कश्मीर की तरह पूरे देश में पत्थर बाजी की तैयारी है ।

भीलवाड़ा में अंततः 24 घंटे बाद प्रशासन ने internet पे लगाया प्रतिबन्ध उठा ही लिया ।
ताजा समाचार ये है कि बारावफात पे मोमिनों द्वारा उत्पात , आगजनी और लूटपाट की प्रतिक्रया में कल दोपहर हिन्दू संगठनों में रोष मार्च निकाला । नेतृत्व बजरंग दल के स्थानीय कार्यकर्ता कर रहे थे । जलूस जब गायत्री नगर पहुंचा तो मोमिनों ने उसका स्वागत पत्थर बाजी से किया ।
जवाब में बजरंगियों ने मोमिनों को घरों से निकाल के कूटा । कई दुकानों को आग लगा दी ।
पुलिस प्रशासन ने मौके पे लाठियां भांज के और हवाई फायर कर भीड़ को काबू में किया ।
फिलहाल पूरे नगर में धारा 144 लगी हुई है । कल शाम internet सेवाएं बंद कर दी गयी थीं जो आज शाम बहाल हुई ।
आज शाम एक गुप्त स्थान पे हिन्दू संगठनों ने बैठक कर आगे की रणनीति बनायी ।
कल की घटना में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आये ।
मुस्लिम इलाकों में तालाशी लेने पे पुलिस को तकरीबन हर घर की छत पे पत्थर बरामद हुए , ठीक वैसे ही जैसे काश्मीर घाटी में पाए जाते हैं ।
बारावफात पे जो जलूस निकला उसमे झंडे लोहे की rods में लगे थे ।
मोमिन बड़े सुनियोजित ढंग से किसी बड़े दंगे की तैयारी में लगे हैं ।
एक स्थानीय मस्जिद और शहर काज़ी पुलिस राडार पे है ।

इसके अलावा ये घटनाएं किसी बड़ी साज़िश की तरफ इशारा कर रही हैं ।
कश्मीर की तर्ज़ पे पत्थरबाजी की तैयारी पूरे देश में हो रही है क्या ?
क्या इस तैयारी के निर्देश कहीं और से आ रहे हैं ?

आँख कान खुले रखने की ज़रूरत है ।
संगठन में ही शक्ति है ।
कम लिखे को ज़्यादा समझना ।

Comments

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ashish

महोदय हम हिन्दू तो आज भी दलित ओर स्वर्ण जाति के बंधन मैं लिप्त है। ऐसे मैं क्या हिन्दू एक होगे।

महेश हिन्दूजा

जबकी फूल का जवाब पत्थर तो पत्थर का जवाब क्या ?

Deepak kumar

ठीक उसी बारावफात के दिन कोलकाता के धूलागढ़ में भी ठीक ऐसी ही घटना घटी । शांतीप्रिय समुदाय के लोगो ने हिन्दुओं के घरों में आग लगा दी और पत्थर बाजी की। आपकी सोच सही है। ये लोग किसी और के इसारे पर काम कर रहे है ।

दुबे

महोदय, लिखनें तक ही हैं या सक्रिय योगदान यानी रणनीतिक मार्गदर्शन भी कर रहे है। इसकी बहुत कमी महसूस हो रही है।

कर्ण सिंह सचान

अजीत जी, बिलकुल सही और सटीक लिखते हैं आप। चिन्ता की बात तो यही है कि न तो हम संगठित हैं और न ही हम मन से मोदी साब को समर्थित करते हैं, या यूँ कहिये कि चार जनों से क्या होगा

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