाया ……. तुम भी अपनाओ ……. जाओ कुछ दिन ……. गोवा टहल आओ ……. कोई सहेली बनाओ ……. जाओ फिजी बाली …… कहीं होनोलुलु में धूप सेक आओ …… बिटामिन D मिलता है सरीर को ……. बहुत दिन धूप न लगे तो हड्डी कमजोर पड़ जाती बतावें …… देखते नही हो अपने राहुल बाबा की हड्डी केतनी मजबूत है …… अबे जाओ तनिक मालिस ओलिस करवाय आओ तुम बी ……. एकाक ठो कविता कहानी लिखना उहाँ ……. इहाँ साले इन छुटभैये नेताओं के साथ अन्ताक्सरी खेल रहे रहे हो ?
जाओ उहाँ …… स्विट्ज़र लैंड ……. एकाक खाता तुम भी खुलवा ल्यो …… बुढापा चैन से कटेगा …….
हे मोदी ……. जियो और जीने दो
खाओ और खाने दो

पिछले 70 साल बनाम अगले 1000 दिन

आज से कुछ एक साल पहले जब कि रतन टाटा ने दिल्ली के Auto Expo में अपनी महत्वाकांक्षी कार Nano की पहली झलक दिखाई …… इस वादे के साथ कि ये आम आदमी की कार होगी , वो जो bike और skooter पे अपनी बीबी और दो बच्चों के साथ शहर में चलता है …… उस आम आदमी के लिए सिर्फ एक लाख रु में कार बनाने का सपना देखा था रतन टाटा ने …….
तब देश में एक नए किस्म की बहस छिड़ गयी थी …… क्या भारत तैयार है इस transformation के लिए …… क्या भारत के शहर कसबे और हमारी सडकें तैयार हैं इसके लिए कि भारत का आम आदमी भी कार में चले ? किस सड़क पे चलेंगी इतनी गाड़ियां और car parking के लिए कहाँ से आएगी इतनी जगह …….
कुछ लोगों ने इस संभावित समस्या का सकारात्मक पहलू देखा और लिखा कि चलो इसी Nano के बहाने हमारे नीति नियंता और हमारे town planners और हमारी सरकार को सुध आएगी और वो कम से कम अब तो सड़कों पे ध्यान देंगे …… अब तो हम 16 lane के express ways बनाने की सोचेंगे ……. Nano की वजह से जो भीड़ सड़कों पे बढ़ेगी वही हमें अपना infrastructure सुधारने के लिए प्रेरित करेगी । खैर Nano ने कितना असर डाला ये तो मैं नहीं कह सकता पर अभी जो नोटबंदी हुई उसने भी ऐसे ही मिलते जुलते सवाल खड़े कर दिए हैं ।
नोटबंदी से उत्पन्न cash crunch ने cashless और Less Cash की बहस छेड़ दी ।
सवाल पूछे जाने लगे कि क्या भारत cashless बनने के लिए तैयार है ।
यदि आप मोदी जी की कार्य शैली से परिचित हों तो ये जानते होंगे कि मोदी जी जब कोई project हाथ में लेते हैं तो उसके लिए 1000 दिन में लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प लेते हैं ।
मोदी जी ने आते ही मने पद गृहण करते ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी । 24 करोड़ परिवारों के जन धन खाते , पूरे देश में OFC मने Optical Fibre Cable का जाल बिछा के पूरे देश के दूर दराज के गाँवों तक Net connectivity पहुंचाने का लक्ष्य ……. ये सारे काम इस cashless समाज की प्राप्ति के लिए ही शुरू किये गए थे ।
अब इस नोटबंदी से एक ही तीर से कई निशाने साधे गए हैं ।
नोटबंदी दो नंबर का धंदा बंद कर सारा व्यापार एक नंबर में करने की दिशा में पहला कदम है ।
cash less और less cash देश के आम आदमी को सारा विनिमय और व्यापार बैंकिंग व्यवस्था के तहत काम करने को प्रेरित / मजबूर करेगा ।
इस से देश का एक बहुत बड़ा वर्ग Tax payer बनेगा और सारा व्यापार एक नम्बर में होने के कारण सरकार के revenue में बेतहाशा वृद्धि होगी जिस से विकास कार्य होंगे ।
cash less होने के लिए हर व्यक्ति के पास एक bank account , debit card , smart fon , और एक reliable High speed Net connection होना आवश्यक है । सरकार निश्चित रूप से अगले कुछ महीनों/सालों में Banking व्यवस्था और Net connectivity के लिए युद्ध स्तर पे कार्य करेगी । मुकेश अम्बानी ने Jio का 4g launch कर इसकी शुरुआत कर दी है और जल्दी ही अन्य सभी कम्पनियों को भी सस्ते 4G के साथ मैदान में उतरना ही होगा । आज सरकार ने cash में लेन देन करने वालों पे 2% surcharge की घोषणा कर दी है । जल्दी ही plastic money और mobile banking प्रयोग करने पे incentives की घोषणाएं शुरू हो जायेंगी । आज जो mobile apps हर transaction पे पैसे काट रहे है बहुत जल्दी ये बीते जमाने की बात हो जायेगी । वो दिन दूर नहीं जब नगद लेन देन महँगा और plastic money और mobile banking सस्ती पड़ने लगेगी ।
मोदी सरकार निकट भविष्य में आम आदमी मने ठेले पे सब्जी बेचने वालों को , रिक्शा चलाने वालों को और सड़क किनारे बैठे मोची को इनकमTax payer बना देगी ……..

नोटबंदी इस दिशा में उठाया गया पहला कदम है ।
भारत बदल रहा है …….
और अगले 1000 दिन में तो भारत इतना बदल जाएगा कि आप शायद पहचान ही न पाएं ।
जितना काम इस देश में पिछले 70 साल में हुआ उस से ज़्यादा अगले 1000 दिन में होगा ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

बड़ी चर्चा है कि नोटबंदी की वजह से ये GDP गिर जायेगी ।
अपने सरदार मौन मोहन सिंह जी उस दिन संसद में उवाच रहे थे कि दरअसल ये नोटबंदी मोदी सरकार की एक सुनियोजित लूट है जिसमे देस की GDP 2% तक गिर जायेगी । वैसे सरदार जी ये बताने से चूक गए कि उनकी सरकार ने अटल जी से विरासत में मिली 8% से ऊपर की GDP को किस सुनियोजित लूट के तहत 4 % तक ले आये ।
बहरहाल ……. नोट बंदी से GDP गिरने की संभावना तो पैदा हो ही गयी है ।
तो मैंने एक वामपंथी मित्र से सवाल किया कि मेरे दोनों लौंडे इस महीने अगर नोटबंदी के कारण 1800 की jeans और 3500 रु का Nike Reebock का जूता न खरीदें तो मेरे 5300 रु बच गए …… मैं सीधे सीधे 5300 रु से अमीर हो गया तो मुल्क कैसे गरीब हो गया ……. मेरे कू ये समझाओ ……
मेरे उन झामपंथी मित्र ने कुछ यूँ समझाया कि हे दद्दे ……. ये GDP दरअसल बड़ी कुत्ती चीज़ है ……. इसको कुछ इस तरह से समझो कि मान लो ये पेड़ जिसके नीचे तुम बैठे हो …… ये देखो कितनी शीतल छाया है इसकी …… कितना सुख देता है …… पेड़ से ही जल है – जीवन है ।
पर ये पेड़ GDP के किसी काम का नहीं । ये हराभरा लहलहाता पेड़ जो दिन रात बढ़ रहा है , फल फूल रहा है देश की GDP में कोई वृद्धि नहीं कर रहा ।
GDP तो भैया तब बढ़ेगी जब इसे काट दोगे । ये कटेगा तो सबसे पहले इस से लकडहारा जो कुल्हाड़ी चलाएगा वो कमाएगा । फिर इसकी छंटाई होगी । पतली लकडियाँ जलावन में चली जायेंगी और मोटी आरा मशीन पे …… इस से आरा मशीन वाला कमाएगा , लकड़ी की टाल वाला कमाएगा ……. कोई trolly वाला कमाएगा …… 4 मजदूर जो लादे उतारेंगे वो कमाएंगे ……. फिर आरे पे चीर के लकड़ी किसी बढई के पास जायेगी तो वो उसका furniture बना के कमाएगा …… फर्नीचर बनेगा तो उसमे फेविकोल कील sunmica लगेगा ……. वार्निश paint होगा ……. फिर उस furniture को कोई दुकानदार बेच के कमाएगा ……. सब लोग मालामाल हो जायेंगे ……. इस तरह देश की GDP बढती है ……. देश की GDP बढाने के लिए इस पेड़ को कुर्बानी तो देनी ही होगी …….

देश तभी बढेगा जब तुमरे लौंडे Lewis की jeans के नीचे reebok का 8500 का जूता पहनेंगे …….. अगर तुम साले देश द्रोही …….. शर्म नहीं आती ……. लौंडो को रोजाना मने करते हो कि jeans और जूते पे फालतू खर्चा न किया करें ।
यदि आप सच्चे देश भक्त हैं तो अपनी बीबी को रेस्ट दीजिये और खाना महंगे Restaurant से मंगा के खाइये ।

GDP बड़ी कुत्ती चीज़ है ।

मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।

मोदी जी एक किस्सा सुनाया करते थे 2014 से पहले ।
तब जबकि वो गुजरात के CM थे ।
गुजरात सरकार हर वर्ष एक नया कार्यक्रम हाथ में ले के उसपे युद्ध स्तर पे काम करती थी ।
तो एक साल गुजरात ने निर्णय लिया कि इस साल हम शहरी विकास वर्ष मनाएंगे ।
मने गुजरात के शहरों का काया कल्प करेंगे ।
municipal corporations को सुधारेंगे । शहर साफ़ करेंगे । कूदा कचरा निस्तारण ….. यातायात ….. अतिक्रमण हटायेंगे ।
सरकारी घोषणा हो गयी । notification जारी हो गयी ……. करीब 15 दिन बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भागे भागे आये । बोले हुज़ूर गलती हो गयी …….
क्यों ? क्या हुआ ?
हुज़ूर इस साल के अंत में पूरे गुजरात में corporations और स्थानीय निकायों के चुनाव हैं ।
आप सड़कों से अतिक्रमण हटाने जा रहे हैं ……. पूरे प्रदेश में हज़ारों नहीं लाखों लोग प्रभावित होंगे …… विस्थापित होंगे ……. सालों से सड़कों पे काबिज लोग जब हटाये जायेंगे तो बवाल करेंगे …… उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी ……. वोटर नाराज होगा ……. नगर निगम चुनाव में सूपड़ा साफ़ हो जाएगा …….
मोदी जी ने कहा , ये सब तो पहले सोचना था । अब तो तीर निकल गया तरकश से …… अब जाओ और public को समझाओ कि यदि सड़क चौड़ी होगी तो आपका ही फायदा है …….
नगर साफ़ सुथरे होंगे तो आपका ही फायदा है ……..
मोदी संकट को अवसर में बदलने में माहिर हैं ।
उन्होंने जी जान लगा दी । सडकों से अतिक्रमण हटाये गए । अकेले अहमदाबाद में ही सड़कों पे बने सैकड़ों मंदिर मस्जिद पीर मजार तोड़े गए ……. बहुत हाय तौबा मची …… सडकें खाली कराई गयी …… शहरों में सैकड़ों Fly over बनने शुरू हुए ……. द्रुत यातायात के लिए rapid transport lane बनी ……. 6 महीने में यातायात दुरुस्त हो गया ……. शहरियों को पहली बार अहसास हुआ कि हमारे शहर की सड़क इतनी चौड़ी …. साल बीतते बीतते शहर चम् चम् चमकने लगे …….
जनता बेवक़ूफ़ नहीं ……. अपना भला बुरा समझती है ……..
उस साल हुए स्थानीय निकायों और कारपोरेशन चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया …… खाता तक न खुला …….

जब से नोट बंदी हुई उसके बाद जितने भी चुनाव या उपचुनाव हुए देश भर में ……. भाजपा जीती है ।
आज चंडीगढ़ भी जीत लिया ।
जनता अपना भला बुरा सब जानती है ।
मोदी जी संकट को अवसर में बदलना बखूबी जानते हैं ।
पंजाब की तस्वीर धीरे धीरे साफ़ हो रही है ।

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..

एकदा जम्बू द्वीपे भारत खंडे बंगाल राज्ये एक औरत रहती थी ।
एक दिन एक गुंडा बदमाश बलात्कारी ने उसको पकड़ लिया और लगा उसका बलात्कार करने ।
और वो लगी हाय हाय करने …… ohh my god ……
उसकी ये हाय तौबा चीखो पुकार मेरे जैसे , दूसरों के फटे में टांग अड़ाने वाले ने सुनी …… और उसने भैया ….. उठाया जो लट्ठ ….. और दौड़ा उस बेचारी अबला को बचाने ……
वहाँ पहुँच उस बलात्कारी को उसने दिया जो एक लट्ठ जमा के ……. तो वो तो लोट गया ……. हाय मार डाला रे …… तब तक वो औरत उठी और उसने उस लट्ठ वाले कू धर पकड़ा कालर से …… तू कौन बे ? कायकू मारा तूने इस बेचारे कू …… सारा मजा खराब कर दिया …….
और फिर वो उस बलात्कारी कि सेवा टहल में लग गयी …… आपको चोट तो नहीं आई ? सतियानास जाए इस नासपीटे का ……. इसने आपको डिस्टर्ब किया …….
पिलिज continue ……
तू चल बे …… फूट यहाँ से …… हवा आने दे …… पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते है ……
Sir ….. You please continue ……..

तो मितरों ……. बंगाल के हिन्दू मोमता दी के राज में मजा ले रहे हैं ……लेने दो …..
वो हाय हाय नहीं …… आह आह कर रहे हैं ……. करने दो …….

भीलवाड़ा के मोमिनों ने सिर उठाया ……. कल हिन्दुओं ने पटक के पेल दिया ……
बंगाल के हिन्दुओं को दर्द होगा तो खुद उठेंगे ।
God helps those who help themselves …….
जिसकी फटेगी उसको ही उठ के खुद की सिलनी पड़ेगी …….
हम कब तक सिलेंगे ?

बंगाल के हिन्दुओं …… खुद ही खडा होना पडेगा ……..