घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक

घर से भागी हुई लड़कियाँ और अजनबी युवक:
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कुछ वर्ष पहले की बात है। एक साधारण पृष्ठभूमि का नवयुवक बिहार के सुदूर उत्तर-पूर्वी छोर से दिल्ली आ रहा था ट्रेन से। दिल्ली में रहते हुए, वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता था।
ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागती जा रही थी। ट्रेन के अंदर सब कुछ सामान्य-सा ही चल रहा था। सभी यात्री अपनी ही धुन में खोये हुए थे। पर तभी अचानक से नवयुवक चौंका..!!

नवयुवक ने देखा कि उसके डब्बे में दरवाजे के पास एक 20-22 साल की लड़की धीमे-धीमे सुबक रही थी!! एक लोफ़र-सा दिखने वाला लड़का सम्भवतः उसे बहलाने-फुसलाने की कोशिश कर रहा था। पर लड़की थी कि रोये जा रही थी।
यह देख नवयुवक चौकन्ना हो उठा..!! उसे लग गया कि हो न हो, कुछ तो गड़बड़ है। वह एकदम से उस लड़की के पास गया और सबसे पहले तो उस लोफ़र से लड़के को वहाँ से भगाया। फिर उस लड़की से तमाम जानकारियाँ ली।

पता चला कि वह लड़की बिहार के बेगुसराय से थी। किसी बात पर अपने पिता की डाँट से दुःखी हो, घर से भाग कर वह भी इसी ट्रेन में सवार हो गयी थी, और वह भी बेटिकट।
सब जानने-समझने के बाद नवयुवक ने उस लड़की को भरोसा दिलाया और सुरक्षित उसे अपने पास बिठा लिया। लड़की को भी तब तक अंदाज़ा हो गया था कि यह नवयुवक एक भलामानुष इंसान है।

तब तक ट्रेन अपनी रफ़्तार से इलाहाबाद को पार कर चुकी थी। पर अभी इस कहानी का अंत यही नहीं होना था। अभी तो कहानी में एक और ट्विस्ट आना था..!! यह तो महज़ इंटरवल था।

नवयुवक ने दोबारा से नोटिस किया कि उसी डब्बे में एक और छोटी-सी, संभवतः 15-16 साल की, लड़की भी अकेले सफ़र कर रही थी। हे भगवान यह क्या..?? इस छोटी-सी लड़की की आँखों से भी गँगा-जमुना बही जा रही थीं निर्बाध..!!

अब नवयुवक के ललाट पर सिलवटें पड़नी शुरू हो गयी थीं। पर फिर भी वह नवयुवक इस छोटी-सी लड़की के पास जाने से खुद को रोक न सका। पूछताछ की, तो पता चला कि यह दूसरी लड़की इलाहाबाद से थी।

अपनी सौतेली माँ के निरंतर मारपीट से परेशान होकर और पिता की बेरुखी के चलते यह भी अपने बाबुल का घर असमय ही छोड़ चुकी थी!!
पर यह छोटी-सी लड़की अब तय कर चुकी थी कि चाहे जान चली जाए, पर वापस अपने घर नहीं जाना। नवयुवक पड़ा भारी फेरे में ! खुद किसी तरह दिल्ली में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर पा रहा था, ऊपर से ये दो-दो असहाय लड़कियाँ बिन बुलाये मेहमान की तरह ट्रेन में मिल गयीं थीं और उस पर तुर्रा यह कि दोनों की दोनों अपने-अपने घरों से भागी हुई!! अब भलामानुष करे तो क्या करे??
पर जहाँ चाह वहाँ राह। अगर विपरीत परिस्थितियों में आप न घबराएँ तथा आपके इरादें दृढ़ हों और नेकनीयत वाले हों, तो फिर ईश्वर भी साक्षात् आपकी मदद करते हैं। सौभाग्य से उसी डब्बे में हरियाणा का एक मारवाड़ी परिवार भी यात्रा कर रहा था। अब तक के सफ़र के दौरान नवयुवक तथा मारवाड़ी परिवार एक-दूसरे से थोड़े खुल से गए थे।

नवयुवक ने मारवाड़ी परिवार को सारी व्यथा समझायी। दोनों मामलों को भलीभाँति समझने के बाद, उदार मारवाड़ी परिवार उन दोनों में से छोटी लड़की को अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया, क्योंकि वह अपने पिता के घर इलाहबाद किसी कीमत पर नहीं जाना चाहती थी।

छोटी लड़की भी मारवाड़ी परिवार के साथ जाने को तैयार हो गयी। तब नवयुवक ने एक आवश्यक शर्त रखी कि भई, मारवाड़ी परिवार उस लड़की को अवश्य पढ़ायेगा तथा साथ ही साथ नियमित अंतराल पर फ़ोन द्वारा उसकी बात उस छोटी लड़की से करायेगा भी, ताकि वह आश्वस्त हो सके कि लड़की सुरक्षित है।

मारवाड़ी परिवार भी सभ्य, उदारवादी व भला परिवार था। अतः उन लोगों ने अपनी सहमति दे दी तथा नवयुवक को आश्वस्त किया कि वे उस छोटी लड़की को अपनी बेटी की तरह रखेंगे। तब नवयुवक ने छोटी लड़की को मारवाड़ी परिवार के हाथों सौंप दिया। साथ ही उस छोटी लड़की को अपना फ़ोन नंबर भी दिया ताकि उसे जब भी जरुरत लगे, वह उस से संपर्क कर सके।
अब बच गयी 20-22 साल वाली बेगुसराय वाली पहली लड़की, जो अपने पिता की डाँट बर्दाश्त न कर सकी और बिना कुछ सोचे, घर से निकल भागी थी! वह तो उसकी किस्मत अच्छी थी कि गलत हाथों में जाते-जाते, वह सुरक्षित हाथों में आ गयी थी।

इस तमाम आपाधापी में ट्रेन कब दिल्ली पहुँच गयी, कुछ पता ही न चला। तनावग्रस्त नवयुवक डरते-डरते, इस लड़की को दिल्ली स्थित किराये के अपने साधारण से तंग कमरे पे ले आया! नवयुवक डर इसलिए रहा था कि कहीं लड़की बीच रास्ते रोने-धोने न लगे, तो फिर लेनी के देने पड़ जाते।

कमरे पर पहुँच कर नवयुवक ने सबसे पहले पड़ोस की एक परिचित महिला को बुलाया, सारी बात समझायी। फिर महिला से निवेदन किया कि जब तक लड़की यहाँ है, कृपया आप साथ रहिये। खुद के कम पैसों में से ही नवयुवक ने लड़की को नये कपड़े दिलवाए , क्योंकि लड़की के शरीर पर चढ़े कपड़े जर्जर अवस्था में थे। जब तक लड़की उसके कमरे में रही, नवयुवक बगल में अपने दोस्त के यहाँ रहा।

अब नवयुवक ने फौरन से लड़की से उसके पिता का फ़ोन नम्बर ले, उसके पिता से संपर्क साधा और बताया कि उनकी लड़की उसके पास पूरी तरह सुरक्षित यहाँ दिल्ली में है। फौरन आएं और अपनी बेटी को ले जाएँ। साथ ही समझाया भी कि भविष्य में अपनी लड़की को डाँटना मत, वरन प्यार से कोई बात समझाना, नहीं तो सारी ज़िन्दगी बैठ के रोते रहोगे।
लड़की के पिता को तो इधर लगा जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मिल गयी हो!! तब तक रोते-रोते लड़की के माता-पिता की हालत खराब हो गयी थी। परन्तु अब शब्द नहीं थे लड़की के पिता के पास कि किन शब्दों में वह नवयुवक के प्रति आभार प्रकट करें..!!

दो दिनों में लड़की के पिता उसको सुरक्षित लेकर वापस गए। कुछ दिनों बाद, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उस लड़की ने भाई से भी बढ़कर फ़र्ज़ निभाने वाले उस नवयुवक को राखी भेजी!!
छोटी लड़की जिसे वो मारवाड़ी परिवार ले गया था आज भी उनके पास रहती है . उसे भी उसके माँ बाप के पास वापस भेजने के प्रयास किये गए पर उन्होंने उसे वापस लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई .

आगे चलकर यही भलामानुष नवयुवक तमाम झंझावातों को झेलता हुआ, महज़ चन्द वर्ष पहले, बिना किसी कोचिंग की सहायता के और वह भी हिंदी माध्यम से तैयारी कर, उत्तर प्रदेश काडर का आईपीएस (IPS) बना!! आजकल पूर्वी उत्तर प्रदेश में एडीशनल SP के पद पे कार्य रत हैं . आखिर हाड़तोड़ मेहनत और नेकनीयती का फल तो मिलना ही था। मुझे फ़ख्र है अपने इस दोस्त पर। इन्ही लोगों के चलते, आज भी इंसानियत पर भरोसा कायम है।

– कुमार प्रियांक

Comments

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अमित

दद्दा उसका नाम भी बताओ आज की दुनिया में ऐसे लोग कम ही है

Kuldeep singh

महान पुरूष का नाम बतायें ।बह धन्यबाद के पात्र हैं ।प्रेरणादायक हैं

Dinesh

SIR US nek insan ki jitni bh taarif ki jaye kam h. This real story tells that noble person do exists in today era also. keep going sir we may get inspired by this story.

Anuj Trivedi

Dada mera 10 year ka bacha aap ki story almost Read karta h, so prerak kahaneya Jada se Jada aap likhe ,
Thanks for this story

अरविंद मिश्रा

जिस दिन 20% लोग भी ऐसी सोच के हो जाये तो रामराज्य आ जायेगा……
वैसे हम लोग भी थोडा बहुत अच्छा काम करते रहे तो सुधार आ जायेगा

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