खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।

जो लोग गाँव में रहे हैं या ग्रामीण पृष्ठभूमि से है उन्होंने ये दृश्य देखा होगा ।
शेष अपनी कल्पना से देख लें ।
गाँव में कोई पशु जब बीमारी या वृद्धावस्था से एकदम अशक्त हो जाता है तो बैठ जाता है ।
बार बार उठने की कोशिश करता है पर उठ नहीं पाता ।
खड़े होना बहुत ज़रूरी है । खड़ा नहीं होगा तो मर जायेगा ।
ऐसे में किसान दो चार आदमी जुटाता है और सहारा दे के पशु को खडा कर देते हैं ।
दो आदमी आगे से दो पीछे से और एक पूंछ पकड़ के उठाता है ।
अब आप सोचेंगे पूंछ पकड़ के कैसे उठा सकते है ?
पूंछ जहां पीठ से जुडी होती है , गुदा स्थान ज़े ठीक ऊपर …….. वो बहुत मज़बूत जोड़ होता है ।
जब तक वहाँ से जोर नहीं लगाएगा ……. पशु हो या मनुष्य …… खडा नहीं हो सकता ।
*** तक का जोर लगाना ……. ये कहावत यूँ ही नहीं बनी है ।
*** भीच के जोर न लगाओ तो कोई भी भारी काम हो नहीं सकता ……..
कोई जानवर उठने की कोशिश कर रहा है और आप अकेले हैं , उसकी मदद करना चाहते हैं …….
पूंछ पकड़ के थोड़ा सा सहारा दीजिये , खडा हो जाएगा ।

बचपन का एक किस्सा याद है मुझे ।
एक भैंस थी जिसे सहारा दे के उठाना पड़ता था । भैया आते जाते 2 – 4 लोगों को बुलाते । साथ में हम बच्चे लगते । भैंस खड़ी हो जाती । दो तीन हफ्ते ये सिलसिला चला । फिर वो मर गयी ।
अब उसे एक बैलगाड़ी में लाद के गाँव से दूर सीवान में पहुंचाना था …….. अंतिम यात्रा ।
उसके शव के पास गाड़ी लगाई । भैया आदमी जुटाने लगे । 10 एक आदमी हो गए । पर भैया बोले की 10 – 12 आदमी और जुटाओ । इतने से काम नहीं चलेगा ।
पर रोजाना तो हम 4 – 6 लोग ही मिल के इसे उठा लिया करते थे ?
आज 25 आदमी क्यों लगेंगे ?
क्योंकि तब ये जीवित थी । कितनी भी अशक्त थी पर जीवित थी ।
सच ये है कि तब भी वो अपनी ताकत से अपने प्रयास से अपनी इच्छाशक्ति से खड़ी होती थी ।
हम तो उसे सिर्फ हल्का सा सहारा दिया करते थे ।
पर आज ये मर चुकी है । She’s dead .
और मरा हुआ जीव बहुत भारी हो जाता है । बहुत बहुत भारी । तब उसे उठाना आसान नहीं होता ।
पूरा गाँव जुटाना पड़ता है ।

वो तो सिर्फ भैंस थी ।
हिन्दुओं ……. तुम तो हाथी हो । तुम मर गए तो पूरा गाँव मिल के भी न उठा पायेगा ।
crane मंगानी पड़ेगी ।

बंगाल से आज एक शुभ समाचार मिला । एक शुभ संकेत ।
TMC के हिन्दू कार्यकर्ताओं में एक undercurrent है । आक्रोश है ।
TMC के हिन्दू भोटर और कार्यकर्ता बेचैन हैं ।
उन्हें ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण रास नहीं आ रहा ।

लोहा गर्म हो रहा है । इसे लाल करो ।
लाल लोहा ही shape बदलता है ।

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Shashi Kant Kansal

बंगाल से आज एक शुभ समाचार मिला । एक शुभ संकेत ।
TMC के हिन्दू कार्यकर्ताओं में एक undercurrent है । आक्रोश है ।
TMC के हिन्दू भोटर और कार्यकर्ता बेचैन हैं ।
उन्हें ममता बनर्जी का मुस्लिम तुष्टिकरण रास नहीं आ रहा ।

लोहा गर्म हो रहा है । इसे लाल करो ।
लाल लोहा ही shape बदलता है ।

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