मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे ……

पंकज कुमार नामक एक फेसबुकिया लौंडा इन दिनों ग़दर मचाये हुए है ।
पट्ठे ने धुंआ उठा रखा है । दहेज़ के खिलाफ गज़ब लिख रिया है ।
उसे पढ़ के मुझे अपनी एक पुरानी पोस्ट याद आ गयी ।
बात यूँ है कि मेरी लिस्ट में नित नए मित्र जुड़ते रहते हैं । और फिर 5 ठो id . न जाने किसपे पोस्ट हुई किसने पढ़ी किसने न पढ़ी ……. इसलिए उस पोस्ट को repost न कर फिर से लिख रहा हूँ ।
ये किस्सा मेरे बड़े भाई ने सुनाया था दो साल पहले ।
हुआ ये की मेरी दो बुआ जी और एक सबसे बडकी बहिन मने बड़का बाबू की सबसे बड़ी बेटी बगल के गाँव में बियाही हैं ……. इस रिश्ते से वो पूरा गाँव ही हम सबको मामा बुलाते हैं ……. तो बडकी फुआ के खानदान का ये किस्सा है ……… सो हुआ ये कि उनके खानदान के एक लौंडे का बियाह था । बारात 30 – 40 km दूर जिला आजमगढ़ के किसी गाँव में गयी थी । आजकल हमारे हियाँ भी लोग मॉडर्न हो गए हैं …… सो वो फूल माला वाला बियाह करने लगे हैं । मने वो जिसमे वर वधू वरमाला डाल के बियाह करते हैं । सो आमतौर पे होता ये है कि जब वरमाला घालने की कवायद होती है तो लौंडे को उसके दोस्त और लौंडिया को उसकी सहेलियां घेरे रहती हैं । पर इस बियाह में मामला उलट था ……… गाँव घर के घाघ किसिम के बैठकबाज खलीफा लोगों ने लौंडों को घुड़क के भगा दिया था और वरमाला लिए दूल्हे को घेरे खड़े थे । उधर वधू के साथ भी उसकी सहेलियां बहनें न हो के सब घाघ बुढवे ही खड़े थे ………
दोनों सेनायें युद्ध भूमि में आमने सामने आ डटी ……. अपने पार्थ ने इठलाते हुए वरमाला यूँ उठायी मानो गांडीव हो …….. और आगे बढ़ चला …….. पर जैसे ही उसकी निगाह वधू पे पड़ी ……. वो ठिठक गया ……. अंग प्रत्यंग शिथिल हो गए …… मिरगी के मरीज मतिन हाथ पाँव ऐंठ गए …… गांडीव मने बरमाला हाथ से छूट गयी …… बहुत मोटे दहेज़ के साथ चन्द्रमुखी के सपनों में खोया लौंडा …… जब उसने अपनी होने वाली बीबी की शक्ल देखी तो उसे राजपाट से वैराग्य उत्पन्न हो गया । चन्द्रमुखी के ख्वाब लिए लड़के के सामने साक्षात ज्वालामुखी खड़ी थी ……. इस से पहले कि लौंडा बेहोश हो के गिर जाए और उसे जूता सुंघाना पड़े …… अगल बगल खड़े योगिराज कृष्ण टाइप लोगों ने मोर्चा सम्हाला और दिग्भ्रमित लौंडे को आधुनिक गीता का ज्ञान बांचना शुरू किया ……. मस्टराइन हौ बे ……. अबे 30,000 रुपिया पावैले बे …… पर लौंडा टस्स से मस्स्स्स्स न हुआ । उसको तो कटरीना कैफ से बियाह करना था । और सामने वरमाला लिए खड़ी थी साक्षात ललिता पवार ……. उसने कहा हे तात …… क्या रखा है दान दहेज़ में ……. मैं खुद कमा के खा लूंगा ……. blah blah blah …….
इतना सुनते ही एक कृष्ण जी ने रौद्र रूप धारण कर जो अपना विराट स्वरुप जो दिखाया ……..
भोसड़ी वाले ? जिनगी में कभी 30,000 रुपया देखले हउए ? कहाँ से कमा लेबे 30,000 महिन्ना ?
अबे मस्टराइन हौ सरकारी इस्कूल में …… सारी जिनगी मऊज लेबे बे …….. और इस प्रकार कृष्ण ने उसे नाना विधि अर्थशास्त्र , समाजशास्त्र और नागरिक शास्त्र का crash course करवा दिया …….. अतः हे पार्थ …….. चेहरे की चमड़ी पे मत जाओ ……. हर महीने जब 1 तारिख को salary खाते में आ जाती है तो जो अलौकिक सुख मिलता है उसका महत्त्व सिर्फ देव लोक के देवता ही जान पाते हैं ……. इस प्रकार के economics के गुण सूत्र समझ पार्थ के मन मस्तिष्क में कुछ स्फूर्ति का संचार हुआ ….. मूर्छा दूर हुई …… चेतना जगी ……. उसने लपक के गांडीव बोले तो वरमाला उठा ली और जी कड़ा कर कलेजे पे पत्थर रख वधू को वर लिया ।
कालान्तर में पार्थ ने हस्तिनापुर में गिट्टी बालू cement सरिया बेचते हुए सुखपूर्वक जीवन यापन करने लगा ।
वो अलग बात है कि कुछ महीनों बाद शिक्षा मूत्र से मस्टराइन हुई बालिका हाई कोर्ट के आदेश से पुनर्मूशिका भव हो गयी ……
वो बड़ी दर्दनाक कहानी है …… फिर कभी ।

Comments

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sunil

हाहाहाहाहाहा.
गजब की शैली है आपके लिखने की.
बस एक सांस में ही पढ डाला.
चुटीला और हास्य से भरा.
जै हो …😀😀

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