भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की मुफलिसी का सच ।

भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की मुफलिसी का सच ।

आज से कुछ साल पहले जब कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब जीवित थे , और न सिर्फ जीवित थे बल्कि पूरी तरह fit थे , सक्रिय थे , एक दिन ये खबर आयी कि उस्ताद जी बेहद मुफलिसी में जी रहे हैं । रोटी के लाले पड़े हुए हैं । देश चिंता में डूब गया । कई जगह से इमदाद आने की खबरें आई । भारत सरकार भी सक्रिय हुई । भारत रत्न मुफलिसी में जी रहा ? आनन् फानन में संसद में उनके शहनाई वादन का कार्यक्रम रखा गया । बाकायदे 5 लाख का मेहनताना दिया गया ।
ये सब देख सुन मेरा माथा ठनका ।
मेरे कू बात समझ में न आयी ।
बिस्मिल्लाह खान जैसा super star मुफलिसी में जी रहा ? बात गले उतरती न थी ।
मैं उन दिनों जालंधर की हरिवल्लभ महासभा से जुड़ा हुआ था । ये महासभा हर साल शास्त्रीय संगीत की एक बहुत बड़ी conference बोले तो संगीत सम्मलेन कराती है जो लगभग 140 साल पुराना है ।
पलुस्कर भीमसेन जोशी रविशंकर लगायित कोई ऐसा गवैया न हुआ जो यहाँ न आया हो …….
मैं पहुंचा कपूर साब के पास जो महासभा के secretary हैं ।
मैंने पूछा गुरु क्या मामिला है ? की खाँ साहेब काहें मुफलिसी को प्राप्त हो गए जबकि यहां तो अदना सा नया लौंडा भी जो कि अभी classical संगीत में उभर रहा है वो भी एक performance के 30 हज़ार माँगता है और खाँ साब जैसे सीनियर तो 5 लाख के नीचे बात तक ना करते ……. आज जो सीनियर कलाकार है वो प्रति concert 5 लाख लेते हैं और एक महीने में 10 से 15 दिन बुक रहते हैं ……. तो इनको क्या पिराब्लम हो गिया ?
कपूर साब हल्का सा मुस्किया दिए ।
बोले , लो किस्सा सुनो ।
आज से कोई 10 साल पहले हमने एक बार खाँ साब को बुला लिया हरिबल्लभ में ।
एक लाख में तय था । सुबह पंजाब मेल से आना था । एक गाडी भेज दी स्टेशन पे ।
वहाँ से ड्राइवर का फून आया । sir एक गाडी से काम न चलेगा । पूरी bus भेजो ।
अबे कित्ते आदमी हैं ? हम ये मान के चल रहे थे कि साजिंदे मिला के 4 – 5 आदमी होंगे ।
ड्राइवर बोला अजी बीसियों हैं सब केना मेना चूंची बच्चा मिला के …….
अपना माथा ठनका । होटल में दो कमरे बुक थे । तीन और खुलवाये । एक एक कमरे में 5 – 5 जा घुसे । उस्ताद ने शहनाई जो बजायी , लोग अश अश कर उठे । भाव विभोर …… उस्ताद की उँगलियों में जादू था । तीन दिन जमे तहे उस्ताद सम्मलेन में पूरी फ़ौज के साथ । गाजे बाजे के साथ बिदा हुए ।
होटल का बिल आया तो माथा ठनका । तीन दिन का बिल यही कोई सवा लाख रु ……. क्या कहा ?
सवा लाख ? अबे दिमाग खराब है ?
अजी 25 आदमी थे । मुर्गे के अलावा कुछ नहीं खाते थे । जाते जाते 35 मुर्गे तो रास्ते के लिए pack करा के ले गए । उस दिन महासभा ने कान पकडे । फिर कभी नहीं बुलाया ।
मैंने पूछा 25 आदमी थे कौन जो उनके साथ पधारे थे । अजी उस्ताद जी के अपने एक दर्जन और उन एक दर्जन के आगे एक एक दर्जन ………
पर गुरु आज जितने ये star performers हैं इन सबने अपने अपने बच्चे जीते जी stage पे set कर दिए ……. उस्ताद जी के लौंडों का क्या हाल है ?
अजी सब एक से बढ़ के एक निकम्मे । किसी को शहनाई पे हाथ तक रखना नहीं आता ।
दारू और भांग गांजे से फ़ुरसत होंय तो शहनाई पे हाथ धरे ।
शास्त्रीय संगीत है भैया । 20 – 20 साल तक लोग 10 – 15 घंटे रोज़ाना रियाज़ करते हैं तो कुछ लायक होते हैं । उसमें भी stardom बुढौती में मिलता है । पंडित जसराज को 55 साल हो गए stage पे परफॉर्म करते ।
और इस तरह उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब अपने दर्जन भर से ज़्यादा आवारा लौंडों और उनके आगे 10 दर्जन नाती पोतों का पेट भरने में अपनी सारी कमाई खर्च करते एक दिन उसी मुफलिसी में अल्लाह को प्यारे हो गए ।
उनके सबसे बड़े बेटे को मैंने सबसे पहली बार देखा 2014 में जब की भाजपा ने उनको बनारस में मोदी जी के पर्चा दाखिले में प्रस्तावक बनने के लिए आमंत्रित किया जिसे उन्होंने एक बार स्वीकार कर फिर मुस्लिम समाज के दबाव में ठुकरा दिया ।

फिर पिछले साल खबर आयी कि मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहेब भारत रत्न की डुमरांव स्थित पुस्तैनी हवेली और जमीन पे कुछ बिहारी गुंडों बाहुबलियों ने कब्जा कर लिया ।
मचा जो बमचक ।
जांच हुई तो पता चला कि उस्ताद के सबसे बड़े बेटे ने खुद ही चोरी छिपे पूरे परिवार को अँधेरे में रख वो जमीन बेच खायी थी ।

फिर पिछले दिनों खबर आयी कि उस्ताद जी की चांदी जड़ी 4 शहनाइयां उनके पैतृक निवास से चोरी हो गयी । बनारस में फिर मचा बमचक ।
तब मेरे मुह से यूँ ही निकला …… अबे कौन चुराएगा ।
खुद बेच खायी होंगी सालों ने ।
आज खबर आयी कि STF ने बनारस में मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहब भारत रत्न के पोते जनाब नज़र ए आलम साहब सुपुत्र जनाब काज़िम खाँ साहिब को दो jewellers के साथ गिरफ्तार कर चारो शहनाइयां बरामद कर लीं ।

काश उस्ताद जी ने किसी साक्षी महाराज type संघी की सलाह मान ली होती और 14 की जगह सिर्फ एक या दो पैदा किये होते तो ये नौबत न आती ।

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Nilesh Murarka

इनकी इज्जत तो उसी दिन उतर गई थी जब इन्होंने परिवार के लिए पेट्रोल पंप की मांग की थी।

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