नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

Ford motors के मालिक Henry Ford निपट अंगूठा टेक अनपढ़ थे । जब वो अपनी सफलता के शिखर पे थे तो एक स्थानीय अखबार ने अपने एक लेख में उनको अनपढ़ लिख दिया । Ford को ये बड़ा नागवार गुजरा और उन्होंने उस अखबार पे मानहानि का मुकद्दमा ठोक दिया ।
सुनवाई शुरू हुई । Ford के वकील ने अखबार पे अपना आरोप दोहराया । आपने Mr Ford को अनपढ़ कहा ? सम्पादक बोला , हाँ कहा ……. और ठीक ही तो कहा …… अनपढ़ ही तो हैं Mr Ford . बुलाओ कटघरे में ……. अभी दो मिनट में सिद्ध कर देंगे कि अनपढ़ हैं ।
Ford कटघरे में आये तो सम्पादक ने उनसे किताबी सामान्य ज्ञान मने GK के कुछ सवाल पूछे । जाहिर सी बात है उनमे से एक का भी जवाब Ford के पास न था । सम्पादक ने जज से कहा …… अब और क्या प्रमाण चाहिए ?
Ford ने जवाब दिया ……. जज साहब ये माना कि मुझे इन सवालों के जवाब नहीं आते । ऐसे भी बहुत से सवाल होंगे जिनके जवाब इन सम्पादक महोदय को नहीं पता होंगे ।
पर मुझे हे पता है कि इन सवालों के जवाब कहाँ मिलेंगे ? कौन देगा इनका जवाब ?किस सवाल को कैसे हल करना है या करवाना है ……. मुझे ये पता है । मैं उन आदमियों को जानता हूँ जिन्हें इन सवालों के जवाब मालूम है । यदि आप आज्ञा दें तो मैं अभी एक मिनट में इन सभी सवालों के जवाब देने वालों की फ़ौज खड़ी कर सकता हूँ ।
मुझे सवालों के जवाब खोजना आता है ।
अपनी जिंदगी का तो शुरू से ही एक फलसफा रहा ।
समस्याओं का रोना मत रोओ । समाधान खोजो ।
Don’t discuss the problems . Find Solutions .
समस्याओं का क्या है ? वो तो लगी रहेंगी ।
सवाल पे focus मत करो । अपनी सारी ऊर्जा उसका हल खोजने में लगाओ ।
एक progressive समाज यही करता है । उस समाज के leaders सवालों और समस्याओं पे अपनी ऊर्जा और समय नष्ट नहीं करते बल्कि समाधान खोजने में करते हैं ।
माना कि नोटबंदी ने सवाल खड़े किये ……. समस्याएं पैदा की ……
8 Nov के बाद से हमारे leaders , हमारी press , हमारे institutions सिर्फ इस से उत्पन्न समस्याओं का रोना रो रहे हैं ……… हाय मर गए …… cash नहीं है ……. नेता और प्रेस सिर्फ और सिर्फ bank और ATM की लाइन में खड़े लोगों के कष्ट दिखा सुना रहे हैं ……. कोई ये नहीं सुझा रहा कि आखिर हल क्या है । समस्या का समाधान क्या है ?
विकल्प क्या हैं ?
cash अगर नहीं है तो कैसे survive करें ?
कैसे काम चलायें ?
cashless या less cash कैसे हुआ जाए ?

TV का पत्रकार लाइन में खड़े आदमी से पूछता है कब से खड़े हो ? कितने दिन से खड़े हो ? कितना कष्ट है ?
मैं पत्रकार होता तो पूछता …….. यहाँ क्यों खड़े हो ?
क्यों चाहिए cash ?
चेक से काम क्यों नहीं करते ?
लाओ अपना फोन दो , मैं सिखाऊँ कैसे करते हैं Net banking और Mobile बैंकिंग ……… cash अगर नहीं है तो विकल्प क्या हैं ? शिक्षा और समाचार माध्यमों को इसपे focus करना चाहिए । leaders को इसपे focus करना चाहिए ।
पर इसके विपरीत वो देश की जनता को ये समझाने में लगे हैं कि हम क्यों खोजें समाधान ?

आखिर ये समाधान हमपे क्यों थोपे जा रहे हैं ?
हम अपने पुराने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ क्यों अपनाएं नयी तकनीक ?
तुम सिर्फ cash दो ……. हमको नहीं चाहिए तुम्हारी नयी तकनीक ……
आज देश की विपक्षी पार्टियां लोगों को भड़का रही हैं …. विद्रोह कर दो ……. दंगा फसाद करो cash के लिए …….. मत होवो cashless या less cash …….. net banking और mobile banking मने समाधान के नुक्सान गिनाये जा रहे हैं ……. खतरे गिनाये जा रहे हैं ……… मोबाइल बैंकिंग को कुछ कम्पनियों और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की साजिश बताया जा रहा है ।

नोट बंदी भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है ……… भविष्य में एक उन्नत भारत का रास्ता इसी नोटबंदी से निकलेगा ……. इसे एक संकट के नहीं बल्कि अवसर के रूप में देख के इसका समाधान खोजना चाहिए युद्ध स्तर पे ।
नोट बंदी संकट नहीं बल्कि एक अवसर है

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सुनील बागड़िया

यह परिपक्वता प्रेस्टिट्यूट्स में कभी नही आये गी दद्दा
में पिछले 3 वर्षों से इन सभी डिज़िटल प्रोसेस को यूज़ कर रहा हूँ , सिखने की ललक ने सीखा दिया ! अपने आस पास के सभी सामान्य वर्ग के लोगों को प्रोत्साहित कर रहा हूँ ! वंदे मातरम

Hasit Hemani

ये फोर्ड की कहानी से कुछ साबित नहीं होता ये आप भी जानते है. आप को सिर्फ मोदीजी की वकालत करना है तो करते रहिये. मगर देशहित सोचते है और आप खुल्ले मन से सोचते हो, तो आप को साफ़ नजर आएगा, गरीब लोगो की ओर middle क्लास की हालत धीरे धीरे खराब हो रही है. अभी हाथ पैर सिर्फ कमजोर हुए है, और ऐसा ही चलते रहा तो एक दिन ऐसा लकवा मारेगा उस समय नए बहाने ढूंढने नीकलना पड़ेगा, की ऐसे हालात क्यूँ हुए.

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