17 में UP में जल प्रलय होगी

मुझे 2014 के लोकसभा चुनावों की वो शाम अब भी याद है ।
देश के मूर्धन्य पत्रकारों का ABP news के स्टूडियो में जमावड़ा था । वो पत्रकार जिनका “धंदा ” ही पत्रकारिता है …… वो जो कि पेशेवर पत्रकार हैं …… वो जिनके घरों के चूल्हे पत्रकारिता से जलते हैं ……. वो जो ये दावे करते हैं कि वो चुनाव के दौरान देश भर में घूमे ……..वो मूर्धन्य पत्रकार उस दिन उस स्टूडियो में जमा थे । अगली सुबह काउंटिंग होने वाली थी ……. किशोर अजवाणी प्रोग्राम कर रहे थे । डेढ़ दो घंटे के तमाशे के बाद अंतिम टिप्पणी के रूप में किशोर ने सभी मूर्धन्य पत्रकारों से सवाल पूछा । कितनी सीटें ?
किसी भी पत्रकार ने भाजपा या NDA को पूर्ण बहुमत न दिया । सब भाजपा को 180 से 200 के बीच सीटें दे रहे थे । NDA को 220 के आसपास ……. एक गंजे ने तो भाजपा को सिर्फ 160 से 180 सीटें ही दीं । ये वो पत्रकार थे जिन्होंने जीवन भर चुनाव ही कवर किये हैं । जो देश की नब्ज पहचानने का दावा करते हैं ।
उधर हम लोग जो सिर्फ अपनी सहज बुद्धि से गाँव गिरांव में थोड़ा बहुत घूम फिर के आकलन कर रहे थे …… हम लोग भाजपा को अकेले ही पूर्ण बहुमत दे रहे थे । मुझे याद है , पंजाब में जमीनी हकीकत और हवा का रुख देख मैंने AAP को 3 से 5 सीट दी थी । UP में गाजीपुर के मतदान से कोई 15 दिन पहले मैंने लिखा था …….. लगता है कि हम गाजीपुर भी जीत रहे हैं ( गाजीपुर भाजपा के लिए सबसे कठिन सीट है UP में ) ……… और अगर हम गाजीपुर जीत गए तो मान लेना कि जल प्रलय होगी …… मने सब बह जाएगा …… कुछ नहीं बचेगा ……. मेरे एक मित्र जो गाजीपुर के ही हैं और हैदराबाद के एक हिंदी अखबार के सह सम्पादक हैं , उन्होंने पूछा कि क्या राम मंदिर से भी ज़्यादा हवा है ?मैंने जवाब दिया , हवा नहीं लहर नहीं सुनामी की बात कीजिये …….
हमको तो कोई लहर नहीं दीखती …….
पेशेवर पत्रकारों को लहर क्यों नहीं दिखी ? क्या वाकई वो हवा का रुख पहचान नहीं पाए ?
ऐसा नहीं है ……. वो खूब जानते थे कि मोदी की सुनामी सब बहा ले गयी ……. पर इसके बावजूद वो सत्य से मुह क्यों चुरा रहे थे । इसके अलावा वो ये झूठ बोल के अपनी साख पे बट्टा क्यों लगा रहे थे । जमीनी आकलन में इतनी बड़ी चूक कर ये पत्रकार अपनी राजनैतिक सूझबूझ और समझ पे सवाल खडा क्यों कर रहे थे ? साख , इज्ज़त , मान सम्मान की चिंता शरीफ लोग करते हैं …… वेश्या की क्या इज्ज़त क्या मान सम्मान ?
पर भैया , मुझे अपनी इज्ज़त बहुत प्यारी है । मैं तो यूँ भी हमेशा कुछ लोगों के राडार पे रहता हूँ ….. मेरी पोस्ट्स के स्क्रीन शॉट सम्हाल के रखे जाते है । लोग याद रखते हैं कि कब क्या कहा या लिखा । इसके अलावा हम MSM के लोग नहीं हैं जहां कोई जवाबदेही accountability नहीं है । हम तो उस medium में लिखते हैं जहां लोग एक मिनट में सवाल कर देते हैं , तथ्य सामने रख देते हैं …… प्रूफ देते हैं …… विडियो दिखा देते हैं …… झूठ का पर्दाफ़ाश कर देते हैं और पोस्ट हटाने और माफ़ी मांगने को मजबूर कर देते हैं । यहाँ shoot n skoot मने थूको और भाग जाओ नहीं चलता …… यहाँ जवाबदेही है . social media जीवंत मीडिया है । इसलिए मैं यहाँ जो भी लिखता हूँ वो पूरे होशोहवास में सोच समझ के लिखता हूँ …… ताकि सनद रहे ।

सो आज नोट बंदी के 38 दिन बाद मैं ये महसूस कर रहा हूँ कि इस बार UP में भाजपा 2014 से बेहतर प्रदर्शन करने जा रही है । मोदी जी की लोकप्रियता 2014 की तुलना में बढ़ी है । 14 में भाजपा को लगभग 42% वोट मिला था और आज से दो महीने पहले ये अनुमान था कि 17 के विस चुनाव में ये आंकडा 32% के आसपास रहेगा । पर POK में सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के बाद ये बढ़ के 36 % तक जा सकता है । यादव कुनबे की पारिवारिक कलह और हाथी के खिसकते जनाधार और गड़बड़ाते जातीय समीकरण ने इन दोनों पार्टियों की स्थिति बेहद खराब कर दी है । हाथी ने जैसे 14 में अंडा दिया वैसे ही अगर 17 में भी अंडा ही दे दे तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा ।
हालांकि अभी समय है और टिकट वितरण पूरा नहीं हुआ है फिर भी अभी जो हालात हैं उनमे ये तीनों पार्टियां 60 के नीचे रह जाए तो बड़ी बात नहीं होगी ।
अब UP में भाजपा को रोकने का सिर्फ एक तरीका है ……. बिहार की तरह यहाँ भी एक ठगबंधन बने और सपा बसपा कांग्रेस मिल के चुनाव लड़ें ।
अगर सिर्फ सपा cong का ही गठबंधन हुआ तो भी ये दोनों मिल के 22+6=28% से ऊपर नहीं जाते । सपा को 22 % इस शर्त पे कि अखिलेश गुट अपने चचा के गुट के प्रत्याशियों को हारने के लिए भितरघात न करें । वरना सपा का आंकडा 16 – 18 % पे भी रुक सकता है और इसका लाभ सीधे सीधे भाजपा को मिलेगा ।
रही बात मुस्लिम मतदाता और मुस्लिम ध्रुवीकरण की तो अधिकाँश मने 60% तक मुसलमान आज भी सपा के साथ ही है । ऐसे में जे बीम जे बीम भी कोई काम करता नहीं दीखता ।

17 में जल प्रलय होगी ………

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shyam jagota

ईश्वर करे ऐसा ही हो / इन उठाईगीरों ने तो प्रदेश की हालत एकदम थर्ड क्लास करदी है

सुनील बागड़िया

साख , इज्ज़त , मान सम्मान की चिंता शरीफ लोग करते हैं …… वेश्या की क्या इज्ज़त क्या मान सम्मान ?

??? बेहतरीन कलमबाजी दद्दा ???

सुभाष

बहुत से लोग आज की स्थिति के आधार पर सपा-बसपा की हालत अच्छी मान रहे हैं, उनके पूर्वानुमान बुरी तरह ध्वस्त होंगे। चुनाव में अभी समय है और भाजपा के तरकश में तीर बहुत हैं। जबकि बाकी सभी दल अपने तीर चला चुके हैं।

उदय भानु सिंह

देखिए आगे क्या क्या होता है… नोट बंदी से फायदा होता है या नुकसान ..हाँ इतना तो तय है कि देश का फायदा ही होगा… हमारे देश की जनता लोकलुभावन नारो पर जल्दी विश्वास कर लेती है .. कुछ फ्री का मिल जाय तो कहना ही क्या..

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