हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना

भीलवाड़ा राजस्थान का एक औद्योगिक नगर है । यहाँ कपडे की हजारों मिलें हैं।हिन्दू बहुल है । शांति प्रिय समुदाय की आबादी लगभग 20 % है । बहुत बड़ा शहर नहीं है । जनसंख्या होगी यही कोई 4 लाख ।
गत 12 दिसंबर को बारा वफात यानि कि ईद ए मिलाद उल नबी को शान्ति दूतों ने जलूस निकाला । जलूस में रहे होंगे कोई 20 हज़ार लोग । गौर करने वाली बात ये कि जलूस में लोगों के हाथ में जो झंडे थे वो बांस की डंडियों में नहीं बल्कि लोहे के rods में थे । जलूस पूरे शहर में घूमा । खूब भड़काऊ नारे बाजी और भाषण बाजी हुई ……. जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जब माणिक्य नगर पहुंचा तो भीड़ हिंसक हो गयी और सड़क पे मौजूद गाड़ियों को तोड़ने लगी ….. दुकानों पे हमले हुए ……. बाज़ार धड़ा धड़ बंद हो गए । सारा दिन शहर भर में आतंक का माहौल रहा ।
20 हज़ार सशस्त्र हुड़दंगियों के उपद्रव के सामने पुलिस और प्रशासन भी दम साधे खडा रहा और लाचार देखता रहा । शहर तनाव में रहा ।
इसकी प्रतिक्रिया में आज RSS के स्थानीय नेतृत्व के आह्वाहन पे आज लगभग 8000 हिन्दू एकत्र हो कर जिला प्रशासन कलेक्टर और SP police से मिले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की । आमतौर पे ऐसे मामलों में जैसा होता है …… प्रशासन ने कार्यवाही का भरोसा दे के वापस भेज दिया । पर संतोषजनक बात ये है कि 8000 हिन्दू कम से कम घरों से बाहर निकल के एकत्र तो हुए । रोष प्रदर्शन तो किया ……..
शहर के लोग बताते हैं कि आमतौर पे भीलवाड़ा शांत रहने वाला नगर है और यहाँ साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा का कोई इतिहास नहीं रहा है ।
प्रश्न है कि जिस भीलवाड़ा में आज तक कभी साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा नहीं हुई वहाँ अब क्यों हुई ?
इस बार बारावफात पे सिर्फ भीलवाड़ा ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी सुनियोजित उपद्रव के समाचार मिले है । आखिर शांति दूतों में बेचैनी क्यों है ?
दूसरा सवाल ये कि भीलवाड़ा के शान्ति दूतों के पास झंडे लगाने के लिए बांस की जगह लोहे की rod कहाँ से आई । किसने उपलब्ध कराई ? बताया जाता है कि सारी योजना नगर की मस्जिदों में बनी …… वहीं से लोगों को Rod में लगे झंडे उपलब्ध कराये गए ।
फिर वही सवाल …… आखिर क्यों ?
मोदी सरकार ने तीन तलाक़ के मुद्दे पे शान्तिदूतों को सीधी चुनौती दी है । ये बौखलाहट उसी का नतीजा है । शांति दूत को ऐसे उपद्रव करने के निर्देश मस्जिदों से मिलते हैं जुमे की तक़रीर में ……. मस्जिदें ही इनके हथियार गोली बारूद के गोदाम हैं ……. शांतिदूतों की सारी politics इन्ही मस्जिदों से संचालित होती है । यहीं से वोट देने के फतवे जारी होते हैं । मस्जिदें ही कौम की लड़ाई लड़ रही हैं ।
इधर हमारे मठ मंदिर और हमारे धर्म गुरु हमारे बाबा जी लोग …… ये अपनी दुकानदारी में लगे हैं ।

फिर भी …… आज RSS के आह्वाहन पे 8000 हिन्दुओं ने एकत्र हो के एक शुभ संकेत दिया है । इन 8000 लोगों से संपर्क करने में whatsapp की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
fb और Whatsapp लड़ाई के महत्वपूर्ण हथियार बन रहे हैं ।

  1. हिन्दुओं , एकत्र होना सीख लो वरना वैसे ही रोना पडेगा जैसे बंगाल के हिन्दू रो रहे हैं ।

Comments

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संदीप कुमार सिंह

दद्दा आप ने सही कहा है, जब तक हम लोग वोट बैंक की राजनीति से आगे नही होता है तब तक ऐसा ही होता रहेगा ।।

Binod Kumar

खुशी की बात है कि 8000 हिन्दू इकट्ठा हुए। वैसे हिन्दूओ को संगठित होने की बात कहो तो ये आर एस एस वाले बीजेपी वाले कहकर हेत टाल देते है। हिन्दुओ को सेकुलर का जो किड़ा काटा है उसका कोई एन्टी डोज खोजना होगा ।

Baldev Kumar kukreja

सही कहा है जागृति की मशाल जलाये रहो कभी तो सफलता मिलेगी

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