किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ? मोलायम या अकलेस ?

इतिहास खुद को दोहरा रहा है क्या ?
बात 1966 की है ।
लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गाँधी PM बनी थी ।
उनके नेतृत्व में 67 में चुनाव हुए तो कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया । सिर्फ 283 सीट आई । बहुमत से बमुश्किल 20 सीट ज़्यादा ।
जब शास्त्री जी मरे थे तो इंदिरा उनके मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थी । उन्हें गूंगी गुड़िया कहा जाता था । वो सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा भर थी जिसके नाम के आगे गांधी नेहरु लगा था ।
शास्त्री के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष कामराज ने तो अपनी तरफ से एक कठपुतली
बैठाई थी कुर्सी पे ……. सत्ता की चाभी उनके पास थी । उनके अलावा मोरारजी भाई देसाई , निजलिंगप्पा , नीलम संजीव रेड्डी , हितेंद्र देसाई , सत्येन्द्र नारायण सिन्हा , चन्द्र भानु गुप्त और वीरेन्द्र पाटिल जैसे दिग्गज थे कांग्रेस में ……… पर PM बनते ही इंदिरा गाँधी ने रंग दिखाना शुरू किया और इन वट वृक्षों की छाया से बाहर आ गयी ।
12 Nov 1969 को तत्कालीन अध्यक्ष निजलिंगप्पा ने अपनी PM इंदिरा गाँधी को अनुशासन हीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया ……… इंदिरा ने अलग हो के नयी पार्टी बना ली ……. सारे बूढ़े खलीफा एक तरफ , गूंगी गुड़िया अकेली एक तरफ …….. इंदिरा गाँधी की कांग्रेस ( O ) और कामराज वाली Cong ( R ) …….. पार्टी दो फाड़ हो गयी ।
तत्कालीन कांग्रेस working committee के 705 मेंबर्स में से 446 इंदिरा गाँधी के साथ हो गए ।
पुरानी कांग्रेस जिसमे कामराज के साथ सब बूढ़े थे , वो उन दिनों सिंडिकेट कहलाती थी और इंदिरा की कांग्रेस इंडिकेट ……..

1971 में अगले आम चुनाव हुए । इंदिरा गाँधी ने 43.6% भोट के साथ 352 सीट जीत के बम्पर सफलता अर्जित की । सिंडिकेट के बुढवों को जनता ने नकार दिया । उनको सिर्फ 10 % भोट और सिर्फ 16 seats मिली ।
लोकतंत्र में राजा वो जिसके साथ जनता ……. भोटर ।

UP में वही तमाशा चल रहा है ।
पप्पू अखिलेश अपने बूढ़े घाघ बाप और चाचा की छाया से निकल के बाहर आ गया है ।
कल रात शहजादे सलीम ने अकबर के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया ।
कहता है कि 265 सीट पे बागी उम्मीदवार लड़ाऊँगा …….. पार्टी मुख्यालय में निष्कासन का पत्र type कर के रखा है । सिर्फ मुलायम के sign होने बाकी हैं ।
सवाल है कि भोटर किसके साथ जाएगा ।
यादव वोटर confused है । बूढ़े बुजुर्ग मुलायम के साथ हैं तो युवा अखिलेश के साथ । जिलों में पुराने नेता मुलायम के साथ हैं तो नए अखिलेश के साथ ।

71 में जनता के सामने विकल्प सीमित थे । या सिंडिकेट या फिर इंडिकेट । उनके लिए चुनाव आसान था । उन्होंने इंदिरा को चुन लिया । आज UP की जनता के सम्मुख 4 विकल्प हैं ।
मोदी , मायावती , मुलायम या अखिलेश ।
आज की स्थिति में अखिलेश 3rd या 4th position के लिए लड़ रहे हैं ।
Gold और Silver मैडल तो तय है ।
सपा के भोटर ……. यादव : 35 % मोलायम , 35 अखिलेश , बाकी 30 % भाजपा ।
मुसलमाँ बेचारा …….. खरबूजा कटेगा और सबमे बंटेगा ……… पहले 3 जगह बँटना था अब 4 जगह बंटेगा । 40 % बसपा बाकी 60 % में 4 हिस्से ……..

असली लड़ाई 2017 के बाद शुरू होगी जब सपा में सिंडिकेट और इंडीकेट होगा ।
किसी एक को मरना होगा । कौन मरेगा ?
मोलायम या अकलेस ?

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Puneet Kumar Malaviya

एक बात और हो सकती है
अखिलेश, कांग्रेस के बीच नये समझौते की उम्मीद ।

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