बादल साहब ने कांग्रेस के दलित वोट में सेंध लगा दी है ।

सुखबीर बादल ने कांग्रेस के कबूतरों के बीच बिल्ली छोड़ दी है ।
पंजाब में लगभग 32% दलित भोटर हैं ।
इनमे प्रमुख हैं वाल्मीकि और राविदासिये ।
पारंपरिक रूप से देश के ब्राह्मण दलित आदिवासी और मुसलमाँ कांग्रेस के वोटर रहे । कांग्रेस ने आज तक राज ही इन 4 वोटर वर्ग के बल पे किया । जहां दलित और मुसलमान कांग्रेस को छोड़ गए cong डूब गयी । देश भर में हर राज्य में एक क्षेत्रीय दल नया बना और उसने कांग्रेस से ये दलित और मुसलमान छीन लिए , congress डूब गयी । देश का बंटवारा हुआ , मुसलमानों ने अपना हिस्सा ले लिया पर पाकिस्तान गए नहीं । नेहरू ने रोक लिया , सिर्फ इसलिए कि यहां रहेंगे और हमको वोट देंगे ।
मुसलमान नेहरू का ये अहसान भूले नहीं और हमेशा इनको वोट दिया । बाबरी ढाँचे के विध्वंस के बाद इनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ ।
इसी तरह दलित भी कांग्रेस का वफादार वोटर रहा । वो तो भला हो कांशीराम और BMW का कि उन्होंने दलितों को नया platform दिया । पर इसके बावजूद आज भी UP Bihar छोड़ अधिकाँश राज्यों में दलित आदिवासी कांग्रेस को भोट देते हैं ।
इधर पंजाब में सुखबीर बादल ने कबूतरों में बिल्ली छोड़ दी है ।
पंजाब में दलितों में दो बड़े प्रमुख वर्ग हैं । वाल्मीकि और राविदासिये ।
रविदासियों के सींग radical sikhs के साथ फंसे रहते हैं । मामला बड़ा पेचीदा है । यहां पंजाब में रविदासियों के गुरुद्वारे भी हैं और मंदिर भी । रविदासी गुरुद्वारों में गुरुग्रंथ साहिब का पाठ होता है और उनके साथ ही बगल में एक गुरु जी और बैठे होते हैं जो प्रवचन करते हैं । यहां radical sikh आपत्ति करते हैं कि गुरु ग्रंथ साहिब के बराबर कोई और गुरु नहीं बैठेगा । राविदासिये कहते हैं हमारा तो बैठेगा भाई …… तुमको आपत्ति है तो हम गुरु ग्रंथ साहिब को हटा देते हैं पर गुरु जी नहीं हटेंगे ।
विवाद बढ़ता गया जिसकी परिणीति अंततः Vienna में रविदासियों के सर्वोच्च गुरु की हत्या में हुई । रविदासियों ने नया ग्रन्थ रच दिया और गुरुग्रंथ साहिब को replace कर दिया ।
दोनों समुदायों में कटुता बहुत बढ़ गयी ।
फिर बादल साहब ने सबको समझा बुझा के मामला शांत किया । अब होशियार पुर के खुरालगढ़ साहिब गाँव में 14 एकड़ भूमि में 160 करोड़ रु खर्च कर मीनार ए बेगमपुरा नामक स्मारक का निर्माण कराया है । खुरालगढ़ में रविदासी , चमार , जाटव समुदाय के आदि गुरु स्वामी रविदास जी का आगमन हुआ था । उनकी याद और सम्मान में बादल सरकार ने भव्य स्मारक बनवाया है । ये पंजाब के दलितों की अस्मिता और मान सम्मान का बेहद संवेदनशील विषय है जिसे बादल साहब ने छुआ । स्मारक बन के तैयार है । इस एक कदम से रविदासी समुदाय का झुकाव अकाली दल की ओर हुआ है । वो कहते हैं की कांग्रेस ने आज तक सिर्फ lollypop दिया , किया कुछ नहीं ।
इसी तरह अमृतसर में पिछले दिनों भगवान् वाल्मीक की 8 फुट की स्वर्ण जड़ित प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वाल्मीकि मंदिर – राम तीर्थ में हुई । कहा जाता है कि इसी स्थान पे महर्षि वाल्मीकि का आश्रम था जहां माता सीता ने शरण ली थी और इसी स्थान पे महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना की ।
बादल सरकार ने इस स्थान पे एक भव्य वाल्मीकि मन्दिर का निर्माण 180 करोड़ रु की लागत से हुआ है । भगवान् वाल्मीकि की भव्य प्रतिमा की परिक्रमा बादल साहब ने पूरे पंजाब में कराई । पंजाब के हर शहर और कसबे गाँव से ये प्रतिमा गुज़री । इसके स्वागत में लाखों की भीड़ उमड़ी ।
दलितों के लिए अस्मिता और मान सम्मान भावनात्मक विषय हैं । पंजाब के दलित बहुत संपन्न हैं । रुपया पैसा धन दौलत उनके लिए बहुत महत्त्व नहीं रखते । अस्मिता उनके लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण है ।
और इसी विषय को बादल साहब ने छुआ है ।
चुनाव में ये एक game changer होगा ।
बादल साहब ने कांग्रेस के दलित वोट में सेंध लगा दी है ।

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