माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले

यूँ तो मैं ये किस्सा कई बार सुना चुका हूँ पर आज फिर मौक़ा है ।
एक बार और सुन लीजिये ।
तो हुआ ये कि बहुत पहले यानि कि कोई हज़ार एक साल पहले की बात है ।
किसी गाँव पे डाकुओं ने धावा बोल दिया । मर्दों को मार दिया ।
औरतों लड़कियों को उठा ले गए ।
महीनों सालों बलात्कार करते रहे । कुछ औरतों को इस बलात्कार से गर्भ ठहर गया ।
उस गर्भ से एक लड़का पैदा हुआ ।
बिन बाप का वो लड़का किसी तरह गाँव में पलने बढ़ने लगा ।
एक दिन , जब वो कुछ सयाना हुआ तो उसने अपनी माँ से पूछा ……. माँ मेरे पिता जी कौन हैं ? वो कहाँ हैं ?
माँ ने कहा ……. बेटा …… बड़ी दर्द भरी कहानी है । सुन पायेगा तू ?
हाँ माँ सुना ……
बेटा …….. तेरे पिता जी इस गाँव के जमींदार थे ।
फिर डाकुओं ने उन्हें मार दिया और मुझे अपने अड्डे पे उठा ले गए ……. कई साल वो डाकुओं का गिरोह मुझसे बलात्कार करता रहा । उसी बलात्कार से तेरा जन्म हुआ ?

माँ ……. वो डाकू कौन थे ? कहाँ है उनका अड्डा ?
बेटा ……. उनका अड्डा उस रेगिस्तान के उस पार है ……..
और फिर वो लड़का निकल पडा अपनी माँ के बलात्कारियों की खोज में …….
महीने दो महीने बाद लौटा तो दाढ़ी बढ़ी हुई थी …… मूछें सफा चट्ट ……. कुर्ता लंबा और पजामा टखनों से ऊपर चढ़ा जाता था ……. अब उसने अपने बाप के कातिलों और माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहना शुरू कर दिया था ……. वो अपनी माँ के बलात्कारियों पे मुसलसल ईमान ले आया था …….

माँ के बलात्कारियों को अब्बू कहने वाले चाहते हैं कि मुंबई में उनके अब्बू की मज़ार हो …… पिता जी की मूर्ती न लगे । माँ के बलात्कारियों के नाम पे अपनी औलादों के नाम रखना उनका धार्मिक अधिकार है ।

 

Comments

comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *