शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर

बहुत साल पहले की बात है ।
मैं और धर्म पत्नी …… हम लोग लखनऊ के चारबाग स्टेशन से बाहर निकल रहे थे ।
जैसा कि अक्सर होता है । स्टेशन से बाहर आते यात्रियों को Auto rikshaw और Taxi वाले टोक के पूछ लेते हैं …… Auto Rikshaw Sir ?
एक दो को तो मैंने बर्दाश्त किया । फिर जब तीसरा आया तो उसे मैंने बड़ी बेरहमी से झिड़क दिया ।
हम थोड़ा आगे बढे । तो इन्होने पूछा ……. इतनी जल्दी नाराज क्यों हो जाते हो ?
Disturb करते हैं साले ……..
रात के 11 बजे ये आदमी यहाँ रेलवे स्टेशन पे सवारी जोह रहा है ।
कायदन इसे इस समय अपने बीबी बच्चों के पास होना चाहिए ।
फिर भी , उनका पेट पालने के लिए , उन्हें एक बेहतर जीवन देने के लिए ……. ये आदमी रात 11 बजे सड़क पे है । कितनी हाड़ तोड़ मेहनत कर रहा है । कम से कम भीख तो नहीं मांग रहा । चोरी चकारी तो नहीं कर रहा । crime तो नहीं कर रहा । इज्ज़त से रोज़ी कमा रहा है ।
आपको तो appreciate करना चाहिए उसे ।
यकीन मानिए ……. बात मेरे दिल को छू गयी । और इस एक घटना ने मेरे जीवन का पूरा नज़रिया ही बदल दिया । और वो दिन और आज का दिन ……. मैं हर मेहनतकश आदमी का मुस्कुरा के स्वागत करता हूँ । अब जब स्टेशन पे रिक्शा वाले टोकते हैं तो मुस्कुरा के उन्हें जवाब देता हूँ …….. हाथ खाली हों तो हाथ भी मिलाता हूँ ।
इसी तरह जब कभी रिक्शा लेना हो तो पहले तो एक झड़प रिक्शे वाले से होना लाज़मी है । 40 नहीं 30 लगते है । और फिर जब गंतव्य तक पहुँचने लगते हैं तो खुद को guilt होने लगता है । और जब रिक्शे वाला सामान उतारता है …… और जब उसके माथे पे चमकती बूँदें देखता हूँ पसीने की ……. तो 30 की जगह 50 ही देता हूँ । ये नियम है …… मेरी जिंदगी का ……. धर्म पत्नी हमेशा पूछती है …… जब 50 ही देने थे …… तो पहले बहस क्यों की ?
नहीं जायज़ तो 30 ही बनते थे ………
फिर 50 क्यों दिए ……. वो तो उसके पसीने ……. उसके श्रम उसके जीवट का सम्मान किया …….
तो ये सम्मान पहले ही कर लेते ……. bargain क्यों किया ।
वो इसलिए …… कि वो मन से 30 लेने के लिए तैयार था …….. पर जब मैंने उसे 50 दिए …… तो जो हलकी सी मुस्कान …… मोनालिज़ा सी ……. वो जो उसके चेहरे पे आती है …… वो बड़ा सुख देती है ।

इसी तरह जब कभी मैं किसी ढाबे या रेस्त्रां में खाना खाता हूँ ……. तो एक point ऐसा आता है …… हमेशा ……. जो मुझे उद्विग्न कर देता है । Rush Hours में जब बहुत से ग्राहक़ हों तो service बड़ा श्रमसाध्य कार्य है । ऊपर से 3 – 4 घंटे लगातार दौड़ते भागते किसी को भोजन परोसना ……. ऐसे में मुझे हमेशा ये guilt हो जाता है ……. कि इस बेचारे ने …… ये जो हमें खाना परोस रहा है ……. इसने खाना खाया ? कब से खडा है ? कितनी भाग दौड़ है ????? एक भूखा आदमी आपको 36 तरह के पकवान खिला रहा है ……. उस समय उसकी खुद की क्या मनोदशा होती होगी ……. ये सवाल मुझे बेहद परेशान कर देते हैं …….. इसलिए मैंने अपने जीवन का ये नियम बना रखा है ……. always leave a very very generous Tip on the Table …….. कई बार तो मैं अपने साथ वाले मित्रों को टोक देता हूँ …… 10 – 20 नहीं ……. Tip कम से कम 50 या 100 ……. कर के देखिये ……. भोजन में जो आनंद आयेगा ……..

ये इतनी लम्बी पोस्ट आज इसलिए लिख मारी कि Youtube पे भ्रमण करते music सुनते आज Brass Band वालों की एक विडियो दिख गयी …… जब देखा सुना ……. महसूस किया ……. तो आज जीवन में 51 बरस बाद समझ आया कि यार ये Band वाले भी इंसान होते हैं …… और इंसान नहीं ….. कलाकार होते हैं भाई …… वरना आज तक तो इन्हें हिकारत से ही देखते आये …… अजीबो गरीब से कपडे पहने ……. बेढंगे से instruments बजाते …… एलियन सी शक्ल वाले लोग ……. पर आज जब उन्हें सुना Youtube पे …… तो अहसास हुआ ……. इंसान है भाई ये भी …… जीते जागते हाड़ मांस के पुतले ……. Sax और trumpets पे धुनें बजाते …….
दुनिया हमें वैसी ही दीखती है जैसी हमारी अंतर्दृष्टि होती है ।
ये दुनिया बेहद खूबसूरत है ……. अंतर्दृष्टि पैदा कीजिये ।

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर

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Atul Kumar Rai

बहुत ही मार्मिक..ब्रास बैंड वाले और शादियों में कपार पर रोड लाइट ढोने वालों को देखकर करेजा दहलता है.सार्थक पोस्ट।
रिक्शा वालों पर मैनें जून में कुछ ऐसे ही लिखा था..

Tribhuwan Kumar

यहाँ बिहार में auto वाला इतना जादा भाड़ा वसूल लेता है की मन करता है जो दिया वो भी ले ले (रिक्शा चढ़े ता जमाना हो गया)…..हा वेटर वाला कथन सत्य है

rajinder sharma

सर जी साला सब्जी वाला हमेशा पांच दस
इन्ही imotion का ले जाता है हर वार

रमेश शर्मा

अतुल्य दद्दा
ईश्वर सबकी सोच आप जैसे ही बनाये

Hasit Hemani

दूसरी जगो के मुकाबले रिक्शावाले, वेटर्स वगेरे और मजदूर क्लास मुंबई में अच्छी स्तिथि में है. दारू वगेरा कोई व्यसन का शोख न रखे तो परिवार को अच्छे ढंग से रख सकते है. मगर कौन समजाये उसे.

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